कक्षा 12 जीव विज्ञान: अध्याय 14 पारितंत्र NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 12 जीव विज्ञान के अध्याय 14, 'पारितंत्र' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। इसमें पारितंत्र की मूल बातें, जैसे उत्पादक, उपभोक्ता, अपघटक, खाद्य श्रृंखला, खाद्य जाल, ऊर्जा प्रवाह और पोषक तत्व चक्र शामिल हैं। समाधानों में रिक्त स्थान भरना, बहुविकल्पीय प्रश्न और विभिन्न अवधारणाओं के बीच अंतर स्पष्ट करना शामिल है। यह छात्रों को पारितंत्र की जटिलताओं को समझने, विभिन्न पारिस्थितिक तंत्रों के बीच संबंधों का विश्लेषण करने और जैविक प्रणालियों में ऊर्जा और पदार्थ के प्रवाह को समझने में मदद करता है। ये समाधान परीक्षा की तैयारी और अवधारणाओं की गहन समझ के लिए एक उत्कृष्ट संसाधन हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 12
Subjectजीव विज्ञान
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter14. पारितंत्र

Chapter summary

अध्याय 14 'पारितंत्र' के ये NCERT समाधान छात्रों को पारिस्थितिक तंत्र की संरचना और कार्यों की गहन समझ प्रदान करते हैं। इसमें उत्पादकों, उपभोक्ताओं और अपघटकों की भूमिका, विभिन्न प्रकार की खाद्य श्रृंखलाओं और खाद्य जालों, पिरामिडों के प्रकार (संख्या, जैवभार, ऊर्जा), और पारिस्थितिक तंत्र में ऊर्जा प्रवाह की व्याख्या की गई है। समाधानों में रिक्त स्थानों को भरने, बहुविकल्पीय प्रश्नों के उत्तर देने और महत्वपूर्ण अवधारणाओं के बीच अंतर करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जो छात्रों को परीक्षा के लिए प्रभावी ढंग से तैयार करने में सहायता करते हैं।

Learning outcomes

  • पारितंत्र के विभिन्न घटकों (उत्पादक, उपभोक्ता, अपघटक) को पहचानना और समझना।
  • खाद्य श्रृंखला और खाद्य जाल के बीच अंतर करना सीखना।
  • पारितंत्र में ऊर्जा प्रवाह की दिशा और दक्षता को समझना।
  • संख्या, जैवभार और ऊर्जा के पिरामिडों के प्रकारों का विश्लेषण करना।
  • चारण खाद्य श्रृंखला और अपरद खाद्य श्रृंखला के बीच अंतर स्पष्ट करना।
  • उत्पादन और अपघटन की प्रक्रियाओं को समझना।

Topics covered

Paper topics

  • पारितंत्र की परिभाषा और घटक
  • उत्पादक, उपभोक्ता और अपघटक
  • चारण खाद्य श्रृंखला
  • अपरद खाद्य श्रृंखला
  • उत्पादन (प्राथमिक और द्वितीयक)
  • अपघटन
  • ऊर्जा प्रवाह
  • पिरामिड (संख्या, जैवभार, ऊर्जा)
  • ऊर्ध्ववर्ती पिरामिड
  • अधोवर्ती पिरामिड
  • खाद्य श्रृंखला
  • खाद्य जाल

Important topics

  • पारितंत्र के घटक और कार्य
  • खाद्य श्रृंखला बनाम खाद्य जाल
  • ऊर्जा प्रवाह और दक्षता
  • पिरामिडों के प्रकार और उनकी व्याख्या
  • उत्पादन और अपघटन की प्रक्रियाएं

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Questions and Solutions

प्रश्न 1. रिक्त स्थानों को भरिए।

(क) पादपों को ...... कहते हैं, क्योंकि वे कार्बन डाइऑक्साइड का स्थिरीकरण करते हैं। (ख) ऐसे पारितन्त्र में जिसमें वृक्ष प्रभावी हो संख्या का पिरामिड ........ प्रकार का है। (ग) एक जलीय पारितन्त्र के लिए सीमाकारी कारक ...... है। (घ) हमारे पारितन्त्र में सामान्य अपरदहारी ..... है। (ङ) पृथ्वी पर कार्बन का प्रमुख भण्डार ...... है।
Solution: (क) पादपों को **उत्पादक** कहते हैं, क्योंकि वे प्रकाश संश्लेषण द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड का स्थिरीकरण करके अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। (ख) ऐसे पारितंत्र में जिसमें वृक्ष प्रभावी हों, जैसे कि एक जंगल, संख्या का पिरामिड **उल्टा** प्रकार का होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि एक बड़े वृक्ष की तुलना में उस पर रहने वाले छोटे जीवों (जैसे पक्षी, कीड़े) की संख्या अधिक हो सकती है। (ग) एक जलीय पारितंत्र के लिए **प्रकाश** एक महत्वपूर्ण सीमाकारी कारक है। प्रकाश की गहराई और उपलब्धता जलीय जीवों, विशेषकर पादपप्लवकों के प्रकाश संश्लेषण और वितरण को प्रभावित करती है। (घ) हमारे पारितंत्र में सामान्य अपरदहारी **केंचुआ** है। केंचुए मृत कार्बनिक पदार्थों को खाते हैं और उन्हें सरल पदार्थों में तोड़कर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाते हैं। (ङ) पृथ्वी पर कार्बन का प्रमुख भण्डार **महासागर (Oceans)** है। महासागर वायुमंडल से बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करते हैं और इसमें घुले हुए कार्बनिक और अकार्बनिक यौगिकों के रूप में संग्रहीत करते हैं।

प्रश्न 2. एक खाद्य शृंखला में निम्नलिखित में सर्वाधिक संख्या किसकी होती है?

एक खाद्य शृंखला में निम्नलिखित में सर्वाधिक संख्या किसकी होती है— (क) उत्पादक, (ख) प्राथमिक उपभोक्ता, (ग) द्वितीयक उपभोक्ता, (घ) अपघटक।
Solution: एक खाद्य शृंखला में **(घ) अपघटक** की संख्या सर्वाधिक होती है। अपघटक (जैसे बैक्टीरिया और कवक) मृत जीवों और अपशिष्ट पदार्थों को तोड़ते हैं, और उनकी भूमिका पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण होती है। उनकी संख्या अक्सर उत्पादकों और उपभोक्ताओं की कुल संख्या से कहीं अधिक होती है क्योंकि वे सभी पोषण स्तरों से पोषक तत्वों को पुनर्चक्रित करते हैं।

प्रश्न 3. एक झील में द्वितीय (दूसरा) पोषण स्तर होता है?

एक झील में द्वितीय ( दूसरा ) पोषण स्तर होता है— (क) पादपप्लवक, (ख) प्राणिप्लवक, (ग) नितलक (बेंथोस), (घ) मछलियाँ।
Solution: एक झील में द्वितीय पोषण स्तर **(ख) प्राणिप्लवक (Zooplanktons)** का होता है। प्रथम पोषण स्तर पादपप्लवक (Phytoplanktons) का होता है, जो उत्पादक होते हैं। प्राणिप्लवक इन पादपप्लवकों को खाते हैं, इसलिए वे प्राथमिक उपभोक्ता (द्वितीय पोषण स्तर) कहलाते हैं। नितलक (बेंथोस) झील के तल पर रहने वाले जीव हैं, और मछलियाँ विभिन्न पोषण स्तरों पर हो सकती हैं।

प्रश्न 4. द्वितीयक उत्पादक हैं?

द्वितीयक उत्पादक हैं— (क) शाकाहारी (शाकभक्षी), (ख) उत्पादक, (ग) मांसाहारी (मांसभक्षी), (घ) कोई भी नहीं।
Solution: द्वितीयक उत्पादक **(क) शाकाहारी (शाकभक्षी)** होते हैं। उत्पादक (जैसे पौधे) प्राथमिक उत्पादक होते हैं। शाकाहारी जीव इन प्राथमिक उत्पादकों को खाते हैं और द्वितीयक उत्पादक कहलाते हैं। मांसाहारी जीव शाकाहारियों को खाते हैं और तृतीयक उत्पादक कहलाते हैं।

प्रश्न 5. आपतित सौर विकिरण में प्रकाश संश्लेषणात्मक सक्रिय विकिरण का क्या प्रतिशत होता है?

आपतित सौर विकिरण में प्रकाश संश्लेषणात्मक सक्रिय विकिरण का क्या प्रतिशत होता है— (क) 100%, (ख) 50%, (ग) 1-5%, (घ) 2-10%.
Solution: आपतित सौर विकिरण का लगभग **(ख) 50%** प्रकाश संश्लेषणात्मक सक्रिय विकिरण (Photosynthetically Active Radiation - PAR) होता है। यह वह विकिरण है जिसका उपयोग पौधे प्रकाश संश्लेषण के लिए करते हैं। शेष विकिरण या तो परावर्तित हो जाता है, अवशोषित हो जाता है, या अन्य तरंग दैर्ध्य का होता है जिसका उपयोग प्रकाश संश्लेषण में नहीं होता है।

प्रश्न 6. निम्नलिखित में अन्तर स्पष्ट कीजिए:

(क) चारण खाद्य शृंखला एवं अपरद खाद्य शृंखला (ख) उत्पादन तथा अपघटन (ग) ऊर्घ्ववर्ती (शिखरांश) व अघोवर्ती पिरामिङ (घ) खाद्य शृंखला व खाद्य जाल (ङ) कर्कट (लिटर) व अपरद (डेट्रिटस) (च) प्राथमिक व द्वितीयक उत्पादकता
Solution: (क) चारण खाद्य शृंखला एवं अपरद खाद्य शृंखला में अन्तर (Differences between Grazing Food Chain and Detritus Food Chain)

चारण खाद्य शृंखला (Grazing Food Chain) और अपरद खाद्य शृंखला (Detritus Food Chain) में मुख्य अंतर इस प्रकार हैं:

क्र.सं. चारण खाद्य शृंखला (Grazing Food Chain) अपरद खाद्य शृंखला (Detritus Food Chain)
1. यह हरे पौधों (उत्पादकों) से शुरू होती है। यह मृत कार्बनिक पदार्थों (अपरद) से शुरू होती है।
2. ऊर्जा का प्रवाह उत्पादकों से शाकाहारियों और फिर मांसाहारियों की ओर बढ़ता है। ऊर्जा का प्रवाह अपरद से अपरदहारियों (detritivores) और फिर उनके परभक्षियों की ओर बढ़ता है।
3. जलीय पारितंत्रों में ऊर्जा प्रवाह का यह मुख्य माध्यम है। स्थलीय पारितंत्रों में ऊर्जा प्रवाह का यह एक महत्वपूर्ण माध्यम है, खासकर जहाँ पत्तियाँ और अन्य कार्बनिक पदार्थ जमा होते हैं।
4. ऊर्जा का प्रत्यक्ष स्रोत सूर्य है। इसमें ऊर्जा का स्रोत मृत कार्बनिक पदार्थ होते हैं, जो अंततः सौर ऊर्जा से ही प्राप्त होती है।
(ख) उत्पादन तथा अपघटन में अन्तर (Differences between Production and Decomposition)

उत्पादन और अपघटन पारिस्थितिकी तंत्र की दो विपरीत लेकिन महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं हैं:

क्र.सं. उत्पादन (Production) अपघटन (Decomposition)
1. हरे पौधे प्रकाश संश्लेषण द्वारा अकार्बनिक पदार्थों (जैसे CO2, जल) से कार्बनिक भोज्य पदार्थ (बायोमास) का संश्लेषण करते हैं। यह प्रक्रिया सौर प्रकाश और पर्णहरित की उपस्थिति में होती है। जीवाणु, कवक जैसे अपघटक मृत जटिल कार्बनिक पदार्थों को सरल अकार्बनिक पदार्थों में विघटित कर देते हैं। इस प्रक्रिया में ऊर्जा, जल तथा CO2 मुक्त होती है।
2. सौर विकिरण ऊर्जा रासायनिक ऊर्जा के रूप में कार्बनिक भोज्य पदार्थों में संचित हो जाती है। इस संचित ऊर्जा को प्राथमिक उत्पादन कहते हैं। इस प्रक्रिया में संचित रासायनिक ऊर्जा ऊष्मा के रूप में मुक्त होती है।
3. यह एक उपचयी (anabolic) क्रिया है, जिसमें सरल पदार्थ जुड़कर जटिल पदार्थ बनाते हैं। यह एक अपचयी (catabolic) क्रिया है, जिसमें जटिल पदार्थ टूटकर सरल पदार्थ बनाते हैं।
4. यह ऊर्जा को पकड़ने (trap) की क्रिया है। इस क्रिया में ऊर्जा मुक्त होती है।
(ग) ऊर्घ्ववर्ती (शिखरांश) व अधोवर्ती पिरामिड में अन्तर (Differences between Upright and Inverted Pyramid)

पिरामिड पारिस्थितिकी तंत्र में विभिन्न पोषण स्तरों पर जीवों की संख्या, जैवभार या ऊर्जा की मात्रा को दर्शाते हैं। इनके दो मुख्य प्रकार हैं:

क्र.सं. ऊर्घ्ववर्ती पिरामिड (Upright Pyramid) अधोवर्ती पिरामिड (Inverted Pyramid)
1. जब उत्पादकों की संख्या या जैवभार सर्वाधिक होता है और प्रत्येक अगले पोषण स्तर पर यह क्रमशः घटता जाता है, तो सीधा या ऊर्ध्ववर्ती पिरामिड बनता है। जब उत्पादकों की संख्या या जैवभार निम्नतम होता है और अगले पोषण स्तरों में यह बढ़ता हुआ उच्चतम स्तर पर सर्वाधिक हो जाता है, तो उल्टा या अधोवर्ती पिरामिड बनता है।
2. पिरामिड का आधार चौड़ा होता है और शीर्ष संकरा या नुकीला होता है। पिरामिड का आधार पतला होता है और शीर्ष सर्वाधिक चौड़ा होता है।
3. ऊर्जा का पिरामिड सदैव ऊर्ध्ववर्ती होता है, क्योंकि प्रत्येक पोषण स्तर पर ऊर्जा की हानि होती है। संख्या का पिरामिड या जैवभार का पिरामिड कुछ विशेष पारितंत्रों (जैसे जलीय) में अधोवर्ती हो सकता है।
(घ) खाद्य शृंखला तथा खाद्य जाल में अन्तर (Differences between Food Chain and Food Web)

खाद्य शृंखला और खाद्य जाल पारिस्थितिकी तंत्र में ऊर्जा और पदार्थ के प्रवाह के मार्ग को दर्शाते हैं:

क्र.सं. खाद्य शृंखला (Food Chain) खाद्य जाल (Food Web)
1. यह जीवों का एक सीधा, रेखीय क्रम है जिसमें एक जीव से दूसरे जीव में ऊर्जा स्थानांतरित होती है। यह बहुत सी आपस में जुड़ी हुई खाद्य शृंखलाओं का एक जटिल नेटवर्क है।
2. इसमें जीवों की संख्या सीमित होती है और ऊर्जा प्रवाह का एक ही मार्ग होता है। इसमें जीवों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक होती है और भोजन प्राप्त करने के अनेक वैकल्पिक रास्ते होते हैं।
3. एक उच्च पोषक स्तर का जीव सामान्यतः निम्न खाद्य स्तर के केवल एक प्रकार के जीव का उपयोग करता है। एक जीव एक से अधिक प्रकार के जीवों को आहार के रूप में उपयोग कर सकता है, और स्वयं भी कई जीवों का भोजन बन सकता है।
4. यह समुदाय की रचना की सीमित जानकारी देता है। यह समुदाय की रचना की व्यापक और अधिक यथार्थवादी जानकारी देता है।
5. यदि श्रृंखला में एक जीव विलुप्त हो जाए, तो पूरी शृंखला बाधित हो सकती है। एक जीव की समाप्ति से अन्य वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होने के कारण खाद्य जाल के स्थिर रहने की संभावना अधिक होती है।
(ङ) कर्कट (लिटर) व अपरद (डेट्रिटस) में अन्तर

कर्कट (लिटर) और अपरद (डेट्रिटस) दोनों ही मृत कार्बनिक पदार्थ से संबंधित हैं, लेकिन इनमें सूक्ष्म अंतर है:

  • **कर्कट (Litter):** यह सामान्यतः पौधों के वे भाग होते हैं जो अभी पूरी तरह से विघटित नहीं हुए हैं, जैसे गिरी हुई पत्तियाँ, टहनियाँ, फूल, फल आदि। यह एक प्रारंभिक अवस्था है।
  • **अपरद (Detritus):** यह कर्कट (लिटर) और अन्य मृत कार्बनिक पदार्थों (जैसे मृत जानवर) का विघटित रूप है। यह छोटे कणों में टूट चुका होता है और अपघटन की प्रक्रिया के लिए अधिक सुलभ होता है। अपरद में सूक्ष्मजीवों का भी योगदान होता है।
(च) प्राथमिक व द्वितीयक उत्पादकता में अन्तर (Differences between Primary and Secondary Productivity)

उत्पादकता पारिस्थितिकी तंत्र में जीवभार (biomass) के निर्माण की दर को दर्शाती है:

  • **प्राथमिक उत्पादकता (Primary Productivity):** यह उत्पादकों (मुख्य रूप से हरे पौधों) द्वारा प्रकाश संश्लेषण या रसायन संश्लेषण के माध्यम से कार्बनिक पदार्थों (ऊर्जा) के निर्माण की दर है। यह पारिस्थितिकी तंत्र में ऊर्जा का प्रारंभिक स्रोत है। इसे सकल प्राथमिक उत्पादकता (Gross Primary Productivity - GPP) और शुद्ध प्राथमिक उत्पादकता (Net Primary Productivity - NPP) में विभाजित किया जाता है (NPP = GPP - श्वसन हानि)।
  • **द्वितीयक उत्पादकता (Secondary Productivity):** यह उपभोक्ताओं (शाकाहारी, मांसाहारी आदि) द्वारा कार्बनिक पदार्थों के उपभोग से अपने शरीर में जीवभार के निर्माण की दर है। यह प्राथमिक उत्पादकों द्वारा संश्लेषित ऊर्जा पर निर्भर करती है।

Common mistakes

  • खाद्य श्रृंखला और खाद्य जाल के बीच भ्रमित होना।
  • ऊर्जा पिरामिड की दिशा को गलत समझना (यह हमेशा सीधा होता है)।
  • उत्पादकों और अपघटकों की भूमिकाओं को गलत समझना।
  • पारितंत्र में विभिन्न पोषण स्तरों की पहचान करने में त्रुटि करना।

Revision tips

  • सभी परिभाषित शब्दों (जैसे उत्पादक, उपभोक्ता, अपघटक) को स्पष्ट रूप से समझें।
  • खाद्य श्रृंखला और खाद्य जाल के बीच के अंतर को सारणीबद्ध रूप में याद करें।
  • ऊर्जा प्रवाह और पिरामिडों के सिद्धांतों पर विशेष ध्यान दें।
  • विभिन्न प्रकार के पिरामिडों के उदाहरणों का अभ्यास करें।

Practice MCQs

Q1. निम्नलिखित में से कौन सा जीव एक जलीय पारितंत्र के लिए एक सीमाकारी कारक हो सकता है?

Q2. एक खाद्य श्रृंखला में, किस पोषण स्तर के जीवों की संख्या आमतौर पर सबसे अधिक होती है?

Q3. एक झील में, प्राणिप्लवक (Zooplanktons) किस पोषण स्तर का प्रतिनिधित्व करते हैं?

Q4. ऊर्जा का पिरामिड पारितंत्र में हमेशा कैसा होता है?

Q5. चारण खाद्य श्रृंखला (Grazing Food Chain) का प्रारंभिक बिंदु क्या है?

Frequently asked questions

कक्षा 12 जीव विज्ञान के अध्याय 14 'पारितंत्र' में मुख्य रूप से किन अवधारणाओं को शामिल किया गया है?

इस अध्याय में पारितंत्र की संरचना और कार्य, उत्पादक, उपभोक्ता, अपघटक, खाद्य श्रृंखला, खाद्य जाल, ऊर्जा प्रवाह, और विभिन्न प्रकार के पिरामिड (संख्या, जैवभार, ऊर्जा) जैसी मुख्य अवधारणाओं को शामिल किया गया है।

NCERT समाधान छात्रों को 'पारितंत्र' अध्याय को समझने में कैसे मदद करते हैं?

ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के लिए विस्तृत, चरण-दर-चरण स्पष्टीकरण प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को जटिल अवधारणाओं को आसानी से समझने में मदद मिलती है। वे महत्वपूर्ण अंतरों को स्पष्ट करते हैं और मुख्य बिंदुओं को उजागर करते हैं।

क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी के लिए उपयोगी हैं?

हाँ, ये समाधान विशेष रूप से परीक्षा की तैयारी के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। वे NCERT पाठ्यक्रम के अनुसार हैं और अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों के प्रकारों को कवर करते हैं, जिससे छात्रों को परीक्षा पैटर्न को समझने में मदद मिलती है।

खाद्य श्रृंखला और खाद्य जाल के बीच मुख्य अंतर क्या है?

खाद्य श्रृंखला जीवों का एक सीधा, रेखीय क्रम है जिसमें ऊर्जा एक पोषण स्तर से दूसरे में स्थानांतरित होती है। खाद्य जाल कई परस्पर जुड़ी हुई खाद्य श्रृंखलाओं का एक जटिल नेटवर्क है, जो जीवों के लिए भोजन के कई वैकल्पिक रास्ते प्रदान करता है।

ऊर्जा का पिरामिड हमेशा सीधा क्यों होता है?

ऊर्जा का पिरामिड हमेशा सीधा होता है क्योंकि प्रत्येक पोषण स्तर पर ऊर्जा का केवल लगभग 10% ही अगले पोषण स्तर तक पहुँचता है। शेष ऊर्जा श्वसन, उपापचय और अन्य जैविक प्रक्रियाओं में उपयोग हो जाती है या नष्ट हो जाती है।

चारण खाद्य श्रृंखला और अपरद खाद्य श्रृंखला में क्या अंतर है?

चारण खाद्य श्रृंखला हरे पौधों (उत्पादकों) से शुरू होती है और उपभोक्ताओं की ओर बढ़ती है। अपरद खाद्य श्रृंखला मृत कार्बनिक पदार्थों (अपरद) से शुरू होती है और अपरदहारियों (detritivores) द्वारा खाई जाती है।

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