CBSE Class 12 जीव विज्ञान अध्याय 12: जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग - NCERT समाधान
यह पृष्ठ CBSE कक्षा 12 जीव विज्ञान के अध्याय 12, 'जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग' के लिए विस्तृत NCERT समाधान हिंदी में प्रस्तुत करता है। इसमें आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलों (GM फसलों) के लाभ और हानियों, बीटी (Bt) आविष के कार्य, पारजीनी जीवाणुओं के उदाहरण, और जीन थेरेपी की अवधारणा, विशेष रूप से एडीनोसीन डिएमीनेज (ADA) की कमी के उपचार के संदर्भ में, जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है। समाधानों को स्पष्टता और सरलता से समझाया गया है, जिससे छात्रों को इन जटिल अवधारणाओं को समझने में मदद मिलती है। यह संसाधन परीक्षा की तैयारी और पुनरीक्षण के लिए एक उत्कृष्ट मार्गदर्शिका के रूप में कार्य करता है, जो छात्रों को प्रत्येक प्रश्न के पीछे के तर्क और समाधान प्रक्रिया को समझने में सहायता करता है।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | जीव विज्ञान |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 12. जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग |
Chapter summary
कक्षा 12 जीव विज्ञान के अध्याय 12, 'जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग' के लिए ये NCERT समाधान हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए तैयार किए गए हैं। ये समाधान आनुवंशिक रूप से संशोधित जीवों (GMOs), विशेष रूप से बीटी फसलों और उनके लाभ-हानि, पारजीनी जीवाणुओं के निर्माण, और जीन थेरेपी की प्रक्रिया पर केंद्रित हैं। एडीनोसीन डिएमीनेज (ADA) की कमी के उपचार के उदाहरण के माध्यम से जीन थेरेपी की व्याख्या की गई है। यह अध्याय जैव प्रौद्योगिकी के व्यावहारिक अनुप्रयोगों की गहरी समझ प्रदान करता है।
Learning outcomes
- बीटी (Bt) आविष के कार्य और जीवाणुओं द्वारा स्वयं को न मारने के कारण को समझना।
- पारजीनी जीवाणु की परिभाषा और मानव इंसुलिन उत्पादन जैसे उदाहरणों के साथ इसके अनुप्रयोग को समझना।
- आनुवंशिक रूपान्तरित फसलों के उत्पादन से जुड़े लाभों और हानियों का तुलनात्मक विश्लेषण करना।
- क्राई प्रोटीन्स की प्रकृति, उन्हें उत्पन्न करने वाले जीव और मानव द्वारा उनके उपयोग को स्पष्ट करना।
- जीन चिकित्सा की अवधारणा को समझना और एडीनोसीन डिएमीनेज (ADA) की कमी के उपचार के उदाहरण के माध्यम से इसकी प्रक्रिया का वर्णन करना।
Topics covered
Paper topics
- जैव प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग
- पारजीनी जीवाणु
- मानव इंसुलिन उत्पादन
- आनुवंशिक रूपान्तरित फसलें (GM फसलें)
- बीटी फसलें
- GM फसलों के लाभ
- GM फसलों की हानियाँ
- क्राई प्रोटीन्स
- जीन चिकित्सा (Gene Therapy)
- एडीनोसीन डिएमीनेज (ADA) की कमी
- Severe Combined Immuno Deficiency (SCID)
- जैव पीड़कनाशी
Important topics
- पारजीनी जीवाणु और उनके उदाहरण
- आनुवंशिक रूपान्तरित फसलों के लाभ और हानियाँ
- क्राई प्रोटीन्स और उनका कार्य
- जीन चिकित्सा की अवधारणा और प्रक्रिया
- एडीनोसीन डिएमीनेज (ADA) की कमी का उपचार
PDF preview
Read page by page below. PDF is streamed from the official NCERT website — no download button on this page.
Questions and Solutions
प्रश्न 1
- (क) जीवाणु आविष के प्रति प्रतिरोधी हैं।
- ( ख ) आविष अपरिपक्व है।
- (ग) आविष निष्क्रिय होता है।
- (घ) आविष जीवाणु की विशेष थैली में मिलता है।
प्रश्न 2
उदाहरण: मानव इंसुलिन का उत्पादन करने वाले पारजीनी जीवाणु। मानव इंसुलिन दो पॉलिपेप्टाइड श्रृंखलाओं (श्रृंखला 'ए' और श्रृंखला 'बी') से बना होता है। आनुवंशिक इंजीनियरिंग तकनीकों का उपयोग करके, मानव इंसुलिन की श्रृंखला 'ए' और 'बी' के अनुरूप डीएनए अनुक्रमों को संश्लेषित किया जाता है। इन डीएनए अनुक्रमों को फिर ई. कोलाई (E. coli) जीवाणु के प्लाज्मिड (plasmid) में डाला जाता है। जब इन पुनर्योजित प्लाज्मिड को ई. कोलाई में प्रवेश कराया जाता है, तो ये जीवाणु मानव इंसुलिन की श्रृंखलाओं का उत्पादन करने लगते हैं। इन श्रृंखलाओं को फिर शुद्ध करके मानव इंसुलिन तैयार किया जाता है।
एक अन्य उदाहरण स्यूडोमोनास (Pseudomonas) जीवाणु का पारजीनी रूप है, जिसे तेल रिसाव से होने वाले समुद्री प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए विकसित किया गया है।
प्रश्न 3
लाभ (Advantages):
- पीड़क प्रतिरोध: ये फसलें कीटों के प्रति प्रतिरोधी होती हैं, जैसे बीटी (Bt) फसलें जो विशिष्ट कीटों को मारती हैं, जिससे कीटनाशकों का प्रयोग कम हो जाता है।
- खनिज उपयोग क्षमता में वृद्धि: ये फसलें मिट्टी से खनिजों को अधिक कुशलता से अवशोषित कर सकती हैं।
- अजैविक तनाव सहनशीलता: ये फसलें सूखा, अत्यधिक ठंड, लवणता और उच्च तापमान जैसे प्रतिकूल पर्यावरणीय परिस्थितियों के प्रति अधिक सहनशील होती हैं।
- पोषणिक स्तर में वृद्धि: कुछ GM फसलों के पोषणिक मूल्य को बढ़ाया जा सकता है, जैसे विटामिन-ए समृद्ध धान (गोल्डन राइस)।
- पर्यावरण संरक्षण: कीटनाशकों पर कम निर्भरता से पर्यावरण प्रदूषण कम होता है।
- कटाई पश्चात् नुकसान में कमी: कुछ GM फसलें, जैसे फ्लेवर सेवर टमाटर, कटाई के बाद अधिक समय तक ताज़ी रहती हैं, जिससे नुकसान कम होता है।
- औद्योगिक उपयोग: ऐसी फसलें विकसित की जा सकती हैं जो उद्योगों के लिए वसा, ईंधन या औषधीय पदार्थ (pharmaceuticals) प्रदान करती हैं।
हानियाँ (Disadvantages):
- एलर्जी की संभावना: GM फसलों में कभी-कभी ऐसे जीन (जैसे एंटीबायोटिक प्रतिरोध जीन) हो सकते हैं जो मनुष्यों में एलर्जी प्रतिक्रियाएँ उत्पन्न कर सकते हैं।
- बीज की लागत और उपलब्धता: कुछ GM फसलों में बीज पैदा करने की क्षमता नहीं होती या बीज महंगे होते हैं, जिससे किसानों को हर बार नए बीज खरीदने पड़ते हैं।
- दीर्घकालिक प्रभाव अज्ञात: GM फसलों के पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक प्रभावों का अभी पूरी तरह से अध्ययन नहीं हुआ है, जिससे अनिश्चितता बनी रहती है। ये मानव आंत के लाभदायक जीवाणुओं को भी प्रभावित कर सकते हैं।
- नैतिक चिंताएँ: कुछ लोगों का मानना है कि प्रकृति के कार्यों में हस्तक्षेप करना नैतिक रूप से उचित नहीं है।
- पारिस्थितिक प्रभाव: GM फसलों पर निर्भर रहने वाले अन्य जीवधारियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उदाहरण के लिए, परागकणों के माध्यम से GM जीन लाभकारी कीटों जैसे मधुमक्खियों को प्रभावित कर सकते हैं।
- प्रतिरोध का विकास: कीट और रोगजनक समय के साथ GM फसलों के प्रति प्रतिरोधी बन सकते हैं, जिससे नए और अधिक शक्तिशाली कीटनाशकों की आवश्यकता उत्पन्न हो सकती है।
प्रश्न 4
बैसीलस थुरिंजिएंसिस जीवाणु अपने बीजाणुओं के अंदर इन विष प्रोटीन्स को क्रिस्टल (रवे) के रूप में संगृहीत करता है। इन विष प्रोटीन्स को क्राई (Cry) कहा जाता है, और इन्हें कूटबद्ध करने वाले जीन को क्राई (cry) जीन कहते हैं। क्राई प्रोटीन्स के विभिन्न प्रकार होते हैं, जैसे क्राई 1 एसी (Cry1Ac) और क्राई 2 एबी (Cry2Ab) जो कपास के मुकुल कृमि को नियंत्रित करते हैं, और क्राई 1एबी (Cry1Ab) जो मक्का छेदक को नियंत्रित करता है।
मनुष्य द्वारा क्राई प्रोटीन्स का उपयोग:
मनुष्य क्राई प्रोटीन्स का उपयोग दो मुख्य तरीकों से करता है:
- बीटी फसलें: बैसीलस थुरिंजिएंसिस से क्राई जीन को पृथक करके विभिन्न फसलों, जैसे कपास और मक्का, में समाविष्ट किया गया है। इससे बीटी फसलें विकसित हुई हैं जो अपने आप में कीट प्रतिरोधी होती हैं, जिससे रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम हो जाती है।
- जैव पीड़कनाशी: बैसीलस थुरिंजिएंसिस जीवाणु के बीजाणुओं को सीधे जैव पीड़कनाशी (biopesticide) के रूप में भी प्रयोग किया जाता है। जब इन बीजाणुओं को फसलों पर छिड़का जाता है, तो कीट इन्हें खा लेते हैं और क्राई प्रोटीन उनके पाचन तंत्र में सक्रिय होकर उन्हें मार देता है।
प्रश्न 5
एडीनोसीन डिएमीनेज (ADA) की कमी का उदाहरण:
जीन चिकित्सा का पहला सफल प्रयोग 1990 में एक चार वर्षीय लड़की में एडीनोसीन डिएमीनेज (Adenosine Deaminase - ADA) की कमी को दूर करने के लिए किया गया था। ADA एंजाइम प्रतिरक्षा प्रणाली के सुचारू कार्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस एंजाइम की कमी से गंभीर संयुक्त प्रतिरक्षा न्यूनता (Severe Combined Immuno Deficiency - SCID) नामक रोग हो जाता है, जिसमें व्यक्ति संक्रमणों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो जाता है। यह कमी ADA एंजाइम के लिए जिम्मेदार जीन के अनुपस्थित या निष्क्रिय होने के कारण होती है।
जीन चिकित्सा की प्रक्रिया:
- लसीकाणु पृथक्करण: सबसे पहले, रोगी के रक्त से लसीकाणु (lymphocytes) नामक प्रतिरक्षा कोशिकाओं को निकाला जाता है।
- संवर्धन और जीन प्रविष्टि: इन लसीकाणुओं को प्रयोगशाला में संवर्धित (cultured) किया जाता है। फिर, एक रिट्रोवायरस (retrovirus) वेक्टर का उपयोग करके, सामान्य ADA जीन की एक कार्यात्मक प्रति (copy) को इन कोशिकाओं में प्रवेश कराया जाता है। रिट्रोवायरस को इस तरह संशोधित किया जाता है कि वह रोग उत्पन्न न करे, बल्कि केवल जीन को कोशिकाओं तक पहुँचाने का माध्यम बने।
- कोशिकाओं का प्रत्यारोपण: जीन युक्त इन संशोधित लसीकाणुओं को रोगी के शरीर में वापस पहुँचा दिया जाता है। ये कोशिकाएँ शरीर में जाकर प्रतिरक्षा प्रणाली का हिस्सा बन जाती हैं और ADA एंजाइम का उत्पादन करती हैं, जिससे रोग के लक्षण कम हो जाते हैं।
चुनौतियाँ और स्थायी समाधान:
इस विधि की एक सीमा यह है कि लसीकाणु और अस्थि मज्जा कोशिकाएँ (bone marrow cells) जिनकी जीवन अवधि सीमित होती है, उन्हें समय-समय पर बदलने की आवश्यकता हो सकती है। एक स्थायी समाधान के लिए, यदि ADA जीन को रोगी के अस्थि मज्जा कोशिकाओं में, विशेष रूप से भ्रूणीय अवस्था में, प्रवेश कराया जा सके, तो यह रोग का स्थायी उपचार प्रदान कर सकता है।
Common mistakes
- बीटी आविष के निष्क्रिय होने के कारण को समझने में भ्रम।
- पारजीनी जीवाणु और सामान्य जीवाणु के बीच अंतर को स्पष्ट न कर पाना।
- जीन थेरेपी की प्रक्रिया में रिट्रोवायरस की भूमिका को गलत समझना।
- आनुवंशिक रूपान्तरित फसलों के लाभों और हानियों को ठीक से वर्गीकृत न कर पाना।
Revision tips
- प्रत्येक प्रश्न के उत्तर में दिए गए मुख्य शब्दों जैसे 'आविष', 'पारजीनी', 'क्राई प्रोटीन्स', 'जीन थेरेपी' को रेखांकित करें।
- आनुवंशिक रूपान्तरित फसलों के लाभ और हानि की सूची बनाएं और उनके बीच के अंतर को समझें।
- जीन थेरेपी के उदाहरण (ADA कमी) को चरण-दर-चरण समझने का प्रयास करें।
- जैव प्रौद्योगिकी के विभिन्न अनुप्रयोगों (जैसे Bt फसलें, इंसुलिन उत्पादन) को संबंधित अवधारणाओं से जोड़ें।
Practice MCQs
Q1. बीटी (Bt) आविष के रवे कुछ जीवाणुओं द्वारा बनाए जाते हैं, लेकिन जीवाणु स्वयं को क्यों नहीं मारते हैं?
Explanation: बीटी आविष एक निष्क्रिय प्रोटीन के रूप में बनता है। यह केवल कीटों के पाचन तंत्र में सक्रिय होता है, इसलिए जीवाणु स्वयं इससे प्रभावित नहीं होते।
Q2. निम्नलिखित में से कौन सा एक पारजीनी जीवाणु का उदाहरण है?
Explanation: मानव इंसुलिन का उत्पादन करने वाला ई. कोलाई और तेल रिसाव को साफ करने वाला स्यूडोमोनास दोनों ही आनुवंशिक इंजीनियरिंग द्वारा बनाए गए पारजीनी जीवाणु के उदाहरण हैं।
Q3. आनुवंशिक रूपान्तरित फसलों का एक प्रमुख लाभ क्या है?
Explanation: आनुवंशिक रूपान्तरित फसलें बढ़ी हुई पोषणिक गुणवत्ता, कीटनाशकों पर कम निर्भरता और अजैविक तनाव के प्रति अधिक सहनशीलता जैसे कई लाभ प्रदान करती हैं।
Q4. क्राई प्रोटीन्स का उत्पादन किस जीवाणु द्वारा किया जाता है?
Explanation: क्राई प्रोटीन्स का उत्पादन बैसीलस थुरिंजिएंसिस (Bt) नामक जीवाणु द्वारा किया जाता है, जो विशिष्ट कीटों के लिए विषैले होते हैं।
Q5. जीन चिकित्सा का उपयोग किस आनुवंशिक रोग के उपचार के लिए पहली बार किया गया था?
Explanation: जीन चिकित्सा का पहला सफल प्रयोग 1990 में एडीनोसीन डिएमीनेज (ADA) की कमी से पीड़ित एक चार वर्षीय लड़की के उपचार के लिए किया गया था।
Frequently asked questions
कक्षा 12 जीव विज्ञान के अध्याय 12 में कौन से मुख्य विषय शामिल हैं?
अध्याय 12, 'जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग', में मुख्य रूप से पारजीनी जीवाणु, आनुवंशिक रूपान्तरित फसलों (GM फसलों) के लाभ और हानियाँ, बीटी (Bt) आविष और क्राई प्रोटीन्स, तथा जीन चिकित्सा (Gene Therapy) जैसे विषयों को शामिल किया गया है।
पारजीनी जीवाणु क्या होते हैं और इसका एक उदाहरण क्या है?
पारजीनी जीवाणु वे जीवाणु होते हैं जिनमें किसी अन्य जीव से प्राप्त इच्छित जीन को प्रवेश कराया जाता है। मानव इंसुलिन का उत्पादन करने वाला ई. कोलाई (E. coli) इसका एक प्रमुख उदाहरण है।
जीन चिकित्सा क्या है और यह कैसे काम करती है?
जीन चिकित्सा एक ऐसी विधि है जिसमें रोगी की कोशिकाओं में सामान्य कार्यशील जीन को प्रवेश कराकर आनुवंशिक रोगों का उपचार किया जाता है। एडीनोसीन डिएमीनेज (ADA) की कमी के उपचार में इसका उपयोग किया जाता है।
आनुवंशिक रूपान्तरित फसलों के उत्पादन के क्या लाभ हैं?
GM फसलों के लाभों में पीड़क प्रतिरोध, अजैविक तनाव के प्रति सहनशीलता, बेहतर पोषणिक मूल्य, और रासायनिक पीड़कनाशकों पर कम निर्भरता शामिल हैं।
क्या आनुवंशिक रूपान्तरित फसलों के कोई नुकसान भी हैं?
हाँ, GM फसलों के कुछ संभावित नुकसानों में एलर्जी की संभावना, बीज उत्पादन क्षमता में कमी, और पर्यावरण व अन्य जीवों पर दीर्घकालिक प्रभाव शामिल हो सकते हैं।
क्राई प्रोटीन्स क्या हैं और वे कैसे कार्य करते हैं?
क्राई प्रोटीन्स बैसीलस थुरिंजिएंसिस (Bt) द्वारा उत्पादित विषैले प्रोटीन होते हैं जो विशिष्ट कीटों के लार्वा को मारते हैं। ये प्रोटीन कीटों के पाचन तंत्र में सक्रिय होकर उन्हें नष्ट कर देते हैं।
Content reviewed by the NCERT Help team. Editorial Team and update policy
NCERT Solutions PDF PDF on NCERT Help. URL unchanged for search indexing.