कक्षा 12 जीव विज्ञान: खाद्य उत्पादन में वृद्धि की कार्यनीति NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 12 जीव विज्ञान के अध्याय 9, "खाद्य उत्पादन में वृद्धि की कार्यनीति" के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। यह अध्याय खाद्य उत्पादन को बढ़ाने के लिए विभिन्न रणनीतियों पर केंद्रित है, जिसमें पशुपालन, डेयरी फार्म प्रबंधन, पशु प्रजनन, मधुमक्खी पालन (एपीकल्चर), मत्स्य पालन (मत्स्यकी) और पादप प्रजनन की महत्वपूर्ण भूमिका शामिल है। समाधानों में पशुधन प्रबंधन, नस्ल सुधार, दुग्ध उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा में वृद्धि, शहद और मोम उत्पादन, मत्स्य पालन तकनीकों और फसल सुधार के लिए पादप प्रजनन के चरणों जैसे विषयों को शामिल किया गया है। ये समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए इन महत्वपूर्ण अवधारणाओं को समझने और याद रखने में मदद करते हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 12
Subjectजीव विज्ञान
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter9. खाद्य उत्पादन में वृद्धि की कार्यनीति

Chapter summary

कक्षा 12 जीव विज्ञान के अध्याय 9, "खाद्य उत्पादन में वृद्धि की कार्यनीति" के लिए NCERT समाधान, खाद्य उत्पादन बढ़ाने की रणनीतियों पर केंद्रित हैं। इसमें पशुपालन के महत्व, डेयरी फार्म प्रबंधन, पशु प्रजनन के उद्देश्य और विधियाँ, मधुमक्खी पालन से लाभ, मत्स्य पालन की भूमिका और पादप प्रजनन के विभिन्न चरण शामिल हैं। ये समाधान छात्रों को खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक वैज्ञानिक दृष्टिकोणों की गहन समझ प्रदान करते हैं।

Learning outcomes

  • पशुपालन की भूमिका और मानव कल्याण में इसके योगदान को समझना।
  • डेयरी फार्म प्रबंधन के माध्यम से दुग्ध उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा में सुधार के उपायों का विश्लेषण करना।
  • पशु प्रजनन के उद्देश्यों और विभिन्न विधियों की पहचान करना।
  • मधुमक्खी पालन (एपीकल्चर) के महत्व और लाभों की व्याख्या करना।
  • खाद्य उत्पादन बढ़ाने में मत्स्य पालन (मत्स्यकी) की भूमिका का वर्णन करना।
  • पादप प्रजनन के विभिन्न चरणों और उनके महत्व को समझना।

Topics covered

Paper topics

  • पशुपालन की भूमिका
  • डेयरी फार्म प्रबंधन
  • पशु प्रजनन
  • नस्ल सुधार
  • मधुमक्खी पालन (एपीकल्चर)
  • शहद और मोम उत्पादन
  • मत्स्य पालन (मत्स्यकी)
  • नीली क्रांति
  • पादप प्रजनन
  • जननद्रव्य संग्रहण
  • संकरण
  • खाद्य उत्पादन में वृद्धि की कार्यनीति

Important topics

  • पशुपालन और मानव कल्याण
  • डेयरी फार्म प्रबंधन और दुग्ध उत्पादन
  • पशु प्रजनन की विधियाँ और उद्देश्य
  • मधुमक्खी पालन के लाभ
  • मत्स्य पालन और नीली क्रांति
  • पादप प्रजनन के चरण

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

मानव कल्याण में पशुपालन की भूमिका की संक्षेप में व्याख्या कीजिए।
Solution: मानव कल्याण में पशुपालन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह न केवल बढ़ती हुई जनसंख्या की खाद्य (जैसे दूध, मांस, अंडे) आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक है, बल्कि यह करोड़ों लोगों के लिए आय और रोजगार का एक प्रमुख स्रोत भी है। पशुपालन से प्राप्त उत्पाद, जैसे दूध, कुपोषण को दूर करने में मदद करते हैं और उच्च गुणवत्ता वाली प्रोटीन, खनिज और विटामिन प्रदान करते हैं। डेयरी उद्योग, कुक्कुट पालन, और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्र सीधे तौर पर पशुपालन से जुड़े हैं और आर्थिक विकास में योगदान करते हैं। इसके अतिरिक्त, मधुमक्खी पालन से प्राप्त शहद और मोम का औषधीय और औद्योगिक महत्व है। पशुपालन किसानों की अतिरिक्त आय सुनिश्चित करता है और कृषि को अधिक टिकाऊ बनाने में मदद करता है।

प्रश्न 2

यदि आपके परिवार के पास एक डेरी फार्म है, तब आप दुग्घ उत्पादन में उसकी गुणवत्ता तथा मात्रा में सुधार लाने के लिए कौन-कौन से उपाय करेंगे?
Solution: यदि मेरे परिवार के पास एक डेरी फार्म होता, तो दुग्ध उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा में सुधार लाने के लिए मैं निम्नलिखित उपाय करता:
  1. नस्ल सुधार: क्षेत्र की जलवायु और परिस्थितियों के अनुकूल, उच्च दुग्ध उत्पादन क्षमता और अच्छी रोग प्रतिरोधक क्षमता वाली नस्लों का चयन करता।
  2. पशुओं की देखभाल: पशुओं के लिए स्वच्छ, हवादार और आरामदायक आवास की व्यवस्था करता। उन्हें पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ जल उपलब्ध कराता।
  3. पोषण प्रबंधन: पशुओं को उनकी आवश्यकतानुसार उच्च गुणवत्ता वाले चारे और संतुलित आहार प्रदान करता, जिसमें आवश्यक पोषक तत्व शामिल हों।
  4. स्वास्थ्य प्रबंधन: पशुओं के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के लिए पशु चिकित्सक की सलाह लेता और टीकाकरण व अन्य निवारक उपायों को अपनाता। किसी भी बीमारी के फैलने से रोकने के लिए तत्काल कदम उठाता।
  5. स्वच्छता: दुहने की प्रक्रिया, दूध के भंडारण और परिवहन के दौरान अत्यधिक स्वच्छता बनाए रखता ताकि दूध संदूषित न हो।
  6. रिकॉर्ड रखना: प्रत्येक पशु के उत्पादन, स्वास्थ्य और आहार का विस्तृत रिकॉर्ड रखता ताकि समस्याओं की पहचान और समाधान शीघ्रता से किया जा सके।
इन उपायों से दुग्ध उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में सुधार होगा।

प्रश्न 3

'नस्ल' शब्द से आप क्या समझते हैं? पशु प्रजनन के क्या उद्देश्य हैं?
Solution:

नस्ल (Breed): नस्ल पशुओं के एक ऐसे समूह को कहते हैं जो सामान्य लक्षणों जैसे कि समान कद-काठी, आकृति, आकार, शारीरिक संरचना आदि में एक जैसे होते हैं। ये पशु समान पूर्वजों से उत्पन्न होते हैं और एक-दूसरे से संबंधित होते हैं।

पशु प्रजनन के उद्देश्य (Objectives of Animal Breeding): पशु प्रजनन का मुख्य उद्देश्य पशुओं की उत्पादकता को बढ़ाना और उनके उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार करना है। इसके प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

उत्पादन में वृद्धि: दुग्ध उत्पादन, मांस उत्पादन, अंडे उत्पादन आदि में वृद्धि करना।

गुणवत्ता में सुधार: उत्पादों की गुणवत्ता को बेहतर बनाना, जैसे कम वसा वाला मांस या अधिक पौष्टिक दूध का उत्पादन।

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना: पशुओं में विभिन्न रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित करना ताकि वे स्वस्थ रहें और उत्पादन प्रभावित न हो।

अनुकूलन क्षमता बढ़ाना: पशुओं को विभिन्न पर्यावरणीय परिस्थितियों, जैसे जलवायु या चारा उपलब्धता के प्रति अधिक अनुकूल बनाना।

प्रजनन क्षमता बढ़ाना: पशुओं की प्रजनन क्षमता में सुधार करना।

प्रश्न 4

पशु प्रजनन के लिए प्रयोग में लायी जाने वाली विधियों के नाम बताएँ। आपके अनुसार कौन-सी विधि सर्वोत्तम है और क्यों?
Solution:

पशु प्रजनन के लिए मुख्य रूप से दो विधियाँ प्रयोग में लायी जाती हैं:

अन्त:प्रजनन (Inbreeding): यह एक ही नस्ल के श्रेष्ठ पशुओं के बीच कराई जाने वाली प्रजनन विधि है। यह समरूपता (homozygosity) को बढ़ाती है और अवांछित जीनों को समाप्त करने में मदद करती है।

बहि:प्रजनन (Outbreeding): यह विधि एक ही नस्ल के, लेकिन असंबंधित पशुओं के बीच या विभिन्न नस्लों के बीच कराई जाती है। इसके अंतर्गत बहि:संकरण (Out-crossing), संकरण (Cross-breeding) और अन्त:प्रजाति संकरण (Interspecific hybridization) आते हैं।

मेरे अनुसार,संकरण (Hybridization) विधि सर्वोत्तम है, विशेषकर जब दो विभिन्न नस्लों के वांछनीय गुणों को एक साथ लाना हो। संकरण द्वारा दो भिन्न नस्लों के श्रेष्ठ गुणों को मिलाकर एक नई, अधिक उपयोगी और श्रेष्ठ नस्ल विकसित की जा सकती है। उदाहरण के लिए, हिसारडेल नस्ल की भेड़ का विकास बीकानेरी भेड़ (मादा) और मैरीनो रेम्स (नर) से किया गया है, जो ऊन उत्पादन में श्रेष्ठ है। संकरण से 'संकर ओज' (Heterosis) का लाभ भी मिलता है, जिससे संतति अपने जनकों से अधिक उत्पादक और सुदृढ़ होती है।

प्रश्न 5

मधुमक्खी पालन से आप क्या समझते हैं? हमारे जीवन में इसका क्या महत्त्व है?
Solution:

मधुमक्खी पालन (Bee Keeping): मधुमक्खी पालन, जिसे एपीकल्चर या मौनपालन भी कहते हैं, व्यावसायिक स्तर पर शहद और मोम के उत्पादन के लिए मधुमक्खियों के छत्तों का प्रबंधन और रखरखाव करने की प्रक्रिया है। यह व्यवसाय उन क्षेत्रों में सफलतापूर्वक किया जा सकता है जहाँ जंगली झाड़ियाँ, फूलों के बगीचे और कृषि योग्य भूमि या चरागाह उपलब्ध हों।

जीवन में महत्व:

शहद उत्पादन: मधुमक्खियों से प्राप्त शहद एक पौष्टिक आहार है जिसका उपयोग आयुर्वेदिक औषधियों में भी किया जाता है।

मोम उत्पादन: मधुमक्खियों से प्राप्त मोम का उपयोग कांतिवर्धक वस्तुओं (cosmetics) और पॉलिश उद्योगों में होता है।

परागण: मधुमक्खियाँ फसलों और फलों के बगीचों में परागण क्रिया को बढ़ाकर उनकी उपज में वृद्धि करती हैं, जिससे फसल और शहद दोनों का उत्पादन बेहतर होता है।

रोजगार और आय: यह एक कुटीर उद्योग है जो ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के लिए आय का एक अतिरिक्त स्रोत प्रदान करता है।

प्रश्न 6

खाद्य उत्पादन को बढ़ाने में मित्स्यकी की भूमिका की विवेचना कीजिए।
Solution:

मित्स्यकी की भूमिका (Role of Fishery): मित्स्यकी, जिसे मत्स्य पालन भी कहते हैं, मछली और अन्य जलीय जीवों को पकड़ने, उनका प्रसंस्करण करने और उन्हें बेचने से संबंधित उद्योग है। खाद्य उत्पादन को बढ़ाने में इसकी भूमिका महत्वपूर्ण है क्योंकि:

  1. प्रोटीन का स्रोत: मछलियाँ उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन का एक सस्ता और सुलभ स्रोत हैं, जो बड़ी आबादी के आहार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
  2. आर्थिक महत्व: भारत जैसे देशों में, जहाँ लंबी तटरेखा है, मत्स्यकी लाखों लोगों के लिए आय और रोजगार का एक प्रमुख साधन है। यह अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देती है।
  3. विविध जलीय जीव: मछलियों के अलावा, झींगा (prawn), केकड़ा (crabs), लॉब्स्टर (lobster), और ऑयस्टर (oyster) जैसे समुद्री और अलवणीय जलीय जीव भी महत्वपूर्ण खाद्य संसाधन हैं।
  4. नीली क्रांति: 'नीली क्रांति' (Blue Revolution) का उद्देश्य मछली उत्पादन को बढ़ाना है, जिसके अंतर्गत अलवणीय और लवणीय दोनों प्रकार के जलीय जीवों के उत्पादन में वृद्धि की जा रही है।
बढ़ती माँग को पूरा करने के लिए मत्स्यकी तकनीकों में सुधार और विस्तार आवश्यक है।

प्रश्न 7

पादप प्रजनन में भाग लेने वाले विभिन्न चरणों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
Solution:

पादप प्रजनन एक व्यवस्थित प्रक्रिया है जिसका उद्देश्य फसल की नई और बेहतर आनुवंशिक नस्लें विकसित करना है। इसमें निम्नलिखित मुख्य चरण शामिल हैं:

  1. परिवर्तनशीलता का संग्रहण (Collection of Variability): किसी भी प्रजनन कार्यक्रम की शुरुआत आनुवंशिक विविधता के संग्रहण से होती है। इसमें फसल की मौजूदा किस्मों और उनकी जंगली प्रजातियों से प्राप्त जननद्रव्य (germplasm) का एक बड़ा संग्रह तैयार किया जाता है। यह विविधता प्रजनन के लिए आवश्यक कच्चा माल प्रदान करती है।
  2. जनकों का मूल्यांकन तथा चयन (Evaluation and Selection of Parents): एकत्रित जननद्रव्य का मूल्यांकन किया जाता है ताकि उन पादपों को पहचाना जा सके जिनमें वांछनीय लक्षण (जैसे उच्च उपज, रोग प्रतिरोधक क्षमता, बेहतर पोषण गुणवत्ता) मौजूद हों। इन चयनित पादपों को 'जनक' कहा जाता है और इन्हें आगे की प्रजनन प्रक्रिया के लिए चुना जाता है।
  3. चयनित जनकों के मध्य संकरण (Cross Hybridization among the Selected Parents): जब दो जनकों में अलग-अलग वांछनीय लक्षण होते हैं, तो उन्हें संकरण (hybridization) द्वारा एक ही पौधे में लाने का प्रयास किया जाता है। इस प्रक्रिया में, एक पौधे के पराग कणों को दूसरे पौधे के स्त्रीकेसर पर स्थानांतरित किया जाता है। अवांछित स्व-परागण को रोकने के लिए विपुंसन (emasculation) और बोरा वस्त्रावरण (bagging) जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाता है।
  4. वांछित पादपों का चयन एवं परीक्षण (Selection and Testing of Superior Hybrids): संकरण से प्राप्त संकरों (hybrids) में से सबसे श्रेष्ठ को चुना जाता है। इन चयनित संकरों का विभिन्न पर्यावरणीय परिस्थितियों में कई पीढ़ियों तक परीक्षण किया जाता है ताकि उनकी स्थिरता और श्रेष्ठता सुनिश्चित हो सके।
  5. नई किस्म का विमोचन एवं व्यवसायीकरण: सफल परीक्षण के बाद, नई किस्म को किसानों के उपयोग के लिए जारी किया जाता है और उसका बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाता है।

Common mistakes

  • पशु प्रजनन की विधियों के बीच अंतर करने में कठिनाई।
  • पादप प्रजनन के चरणों को क्रमबद्ध करने में भ्रम।
  • मधुमक्खी पालन और मत्स्य पालन के लाभों को गलत समझना।
  • पशुपालन के महत्व को कम आंकना।

Revision tips

  • प्रत्येक पशुपालन विधि के लाभों और हानियों की तुलना करें।
  • पादप प्रजनन के चरणों को एक फ्लोचार्ट के रूप में सारांशित करें।
  • मधुमक्खी पालन और मत्स्य पालन से संबंधित प्रमुख शब्दावली को याद करें।
  • खाद्य उत्पादन बढ़ाने में प्रत्येक रणनीति के योगदान का मूल्यांकन करें।

Practice MCQs

Q1. पशुपालन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

Q2. डेयरी फार्म प्रबंधन में दुग्ध उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा में सुधार के लिए क्या आवश्यक है?

Q3. पशु प्रजनन का एक प्रमुख उद्देश्य क्या है?

Q4. मधुमक्खी पालन (एपीकल्चर) का मुख्य उत्पाद क्या है?

Q5. नीली क्रांति (Blue Revolution) किससे संबंधित है?

Frequently asked questions

कक्षा 12 जीव विज्ञान के अध्याय 9 का मुख्य विषय क्या है?

कक्षा 12 जीव विज्ञान के अध्याय 9, "खाद्य उत्पादन में वृद्धि की कार्यनीति" का मुख्य विषय खाद्य उत्पादन को बढ़ाने के लिए विभिन्न रणनीतियों का अध्ययन करना है, जिसमें पशुपालन, पादप प्रजनन, मधुमक्खी पालन और मत्स्य पालन शामिल हैं।

पशुपालन मानव कल्याण में कैसे योगदान देता है?

पशुपालन बढ़ती जनसंख्या की खाद्य आवश्यकताओं को पूरा करता है, करोड़ों लोगों को रोजगार प्रदान करता है, और किसानों के लिए आय का एक अतिरिक्त स्रोत सुनिश्चित करता है।

डेयरी फार्म में दुग्ध उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा कैसे बढ़ाई जा सकती है?

उच्च नस्ल के पशुओं का चयन, उनकी उचित देखभाल, अच्छा आवास, स्वच्छ जल, संतुलित आहार, और नियमित पशु चिकित्सक की जाँच से दुग्ध उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा में सुधार किया जा सकता है।

पशु प्रजनन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

पशु प्रजनन का मुख्य उद्देश्य पशुओं के उत्पादन (जैसे दुग्ध, मांस) को बढ़ाना और उनके उत्पादों की गुणवत्ता (जैसे रोग प्रतिरोधक क्षमता, कम वसा वाला मांस) में सुधार करना है।

मधुमक्खी पालन से क्या लाभ हैं?

मधुमक्खी पालन से शहद और मोम प्राप्त होता है। शहद का उपयोग औषधियों में होता है, और मोम का उपयोग विभिन्न उद्योगों में होता है। इसके अतिरिक्त, मधुमक्खियाँ परागण द्वारा फसल उत्पादन बढ़ाने में भी मदद करती हैं।

पादप प्रजनन के मुख्य चरण कौन से हैं?

पादप प्रजनन के मुख्य चरण हैं: परिवर्तनशीलता का संग्रहण, जनकों का मूल्यांकन और चयन, चयनित जनकों के मध्य संकरण, और वांछित पादपों का चयन एवं परीक्षण।

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