कक्षा 12 जीव विज्ञान: पुष्पी पादपों में लैंगिक जनन NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 12 जीव विज्ञान के अध्याय 'पुष्पी पादपों में लैंगिक जनन' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें आवृतबीजी पुष्प के नर और मादा युग्मकोद्भिद के विकास स्थलों, लघुबीजाणुधानी और गुरुबीजाणुधानी के बीच अंतर, और विभिन्न विकासीय शब्दावलियों के सही क्रम की व्याख्या की गई है। समाधान एक प्रारूपी आवृतबीजी बीजाण्ड के नामांकित चित्र और मादा युग्मकोद्भिद के एकबीजाणुज विकास (पॉलीगोनम प्रकार) की विस्तृत जानकारी भी प्रदान करते हैं। अंत में, परिपक्व मादा युग्मकोद्भिद की 7-कोशिकीय, 8-केन्द्रकीय प्रकृति को चित्रों के माध्यम से समझाया गया है। ये समाधान छात्रों को पुष्पी पादपों में होने वाली जटिल लैंगिक जनन प्रक्रियाओं को समझने और परीक्षा की तैयारी में सहायता करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 12
Subjectजीव विज्ञान
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter2. पुष्पी पादपों में लैंगिक जनन

Chapter summary

कक्षा 12 जीव विज्ञान के इस अध्याय के NCERT समाधान पुष्पी पादपों में होने वाले लैंगिक जनन की प्रक्रियाओं पर केंद्रित हैं। इनमें नर युग्मकोद्भिद (परागकण) और मादा युग्मकोद्भिद (भ्रूणकोष) के विकास, लघुबीजाणुधानी और गुरुबीजाणुधानी की संरचनात्मक भिन्नताओं, और बीजाण्ड की संरचना का विस्तृत अध्ययन शामिल है। समाधान एकबीजाणुज विकास और परिपक्व मादा युग्मकोद्भिद की विशिष्ट 7-कोशिकीय, 8-केन्द्रकीय प्रकृति को स्पष्ट करते हैं।

Learning outcomes

  • आवृतबीजी पुष्प में नर एवं मादा युग्मकोद्भिद के विकास स्थलों की पहचान करना।
  • लघुबीजाणुधानी और गुरुबीजाणुधानी के बीच मुख्य अंतरों को समझना।
  • लैंगिक जनन से संबंधित शब्दावलियों के विकासीय क्रम को व्यवस्थित करना।
  • एक प्रारूपी आवृतबीजी बीजाण्ड के विभिन्न भागों का वर्णन करना।
  • मादा युग्मकोद्भिद के एकबीजाणुज विकास की प्रक्रिया को समझाना।
  • परिपक्व मादा युग्मकोद्भिद की 7-कोशिकीय, 8-केन्द्रकीय संरचना का विश्लेषण करना।

Topics covered

Paper topics

  • नर युग्मकोद्भिद का विकास
  • मादा युग्मकोद्भिद का विकास
  • लघुबीजाणुधानी
  • गुरुबीजाणुधानी
  • बीजाण्ड की संरचना
  • एकबीजाणुज विकास
  • पॉलीगोनम प्रकार का भ्रूणकोष
  • भ्रूणकोष की संरचना
  • लघुबीजाणु मातृ कोशिका
  • गुरुबीजाणु मातृ कोशिका
  • अर्द्धसूत्री विभाजन
  • समसूत्री विभाजन

Important topics

  • लघुबीजाणुधानी तथा गुरुबीजाणुधानी में अन्तर
  • प्रारूपी आवृतबीजी बीजाण्ड का नामांकित चित्र
  • मादा युग्मकोद्भिद् का एकबीजाणुज विकास
  • परिपक्व मादा युग्मकोद्भिद् की 7-कोशिकीय, 8-केन्द्रकीय प्रकृति
  • नर एवं मादा युग्मकोद्भिद् के विकास स्थल

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

एक आवृतबीजी पुष्प के उन अंगों के नाम बताएँ, जहाँ पर नर एवं मादा युग्म्ऋोद्भिद का विकास होता है?
Solution:

नर युग्मकोद्भिद्, जिसे परागकण भी कहा जाता है, का विकास पुंकेसर के परागकोश (anther) नामक भाग में होता है।

मादा युग्मकोद्भिद्, जिसे भ्रूणकोष (embryo sac) भी कहते हैं, का विकास बीजाण्ड (ovule) के भीतर होता है। बीजाण्ड अण्डाशय (ovary) में स्थित होता है और इसे गुरुबीजाणुधानी (megasporangium) भी कहा जाता है।

प्रश्न 2

लघुबीजाणुधानी तथा गुरुबीजाणुधानी के बीच अन्तर स्पष्ट करें। इन घटनाओं के दौरान किस प्रकार का कोशिका विभाजन सम्पन्न होता है? इन दोनों घटनाओं के अन्त में बनने वाली संरचनाओं के नाम बताएँ।
Solution:

लघुबीजाणुधानी (Microsporangium) और गुरुबीजाणुधानी (Megasporangium) के बीच मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:

क्र० सं० लघुबीजाणुधानी (Microsporangium) गुरुबीजाणुधानी (Megasporangium)
1. यह पुंकेसर के परागकोश (anther) में विकसित होती है, जो सामान्यतः चार कोनों पर स्थित होती है। यह अण्डप (pistil) के अण्डाशय (ovary) में जरायु (placenta) से विकसित होती है। इसे सामान्यतः बीजाण्ड (ovule) कहते हैं।
2. यह चार परतों से घिरी होती है: बाह्य त्वचा (epidermis), अन्त:स्तर (endothecium), मध्य स्तर (middle layers) और टेपीटम (tapetum)। यह सामान्यतः एक या दो अध्यावरणों (integuments) से घिरी होती है।
3. अनेक लघुबीजाणु मातृ कोशिकाएँ (microspore mother cells) अर्द्धसूत्री विभाजन (meiosis) द्वारा असंख्य अगुणित (haploid) लघुबीजाणु (microspores) या परागकण (pollen grains) बनाती हैं। एकमात्र गुरुबीजाणु मातृ कोशिका (megaspore mother cell) अर्द्धसूत्री विभाजन (meiosis) द्वारा चार अगुणित (haploid) गुरुबीजाणु (megaspores) बनाती है। इनमें से तीन नष्ट हो जाते हैं और एक क्रियाशील रहता है।
4. लघुबीजाणु (परागकण) रेखीय चतुष्क (linear tetrad), T-आकार या क्रॉसित (decussate) चतुष्क के रूप में व्यवस्थित हो सकते हैं। गुरुबीजाणु सामान्यतः रेखीय चतुष्क के रूप में व्यवस्थित होते हैं।
5. लघुबीजाणु (परागकण) परागकोश के स्फुटन से मुक्त होकर नर युग्मकोद्भिद् (male gametophyte) का निर्माण करते हैं। क्रियाशील गुरुबीजाणु वृद्धि करके मादा युग्मकोद्भिद् (female gametophyte) या भ्रूणकोष (embryo sac) का निर्माण करता है, जिसमें मादा युग्मक (अण्ड कोशिका) बनता है।

लघुबीजाणुजनन (microsporogenesis) और गुरुबीजाणुजनन (megasporogenesis) दोनों प्रक्रियाओं के दौरान कोशिका विभाजन का प्रकार अर्द्धसूत्री विभाजन (meiosis) होता है।

लघुबीजाणुजनन के अंत में लघुबीजाणु (परागकण) बनते हैं, जो नर युग्मकोद्भिद् होते हैं।

गुरुबीजाणुजनन के अंत में गुरुबीजाणु बनते हैं, जिनमें से एक क्रियाशील होकर भ्रूणकोष (मादा युग्मकोद्भिद्) का निर्माण करता है।

प्रश्न 3

निम्नलिखित शब्दावलियों को सही विकासीय क्रम में व्यवस्थित करें— परागकण, बीजाणुजन ऊतक, लघुबीजाणु चतुष्क, पराग मातृ कोशिका या लघुबीजाणु मातृ कोशिका, नर युग्मक।
Solution:

दिए गए शब्दों का सही विकासीय क्रम इस प्रकार है:

  1. बीजाणुजन ऊतक (Sporogenous tissue): यह वह ऊतक है जो बीजाणु मातृ कोशिकाओं को जन्म देता है।
  2. पराग मातृ कोशिका या लघुबीजाणु मातृ कोशिका (Pollen mother cell or Microspore mother cell): बीजाणुजन ऊतक की कोशिकाएँ विभाजित होकर लघुबीजाणु मातृ कोशिकाएँ बनाती हैं।
  3. लघुबीजाणु चतुष्क (Microspore tetrad): प्रत्येक लघुबीजाणु मातृ कोशिका अर्द्धसूत्री विभाजन द्वारा चार अगुणित लघुबीजाणु बनाती है, जो चतुष्क के रूप में व्यवस्थित होते हैं।
  4. परागकण (लघुबीजाणु) (Pollen grain / Microspore): चतुष्क के अलग होने पर ये स्वतंत्र लघुबीजाणु बनते हैं, जो नर युग्मकोद्भिद् का प्रारंभिक रूप हैं।
  5. नर युग्मक (Male gamete): परागकण के अंकुरण से नर युग्मक बनते हैं, जो निषेचन में भाग लेते हैं।

प्रश्न 4

एक प्रारूपी आवृतबीजी बीजाण्ड के भागों का विवरण दिखाते हुए एक स्पष्ट एवं साफ-सुथरा नामांकित चित्र बनाएँ।
Solution:

एक प्रारूपी आवृतबीजी बीजाण्ड (Angiospermic Ovule) की संरचना में निम्नलिखित मुख्य भाग होते हैं:

  • बीजाण्डवृन्त (Funicle): वह डंठल जो बीजाण्ड को जरायु (placenta) से जोड़ता है।
  • बीजाण्डकाय (Nucellus): बीजाण्ड के अंदर का पैरेन्काइमेटस ऊतक, जो भ्रूणकोष को पोषण प्रदान करता है।
  • अध्यावरण (Integuments): बीजाण्डकाय के चारों ओर पाई जाने वाली सुरक्षात्मक परतें, जो सामान्यतः एक या दो होती हैं।
  • बीजाण्डद्वार (Micropyle): अध्यावरणों के बीच एक छोटा सा छिद्र, जिससे पराग नलिका सामान्यतः प्रवेश करती है।
  • निभाग (Chalaza): बीजाण्ड का वह आधारभूत सिरा जहाँ अध्यावरण और बीजाण्डकाय मिलते हैं।
  • भ्रूणकोष (Embryo Sac): बीजाण्डकाय के भीतर स्थित मादा युग्मकोद्भिद्, जिसमें अण्ड कोशिका और अन्य कोशिकाएँ होती हैं।

चित्र:

प्रारूपी आवृतबीजी बीजाण्ड का नामांकित चित्र
चित्र 2.1: एक प्रारूपी आवृतबीजी बीजाण्ड की संरचना।

प्रश्न 5

आप मादा युग्मकोद्भिद के एकबीजाणुज विकास से क्या समझते हैं?
Solution:

मादा युग्मकोद्भिद् का एकबीजाणुज विकास (Monosporic development of female gametophyte) वह प्रक्रिया है जिसमें मादा युग्मकोद्भिद् (भ्रूणकोष) का निर्माण केवल एक गुरुबीजाणु (megaspore) से होता है।

अधिकांश आवृतबीजी पादपों में, बीजाण्ड के बीजाण्डकाय (nucellus) में स्थित गुरुबीजाणु मातृ कोशिका (megaspore mother cell) अर्द्धसूत्री विभाजन (meiosis) द्वारा चार अगुणित गुरुबीजाणु बनाती है। इन चार गुरुबीजाणुओं में से तीन सामान्यतः अविकसित या नष्ट हो जाते हैं, और केवल एक गुरुबीजाणु क्रियाशील रहता है।

यह क्रियाशील गुरुबीजाणु वृद्धि करता है और उसमें समसूत्री विभाजन (mitotic divisions) होते हैं। इन विभाजनों के परिणामस्वरूप 8-केन्द्रकीय और 7-कोशिकीय संरचना बनती है, जिसे भ्रूणकोष (embryo sac) या मादा युग्मकोद्भिद् कहते हैं।

चूंकि मादा युग्मकोद्भिद् का विकास केवल एक गुरुबीजाणु से होता है, इसलिए इस प्रकार के विकास को 'एकबीजाणुज' कहा जाता है। इस प्रकार के विकास का सबसे पहले पॉलीगोनम (Polygonum) नामक पौधे में अध्ययन किया गया था, इसलिए इसे 'पॉलीगोनम प्रकार का भ्रूणकोष' भी कहा जाता है।

प्रश्न 6

एक स्पष्ट एवं साफ-सुथरे चित्र के द्वारा परिपक्व मादा युग्मकोद्भिद के 7-कोशीय, 8-न्यूक्लिएट (केन्द्रक) प्रकृति की व्याख्या कीजिए।
Solution:

अधिकांश आवृतबीजी पादपों में परिपक्व मादा युग्मकोद्भिद् (भ्रूणकोष) की संरचना 7-कोशिकीय और 8-केन्द्रकीय होती है। इसकी व्याख्या निम्नलिखित है:

  1. प्रारंभिक विकास: क्रियाशील गुरुबीजाणु का केंद्रक दो बार समसूत्री विभाजन से गुजरता है। पहले विभाजन से दो केंद्रक बनते हैं, जो विपरीत ध्रुवों पर चले जाते हैं। दूसरे विभाजन से प्रत्येक ध्रुव पर दो-दो केंद्रक बनते हैं, जिससे कुल चार केंद्रक हो जाते हैं।
  2. मुक्त-केन्द्रकीय विभाजन: ये विभाजन मुक्त-केन्द्रकीय (free-nuclear) होते हैं, अर्थात कोशिका भित्ति का निर्माण तुरंत नहीं होता।
  3. 8-केन्द्रकीय अवस्था: इसके बाद, केंद्रक कुल आठ हो जाते हैं, जो भ्रूणकोष में वितरित होते हैं।
  4. कोशिका भित्ति का निर्माण: अंततः, कोशिका भित्ति का निर्माण होता है, जिससे 7 कोशिकाएँ बनती हैं।

संरचना का विवरण:

  • बीजाण्डद्वार सिरे पर (Micropylar end): इस सिरे पर तीन कोशिकाएँ होती हैं: एक बड़ी अण्ड कोशिका (egg cell) और उसके दोनों ओर दो छोटी सहायक कोशिकाएँ (synergids)। इन तीनों कोशिकाओं को सामूहिक रूप से अण्ड उपकरण (egg apparatus) कहा जाता है।
  • निभाग सिरे पर (Chalazal end): इस सिरे पर तीन कोशिकाएँ होती हैं, जिन्हें प्रतिमुख कोशिकाएँ (antipodal cells) कहा जाता है।
  • केंद्रीय कोशिका (Central cell): भ्रूणकोष के मध्य में एक बड़ी केंद्रीय कोशिका होती है, जिसमें दो ध्रुवीय केंद्रक (polar nuclei) होते हैं। ये ध्रुवीय केंद्रक अक्सर आपस में मिलकर एक द्विगुणित (diploid) द्वितीयक केंद्रक (secondary nucleus) बनाते हैं।

इस प्रकार, परिपक्व मादा युग्मकोद्भिद् में कुल 7 कोशिकाएँ (1 अण्ड कोशिका + 2 सहायक कोशिकाएँ + 3 प्रतिमुख कोशिकाएँ + 1 केंद्रीय कोशिका जिसमें 2 ध्रुवीय केंद्रक होते हैं) और 8 केंद्रक (1 अण्ड कोशिका केंद्रक + 2 सहायक कोशिका केंद्रक + 3 प्रतिमुख कोशिका केंद्रक + 2 ध्रुवीय केंद्रक) होते हैं।

चित्र: (यहाँ एक स्पष्ट चित्र की आवश्यकता होगी जो 7-कोशिकीय, 8-केन्द्रकीय भ्रूणकोष को दर्शाता हो, जिसमें अण्ड उपकरण, प्रतिमुख कोशिकाएँ और केंद्रीय कोशिका को नामांकित किया गया हो।)

Common mistakes

  • लघुबीजाणुधानी और गुरुबीजाणुधानी के कार्यों और संरचनाओं को भ्रमित करना।
  • युग्मकोद्भिद विकास के चरणों को गलत क्रम में व्यवस्थित करना।
  • बीजाण्ड के विभिन्न भागों के नामों और उनके स्थान को याद रखने में कठिनाई।
  • अर्द्धसूत्री और समसूत्री विभाजन के बीच अंतर को समझने में चूक।

Revision tips

  • बीजाण्ड और भ्रूणकोष के चित्रों को बार-बार बनाकर नामांकित करें।
  • लघुबीजाणुधानी और गुरुबीजाणुधानी के बीच अंतर की एक सारणी बनाएँ।
  • युग्मकोद्भिद विकास से संबंधित शब्दावली के विकासीय क्रम को याद करने के लिए फ्लोचार्ट का उपयोग करें।
  • प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को अपनी भाषा में संक्षेप में समझाने का अभ्यास करें।

Practice MCQs

Q1. आवृतबीजी पुष्प में नर युग्मकोद्भिद् का विकास कहाँ होता है?

Q2. लघुबीजाणुधानी के चारों ओर पाए जाने वाले ऊतक कौन से हैं?

Q3. मादा युग्मकोद्भिद् के एकबीजाणुज विकास को किस नाम से भी जाना जाता है?

Q4. परिपक्व मादा युग्मकोद्भिद् में कुल कितने केंद्रक होते हैं?

Q5. बीजाण्ड के किस भाग से भ्रूणकोष का विकास होता है?

Frequently asked questions

कक्षा 12 जीव विज्ञान के अध्याय 'पुष्पी पादपों में लैंगिक जनन' में मुख्य रूप से किन विषयों को शामिल किया गया है?

इस अध्याय के समाधानों में मुख्य रूप से आवृतबीजी पादपों में नर एवं मादा युग्मकोद्भिद का विकास, लघुबीजाणुधानी और गुरुबीजाणुधानी की संरचना और कार्य, बीजाण्ड की संरचना, एकबीजाणुज विकास और परिपक्व मादा युग्मकोद्भिद् की संरचना जैसे विषयों को शामिल किया गया है।

लघुबीजाणुधानी और गुरुबीजाणुधानी के बीच क्या मुख्य अंतर हैं?

लघुबीजाणुधानी पुंकेसर के परागकोश में विकसित होती है और असंख्य परागकण बनाती है, जबकि गुरुबीजाणुधानी अण्डप के अण्डाशय में स्थित बीजाण्ड में विकसित होती है और गुरुबीजाणु बनाती है। उनकी भित्ति संरचना और विकास प्रक्रिया भी भिन्न होती है।

मादा युग्मकोद्भिद् का एकबीजाणुज विकास क्या है?

यह वह प्रक्रिया है जिसमें मादा युग्मकोद्भिद् (भ्रूणकोष) का विकास केवल एक गुरुबीजाणु से होता है। अधिकांश आवृतबीजी पादपों में यह पाया जाता है और इसे पॉलीगोनम प्रकार का भ्रूणकोष भी कहा जाता है।

परिपक्व मादा युग्मकोद्भिद् की 7-कोशिकीय, 8-केन्द्रकीय प्रकृति का क्या अर्थ है?

इसका अर्थ है कि परिपक्व भ्रूणकोष में कुल सात कोशिकाएँ होती हैं (एक अण्ड कोशिका, दो सहायक कोशिकाएँ, तीन प्रतिमुख कोशिकाएँ, और एक केन्द्रीय कोशिका जिसमें दो ध्रुवीय केंद्रक मिलकर द्वितीयक केंद्रक बनाते हैं) और कुल आठ केंद्रक होते हैं।

ये NCERT समाधान कक्षा 12 के छात्रों के लिए कैसे उपयोगी हैं?

ये समाधान अध्याय की जटिल अवधारणाओं को स्पष्ट करते हैं, महत्वपूर्ण शब्दावली की व्याख्या करते हैं, और चित्रों के माध्यम से संरचनाओं को समझने में मदद करते हैं। यह छात्रों को परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर देने के लिए एक ठोस आधार प्रदान करते हैं।

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