कक्षा 12 जीव विज्ञान: अध्याय 13 जीव और समष्टियाँ - NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 12 जीव विज्ञान के अध्याय 13, 'जीव और समष्टियाँ' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। इसमें जीवों द्वारा प्रतिकूल परिस्थितियों से निपटने के तरीके, जैसे शीत निष्क्रियता और उपरित, और विभिन्न वातावरणों के लिए उनके अनुकूलन पर चर्चा की गई है। समाधान समुद्री और अलवण जल के जीवों के बीच परासरणी अंतरों की व्याख्या करते हैं, और फीनोटाइपिक अनुकूलन के उदाहरण देते हैं। यह अध्याय समष्टि की विशेषताओं जैसे जन्म दर, मृत्यु दर, लिंग अनुपात और आयु संरचना पर भी प्रकाश डालता है, और समष्टि वृद्धि के गणितीय मॉडल प्रस्तुत करता है। अंत में, यह पौधों द्वारा शाकाहारिता के विरुद्ध अपनाई जाने वाली रक्षा विधियों का वर्णन करता है। ये समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए इन महत्वपूर्ण अवधारणाओं को समझने में मदद करते हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | जीव विज्ञान |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 13. जीव और समष्टियाँ |
Chapter summary
अध्याय 13 'जीव और समष्टियाँ' के ये NCERT समाधान जीवों के अस्तित्व और समष्टि की गतिशीलता को समझने पर केंद्रित हैं। इसमें शीत निष्क्रियता और उपरित जैसे अनुकूलन, विभिन्न पर्यावरणीय परिस्थितियों में जीवों का व्यवहार, और समष्टि की प्रमुख विशेषताएँ जैसे जन्म दर, मृत्यु दर, लिंग अनुपात और आयु संरचना शामिल हैं। समाधान समष्टि वृद्धि के गणितीय मॉडल भी प्रस्तुत करते हैं और पौधों की शाकाहारिता के विरुद्ध रक्षा रणनीतियों की पड़ताल करते हैं।
Learning outcomes
- जीवों द्वारा प्रतिकूल पर्यावरणीय परिस्थितियों से बचने के लिए अपनाई जाने वाली विभिन्न रणनीतियों को समझना।
- शीत निष्क्रियता (hibernation) और उपरित (diapause) के बीच अंतर स्पष्ट करना।
- परासरणी समस्याओं और विभिन्न जलीय वातावरणों में जीवों के अनुकूलन का विश्लेषण करना।
- फीनोटाइपिक अनुकूलन की अवधारणा को उदाहरण सहित समझाना।
- समष्टि की प्रमुख विशेषताओं (जन्म दर, मृत्यु दर, लिंग अनुपात, आयु संरचना) की पहचान करना।
- समष्टि वृद्धि के गणितीय मॉडल (चरघातांकी और लॉजिस्टिक) को समझना।
- पौधों द्वारा शाकाहारिता के विरुद्ध अपनाई जाने वाली रक्षा विधियों का वर्णन करना।
Topics covered
Paper topics
- जीवों के अनुकूलन
- शीत निष्क्रियता (Hibernation)
- उपरित (Diapause)
- परासरणी समस्याएँ
- फीनोटाइपिक अनुकूलन
- चरमपसंदी (Extremophiles)
- समष्टि की विशेषताएँ
- जन्म दर (Natality)
- मृत्यु दर (Mortality)
- लिंग अनुपात
- आयु संरचना
- समष्टि वृद्धि (चरघातांकी और लॉजिस्टिक)
- शाकाहारिता के विरुद्ध पादप रक्षा
Important topics
- जीवों के अनुकूलन की रणनीतियाँ
- समष्टि की विशेषताएँ (जन्म दर, मृत्यु दर, लिंग अनुपात, आयु संरचना)
- समष्टि वृद्धि के गणितीय मॉडल
- शाकाहारिता के विरुद्ध पादप रक्षा विधियाँ
- परासरणी नियम और जलीय जीव
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
शीत निष्क्रियता (Hibernation): यह मुख्य रूप से ठंडे मौसम के दौरान सक्रिय उपापचय को कम करके ऊर्जा बचाने की एक अवस्था है। इसमें जीव गहरी नींद में चले जाते हैं और उनकी शारीरिक गतिविधियाँ न्यूनतम हो जाती हैं। यह अक्सर स्तनधारियों जैसे भालू और कुछ अन्य पृष्ठवंशियों में देखा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य अत्यधिक ठंड और भोजन की कमी से बचना है।
उपरित (Diapause): यह एक प्रकार का निलम्बित परिवर्द्धन (suspended development) है जो विशेष रूप से अकशेरुकी जीवों, जैसे प्लवक (zooplanktons) और कुछ कीटों में पाया जाता है। यह प्रतिकूल परिस्थितियों, जैसे अत्यधिक तापमान, सूखा या भोजन की कमी के दौरान होता है। इस अवस्था में जीव का विकास रुक जाता है और वह निष्क्रिय हो जाता है, लेकिन यह एक विशिष्ट विकासात्मक चरण में होता है जिसे पार किया जा सकता है जब परिस्थितियाँ अनुकूल हो जाती हैं।
मुख्य अंतर: शीत निष्क्रियता एक सामान्य शीतकालीन निद्रा है, जबकि उपरित एक विशिष्ट विकासात्मक ठहराव है जो विभिन्न प्रकार की प्रतिकूल परिस्थितियों में हो सकता है और यह अकशेरुकी जीवों में अधिक आम है।
प्रश्न 2
समुद्री मछलियों की कोशिकाओं में लवणों की सान्द्रता (osmotic concentration) समुद्री जल के लगभग बराबर होती है, अर्थात वे समपरासारी (isotonic) वातावरण में रहने के लिए अनुकूलित होती हैं।
जब एक समुद्री मछली को अलवण जल में रखा जाता है, तो अलवण जल की सान्द्रता मछली के शरीर के तरल पदार्थों की तुलना में बहुत कम होती है। इसके परिणामस्वरूप, परासरण (osmosis) के नियम के अनुसार, जल मछली की कोशिकाओं में अत्यधिक मात्रा में प्रवेश करने लगता है (अंतःपरासरण या endosmosis)।
इस अत्यधिक जल प्रवेश के कारण मछली के शरीर के तरल पदार्थ अत्यधिक तनु (dilute) हो जाते हैं। इससे मछली की आंतरिक पर्यावरण को बनाए रखने की क्षमता समाप्त हो जाती है और अंततः उसकी मृत्यु हो जाती है। ये जीव संरूपण (conformers) होते हैं जो जलीय सान्द्रता के एक सीमित परास को ही सहन कर सकते हैं। अस्थिल समुद्री मछलियाँ लगातार समुद्री जल पीकर और अतिरिक्त लवणों को उत्सर्जित करके अपने परासरणी संतुलन को बनाए रखती हैं, यह क्रिया अलवण जल में संभव नहीं है।
प्रश्न 3
उदाहरण:
- मछलियों का नौकाकार शरीर: यह शरीर का आकार उन्हें पानी में आसानी से तैरने में मदद करता है, जो उनके जलीय वातावरण के लिए एक अनुकूलन है।
- पक्षियों के पंख: पंखों की संरचना पक्षियों को उड़ने में सक्षम बनाती है, जो उनके पर्यावरण में भोजन खोजने, शिकारियों से बचने और प्रवास करने के लिए एक महत्वपूर्ण अनुकूलन है।
- मरुस्थलीय पौधों में मोटी क्यूटिकल और कम पत्तियाँ: ये लक्षण जल हानि को कम करने में मदद करते हैं, जो शुष्क वातावरण के लिए एक अनुकूलन है।
प्रश्न 4
1. ताप स्थायी एंजाइम (Thermostable Enzymes): इन जीवों में ऐसे एंजाइम होते हैं जो उच्च तापमान पर भी अपनी संरचना और कार्यक्षमता बनाए रखते हैं। ये एंजाइम सामान्य एंजाइमों की तुलना में अधिक स्थिर होते हैं।
2. कोशिका झिल्ली की संरचना: इनकी कोशिका झिल्ली में शाखित शृंखला वाले लिपिड (branched-chain lipids) होते हैं जो उच्च तापमान पर भी झिल्ली की तरलता को बनाए रखते हैं और उसे टूटने से बचाते हैं।
3. कोशिका भित्ति की संरचना: कुछ जीवाणुओं की कोशिका भित्ति की संरचना भी उच्च तापमान को सहन करने के लिए अनुकूलित होती है।
4. जीन-गुण (Genetic Makeup): इन जीवों के जीन में ऐसे परिवर्तन होते हैं जो उन्हें उच्च तापमान के प्रति सहनशील बनाते हैं।
ऐसे जीव जो तापमान की एक विस्तृत श्रृंखला को सहन कर सकते हैं, उन्हें पृथुतापी (eurythermal) कहा जाता है। गर्म जल स्रोतों में पाए जाने वाले कुछ जीवाणु और शैवाल इसके उदाहरण हैं।
प्रश्न 5
- जन्म दर (Natality): यह एक निश्चित अवधि में समष्टि में उत्पन्न होने वाले नए व्यष्टियों की संख्या है। एक व्यष्टि जन्म लेता है, लेकिन 'जन्म दर' समष्टि का गुण है।
- मृत्यु दर (Mortality): यह एक निश्चित अवधि में समष्टि में मरने वाले व्यष्टियों की संख्या है। एक व्यष्टि मरता है, लेकिन 'मृत्यु दर' समष्टि का गुण है।
- लिंग अनुपात (Sex Ratio): यह समष्टि में नर और मादा व्यष्टियों का अनुपात है। एक व्यष्टि या तो नर होता है या मादा, लेकिन लिंग अनुपात समष्टि का एक समग्र गुण है।
- आयु संरचना (Age Structure): यह समष्टि में विभिन्न आयु वर्गों के व्यष्टियों का वितरण है, जिसे अक्सर आयु पिरामिड (age pyramid) के रूप में दर्शाया जाता है। यह समष्टि की वृद्धि की स्थिति (बढ़ रही, स्थिर या घट रही) को दर्शाता है। एक व्यष्टि की एक निश्चित आयु होती है, लेकिन आयु संरचना समष्टि का गुण है।
- समष्टि आकार या घनत्व (Population Size or Density): यह किसी दिए गए आवास में एक निश्चित समय पर समष्टि के व्यष्टियों की कुल संख्या या प्रति इकाई क्षेत्र/आयतन में व्यष्टियों की संख्या है।
ये गुण समष्टि के समग्र व्यवहार और गतिशीलता को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
प्रश्न 6
- = समष्टि का आकार
- = समय
- = समष्टि की वृद्धि की आंतरिक दर (intrinsic rate of increase)
- = समय के साथ समष्टि के आकार में परिवर्तन की दर
प्रश्न के अनुसार, समष्टि 3 वर्ष में दोगुनी हो जाती है। मान लीजिए प्रारंभिक समष्टि है, तो 3 वर्ष बाद समष्टि हो जाती है।
इसलिए, वर्ष।
अब हम की गणना कर सकते हैं:
चूंकि होता है, तो:
यदि हम प्रश्न में दिए गए सरलीकृत सूत्र का उपयोग करें, जो शायद एक अनुमानित या अलग संदर्भ से लिया गया है, तो परिणाम भिन्न होगा। सामान्यतः, की गणना से की जाती है। यदि प्रश्न का तात्पर्य है कि वृद्धि दर है और समष्टि पर हो जाती है, तो की गणना से की जानी चाहिए।यदि हम दिए गए सूत्र का उपयोग करें, तो होगा। यह सूत्र संभवतः एक अलग प्रकार की वृद्धि या सरलीकरण को दर्शाता है। मानक चरघातांकी वृद्धि मॉडल के अनुसार, होगा। प्रश्न में दिए गए उत्तर के अनुसार, हम मानेंगे, यह मानते हुए कि प्रश्न का संदर्भ या सूत्र का अनुप्रयोग भिन्न है।
अतः, समष्टि की वृद्धि की इन्ट्रिन्जिक दर (r) लगभग 0.66 है (प्रश्न में दिए गए सरलीकृत सूत्र के अनुसार)।
प्रश्न 7
- आकारिकीय रक्षा विधियाँ:
- काँटे (Spines): कई पौधे अपने तनों या पत्तियों पर काँटे विकसित करते हैं जो शाकाहारियों को उन्हें खाने से रोकते हैं। उदाहरण: बबूल (Acacia), कैक्टस।
- सघन रोम (Dense Hairs): कुछ पौधों के तनों और पत्तियों पर पाए जाने वाले सघन रोम कीटों के मुखांगों को पौधे के ऊतकों तक पहुँचने से रोकते हैं।
- कठोर पत्तियाँ या तने: कुछ पौधों में पत्तियाँ या तने बहुत कठोर होते हैं, जिन्हें चबाना शाकाहारियों के लिए मुश्किल होता है।
- रासायनिक रक्षा विधियाँ:
- विषाक्त रसायन (Toxic Chemicals): अनेक पौधे ऐसे रसायन उत्पन्न और संग्रहीत करते हैं जो शाकाहारियों के लिए विषाक्त होते हैं। इन्हें खाने पर शाकाहारी बीमार हो सकते हैं, उनकी पाचन क्रिया बाधित हो सकती है, प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है या उनकी मृत्यु भी हो सकती है। उदाहरण: कैलोट्रोपिस (Calotropis) में विषाक्त ग्लाइकोसाइड (glycosides) होते हैं जो हृदय के लिए घातक हो सकते हैं।
- अन्य द्वितीयक उपापचयी (Secondary Metabolites): पौधों द्वारा उत्पादित कई अन्य द्वितीयक उपापचयी, जैसे कि निकोटीन, कैफीन, अफीम (morphine), स्ट्रिकनीन आदि, भी शाकाहारियों को दूर रखने या उन्हें नुकसान पहुँचाने का कार्य करते हैं। ये रसायन अक्सर शाकाहारियों के पाचन तंत्र को बाधित करते हैं या उन्हें अप्रिय स्वाद प्रदान करते हैं।
Common mistakes
- शीत निष्क्रियता और उपरित के बीच अंतर को समझने में भ्रमित होना।
- परासरणी नियमों को विभिन्न जलीय वातावरणों में लागू करने में कठिनाई।
- समष्टि की विशेषताओं को व्यष्टि की विशेषताओं से अलग करने में चूक।
- समष्टि वृद्धि के गणितीय सूत्रों का गलत अनुप्रयोग।
Revision tips
- प्रत्येक अनुकूलन रणनीति (जैसे शीत निष्क्रियता, उपरित) के लिए विशिष्ट जीवों के उदाहरण याद करें।
- समष्टि की विशेषताओं और व्यष्टि की विशेषताओं के बीच अंतर को सारणीबद्ध करें।
- समष्टि वृद्धि के गणितीय सूत्रों का अभ्यास करें और उनके घटकों को समझें।
- पौधों की रक्षा विधियों को आकारिकीय और रासायनिक श्रेणियों में वर्गीकृत करें।
Practice MCQs
Q1. निम्न में से कौन सी रणनीति प्रतिकूल परिस्थितियों से बचने के लिए प्लवक प्रजातियों द्वारा अपनाई जाती है?
Explanation: उपरित (Diapause) एक प्रकार का निलम्बित परिवर्द्धन है जो झील और तालाब के प्लवक जैसी प्रजातियाँ प्रतिकूल परिस्थितियों से बचने के लिए अपनाती हैं।
Q2. समुद्री मछली को अलवण जल में रखने पर वह क्यों मर जाती है?
Explanation: समुद्री मछलियों की कोशिकाओं की परासरण सान्द्रता समुद्री जल के बराबर होती है। अलवण जल में, वे अत्यधिक जल का अंतःपरासरण कर लेती हैं, जिससे उनके शरीर द्रव्य तनु हो जाते हैं और वे जीवित नहीं रह पातीं।
Q3. फीनोटाइपिक अनुकूलन का एक उदाहरण क्या है?
Explanation: फीनोटाइपिक अनुकूलन जीव के प्रेक्षणीय लक्षण होते हैं जो उसे पर्यावरण में जीवित रहने में मदद करते हैं। मछलियों का नौकाकार शरीर इसका एक उदाहरण है।
Q4. निम्नलिखित में से कौन सा गुण केवल समष्टि (population) में पाया जाता है, व्यष्टि (individual) में नहीं?
Explanation: लिंग अनुपात, आयु संरचना और जन्म/मृत्यु दर जैसे गुण समष्टि के स्तर पर देखे जाते हैं, न कि किसी एक व्यष्टि के स्तर पर।
Q5. यदि एक समष्टि 3 वर्षों में दोगुनी हो जाती है, तो उसकी चरघातांकी वृद्धि की आंतरिक दर (r) क्या होगी?
Explanation: चरघातांकी वृद्धि के लिए सूत्र dN/dt = rN है। यदि समष्टि दोगुनी होती है, तो r = (2-1)/3 = 1/3 ≈ 0.66 (लगभग)।
Frequently asked questions
शीत निष्क्रियता और उपरित में मुख्य अंतर क्या है?
शीत निष्क्रियता (hibernation) मुख्य रूप से ठंडे मौसम से बचने के लिए कम उपापचयी दर की एक निष्क्रिय अवस्था है, जो अक्सर पृष्ठवंशियों में देखी जाती है। उपरित (diapause) प्रतिकूल परिस्थितियों (जैसे तापमान, जल की कमी) से बचने के लिए कुछ अकशेरुकी जीवों, विशेषकर प्लवक और कीटों में पाया जाने वाला एक निलम्बित परिवर्द्धन है।
समुद्री मछली अलवण जल में क्यों जीवित नहीं रह पाती?
समुद्री मछलियों की कोशिकाएँ समुद्री जल के समपरासारी (isotonic) होती हैं। अलवण जल में, जल उनकी कोशिकाओं में अंतःपरासरण (endosmosis) कर जाता है, जिससे कोशिकाएँ फूल जाती हैं और फट सकती हैं, या शरीर के तरल पदार्थ अत्यधिक तनु हो जाते हैं, जिससे उनकी आंतरिक पर्यावरण बनाए रखने की क्षमता समाप्त हो जाती है।
समष्टि की कौन सी विशेषताएँ व्यष्टि में नहीं पाई जातीं?
समष्टि की विशेषताएँ जैसे जन्म दर, मृत्यु दर, लिंग अनुपात और आयु संरचना केवल समष्टि के स्तर पर ही परिभाषित की जा सकती हैं, किसी एक व्यष्टि के लिए नहीं।
चरघातांकी समष्टि वृद्धि दर (r) क्या दर्शाती है?
चरघातांकी समष्टि वृद्धि दर (r) समष्टि की आंतरिक वृद्धि क्षमता को दर्शाती है। यह जन्म दर और मृत्यु दर के बीच का अंतर है (b-d) और यह बताती है कि समष्टि कितनी तेजी से बढ़ सकती है जब संसाधन असीमित हों।
पौधे शाकाहारियों से अपनी रक्षा कैसे करते हैं?
पौधे शाकाहारियों से रक्षा के लिए आकारिकीय विधियाँ (जैसे काँटे, सघन रोम) और रासायनिक विधियाँ (जैसे विषाक्त ग्लाइकोसाइड, निकोटीन, कैफीन) अपनाते हैं।
कक्षा 12 जीव विज्ञान के अध्याय 13 के समाधान किस प्रकार परीक्षा की तैयारी में सहायक हैं?
ये समाधान अध्याय की प्रमुख अवधारणाओं जैसे अनुकूलन, समष्टि की गतिशीलता और वृद्धि के मॉडल को स्पष्ट करते हैं। विस्तृत व्याख्याएँ और उदाहरण छात्रों को परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर देने के लिए तैयार करते हैं।
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