कक्षा 12 जीव विज्ञान अध्याय 16: पर्यावरणीय मुद्दे - NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 12 जीव विज्ञान के अध्याय 16, 'पर्यावरणीय मुद्दे' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। इसमें घरेलू वाहित मल के घटकों और नदी प्रदूषण पर इसके प्रभावों, उत्पन्न अपशिष्टों की सूची और उन्हें कम करने के तरीकों, वैश्विक उष्णता के कारणों, प्रभावों और नियंत्रण उपायों, और ओजोन परत के क्षरण के कारणों और प्रभावों पर चर्चा की गई है। समाधानों में प्रत्येक प्रश्न के लिए स्पष्टीकरण और चरण-दर-चरण प्रक्रियाएं शामिल हैं, जो छात्रों को इन महत्वपूर्ण पर्यावरणीय अवधारणाओं को समझने और परीक्षा के लिए प्रभावी ढंग से तैयारी करने में मदद करती हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | जीव विज्ञान |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 16. पर्यावरणीय मुद्दे |
Chapter summary
कक्षा 12 जीव विज्ञान के अध्याय 16 के ये NCERT समाधान पर्यावरणीय मुद्दों की एक विस्तृत श्रृंखला को कवर करते हैं। इसमें वाहित मल प्रबंधन, अपशिष्ट उत्पादन और न्यूनीकरण रणनीतियाँ, वैश्विक उष्णता के अंतर्निहित कारण और परिणाम, और ओजोन परत के क्षरण के तंत्र और समाधान शामिल हैं। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर एक व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करता है, जो छात्रों को इन जटिल पर्यावरणीय चुनौतियों की गहरी समझ विकसित करने में सहायता करता है।
Learning outcomes
- घरेलू वाहित मल के घटकों और नदी प्रदूषण पर इसके प्रभावों को समझना।
- अपने दैनिक जीवन से उत्पन्न अपशिष्टों की पहचान करना और उन्हें कम करने के तरीके खोजना।
- वैश्विक उष्णता के कारणों, प्रभावों और इसे नियंत्रित करने के उपायों का विश्लेषण करना।
- ओजोन परत के क्षरण के कारणों और इसके प्रभावों की व्याख्या करना।
- पर्यावरणीय मुद्दों के समाधान के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना।
Topics covered
Paper topics
- घरेलू वाहित मल के घटक
- वाहित मल विसर्जन के प्रभाव
- बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD)
- घुलित ऑक्सीजन (DO)
- अपशिष्ट उत्पादन
- जैव निम्नीकृत पदार्थ
- अजैव निम्नीकृत पदार्थ
- पुनर्चक्रण
- वैश्विक उष्णता (Global Warming)
- ग्रीन हाउस प्रभाव
- ओजोन परत का क्षरण
- पर्यावरणीय मुद्दे
Important topics
- वाहित मल के नदी में विसर्जन के प्रभाव
- जैव निम्नीकृत बनाम अजैव निम्नीकृत अपशिष्ट
- वैश्विक उष्णता के कारण और नियंत्रण
- ओजोन परत का क्षरण और उसके प्रभाव
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
घरेलू वाहित मल में मुख्य रूप से जल होता है, जिसकी मात्रा लगभग 99.9% होती है। शेष 0.1% में विभिन्न प्रकार के अपद्रव्य (impurities) शामिल होते हैं, जिनमें ठोस, कोलाइडल और विलीन पदार्थ शामिल हैं।
घरेलू वाहित मल के घटक:
- निलम्बित ठोस (Suspended Solids): इनमें रेत, गाद और चिकनी मिट्टी जैसे कण शामिल होते हैं।
- कोलॉइडी पदार्थ (Colloidal Matter): इसमें मल पदार्थ (faecal matter), जीवाणु, वस्त्र और कागज के रेशे जैसे सूक्ष्म कण होते हैं।
- विलीन पदार्थ (Dissolved Substances): इनमें पोषक तत्व जैसे नाइट्रेट, अमोनिया, फॉस्फेट, सोडियम, कैल्सियम आदि, साथ ही यूरिया और अन्य कार्बनिक यौगिक शामिल होते हैं। यूरिया के जलीय अपघटन से अमोनिया बनती है, जिससे दुर्गंध फैलती है।
वाहित मल के नदी में विसर्जन से होने वाले प्रभाव:
जब वाहित मल को नदियों में छोड़ा जाता है, तो यह जल प्रदूषण का एक प्रमुख कारण बनता है, जिसके निम्नलिखित प्रभाव होते हैं:
- कार्बनिक पदार्थ में वृद्धि: वाहित मल में उपस्थित कार्बनिक पदार्थ जल निकायों में घुलित ऑक्सीजन (DO) की मात्रा को कम कर देते हैं क्योंकि सूक्ष्मजीव इन पदार्थों के अपघटन के लिए DO का उपयोग करते हैं।
- बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) में वृद्धि: कार्बनिक पदार्थों के अपघटन के लिए आवश्यक ऑक्सीजन की मात्रा (BOD) बढ़ जाती है।
- घुलित ऑक्सीजन (DO) में कमी: जलीय जीवों के श्वसन के लिए आवश्यक घुलित ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है, जिससे जलीय जीवन प्रभावित होता है।
- जल का गंदलापन: निलम्बित कणों के कारण जल गंदला (turbid) हो जाता है, जिससे सूर्य का प्रकाश जल में गहराई तक नहीं पहुँच पाता और जलीय पौधों का प्रकाश संश्लेषण बाधित होता है।
- जलीय जीवों पर प्रतिकूल प्रभाव: प्रदूषक पदार्थ जल के रासायनिक गुणों को बदल देते हैं, जिससे मछलियों और अन्य जलीय जीवों के जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
- जलजन्य रोगों का खतरा: वाहित मल में रोगजनक सूक्ष्मजीव हो सकते हैं, जिससे हैजा, टाइफाइड, पेचिश और पोलियो जैसी जलजन्य बीमारियाँ फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
- शैवाल वृद्धि (Eutrophication): नाइट्रोजन और फास्फोरस जैसे पोषक तत्वों की अधिकता से शैवाल (algae) की अत्यधिक वृद्धि हो सकती है, जो बाद में सड़कर जल को और प्रदूषित करते हैं।
चित्र 16.1 में दर्शाया गया है कि कैसे वाहित मल के विसर्जन से नदी के जल की गुणवत्ता प्रभावित होती है, जिसमें घुलित ऑक्सीजन और BOD के स्तर में परिवर्तन प्रमुख हैं।
प्रश्न 2
हम अपने दैनिक जीवन में विभिन्न स्थानों पर विभिन्न प्रकार के अपशिष्ट उत्पन्न करते हैं। इन अपशिष्टों को कम करने की संभावना और कठिनाई उनके प्रकार पर निर्भर करती है।
उत्पन्न होने वाले अपशिष्टों की सूची:
घर से:
- पॉलिथीन की थैलियाँ, प्लास्टिक के पैकेट
- फटे वस्त्र, पुराने जूते
- प्लास्टिक और शीशे की बोतलें, डिब्बे
- सब्जियों और फलों के छिलके, बचा हुआ भोजन
- कागज, गत्ता, थर्मोकोल कप/प्लेट
- रसोई के अन्य अपशिष्ट (जैसे तेल, चाय पत्ती)
- धातु के अपशिष्ट (जैसे डिब्बे, तार)
- वाहित मल (मल-मूत्र)
विद्यालय से:
- कागज के टुकड़े, पेंसिल की छीलन, चाक के टुकड़े
- पॉलिथीन बैग्स, प्लास्टिक के पेन/रिफिल
- फलों के छिलके, पेपर नैपकिन
- एल्युमिनियम फॉयल, टेट्रा पैक
भ्रमण के दौरान:
- पॉलिथीन की थैलियाँ, डिस्पोजेबल कप/प्लेट
- पानी, जूस या कोल्ड ड्रिंक की प्लास्टिक बोतलें
- फलों के छिलके, खाद्य पदार्थों के पैकेट
- कागज के नैपकिन, टिन के डिब्बे
अपशिष्टों को कम करने की संभावना:
अपशिष्टों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बाँटा जा सकता है:
- जैव निम्नीकृत (Biodegradable) पदार्थ: ये पदार्थ प्राकृतिक रूप से सूक्ष्मजीवों द्वारा विघटित हो जाते हैं, जैसे - सब्जियों और फलों के छिलके, बचा हुआ भोजन, कागज आदि। इन्हें खाद बनाकर या कंपोस्टिंग द्वारा आसानी से प्रबंधित किया जा सकता है और इनके उत्पादन को भी कम किया जा सकता है (जैसे भोजन की बर्बादी रोककर)।
- अजैव निम्नीकृत (Non-Biodegradable) पदार्थ: ये पदार्थ प्राकृतिक रूप से आसानी से विघटित नहीं होते हैं और पर्यावरण में लंबे समय तक बने रहते हैं, जैसे - प्लास्टिक, पॉलिथीन, धातु, काँच आदि।
आसानी से कम किए जा सकने वाले अपशिष्ट:
- प्लास्टिक की थैलियों के स्थान पर कपड़े के थैलों का उपयोग करना।
- डिस्पोजेबल (एकल-उपयोग) प्लास्टिक वस्तुओं के बजाय पुन: प्रयोज्य (reusable) वस्तुओं का उपयोग करना।
- कागज का विवेकपूर्ण उपयोग करना और पुनर्चक्रण (recycling) को बढ़ावा देना।
- भोजन की बर्बादी को कम करना।
कम करना कठिन या असम्भव अपशिष्ट:
- कुछ अजैव निम्नीकृत पदार्थ जैसे कि विशेष प्रकार के प्लास्टिक पैकेजिंग, इलेक्ट्रॉनिक कचरा (e-waste), कुछ धातुएँ और काँच को पूरी तरह से समाप्त करना या उनके उत्पादन को रोकना कठिन होता है। हालाँकि, इनके पुनर्चक्रण (recycling) और उचित निपटान पर ध्यान केंद्रित करके इनके पर्यावरणीय प्रभाव को कम किया जा सकता है।
- चिकित्सा अपशिष्ट (medical waste) भी एक विशेष श्रेणी है जिसे कम करना कठिन होता है, लेकिन इसके सुरक्षित निपटान की आवश्यकता होती है।
संक्षेप में, जैव निम्नीकृत अपशिष्टों को कम करना और प्रबंधित करना अपेक्षाकृत आसान है, जबकि अजैव निम्नीकृत अपशिष्टों को कम करना अधिक चुनौतीपूर्ण होता है, जिसके लिए पुनर्चक्रण और स्थायी उपभोग पैटर्न पर जोर देना आवश्यक है।
प्रश्न 3
वैश्विक उष्णता (Global Warming) पृथ्वी की जलवायु प्रणाली में दीर्घकालिक परिवर्तन को संदर्भित करती है, विशेष रूप से औसत वैश्विक तापमान में वृद्धि। यह मुख्य रूप से ग्रीनहाउस प्रभाव के तीव्र होने के कारण होता है।
वैश्विक उष्णता में वृद्धि के कारण:
- ग्रीन हाउस गैसों (GHGs) की सांद्रता में वृद्धि: वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂), मीथेन (CH₄), नाइट्रस ऑक्साइड (N₂O), और क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) जैसी ग्रीन हाउस गैसों की मात्रा में वृद्धि वैश्विक उष्णता का प्रत्यक्ष कारण है। ये गैसें पृथ्वी से परावर्तित ऊष्मा को वायुमंडल में वापस जाने से रोकती हैं, जिससे पृथ्वी का तापमान बढ़ता है।
- जीवाश्म ईंधनों का अत्यधिक उपयोग: कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों के जलने से बड़ी मात्रा में CO₂ का उत्सर्जन होता है।
- वनों की कटाई (Deforestation): पेड़ कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करते हैं। वनों की कटाई से वायुमंडल में CO₂ की मात्रा बढ़ती है और साथ ही वनों में संचित कार्बन भी मुक्त हो जाता है।
- औद्योगिकीकरण और शहरीकरण: औद्योगिक प्रक्रियाओं और परिवहन से ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन बढ़ता है।
- भूमि उपयोग में परिवर्तन: कृषि पद्धतियों में बदलाव और अन्य भूमि उपयोग परिवर्तन भी ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को प्रभावित करते हैं।
वैश्विक उष्णता के प्रभाव:
- तापमान में वृद्धि: पृथ्वी के औसत तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है।
- जलवायु परिवर्तन: मौसम के पैटर्न में बदलाव, जैसे कि अत्यधिक गर्मी, सूखा, बाढ़ और तूफान की आवृत्ति और तीव्रता में वृद्धि।
- समुद्र स्तर में वृद्धि: ग्लेशियरों और ध्रुवीय बर्फ के पिघलने से समुद्र का जल स्तर बढ़ रहा है, जिससे तटीय क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा है।
- पारिस्थितिक तंत्र पर प्रभाव: तापमान और वर्षा के पैटर्न में बदलाव से पौधों और जानवरों के आवास प्रभावित होते हैं, जिससे जैव विविधता का नुकसान हो सकता है।
- कृषि पर प्रभाव: फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे खाद्य सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
वैश्विक उष्णता वृद्धि को नियंत्रित करने के उपाय:
- ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करना: जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करके ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों (जैसे सौर, पवन ऊर्जा) का उपयोग बढ़ाना।
- वनीकरण और पुनर्वनीकरण: अधिक से अधिक पेड़ लगाना और मौजूदा वनों का संरक्षण करना ताकि वायुमंडल से CO₂ का अवशोषण बढ़ सके।
- ऊर्जा दक्षता में सुधार: ऊर्जा की खपत को कम करने के लिए कुशल प्रौद्योगिकियों का उपयोग करना।
- सतत कृषि पद्धतियाँ: ऐसी कृषि तकनीकों को अपनाना जो ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करें।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: वैश्विक स्तर पर ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लिए देशों के बीच सहयोग और समझौते।
- जागरूकता फैलाना: लोगों को वैश्विक उष्णता के खतरों और इसे रोकने के उपायों के बारे में शिक्षित करना।
इन उपायों को अपनाकर हम वैश्विक उष्णता की दर को धीमा कर सकते हैं और इसके विनाशकारी प्रभावों को कम कर सकते हैं।
Common mistakes
- वाहित मल के घटकों को पूरी तरह से सूचीबद्ध न कर पाना।
- जैव निम्नीकृत और अजैव निम्नीकृत पदार्थों के बीच अंतर को स्पष्ट न कर पाना।
- वैश्विक उष्णता के कारणों और प्रभावों को आपस में मिला देना।
- ओजोन क्षरण के लिए जिम्मेदार मुख्य रसायनों की पहचान करने में चूक।
Revision tips
- प्रत्येक पर्यावरणीय मुद्दे के कारणों और प्रभावों को अलग-अलग सूचीबद्ध करें।
- अपशिष्ट न्यूनीकरण के लिए व्यावहारिक समाधानों पर ध्यान केंद्रित करें।
- वैश्विक उष्णता और ओजोन क्षरण से संबंधित प्रमुख गैसों और रसायनों को याद करें।
- चित्रों (जैसे चित्र 16.1) का उपयोग करके अवधारणाओं को समझने का प्रयास करें।
Practice MCQs
Q1. घरेलू वाहित मल में जल की प्रतिशत मात्रा लगभग कितनी होती है?
Explanation: घरेलू वाहित मल में लगभग 99.9% जल होता है, शेष 0.1% में विभिन्न अपद्रव्य होते हैं।
Q2. वाहित मल के नदी में विसर्जन से घुलित ऑक्सीजन (DO) पर क्या प्रभाव पड़ता है?
Explanation: वाहित मल में कार्बनिक पदार्थों के अपघटन के लिए सूक्ष्मजीव अधिक ऑक्सीजन का उपयोग करते हैं, जिससे जल में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है।
Q3. निम्नलिखित में से कौन सा पदार्थ अजैव निम्नीकृत (Non-Biodegradable) है?
Explanation: पॉलिथीन की थैलियाँ अजैव निम्नीकृत पदार्थ हैं जिनका विघटन पर्यावरण में आसानी से नहीं होता है।
Q4. वैश्विक उष्णता का मुख्य कारण क्या है?
Explanation: वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2), मीथेन (CH4) जैसी ग्रीन हाउस गैसों की सांद्रता में वृद्धि पृथ्वी के तापमान को बढ़ाती है, जिसे वैश्विक उष्णता कहते हैं।
Q5. ओजोन परत के क्षरण के लिए मुख्य रूप से कौन सी गैसें जिम्मेदार हैं?
Explanation: क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) ओजोन परत के क्षरण के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार हैं, जो रेफ्रिजरेटर और एयरोसोल स्प्रे में उपयोग होती हैं।
Frequently asked questions
कक्षा 12 जीव विज्ञान के अध्याय 16 में कौन से मुख्य पर्यावरणीय मुद्दे शामिल हैं?
इस अध्याय में मुख्य रूप से घरेलू वाहित मल और उसके प्रभाव, अपशिष्ट प्रबंधन, वैश्विक उष्णता (ग्लोबल वार्मिंग) और ओजोन परत का क्षरण जैसे महत्वपूर्ण पर्यावरणीय मुद्दे शामिल हैं।
वाहित मल के नदी में विसर्जन से जलीय जीवन पर क्या असर पड़ता है?
वाहित मल के विसर्जन से जल में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ती है, जिससे घुलित ऑक्सीजन (DO) का स्तर कम हो जाता है। यह जलीय जीवों, विशेषकर मछलियों के लिए हानिकारक है और उनकी मृत्यु का कारण बन सकता है।
वैश्विक उष्णता को नियंत्रित करने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं?
वैश्विक उष्णता को नियंत्रित करने के लिए जीवाश्म ईंधनों का उपयोग कम करना, वनों की कटाई रोकना और वृक्षारोपण को बढ़ावा देना, ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों का उपयोग करना और ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करना जैसे उपाय किए जा सकते हैं।
ओजोन परत के क्षरण का मुख्य कारण क्या है?
ओजोन परत के क्षरण का मुख्य कारण क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) जैसे रसायन हैं, जो रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर और एयरोसोल स्प्रे में उपयोग किए जाते हैं। ये रसायन समताप मंडल में ओजोन अणुओं को नष्ट कर देते हैं।
क्या हम अपने दैनिक जीवन में उत्पन्न होने वाले अपशिष्टों को कम कर सकते हैं?
हाँ, हम प्लास्टिक और पॉलिथीन के उपयोग को कम करके, पुन: प्रयोज्य (reusable) वस्तुओं का उपयोग करके, और सामग्री को पुनर्चक्रित (recycle) करके अपने दैनिक जीवन में उत्पन्न होने वाले अपशिष्टों को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
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