कक्षा 12 जीव विज्ञान NCERT समाधान: अध्याय 10 - मानव कल्याण में सूक्ष्म जीव

NCERT Solutions PDF Class 12 PDF

यह पृष्ठ कक्षा 12 जीव विज्ञान के अध्याय 10, 'मानव कल्याण में सूक्ष्म जीव' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें सूक्ष्मजीवों की विविध भूमिकाओं पर प्रकाश डाला गया है, जिसमें खाद्य उत्पादन (जैसे दही, इडली, डोसा, डबलरोटी), जैव प्रौद्योगिकी (एंटीबायोटिक्स, टीके), पर्यावरण प्रबंधन (वाहित मल उपचार, बायोगैस उत्पादन) और कृषि (जैव उर्वरक, जैव नियंत्रण) शामिल हैं। समाधानों में किण्वन की प्रक्रिया, विभिन्न सूक्ष्मजीवों के कार्य और उनके लाभप्रद अनुप्रयोगों को स्पष्ट किया गया है। यह छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए सूक्ष्मजीवों के महत्व और उनके व्यावहारिक उपयोगों की गहरी समझ प्रदान करता है।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 12
Subjectजीव विज्ञान
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter10. मानव कल्याण में सूक्ष्म जीव

Chapter summary

कक्षा 12 जीव विज्ञान के अध्याय 10 के ये NCERT समाधान मानव कल्याण में सूक्ष्मजीवों की महत्वपूर्ण भूमिकाओं का विस्तृत विवरण प्रदान करते हैं। इसमें खाद्य उत्पादों के निर्माण में सूक्ष्मजीवों के उपयोग, जैसे किण्वन द्वारा दही, इडली, डोसा और डबलरोटी का उत्पादन, शामिल है। समाधान एंटीबायोटिक्स, टीके और जैव प्रौद्योगिकी में सूक्ष्मजीवों के अनुप्रयोगों पर भी चर्चा करते हैं। इसके अतिरिक्त, वाहित मल उपचार, बायोगैस उत्पादन और जैव नियंत्रण एजेंटों के रूप में सूक्ष्मजीवों के पर्यावरणीय और कृषि संबंधी लाभों को समझाया गया है।

Learning outcomes

  • सूक्ष्मजीवों द्वारा खाद्य पदार्थों के उत्पादन की प्रक्रियाओं को समझना।
  • एंटीबायोटिक्स और टीकों के निर्माण में सूक्ष्मजीवों की भूमिका का विश्लेषण करना।
  • वाहित मल उपचार और बायोगैस उत्पादन में सूक्ष्मजीवों के महत्व को पहचानना।
  • कृषि में जैव नियंत्रण और जैव उर्वरकों के रूप में सूक्ष्मजीवों के अनुप्रयोगों का वर्णन करना।
  • सूक्ष्मजीवों के विभिन्न लाभप्रद उपयोगों को उदाहरण सहित समझाना।

Topics covered

Paper topics

  • सूक्ष्मजीवों का परिचय
  • खाद्य उत्पादन में सूक्ष्मजीव (दही, इडली, डोसा, डबलरोटी)
  • किण्वन की प्रक्रिया
  • औद्योगिक उत्पाद (ऐल्कोहॉल, कार्बनिक अम्ल)
  • एंटीबायोटिक्स का उत्पादन (पेनिसिलिन)
  • जैव प्रौद्योगिकी में सूक्ष्मजीव (टीके, एंजाइम)
  • वाहित मल उपचार (प्राथमिक और द्वितीयक उपचार)
  • बायोगैस उत्पादन (मेथेनोजन)
  • जैव नियंत्रण (बैसिलस थ्यूरिनजिएन्सिस, ट्राइकोडर्मा)
  • जैव उर्वरक
  • सूक्ष्मजीवों के अन्य लाभप्रद उपयोग

Important topics

  • खाद्य उत्पादन में सूक्ष्मजीवों की भूमिका
  • एंटीबायोटिक्स का उत्पादन और महत्व
  • वाहित मल उपचार की प्रक्रियाएं
  • बायोगैस उत्पादन और इसके घटक
  • जैव नियंत्रण के सिद्धांत और उदाहरण

PDF preview

Read page by page below. PDF is streamed from the official NCERT website — no download button on this page.

Loading document …
Page of
Loading page …

Questions and Solutions

प्रश्न 1

जीवाणुओं को नग्न नेत्रों द्वारा नहीं देखा जा सकता, परन्तु सूक्ष्मदर्शी की सहायता से देखा जा सकता है। यदि आपको अपने घर से अपनी जीव विज्ञान प्रयोगशाला तक एक नमूना ले जाना हो और सूक्ष्मदर्शी की सहायता से इस नमूने से सूक्ष्मजीवों की उपस्थिति को प्रदर्शित करना हो तो किस प्रकार का नमूना आप अपने साथ ले जाएँगे और क्यों?
Solution:

सूक्ष्मजीवों की उपस्थिति को प्रदर्शित करने के लिए, हम अपने साथ दही का नमूना ले जाएँगे। दही में लैक्टोबैसीलस जैसे लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया (LAB) प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो दूध को दही में किण्वित करते हैं। ये बैक्टीरिया सूक्ष्मदर्शी के नीचे आसानी से देखे जा सकते हैं। दही का नमूना ले जाना सुरक्षित, सुविधाजनक और हानिरहित है, और यह आसानी से उपलब्ध भी होता है। प्रयोगशाला में, दही की एक छोटी मात्रा को स्लाइड पर रखकर और सूक्ष्मदर्शी के नीचे अवलोकन करके सूक्ष्मजीवों की उपस्थिति को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया जा सकता है।

प्रश्न 2

उपापचय के दौरान सूक्ष्मजीव गैसों का निष्कासन करते हैं; उदाहरण द्वारा सिद्ध कीजिए।
Solution:

सूक्ष्मजीव अपने उपापचय के दौरान विभिन्न गैसों का निष्कासन करते हैं। इसके कुछ प्रमुख उदाहरण निम्नलिखित हैं:

  1. खाद्य पदार्थों का किण्वन: दाल, चावल या मैदा से बने आटे का उपयोग डोसा, इडली, भटूरे और डबलरोटी बनाने में किया जाता है। यीस्ट (सैकेरोमाइसिस प्रजाति) द्वारा इस आटे का किण्वन किया जाता है। इस प्रक्रिया में, यीस्ट शर्करा का किण्वन करके ऐल्कोहॉल और कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) गैस उत्पन्न करता है। आटे में CO2 गैस के उत्पादन के कारण ही वह फूलता है और डबलरोटी सेंकने पर स्पंजी या छिद्रयुक्त बनती है। इसका रासायनिक समीकरण इस प्रकार है: C_6H_{12}O_6 \xrightarrow{\text{यीस्ट}} 2C_2H_5OH + 2CO_2 ↑ + 21 \text{ kcal}
  2. स्विस चीज़ का उत्पादन: 'स्विस चीज़' में पाए जाने वाले बड़े छिद्र प्रोपिओनीबैक्टीरियम शारपैनाई (Propionibacterium sharmanii) नामक बैक्टीरिया द्वारा बड़ी मात्रा में उत्पन्न कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) गैस के कारण होते हैं।
  3. बायोगैस उत्पादन: बायोगैस संयंत्रों में, मेथेनोजन नामक बैक्टीरिया कार्बनिक पदार्थों का अवायवीय अपघटन करके मीथेन (CH4), कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) और हाइड्रोजन सल्फाइड (H2S) जैसी गैसें उत्पन्न करते हैं।

प्रश्न 3

किस भोजन (आहार) में लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया मिलते हैं? इनके कुछ लाभप्रद उपयोगों का वर्णन कीजिए।
Solution:

लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया (Lactic Acid Bacteria - LAB) मुख्य रूप से दूध में पाए जाते हैं और इसे दही में परिवर्तित करते हैं। इनके लाभप्रद उपयोग निम्नलिखित हैं:

  1. दही का निर्माण: लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया दूध में मौजूद लैक्टोज शर्करा को लैक्टिक अम्ल में परिवर्तित करते हैं। यह लैक्टिक अम्ल दूध की कैसीन प्रोटीन को स्कन्दित (coagulate) कर देता है, जिससे दूध गाढ़ा होकर दही बन जाता है।
  2. पोषण गुणवत्ता में सुधार: ये बैक्टीरिया दही में विटामिन B12 की मात्रा को बढ़ाते हैं, जिससे दही की पोषण गुणवत्ता में सुधार होता है।
  3. रोगों का निवारण: हमारे आंतों में लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया हानिकारक सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को रोककर पेट के रोगों से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  4. अन्य किण्वित उत्पाद: ये बैक्टीरिया अन्य डेयरी उत्पादों जैसे पनीर और कुछ अन्य किण्वित खाद्य पदार्थों के निर्माण में भी सहायक होते हैं।

प्रश्न 4

कुछ पारम्परिक भारतीय आहार जो गेहूँ, चावल तथा चना (अथवा उनके उत्पाद) से बनते हैं और जिनमें सूक्ष्मजीवों का प्रयोग शामिल हो, उनके नाम बताएँ।
Solution:

कई पारम्परिक भारतीय आहारों के निर्माण में सूक्ष्मजीवों द्वारा किण्वन की प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है। गेहूँ, चावल और चने (या उनके उत्पादों) से बनने वाले कुछ प्रमुख आहार इस प्रकार हैं:

  • चावल (व दाल) के मिश्रण से बनने वाले उत्पाद: डोसा, इडली, उत्तपम। इन उत्पादों के घोल को किण्वित करने के लिए यीस्ट और बैक्टीरिया का उपयोग किया जाता है।
  • गेहूँ अथवा मैदा से बनने वाले उत्पाद: भटूरा, तंदूरी रोटी, नान, कुल्चे, जलेबी। इन उत्पादों के आटे या घोल को किण्वित करने के लिए यीस्ट का प्रयोग किया जाता है, जिससे वे फूलते हैं और उनकी बनावट बेहतर होती है।
  • चने से बनने वाले उत्पाद: ढोकला, खमण। इन व्यंजनों को बनाने के लिए चने के आटे या बेसन के घोल को किण्वित किया जाता है।

प्रश्न 5

हानिप्रद जीवाणु द्वारा उत्पन्न करने वाले रोगों के नियन्त्रण में किस प्रकार सूक्ष्मजीव महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं?
Solution:

सूक्ष्मजीव, विशेष रूप से कुछ प्रकार के बैक्टीरिया और कवक, हानिकारक जीवाणुओं द्वारा उत्पन्न रोगों के नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह मुख्य रूप से एंटीबायोटिक्स (प्रतिजैविक) के उत्पादन के माध्यम से होता है:

  1. एंटीबायोटिक्स का उत्पादन: कई एंटीबायोटिक्स, जैसे पेनिसिलिन, स्ट्रेप्टोमाइसिन आदि, अन्य सूक्ष्मजीवों (जैसे पेनिसिलियम कवक या स्ट्रेप्टोमाइसीज बैक्टीरिया) द्वारा उत्पन्न किए जाते हैं। ये एंटीबायोटिक्स रोग पैदा करने वाले जीवाणुओं के विकास को रोकते हैं या उन्हें मार देते हैं। इस प्रकार, वे संक्रमणों के इलाज में प्रभावी होते हैं।
  2. जैव प्रौद्योगिकी द्वारा रोगाणुरोधी पदार्थ: सूक्ष्मजीवों का उपयोग जैव प्रौद्योगिकी में करके इन्टरफेरॉन जैसे अन्य प्रकार के रोगाणुरोधी पदार्थ भी बनाए जाते हैं, जो वायरल संक्रमणों से लड़ने में मदद करते हैं।
  3. प्रतिस्पर्धा द्वारा नियंत्रण: कुछ लाभकारी सूक्ष्मजीव रोगजनक सूक्ष्मजीवों के साथ पोषक तत्वों और स्थान के लिए प्रतिस्पर्धा करके उनकी वृद्धि को सीमित कर सकते हैं।

इस प्रकार, सूक्ष्मजीव स्वयं रोगजनकों के खिलाफ एक रक्षा तंत्र के रूप में कार्य करते हैं।

प्रश्न 6

किन्हीं दो कवक प्रजातियों के नाम लिखिए जिनका प्रयोग प्रतिजैविकों (एण्टीबायोटिक्स) के उत्पादन में किया जाता है।
Solution:

दो कवक प्रजातियाँ जिनका उपयोग प्रतिजैविकों के उत्पादन में किया जाता है, वे निम्नलिखित हैं:

  1. पेनिसिलियम नोटेटम (Penicillium notatum) या पेनिसिलियम क्राइसोजेनम (P. chrysogenum): इन कवक प्रजातियों से 'पेनिसिलिन' नामक महत्वपूर्ण एंटीबायोटिक प्राप्त की जाती है।
  2. पेनिसिलियम ग्रीसियोफल्विम (Penicillium griseofulvum): इस कवक प्रजाति से 'ग्रीसियोफल्विन' नामक एंटीबायोटिक प्राप्त होती है, जिसका उपयोग त्वचा के फंगल संक्रमण के इलाज में किया जाता है।

प्रश्न 7

वाहित मल से आप क्या समझते हैं? वाहित मल हमारे लिए किस प्रकार से हानिप्रद है?
Solution:

वाहित मल (Sewage): वाहित मल से तात्पर्य नगरों और शहरों में प्रयोग के बाद उत्पन्न होने वाले अपशिष्ट जल से है। इसमें मुख्य रूप से मानव मलमूत्र, घरेलू उपयोग का पानी (जैसे नहाने, धोने आदि का पानी) और अन्य औद्योगिक अपशिष्ट शामिल होते हैं।

वाहित मल के हानिकारक प्रभाव:

  1. जल प्रदूषण: वाहित मल में बड़ी मात्रा में कार्बनिक पदार्थ, जैव प्रदूषक और रोगजनक सूक्ष्मजीव होते हैं। जब इसे सीधे जल स्रोतों (नदियों, झीलों) में छोड़ा जाता है, तो यह उन्हें प्रदूषित करता है।
  2. रोगों का प्रसार: वाहित मल में मौजूद रोगजनक सूक्ष्मजीव टाइफॉइड, हैजा, पेचिश और पीलिया जैसे जलजनित रोगों को फैला सकते हैं।
  3. ऑक्सीजन की कमी: जल स्रोतों में वाहित मल मिलने पर, उसमें मौजूद कार्बनिक पदार्थों के अपघटन के लिए सूक्ष्मजीव बहुत अधिक घुलित ऑक्सीजन (DO) का उपभोग करते हैं। इससे जलीय जीवों के लिए ऑक्सीजन की कमी हो जाती है और वे मर सकते हैं।
  4. सुपोषण (Eutrophication): वाहित मल में पोषक तत्वों (जैसे नाइट्रोजन और फास्फोरस) की अधिकता होती है। जब यह जलाशयों में जाता है, तो शैवाल (algae) की अत्यधिक वृद्धि होती है, जिसे सुपोषण कहते हैं। इससे जल की गुणवत्ता और भी खराब हो जाती है।
  5. BOD में वृद्धि: वाहित मल के कारण जल में BOD (Biochemical Oxygen Demand) बढ़ जाती है, जो जल की गुणवत्ता का एक महत्वपूर्ण सूचक है। उच्च BOD का अर्थ है अधिक प्रदूषण।

प्रश्न 8

प्राथमिक तथा द्वितीयक वाहित मल उपचार के बीच पाए जाने वाले मुख्य अन्तर कौन-से हैं?
Solution:

वाहित मल उपचार के प्राथमिक और द्वितीयक चरणों के बीच मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:

वाहित मल के प्राथमिक व द्वितीयक उपचार में अन्तर
क्र० सं० लक्षण प्राथमिक उपचार द्वितीयक उपचार
1. प्रक्रम प्रकार भौतिक (Physical) व यांत्रिक (Mechanical) जैविक-जैव-अपघटन (Biodegradation)
2. हटाए जाने वाले पदार्थ अघुलित ठोस पदार्थ (जैसे रेत, कंकड़, बड़े कण) घुलित और कोलाइडी कार्बनिक पदार्थ
3. BOD (उपचार के बाद) अधिक (यथावत् रहती है या थोड़ी कम होती है) काफी कम हो जाती है
4. मुख्य उद्देश्य ठोस निलंबित कणों को हटाना कार्बनिक पदार्थों को कम करना और BOD घटाना

स्पष्टीकरण:

  • प्राथमिक उपचार: यह एक भौतिक प्रक्रिया है जिसमें वाहित मल से बड़े ठोस कणों, रेत, कंकड़ आदि को छानकर या अवसादन (sedimentation) द्वारा अलग किया जाता है।
  • द्वितीयक उपचार: यह एक जैविक प्रक्रिया है जिसमें सूक्ष्मजीवों (बैक्टीरिया, कवक) का उपयोग करके वाहित मल में घुले हुए कार्बनिक पदार्थों का जैव-अपघटन किया जाता है। यह प्रक्रिया BOD को काफी कम कर देती है।

प्रश्न 9

सूक्ष्मजीवों का प्रयोग ऊर्जा के स्रोतों के रूप में भी किया जा सकता है। यदि हाँ, तो किस प्रकार से? इस पर विचार कीजिए।
Solution:

हाँ, सूक्ष्मजीवों का प्रयोग ऊर्जा के स्रोतों के रूप में सफलतापूर्वक किया जा सकता है। इसके प्रमुख तरीके निम्नलिखित हैं:

  1. बायोगैस उत्पादन: बायोगैस, जिसे 'गोबर गैस' भी कहते हैं, सूक्ष्मजीवों द्वारा ऊर्जा उत्पादन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। कुछ विशेष प्रकार के बैक्टीरिया, जिन्हें मेथेनोजन (Methanogens) कहा जाता है (जैसे मेथेनोबैक्टीरियम), सेलुलोसयुक्त पदार्थों (जैसे गोबर, पादप अवशेष) पर अवायवीय (anaerobic) परिस्थितियों में वृद्धि करते हैं। इस प्रक्रिया में वे मीथेन (CH4), कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) और हाइड्रोजन (H2) जैसी गैसें उत्पन्न करते हैं। मीथेन बायोगैस का मुख्य ज्वलनशील घटक है, जिसका उपयोग ईंधन के रूप में किया जाता है।
  2. औद्योगिक ऐल्कोहॉल का ईंधन के रूप में उपयोग: यीस्ट द्वारा शर्करा के किण्वन से उत्पादित ऐल्कोहॉल का उपयोग ईंधन के रूप में पेट्रोल और डीजल के साथ मिलाकर किया जा सकता है।
  3. एकल कोशिका प्रोटीन (SCP): कुछ सूक्ष्मजीवों, जैसे शैवाल और यीस्ट, का उपयोग एकल कोशिका प्रोटीन (SCP) के उत्पादन के लिए किया जाता है। हालांकि यह सीधे ऊर्जा स्रोत नहीं है, लेकिन यह प्रोटीन का एक सघन स्रोत है जो खाद्य और पशु आहार के रूप में ऊर्जा प्रदान कर सकता है।

प्रश्न 10

सूक्ष्मजीवों का प्रयोग रसायन उर्वरकों तथा पीड़कनाशियों के प्रयोग को कम करने के लिए भी किया जा सकता है। यह किस प्रकार सम्पन्न होगा? व्याख्या कीजिए।
Solution:

सूक्ष्मजीवों का उपयोग रसायन उर्वरकों और पीड़कनाशियों पर हमारी निर्भरता को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिसे जैव नियंत्रण (Bio Control) और जैव उर्वरक (Biofertilizers) के माध्यम से प्राप्त किया जाता है:

  1. जैव नियंत्रण (Biological Control):
    • पीड़क नियंत्रण: हानिकारक कीटों और रोगों को नियंत्रित करने के लिए जैविक विधियों का उपयोग जैव नियंत्रण कहलाता है। उदाहरण के लिए, बैसिलस थ्यूरिनजिएन्सिस (Bacillus thuringiensis - Bt) नामक जीवाणु के बीजाणु (spores) बाजार में उपलब्ध हैं। इन्हें पानी में मिलाकर पौधों पर छिड़का जाता है। जब कीटों के लार्वा इन्हें खाते हैं, तो वे मर जाते हैं। यह विधि पर्यावरण के लिए सुरक्षित है क्योंकि यह केवल लक्षित कीटों को प्रभावित करती है और वयस्क कीटों या अन्य जीवों को नुकसान नहीं पहुँचाती। आनुवंशिक अभियांत्रिकी द्वारा Bt फसलों का विकास भी इसी सिद्धांत पर आधारित है।
    • रोग नियंत्रण: कवक ट्राइकोडर्मा (Trichoderma) का उपयोग कई पादप रोगजनकों के नियंत्रण के लिए एक प्रभावी जैव नियंत्रण कारक के रूप में किया जाता है। यह मिट्टी में पाए जाने वाले रोगजनक कवक की वृद्धि को रोकता है।
    • अन्य जीव: मच्छरों के लार्वा को नियंत्रित करने के लिए ड्रैगनफ्लाई (Dragonfly) और एफिड्स (Aphids) को नियंत्रित करने के लिए लेडीबर्ड बीटल (Ladybird beetle) जैसे जीवों का भी उपयोग किया जाता है।
  2. जैव उर्वरक (Biofertilizers): सूक्ष्मजीवों का उपयोग रासायनिक उर्वरकों के विकल्प के रूप में भी किया जाता है। ये सूक्ष्मजीव मिट्टी की उर्वरता बढ़ाते हैं और पौधों को पोषक तत्व उपलब्ध कराते हैं। उदाहरण के लिए:
    • साइनोबैक्टीरिया (जैसे एनाबीना, नोस्टॉक): ये वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करके मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाते हैं।
    • माइकोराइजा (Mycorrhiza): यह कवक का एक प्रकार है जो पौधों की जड़ों के साथ सहजीवी संबंध बनाता है और फास्फोरस जैसे पोषक तत्वों के अवशोषण में मदद करता है।
    • बैसिलस प्रजातियाँ: कुछ बैसिलस प्रजातियाँ मिट्टी में फास्फोरस की उपलब्धता को बढ़ाती हैं।

इन विधियों द्वारा, हम रासायनिक उर्वरकों और पीड़कनाशियों के अत्यधिक उपयोग से बच सकते हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण और मानव स्वास्थ्य को लाभ होता है।

Common mistakes

  • सूक्ष्मजीवों के केवल हानिकारक प्रभावों पर ध्यान केंद्रित करना और उनके लाभकारी पहलुओं को अनदेखा करना।
  • किण्वन की प्रक्रिया और उसमें उत्पन्न होने वाली गैसों (जैसे CO2) की भूमिका को गलत समझना।
  • जैव नियंत्रण और रासायनिक कीटनाशकों के बीच अंतर को स्पष्ट न कर पाना।
  • वाहित मल उपचार के विभिन्न चरणों और उनके उद्देश्यों को भ्रमित करना।

Revision tips

  • प्रत्येक प्रश्न के उत्तर में दिए गए सूक्ष्मजीवों के नाम और उनके विशिष्ट कार्यों को सूचीबद्ध करें।
  • खाद्य उत्पादन, औषधि निर्माण और पर्यावरण प्रबंधन में सूक्ष्मजीवों के उपयोग के उदाहरणों को याद करें।
  • किण्वन से संबंधित रासायनिक समीकरणों और उसमें उत्पन्न होने वाली गैसों पर विशेष ध्यान दें।
  • जैव नियंत्रण और वाहित मल उपचार जैसी प्रक्रियाओं के चरणों को रेखांकित करें।

Practice MCQs

Q1. दूध को दही में बदलने के लिए कौन से सूक्ष्मजीव जिम्मेदार हैं?

Q2. डबलरोटी (ब्रेड) को स्पंजी बनाने वाली मुख्य गैस कौन सी है?

Q3. स्विस चीज़ में बड़े छिद्रों का कारण क्या है?

Q4. एंटीबायोटिक 'पेनिसिलिन' किस कवक से प्राप्त होती है?

Q5. बायोगैस उत्पादन में मुख्य रूप से कौन सी गैस उत्पन्न होती है?

Frequently asked questions

कक्षा 12 जीव विज्ञान के अध्याय 10 में किन मुख्य विषयों को शामिल किया गया है?

इस अध्याय में मानव कल्याण में सूक्ष्मजीवों की भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जिसमें खाद्य उत्पादन, जैव प्रौद्योगिकी, पर्यावरण प्रबंधन (जैसे वाहित मल उपचार, बायोगैस) और कृषि (जैव नियंत्रण, जैव उर्वरक) में उनके उपयोग शामिल हैं।

सूक्ष्मजीवों का उपयोग करके कौन से खाद्य पदार्थ बनाए जाते हैं?

सूक्ष्मजीवों का उपयोग करके दही, इडली, डोसा, भटूरे, डबलरोटी, जलेबी, ढोकला और खमण जैसे कई पारंपरिक खाद्य पदार्थ बनाए जाते हैं, जिनमें किण्वन की प्रक्रिया शामिल होती है।

एंटीबायोटिक्स क्या हैं और वे कैसे काम करते हैं?

एंटीबायोटिक्स सूक्ष्मजीवों (जैसे बैक्टीरिया या कवक) से प्राप्त ऐसे पदार्थ हैं जो अन्य हानिकारक सूक्ष्मजीवों (विशेषकर जीवाणुओं) के विकास को रोकते हैं या उन्हें नष्ट करते हैं, जिससे संक्रमण का इलाज होता है।

वाहित मल उपचार में सूक्ष्मजीवों की क्या भूमिका है?

वाहित मल उपचार में, सूक्ष्मजीव कार्बनिक पदार्थों का जैव-अपघटन (biodegradation) करते हैं। प्राथमिक उपचार में भौतिक विधियों से ठोस पदार्थ हटाए जाते हैं, जबकि द्वितीयक उपचार में सूक्ष्मजीव कार्बनिक प्रदूषकों को कम करते हैं, जिससे BOD घटती है।

बायोगैस क्या है और यह कैसे उत्पन्न होती है?

बायोगैस एक ऊर्जा स्रोत है जो मुख्य रूप से मीथेन (CH4) गैस से बनी होती है। यह मेथेनोजन नामक अवायवीय जीवाणुओं द्वारा कार्बनिक पदार्थों (जैसे गोबर) के अपघटन से उत्पन्न होती है।

जैव नियंत्रण से आप क्या समझते हैं?

जैव नियंत्रण एक ऐसी विधि है जिसमें हानिकारक कीटों और रोगों को नियंत्रित करने के लिए अन्य जैविक एजेंटों (जैसे सूक्ष्मजीवों या अन्य जीवों) का उपयोग किया जाता है, जिससे रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम होती है।

Content reviewed by the NCERT Help team. Editorial Team and update policy

NCERT Solutions PDF PDF on NCERT Help. URL unchanged for search indexing.