कक्षा 5 हिंदी NCERT समाधान: फसलों के त्योहार

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यह पृष्ठ कक्षा 5 हिंदी की पुस्तक के अध्याय 'फसलों के त्योहार' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें मकर संक्रांति जैसे त्योहारों के महत्व, विभिन्न क्षेत्रों की सांस्कृतिक विविधता, जैसे भाषा, वेशभूषा, भोजन और नए साल के उत्सवों पर प्रकाश डाला गया है। समाधान छात्रों को यह समझने में मदद करते हैं कि कैसे विभिन्न फसलें और त्योहार भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं। इसमें अन्न के विभिन्न रूपों, जैसे तिल के उपयोग और तेल निकालने की प्रक्रिया पर भी चर्चा की गई है। साथ ही, यह अध्याय किसानों के जीवन और उनके द्वारा हमारे भोजन तक पहुँचाने की यात्रा को भी दर्शाता है। ये समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए एक स्पष्ट और व्यापक समझ प्रदान करते हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 5
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter2 फ़सलों के त्योहार

Chapter summary

कक्षा 5 हिंदी के अध्याय 'फसलों के त्योहार' के ये NCERT समाधान छात्रों को भारत के विभिन्न फसल उत्सवों से परिचित कराते हैं। यह अध्याय सांस्कृतिक विविधता के विभिन्न पहलुओं जैसे भाषा, वेशभूषा, भोजन और नए साल के उत्सवों पर भी प्रकाश डालता है। समाधान अन्न के महत्व, विशेषकर तिल के उपयोग और तेल निष्कर्षण की प्रक्रिया को स्पष्ट करते हैं। इसके अतिरिक्त, यह किसानों के योगदान और भोजन की यात्रा को समझने में मदद करता है। यह खंड छात्रों को परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण अवधारणाओं को समझने में सहायता करता है।

Learning outcomes

  • फसलों के त्योहारों के महत्व को समझना।
  • भारत की सांस्कृतिक विविधता के विभिन्न पहलुओं की पहचान करना।
  • अन्न और उसके विभिन्न उपयोगों के बारे में जानना।
  • किसानों के योगदान और भोजन की यात्रा को समझना।
  • विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों को पहचानना।

Topics covered

Paper topics

  • फसलों के त्योहार
  • मकर संक्रांति
  • सांस्कृतिक विविधता
  • भारतीय भाषाएँ
  • भारतीय वेशभूषा
  • भारतीय भोजन
  • नए साल के उत्सव
  • अन्न का महत्व
  • तिल का उपयोग
  • तेल निष्कर्षण
  • किसानों का जीवन
  • भोजन की यात्रा

Important topics

  • फसलों के त्योहारों का महत्व
  • भारत की सांस्कृतिक और भाषाई विविधता
  • अन्न और उसके विभिन्न उपयोग
  • किसानों की भूमिका और भोजन की आपूर्ति श्रृंखला
  • त्योहारों से जुड़े पकवान

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

"खिचड़ी में अइसन जाड़ा हम पहिले कब्बो ना देखनीं।" यहाँ 'खिचड़ी' से क्या मतलब निकाल रही हो?
Solution: इस वाक्य में 'खिचड़ी' शब्द का प्रयोग मकर संक्रांति नामक त्योहार के संदर्भ में किया गया है। मकर संक्रांति एक महत्वपूर्ण भारतीय त्योहार है जो सर्दियों के मौसम में मनाया जाता है। लेखिका इस वाक्य के माध्यम से यह बताना चाहती है कि उन्होंने मकर संक्रांति के दौरान पहले कभी इतनी कड़ाके की सर्दी का अनुभव नहीं किया था। यह वाक्य उस विशेष दिन के मौसम की गंभीरता को दर्शाता है।

प्रश्न 2

क्या कभी ऐसा हो सकता है कि सूरज बिल्कुल ही न निकले? अगर ऐसा हो तो चारों तरफ अंधेरा छा जाएगा। ठंड बढ़ जाएगी। लोगों के लिए काम करना मुश्किल हो जाएगा। जीवन की रफ़्तार थम-सी जाएगी। अपने साथियों के साथ बातचीत करके लिखो।
Solution: यह एक काल्पनिक स्थिति है। सामान्य परिस्थितियों में, पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमती है और सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करती है, जिससे दिन और रात होते हैं। यदि सूरज बिल्कुल न निकले, तो पृथ्वी पर स्थायी रूप से अंधेरा छा जाएगा। तापमान बहुत गिर जाएगा, जिससे अत्यधिक ठंड पड़ेगी और जीवन का अस्तित्व असंभव हो जाएगा। प्रकाश संश्लेषण रुक जाएगा, जिससे पौधे नष्ट हो जाएंगे और खाद्य श्रृंखला टूट जाएगी। मानव जीवन के लिए आवश्यक गतिविधियाँ जैसे खेती, यात्रा और अन्य दैनिक कार्य करना अत्यंत कठिन या असंभव हो जाएगा। जीवन की गति पूरी तरह से थम जाएगी और पृथ्वी एक निर्जन ग्रह बन जाएगी।

प्रश्न 3

बाहर देखने से समय का अंदाना क्यों नहीं हो रहा था? जिनके पास घड़ी नहीं होती वे समय का अनुमान किस तरह से लगाते हैं?
Solution: बाहर देखने से समय का अंदाज़ा इसलिए नहीं हो रहा था क्योंकि उस समय सूरज नहीं निकला था। आमतौर पर, लोग सूरज की स्थिति (जैसे वह कितनी ऊँचाई पर है) और उसकी चमक के आधार पर दिन के समय का अनुमान लगाते हैं। जब सूरज नहीं निकलता, तो यह अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता है। जिन लोगों के पास घड़ी नहीं होती, वे समय का अनुमान मुख्य रूप से सूरज की गति और उसकी रोशनी की तीव्रता से लगाते हैं। वे सुबह सूरज उगने के समय, दोपहर में उसकी सबसे ऊँची स्थिति और शाम को उसके ढलने के समय को देखकर दिन के विभिन्न पहरों का अंदाज़ा लगाते हैं। इसके अतिरिक्त, वे पक्षियों की चहचहाहट, लोगों की आवाजाही और अन्य प्राकृतिक संकेतों पर भी ध्यान देते हैं।

प्रश्न 4 (क)

(क) "आज ई लोग के उठे के नईखे का?" इस वाक्य को अपने घर की भाषा में लिखो।
Solution: इस वाक्य को घर की भाषा में इस प्रकार लिखा जा सकता है: "आज ये लोग उठेंगे नहीं क्या?" यह वाक्य किसी के देर तक न उठने पर आश्चर्य या थोड़ी झुंझलाहट व्यक्त करने के लिए कहा जाता है।

प्रश्न 4 (ख)

(ख) "जा भाग के देख केरा के पत्ता आइल की ना?" इस वाक्य को अपने घर की भाषा में लिखो।
Solution: इस वाक्य को घर की भाषा में इस प्रकार लिखा जा सकता है: "जाओ, दौड़ कर देखो कि केले का पत्ता आया है या नहीं।" यह वाक्य किसी को जल्दी से कोई काम करने या किसी चीज़ की जाँच करने के लिए कहने के लिए प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 5

विविधता हमारे देश की पहचान है। फसलों का त्योहार हमारे देश के विविध रंग-रूपों का एक उदाहरण है। नीचे विविधता के कुछ और उदाहरण दिए गए हैं। पाँच-पाँच बच्चों का समूह एक-एक उदाहरण लें और उस पर जानकारी इकड़ी करे। (जानकारी चित्र, फोटोग्राफ, कहानी, कविता, सूचनापरक सामग्री के रूप में हो सकती है।) हर समूह इस जानकारी को कक्षा में प्रस्तुत करे।

भाषा ● कपड़े ● नया वर्ष ● भोजन ● लोक कला ● लोक संगीत

Solution: यह प्रश्न छात्रों को समूह में कार्य करने और भारत की विविधता के विभिन्न पहलुओं पर शोध करने के लिए प्रोत्साहित करता है। प्रत्येक समूह को दिए गए विषय (भाषा, कपड़े, नया वर्ष, भोजन, लोक कला, लोक संगीत) पर जानकारी एकत्र करनी होगी और उसे कक्षा में प्रस्तुत करना होगा।

भाषा: भारत में सैकड़ों भाषाएँ और बोलियाँ बोली जाती हैं, जो इसकी भाषाई विविधता को दर्शाती हैं। उदाहरण के लिए, हिंदी, बंगाली, मराठी, तेलुगु, तमिल, कन्नड़, गुजराती, पंजाबी, असमिया, उर्दू आदि प्रमुख भाषाएँ हैं। प्रत्येक भाषा की अपनी लिपि और साहित्य है।

कपड़े: भारत के विभिन्न क्षेत्रों में लोगों की वेशभूषा उनकी संस्कृति और जलवायु के अनुसार भिन्न होती है। दक्षिण भारत में लुंगी, उत्तर भारत में सलवार-कमीज और कुर्ता-पायजामा, राजस्थान में रंगीन पगड़ी और घाघरा-चोली, पूर्वोत्तर में पारंपरिक परिधान आदि विविधता के उदाहरण हैं।

नया वर्ष: भारत में नया वर्ष विभिन्न संस्कृतियों और पंचांगों के अनुसार अलग-अलग समय पर मनाया जाता है। उदाहरण के लिए, हिंदू कैलेंडर के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को, विक्रम संवत के अनुसार भी इसी दिन, जबकि कुछ क्षेत्रों में यह होली के आसपास या बैसाखी के समय मनाया जाता है।

भोजन: भारत का भोजन अत्यंत विविध है। हर क्षेत्र का अपना विशेष व्यंजन और खान-पान की शैली है। दक्षिण भारत में इडली, डोसा, सांभर प्रसिद्ध हैं, तो उत्तर भारत में रोटी, दाल, चावल, राजमा, छोले लोकप्रिय हैं। पश्चिम बंगाल में मछली-भात, गुजरात में ढोकला, महाराष्ट्र में वड़ा पाव आदि प्रमुख हैं।

लोक कला: भारत में विभिन्न प्रकार की लोक कलाएँ प्रचलित हैं, जैसे मधुबनी पेंटिंग (बिहार), वारली पेंटिंग (महाराष्ट्र), कलमकारी (आंध्र प्रदेश), गोंड कला (मध्य प्रदेश) आदि। ये कलाएँ स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को दर्शाती हैं।

लोक संगीत: भारत में लोक संगीत की भी समृद्ध परंपरा है। हर क्षेत्र का अपना विशिष्ट लोक संगीत है, जैसे पंजाब का भांगड़ा संगीत, राजस्थान का कालबेलिया संगीत, बंगाल का बाउल संगीत, असम का बिहू संगीत आदि। ये संगीत स्थानीय रीति-रिवाजों और त्योहारों से जुड़े होते हैं।

प्रश्न 6

तुम्हें कौन-सा त्योहार सबसे अच्छा लगता है और क्यों? इस दिन तुम्हारी दिनचर्या क्या रहती है?
Solution: यह प्रश्न व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित है और इसका उत्तर प्रत्येक छात्र के लिए भिन्न हो सकता है। यहाँ एक उदाहरण उत्तर दिया गया है:

मुझे होली का त्योहार सबसे अच्छा लगता है क्योंकि यह रंगों का त्योहार है और इस दिन सभी लोग आपसी भेदभाव भुलाकर एक-दूसरे के साथ मिलकर खुशियाँ मनाते हैं। इस दिन मेरी दिनचर्या सुबह जल्दी उठने से शुरू होती है। मैं अपने दोस्तों और परिवार के साथ मिलकर रंगों से खेलता हूँ, पिचकारियों से पानी भरता हूँ और गुलाल उड़ाता हूँ। घर में तरह-तरह के पकवान बनते हैं, जैसे गुजिया, मालपुआ और ठंडाई, जिनका मैं आनंद लेता हूँ। नए कपड़े पहनकर यह त्योहार और भी खास हो जाता है। शाम को हम सब मिलकर एक-दूसरे को बधाई देते हैं और दिन भर की मस्ती के बाद आराम करते हैं।

प्रश्न 7 (क)

(क) फ़सल के त्योहार पर 'तिल' का बहुत महत्व होता है। तिल का किन-किन रूपों में इस्तेमाल किया जाता है? पता करो।
Solution: फसल के त्योहारों पर तिल का विशेष महत्व होता है, खासकर मकर संक्रांति जैसे त्योहारों पर। तिल का उपयोग कई रूपों में किया जाता है:
  1. मिठाइयाँ: तिल का सबसे आम उपयोग तिलकुट, रेवड़ियाँ और गज्जक जैसी पारंपरिक मिठाइयाँ बनाने में होता है। ये मिठाइयाँ अक्सर तिल और गुड़ या चीनी को मिलाकर बनाई जाती हैं।
  2. तेल: तिल से तेल निकाला जाता है, जिसे तिल का तेल कहते हैं। यह तेल खाने के लिए और कुछ पारंपरिक औषधियों में भी प्रयोग किया जाता है।
  3. अन्य व्यंजन: कुछ क्षेत्रों में, तिल का उपयोग विभिन्न प्रकार के नमकीन और मीठे व्यंजनों में स्वाद और पौष्टिकता बढ़ाने के लिए भी किया जाता है।

प्रश्न 7 (ख)

(ख) तुम जानती हो कि तिल से तेल बनता है? और किन चीज़ों से तेल बनता है और कैसे? हो सके तो तेल की दुकान में जाकर पूछो।
Solution: हाँ, तिल से तेल बनता है। तिल के दानों को पीसकर या दबाकर उनका तेल निकाला जाता है। तिल के अलावा, भारत में कई अन्य चीज़ों से भी तेल बनाया जाता है, जिनमें प्रमुख हैं:
  • सरसों: सरसों के दानों से सरसों का तेल निकाला जाता है, जो उत्तर भारत में खाना पकाने के लिए बहुत लोकप्रिय है।
  • मूंगफली: मूंगफली से मूंगफली का तेल बनता है, जिसका उपयोग तलने और खाना पकाने में व्यापक रूप से होता है।
  • सोयाबीन: सोयाबीन से सोयाबीन का तेल प्राप्त होता है, जो एक सामान्य खाद्य तेल है।
  • सूरजमुखी: सूरजमुखी के बीजों से सूरजमुखी का तेल बनता है, जो अपने स्वास्थ्य लाभों के लिए जाना जाता है।
  • नारियल: नारियल से नारियल का तेल निकाला जाता है, जो विशेष रूप से दक्षिण भारत और तटीय क्षेत्रों में उपयोग होता है।
तेल निकालने की प्रक्रिया में आमतौर पर बीजों या दानों को पीसना या दबाना शामिल होता है ताकि उनमें से तेल बाहर निकल सके। यह पारंपरिक कोल्हू या आधुनिक मशीनों द्वारा किया जा सकता है।

प्रश्न 8

किसान और खेती हममें से बहुत से लोगों की जानी-पहचानी दुनिया का हिस्सा नहीं है। विशेष रूप से शहर के ज्यादातर लोगों को यह अहसास नहीं है कि हमारी ज़िंदगी किस हद तक इनसे जुड़ी हुई है। देश के कई हिस्सों में आज किसानों को ज़िंदा रहने के लिए बहुत मेहनत और संघर्ष करना पड़ रहा है। अगर यह जानने की कोशिश करें कि हम दिनभर जो चीज़ें खाते हैं वे कहाँ से आती हैं-तो किसानों की हमारी ज़िंदगी में भूमिका को हम समझ पाएँगे। आलू की पकौड़ी, बर्फी और आइसक्रीम-- इन तीन चीज़ों के बारे में नीचे दिए बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए जानकारी इकट्ठी करो और 'मेरी कहानी' के रूप में उसे लिखो।

किन चीज़ों से बनती है?

इन चीज़ों का जन्म कहाँ होता है?

हम तक पहुँचने का उनका सफ़र क्या है?

किन-किन हाथों से होकर हम तक पहुँचती है?

इस पूरे सफर में किन लोगों की कितनी मेहनत लगती है?

इन लोगों में से किसको कितना मुनाफा मिलता है?

अगले वर्ष कक्षा छह में सामाजिक एवं राजनैतिक जीवन के बारे में पढ़ोगी तो ऊपर लिखे सफ़र में शामिल लोगों की दिनचर्या पता करने का मौका भी मिलेगा।

Solution: यह प्रश्न छात्रों को भोजन की उत्पत्ति और किसानों के योगदान को समझने के लिए प्रोत्साहित करता है। यहाँ तीन चीज़ों - आलू की पकौड़ी, बर्फी और आइसक्रीम - के बारे में जानकारी दी गई है: 1. आलू की पकौड़ी:
  • किन चीज़ों से बनती है? यह मुख्य रूप से आलू और बेसन से बनती है। इसमें नमक, मसाले और तलने के लिए तेल भी इस्तेमाल होता है।
  • इन चीज़ों का जन्म कहाँ होता है? आलू खेतों में किसानों द्वारा उगाए जाते हैं। बेसन चने से बनता है, जो भी खेतों में उगता है।
  • हम तक पहुँचने का उनका सफ़र क्या है? किसान आलू उगाते हैं, उन्हें मंडी में बेचते हैं। व्यापारी उन्हें खरीदकर आगे बेचते हैं। फिर हम या कोई दुकानदार आलू खरीदते हैं। बेसन भी इसी तरह खेतों से हम तक पहुँचता है।
  • किन-किन हाथों से होकर हम तक पहुँचती है? किसान, मंडी के व्यापारी, खुदरा विक्रेता, और अंत में बनाने वाला (घर पर या दुकान में)।
  • इस पूरे सफर में किन लोगों की कितनी मेहनत लगती है? किसान की सबसे ज़्यादा मेहनत लगती है - खेत तैयार करना, बीज बोना, सिंचाई करना, निराई-गुड़ाई करना, कीटनाशक डालना और फिर फसल काटना। इसके बाद व्यापारियों और विक्रेताओं की मेहनत भी होती है।
  • इन लोगों में से किसको कितना मुनाफा मिलता है? आमतौर पर, किसान को सबसे कम मुनाफा मिलता है, जबकि व्यापारी और विक्रेता अधिक मुनाफा कमाते हैं।
2. बर्फी:
  • किन चीज़ों से बनती है? यह मुख्य रूप से दूध से बने खोया (मावा) और चीनी से बनती है। इसमें मेवे (जैसे काजू, बादाम) भी डाले जा सकते हैं।
  • इन चीज़ों का जन्म कहाँ होता है? दूध डेयरी फार्मों से आता है, जहाँ गाय-भैंस पाली जाती हैं। चीनी गन्ने से बनती है, जो खेतों में उगता है।
  • हम तक पहुँचने का उनका सफ़र क्या है? दूध डेयरी से आता है, जिसे खोया बनाने वाले खरीदते हैं। चीनी गन्ने के खेतों से चीनी मिलों तक और फिर बाज़ार तक पहुँचती है। खोया और चीनी को मिलाकर बर्फी बनाई जाती है।
  • किन-किन हाथों से होकर हम तक पहुँचती है? डेयरी फार्म के मालिक, दूध वाले, गन्ने के किसान, चीनी मिल के कर्मचारी, बर्फी बनाने वाले कारीगर और दुकानदार।
  • इस पूरे सफर में किन लोगों की कितनी मेहनत लगती है? डेयरी फार्म के कर्मचारियों और गन्ने के किसानों की मेहनत सबसे अधिक होती है। बर्फी बनाने वाले कारीगरों की भी मेहनत लगती है।
  • इन लोगों में से किसको कितना मुनाफा मिलता है? डेयरी फार्म मालिक, चीनी मिलें और बर्फी बनाने वाले दुकानदार अधिक मुनाफा कमाते हैं, जबकि किसान और दूध वाले को अपेक्षाकृत कम मुनाफा मिलता है।
3. आइसक्रीम:
  • किन चीज़ों से बनती है? यह मुख्य रूप से दूध, क्रीम, चीनी और फ्लेवरिंग एजेंट (जैसे फल, चॉकलेट, वनीला) से बनती है। इसमें आइसक्रीम पाउडर भी इस्तेमाल हो सकता है।
  • इन चीज़ों का जन्म कहाँ होता है? दूध डेयरी फार्म से आता है। चीनी गन्ने से बनती है। फल खेतों में उगते हैं।
  • हम तक पहुँचने का उनका सफ़र क्या है? दूध और क्रीम को आइसक्रीम बनाने वाली फैक्टरी में ले जाया जाता है। चीनी और अन्य सामग्री भी वहीं पहुँचती है। वहाँ इन्हें मिलाकर आइसक्रीम बनाई जाती है और फिर पैक करके दुकानों तक पहुँचाया जाता है।
  • किन-किन हाथों से होकर हम तक पहुँचती है? डेयरी फार्म के कर्मचारी, किसान (फल वाले), आइसक्रीम फैक्टरी के कर्मचारी, ट्रांसपोर्टर और दुकानदार।
  • इस पूरे सफर में किन लोगों की कितनी मेहनत लगती है? डेयरी फार्म के कर्मचारियों, फल उगाने वाले किसानों और आइसक्रीम फैक्टरी में काम करने वाले लोगों की मेहनत लगती है।
  • इन लोगों में से किसको कितना मुनाफा मिलता है? आइसक्रीम बनाने वाली बड़ी कंपनियाँ और दुकानदार सबसे अधिक मुनाफा कमाते हैं।

प्रश्न 9

'गया' शहर तिलकुट के लिए भी प्रसिद्ध है। हमारे देश में छोटी-बड़ी ऐसी कई जगहें हैं जो अपने खास पकवान के लिए मशहूर हैं। अपने परिवार के लोगों से पता करके उनके बारे में बताओ।
Solution: यह प्रश्न छात्रों को अपने परिवार से बातचीत करके भारत के विभिन्न क्षेत्रों के प्रसिद्ध पकवानों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है। यहाँ कुछ उदाहरण दिए गए हैं, लेकिन छात्र अपने परिवार से पूछकर और भी कई जगहों और उनके पकवानों के बारे में जान सकते हैं:
  • बनारस (वाराणसी): बनारसी पान, लस्सी, ठंडाई, चाट।
  • लखनऊ: टुंडे कबाब, बिरयानी, मलाई गिलौरी।
  • जयपुर: दाल-बाटी-चूरमा, घेवर।
  • अमृतसर: छोले भटूरे, लस्सी, दाल मखनी।
  • कोलकाता: रसगुल्ला, संदेश, मिष्टी दोई, फिश करी।
  • हैदराबाद: हैदराबादी बिरयानी, कबाब।
  • दिल्ली: छोले भटूरे, चाट, बटर चिकन।
  • कोयंबटूर: इडली, डोसा, सांभर।
छात्र अपने परिवार के सदस्यों से पूछ सकते हैं कि वे किस शहर या क्षेत्र के किस पकवान के बारे में जानते हैं और क्यों वह प्रसिद्ध है।

प्रश्न 10

नीचे खिचड़ी बनाने की विधि दी गई है। इसमें बीच-बीच में कुछ क्रियाएँ छूट गई हैं। उचित क्रियाओं का प्रयोग करते हुए इसे पूरा करो।

छौंकना, पीसना, पकाना, धोना, भूनना, परोसना

बंगाली 'खिचुरी' (5 व्यक्तियों के लिए)

सामग्री मात्रा सामग्री मात्रा

अदरक 20 ग्राम चावल धुले हुए 1 प्याला

लहसुन ३ फाँके फूल गोभी बड़े-बड़े इलायची के दाने 3 छोटी टुकड़ों में कटी हुई 200 ग्राम

दालचीनी 2½ से.मी. का आलू छीलकर चार-चार 1 दुकड़ा टुकड़ों में कटे हुए 2

पानी 4 प्याले मटर के दाने ½ प्याला

मूँग दाल ¹∕2'प्याला धनिया पिसा हुआ 1 बड़ा चम्मच

सरसों का तेल. 3 बड़े चम्मच लाल मिर्च पिसी हुई 1∕2 छोटा चम्मच

तेज पत्ते 2 चीनी 1 छोटा चम्मच

जीरा 1∕2 छोटा चम्मच घी 2 बड़े चम्मच

प्याज़ बारीक कटा हुआ 1 मँझोला नमक और हल्दी अंदाज़ से

Solution: यहाँ बंगाली 'खिचूरी' बनाने की विधि को उचित क्रियाओं से पूरा किया गया है: विधि:
  1. इलायची, दालचीनी और लौंग में थोड़ा-थोड़ा पानी (एक छोटा चम्मच) डालते हुए पीस लो।
  2. अदरक और लहसुन को इकट्ठा पीसकर पेस्ट बनाओ।
  3. दाल को कड़ाही में डालो और मध्यम आँच पर सुनहरी भूरी होने तक भून लो।
  4. अब चावल निकाल कर धो लो।
  5. तेल को कुकर में डालकर गरम करो। तेल गरम हो जाने पर तेज पत्ते और जीरा डालो। जीरा जब चटकने लगे तो प्याज़ डालकर सुनहरा भूरा होने तक भूनो।
  6. अब अदरक-लहसुन का पेस्ट डालकर कुछ मिनट भूनो
  7. भुनी हुई दाल, चावल और सब्ज़ी डालो और अच्छी तरह मिलाओ।
  8. शेष पानी (चार प्याले) डालकर एक बार चलाओ। कुकर बंद करो। तेज़ आँच पर पूर्ण प्रेशर आने दो। अब आँच कम करके चार मिनट तक पकाओ
  9. भाप निकल जाने पर कुकर खोलो, मसालों का पेस्ट मिलाओ।
  10. खिचूरी पर घी, हींग, जीरा, साबुत लाल मिर्च से छौंक कर परोसो गरमागरम।

इस प्रकार, छूटी हुई क्रियाएँ हैं: पीसना, धोना, पकाना, छौंकना और परोसना। भूनना क्रिया का प्रयोग दो बार हुआ है।

Common mistakes

  • त्योहारों के स्थानीय नामों और उनके महत्व को समझने में भ्रमित होना।
  • विविधता के उदाहरणों को सामान्यीकृत करना, विशिष्टता को अनदेखा करना।
  • किसानों की भूमिका और भोजन की आपूर्ति श्रृंखला के महत्व को कम आंकना।

Revision tips

  • प्रत्येक त्योहार से जुड़े मुख्य पकवानों और रीति-रिवाजों को सूचीबद्ध करें।
  • भारत की विविधता (भाषा, भोजन, कपड़े) के उदाहरणों को याद करें।
  • किसानों के जीवन और उनके द्वारा हमारे भोजन तक पहुँचने की प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित करें।
  • अध्याय में उल्लिखित 'काम वाले शब्दों' (क्रियाओं) का अभ्यास करें।

Practice MCQs

Q1. लेखिका के अनुसार 'खिचड़ी' से क्या तात्पर्य है?

Q2. अगर सूरज बिल्कुल न निकले तो क्या होगा?

Q3. बाहर देखकर समय का अंदाज़ा क्यों नहीं हो रहा था?

Q4. भारत की विविधता का एक उदाहरण क्या है?

Q5. तिल का उपयोग किन चीज़ों में किया जाता है?

Q6. आलू की पकौड़ी बनाने के लिए मुख्य सामग्री क्या है?

Frequently asked questions

कक्षा 5 हिंदी के 'फसलों के त्योहार' अध्याय में मुख्य रूप से किन विषयों पर चर्चा की गई है?

इस अध्याय में मुख्य रूप से भारत के विभिन्न फसल उत्सवों, जैसे मकर संक्रांति, सांस्कृतिक विविधता (भाषा, वेशभूषा, भोजन), अन्न के महत्व (जैसे तिल) और किसानों के योगदान पर चर्चा की गई है।

यह NCERT समाधान छात्रों की मदद कैसे करते हैं?

ये समाधान छात्रों को 'फसलों के त्योहार' अध्याय के प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को विस्तार से समझने में मदद करते हैं, जिससे उनकी परीक्षा की तैयारी मजबूत होती है और वे अवधारणाओं को बेहतर ढंग से सीख पाते हैं।

'खिचड़ी' शब्द का प्रयोग इस अध्याय में किस संदर्भ में किया गया है?

इस अध्याय में 'खिचड़ी' शब्द का प्रयोग मकर संक्रांति नामक त्योहार के संदर्भ में किया गया है, जो सर्दियों के मौसम में मनाया जाता है।

भारत की विविधता को किन-किन उदाहरणों से समझाया गया है?

भारत की विविधता को भाषा (जैसे हिंदी, मराठी, पंजाबी), कपड़े (जैसे लुंगी, सलवार-कमीज), नए साल के उत्सव (जैसे होली के दिन हिंदी कैलेंडर के अनुसार) और भोजन (जैसे इडली-डोसा, चावल-दाल) जैसे उदाहरणों से समझाया गया है।

तिल का क्या महत्व है और इसका उपयोग कैसे किया जाता है?

तिल का फसल के त्योहारों पर विशेष महत्व होता है। इसका उपयोग तिलकुट, रेवड़ियाँ और गज्जक जैसी मिठाइयाँ बनाने में किया जाता है, और इससे तेल भी निकाला जाता है।

इस अध्याय में 'काम वाले शब्द' या क्रियाओं का क्या महत्व है?

अध्याय में 'काम वाले शब्दों' या क्रियाओं का महत्व समझाया गया है, जो किसी कार्य के होने का बोध कराते हैं। खिचड़ी बनाने की विधि में छूटी हुई क्रियाओं को भरने का अभ्यास कराया गया है।

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