कक्षा 5 हिंदी NCERT समाधान: चुनौती हिमालय की

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यह खंड कक्षा 5 के हिंदी विषय के लिए "चुनौती हिमालय की" अध्याय पर केंद्रित है। इसमें छात्रों को भारत के नक्शे पर लद्दाख और तिब्बत जैसे स्थानों को पहचानने, यात्रा के साधनों का अनुमान लगाने और बर्फीले पहाड़ों के उदास लगने के कारणों पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। वाद-विवाद अनुभाग में, छात्रों को जवाहरलाल नेहरू की कठिन यात्रा के बारे में चर्चा करने और अपने तर्क प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित किया गया है। कोलाज बनाने की गतिविधि छात्रों को पहाड़ों से संबंधित चित्रों और शब्दों को इकट्ठा करके रचनात्मकता विकसित करने में मदद करती है। "तुम्हारी समझ से" अनुभाग छात्रों को अपनी यात्राओं के बारे में लिखने और जवाहरलाल नेहरू की यात्रा के अनुभवों से सीखने का अवसर देता है। अंत में, "बोलते पहाड़" और "एक वर्णन ऐसा भी" अनुभाग छात्रों को निर्जीव वस्तुओं के मानवीकरण और प्रकृति के काव्यात्मक वर्णन को समझने में मदद करते हैं। ये समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए विस्तृत स्पष्टीकरण प्रदान करते हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 5
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter18 चुनौती हिमालय की

Chapter summary

कक्षा 5 हिंदी के "चुनौती हिमालय की" अध्याय के ये NCERT समाधान छात्रों को हिमालय की यात्रा के अनुभवों से परिचित कराते हैं। इसमें नक्शे पर स्थानों की पहचान, यात्रा के साधनों का अनुमान, और यात्रा के दौरान आने वाली चुनौतियों पर चर्चा शामिल है। समाधान छात्रों को जवाहरलाल नेहरू की यात्रा के बारे में सोचने, वाद-विवाद करने और अपनी रचनात्मकता का उपयोग करके कोलाज बनाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। यह अध्याय प्रकृति के वर्णन और निर्जीव वस्तुओं के मानवीकरण को भी उजागर करता है, जिससे छात्रों की समझ और भाषा कौशल विकसित होता है।

Learning outcomes

  • भारत के नक्शे पर लद्दाख और तिब्बत जैसे स्थानों की पहचान करना।
  • यात्रा के विभिन्न साधनों और समय का अनुमान लगाना।
  • कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेने और तर्क देने की क्षमता विकसित करना।
  • प्रकृति के काव्यात्मक वर्णन को समझना।
  • निर्जीव वस्तुओं के मानवीकरण को पहचानना।
  • रचनात्मकता का उपयोग करके कोलाज बनाना।

Topics covered

Paper topics

  • भारत का नक्शा और स्थान
  • यात्रा और परिवहन के साधन
  • पर्वतारोहण और हिमालय
  • प्रकृति का वर्णन
  • निर्जीव वस्तुओं का मानवीकरण
  • कोलाज बनाना
  • यात्रा वृत्तांत
  • चुनौतियाँ और आत्मविश्वास

Important topics

  • नक्शे पर स्थानों की पहचान
  • जवाहरलाल नेहरू की यात्रा का अनुभव
  • प्रकृति का काव्यात्मक वर्णन
  • निर्जीव वस्तुओं का मानवीकरण
  • चुनौतियों का सामना

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

(क) लद्दाख जम्मू-कश्मीर राज्य में है। ऊपर दिए भारत के नक्शे में ढूँढ़ो कि लद्दाख कहाँ है और तुम्हारा घर कहाँ है?
Solution:

(क) इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए, आपको भारत का नक्शा देखना होगा। नक्शे पर, आपको जम्मू-कश्मीर राज्य के भीतर लद्दाख क्षेत्र का पता लगाना होगा। इसके बाद, आपको अपने निवास स्थान की पहचान करनी होगी और नक्शे पर अपने घर की अनुमानित स्थिति को चिह्नित करना होगा। यह गतिविधि आपको भौगोलिक स्थानों की समझ विकसित करने में मदद करती है।

प्रश्न 2

(ख) अनुमान लगाओ कि तुम जहाँ रहते हो वहाँ से लद्दाख पहुँचने में कितने दिन लग सकते हैं और वहाँ किन-किन ज़रियों से पहुँचा जा सकता है?
Solution:

(ख) आपके निवास स्थान से लद्दाख की दूरी और उपलब्ध परिवहन साधनों के आधार पर यात्रा का समय अलग-अलग हो सकता है। सामान्यतः, सड़क मार्ग से यात्रा में कई दिन लग सकते हैं, जिसमें बस, टैक्सी या निजी वाहन का उपयोग किया जा सकता है। हवाई मार्ग से दिल्ली या अन्य प्रमुख शहरों से लेह तक पहुँचा जा सकता है, जिसमें यात्रा का समय काफी कम हो जाता है। रेल मार्ग सीधे लद्दाख तक नहीं जाता है। आपको अपनी वर्तमान स्थिति के अनुसार इन साधनों और समय का अनुमान लगाना होगा।

प्रश्न 3

(ग) किताब के शुरू में तुमने तिब्बती लोककथा 'राख की रस्सी' पढ़ी थी। नक्शे में तिब्बत को ढूँढ़ो। उत्तर उपरोक्त तीनों प्रश्नों का उत्तर विद्यार्थी मानचित्र की सहायता से स्वयं करें।
Solution:

(ग) इस प्रश्न के लिए, आपको भारत के नक्शे में तिब्बत की भौगोलिक स्थिति का पता लगाना होगा। तिब्बत, चीन का एक स्वायत्त क्षेत्र है और यह हिमालय के उत्तर में स्थित है। नक्शे में तिब्बत को खोजने के बाद, आप पहले दो प्रश्नों के उत्तरों को अपने निवास स्थान और लद्दाख की यात्रा के संदर्भ में और अधिक सटीकता से समझ सकते हैं। यह प्रश्न भौगोलिक ज्ञान और मानचित्र कौशल को बढ़ाता है।

प्रश्न 4

(क) बर्फ़ से ढके चट्टानी पहाड़ों के उदास और फीके लगने की क्या वजह हो सकती थी?
Solution:

(क) बर्फ़ से ढके चट्टानी पहाड़ों के उदास और फीके लगने की मुख्य वजह यह हो सकती है कि ऐसे इलाकों में आमतौर पर हरियाली, पेड़-पौधे या रंगीन फूल नहीं होते हैं। चारों ओर केवल सफ़ेद बर्फ़ और भूरे या काले चट्टान दिखाई देते हैं, जो एक नीरस दृश्य प्रस्तुत करते हैं। इसके अतिरिक्त, अत्यधिक ठंड और दुर्गम रास्तों के कारण इन क्षेत्रों में मानव आबादी और गतिविधियों का अभाव होता है, जिससे वे और भी सुनसान और उदास लगते हैं।

प्रश्न 5

(ख) बताओ, ये जगहें कब उदास और फीकी लगती हैं और यहाँ कब रौनक होती है? घर, बाज़ार, स्कूल, खेत
Solution:

(ख) विभिन्न स्थानों के उदास या रौनक भरे लगने के कारण वहाँ की गतिविधियों और उपस्थिति पर निर्भर करते हैं:

  • घर: घर तब उदास और फीका लगता है जब घर के सदस्य बाहर गए हों या घर में कोई न हो। घर में रौनक तब होती है जब परिवार के सभी सदस्य मौजूद हों, बातचीत कर रहे हों और एक साथ समय बिता रहे हों।
  • बाज़ार: बाज़ार दोपहर के समय या जब वह बंद हो, तब फीका लग सकता है। शाम के समय, त्योहारों पर या जब खरीदार और विक्रेता अधिक संख्या में हों, तब बाज़ार में रौनक होती है।
  • स्कूल: स्कूल तब उदास लगता है जब बच्चों की छुट्टियाँ हों या स्कूल खाली हो। जब बच्चे स्कूल में उपस्थित होते हैं, पढ़ते हैं और खेलते हैं, तब स्कूल में रौनक ही रौनक होती है।
  • खेत: खेत तब फीके लगते हैं जब फसल कट चुकी हो और वे परती (खाली) पड़े हों। जब खेत में फसल लहलहा रही हो और हरी-भरी हो, तब उनमें रौनक दिखाई देती है।

प्रश्न 6

'जवाहरलाल को इस कठिन यात्रा के लिए तैयार नहीं होना चाहिए।' तुम इससे सहमत हो तो भी तर्क दो, नहीं हो तो भी तर्क दो। अपने तर्कों को तुम कक्षा के सामने प्रस्तुत भी कर सकते हो।
Solution:

मैं इस कथन से सहमत नहीं हूँ कि जवाहरलाल को इस कठिन यात्रा के लिए तैयार नहीं होना चाहिए। इसके कई कारण हैं:

  • चुनौतियों का सामना: जीवन में कठिनाइयों और चुनौतियों से मुँह मोड़ना कायरता है। हमें उनका सामना करने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए।
  • आत्मविश्वास और जोश: जवाहरलाल जैसे साहसी व्यक्तियों में आत्मविश्वास और जोश होता है, जो उन्हें कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
  • अनुभव से सीखना: ऐसी यात्राएँ व्यक्ति को अनुभव प्रदान करती हैं और उसे मजबूत बनाती हैं। यदि आगे बढ़ना असंभव हो जाए, तो सुरक्षित वापस लौटना भी एक महत्वपूर्ण निर्णय होता है, जिससे पछतावा नहीं रहता।
  • प्रेरणा स्रोत: जवाहरलाल ने जो किया, वह एक महान व्यक्ति का कार्य था। उन्होंने साहस और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया, जो दूसरों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनता है।

कठिनाइयों से भागने के बजाय उनका सामना करना और उनसे सीखना ही जीवन का सही मार्ग है।

प्रश्न 7

तुम मिलकर पहाड़ों का एक कोलाज बनाओ। इसके लिए पहाड़ों से जुड़ी विभिन्न तस्वीरें इकट्ठा करो-पर्वतारोहण, चट्टान, पहाड़ों के अलग-अलग नज़ारे, चोटी, अलग-अलग किस्म के पहाड़। अब इन्हें एक बड़े से कागज़ पर पहाड़ के आकार में ही चिपकाओ। यदि चाहो तो ये कोलाज तुम अपनी कक्षा की एक दीवार पर भी बना सकते हो।
Solution:

यह एक रचनात्मक गतिविधि है। इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए, आपको पहाड़ों से संबंधित विभिन्न चित्र (जैसे पर्वतारोही, चट्टानें, पहाड़ के सुंदर दृश्य, चोटियाँ आदि) एकत्र करने होंगे। इन चित्रों को एक बड़े कागज़ पर इस तरह चिपकाना है कि वे मिलकर एक पहाड़ का आकार बना दें। आप चाहें तो इस कोलाज को अपनी कक्षा की दीवार पर भी प्रदर्शित कर सकते हैं। यह गतिविधि पहाड़ों के बारे में आपकी समझ को बढ़ाएगी और आपकी कलात्मकता को भी निखारेगी।

प्रश्न 8

अब इन चित्रों पर आधारित शब्दों का एक कोलाज बनाओ। कोलाज में ऐसे शब्द हों जो इन चित्रों का वर्णन कर पा रहे हों या मन में उठने वाली भावनाओं को बता रहे हों। अब इन दोनों कोलाजों को कक्षा में प्रदर्शित करो।
Solution:

इस प्रश्न के लिए, आपको पहले बनाए गए चित्रों वाले कोलाज को देखना होगा। उन चित्रों के आधार पर, ऐसे शब्दों का चयन करें जो उन चित्रों का वर्णन करते हों या उन्हें देखकर आपके मन में आने वाली भावनाओं को व्यक्त करते हों। उदाहरण के लिए, यदि चित्र में ऊँची बर्फीली चोटी है, तो आप 'ऊँचा', 'बर्फ़ीला', 'शांत', 'सुंदर', 'चुनौतीपूर्ण' जैसे शब्दों का उपयोग कर सकते हैं। इन शब्दों को भी एक साथ व्यवस्थित करके एक 'शब्द कोलाज' बनाया जा सकता है। अंत में, चित्र कोलाज और शब्द कोलाज दोनों को कक्षा में प्रदर्शित करें। यह गतिविधि आपकी शब्दावली और अभिव्यक्ति क्षमता को बढ़ाएगी।

प्रश्न 9

जवाहरलाल को अमरनाथ तक का सफर अधूरा क्यों छोड़ना पड़ा?
Solution:

जवाहरलाल को अमरनाथ तक का अपना सफर अधूरा छोड़ना पड़ा क्योंकि आगे का रास्ता बहुत खतरनाक था। रास्ते में अनेक गहरी और चौड़ी खाइयाँ थीं, जिन्हें पार करना अत्यंत कठिन था। उनके पास इन खाइयों को सुरक्षित रूप से पार करने के लिए आवश्यक उपकरण या पर्याप्त साधन नहीं थे, जिसके कारण उन्हें यात्रा बीच में ही रोकनी पड़ी।

प्रश्न 10

जवाहरलाल, किशन और कुली सभी रस्सी से क्यों बँधे थे?
Solution:

जवाहरलाल, किशन और कुली सभी एक मोटी रस्सी से बँधे हुए थे। इसका मुख्य कारण यह था कि वे एक खतरनाक पहाड़ी इलाके से गुजर रहे थे जहाँ पैर फिसलने का या अचानक संतुलन बिगड़ने का खतरा था। रस्सी से बंधे होने पर, यदि कोई एक व्यक्ति फिसल जाता या गिर जाता, तो बाकी लोग उसे रस्सी के सहारे पकड़कर गिरने से बचा सकते थे। यह सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण उपाय था, जैसा कि तब साबित हुआ जब जवाहरलाल का पैर फिसला और उन्हें रस्सी के सहारे ही बचाया जा सका।

प्रश्न 11

(क) पाठ में नेहरू जी ने हिमालय से चुनौती महसूस की। कुछ लोग पर्वतारोहण क्यों करना चाहते हैं?
Solution:

(क) कुछ लोग पर्वतारोहण को इसलिए चुनते हैं क्योंकि यह एक अत्यंत रोमांचक और चुनौतीपूर्ण कार्य है। ऊँची चोटियों पर चढ़ना उन्हें अपनी शारीरिक और मानसिक सीमाओं को परखने का अवसर देता है। इसके अलावा, कुछ लोग असाधारण कारनामे करने की इच्छा रखते हैं और पर्वतारोहण उन्हें ऐसा करने का एक मंच प्रदान करता है। प्रकृति की भव्यता का अनुभव करना और शिखर पर पहुँचने की उपलब्धि भी कई लोगों को प्रेरित करती है।

प्रश्न 12

(ख) ऐसे कौन-से चुनौती-भरे काम हैं जो तुम करना पसंद करोगे?
Solution:

(ख) एक छात्र के रूप में, मैं निम्नलिखित चुनौती-भरे काम करना पसंद करूँगा:

  • कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने की चुनौती को स्वीकार करना और उसके लिए कड़ी मेहनत करना।
  • स्कूल में आयोजित होने वाली विभिन्न प्रतियोगिताओं, जैसे वाद-विवाद, खेलकूद या कला प्रतियोगिता, में भाग लेना और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना।
  • किसी नए कौशल को सीखना, जैसे कोई वाद्य यंत्र बजाना या कोई नई भाषा बोलना, और उसमें निपुणता हासिल करना।
  • किसी सामाजिक कार्य में योगदान देना, जैसे पर्यावरण संरक्षण या जरूरतमंदों की मदद करना।

ये सभी कार्य चुनौतीपूर्ण हैं और इन्हें पूरा करने से आत्मविश्वास बढ़ता है और व्यक्तिगत विकास होता है।

प्रश्न 13

उदास फीके बर्फ से ढके चट्टानी पहाड़। हिमालय की दुर्गम पर्वतमाला मुँह उठाए चुनौती दे रही थी। "उदास होना" और "चुनौती देना" मनुष्य के स्वभाव हैं। यहाँ निर्जीव पहाड़ ऐसा कर रहे हैं। ऐसे और भी वाक्य हैं। जैसे- बिजली चली गई। चाँद ने शरमाकर अपना मुँह बादलों के पीछे कर लिया। इस किताब के दूसरे पाठों में भी ऐसे वाक्य ढूँढ़ो।
Solution:

यह प्रश्न निर्जीव वस्तुओं के मानवीकरण (Personification) के प्रयोग को समझने के लिए है, जहाँ निर्जीव चीज़ों को सजीव प्राणियों की तरह व्यवहार करते हुए या भावनाएँ व्यक्त करते हुए दिखाया जाता है। पाठ में ऐसे कुछ वाक्य दिए गए हैं, जैसे:

  • "उदास फीके, बर्फ़ से ढके चट्टानी पहाड़" - यहाँ पहाड़ों को 'उदास' बताया गया है, जो एक मानवीय भावना है।
  • "हिमालय की दुर्गम पर्वतमाला मुँह उठाए चुनौती दे रही थी" - यहाँ पर्वतमाला को 'चुनौती देने' वाला बताया गया है, जैसे कोई मनुष्य चुनौती दे रहा हो।
  • "बिजली चली गई" - यह एक सामान्य वाक्य है, लेकिन इसे ऐसे भी कहा जा सकता है कि 'बिजली ने हमें छोड़ दिया'।
  • "चाँद ने शरमाकर अपना मुँह बादलों के पीछे कर लिया" - यहाँ चाँद को 'शरमाने' वाला और 'मुँह छिपाने' वाला बताया गया है, जो मानवीय क्रियाएँ हैं।

इसी तरह के अन्य वाक्य जो इस किताब के अन्य पाठों में मिल सकते हैं, वे हो सकते हैं:

  • "नलों में अब पूरे समय पानी नहीं आता।" (यहाँ नल को किसी व्यक्ति की तरह दर्शाया जा सकता है जो सहयोग नहीं कर रहा)।
  • "फसल तैयार खड़ी थी।" (फसल को किसी व्यक्ति की तरह 'खड़ा' होना बताया गया है)।
  • "सुबह की हल्की धूप में खेत सुनहरे दिखाई दे रहे थे।" (खेतों को सजीव की तरह प्रस्तुत किया गया है)।
  • "सामने एक गहरी खाई मुँह फाड़े निगलने के लिए तैयार थी।" (खाई को एक भूखे प्राणी की तरह दर्शाया गया है जो निगलने को तैयार है)।

यह साहित्यिक शैली भाषा को अधिक प्रभावशाली और रोचक बनाती है।

प्रश्न 14

(क) ऊपर दिए पहाड़ के वर्णन और पाठ में दिए वर्णन में क्या अंतर है?
Solution:

(क) पाठ में दिए गए वर्णन में जवाहरलाल नेहरू की यात्रा के दौरान हिमालय के बर्फीले, चट्टानी और दुर्गम स्वरूप का वर्णन है, जिसे 'उदास' और 'फीका' कहा गया है। यह वर्णन यात्रा की कठिनाइयों और प्रकृति की कठोरता पर केंद्रित है।

इसके विपरीत, निर्मल वर्मा द्वारा शिमला के पहाड़ी इलाके का वर्णन अधिक काव्यात्मक और सुखद है। इसमें बर्फ से ढके देवदार के वृक्षों का उल्लेख है, जिनकी शाखाओं पर रूई जैसी बर्फ जमी है, जिससे वे सांता-क्लॉज़ की तरह दिखते हैं। धूप निकलने पर बर्फ से ढकी पहाड़ियाँ धूप सेंकती हुई प्रतीत होती हैं। यह वर्णन प्रकृति की सुंदरता और शांति को दर्शाता है, जिसमें मानवीय भावनाओं का समावेश है।

मुख्य अंतर यह है कि पाठ का वर्णन यात्रा की चुनौतियों पर केंद्रित है, जबकि शिमला का वर्णन प्रकृति की सुंदरता और शांति पर, जिसमें मानवीकरण का प्रयोग किया गया है।

प्रश्न 15

(ख) कई बार निर्जीव चीज़ों के लिए मनुष्यों से जुड़ी क्रियाओं, विशेषण आदि का इस्तेमाल होता है, जैसे-पाठ में आए दो उदाहरण "उदास फीके, बर्फ़ से ढके चट्टानी पहाड़" या "सामने एक गहरी खाई मुँह फाड़े निगलने के लिए तैयार थी।" ऊपर लिखे शिमला के वर्णन में ऐसे उदाहरण हूँद्धो।
Solution:

(ख) शिमला के वर्णन में निर्जीव चीज़ों के लिए मनुष्यों से जुड़ी क्रियाओं और विशेषणों के कई उदाहरण मिलते हैं:

  • "बर्फ़ चुपचाप गिर रही थी।" - यहाँ 'चुपचाप' गिरना एक मानवीय क्रिया का बोध कराता है, जैसे कोई व्यक्ति धीरे से कुछ कर रहा हो।
  • "...जिसकी नंगी शाखों पर रूई के मोटे-मोटे गालों-सी बर्फ़ चिपक गई थी।" - यहाँ वृक्ष की शाखाओं को 'नंगी' कहा गया है, जो एक मानवीय अवस्था है। साथ ही, बर्फ को 'गालों' से तुलना की गई है, जो मानवीय चेहरे का हिस्सा है।
  • "लगता था जैसे वह सांता-क्लॉज़ हो, एक रात में ही जिसके बाल सन-से सफ़ेद हो गए हैं ..." - यहाँ देवदार के वृक्ष की तुलना सांता-क्लॉज़ से की गई है, जो एक मानवीय चरित्र है, और उसके बालों का सफ़ेद होना एक मानवीय परिवर्तन है।
  • "...बर्फ़ से ढकी पहाड़ियाँ धूप सेकने के लिए अपना चेहरा बादलों के बाहर निकाल लेती हैं।" - यहाँ 'पहाड़ियों' को सजीव की तरह दर्शाया गया है जो 'धूप सेक रही हैं' और 'चेहरा बाहर निकाल रही हैं', ये सभी मानवीय क्रियाएँ हैं।

ये उदाहरण दर्शाते हैं कि कैसे लेखक प्रकृति के वर्णन को अधिक सजीव और भावनात्मक बनाने के लिए मानवीकरण का प्रयोग करते हैं।

Common mistakes

  • नक्शे पर स्थानों की सही पहचान न कर पाना।
  • यात्रा के साधनों और समय का गलत अनुमान लगाना।
  • चुनौतियों का सामना करने के बजाय उनसे बचने की प्रवृत्ति।
  • प्रकृति के वर्णन में छिपे भावों को न समझ पाना।

Revision tips

  • नक्शे पर लद्दाख और तिब्बत की स्थिति को ध्यान से देखें।
  • जवाहरलाल नेहरू की यात्रा की कठिनाइयों और उनके समाधानों पर विचार करें।
  • प्रकृति के वर्णन में प्रयुक्त विशेषणों और क्रियाओं पर ध्यान दें।
  • अपनी यात्राओं के अनुभवों को पाठ के संदर्भ में जोड़ने का प्रयास करें।

Practice MCQs

Q1. लद्दाख किस राज्य में स्थित है?

Q2. बर्फ़ से ढके चट्टानी पहाड़ों के उदास और फीके लगने की क्या वजह हो सकती है?

Q3. जवाहरलाल को अमरनाथ तक का सफर अधूरा क्यों छोड़ना पड़ा?

Q4. जवाहरलाल, किशन और कुली रस्सी से क्यों बँधे थे?

Q5. पाठ में 'चुनौती देना' किसका स्वभाव बताया गया है?

Frequently asked questions

यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए है?

यह NCERT समाधान कक्षा 5 के हिंदी विषय के लिए "चुनौती हिमालय की" अध्याय पर आधारित है।

इन समाधानों में क्या शामिल है?

इन समाधानों में नक्शे पर स्थानों की पहचान, यात्रा के साधनों का अनुमान, जवाहरलाल नेहरू की यात्रा के अनुभव, प्रकृति का वर्णन और कोलाज बनाने जैसी गतिविधियों पर आधारित प्रश्नोत्तर शामिल हैं।

क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे?

हाँ, ये समाधान विस्तृत स्पष्टीकरण और महत्वपूर्ण अवधारणाओं पर ध्यान केंद्रित करके छात्रों को परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे।

क्या कोलाज बनाने की गतिविधि का कोई शैक्षिक महत्व है?

हाँ, कोलाज बनाने की गतिविधि छात्रों की रचनात्मकता को बढ़ावा देती है और उन्हें पहाड़ों से संबंधित चित्रों और शब्दों को समझने में मदद करती है।

निर्जीव वस्तुओं का मानवीकरण क्या है?

निर्जीव वस्तुओं का मानवीकरण वह साहित्यिक युक्ति है जिसमें निर्जीव चीज़ों या प्रकृति को मनुष्यों की तरह क्रियाएँ करते हुए या भावनाएँ व्यक्त करते हुए दर्शाया जाता है, जैसे 'पहाड़ चुनौती दे रहे थे'।

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