कक्षा 5 हिंदी NCERT समाधान: अध्याय 8 वे दिन भी क्या दिन थे
यह पृष्ठ कक्षा 5 हिंदी की पुस्तक 'रिमझिम' के अध्याय 8 'वे दिन भी क्या दिन थे' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह अध्याय भविष्य की कल्पना, प्रौद्योगिकी के विकास और संचार के विभिन्न माध्यमों पर केंद्रित है। छात्र यह समझेंगे कि कैसे समय के साथ चीजें बदलती हैं, जैसे कि किताबों का स्वरूप, शिक्षा का तरीका और दैनिक जीवन में प्रौद्योगिकी का उपयोग। समाधानों में पुरानी और नई कीमतों की तुलना, कंप्यूटर के उपयोग और संचार के विभिन्न साधनों का वर्गीकरण शामिल है। यह अध्याय छात्रों को सोचने और अपनी कल्पना का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करता है, जिससे वे अतीत, वर्तमान और भविष्य के बीच संबंध स्थापित कर सकें। ये समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए स्पष्ट और संक्षिप्त उत्तर प्रदान करते हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 5 |
| Subject | हिंदी |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 8 वे दिन भी क्या दिन थे |
Chapter summary
कक्षा 5 हिंदी के अध्याय 8 'वे दिन भी क्या दिन थे' के ये NCERT समाधान छात्रों को भविष्य की कल्पना करने और प्रौद्योगिकी के प्रभाव को समझने में मदद करते हैं। इसमें पुरानी किताबों और आधुनिक माध्यमों की तुलना, शिक्षा के बदलते तरीके, और संचार के विभिन्न साधनों पर चर्चा की गई है। समाधान छात्रों को विभिन्न वस्तुओं की कीमतों में आए बदलावों का विश्लेषण करने और कंप्यूटर के उपयोग को समझने में भी सहायता करते हैं। यह अध्याय छात्रों की सोच को विस्तृत करता है और उन्हें समय के साथ होने वाले परिवर्तनों पर विचार करने के लिए प्रेरित करता है।
Learning outcomes
- भविष्य की प्रौद्योगिकी और शिक्षा के बारे में कल्पना करना।
- संचार के विभिन्न माध्यमों को पहचानना और वर्गीकृत करना।
- समय के साथ वस्तुओं की कीमतों में हुए बदलावों का विश्लेषण करना।
- कंप्यूटर के व्यक्तिगत और सार्वजनिक जीवन में उपयोग को समझना।
- बीते हुए समय और भविष्य के बीच संबंध स्थापित करना।
Topics covered
Paper topics
- भविष्य की कल्पना
- प्रौद्योगिकी का विकास
- किताबों का इतिहास
- शिक्षा के बदलते तरीके
- संचार के माध्यम
- इकतरफ़ा और दोतरफ़ा संचार
- वस्तुओं की कीमतों में बदलाव
- कंप्यूटर का उपयोग
- डायरी लेखन
- समय का बोध (भूत, वर्तमान, भविष्य)
Important topics
- भविष्य की कल्पना और प्रौद्योगिकी
- संचार के विभिन्न माध्यम और उनका वर्गीकरण
- समय के साथ हुए बदलाव (कीमतें, शिक्षा)
- कंप्यूटर का व्यक्तिगत और सार्वजनिक जीवन में उपयोग
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Questions and Solutions
सोचो
कहानी में जिस किताब का ज़िक्र है, वह शायद बहुत पुरानी है, संभवतः सदियों पहले छपी होगी। यह कल्पना की गई है कि भविष्य में किताबें मशीनी रूप में होंगी, इसलिए पुरानी छपी हुई किताबों का महत्व और भी बढ़ जाता है।
रोहित की बात कुछ हद तक सही हो सकती है, लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है। पुस्तकें तभी बेकार जाती हैं जब उन्हें पढ़ने के बाद ठीक से न रखा जाए या फेंक दिया जाए। यदि पुस्तकों को सहेज कर रखा जाए, तो वे पीढ़ी-दर-पीढ़ी ज्ञान का स्रोत बनी रहती हैं और कभी बेकार नहीं होतीं। अच्छी पुस्तकें जीवन भर उपयोगी साबित होती हैं।
मैं कागज के पन्नों वाली किताब को पसंद करूंगा। इसके कई कारण हैं: कागज की किताब को कभी भी, कहीं भी पढ़ा जा सकता है, चाहे बिजली हो या न हो। इसे बार-बार पढ़ा जा सकता है, और अपनी गति से पढ़ा जा सकता है। टेलीविजन पर चलने वाली किताब में ये सुविधाएँ नहीं होतीं, और यह आँखों के लिए भी उतनी आरामदायक नहीं होती।
कागज़ के आविष्कार से पहले, ज्ञान को संरक्षित करने और फैलाने के लिए विभिन्न माध्यमों का उपयोग किया जाता था। छपाई मुख्य रूप से इन चीज़ों पर हुआ करती थी: पत्तों (जैसे ताड़ के पत्ते), ताम्रपत्रों (तांबे की चादरों) और लकड़ी की सतहों पर। इन पर लेख या चित्र उकेर कर या लिखकर ज्ञान को सहेजा जाता था।
मैं अध्यापक की मदद से पढ़ना पसंद करूंगा। अध्यापक के पढ़ाने में यह आसानी है कि वे सीधे संवाद करते हैं, हमारी शंकाओं का तुरंत समाधान करते हैं और हमें डाँटकर या प्यार से समझाकर प्रेरित करते हैं। इससे कक्षा में एक अपनापन और सीखने का सहज माहौल बनता है।
मशीन से पढ़ने में यह मुश्किल हो सकती है कि वह नीरस और एकतरफ़ा हो सकती है। मशीन मानवीय भावनाओं और व्यक्तिगत मार्गदर्शन का स्थान नहीं ले सकती, जिससे सीखने की प्रक्रिया उबाऊ हो सकती है। हालाँकि, मशीनें जानकारी को तेज़ी से पहुँचा सकती हैं, पर मानवीय स्पर्श का कोई विकल्प नहीं है।
"वे दिन भी क्या दिन थे"
यह एक व्यक्तिगत प्रश्न है जिसका उत्तर प्रत्येक छात्र अपनी भावनाओं और अनुभवों के आधार पर देगा। छात्र अपने बचपन के किसी खास पल, अपने परिवार के साथ बिताए सुखद क्षणों, या किसी ऐसी घटना को याद कर सकते हैं जो उन्हें बहुत प्रिय थी और जिसके बारे में वे "वे दिन भी क्या दिन थे!" कहना चाहेंगे। यह किसी विशेष त्यौहार, छुट्टी, या किसी प्रियजन के साथ बिताए समय से जुड़ा हो सकता है।
कल, आज और कल
यह प्रश्न छात्रों को भविष्य की कल्पना करने के लिए प्रोत्साहित करता है। यहाँ कुछ संभावित कल्पनाएँ दी गई हैं:
- पेन: शायद ऐसे पेन होंगे जो बोलते हों, या जो सीधे दिमाग से जुड़कर लिख सकें। या शायद लिखने की आवश्यकता ही न हो, सब कुछ वॉयस कमांड से हो।
- घड़ी: घड़ियाँ शायद समय बताने के साथ-साथ स्वास्थ्य की निगरानी करेंगी, संदेश भेजेंगी और शायद हमारे मूड के अनुसार रंग बदलेंगी।
- टेलीफ़ोन/मोबाइल: ये शायद होलोग्राफिक (त्रिविमीय) कॉल कर सकेंगे, जहाँ व्यक्ति सामने खड़ा दिखेगा। ये शायद हमारी भावनाओं को समझकर प्रतिक्रिया देंगे।
- टेलीविज़न: टेलीविज़न शायद कमरे की दीवारों पर फैल जाएगा या हवा में चित्र दिखाएगा। यह हमारी पसंद के अनुसार सामग्री को तुरंत बदल देगा।
- कोई और चीज़ (जैसे कार): कारें शायद उड़ने वाली होंगी, या स्वचालित रूप से चलेंगी और हमें गंतव्य तक पहुँचा देंगी, बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के।
वस्तुओं के नाम: आलू, लड्डू, दाल, शक्कर, चावल, दूध
यह प्रश्न छात्रों को अपने बड़ों से बातचीत करके जानकारी जुटाने और कीमतों में आए बदलावों को समझने के लिए प्रेरित करता है। यहाँ एक अनुमानित तालिका दी गई है, जो स्रोत के अनुसार है:
| वस्तुओं के नाम | बीस साल पहले इनकी कीमत (लगभग) | अब इनका दाम (लगभग) |
| आलू | 50-75 पैसे प्रति कि. ग्रा. | 8-10 रुपये प्रति कि. ग्रा. |
| लड्डू (यह वस्तु शायद किलो में नहीं बिकती थी, पर तुलना के लिए) | 10-20 रुपये प्रति कि. ग्रा. | 150-200 रुपये प्रति कि. ग्रा. |
| शक्कर | 3-4 रुपये प्रति कि. ग्रा. | 30-32 रुपये प्रति कि. ग्रा. |
| दाल | 4-5 रुपये प्रति कि. ग्रा. | 60-80 रुपये प्रति कि. ग्रा. |
| चावल | 5-10 रुपये प्रति कि. ग्रा. | 25-60 रुपये प्रति कि. ग्रा. |
| दूध | 4-5 रुपये प्रति लीटर | 32-38 रुपये प्रति लीटर |
इस तालिका से स्पष्ट है कि पिछले बीस वर्षों में इन सभी वस्तुओं की कीमतों में काफी वृद्धि हुई है।
व्यक्तिगत | सार्वजनिक
मनोरंजन के लिए ...... | रेल टिकट कटाने के लिए
संदेश भेजने के लिए ..... |
किसी चीज के बारे में ..... जानकारियाँ प्राप्त करने के लिए |
कंप्यूटर हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। इसके उपयोग को व्यक्तिगत और सार्वजनिक जीवन में इस प्रकार बाँटा जा सकता है:
| व्यक्तिगत उपयोग | सार्वजनिक उपयोग |
| मनोरंजन के लिए (गेम खेलना, फिल्में देखना, संगीत सुनना) | रेल टिकट कटाने के लिए |
| संदेश भेजने के लिए (ईमेल, चैट) | सार्वजनिक सूचनाएँ प्राप्त करने के लिए (जैसे मौसम, समाचार) |
| किसी चीज़ के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए (ऑनलाइन रिसर्च) | सरकारी सेवाओं के लिए (जैसे फॉर्म भरना, बिल जमा करना) |
| ऑनलाइन खरीदारी के लिए | बैंकिंग और वित्तीय लेनदेन के लिए |
| पढ़ाई और सीखने के लिए (ऑनलाइन कोर्स) | सार्वजनिक परिवहन का प्रबंधन |
बॉक्स में दिए गए साधन: संदेश, अभिनय, रेडियो, नृत्य के हाव-भाव, फ़ोन, विज्ञापन, नोटिस, संकेत-भाषा, चित्र, मोबाइल, टी.वी., मोबाइल संदेश, फ़ैक्स, इंटरनेट, तार, इश्तहार।
जानकारी और भावनाओं को व्यक्त करने के विभिन्न साधनों को उनके प्रकार के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है। यहाँ एक संभावित वर्गीकरण दिया गया है:
| जानकारी (Information) | भावनाएँ (Emotions) | संदेश/संचार (Messages/Communication) |
| रेडियो | अभिनय | संदेश |
| विज्ञापन | नृत्य के हाव-भाव | फ़ोन |
| नोटिस | संकेत-भाषा | मोबाइल |
| चित्र | मोबाइल संदेश | |
| टी.वी. | फ़ैक्स | |
| इंटरनेट | तार | |
| इश्तहार | (मोबाइल संदेश को यहाँ भी रखा जा सकता है) |
यह वर्गीकरण साधनों के मुख्य उद्देश्य पर आधारित है, हालाँकि कई साधन एक से अधिक श्रेणियों में आ सकते हैं।
संचार माध्यमों को इकतरफ़ा (जहाँ केवल एक ओर से संदेश जाता है) और दोतरफ़ा (जहाँ दोनों ओर से संवाद संभव है) में वर्गीकृत किया जा सकता है। यहाँ उनका वर्गीकरण दिया गया है:
- इकतरफ़ा (→): रेडियो (→), विज्ञापन (→), नोटिस (→), इश्तहार (→), (कुछ हद तक टी.वी. →)
- दोतरफ़ा (↔): संदेश (↔), अभिनय (↔), नृत्य के हाव-भाव (↔), फ़ोन (↔), संकेत-भाषा (↔), चित्र (↔ - यदि प्रतिक्रिया दी जाए), मोबाइल (↔), मोबाइल संदेश (↔), फ़ैक्स (↔), इंटरनेट (↔), तार (↔)
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि कुछ माध्यम, जैसे टी.वी. या इंटरनेट, का उपयोग इकतरफ़ा या दोतरफ़ा दोनों तरह से किया जा सकता है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि उनका उपयोग कैसे किया जा रहा है।
तुम्हारी डायरी
यह प्रश्न छात्रों को डायरी लेखन के महत्व और उसके निजी या सार्वजनिक स्वरूप को समझने के लिए है। छात्रों को किसी प्रसिद्ध व्यक्ति की डायरी खोजने और उसका एक अंश कक्षा में सुनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। यह उन्हें विभिन्न लेखकों की शैली और उनके विचारों से परिचित कराएगा।
छात्रों को अपनी डायरी बनाने और उसमें अपनी महत्वपूर्ण बातें लिखने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। यह उन्हें आत्म-चिंतन करने और अपने अनुभवों, विचारों और भावनाओं को व्यवस्थित रूप से लिखने का अवसर देता है।
अपनी डायरी में स्कूल के बारे में लिखते समय, छात्र निम्नलिखित बातें शामिल कर सकते हैं:
- शिक्षक-शिक्षिकाएँ: वे कैसे पढ़ाते हैं, उनका स्वभाव कैसा है, विद्यार्थियों के साथ उनका तालमेल कैसा है।
- दोस्त: कक्षा में कितने साथी हैं, कौन सबसे प्रिय है, कौन मदद करता है, दोस्तों के साथ बिताए यादगार पल।
- स्कूल की गतिविधियाँ: कोई विशेष कार्यक्रम, खेल, या कक्षा की कोई रोचक घटना।
- अपनी पढ़ाई: किसी विषय में आई कठिनाई या उसमें मिली सफलता।
- स्कूल का माहौल: स्कूल का वातावरण कैसा है, क्या पसंद है और क्या नहीं।
तुम भी कल्पना करो
यह प्रश्न छात्रों को भविष्य के बारे में सोचने और अपने दोस्तों के साथ चर्चा करने के लिए प्रेरित करता है। यहाँ 50 साल बाद संभावित बदलावों के कुछ अनुमान दिए गए हैं:
- फिल्में: फिल्मों में स्पेशल इफेक्ट्स और भी उन्नत हो जाएंगे, शायद दर्शक फिल्मों को त्रिविमीय (3D) या आभासी वास्तविकता (VR) में अनुभव कर पाएंगे। कहानियों में नए विषय आ सकते हैं, और अभिनय का तरीका भी बदल सकता है।
- गाँव की हालत: गाँवों में आधुनिक तकनीक का प्रयोग बढ़ेगा, जैसे स्मार्ट खेती, बेहतर कनेक्टिविटी (इंटरनेट, मोबाइल), और शायद बेहतर स्वास्थ्य व शिक्षा सुविधाएँ। जीवन स्तर में सुधार हो सकता है।
- तुम्हारी परिचित किसी नदी में: यदि प्रदूषण नियंत्रण के उपाय नहीं किए गए, तो नदियाँ और अधिक प्रदूषित हो सकती हैं। यदि पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान दिया गया, तो वे साफ और स्वच्छ हो सकती हैं।
- स्कूल में: स्कूल पूरी तरह से डिजिटल हो सकते हैं, जहाँ रोबोटिक शिक्षक या वर्चुअल क्लासरूम हों। खेल के मैदान और अन्य सुविधाएँ भी आधुनिक हो सकती हैं।
था, है, होगा
कहानी में 'थे' का प्रयोग इसलिए किया गया है क्योंकि लेखक भविष्य (2155) की घटनाओं का वर्णन करते हुए, उस समय के पात्रों के दृष्टिकोण से बात कर रहा है। उस भविष्य के पात्रों के लिए, 2155 से पहले का समय (जैसे कि आज का समय) 'बीता हुआ समय' या 'भूतकाल' है। वे अपने वर्तमान से अतीत की ओर देखते हुए 'थे' का प्रयोग करते हैं, जैसे हम आज के समय से 1967 की बात करते हुए 'थे' का प्रयोग करते हैं। यह कहानी कहने की एक शैली है।
यह प्रश्न छात्रों को अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करने के लिए प्रोत्साहित करता है। छात्र किसी ऐसी घटना का वर्णन कर सकते हैं जब वे बहुत डरे हुए थे, या अपने बचपन की कोई यादगार घटना बता सकते हैं। उदाहरण के लिए, अँधेरे से डर लगना, किसी जानवर से डरना, या बचपन की कोई शरारत जो उन्हें याद हो।
यह प्रश्न छात्रों को आत्म-विश्लेषण और रचनात्मक लेखन का अभ्यास करने का अवसर देता है। छात्र 'मैं' शीर्षक के तहत अपने व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं, जैसे अपनी खूबियों, खामियों, पसंद और नापसंद के बारे में लिख सकते हैं। वैकल्पिक रूप से, वे किसी खेल मैच का आँखों देखा हाल इस प्रकार लिख सकते हैं कि पाठक को लगे कि वह घटना अभी घटित हो रही है, जिससे उनकी वर्णन क्षमता का विकास होगा।
यह प्रश्न छात्रों को अपनी योजनाओं और अपेक्षाओं को व्यक्त करने के लिए प्रेरित करता है। छात्र अपनी नानी के घर जाने की खुशी, वहाँ बिताए जाने वाले समय की योजना, जैसे कि नानी के साथ खेलना, कहानियाँ सुनना, घर के कामों में मदद करना, या आस-पड़ोस घूमना, आदि के बारे में एक अनुच्छेद लिख सकते हैं। यह उनकी कल्पनाशीलता और योजना बनाने की क्षमता को दर्शाता है।
Common mistakes
- भविष्य की कल्पना करते समय केवल वर्तमान को आधार मानना।
- संचार के साधनों को इकतरफ़ा और दोतरफ़ा में गलत वर्गीकृत करना।
- पुरानी और नई कीमतों की तुलना करते समय इकाइयों (जैसे प्रति कि.ग्रा., प्रति लीटर) पर ध्यान न देना।
- कंप्यूटर के उपयोग के व्यक्तिगत और सार्वजनिक पहलुओं को अलग न कर पाना।
Revision tips
- अध्याय में दी गई भविष्य की कल्पनाओं पर विचार करें और अपनी कल्पना को जोड़ें।
- संचार के विभिन्न साधनों की सूची बनाएं और उनके इकतरफ़ा/दोतरफ़ा होने का अभ्यास करें।
- पुरानी और नई कीमतों की तुलना सारणीबद्ध रूप में करें और अंतर का प्रतिशत निकालें।
- कंप्यूटर के उपयोग के उदाहरणों को अपने दैनिक जीवन से जोड़कर समझें।
Practice MCQs
Q1. कहानी में किस वर्ष की कल्पना की गई है, जहाँ स्कूल की जगह मशीनें ले लेंगी?
Explanation: कहानी में वर्ष 2155 की कल्पना की गई है, जहाँ स्कूल की जगह मशीनें ले लेंगी।
Q2. कागज के पन्नों वाली किताब की तुलना में टेलीविजन के पर्दे पर चलने वाली किताब में क्या कमी है?
Explanation: टेलीविजन के पर्दे पर चलने वाली किताब को कागज की किताब की तरह किस्तों में या बार-बार पढ़ने की सुविधा नहीं मिलती।
Q3. कागज से पहले छपाई किन चीजों पर होती थी?
Explanation: स्रोत के अनुसार, कागज से पहले छपाई पत्तों, ताम्रपत्रों और लकड़ी पर हुआ करती थी।
Q4. नीचे दिए गए संचार माध्यमों में से कौन सा इकतरफ़ा (→) है?
Explanation: रेडियो एक इकतरफ़ा माध्यम है, जहाँ से केवल प्रसारण होता है, प्रतिक्रिया संभव नहीं होती।
Q5. 20 साल पहले आलू की कीमत लगभग कितनी थी?
Explanation: स्रोत के अनुसार, 20 साल पहले आलू की कीमत 50-75 पैसे प्रति किलोग्राम थी।
Frequently asked questions
यह समाधान किस कक्षा और विषय के लिए है?
यह समाधान कक्षा 5 के हिंदी विषय के लिए है, जो 'रिमझिम' पुस्तक के अध्याय 8 'वे दिन भी क्या दिन थे' पर आधारित है।
इस अध्याय में मुख्य रूप से किन विषयों पर चर्चा की गई है?
इस अध्याय में भविष्य की कल्पना, प्रौद्योगिकी का विकास, शिक्षा के बदलते तरीके, संचार के विभिन्न माध्यमों और समय के साथ वस्तुओं की कीमतों में हुए बदलावों पर चर्चा की गई है।
क्या इन समाधानों में प्रश्नों के उत्तर विस्तृत हैं?
हाँ, इन समाधानों में प्रत्येक प्रश्न का उत्तर स्पष्ट, विस्तृत और समझने योग्य तरीके से दिया गया है, जिसमें आवश्यक स्पष्टीकरण भी शामिल हैं।
यह समाधान छात्रों के लिए कैसे उपयोगी है?
यह समाधान छात्रों को अध्याय की अवधारणाओं को गहराई से समझने, परीक्षा की तैयारी करने और भविष्य तथा प्रौद्योगिकी के बारे में सोचने के लिए प्रेरित करने में मदद करता है।
क्या समाधान में पुरानी और नई कीमतों की तुलना शामिल है?
हाँ, समाधान में कुछ वस्तुओं की बीस साल पहले की कीमतों और वर्तमान कीमतों की तुलना सारणीबद्ध रूप में प्रस्तुत की गई है।
संचार के साधनों को कैसे वर्गीकृत किया गया है?
संचार के साधनों को इकतरफ़ा (→) और दोतरफ़ा (↔) के रूप में वर्गीकृत किया गया है, और उनके उदाहरण भी दिए गए हैं।
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