कक्षा 7 गणित अध्याय 15: ठोस आकारों का चित्रण NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 7 गणित के अध्याय 15, 'ठोस आकारों का चित्रण' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। इसमें छात्रों को विभिन्न 2D जालों (nets) को पहचानने में मदद की जाती है जिनका उपयोग 3D ठोस आकृतियाँ, विशेष रूप से घन बनाने के लिए किया जा सकता है। समाधानों में यह भी समझाया गया है कि कैसे पासे (घन) के सम्मुख फलकों का योग हमेशा 7 होता है और इस नियम का उपयोग करके जालों को पूरा किया जाता है। छात्रों को घन बनाने के लिए अधूरे जालों को पूरा करने और विभिन्न जालों को उनके संगत ठोस आकृतियों से मिलाने का अभ्यास भी कराया जाता है। ये समाधान छात्रों को ठोस ज्यामिति की बुनियादी समझ विकसित करने और परीक्षा की तैयारी में सहायता करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 7 |
| Subject | गणित |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 15. ठोस आकारों का चित्रण |
Chapter summary
कक्षा 7 गणित के अध्याय 15 'ठोस आकारों का चित्रण' के NCERT समाधान छात्रों को 2D जालों और 3D आकृतियों के बीच संबंध समझने में मदद करते हैं। यह अध्याय घन और पासे जैसे ठोसों के जालों की पहचान करने, उन्हें बनाने और मिलान करने पर केंद्रित है। समाधानों में पासे के सम्मुख फलकों के योग के नियम का उपयोग करके जालों को पूरा करना और अधूरे जालों को पूरा करने के तरीके भी शामिल हैं।
Learning outcomes
- विभिन्न 2D जालों को पहचानना जो घन बना सकते हैं।
- पासे के सम्मुख फलकों के योग के नियम को समझना।
- दिए गए नियमों के आधार पर पासे के जालों को पूरा करना।
- अधूरे जालों को पूरा करके घन बनाना।
- 2D जालों को उनके संगत 3D ठोस आकृतियों से मिलाना।
Topics covered
Paper topics
- ठोस आकारों का चित्रण
- जाल (Nets)
- घन (Cube)
- पासा (Dice)
- सम्मुख फलकों का योग
- 2D आकृतियों से 3D आकृतियाँ बनाना
- जालों को ठोस आकृतियों से मिलाना
- अधूरे जालों को पूरा करना
Important topics
- घन बनाने वाले जालों की पहचान
- पासे के सम्मुख फलकों का योग (7)
- जालों को ठोस आकृतियों से मिलान
- अधूरे जालों को पूरा करने की विधि
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Questions and Solutions
गणित
(अध्याय - 15) (ठोस आकारों का चित्रण) (कक्षा - VII) प्रश्नावली 15.1
प्रश्न 1:
उन जालों को पहचानिए, जिनका प्रयोग करके आप घनों को बना सकते हैं (इन जालों के प्रतिरूप काट कर ऐसा करने का प्रयास कीजिए): .
(i) (ii)
(iii)
(iv) (v) (vi)
उत्तर 1: (ii), (iii), (iv) और (vi) का प्रयोग करके घनों को बना सकते हैं।
प्रश्न 2:
पासे (dice) ऐसे घन होते हैं, जिनके प्रत्येक फलक पर बिंदु (dots) अंकित होते हैं। एक पासे के सम्मुख फलकों पर अंकित बिन्दुओं की संख्याओं का योग सदैव 7 होता है।<br>यहाँ, पासे (घनों) को बनाने के लिए, दो जाल दिए जा रहे हैं। प्रत्य
3
यह याद रखते हुए कि पासे के सम्मुख फलकों की संख्याओं का योग सदैव 7 होता है, रिक्त स्थानों पर उपयुक्त संख्याएँ लिखिए। उत्तर 2:
- 1 (ii) 2
3 2 4 5 5 3
6 4 6
प्रश्न 3: क्या यह पासे के लिए एक जाल हो सकता है? अपने उत्तर को स्पष्ट कीजिए। 1 2 3 4
5 6 1
उत्तर 3:
नहीं, ये पासे के लिए एक जाल नहीं हो सकता है।<br>क्योंकि हम जानते हैं कि पासे के सम्मुख फलकों की संख्याओं का योग सदैव 7 होता है। परन्तु 1 के सम्मुख 3 है और 4 के<br>सम्मुख 6 है और दोनों ही स्थितियों में योग 7 नहीं है।
प्रश्न 4:
यहाँ एक घन बनाने के लिए, एक अधूरा जाल दिया गया है। इसको कम-से-कम दो विभिन्न विधियों से पूरा कीजिए। याद रखिए कि घन के 6 फलक होते हैं। यहाँ इस जाल में कितने फलक दिए हुए हैं। (दो पृथक्-पृथक् चित्र दीजिए। कार्य को सरल बनाने क
उत्तर 4:
दो विभिन्न विधियाँ:
प्रश्न 5:
जालों को उपयुक्त ठोसों से मिलान कीजिए:
- (1)
(b) (ii)
(c) (iii)
- (iv)
उत्तर 5: ठोस ठोसों के जाल ठोस ठोसों के जाल
(iv)
- (ii)
(iii)
(b)
2
Common mistakes
- यह पहचानने में गलती करना कि कौन से जाल घन बना सकते हैं।
- पासे के सम्मुख फलकों के योग के नियम को भूल जाना।
- अधूरे जाल को पूरा करते समय घन के 6 फलकों की संख्या का ध्यान न रखना।
Revision tips
- प्रत्येक जाल को कागज पर बनाकर और मोड़कर घन बनाने का प्रयास करें।
- पासे के सम्मुख फलकों के योग के नियम को याद रखें और अभ्यास प्रश्नों में इसका उपयोग करें।
- विभिन्न जालों और ठोस आकृतियों के बीच संबंध को समझने के लिए मिलान वाले प्रश्नों का अभ्यास करें।
Practice MCQs
Q1. निम्नलिखित में से कौन सा जाल एक घन बनाने के लिए उपयोग किया जा सकता है?
Explanation: एक घन बनाने के लिए, जालक में वर्गों की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि मोड़ने पर वे एक बंद आकृति बना सकें। चार वर्ग एक पंक्ति में और दो वर्ग ऊपर या नीचे की ओर व्यवस्थित होने पर एक घन का जाल बनता है।
Q2. एक पासे के सम्मुख फलकों पर अंकित बिन्दुओं की संख्याओं का योग सदैव कितना होता है?
Explanation: पासे के सम्मुख फलकों पर अंकित बिन्दुओं की संख्याओं का योग हमेशा 7 होता है। यह पासे की एक मानक विशेषता है।
Q3. यदि एक पासे के जाल में एक फलक पर '1' है, तो उसके सम्मुख फलक पर कौन सी संख्या होनी चाहिए?
Explanation: चूंकि सम्मुख फलकों का योग 7 होता है, यदि एक फलक पर 1 है, तो उसके सम्मुख फलक पर 7 - 1 = 6 होना चाहिए।
Q4. एक घन बनाने के लिए कितने फलकों की आवश्यकता होती है?
Explanation: एक घन एक त्रिविमीय (3D) आकृति है जिसमें कुल 6 वर्गाकार फलक होते हैं।
Q5. निम्नलिखित में से कौन सा जाल पासे के लिए उपयुक्त नहीं हो सकता है यदि सम्मुख फलकों का योग 7 हो?
Explanation: पासे के सम्मुख फलकों का योग हमेशा 7 होता है। यदि 1 के सम्मुख 3 है, तो उनका योग 4 होगा, जो 7 नहीं है, इसलिए यह पासे के लिए उपयुक्त जाल नहीं है।
Frequently asked questions
कक्षा 7 गणित के अध्याय 15 में क्या सिखाया जाता है?
कक्षा 7 गणित के अध्याय 15 'ठोस आकारों का चित्रण' में छात्र सीखते हैं कि कैसे 2D जालों (nets) का उपयोग करके 3D ठोस आकृतियाँ, विशेष रूप से घन, बनाई जा सकती हैं। इसमें जालों की पहचान करना, पासे के नियमों को समझना और जालों को ठोस आकृतियों से मिलाना शामिल है।
पासे के सम्मुख फलकों के योग का नियम क्या है?
एक मानक पासे में, किसी भी फलक के सम्मुख (opposite) स्थित फलक पर अंकित बिन्दुओं की संख्याओं का योग हमेशा 7 होता है। उदाहरण के लिए, यदि एक फलक पर 1 है, तो उसके सम्मुख 6 होगा (1+6=7)।
क्या सभी जाल घन बना सकते हैं?
नहीं, सभी जाल घन नहीं बना सकते। केवल विशेष व्यवस्था वाले जाल ही घन बनाने के लिए उपयुक्त होते हैं। इन जालों में आमतौर पर छह वर्ग होते हैं जो इस तरह से जुड़े होते हैं कि मोड़ने पर वे एक बंद घन बना सकें।
इन NCERT समाधानों का उपयोग कैसे करें?
इन समाधानों का उपयोग अध्याय में दिए गए प्रश्नों को समझने और हल करने के लिए किया जा सकता है। प्रत्येक प्रश्न का विस्तृत हल छात्रों को समस्या-समाधान की प्रक्रिया को समझने में मदद करता है, जिससे परीक्षा की तैयारी बेहतर होती है।
ठोस आकारों का चित्रण क्यों महत्वपूर्ण है?
ठोस आकारों का चित्रण ज्यामिति की एक महत्वपूर्ण अवधारणा है जो छात्रों को 2D प्रतिनिधित्व से 3D आकृतियों की कल्पना करने में मदद करती है। यह स्थानिक तर्क (spatial reasoning) विकसित करता है, जो गणित और विज्ञान के कई क्षेत्रों के लिए आवश्यक है।
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