कक्षा 12 जीव विज्ञान: मानव स्वास्थ्य तथा रोग NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 12 जीव विज्ञान के अध्याय 8, 'मानव स्वास्थ्य तथा रोग' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। इसमें संक्रामक रोगों के विभिन्न प्रकार, उनके संचरण के तरीके, और रोकथाम के उपाय जैसे जन-स्वास्थ्य उपाय, टीकाकरण, और स्वच्छता का महत्व शामिल है। समाधान प्रतिरक्षा प्रणाली की भूमिका, जैसे सहज और उपार्जित प्रतिरक्षा, सक्रिय और निष्क्रिय प्रतिरक्षा, और लसीकाभ अंगों की संरचना पर भी प्रकाश डालते हैं। इसके अतिरिक्त, यह अध्याय डीएनए वैक्सीन, एंटीबॉडीज, और विभिन्न रोगों जैसे अमीबता, मलेरिया, और एड्स के बारे में भी जानकारी प्रदान करता है। ये समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए एक स्पष्ट और व्यापक समझ विकसित करने में मदद करेंगे।

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BoardCBSE
ClassClass 12
Subjectजीव विज्ञान
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter8. मानव स्वास्थ्य तथा रोग

Chapter summary

कक्षा 12 जीव विज्ञान के अध्याय 8 के ये NCERT समाधान मानव स्वास्थ्य और रोगों के महत्वपूर्ण पहलुओं को कवर करते हैं। इसमें संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए जन-स्वास्थ्य उपायों, विभिन्न रोगों के संचरण के तरीकों (जैसे अमीबता, मलेरिया, न्यूमोनिया), और जल-जनित रोगों से बचाव के उपायों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। समाधान प्रतिरक्षा प्रणाली के प्रकारों (सहज, उपार्जित, सक्रिय, निष्क्रिय) और लसीकाभ अंगों की भूमिका की भी व्याख्या करते हैं। यह छात्रों को रोग नियंत्रण और प्रतिरक्षा तंत्र की गहरी समझ प्रदान करता है।

Learning outcomes

  • संक्रामक रोगों के प्रसार को रोकने के लिए जन-स्वास्थ्य उपायों की पहचान करना।
  • विभिन्न संक्रामक रोगों के संचरण के तरीकों को समझना।
  • सहज और उपार्जित प्रतिरक्षा के बीच अंतर स्पष्ट करना।
  • सक्रिय और निष्क्रिय प्रतिरक्षा के बीच भेद करना।
  • लसीकाभ अंगों की भूमिका और महत्व को समझना।
  • डीएनए वैक्सीन की अवधारणा को समझना।

Topics covered

Paper topics

  • मानव स्वास्थ्य और रोग
  • संक्रामक रोग
  • रोगों का संचरण
  • जन-स्वास्थ्य उपाय
  • टीकाकरण
  • प्रतिरक्षा प्रणाली
  • सहज प्रतिरक्षा
  • उपार्जित प्रतिरक्षा
  • सक्रिय प्रतिरक्षा
  • निष्क्रिय प्रतिरक्षा
  • लसीकाभ अंग
  • डीएनए वैक्सीन

Important topics

  • संक्रामक रोगों की रोकथाम के उपाय
  • सहज बनाम उपार्जित प्रतिरक्षा
  • सक्रिय बनाम निष्क्रिय प्रतिरक्षा
  • लसीकाभ अंगों की भूमिका
  • रोगों के संचरण के तरीके

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

संक्रामक रोगों के विरुद्ध रक्षा-उपायों के रूप में आप कौन-से विभिन्न जन-स्वास्थ्य उपायों का सुझाव देंगे?
Solution: संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए निम्नलिखित जन-स्वास्थ्य उपाय सुझाए जा सकते हैं:
  1. टीकाकरण कार्यक्रम: संक्रामक रोगों से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण कार्यक्रमों का आयोजन और उनका पालन सुनिश्चित करना।
  2. जन जागरूकता: रोगों, उनके फैलने के तरीकों और शरीर पर उनके प्रभावों के बारे में आम जनता को शिक्षित करना।
  3. स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन: व्यक्तिगत स्वच्छता, सामुदायिक स्वास्थ्य और अपशिष्ट पदार्थों (जैसे जैविक कचरा) के उचित निपटान पर जोर देना ताकि रोग वाहकों का प्रजनन रोका जा सके और वातावरण स्वच्छ रहे।
  4. खाद्य और जल सुरक्षा: खाद्य पदार्थों के सुरक्षित रख-रखाव और शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना, जिससे जलजनित और खाद्यजनित रोगों से बचा जा सके।
  5. रोग वाहक नियंत्रण: मच्छरों और अन्य रोग वाहकों के प्रजनन स्थलों (जैसे रुके हुए पानी, गंदगी) को समाप्त करना और उनके प्रसार को नियंत्रित करने के उपाय करना।

प्रश्न 2

जैविकी के अध्ययन ने संक्रामक रोगों को नियंत्रित करने में किस प्रकार हमारी सहायता की है?
Solution: जीव विज्ञान के अध्ययन ने संक्रामक रोगों को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है:
  1. टीकाकरण और प्रतिरक्षीकरण: चेचक जैसे घातक रोगों का उन्मूलन और पोलियो, डिप्थीरिया, टिटेनस जैसे रोगों का नियंत्रण टीकाकरण के माध्यम से संभव हुआ है। जैव प्रौद्योगिकी की मदद से नए और सुरक्षित टीके विकसित किए जा रहे हैं।
  2. औषधियों की खोज: एंटीबायोटिक्स और अन्य दवाओं की खोज ने संक्रामक रोगों के उपचार को अधिक प्रभावी बनाया है।
  3. रोगजनकों की समझ: जीव विज्ञान के अध्ययन से रोगजनकों की प्रकृति, जीवन चक्र और संचरण के तरीकों को समझने में मदद मिली है, जिससे रोग चक्र को तोड़कर नियंत्रण संभव हुआ है।
  4. नई तकनीकें: मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज और इंटरफेरॉन जैसे उन्नत उपचारों का विकास भी संक्रामक रोगों के नियंत्रण में सहायक रहा है।

प्रश्न 3

निम्नलिखित रोगों का संचरण कैसे होता है? (क) अमीबता (ख) मलेरिया (ग) ऐस्कैरिसता (घ) न्यूमोनिया।
Solution: विभिन्न रोगों के संचरण के तरीके इस प्रकार हैं:
  • (क) अमीबता (Amoebiasis): यह रोग संदूषित (गंदे) जल और खाद्य पदार्थों के सेवन से फैलता है। एंटअमीबा हिस्टोलिटिका नामक परजीवी इसका कारण है।
  • (ख) मलेरिया (Malaria): मलेरिया रोग का संचरण मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से होता है, जो प्लास्मोडियम परजीवी को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक ले जाती है।
  • (ग) ऐस्कैरिसता (Ascariasis): इस संक्रमण का मुख्य मार्ग मल-मुखीय (faeco-oral) है। ऐस्करिस के अंडे रोगी के मल के साथ मिट्टी में मिल जाते हैं। इन अंडों से दूषित भोजन या पानी का सेवन करने या गंदे हाथों से खाना खाने से संक्रमण होता है।
  • (घ) न्यूमोनिया (Pneumonia): यह एक वायुजनित संक्रमण है जो संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकलने वाली बूंदों (droplet infection) के माध्यम से फैलता है। रोगी द्वारा उपयोग किए गए बर्तनों के साझा करने से भी यह फैल सकता है।

प्रश्न 4

जल वाहित रोगों की रोकथाम के लिए आप क्या उपाय अपनाएँगे?
Solution: जल वाहित रोगों (जैसे टाइफाइड, अमीबता, ऐस्कैरिसता) की रोकथाम के लिए निम्नलिखित उपाय अपनाए जाने चाहिए:
  1. शुद्ध पेयजल का उपयोग: पीने के लिए हमेशा साफ और शुद्ध पानी का ही उपयोग करना चाहिए। पानी को उबालकर या फिल्टर करके पीना सुरक्षित होता है।
  2. मल-मूत्र का उचित निपटान: अपशिष्ट पदार्थों और मल-मूत्र का वैज्ञानिक तरीके से निपटान करना आवश्यक है, क्योंकि ये जल स्रोतों को दूषित कर सकते हैं और रोगों को फैला सकते हैं।
  3. जलाशयों की सफाई: पीने के पानी के स्रोतों जैसे कुओं, तालाबों और जलाशयों की नियमित रूप से सफाई करनी चाहिए।
  4. मक्खी नियंत्रण: मक्खियाँ रोगजनकों को मल से खाद्य पदार्थों तक ले जाकर जल को भी संदूषित कर सकती हैं, इसलिए इनका नियंत्रण भी महत्वपूर्ण है।
  5. टीकाकरण: टाइफाइड और पोलियो जैसे कुछ जल जनित रोगों को टीकाकरण द्वारा प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है।

प्रश्न 5

डी०एन०ए० वैक्सीन के सन्दर्भ में 'उपयुक्त जीन' के अर्थ के बारे में अपने अध्यापक से चर्चा कीजिए।
Solution: डीएनए वैक्सीन एक आधुनिक प्रकार की प्रायोगिक वैक्सीन है। इसमें रोगजनक (जैसे वायरस या बैक्टीरिया) के उस विशिष्ट जीन का उपयोग किया जाता है जो एंटीजन (प्रतिजन) के निर्माण के लिए जिम्मेदार होता है। इस 'उपयुक्त जीन' को एक डीएनए खंड के रूप में मानव शरीर में इंजेक्ट किया जाता है। शरीर की कुछ कोशिकाएं इस डीएनए को ग्रहण कर लेती हैं और जीन को अभिव्यक्त करती हैं, जिससे एंटीजन का उत्पादन होता है। शरीर इन एंटीजन के विरुद्ध एंटीबॉडीज का निर्माण करके प्रतिरक्षा विकसित करता है। इस विधि में मृत या कमजोर रोगाणु को शरीर में प्रवेश कराने की आवश्यकता नहीं होती है।

प्रश्न 6

प्राथमिक और द्वितीयक लसीकाओं के अंगों के नाम बताइए।
Solution: प्रतिरक्षा प्रणाली में लसीकाभ अंग महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन्हें दो श्रेणियों में बांटा गया है:
  • प्राथमिक लसीकाभ अंग: ये वे अंग हैं जहाँ लसीकाणु (लिम्फोसाइट्स) उत्पन्न होते हैं और परिपक्व होते हैं। इनके उदाहरण हैं: अस्थिमज्जा (Bone Marrow) और थाइमस (Thymus)।
  • द्वितीयक लसीकाभ अंग: ये वे अंग हैं जहाँ परिपक्व लसीकाणु रोगजनकों से संपर्क करते हैं और प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया शुरू करते हैं। इनके उदाहरण हैं: प्लीहा (Spleen), लसीका ग्रंथि (Lymph nodes), टॉन्सिल्स (Tonsils), क्षुद्रांत्र के पेयर पैचेस (Peyer's patches of small intestine), और परिशेषिका (Appendix)।

प्रश्न 7

इस अध्याय में निम्नलिखित सुप्रसिद्ध संकेताक्षर इस्तेमाल किए गए हैं। इनका पूरा रूप बताइए— (क) एम०ए०एल०टी०, (ख) सी०एम०आई०, (ग) एड्स, (घ) एन०ए०सी०ओ०, (च) एच०आई०वी०।
Solution: दिए गए संकेताक्षरों के पूर्ण रूप निम्नलिखित हैं:
  • (क) एम०ए०एल०टी० (M.A.L.T.): म्यूकोसल एसोसिएटेड लिम्फॉयड टिशू (Mucosal Associated Lymphoid Tissue) या श्लेष्म सम्बद्ध लसीकाभ ऊतक। यह प्रतिरक्षा प्रणाली का वह हिस्सा है जो श्लेष्म झिल्लियों की रक्षा करता है।
  • (ख) सी०एम०आई० (C.M.I.): सेल मीडिएटेड इम्युनिटी (Cell Mediated Immunity) या कोशिका माध्यित प्रतिरक्षा। यह प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया का वह प्रकार है जिसमें टी-लिम्फोसाइट्स सीधे रोगजनकों से लड़ती हैं।
  • (ग) एड्स (AIDS): एक्वायर्ड इम्यूनो डिफिसियेंसी सिंड्रोम (Acquired Immuno Deficiency Syndrome) या उपार्जित प्रतिरक्षा न्यूनता संलक्षण। यह एचआईवी वायरस के कारण होने वाली एक गंभीर बीमारी है।
  • (घ) एन०ए०सी०ओ० (N.A.C.O.): नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (National AIDS Control Organisation) या राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन। यह भारत में एड्स की रोकथाम और नियंत्रण के लिए जिम्मेदार सरकारी संस्था है।
  • (च) एच०आई०वी० (H.I.V.): ह्यमन इम्यूनो डिफिसियेंसी वायरस (Human Immuno-deficiency Virus) या मानव प्रतिरक्षा न्यूनता विषाणु। यह वायरस एड्स का कारण बनता है।

प्रश्न 8

निम्नलिखित में भेद कीजिए और प्रत्येक के उदाहरण दीजिए— (क) सहज (जन्मजात) और उपार्जित प्रतिरक्षा, (ख) सक्रिय और निष्क्रिय प्रतिरक्षा।
Solution: सहज (जन्मजात) और उपार्जित प्रतिरक्षा के बीच मुख्य अंतर इस प्रकार हैं:

(क) सहज (जन्मजात) प्रतिरक्षा बनाम उपार्जित प्रतिरक्षा

विशेषता सहज (जन्मजात) प्रतिरक्षा (Innate Immunity) उपार्जित प्रतिरक्षा (Acquired Immunity)
प्रकार यह एक अविशिष्ट (non-specific) प्रतिरक्षा है। यह रोग-विशिष्ट (disease-specific) होती है।
उत्पत्ति यह जन्म से ही मौजूद होती है। यह जीवनकाल में प्राप्त की जाती है (विकसित होती है)।
कार्य यह रोगजनकों के शरीर में प्रवेश को रोकने के लिए विभिन्न अवरोध (जैसे शारीरिक, कार्यात्मक, कोशिकीय, साइटोकाइन अवरोध) प्रदान करती है। यह शरीर में प्रवेश कर चुके विशिष्ट रोगजनकों को पहचान कर उनका सामना करती है।
उदाहरण त्वचा, श्लेष्मा झिल्ली, श्वेत रक्त कोशिकाएं (जैसे मैक्रोफेज), सूजन। एंटीबॉडीज का उत्पादन, टी-कोशिकाएं।

(ख) सक्रिय प्रतिरक्षा बनाम निष्क्रिय प्रतिरक्षा

विशेषता सक्रिय प्रतिरक्षा (Active Immunity) निष्क्रिय प्रतिरक्षा (Passive Immunity)
उत्पत्ति जब शरीर स्वयं रोगजनकों के संपर्क में आने पर या टीके के माध्यम से एंटीबॉडीज का उत्पादन करता है। जब शरीर को सीधे तैयार एंटीबॉडीज प्रदान की जाती हैं (जैसे मां से शिशु को या इंजेक्शन द्वारा)।
गति यह धीरे-धीरे विकसित होती है। यह तुरंत प्रभावी होती है।
अवधि यह आमतौर पर लंबे समय तक बनी रहती है। यह थोड़े समय के लिए ही प्रभावी रहती है।
उदाहरण किसी संक्रमण से ठीक होने के बाद विकसित प्रतिरक्षा, टीकाकरण। नवजात शिशु को मां के दूध (कोलोस्ट्रम) से मिलने वाली एंटीबॉडीज, एंटी-टिटेनस सीरम इंजेक्शन।

Common mistakes

  • जन-स्वास्थ्य उपायों और व्यक्तिगत स्वच्छता के बीच संबंध को न समझना।
  • विभिन्न रोगों के संचरण के तरीकों को गलत बताना।
  • सहज और उपार्जित प्रतिरक्षा के बीच के अंतर को भ्रमित करना।
  • सक्रिय और निष्क्रिय प्रतिरक्षा के उदाहरणों को गलत वर्गीकृत करना।

Revision tips

  • प्रत्येक रोग के संचरण के तरीके को एक तालिका में सूचीबद्ध करें।
  • सहज और उपार्जित प्रतिरक्षा के बीच मुख्य अंतरों को याद करें।
  • लसीकाभ अंगों के कार्यों को समझें और उन्हें वर्गीकृत करें।
  • टीकाकरण और प्रतिरक्षा के महत्व पर ध्यान केंद्रित करें।

Practice MCQs

Q1. निम्नलिखित में से कौन सा जन-स्वास्थ्य उपाय संक्रामक रोगों की रोकथाम में मदद करता है?

Q2. मलेरिया रोग का संचरण किस प्रकार होता है?

Q3. निम्नलिखित में से कौन सा एक प्राथमिक लसीकाभ अंग है?

Q4. सेल मीडिएटेड इम्युनिटी (CMI) का क्या अर्थ है?

Q5. डीएनए वैक्सीन में किस प्रकार के जीन का उपयोग किया जाता है?

Frequently asked questions

मानव स्वास्थ्य तथा रोग अध्याय में कौन से मुख्य संक्रामक रोग शामिल हैं?

इस अध्याय में अमीबता, मलेरिया, ऐस्कैरिसता और न्यूमोनिया जैसे रोगों के संचरण के तरीकों और रोकथाम पर चर्चा की गई है।

जन-स्वास्थ्य उपाय क्या हैं और वे रोगों को कैसे रोकते हैं?

जन-स्वास्थ्य उपाय जैसे टीकाकरण, स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता, अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छता बनाए रखना संक्रामक रोगों को फैलने से रोकते हैं।

सहज प्रतिरक्षा और उपार्जित प्रतिरक्षा में क्या अंतर है?

सहज प्रतिरक्षा जन्मजात होती है और अविशिष्ट होती है, जबकि उपार्जित प्रतिरक्षा जीवनकाल में विकसित होती है और रोग-विशिष्ट होती है।

सक्रिय और निष्क्रिय प्रतिरक्षा के बीच मुख्य अंतर क्या है?

सक्रिय प्रतिरक्षा में शरीर स्वयं एंटीबॉडी बनाता है, जबकि निष्क्रिय प्रतिरक्षा में तैयार एंटीबॉडी बाहर से प्रदान की जाती हैं।

डीएनए वैक्सीन कैसे काम करती है?

डीएनए वैक्सीन में रोगजनक का एक जीन होता है जो एंटीजन बनाता है, जिससे शरीर में प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया उत्पन्न होती है, बिना मृत या कमजोर रोगाणु के।

लसीकाभ अंग क्या हैं और वे प्रतिरक्षा में कैसे योगदान करते हैं?

लसीकाभ अंग (जैसे अस्थिमज्जा, थाइमस, प्लीहा) वे स्थान हैं जहाँ लसीकाणु उत्पन्न और परिपक्व होते हैं, जो प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण हैं।

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