कक्षा 12 जीव विज्ञान NCERT समाधान: वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत
यह पृष्ठ कक्षा 12 जीव विज्ञान के अध्याय 5, 'वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। यह अध्याय ग्रेगर मेंडल के आनुवंशिकता के मौलिक सिद्धांतों की पड़ताल करता है, जिसमें प्रभाविता, पृथक्करण और स्वतंत्र अपव्यूहन के नियम शामिल हैं। समाधानों में एकसंकर और द्विसंकर क्रॉस, समयुग्मजी और विषमयुग्मजी अवस्थाओं के बीच अंतर, और युग्मक निर्माण की संभावनाओं पर चर्चा की गई है। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर स्पष्टीकरण और उदाहरणों के साथ दिया गया है, जिससे छात्रों को आनुवंशिकी की जटिलताओं को समझने में मदद मिलती है। ये समाधान परीक्षा की तैयारी और अवधारणाओं की गहरी समझ के लिए एक मूल्यवान संसाधन हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | जीव विज्ञान |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 5. वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत |
Chapter summary
कक्षा 12 जीव विज्ञान के लिए 'वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत' पर केंद्रित यह NCERT समाधान, आनुवंशिकी की मूल बातें स्पष्ट करता है। इसमें मेंडल के प्रयोगों, प्रभाविता, अप्रभाविता, समयुग्मजी/विषमयुग्मजी अवस्थाओं और एकसंकर/द्विसंकर क्रॉस का विस्तृत विश्लेषण शामिल है। समाधान छात्रों को युग्मक निर्माण और विभिन्न आनुवंशिक अनुपातों की गणना करने में सहायता करते हैं।
Learning outcomes
- मेंडल द्वारा मटर के पौधे चुनने के लाभों को समझना।
- प्रभाविता और अप्रभाविता के बीच अंतर स्पष्ट करना।
- समयुग्मजी और विषमयुग्मजी जीनोटाइप की पहचान करना।
- एकसंकर और द्विसंकर क्रॉस के बीच भेद करना।
- विषमयुग्मजी जीनोटाइप से बनने वाले संभावित युग्मकों की संख्या की गणना करना।
- एकसंकर क्रॉस का उपयोग करके प्रभाविता नियम की व्याख्या करना।
Topics covered
Paper topics
- मेंडल के प्रयोग
- मटर के पौधे चुनने के लाभ
- प्रभाविता का नियम
- अप्रभाविता
- समयुग्मजी और विषमयुग्मजी
- एकसंकर क्रॉस
- द्विसंकर क्रॉस
- युग्मक निर्माण
- फीनोटाइपिक अनुपात
- जीनोटाइपिक अनुपात
Important topics
- मेंडल के आनुवंशिकता के नियम
- एकसंकर क्रॉस का विश्लेषण
- द्विसंकर क्रॉस का विश्लेषण
- प्रभाविता और अप्रभाविता की अवधारणा
- समयुग्मजी बनाम विषमयुग्मजी जीनोटाइप
- F1 और F2 पीढ़ियों के अनुपात
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
- वार्षिक प्रकृति: मटर का पौधा एक वर्षीय होता है, जिससे इसे पूरे वर्ष उगाया जा सकता है और इसकी कई पीढ़ियों का अध्ययन कम समय में संभव हो पाता है।
- पुष्प संरचना: इसके पुष्प उभयलिंगी होते हैं और इनकी संरचना ऐसी होती है कि प्राकृतिक रूप से स्वपरागण होता है, लेकिन कृत्रिम परपरागण भी आसानी से कराया जा सकता है।
- शुद्ध लक्षण: समयुग्मजी (homozygous) पौधों में लक्षण पीढ़ी-दर-पीढ़ी शुद्ध बने रहते हैं, जिससे परिणामों का विश्लेषण सरल हो जाता है।
- संकर पौधों की जनन क्षमता: कृत्रिम परपरागण से उत्पन्न संकर (hybrid) पौधे भी पूर्णतः जननक्षम (fertile) होते हैं, जिससे अगली पीढ़ियों का अध्ययन जारी रखा जा सकता है।
- विपर्यासी लक्षणों की उपस्थिति: मटर के पौधे में कई ऐसे लक्षण थे जिनके स्पष्ट वैकल्पिक रूप (जैसे फूल का रंग - बैंगनी या सफेद; पौधे की लम्बाई - लम्बा या बौना) उपस्थित थे, जो आनुवंशिक विश्लेषण के लिए उपयुक्त थे।
प्रश्न 2
- प्रभाविता और अप्रभाविता
- समयुग्मजी और विषमयुग्मजी
- एकसंकर और द्विसंकर।
(क) प्रभाविता और अप्रभाविता (Dominance & Recessiveness)
प्रभाविता: वह लक्षण (या ऐलील) जो विषमयुग्मजी (heterozygous) अवस्था में स्वयं को अभिव्यक्त कर पाता है, प्रभावी (dominant) कहलाता है। यह घटना प्रभाविता कहलाती है। इसका कारण यह है कि प्रभावी ऐलील एक पूर्णतः कार्यशील एन्जाइम का उत्पादन करता है।
अप्रभाविता: वह लक्षण (या ऐलील) जो विषमयुग्मजी अवस्था में अभिव्यक्त नहीं हो पाता, अप्रभावी (recessive) कहलाता है। यह घटना अप्रभाविता कहलाती है। इसका कारण यह है कि अप्रभावी ऐलील में उत्परिवर्तन के कारण या तो अकार्यशील एन्जाइम बनता है या एन्जाइम बनता ही नहीं है।
(ख) समयुग्मजी और विषमयुग्मजी (Homozygous and Heterozygous)
समयुग्मजी: जब किसी लक्षण के लिए किसी जीव के जीनोटाइप में कारकों (जीन्स) के दोनों युग्मविकल्पी (alleles) समान होते हैं (जैसे TT या tt), तो वह जीव उस लक्षण के लिए समयुग्मजी कहलाता है। ऐसे जीव शुद्ध (pure) माने जाते हैं और केवल एक ही प्रकार के युग्मक उत्पन्न करते हैं।
विषमयुग्मजी: जब किसी लक्षण के लिए जीनोटाइप में कारकों (जीन्स) के दोनों युग्मविकल्पी विपरीत प्रभाव वाले होते हैं (जैसे Tt), तो वह जीव उस लक्षण के लिए विषमयुग्मजी कहलाता है। ऐसे जीव शुद्ध नहीं होते, बल्कि संकर (hybrid) होते हैं और दो प्रकार के युग्मक उत्पन्न कर सकते हैं।
(ग) एकसंकर और द्विसंकर (Monohybrid and Dihybrid)
एकसंकर क्रॉस: जब एक समय में केवल एक ही लक्षण के दो विपरीत रूपों (जैसे लम्बाई - लम्बा और बौना) वाले शुद्ध जनकों के बीच संकरण कराया जाता है, तो इसे एकसंकर क्रॉस कहते हैं। इस क्रॉस में F1 पीढ़ी प्रभावी लक्षण प्रदर्शित करती है, और F2 पीढ़ी में फीनोटाइपिक अनुपात 3:1 (प्रभावी:अप्रभावी) प्राप्त होता है।
द्विसंकर क्रॉस: जब एक समय में दो लक्षणों के विपरीत रूपों (जैसे बीज का आकार - गोल/झुर्रीदार और बीज का रंग - पीला/हरा) वाले शुद्ध जनकों के बीच संकरण कराया जाता है, तो इसे द्विसंकर क्रॉस कहते हैं। F1 पीढ़ी दोनों लक्षणों में प्रभावी रूप प्रदर्शित करती है, और F2 पीढ़ी में फीनोटाइपिक अनुपात 9:3:3:1 प्राप्त होता है।
प्रश्न 3
यदि कोई द्विगुणित जीव (diploid organism) 6 विभिन्न स्थलों (loci) के लिए विषमयुग्मजी (heterozygous) है, तो प्रत्येक स्थल पर दो भिन्न युग्मविकल्पी (alleles) होंगे। उदाहरण के लिए, यदि 6 स्थल A, B, C, D, E, F हैं, तो जीनोटाइप Aa Bb Cc Dd Ee Ff होगा।
प्रत्येक विषमयुग्मजी स्थल से दो प्रकार के युग्मक (alleles) बन सकते हैं। चूँकि 6 स्थल विषमयुग्मजी हैं, तो युग्मकों के संयोजन की कुल संख्या \(2^n\) होगी, जहाँ \(n\) विषमयुग्मजी स्थलों की संख्या है।
इस स्थिति में, \(n = 6\)।
अतः, संभव युग्मकों की संख्या = \(2^6 = 2 \times 2 \times 2 \times 2 \times 2 \times 2 = 64\)।
इसलिए, 64 विभिन्न प्रकार के युग्मकों का उत्पादन संभव है।
प्रश्न 4
मेण्डल का प्रभाविता का नियम (Law of Dominance) बताता है कि जब दो विषमयुग्मजी (heterozygous) जनक, जो एक लक्षण के दो वैकल्पिक रूपों (alleles) को धारण करते हैं, के बीच संकरण कराया जाता है, तो F1 पीढ़ी में केवल एक ही लक्षण (प्रभावी लक्षण) प्रकट होता है।
इस नियम की व्याख्या एकसंकर क्रॉस (Monohybrid Cross) के माध्यम से की जा सकती है, जिसमें एक समय में केवल एक लक्षण का अध्ययन किया जाता है।
उदाहरण: मटर के पौधे की लम्बाई का अध्ययन
- जनक पीढ़ी (P): मेण्डल ने शुद्ध लम्बे (Pure Tall) पौधे (जीनोटाइप TT) और शुद्ध बौने (Pure Dwarf) पौधे (जीनोटाइप tt) का चयन किया।
- युग्मक निर्माण: शुद्ध लम्बे पौधे केवल 'T' युग्मक बनाते हैं, और शुद्ध बौने पौधे केवल 't' युग्मक बनाते हैं।
- F1 पीढ़ी (प्रथम सन्तानीय पीढ़ी): जब शुद्ध लम्बे और शुद्ध बौने पौधों के बीच संकरण कराया गया, तो सभी पौधे लम्बे (Hybrid Tall) प्राप्त हुए (जीनोटाइप Tt)। यहाँ 'T' (लम्बाई का कारक) 't' (बौनेपन का कारक) पर प्रभावी है, इसलिए लम्बापन लक्षण प्रकट हुआ और बौनापन अप्रभावी रहा।
- F1 पीढ़ी का स्वपरागण: F1 पीढ़ी के लम्बे पौधों (Tt) के बीच स्वपरागण (self-pollination) कराया गया।
- F2 पीढ़ी (द्वितीय सन्तानीय पीढ़ी): स्वपरागण से F2 पीढ़ी में तीन प्रकार के जीनोटाइप प्राप्त हुए:
- TT (शुद्ध लम्बा): 1
- Tt (संकर लम्बा): 2
- tt (शुद्ध बौना): 1
इस प्रकार, F2 पीढ़ी में फीनोटाइप (लक्षण प्ररूप) का अनुपात 3 लम्बे पौधे : 1 बौना पौधा प्राप्त हुआ।
यह परिणाम दर्शाता है कि F1 पीढ़ी में अप्रभावी लक्षण (बौनापन) लुप्त नहीं हुआ था, बल्कि वह विषमयुग्मजी अवस्था में छिपा रहा और F2 पीढ़ी में पुनः प्रकट हुआ, जो पृथक्करण के नियम का भी समर्थन करता है। प्रभाविता नियम के अनुसार, F1 पीढ़ी में केवल प्रभावी लक्षण (लम्बापन) ही अभिव्यक्त हुआ।
Common mistakes
- प्रभावी और अप्रभावी लक्षणों के बीच भ्रमित होना।
- समयुग्मजी और विषमयुग्मजी अवस्थाओं के जीनोटाइप को गलत समझना।
- एकसंकर और द्विसंकर क्रॉस के फीनोटाइपिक अनुपातों को याद रखने में कठिनाई।
- युग्मक निर्माण की गणना में त्रुटियाँ करना।
Revision tips
- मेंडल के प्रयोगों और उनके द्वारा चुने गए पौधों के लाभों को याद करें।
- प्रभाविता, अप्रभाविता, समयुग्मजी और विषमयुग्मजी शब्दों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें।
- एकसंकर और द्विसंकर क्रॉस के लिए पुनेट स्क्वायर का अभ्यास करें।
- विभिन्न जीनोटाइप से उत्पन्न होने वाले युग्मकों की संख्या की गणना का अभ्यास करें।
Practice MCQs
Q1. मेंडल ने अपने आनुवंशिकता के प्रयोगों के लिए मटर के पौधे क्यों चुने?
Explanation: मेंडल ने मटर के पौधे इसलिए चुने क्योंकि वे वार्षिक थे, उनमें स्वपरागण और परपरागण आसानी से संभव था, और उनमें कई स्पष्ट वैकल्पिक लक्षण थे, जिससे आनुवंशिकता के नियमों का अध्ययन सुगम हो गया।
Q2. विषमयुग्मजी अवस्था में जो लक्षण अभिव्यक्त होता है, उसे क्या कहते हैं?
Explanation: प्रभाविता के नियम के अनुसार, विषमयुग्मजी अवस्था में जो ऐलील या लक्षण स्वयं को अभिव्यक्त करता है, उसे प्रभावी लक्षण कहा जाता है।
Q3. एक पौधे का जीनोटाइप 'Tt' है। यह किस प्रकार का जीनोटाइप है?
Explanation: जब किसी लक्षण के लिए जीन्स के दोनों युग्मविकल्पी (alleles) विपरीत होते हैं (जैसे T और t), तो उसे विषमयुग्मजी (heterozygous) कहा जाता है।
Q4. एकसंकर क्रॉस में F2 पीढ़ी का फीनोटाइपिक अनुपात क्या होता है?
Explanation: एकसंकर क्रॉस में, F2 पीढ़ी में प्रभावी और अप्रभावी लक्षणों का फीनोटाइपिक अनुपात 3:1 प्राप्त होता है।
Q5. द्विसंकर क्रॉस में F2 पीढ़ी का फीनोटाइपिक अनुपात क्या होता है?
Explanation: द्विसंकर क्रॉस में, F2 पीढ़ी में दो लक्षणों के संयुक्त प्रभाव का फीनोटाइपिक अनुपात 9:3:3:1 प्राप्त होता है।
Frequently asked questions
कक्षा 12 जीव विज्ञान के लिए 'वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत' अध्याय में कौन से मुख्य सिद्धांत शामिल हैं?
इस अध्याय में ग्रेगर मेंडल द्वारा प्रतिपादित आनुवंशिकता के मौलिक सिद्धांत शामिल हैं, जैसे प्रभाविता का नियम, युग्मकों की शुद्धता का नियम (पृथक्करण का नियम), और स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम। यह एकसंकर और द्विसंकर क्रॉस, जीनोटाइप, फीनोटाइप, समयुग्मजी और विषमयुग्मजी जैसी अवधारणाओं को भी स्पष्ट करता है।
मेंडल ने अपने प्रयोगों के लिए मटर के पौधे क्यों चुने?
मेंडल ने मटर के पौधे इसलिए चुने क्योंकि वे वार्षिक थे, जिससे कई पीढ़ियों का अध्ययन संभव था। उनके पुष्प उभयलिंगी थे और स्वपरागण व परपरागण आसानी से कराया जा सकता था। साथ ही, मटर में कई स्पष्ट वैकल्पिक लक्षण (जैसे लम्बाई, फूल का रंग) मौजूद थे।
एकसंकर क्रॉस और द्विसंकर क्रॉस में क्या अंतर है?
एकसंकर क्रॉस में एक समय में केवल एक लक्षण के वैकल्पिक रूपों का अध्ययन किया जाता है, जबकि द्विसंकर क्रॉस में एक साथ दो लक्षणों के वैकल्पिक रूपों का अध्ययन किया जाता है।
समयुग्मजी और विषमयुग्मजी में क्या अंतर है?
समयुग्मजी (Homozygous) वह अवस्था है जब किसी लक्षण के लिए जीन्स के दोनों युग्मविकल्पी समान होते हैं (जैसे TT या tt)। विषमयुग्मजी (Heterozygous) वह अवस्था है जब युग्मविकल्पी विपरीत होते हैं (जैसे Tt)।
ये NCERT समाधान परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करते हैं?
ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के विस्तृत और स्पष्ट उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को अवधारणाओं को गहराई से समझने में मदद मिलती है। अभ्यास प्रश्नों को हल करने से परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के प्रकार का अनुमान लगाने और उत्तर देने की क्षमता विकसित होती है।
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