कक्षा 12 जीव विज्ञान: वंशागति के आण्विक आधार NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 12 जीव विज्ञान के अध्याय 'वंशागति के आण्विक आधार' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। इसमें नाइट्रोजनीकृत क्षार और न्यूक्लियोटाइड का वर्गीकरण, डीएनए में एडेनिन प्रतिशत की गणना, पूरक डीएनए स्ट्रैंड का अनुक्रम निर्धारण, एमआरएनए अनुक्रम का निर्माण, डीएनए प्रतिकृति के अर्ध-संरक्षी मॉडल की व्याख्या, और विभिन्न न्यूक्लिक एसिड पोलीमरेज़ के प्रकारों पर प्रश्नों के उत्तर शामिल हैं। ये समाधान छात्रों को डीएनए संरचना, प्रतिकृति, और जीन अभिव्यक्ति के आण्विक तंत्र को समझने में मदद करते हैं। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर स्पष्ट चरणों और तार्किक स्पष्टीकरण के साथ प्रस्तुत किया गया है, जो परीक्षा की तैयारी के लिए एक उत्कृष्ट संसाधन है।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 12
Subjectजीव विज्ञान
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter6. वंशागति के आण्विक आधार

Chapter summary

यह खंड कक्षा 12 जीव विज्ञान के 'वंशागति के आण्विक आधार' अध्याय के लिए NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें न्यूक्लिक एसिड के मूल घटकों, डीएनए संरचना और प्रतिकृति के सिद्धांतों, और जीन अभिव्यक्ति की आण्विक प्रक्रियाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है। समाधान छात्रों को डीएनए अनुक्रमों का विश्लेषण करने, प्रतिकृति के अर्ध-संरक्षी मॉडल को समझने और विभिन्न एंजाइमों की भूमिका को पहचानने में सहायता करते हैं।

Learning outcomes

  • नाइट्रोजनीकृत क्षार और न्यूक्लियोटाइड को वर्गीकृत करना सीखें।
  • डीएनए में क्षार युग्मन नियमों का उपयोग करके एडेनिन की मात्रा की गणना करें।
  • डीएनए और एमआरएनए के पूरक अनुक्रमों को निर्धारित करना समझें।
  • डीएनए प्रतिकृति के अर्ध-संरक्षी मॉडल के महत्व की व्याख्या करें।
  • विभिन्न प्रकार के न्यूक्लिक एसिड पोलीमरेज़ और उनके कार्यों को पहचानें।

Topics covered

Paper topics

  • नाइट्रोजनीकृत क्षार
  • न्यूक्लियोटाइड
  • डीएनए संरचना
  • चारगाफ का नियम
  • डीएनए अनुक्रम
  • पूरक स्ट्रैंड
  • अनुलेखन
  • दूत आरएनए (एमआरएनए)
  • डीएनए प्रतिकृति
  • अर्ध-संरक्षी प्रतिकृति
  • न्यूक्लिक अम्ल पॉलिमरेज
  • आरएनए पॉलिमरेज के प्रकार

Important topics

  • डीएनए की संरचना और क्षार युग्मन
  • चारगाफ के नियम और डीएनए प्रतिशत गणना
  • डीएनए प्रतिकृति का अर्ध-संरक्षी मॉडल
  • अनुलेखन प्रक्रिया और एमआरएनए का निर्माण
  • विभिन्न आरएनए पॉलिमरेज़ की भूमिका

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

निम्न को नाइट्रोजनीकृत क्षार व न्यूक्लियोटाइड के रूप में वर्गीकृत कीजिए— एडीनीन, साइटीडीन, थाइमीन, ग्वानोसीन, यूरेसील व साइटोसीन।
Solution:

नाइट्रोजनीकृत क्षार (Nitrogenous bases) और न्यूक्लियोसाइड (Nucleosides) को वर्गीकृत करने के लिए, हमें उनकी रासायनिक संरचना को समझना होगा। न्यूक्लियोसाइड में एक नाइट्रोजनीकृत क्षार और एक पेंटोस शर्करा (जैसे डीऑक्सीराइबोस या राइबोस) होती है। न्यूक्लियोटाइड में एक न्यूक्लियोसाइड और एक या अधिक फॉस्फेट समूह होते हैं। दिए गए शब्दों में से:

नाइट्रोजनीकृत क्षार (Nitrogenous bases): ये वे यौगिक हैं जिनमें नाइट्रोजन परमाणु होते हैं और ये न्यूक्लिक एसिड के निर्माण खंड हैं।

  • एडीनीन (Adenine)
  • थाइमीन (Thymine) - यह डीएनए में पाया जाता है।
  • यूरेसिल (Uracil) - यह आरएनए में पाया जाता है।
  • साइटोसीन (Cytosine) - यह डीएनए और आरएनए दोनों में पाया जाता है।

न्यूक्लियोसाइड (Nucleosides): ये नाइट्रोजनीकृत क्षार और शर्करा के संयोजन से बनते हैं।

  • साइटिडीन (Cytidine) - साइटोसीन + राइबोस/डीऑक्सीराइबोस शर्करा
  • ग्वानोसीन (Guanosine) - ग्वानिन + राइबोस/डीऑक्सीराइबोस शर्करा

नोट: प्रश्न में 'न्यूक्लियोटाइड' के रूप में वर्गीकृत करने के लिए कहा गया है, लेकिन दिए गए विकल्पों में से केवल न्यूक्लियोसाइड (साइटिडीन, ग्वानोसीन) और नाइट्रोजनीकृत क्षार (एडीनीन, थाइमीन, यूरेसिल, साइटोसीन) हैं। यदि प्रश्न का आशय न्यूक्लियोसाइड से था, तो ऊपर सूचीबद्ध किया गया है। यदि 'न्यूक्लियोटाइड' का अर्थ केवल क्षार से था, तो यह एक गलत शब्दावली है। सामान्यतः, एडीनीन, थाइमीन, यूरेसिल, साइटोसीन नाइट्रोजनीकृत क्षार हैं, और जब वे शर्करा से जुड़ते हैं तो न्यूक्लियोसाइड बनाते हैं, और जब फॉस्फेट जुड़ता है तो न्यूक्लियोटाइड बनता है।

प्रश्न 2

यदि एक द्विरज्जुक डी०एन०ए० में 20 प्रतिशत साइटोसीन है तो डी०एन०ए० में मिलने वाले एडेनीन के प्रतिशत की गणना कीजिए।
Solution:

डीएनए की द्विरज्जुक संरचना में क्षार युग्मन के नियमों (चारगाफ के नियम) के अनुसार, एडेनिन (A) की मात्रा थाइमिन (T) के बराबर होती है, और ग्वानिन (G) की मात्रा साइटोसीन (C) के बराबर होती है। साथ ही, कुल प्यूरीन (A+G) की मात्रा कुल पिरिमिडीन (T+C) के बराबर होती है।

दिया गया है:

  • साइटोसीन (C) का प्रतिशत = 20%

चारगाफ के नियम के अनुसार:

  • ग्वानिन (G) का प्रतिशत = साइटोसीन (C) का प्रतिशत = 20%

अब, डीएनए में कुल क्षार का प्रतिशत 100% होता है। इसलिए:

G + C = 20\% + 20\% = 40\%

शेष प्रतिशत एडेनिन (A) और थाइमिन (T) का होगा:

A + T = 100\% - (G + C) = 100\% - 40\% = 60\%

चूंकि एडेनिन (A) की मात्रा थाइमिन (T) के बराबर होती है (A = T):

A = \frac{60\%}{2} = 30\%

अतः, डीएनए में मिलने वाले एडेनिन का प्रतिशत 30% होगा।

प्रश्न 3

यदि डी०एन०ए० के एक रज्जुक के अनुक्रम निम्नवत् लिखे हैं— 5'—ATGCATGCATGCATGCATGCATGC—3' तो पूरक रज्जुक के अनुक्रम को 5' → 3' दिशा में लिखें।
Solution:

डीएनए के एक रज्जुक का दिया गया अनुक्रम है:

5'—ATGCATGCATGCATGCATGCATGC—3'

डीएनए की द्विरज्जुक संरचना में, दोनों रज्जुक एक-दूसरे के पूरक (complementary) होते हैं और विपरीत दिशाओं में चलते हैं (एंटी-पैरेलल)। क्षार युग्मन के नियम के अनुसार, एडेनिन (A) हमेशा थाइमिन (T) के साथ और ग्वानिन (G) हमेशा साइटोसीन (C) के साथ युग्मित होता है।

दिए गए रज्जुक (5' → 3') के पूरक रज्जुक का निर्माण करते समय, हम प्रत्येक क्षार के पूरक क्षार को विपरीत दिशा (3' → 5') में लिखेंगे:

  • A के पूरक T
  • T के पूरक A
  • G के पूरक C
  • C के पूरक G

इसलिए, दिए गए रज्जुक 5' → 3' के पूरक रज्जुक का अनुक्रम 3' → 5' दिशा में इस प्रकार होगा:

3'—TACGTACGTACGTACGTACGTACG—5'

प्रश्न में पूरक रज्जुक के अनुक्रम को 5' → 3' दिशा में लिखने के लिए कहा गया है। इसलिए, हमें उपरोक्त 3' → 5' अनुक्रम को उलट देना होगा:

5'—GCATGCATGCATGCATGCATGCAT—3'

अतः, पूरक रज्जुक का 5' → 3' दिशा में अनुक्रम 5'—GCATGCATGCATGCATGCATGCAT—3' है।

प्रश्न 4

यदि अनुलेखन इकाई में कूटलेखन रज्जुक के अनुक्रम को निम्नवत् लिखा गया है— 5'—ATGCATGCATGCATGCATGCATGC—3' तो दूत आर०एन०ए० के अनुक्रम को लिखें।
Solution:

अनुलेखन (Transcription) वह प्रक्रिया है जिसमें डीएनए के एक रज्जुक से आरएनए का संश्लेषण होता है। इस प्रक्रिया में, डीएनए का एक रज्जुक (टेम्पलेट स्ट्रैंड) आरएनए पॉलिमरेज एंजाइम के लिए टेम्पलेट के रूप में कार्य करता है, और इसके पूरक आरएनए अणु का निर्माण होता है।

दिया गया कूटलेखन रज्जुक (coding strand) का अनुक्रम है:

5'—ATGCATGCATGCATGCATGCATGC—3'

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि आरएनए पॉलिमरेज डीएनए के टेम्पलेट स्ट्रैंड से आरएनए का संश्लेषण करता है, न कि कूटलेखन स्ट्रैंड से। टेम्पलेट स्ट्रैंड, कूटलेखन स्ट्रैंड का पूरक होता है और यह 3' → 5' दिशा में चलता है।

इसलिए, कूटलेखन रज्जुक (5' → 3') के पूरक के रूप में टेम्पलेट स्ट्रैंड (3' → 5') का अनुक्रम होगा:

3'—TACGTACGTACGTACGTACGTACG—5'

अब, आरएनए पॉलिमरेज इस टेम्पलेट स्ट्रैंड (3' → 5') पर आरएनए का संश्लेषण करेगा। बनने वाला एमआरएनए (mRNA) अनुक्रम टेम्पलेट स्ट्रैंड का पूरक होगा और 5' → 3' दिशा में बनेगा। आरएनए में, थाइमिन (T) के स्थान पर यूरेसिल (U) पाया जाता है।

टेम्पलेट स्ट्रैंड (3' → 5') के पूरक के रूप में एमआरएनए (5' → 3') का अनुक्रम होगा:

  • T के पूरक A
  • A के पूरक U (डीएनए के T के स्थान पर)
  • C के पूरक G
  • G के पूरक C

इस प्रकार, एमआरएनए का अनुक्रम होगा:

5'—AUGCAUGCAUGCAUGCAUGCAUGC—3'

अतः, दूत आरएनए (mRNA) का अनुक्रम 5'—AUGCAUGCAUGCAUGCAUGCAUGC—3' है।

प्रश्न 5

डी॰एन॰ए॰ द्विकुण्डली की कौन-सी विशेषता ने वाटसन व क्रिक को डी॰एन॰ए॰ प्रतिकृति के सेमी-कंजर्वेटिव रूप को कल्पित करने में सहयोग किया, इसकी व्याख्या कीजिए।
Solution:

वाटसन और क्रिक ने 1953 में डीएनए की द्विकुण्डली संरचना का मॉडल प्रस्तुत किया, जो मौरिस विल्किन्स और रोजालिंड फ्रैंकलिन द्वारा किए गए एक्स-रे विवर्तन (X-ray diffraction) अध्ययनों पर आधारित था। डीएनए द्विकुण्डली की कई विशेषताएं थीं जिन्होंने उन्हें डीएनए प्रतिकृति के अर्ध-संरक्षी (semi-conservative) रूप को कल्पित करने में मदद की:

  1. पूरकता (Complementarity): डीएनए की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसके दोनों पॉली न्यूक्लियोटाइड स्ट्रैंड एक-दूसरे के पूरक होते हैं। इसका मतलब है कि एक स्ट्रैंड पर क्षार का क्रम दूसरे स्ट्रैंड पर क्षार के क्रम को निर्धारित करता है (A हमेशा T के साथ और G हमेशा C के साथ युग्मित होता है)। इस पूरकता के कारण, यदि एक स्ट्रैंड को टेम्पलेट के रूप में उपयोग किया जाता है, तो उसके पूरक स्ट्रैंड को सटीक रूप से संश्लेषित किया जा सकता है।
  2. क्षार युग्मन (Base Pairing): विशिष्ट क्षार युग्मन (A-T और G-C) यह सुनिश्चित करता है कि प्रतिकृति के दौरान सही न्यूक्लियोटाइड जोड़े जाएं। यह विशिष्टता आनुवंशिक जानकारी की सटीकता को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
  3. द्विरज्जुक संरचना (Double Helix Structure): डीएनए की द्विरज्जुक संरचना में, दोनों स्ट्रैंड एक-दूसरे से हाइड्रोजन बंधों द्वारा जुड़े होते हैं। प्रतिकृति के दौरान, इन हाइड्रोजन बंधों को तोड़ा जा सकता है, जिससे दोनों स्ट्रैंड अलग हो जाते हैं। प्रत्येक अलग हुआ स्ट्रैंड फिर एक टेम्पलेट के रूप में कार्य करता है, जिस पर एक नया पूरक स्ट्रैंड संश्लेषित होता है।

अर्ध-संरक्षी प्रतिकृति की व्याख्या:

इन विशेषताओं के आधार पर, वाटसन और क्रिक ने प्रस्तावित किया कि डीएनए प्रतिकृति अर्ध-संरक्षी होती है। इसका अर्थ है कि जब डीएनए की द्विकुण्डली प्रतिकृति करती है, तो मूल डीएनए अणु के दोनों स्ट्रैंड अलग हो जाते हैं। प्रत्येक स्ट्रैंड एक टेम्पलेट के रूप में कार्य करता है, और उस पर एक नया, पूरक स्ट्रैंड संश्लेषित होता है। परिणामी दो डीएनए अणुओं में से प्रत्येक में एक मूल (पैतृक) स्ट्रैंड और एक नव-निर्मित स्ट्रैंड होता है। यह 'अर्ध-संरक्षी' प्रकृति सुनिश्चित करती है कि आनुवंशिक जानकारी पीढ़ी दर पीढ़ी सटीकता से स्थानांतरित हो।

प्रश्न 6

टेम्पलेट (डी०एन०ए० या आर०एन०ए०) की रासायनिक प्रकृति व इससे (डी०एन०ए० या आर०एन०ए०) संश्लेषित न्यूक्लिक अम्लों की प्रकृति के आधार पर न्यूक्लिक अम्ल पॉलिमरेज के विभिन्न प्रकार की सूची बनाइए।
Solution:

न्यूक्लिक अम्ल पॉलिमरेज एंजाइम होते हैं जो न्यूक्लिक एसिड (डीएनए या आरएनए) के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं। उनकी क्रिया का आधार टेम्पलेट (जिस पर संश्लेषण होता है) और संश्लेषित होने वाले उत्पाद की रासायनिक प्रकृति पर निर्भर करता है। न्यूक्लिक अम्ल पॉलिमरेज को मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है:

डीएनए टेम्पलेट पर कार्य करने वाले पॉलिमरेज

  1. डीएनए निर्भर डीएनए पॉलिमरेज (DNA dependent DNA polymerase):
    • यह एंजाइम डीएनए टेम्पलेट का उपयोग करके नए डीएनए स्ट्रैंड का संश्लेषण करता है।
    • यह डीएनए प्रतिकृति (DNA replication) के लिए जिम्मेदार है।
    • यह प्रोकैरियोट्स और यूकैरियोट्स दोनों में पाया जाता है।
  2. डीएनए निर्भर आरएनए पॉलिमरेज (DNA dependent RNA polymerase):
    • यह एंजाइम डीएनए टेम्पलेट का उपयोग करके आरएनए स्ट्रैंड का संश्लेषण करता है।
    • यह अनुलेखन (Transcription) की प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार है, जिससे विभिन्न प्रकार के आरएनए (जैसे mRNA, tRNA, rRNA) बनते हैं।
    • प्रोकैरियोट्स में: एक ही प्रकार का डीएनए निर्भर आरएनए पॉलिमरेज सभी प्रकार के आरएनए का संश्लेषण करता है।
    • यूकैरियोट्स में: आरएनए के विभिन्न प्रकारों के संश्लेषण के लिए तीन मुख्य प्रकार के डीएनए निर्भर आरएनए पॉलिमरेज होते हैं:
      • आरएनए पॉलिमरेज I: राइबोसोमल आरएनए (rRNA) के संश्लेषण के लिए उत्तरदायी।
      • आरएनए पॉलिमरेज II: मैसेंजर आरएनए (mRNA) के पूर्ववर्ती (hnRNA) के संश्लेषण के लिए उत्तरदायी।
      • आरएनए पॉलिमरेज III: ट्रांसफर आरएनए (tRNA), 5S rRNA और छोटे न्यूक्लियर आरएनए (snRNA) के संश्लेषण के लिए उत्तरदायी।

आरएनए टेम्पलेट पर कार्य करने वाले पॉलिमरेज

  1. आरएनए निर्भर आरएनए पॉलिमरेज (RNA dependent RNA polymerase):
    • यह एंजाइम आरएनए टेम्पलेट का उपयोग करके नए आरएनए स्ट्रैंड का संश्लेषण करता है।
    • यह मुख्य रूप से आरएनए वायरस (जैसे इन्फ्लूएंजा वायरस, एचआईवी के कुछ चरण) में पाया जाता है, जहाँ यह आरएनए के प्रतिकृति (replication) या आरएनए से डीएनए संश्लेषण (रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन, जो रेट्रोवायरस में होता है) के लिए जिम्मेदार होता है। सामान्यतः, कोशिकाएं आरएनए का प्रतिकृति नहीं करती हैं।

नोट: रेट्रोवायरस में, आरएनए टेम्पलेट से डीएनए संश्लेषण के लिए रिवर्स ट्रांसक्रिपटेस (Reverse Transcriptase) नामक एंजाइम कार्य करता है, जो एक प्रकार का आरएनए-निर्भर डीएनए पॉलिमरेज है।

Common mistakes

  • नाइट्रोजनीकृत क्षार और न्यूक्लियोसाइड के बीच अंतर करने में भ्रमित होना।
  • डीएनए प्रतिकृति में चारगाफ के नियमों को गलत लागू करना।
  • डीएनए और आरएनए अनुक्रमों के बीच अंतर (जैसे T बनाम U) को अनदेखा करना।
  • कोडिंग स्ट्रैंड और टेम्पलेट स्ट्रैंड के बीच संबंध को गलत समझना।

Revision tips

  • डीएनए और आरएनए के बीच मुख्य अंतरों को याद करें, विशेष रूप से क्षार युग्मन में।
  • चारगाफ के नियमों का उपयोग करके विभिन्न प्रतिशत गणनाओं का अभ्यास करें।
  • डीएनए प्रतिकृति के अर्ध-संरक्षी मॉडल को समझाने वाले चित्र का अध्ययन करें।
  • विभिन्न आरएनए पोलीमरेज़ के कार्यों को सारणीबद्ध करें।

Practice MCQs

Q1. निम्नलिखित में से कौन एक नाइट्रोजनीकृत क्षार है?

Q2. यदि एक द्विरज्जुक डीएनए में 20% साइटोसीन है, तो एडेनिन का प्रतिशत क्या होगा?

Q3. डीएनए के एक रज्जुक का अनुक्रम 5'—ATGC—3' है, तो इसके पूरक रज्जुक का अनुक्रम 5' → 3' दिशा में क्या होगा?

Q4. डीएनए प्रतिकृति के अर्ध-संरक्षी मॉडल का क्या अर्थ है?

Q5. आरएनए पॉलिमरेज I का मुख्य कार्य क्या है?

Frequently asked questions

वंशागति के आण्विक आधार अध्याय में मुख्य रूप से किन विषयों को शामिल किया गया है?

इस अध्याय में मुख्य रूप से डीएनए की संरचना, डीएनए प्रतिकृति की प्रक्रिया, अनुलेखन (ट्रांसक्रिप्शन) और विभिन्न प्रकार के आरएनए (एमआरएनए, टीआरएनए, आरआरएनए) के निर्माण को शामिल किया गया है।

चारगाफ का नियम क्या है और यह डीएनए विश्लेषण में कैसे उपयोगी है?

चारगाफ के नियम के अनुसार, डीएनए में एडेनिन (A) की मात्रा थाइमिन (T) के बराबर होती है, और ग्वानिन (G) की मात्रा साइटोसीन (C) के बराबर होती है (A=T, G=C)। यह नियम डीएनए में अज्ञात क्षार की मात्रा की गणना करने में मदद करता है।

डीएनए प्रतिकृति का 'अर्ध-संरक्षी' (semi-conservative) मॉडल क्यों महत्वपूर्ण है?

यह मॉडल बताता है कि डीएनए प्रतिकृति के बाद बनने वाले प्रत्येक नए डीएनए अणु में एक मूल (पैतृक) स्ट्रैंड और एक नया संश्लेषित स्ट्रैंड होता है। यह आनुवंशिक जानकारी की सटीकता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।

डीएनए और आरएनए के बीच मुख्य अंतर क्या हैं?

डीएनए में डीऑक्सीराइबोस शर्करा होती है जबकि आरएनए में राइबोस शर्करा होती है। डीएनए में थाइमिन (T) क्षार होता है, जबकि आरएनए में यूरेसिल (U) होता है। डीएनए आमतौर पर द्विरज्जुक होता है, जबकि आरएनए एकल रज्जुक होता है।

इन NCERT समाधानों का उपयोग परीक्षा की तैयारी के लिए कैसे किया जा सकता है?

ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को स्पष्ट और विस्तृत तरीके से समझाते हैं, जिससे छात्रों को अवधारणाओं को गहराई से समझने में मदद मिलती है। अभ्यास प्रश्नों को हल करने से परीक्षा में पूछे जाने वाले विभिन्न प्रकार के प्रश्नों के लिए तैयारी मजबूत होती है।

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