कक्षा 12 जीव विज्ञान: जैव प्रौद्योगिकी - सिद्धांत व प्रक्रम NCERT समाधान

NCERT Solutions PDF Class 12 PDF

यह पृष्ठ कक्षा 12 जीव विज्ञान के अध्याय 11, 'जैव प्रौद्योगिकी - सिद्धांत व प्रक्रम' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें पुनर्योगज प्रोटीन के चिकित्सीय उपयोग, प्रतिबंधन एंजाइम की क्रियाविधि, डीएनए और एंजाइम के आणविक आकार की तुलना, मानव कोशिका में डीएनए की मोलर सांद्रता, सुकेन्द्रकी कोशिकाओं में प्रतिबंधन एंडोन्यूक्लिएज की उपस्थिति, स्टिर्ड टैंक बायोरिएक्टर के लाभ और पैलिंड्रोमिक अनुक्रमों की समझ जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर स्पष्ट, चरण-दर-चरण तरीके से समझाया गया है, जिससे छात्रों को इन जटिल अवधारणाओं को समझने में मदद मिलती है। ये समाधान परीक्षा की तैयारी और विषय की गहरी समझ के लिए एक उत्कृष्ट संसाधन हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 12
Subjectजीव विज्ञान
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter11. जैव प्रौद्योगिकी - सिद्धांत व प्रक्रम

Chapter summary

कक्षा 12 जीव विज्ञान के अध्याय 11 'जैव प्रौद्योगिकी - सिद्धांत व प्रक्रम' के ये NCERT समाधान छात्रों को जैव प्रौद्योगिकी के मूल सिद्धांतों और प्रक्रियाओं से परिचित कराते हैं। इसमें पुनर्योगज प्रोटीन के चिकित्सीय अनुप्रयोगों, प्रतिबंधन एंजाइमों की भूमिका, डीएनए की संरचनात्मक विशेषताओं और बायोरिएक्टरों के उपयोग जैसे प्रमुख विषयों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। समाधान अभ्यास प्रश्नों के विस्तृत उत्तर प्रदान करते हैं, जो छात्रों को अवधारणाओं को स्पष्ट करने और परीक्षा के लिए प्रभावी ढंग से तैयारी करने में सहायता करते हैं।

Learning outcomes

  • चिकित्सीय रूप से महत्वपूर्ण दस पुनर्योगज प्रोटीनों और उनके अनुप्रयोगों की पहचान करना।
  • प्रतिबंधन एंजाइम की क्रियाविधि को आरेखित करना और समझना।
  • डीएनए और एंजाइम के आणविक आकार की तुलना करना।
  • मानव कोशिका में डीएनए की मोलर सांद्रता की गणना करना।
  • सुकेन्द्रकी कोशिकाओं में प्रतिबंधन एंडोन्यूक्लिएज की अनुपस्थिति के कारणों को समझाना।
  • स्टिर्ड टैंक बायोरिएक्टर के लाभों का वर्णन करना।
  • पैलिंड्रोमिक अनुक्रमों को पहचानना और उदाहरण देना।

Topics covered

Paper topics

  • पुनर्योगज प्रोटीन के चिकित्सीय उपयोग
  • प्रतिबंधन एंजाइम की क्रियाविधि
  • डीएनए और एंजाइम का आणविक आकार
  • मानव कोशिका में डीएनए की मोलर सांद्रता
  • सुकेन्द्रकी कोशिकाओं में प्रतिबंधन एंडोन्यूक्लिएज
  • स्टिर्ड टैंक बायोरिएक्टर
  • पैलिंड्रोमिक अनुक्रम

Important topics

  • पुनर्योगज प्रोटीन के चिकित्सीय उपयोग
  • प्रतिबंधन एंजाइम की क्रियाविधि
  • स्टिर्ड टैंक बायोरिएक्टर के लाभ
  • पैलिंड्रोमिक अनुक्रमों की पहचान

PDF preview

Read page by page below. PDF is streamed from the official NCERT website — no download button on this page.

Loading document …
Page of
Loading page …

Questions and Solutions

प्रश्न 1

क्या आप दस पुनर्योगज प्रोटीन के बारे में बता सकते हैं जो चिकित्सीय व्यवहार के काम में लाए जाते हैं? पता लगाइए कि वे चिकित्सीय औषधि के रूप में कहाँ प्रयोग किए जाते हैं? इण्टरनेट की सहायता लीजिए।
Solution:

चिकित्सीय व्यवहार में उपयोग किए जाने वाले दस पुनर्योगज प्रोटीन और उनके अनुप्रयोग निम्नलिखित हैं:

  1. मानव इन्सुलिन (ह्युमुलिन): यह मधुमेह (Diabetes Mellitus) के उपचार में रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने के लिए प्रयोग किया जाता है।
  2. मानव वृद्धि हॉर्मोन (hGH): इसका उपयोग बच्चों में बौनेपन (Dwarfism) के उपचार के लिए किया जाता है, जो वृद्धि हॉर्मोन की कमी के कारण होता है।
  3. इण्टरफेरॉन (Interferon): ये प्रोटीन वायरल संक्रमणों से लड़ने में मदद करते हैं और कुछ प्रकार के कैंसर (जैसे ल्यूकेमिया) के उपचार में भी प्रभावी होते हैं।
  4. फॉलिकिल स्टिमुलेटिंग हॉर्मोन (FSH): इसका उपयोग प्रजनन तंत्र से जुड़े रोगों के उपचार में किया जाता है, जैसे बांझपन के इलाज में।
  5. इण्टरल्यूसिन-2 (Interleukin-2): यह प्रतिरक्षा प्रणाली को उत्तेजित करता है और इसका उपयोग कुछ प्रकार के कैंसर (जैसे गुर्दे का कैंसर) के उपचार में किया जाता है।
  6. फैक्टर VIII और फैक्टर IX: ये रक्त स्कंदन कारक (blood clotting factors) हैं जिनका उपयोग हीमोफीलिया (Haemophilia) के उपचार में किया जाता है, जो रक्तस्राव को रोकने में मदद करते हैं।
  7. टिशु प्लाज्मिनोजन एक्टिवेटर (TPA): यह एक थक्का-रोधी (anti-clotting) एजेंट है जिसका उपयोग मायोकार्डियल इन्फार्कशन (हृदयाघात) या स्ट्रोक के दौरान रक्त के थक्कों को घोलने के लिए किया जाता है।
  8. ऐल्फा गैलैक्टोसाइड्स-A (Alpha-Galactosidase-A): यह एंजाइम रिप्लेसमेंट थेरेपी में उपयोग किया जाता है, विशेष रूप से फैब्री रोग (Fabry disease) जैसे लाइसोसोमल स्टोरेज डिसऑर्डर के उपचार में।
  9. 'यूरोगैस्ट्रोन' (Urogastrone): यह गैस्ट्रिक एसिड स्राव को कम करने वाला एक पेप्टाइड है और इसका उपयोग पेट के अल्सर और घाव भरने में सहायता के लिए किया जा सकता है।
  10. एरिथोप्रोइटिन (Erythropoietin - EPO): यह लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन को उत्तेजित करता है और इसका उपयोग क्रोनिक किडनी रोग या कीमोथेरेपी के कारण होने वाली एनीमिया (रुधिरहीनता) के उपचार में किया जाता है।

प्रश्न 2

एक सचित्र (चार्ट) (आरेखित निरूपण के साथ ) बनाइए जो प्रतिबन्धन एन्जाइम को (जिस क्रियाधार डी॰एन॰ए॰ पर यह कार्य करता है उसे ), उन स्थलों को जहाँ डी॰एन॰ए॰ को काटता है व इनसे उत्पन्न उत्पाद को दर्शाता है।
Solution:

प्रतिबंधन एंजाइम (Restriction Enzyme) की क्रिया का सचित्र निरूपण निम्नलिखित है:

प्रतिबंधन एंजाइम, जैसे कि Eco R1, एक विशिष्ट डीएनए अनुक्रम को पहचानता है और उसे काटता है। यह एंजाइम डीएनए के दोहरे स्ट्रैंड में एक विशिष्ट पैलिंड्रोमिक अनुक्रम के भीतर क्षारक युग्मों के बीच काटता है।

क्रियाविधि:

  1. पहचान स्थल: Eco R1 एंजाइम डीएनए में 'GAATTC' नामक पैलिंड्रोमिक अनुक्रम को पहचानता है। यह अनुक्रम दोनों डीएनए स्ट्रैंड्स पर 5' से 3' दिशा में समान पढ़ा जाता है।
  2. डीएनए का काटना: Eco R1 इस पैलिंड्रोमिक अनुक्रम के भीतर G और A क्षारक युग्मों के बीच काटता है। यह कटाई डीएनए के दोनों स्ट्रैंड्स पर होती है।
  3. उत्पाद (चिपचिपे सिरे - Sticky Ends): इस कटाई के परिणामस्वरूप डीएनए के टुकड़े बनते हैं जिनके सिरों पर एकल-स्ट्रैंडेड, पूरक (complementary) डीएनए अनुक्रम होते हैं। इन्हें 'चिपचिपे सिरे' (Sticky Ends) कहा जाता है। ये सिरे अन्य पूरक चिपचिपे सिरों के साथ आसानी से जुड़ सकते हैं।
  4. पुनर्योगज डीएनए का निर्माण: इन चिपचिपे सिरों का उपयोग करके, एक बाहरी डीएनए (जैसे प्लास्मिड) के टुकड़े को वांछित जीन वाले डीएनए टुकड़े के साथ जोड़ा जा सकता है, जिससे पुनर्योगज डीएनए (Recombinant DNA) का निर्माण होता है।

आरेखित निरूपण (वर्णनात्मक):

कल्पना करें कि एक डीएनए अणु है जिसमें 'GAATTC' अनुक्रम है। Eco R1 एंजाइम इस अनुक्रम में G और A के बीच दोनों स्ट्रैंड्स पर काटता है।

5' --- G A A T T C --- 3'

3' --- C T T A A G --- 5'

कटने के बाद:

5' --- G A A T T C --- 3'

3' --- C T T A A G --- 5'

यह दो डीएनए खंड बनाता है, जिनमें से प्रत्येक के सिरे पर एकल-स्ट्रैंडेड 'AATT' अनुक्रम होता है। ये चिपचिपे सिरे हैं।

5' --- G

A A T T C --- 3'

3' --- C T T A A G 5' ये चिपचिपे सिरे अन्य पूरक चिपचिपे सिरों से जुड़ सकते हैं, जिससे पुनर्योगज डीएनए का निर्माण होता है।

प्रश्न 3

कक्षा ग्यारहवीं में जो आप पढ़ चुके हैं, उसके आधार पर क्या आप बता सकते हैं कि आण्विक आकार के आधार पर एन्जाइम्स बड़े हैं या डी०एन०ए०। आप इसके बारे में कैसे पता लगाएँगे?
Solution:

आण्विक आकार के आधार पर, डी०एन०ए० (DNA) सामान्यतः एन्जाइम्स (प्रोटीन) से बहुत बड़ा अणु होता है।

स्पष्टीकरण:

  1. डीएनए की संरचना: डीएनए एक वृहद अणु (macromolecule) है जो न्यूक्लियोटाइड की लंबी श्रृंखलाओं से बना होता है। एक मानव कोशिका में, डीएनए में अरबों न्यूक्लियोटाइड हो सकते हैं, जो गुणसूत्रों (chromosomes) के रूप में व्यवस्थित होते हैं। एक डीएनए अणु में हजारों जीन होते हैं, और प्रत्येक जीन एक विशिष्ट प्रोटीन (या आरएनए) के संश्लेषण के लिए जानकारी रखता है।
  2. एंजाइम की संरचना: एंजाइम प्रोटीन होते हैं, जो अमीनो एसिड की श्रृंखलाओं से बने होते हैं। जबकि प्रोटीन बड़े अणु हो सकते हैं, वे आमतौर पर एक एकल जीन द्वारा कोडित होते हैं। एक डीएनए अणु में कई जीन होते हैं, जो कई अलग-अलग प्रोटीन (एंजाइम सहित) के लिए जानकारी रखते हैं।
  3. तुलना: चूंकि एक डीएनए अणु में हजारों जीनों के लिए जानकारी होती है, जो हजारों विभिन्न प्रोटीनों (एंजाइमों) के संश्लेषण को निर्देशित करती है, इसलिए डीएनए का कुल आणविक भार और आकार किसी एक प्रोटीन या एंजाइम की तुलना में बहुत अधिक होता है।

पता लगाने का तरीका:

हम आणविक भार (molecular weight) की तुलना करके इसका पता लगा सकते हैं। विभिन्न अणुओं के आणविक भार की गणना उनके रासायनिक सूत्र और परमाणुओं की संख्या के आधार पर की जा सकती है। डीएनए के लिए, हम न्यूक्लियोटाइड की संख्या और उनके औसत आणविक भार का उपयोग कर सकते हैं। प्रोटीनों के लिए, हम अमीनो एसिड की संख्या और उनके औसत आणविक भार का उपयोग कर सकते हैं। विभिन्न अणुओं के आणविक भार की तुलना करने वाले डेटाबेस या वैज्ञानिक साहित्य का संदर्भ लेकर भी यह जानकारी प्राप्त की जा सकती है। उदाहरण के लिए, मानव जीनोम में लगभग 3 बिलियन बेस जोड़े होते हैं, जबकि एक औसत प्रोटीन का आणविक भार कुछ हजार से लेकर कुछ लाख डाल्टन तक होता है।

प्रश्न 4

मानव की एक कोशिका में डी०एन०ए० की मोलर सान्द्रता क्या होगी? अपने अध्यापक से परामर्श लीजिए।
Solution:

मानव की एक कोशिका में डीएनए की मोलर सांद्रता (Molar Concentration) की गणना करने के लिए, हमें कोशिका में डीएनए की कुल मात्रा और कोशिका के आयतन को जानना होगा। हालांकि, प्रश्न में सीधे तौर पर मोलर सांद्रता (mol/L) नहीं पूछी गई है, बल्कि डीएनए की 'मोलर सांद्रता' को एक अलग तरीके से प्रस्तुत किया गया है, जो संभवतः कोशिका में डीएनए अणुओं की कुल संख्या को मोल में व्यक्त करने का प्रयास है।

स्पष्टीकरण:

मोलरता (Molarity) को सामान्यतः प्रति लीटर विलयन में विलेय के मोलों की संख्या के रूप में परिभाषित किया जाता है (mol/L)। एक मानव कोशिका (द्विगुणित) में लगभग 46 क्रोमोसोम होते हैं (23 जोड़े)। प्रत्येक क्रोमोसोम में एक डीएनए अणु होता है (सूक्ष्म अवस्था में)।

यदि हम प्रश्न के स्रोत के अनुसार गणना करें, तो यह डीएनए अणुओं की कुल संख्या को एवोगैड्रो संख्या से संबंधित करने का प्रयास है:

एक मानव कोशिका (द्विगुणित) में क्रोमोसोम की संख्या = 46

माना कि प्रत्येक क्रोमोसोम में एक डीएनए अणु है।

डीएनए अणुओं की कुल संख्या = 46

एक मोल में अणुओं की संख्या (एवोगैड्रो संख्या) = 6.023 \times 10^{23} अणु

डीएनए की 'मोलर सांद्रता' (जैसा कि प्रश्न में व्याख्या की गई है, संभवतः कुल डीएनए अणुओं को मोल में व्यक्त करना):

\text{कुल मोल} = \frac{\text{डीएनए अणुओं की कुल संख्या}}{\text{एवोगैड्रो संख्या}}

यह गणना प्रश्न के स्रोत में दी गई गणना से भिन्न है। स्रोत में दी गई गणना इस प्रकार है:

\text{मोलर सान्द्रता} = 46 \times 6.023 \times 10^{23} \text{ मोल}

यह गणना गलत है क्योंकि यह 46 को एवोगैड्रो संख्या से गुणा कर रही है, जो डीएनए अणुओं की कुल संख्या को मोल में बदलने के बजाय बहुत बड़ी संख्या दे रही है। सही गणना के अनुसार, 46 डीएनए अणुओं का मतलब होगा \frac{46}{6.023 \times 10^{23}} मोल, जो एक अत्यंत छोटी संख्या होगी।

संभावित व्याख्या: प्रश्न का उद्देश्य शायद यह पूछना था कि कोशिका में डीएनए की कुल मात्रा कितनी है, जिसे मोल में व्यक्त किया जा सके, या शायद यह एक गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया प्रश्न है। यदि हम कोशिका के आयतन को भी ध्यान में रखें, तो मोलर सांद्रता (mol/L) की गणना की जा सकती है, लेकिन इसके लिए कोशिका के आयतन की आवश्यकता होगी।

स्रोत के अनुसार परिणाम: स्रोत में दी गई गणना के अनुसार, परिणाम 2.7 \times 10^{18} मोल है, जो कि एक गलत गणना प्रतीत होती है। यह संभवतः डीएनए की मात्रा को किसी अन्य इकाई में व्यक्त करने का प्रयास है या प्रश्न की व्याख्या में त्रुटि है।

प्रश्न 5

क्या सुकेन्द्रकी कोशिकाओं में प्रतिबन्धन एण्डोन्यूक्लिएज मिलते हैं? अपने उत्तर को सही सिद्ध कीजिए।
Solution:

नहीं, सुकेन्द्रकी (Eukaryotic) कोशिकाओं में सामान्यतः प्रतिबंधन एण्डोन्यूक्लिएज (Restriction Endonuclease) नहीं पाए जाते हैं।

स्पष्टीकरण:

  1. खोज और कार्य: प्रतिबंधन एण्डोन्यूक्लिएज एंजाइम मुख्य रूप से जीवाणुओं (Prokaryotes) में पाए जाते हैं। ये एंजाइम जीवाणुओं को बाहरी डीएनए, जैसे कि बैक्टीरियोफेज (bacteriophage) के डीएनए, से अपनी रक्षा करने में मदद करते हैं। जब कोई बैक्टीरियोफेज जीवाणु को संक्रमित करता है, तो जीवाणु का प्रतिबंधन एंजाइम उस बाहरी डीएनए को पहचान कर काट देता है, जिससे बैक्टीरियोफेज की वृद्धि रुक जाती है।
  2. सुकेन्द्रकी कोशिकाओं में अनुपस्थिति: सुकेन्द्रकी कोशिकाओं में, डीएनए आमतौर पर हिस्टोन प्रोटीन के साथ मिलकर क्रोमेटिन के रूप में व्यवस्थित होता है। इसके अलावा, सुकेन्द्रकी कोशिकाओं में डीएनए पर मिथाइलेशन (methylation) जैसी रासायनिक प्रक्रियाएं होती हैं। यह मिथाइलेशन डीएनए को बाहरी एंजाइमों द्वारा काटे जाने से बचाता है। सुकेन्द्रकी कोशिकाओं को बाहरी डीएनए से रक्षा के लिए प्रतिबंधन एंजाइमों की आवश्यकता नहीं होती है, क्योंकि उनके पास अन्य प्रतिरक्षा तंत्र होते हैं।
  3. डीएनए की सुरक्षा: जीवाणु अपने स्वयं के डीएनए को प्रतिबंधन एंजाइमों से बचाने के लिए एक तंत्र का उपयोग करते हैं जिसे 'संशोधन' (modification) कहा जाता है। इसमें डीएनए के विशिष्ट स्थलों पर मिथाइल समूह जोड़ना शामिल है, जो प्रतिबंधन एंजाइमों द्वारा पहचाने नहीं जाते हैं। सुकेन्द्रकी डीएनए पहले से ही इस तरह से संरक्षित होता है।

इसलिए, प्रतिबंधन एण्डोन्यूक्लिएज सुकेन्द्रकी कोशिकाओं के लिए विशिष्ट नहीं हैं; वे मुख्य रूप से जीवाणुओं में पाए जाने वाले रक्षा तंत्र का हिस्सा हैं।

प्रश्न 6

अच्छे वातन (aeration) व मिश्रित करने के गुण के अतिरिक्त स्टिर्ड टैंक बायोरिऐक्टर की रोटेटर पर हिलने वाले फ्लास्क या कम्पन फ्लास्क (shake flask) की तुलना में क्या अच्छाइयाँ हैं?
Solution:

स्टिर्ड टैंक बायोरिएक्टर (Stirred Tank Bioreactor) की रोटेटर पर हिलने वाले फ्लास्क (Shake Flask) या कम्पन फ्लास्क (Shake Flask) की तुलना में कई महत्वपूर्ण अच्छाइयाँ हैं, विशेष रूप से बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए:

  1. व्यावसायिक उत्पादन क्षमता: बायोरिएक्टर का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह पुनर्योगज प्रोटीन या अन्य जैव-उत्पादों का व्यावसायिक (commercial) या औद्योगिक स्तर पर उत्पादन करने में सक्षम है। शेक फ्लास्क केवल प्रयोगशाला स्तर पर छोटे पैमाने के प्रयोगों के लिए उपयुक्त होते हैं।
  2. नियंत्रित वातावरण: बायोरिएक्टर में तापमान, pH, ऑक्सीजन स्तर (वातन), और मिश्रण (stirring) जैसे महत्वपूर्ण मापदंडों को सटीक रूप से नियंत्रित करने के लिए स्वचालित प्रणालियाँ होती हैं। यह सुनिश्चित करता है कि सूक्ष्मजीव या कोशिकाएं इष्टतम परिस्थितियों में विकसित हों और अधिकतम उत्पाद उत्पन्न करें। शेक फ्लास्क में इन मापदंडों का नियंत्रण बहुत सीमित होता है।
  3. फोम नियंत्रण: बायोरिएक्टर में अक्सर फोम को नियंत्रित करने के लिए एक फोम ब्रेकर (foam breaker) लगा होता है। किण्वन (fermentation) प्रक्रिया के दौरान झाग बनना एक आम समस्या है जो ऑक्सीजन हस्तांतरण को बाधित कर सकती है और संदूषण का कारण बन सकती है।
  4. नमूनाकरण की सुविधा: बायोरिएक्टर से समय-समय पर नमूने (samples) निकालकर उनकी जाँच की जा सकती है। इससे प्रक्रिया की प्रगति की निगरानी की जा सकती है और आवश्यकतानुसार समायोजन किया जा सकता है। शेक फ्लास्क से नमूना लेना अधिक कठिन और संदूषण का जोखिम भरा हो सकता है।
  5. बड़े आयतन का प्रबंधन: बायोरिएक्टर हजारों लीटर के आयतन को संभाल सकते हैं, जिससे बड़ी मात्रा में उत्पाद का उत्पादन संभव होता है। शेक फ्लास्क का आयतन बहुत सीमित होता है (कुछ सौ मिलीलीटर)।
  6. ऑक्सीजन हस्तांतरण: स्टिर्ड टैंक बायोरिएक्टर में कुशल मिश्रण और वातन (aeration) के कारण ऑक्सीजन का हस्तांतरण (oxygen transfer) बहुत प्रभावी होता है, जो एरोबिक सूक्ष्मजीवों के विकास के लिए महत्वपूर्ण है।

संक्षेप में, स्टिर्ड टैंक बायोरिएक्टर बड़े पैमाने पर, नियंत्रित और कुशल जैव-उत्पादन के लिए शेक फ्लास्क की तुलना में कहीं अधिक उन्नत और प्रभावी प्रणाली है।

प्रश्न 7

शिक्षक से परामर्श कर पाँच पैलिंड्रोमिक अनुक्रम उदाहरण एकत्रित कीजिए बेहतर होगा कि क्षारक-युग्म नियमों का पालन करते हुए आप स्वयं पैलिंड्रोमिक अनुक्रम बनाएँ।
Solution:

पैलिंड्रोम (Palindrome) वे वर्ण या शब्द होते हैं जिन्हें आगे और पीछे से पढ़ने पर एक ही अर्थ या रूप प्राप्त होता है (जैसे 'मलयालम' या 'नमन')। डीएनए के संदर्भ में, एक पैलिंड्रोमिक अनुक्रम एक ऐसा अनुक्रम होता है जिसे एक स्ट्रैंड पर 5' से 3' दिशा में पढ़ने पर वही अनुक्रम दूसरे स्ट्रैंड पर 3' से 5' दिशा में पढ़ने पर प्राप्त होता है। दूसरे शब्दों में, यह एक ऐसा अनुक्रम है जो अपने पूरक (complementary) स्ट्रैंड पर उल्टा पढ़ने पर समान होता है।

डीएनए में पैलिंड्रोमिक अनुक्रमों की पहचान:

डीएनए में, पैलिंड्रोमिक अनुक्रमों का अर्थ है कि एक स्ट्रैंड पर एक निश्चित अनुक्रम, जब दूसरे स्ट्रैंड पर पढ़ा जाता है (विपरीत दिशा में), तो वह समान अनुक्रम होता है। यह तब होता है जब अनुक्रम अपने स्वयं के दर्पण प्रतिबिंब (mirror image) के समान होता है, जब क्षारक युग्मन नियमों (A-T, G-C) का पालन किया जाता है।

उदाहरण:

सबसे आम उदाहरण वे अनुक्रम हैं जिन्हें प्रतिबंधन एंजाइम (Restriction Enzymes) पहचानते हैं।

  1. Eco RI का पहचान स्थल:
  2. 5' --- GAATTC --- 3'

    3' --- CTTAAG --- 5'

    यहां, यदि आप ऊपरी स्ट्रैंड को 5' से 3' पढ़ते हैं (GAATTC), और निचले स्ट्रैंड को 3' से 5' पढ़ते हैं (जो कि CTTAAG है), तो यह समान अनुक्रम नहीं है। लेकिन यदि आप ऊपरी स्ट्रैंड को 5' से 3' (GAATTC) पढ़ते हैं, और निचले स्ट्रैंड को भी 5' से 3' दिशा में पढ़ते हैं (जो कि CTTAAG का उल्टा है, यानी GAATTC), तो यह पैलिंड्रोमिक है।

  3. Alu I का पहचान स्थल:
  4. 5' --- AGCT --- 3'

    3' --- TCGA --- 5'

    ऊपरी स्ट्रैंड 5' से 3' (AGCT) और निचले स्ट्रैंड को 5' से 3' (AGCT) पढ़ने पर समान है।

  5. Pst I का पहचान स्थल:
  6. 5' --- CTGCAG --- 3'

    3' --- GACGTC --- 5'

    ऊपरी स्ट्रैंड 5' से 3' (CTGCAG) और निचले स्ट्रैंड को 5' से 3' (CTGCAG) पढ़ने पर समान है।

  7. BamHI का पहचान स्थल:
  8. 5' --- GGATCC --- 3'

    3' --- CCTAGG --- 5'

    ऊपरी स्ट्रैंड 5' से 3' (GGATCC) और निचले स्ट्रैंड को 5' से 3' (GGATCC) पढ़ने पर समान है।

  9. Hind III का पहचान स्थल:
  10. 5' --- AAGCTT --- 3'

    3' --- TTCGAA --- 5'

    ऊपरी स्ट्रैंड 5' से 3' (AAGCTT) और निचले स्ट्रैंड को 5' से 3' (AAGCTT) पढ़ने पर समान है।

    स्वयं पैलिंड्रोमिक अनुक्रम बनाना:

    पैलिंड्रोमिक अनुक्रम बनाने के लिए, आप एक स्ट्रैंड पर एक अनुक्रम लिखें और फिर दूसरे स्ट्रैंड पर उसके पूरक अनुक्रम को विपरीत दिशा में लिखें। यदि दोनों स्ट्रैंड्स को 5' से 3' दिशा में पढ़ने पर समान अनुक्रम प्राप्त होता है, तो वह पैलिंड्रोमिक है।

    उदाहरण के लिए, यदि हम एक स्ट्रैंड पर 5' --- ATGC --- 3' लिखते हैं, तो पूरक स्ट्रैंड 3' --- TACG --- 5' होगा। यदि हम दोनों को 5' से 3' दिशा में देखें, तो यह 5' --- ATGC --- 3' और 5' --- CGTA --- 3' होगा, जो समान नहीं है।

    लेकिन, यदि हम 5' --- ATGC --- 3' के बजाय 5' --- ATAT --- 3' लेते हैं, तो पूरक स्ट्रैंड 3' --- TATA --- 5' होगा। दोनों स्ट्रैंड्स को 5' से 3' दिशा में पढ़ने पर: 5' --- ATAT --- 3' और 5' --- TATA --- 3' (जो कि 3' --- TATA --- 5' का उल्टा है)। यह भी पैलिंड्रोमिक नहीं है।

    सही तरीका यह है कि आप एक स्ट्रैंड पर एक अनुक्रम लिखें, और फिर दूसरे स्ट्रैंड पर उसके पूरक को लिखें। फिर दोनों स्ट्रैंड्स को 5' से 3' दिशा में पढ़ें।

    मान लीजिए हम एक स्ट्रैंड पर 5' --- GATC --- 3' लिखते हैं। पूरक स्ट्रैंड 3' --- CTAG --- 5' होगा। अब दोनों को 5' से 3' दिशा में देखें: पहला स्ट्रैंड 5' --- GATC --- 3' है। दूसरा स्ट्रैंड (3' --- CTAG --- 5') को 5' से 3' दिशा में पढ़ने पर 5' --- GATC --- 3' ही प्राप्त होता है। अतः, 5' --- GATC --- 3' एक पैलिंड्रोमिक अनुक्रम है।

    एक और उदाहरण:

    5' --- ACGT --- 3'

    3' --- TGCA --- 5'

    दोनों स्ट्रैंड्स को 5' से 3' दिशा में पढ़ने पर: 5' --- ACGT --- 3' और 5' --- ACGT --- 3' (3' --- TGCA --- 5' का उल्टा)। यह भी एक पैलिंड्रोमिक अनुक्रम है।

Common mistakes

  • पुनर्योगज प्रोटीनों के अनुप्रयोगों को गलत बताना।
  • प्रतिबंधन एंजाइम की क्रियाविधि को गलत ढंग से चित्रित करना।
  • डीएनए और प्रोटीन के सापेक्ष आणविक आकार को लेकर भ्रमित होना।
  • पैलिंड्रोमिक अनुक्रमों को सही ढंग से न पहचान पाना।

Revision tips

  • पुनर्योगज प्रोटीनों की सूची और उनके विशिष्ट चिकित्सीय उपयोगों को याद करें।
  • प्रतिबंधन एंजाइम की क्रियाविधि को दर्शाने वाले आरेख का अभ्यास करें।
  • पैलिंड्रोमिक अनुक्रमों के उदाहरणों को समझें और स्वयं बनाने का प्रयास करें।
  • बायोरिएक्टरों के लाभों और सामान्य प्रयोगशाला विधियों के बीच अंतर को स्पष्ट करें।

Practice MCQs

Q1. निम्नलिखित में से कौन सा पुनर्योगज प्रोटीन मधुमेह के उपचार में प्रयोग किया जाता है?

Q2. प्रतिबंधन एंजाइम DNA को किन स्थलों पर काटता है?

Q3. सुकेन्द्रकी कोशिकाओं में प्रतिबंधन एंडोन्यूक्लिएज क्यों नहीं पाए जाते हैं?

Q4. स्टिर्ड टैंक बायोरिएक्टर का एक प्रमुख लाभ क्या है?

Q5. निम्नलिखित में से कौन सा एक पैलिंड्रोमिक अनुक्रम का उदाहरण है?

Frequently asked questions

कक्षा 12 जीव विज्ञान के अध्याय 11 में कौन से मुख्य विषय शामिल हैं?

अध्याय 11, 'जैव प्रौद्योगिकी - सिद्धांत व प्रक्रम', पुनर्योगज प्रोटीन के चिकित्सीय अनुप्रयोगों, प्रतिबंधन एंजाइमों की क्रियाविधि, डीएनए और एंजाइम के आणविक आकार की तुलना, मानव कोशिका में डीएनए की मोलर सांद्रता, सुकेन्द्रकी कोशिकाओं में प्रतिबंधन एंडोन्यूक्लिएज की अनुपस्थिति, स्टिर्ड टैंक बायोरिएक्टर के लाभ और पैलिंड्रोमिक अनुक्रमों जैसे विषयों को कवर करता है।

पुनर्योगज प्रोटीन क्या होते हैं और उनके कुछ चिकित्सीय उपयोग क्या हैं?

पुनर्योगज प्रोटीन वे प्रोटीन होते हैं जो पुनर्योगज डीएनए तकनीक का उपयोग करके उत्पादित किए जाते हैं। उदाहरणों में मधुमेह के लिए इन्सुलिन (ह्युमुलिन), बौनेपन के लिए मानव वृद्धि हॉर्मोन (hGH), और कैंसर व वायरल संक्रमणों के लिए इण्टरफेरॉन शामिल हैं।

प्रतिबंधन एंजाइम डीएनए को कैसे काटते हैं?

प्रतिबंधन एंजाइम (Restriction enzyme) डीएनए को विशिष्ट पैलिंड्रोमिक अनुक्रमों पर पहचान कर काटते हैं। उदाहरण के लिए, Eco RI एंजाइम डीएनए में GAATTC अनुक्रम को पहचानता है और उसे काटता है।

स्टिर्ड टैंक बायोरिएक्टर का उपयोग क्यों किया जाता है?

स्टिर्ड टैंक बायोरिएक्टर का उपयोग व्यावसायिक स्तर पर पुनर्योगज प्रोटीन जैसे उत्पादों के उत्पादन के लिए किया जाता है। यह तापमान, pH, वातन और मिश्रण जैसे महत्वपूर्ण मापदंडों को नियंत्रित करने की सुविधा प्रदान करता है।

पैलिंड्रोमिक अनुक्रम क्या होते हैं?

डीएनए में पैलिंड्रोमिक अनुक्रम वे होते हैं जिन्हें दोनों स्ट्रैंड्स पर समान अभिविन्यास (जैसे 5' से 3') में पढ़ने पर समान पढ़ा जाता है। उदाहरण के लिए, 5' GAATTC 3' एक पैलिंड्रोमिक अनुक्रम है।

ये समाधान परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद कर सकते हैं?

ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के लिए विस्तृत और स्पष्ट उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को अवधारणाओं को गहराई से समझने में मदद मिलती है। महत्वपूर्ण विषयों पर ध्यान केंद्रित करके और अभ्यास प्रश्नों को हल करके, छात्र अपनी परीक्षा की तैयारी को मजबूत कर सकते हैं।

Content reviewed by the NCERT Help team. Editorial Team and update policy

NCERT Solutions PDF PDF on NCERT Help. URL unchanged for search indexing.