कक्षा 12 जीव विज्ञान NCERT समाधान: अध्याय 15 - जैव विविधता एवं संरक्षण

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यह पृष्ठ कक्षा 12 जीव विज्ञान के अध्याय 15, 'जैव विविधता एवं संरक्षण' के लिए NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें जैव विविधता के तीन मुख्य घटकों - आनुवंशिक, जातीय और पारितंत्र विविधता - की विस्तृत व्याख्या शामिल है। समाधान बताते हैं कि कैसे वैज्ञानिक प्रजातियों की संख्या का अनुमान लगाते हैं, विशेष रूप से उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में उच्च जाति-समृद्धता के कारणों और जातीय-क्षेत्र संबंध में समाश्रयण ढलान के महत्व पर प्रकाश डालते हैं। यह अध्याय जाति क्षति के प्रमुख कारणों जैसे आवास क्षय, अतिदोहन, विदेशी प्रजातियों का आक्रमण और सह-विलुप्ति पर भी चर्चा करता है। इसके अतिरिक्त, यह पारितंत्र के कार्यों, जैसे उत्पादकता और ऊर्जा प्रवाह के लिए जैव विविधता की उपयोगिता की पड़ताल करता है, और पवित्र उपवनों जैसी पारंपरिक संरक्षण विधियों की भूमिका पर प्रकाश डालता है। अंत में, यह बाढ़ और मृदा अपरदन नियंत्रण में पारितंत्र सेवाओं के महत्व को स्पष्ट करता है। ये समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए एक स्पष्ट और व्यापक समझ प्रदान करते हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 12
Subjectजीव विज्ञान
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter15. जैव विविधता एवं संरक्षण

Chapter summary

कक्षा 12 जीव विज्ञान के अध्याय 15 के ये NCERT समाधान जैव विविधता की अवधारणा और इसके संरक्षण के महत्व पर केंद्रित हैं। इसमें जैव विविधता के विभिन्न स्तरों (आनुवंशिक, जातीय, पारितंत्र), प्रजातियों की संख्या का अनुमान लगाने की विधियों, उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में अधिक विविधता के कारणों और जाति-क्षेत्र संबंध की व्याख्या की गई है। समाधान जाति क्षति के चार मुख्य कारणों और पारितंत्र के कार्यों में जैव विविधता की भूमिका पर भी प्रकाश डालते हैं। पवित्र उपवनों और पारितंत्र सेवाओं जैसे बाढ़ नियंत्रण का भी उल्लेख किया गया है।

Learning outcomes

  • जैव विविधता के तीन आवश्यक घटकों को पहचानना और समझाना।
  • प्रजातियों की संख्या का अनुमान लगाने की वैज्ञानिक विधियों का वर्णन करना।
  • उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में उच्च जाति-समृद्धता के कारणों की व्याख्या करना।
  • जाति क्षति के चार मुख्य कारणों की सूची बनाना और समझाना।
  • पारितंत्र के कार्यों के लिए जैव विविधता के महत्व का विश्लेषण करना।
  • पवित्र उपवनों की संरक्षण में भूमिका को स्पष्ट करना।

Topics covered

Paper topics

  • जैव विविधता के घटक
  • आनुवंशिक विविधता
  • जातीय विविधता
  • पारितंत्र विविधता
  • प्रजातियों की संख्या का अनुमान
  • उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में जाति-समृद्धता
  • जातीय-क्षेत्र संबंध
  • जाति क्षति के कारण
  • आवास क्षय और विखण्डन
  • अतिदोहन
  • विदेशी जातियों का आक्रमण
  • सहविलुप्तता
  • पारितंत्र के कार्य और जैव विविधता
  • पवित्र उपवन
  • पारितंत्र सेवाएँ (बाढ़ और मृदा अपरदन नियंत्रण)

Important topics

  • जैव विविधता के घटक
  • जाति क्षति के कारण
  • उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में जाति-समृद्धता के कारण
  • पारितंत्र के कार्यों के लिए जैव विविधता का महत्व
  • संरक्षण की विधियाँ (पवित्र उपवन)

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

जैव विविधता के तीन आवश्यक घटकों (कम्पोनेन्ट) के नाम बताइए।
Solution:

जैव विविधता के तीन आवश्यक घटक निम्नलिखित हैं:

  1. आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity): यह एक प्रजाति के भीतर जीनों की भिन्नता को संदर्भित करती है। यह विभिन्न उप-प्रजातियों या एक ही प्रजाति की विभिन्न आबादी के बीच पाई जाती है।
  2. जातीय विविधता (Species Diversity): यह किसी विशेष क्षेत्र में विभिन्न प्रजातियों की संख्या और बहुतायत को दर्शाती है।
  3. पारितंत्र विविधता (Ecosystem Diversity): यह किसी क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के पारितंत्रों (जैसे जंगल, घास के मैदान, रेगिस्तान, आर्द्रभूमि) की उपस्थिति को संदर्भित करती है।

प्रश्न 2

पारिस्थितिकीविद् किस प्रकार विश्व की कुल जातियों का आकलन करते हैं?
Solution:

पारिस्थितिकीविद् विश्व की कुल जातियों का आकलन करने के लिए विभिन्न विधियों का उपयोग करते हैं। एक सामान्य तरीका यह है कि उन क्षेत्रों का गहन अध्ययन किया जाए जहाँ प्रजातियों की विविधता अधिक है, जैसे कि उष्णकटिबंधीय वर्षावन। इन क्षेत्रों में कीटों जैसी प्रजातियों की संख्या का अध्ययन करके, वैज्ञानिक अन्य जीवों की प्रजातियों की संख्या का अनुमान लगाने के लिए सांख्यिकीय विधियों का उपयोग करते हैं। वे ज्ञात प्रजातियों की संख्या और क्षेत्र के आकार के बीच संबंध का विश्लेषण करते हैं। रॉबर्ट मे जैसे वैज्ञानिकों ने अपने अनुमानों में यह संख्या लगभग 7 मिलियन बताई है, जो कि कई अध्ययनों से प्राप्त 20-50 मिलियन की सीमा से अधिक यथार्थवादी मानी जाती है।

प्रश्न 3

उष्ण कटिबन्धीय क्षेत्रों में सबसे अधिक स्तर की जाति-समृद्धता क्यों मिलती है? इसकी तीन परिकल्पनाएँ दीजिए।
Solution:

उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में सबसे अधिक जाति-समृद्धता मिलने के पीछे कई परिकल्पनाएँ हैं:

  1. जाति उद्भवन (Speciation) के लिए अधिक समय: उष्णकटिबंधीय क्षेत्र लाखों वर्षों से हिमीकरण (glaciation) जैसी पर्यावरणीय बाधाओं से अपेक्षाकृत मुक्त रहे हैं। इस लंबे, अबाधित समय ने प्रजातियों के विकास और विविधीकरण के लिए पर्याप्त अवसर प्रदान किए हैं। इसके विपरीत, शीतोष्ण क्षेत्रों में बार-बार हिमीकरण हुआ है, जिसने प्रजातियों की विविधता को बाधित किया है।
  2. स्थिर पर्यावरण: शीतोष्ण क्षेत्रों की तुलना में उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में मौसमी परिवर्तन कम होते हैं और पर्यावरण अधिक स्थिर रहता है। यह स्थिरता प्रजातियों को पनपने और विविधता बनाए रखने के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ प्रदान करती है।
  3. अधिक सौर ऊर्जा उपलब्धता: उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में शीतोष्ण क्षेत्रों की तुलना में अधिक सौर ऊर्जा प्राप्त होती है। यह उच्च सौर ऊर्जा प्रकाश संश्लेषण को बढ़ावा देती है, जिससे उत्पादकता बढ़ती है और अधिक संख्या में जीवों का समर्थन होता है, जो अंततः उच्च जैव विविधता में योगदान देता है।

प्रश्न 4

जातीय क्षेत्र सम्बन्ध में समाश्रयण (रिग्रेशन) की ढलान का क्या महत्त्व है?
Solution:

जातीय-क्षेत्र संबंध (Species-area Relationship) में समाश्रयण (regression) की ढलान (जिसे अक्सर 'Z' से दर्शाया जाता है) किसी क्षेत्र में प्रजातियों की संख्या और उस क्षेत्र के आकार के बीच संबंध की दर को मापती है।

  • छोटे क्षेत्रों के लिए: छोटे क्षेत्रों या द्वीपों के लिए, इस ढलान का मान आमतौर पर 0.1 से 0.2 के बीच होता है। यह मान अपेक्षाकृत स्थिर रहता है और क्षेत्र के आकार के साथ प्रजातियों की संख्या में धीमी वृद्धि को दर्शाता है।
  • बड़े क्षेत्रों के लिए: जब बहुत बड़े भौगोलिक क्षेत्रों, जैसे महाद्वीपों का अध्ययन किया जाता है, तो समाश्रयण की ढलान का मान बढ़ जाता है, जो 0.6 से 1.2 तक हो सकता है। यह दर्शाता है कि बड़े क्षेत्रों में, क्षेत्र के आकार में वृद्धि के साथ प्रजातियों की संख्या में बहुत तेजी से वृद्धि होती है।

इस प्रकार, समाश्रयण की ढलान प्रजाति-क्षेत्र संबंध की प्रकृति को समझने और विभिन्न पैमानों पर जैव विविधता के वितरण का विश्लेषण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

प्रश्न 5

किसी भौगोलिक क्षेत्र में जाति क्षति के मुख्य कारण क्या हैं?
Solution:

किसी भौगोलिक क्षेत्र में जाति क्षति के चार मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  1. आवासीय क्षय और विखण्डन (Habitat Loss and Fragmentation): मानवीय गतिविधियों, जैसे कि वनों की कटाई, शहरीकरण, औद्योगिकीकरण और कृषि विस्तार के कारण जीवों के प्राकृतिक आवासों का बड़े पैमाने पर विनाश और छोटे-छोटे टुकड़ों में बँट जाना। इससे जीवों के रहने, भोजन खोजने और प्रजनन करने की क्षमता प्रभावित होती है, जिससे उनकी संख्या में कमी आती है और वे विलुप्त होने के कगार पर पहुँच जाते हैं।
  2. अतिदोहन (Over Exploitation): जब किसी प्रजाति के संसाधनों का उपयोग उसकी पुनः पूर्ति की क्षमता से अधिक दर पर किया जाता है, तो उसे अतिदोहन कहते हैं। मानव द्वारा भोजन, आवास, व्यापार या अन्य लालचों के कारण प्राकृतिक संपदा का अत्यधिक दोहन, जैसे अत्यधिक शिकार या मछली पकड़ना, कई प्रजातियों को विलुप्त होने के करीब ले आया है (उदाहरण: स्टेलर सी काउ, पैसेन्जर पिजन)।
  3. विदेशी जातियों का आक्रमण (Alien Species Invasions): जब कोई प्रजाति अपने प्राकृतिक आवास से बाहर किसी नए क्षेत्र में लाई जाती है (अनजाने में या जानबूझकर) और वह वहाँ आक्रामक हो जाती है, तो वह स्थानीय प्रजातियों के लिए खतरा बन जाती है। ये विदेशी प्रजातियाँ संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा कर सकती हैं, शिकार कर सकती हैं, या रोग फैला सकती हैं, जिससे स्थानीय प्रजातियों की संख्या कम हो जाती है या वे विलुप्त हो जाती हैं (उदाहरण: गाजर घास, अफ्रीकन कैटफिश)।
  4. सहविलुप्तता (Co-extinctions): यह एक ऐसी घटना है जहाँ एक प्रजाति के विलुप्त होने के कारण उस पर निर्भर अन्य प्रजातियाँ भी विलुप्त हो जाती हैं। उदाहरण के लिए, यदि कोई मेजबान मछली प्रजाति विलुप्त हो जाती है, तो उस पर निर्भर परजीवी प्रजातियाँ भी विलुप्त हो जाएँगी। इसी तरह, यदि परागणकर्ता विलुप्त हो जाते हैं, तो उन पर निर्भर पौधे भी विलुप्त हो सकते हैं।

प्रश्न 6

पारितन्त्र के कार्यों के लिए जैवविविधता कैसे उपयोगी है?
Solution:

जैव विविधता पारितंत्र के सुचारू रूप से कार्य करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके मुख्य योगदान निम्नलिखित हैं:

  • उत्पादकता (Productivity): अधिक जैव विविधता वाले पारितंत्रों में उत्पादकता अधिक होती है। डेविड टिलमैन के प्रयोगों से पता चला है कि जिन भूखंडों में अधिक प्रजातियाँ थीं, उनमें कुल जैवभार में साल-दर-साल कम भिन्नता देखी गई, जो स्थिरता और उच्च उत्पादकता का संकेत है।
  • अपघटन (Decomposition): सूक्ष्मजीवों की विविधता अपशिष्ट पदार्थों के अपघटन की प्रक्रिया को अधिक कुशल बनाती है। विभिन्न प्रकार के सूक्ष्मजीव विभिन्न प्रकार के कार्बनिक पदार्थों को तोड़ने में सक्षम होते हैं।
  • ऊर्जा प्रवाह (Energy Flow): जटिल खाद्य जाल और उच्च जैव विविधता ऊर्जा को पारितंत्र के विभिन्न पोषण स्तरों तक अधिक प्रभावी ढंग से प्रवाहित करने में मदद करते हैं।
  • जैव भू-रासायनिक चक्र (Biogeochemical Cycles): विभिन्न प्रजातियाँ पोषक तत्वों के चक्रण (जैसे कार्बन, नाइट्रोजन, फास्फोरस) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। जैव विविधता इन चक्रों को अधिक सुचारू और पूर्ण बनाती है।
  • पारितंत्र सेवाएँ (Ecosystem Services): जैव विविधता वायुमंडल में गैसों की मात्रा का नियमन, जल शोधन, और जलवायु स्थिरीकरण जैसी महत्वपूर्ण पारितंत्र सेवाएँ प्रदान करती है।

संक्षेप में, जैव विविधता पारितंत्र को अधिक स्थिर, उत्पादक और विभिन्न पर्यावरणीय परिवर्तनों के प्रति लचीला बनाती है।

प्रश्न 7

पवित्र उपवन क्या हैं? उनकी संरक्षण में क्या भूमिका है?
Solution:

पवित्र उपवन (Sacred Groves) ऐसे वन क्षेत्र होते हैं जिन्हें भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं के अनुसार पवित्र माना जाता है और संरक्षित किया जाता है। इन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की वनस्पति को काटना या वन्यजीवों को नुकसान पहुँचाना वर्जित होता है।

संरक्षण में भूमिका:

  • आश्रय स्थल: पवित्र उपवन कई दुर्लभ और संकटग्रस्त पौधों और जानवरों के लिए अंतिम आश्रय स्थल के रूप में कार्य करते हैं।
  • जैव विविधता का संरक्षण: चूँकि इन क्षेत्रों में मानवीय हस्तक्षेप न्यूनतम होता है, यहाँ की देशी और स्थानिक प्रजातियाँ बिना किसी बाधा के विकसित होती हैं और संरक्षित रहती हैं।
  • पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण: ये उपवन स्थानीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान और प्रकृति के प्रति सम्मान को भी दर्शाते हैं।

मेघालय की खासी और जयंतिया पहाड़ियाँ, राजस्थान की अरावली, कर्नाटक और महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट जैसे क्षेत्रों में ऐसे पवित्र उपवन पाए जाते हैं, जो जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

प्रश्न 8

पारितन्त्र सेवा के अन्तर्गत बाढ़ व भू-अपरदन (सॉइल इरोजन) नियन्त्रण आते हैं। यह किस प्रकार पारितन्त्र के जीवीय घटकों (बायोटिक कम्पोनेन्ट) द्वारा पूर्ण होते हैं?
Solution:

पारितंत्र के जीवीय घटक, विशेष रूप से वनस्पति, बाढ़ और मृदा अपरदन को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह प्रक्रिया निम्नलिखित प्रकार से होती है:

  • मृदा अपरदन नियंत्रण: वृक्षों और अन्य पौधों की जड़ें मिट्टी के कणों को मजबूती से बांधे रखती हैं। यह जड़ों का जाल मिट्टी को अपनी जगह पर बनाए रखता है, जिससे तेज हवा या पानी के बहाव से मिट्टी का कटाव (अपरदन) रुक जाता है।
  • बाढ़ नियंत्रण: घने वन और वनस्पति वर्षा जल के प्रभाव को कम करते हैं। जब वर्षा की बूँदें सीधे जमीन पर गिरने के बजाय वृक्षों की पत्तियों और शाखाओं (कैनोपी) से टकराती हैं, तो उनकी गतिज ऊर्जा कम हो जाती है। इसके बाद पानी धीरे-धीरे जमीन पर गिरता है और मिट्टी में रिस जाता है। यह प्रक्रिया सतही अपवाह को कम करती है, जिससे बाढ़ का खतरा कम होता है और भूजल स्तर बढ़ता है।
  • जल प्रवाह का नियमन: वनस्पति जल के प्रवाह को धीमा करके उसे मिट्टी में गहराई तक प्रवेश करने में मदद करती है, जिससे अचानक आने वाली बाढ़ की तीव्रता कम हो जाती है।

इस प्रकार, वनस्पति आवरण (जीवीय घटक) मिट्टी को बांधकर और वर्षा जल के प्रभाव को कम करके बाढ़ और मृदा अपरदन जैसी प्राकृतिक आपदाओं को नियंत्रित करने में एक प्रभावी पारितंत्र सेवा प्रदान करता है।

Common mistakes

  • जाति क्षति के कारणों को ठीक से न समझ पाना।
  • जैव विविधता के विभिन्न स्तरों के बीच अंतर करने में कठिनाई।
  • पारितंत्र सेवाओं और जैव विविधता के बीच संबंध को स्पष्ट न कर पाना।
  • आक्रामक विदेशी प्रजातियों के प्रभाव को कम आंकना।

Revision tips

  • जैव विविधता के तीन घटकों को याद करने के लिए एक माइंड मैप बनाएं।
  • जाति क्षति के चार मुख्य कारणों को उदाहरण सहित समझें।
  • पारितंत्र के कार्यों में जैव विविधता की भूमिका को रेखांकित करें।
  • पवित्र उपवनों और अन्य संरक्षण विधियों के बीच अंतर को समझें।

Practice MCQs

Q1. जैव विविधता के तीन आवश्यक घटक कौन से हैं?

Q2. रॉबर्ट मे के अनुसार पृथ्वी पर अनुमानित प्रजातियों की संख्या कितनी है?

Q3. उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में अधिक जाति-समृद्धता का कारण क्या नहीं है?

Q4. जाति क्षति का मुख्य कारण क्या है?

Q5. निम्नलिखित में से कौन सी एक आक्रामक विदेशी प्रजाति है जिसने स्थानीय जातियों को खतरा पैदा किया है?

Frequently asked questions

जैव विविधता के तीन मुख्य घटक कौन से हैं?

जैव विविधता के तीन मुख्य घटक आनुवंशिक विविधता, जातीय विविधता और पारितंत्र विविधता हैं।

वैज्ञानिक पृथ्वी पर प्रजातियों की कुल संख्या का अनुमान कैसे लगाते हैं?

वैज्ञानिक उष्णकटिबंधीय और शीतोष्ण क्षेत्रों में कीटों जैसी प्रजातियों की समृद्धता का अध्ययन करके और सांख्यिकीय तुलनाओं का उपयोग करके अन्य जीवों की संख्या का अनुमान लगाते हैं।

उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में अधिक प्रजातियाँ क्यों पाई जाती हैं?

इसके तीन मुख्य कारण हैं: अधिक समय (हिमीकरण का अभाव), स्थिर पर्यावरण और अधिक सौर ऊर्जा उपलब्धता, जो उच्च उत्पादकता को बढ़ावा देती है।

जाति क्षति के चार प्रमुख कारण क्या हैं?

जाति क्षति के चार प्रमुख कारण हैं: आवासीय क्षय और विखण्डन, अतिदोहन, विदेशी जातियों का आक्रमण और सहविलुप्तता।

पवित्र उपवन क्या हैं और वे संरक्षण में कैसे मदद करते हैं?

पवित्र उपवन विशेष वन क्षेत्र होते हैं जिन्हें सांस्कृतिक या धार्मिक कारणों से संरक्षित किया जाता है। इनमें पौधों और वन्यजीवों को नुकसान पहुँचाने की मनाही होती है, जिससे वे स्थानीय और संकटग्रस्त प्रजातियों के लिए अंतिम शरणस्थली बन जाते हैं।

पारितंत्र सेवाएँ जैसे बाढ़ और मृदा अपरदन नियंत्रण कैसे काम करते हैं?

वृक्ष और उनकी जड़ें मिट्टी को बांधे रखती हैं, जिससे बाढ़ और मृदा अपरदन को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। वृक्षों की छत्रक वर्षा की बूंदों की गतिज ऊर्जा को कम करके मिट्टी के कटाव को रोकते हैं।

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