कक्षा 12 जीव विज्ञान: अध्याय 17 प्रयोगात्मक एवं प्रोजेक्ट कार्य NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 12 जीव विज्ञान के अध्याय 17, 'प्रयोगात्मक एवं प्रोजेक्ट कार्य' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें पराग अंकुरण का अध्ययन, मृदा की बनावट, नमी, pH मान, जलधारण क्षमता और पौधों के साथ उसके सहसंबंध का प्रायोगिक विश्लेषण शामिल है। प्रत्येक प्रयोग के उद्देश्य, आवश्यक सामग्री, चरण-दर-चरण विधि और निष्कर्षों को स्पष्ट रूप से समझाया गया है। ये समाधान छात्रों को जीव विज्ञान के व्यावहारिक पहलुओं को समझने और अपने प्रोजेक्ट कार्यों को प्रभावी ढंग से पूरा करने में मदद करते हैं, जिससे वे परीक्षा की तैयारी के लिए आवश्यक प्रायोगिक ज्ञान प्राप्त कर सकें।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 12
Subjectजीव विज्ञान
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter17. प्रयोगात्मक एवं प्रोजेक्ट कार्य

Chapter summary

कक्षा 12 जीव विज्ञान के अध्याय 17 के ये NCERT समाधान छात्रों को विभिन्न प्रयोगात्मक तकनीकों से परिचित कराते हैं। इसमें पराग अंकुरण का अध्ययन, मृदा के भौतिक गुणों जैसे बनावट, रंग, तापमान, pH मान और नमी की मात्रा का निर्धारण, तथा जलधारण क्षमता का विश्लेषण शामिल है। साथ ही, मृदा के प्रकार और उसमें उगने वाले पौधों के बीच सहसंबंध पर भी प्रकाश डाला गया है। ये समाधान छात्रों को प्रायोगिक कौशल विकसित करने और वैज्ञानिक विधियों को समझने में सहायता करते हैं।

Learning outcomes

  • पराग अंकुरण की प्रक्रिया और पराग नलिका के विकास का अध्ययन करना।
  • मृदा के विभिन्न भौतिक गुणों जैसे रंग, तापमान, गठन और pH मान का निर्धारण करना।
  • मृदा में नमी की मात्रा और उसकी जलधारण क्षमता का मापन करना।
  • विभिन्न प्रकार की मृदा और उनमें उगने वाले पौधों के बीच सहसंबंध स्थापित करना।
  • प्रायोगिक विधियों का पालन करते हुए वैज्ञानिक अवलोकन और निष्कर्ष निकालना।

Topics covered

Paper topics

  • पराग अंकुरण का अध्ययन
  • मृदा की बनावट का अध्ययन
  • मृदा का रंग
  • मृदा का ताप
  • मृदा का गठन
  • मृदा का pH मान ज्ञात करना
  • मृदा के नमूने में नमी की मात्रा ज्ञात करना
  • मृदा की जलधारण क्षमता का अध्ययन
  • मृदा में पाए जाने वाले पौधों का सहसंबंध

Important topics

  • पराग अंकुरण की विधि एवं प्रेक्षण
  • मृदा के गठन का वर्गीकरण (कणों के व्यास के आधार पर)
  • मृदा का pH मान और उसका महत्व
  • मृदा में नमी की मात्रा ज्ञात करने की विधि
  • जलधारण क्षमता का मापन और विभिन्न मृदाओं की तुलना

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

उद्देश्य: स्लाइड पर पराग अंकुरण का अध्ययन करना।
Solution:

इस प्रयोग का उद्देश्य स्लाइड पर परागकणों के अंकुरण की प्रक्रिया का अध्ययन करना है।

सामग्री: किसी पुष्प के ताजे परागकण, 10% शर्करा विलयन, स्लाइड, कवर स्लिप, सूक्ष्मदर्शी, पेट्रीडिश, ब्रुश।

विधि:

किसी उपयुक्त पुष्प के परागकोश से परागकणों को एक ब्रुश की सहायता से सावधानीपूर्वक एकत्र करें।

एक साफ स्लाइड पर 10% शर्करा विलयन की एक बूँद रखें।

इस बूँद में एकत्र किए गए परागकणों को मिलाएँ।

स्लाइड को एक पेट्रीडिश में रखें और पेट्रीडिश को ढक दें ताकि नमी बनी रहे।

इस पेट्रीडिश को लगभग 24 घंटे के लिए उपयुक्त तापमान पर रखें।

24 घंटे बाद, स्लाइड पर पराग नलिका के विकास का सूक्ष्मदर्शी द्वारा अध्ययन करें।

प्रेक्षण:

परागकण की बाहरी मोटी भित्ति को बाह्यचोल (exine) और भीतरी पतली भित्ति को अंतःचोल (intine) कहते हैं।

अंकुरण के दौरान, अंतःचोल जनन छिद्र से पराग नलिका के रूप में बाहर निकलती है।

पराग नलिका में एक बड़ा नलिका केंद्रक (tube nucleus) और एक छोटा जनन केंद्रक (generative nucleus) होता है।

जनन केंद्रक विभाजित होकर दो नर युग्मक बनाता है।

पराग नलिका इन नर युग्मकों को अण्डाशय में स्थित बीजाण्ड तक पहुँचाती है, जो निषेचन के लिए आवश्यक है।

निष्कर्ष: परागकण उपयुक्त माध्यम (जैसे 10% शर्करा विलयन) में अंकुरित होकर पराग नलिका बनाते हैं, जो नर युग्मकों को ले जाती है।

प्रश्न 2.1

उद्देश्य: मृदा की बनावट का अध्ययन करना।
Solution:

इस प्रयोग का उद्देश्य विभिन्न मृदा नमूनों की बनावट का अध्ययन करना है।

सामग्री: विभिन्न प्रकार की मृदा के नमूने, विभिन्न व्यास के छिद्रों वाली लोहे की छलनियाँ, मुन्सेल का मृदा रंग चार्ट, तापमापी, भौतिक तुला।

विधि:

1. मृदा का रंग (Soil colour):

मृदा के विभिन्न नमूनों को कार्ड-बोर्ड की अलग-अलग तख्तियों पर समान रूप से फैलाएँ।

इनके रंग की तुलना मुन्सेल के मृदा रंग चार्ट से करें और रंग का निर्धारण करें।

2. मृदा का ताप (Temperature of soil):

मृदा तापमापी का उपयोग करके मृदा की विभिन्न गहराइयों (जैसे 1 इंच, 2 इंच, 4 इंच, 6 इंच, 12 इंच) पर तापमान मापें।

विभिन्न गहराइयों पर तापमान की भिन्नता को नोट करें।

3. मृदा का गठन (Soil Texture):

एक शुष्क मृदा नमूना लें और उसे सबसे छोटे छिद्रों वाली लोहे की छलनी से छानें।

क्रमशः बढ़ते व्यास वाली छलनियों से मृदा को छानते जाएँ।

इस प्रकार प्राप्त विभिन्न व्यास के कणों वाली मृदा को पृथक्-पृथक् कर लें।

मृदा कणों के व्यास के आधार पर उनका वर्गीकरण करें:

वर्गीकरण:

क्र० सं० मृदा कणों का व्यास मृदा का गठन
1 0.002 mm से कम चिकनी मृदा (clay)
2 0.002 mm से 0.02 mm तक गाद (silt)
3 0.02 mm से 0.2 mm तक बारीक रेत (fine sand)
4 0.2 mm से 2 mm तक मोटी बालू (coarse sand)
5 2 mm से अधिक बजरी (gravel)

निष्कर्ष: मृदा का रंग, ताप और गठन उसके भौतिक गुणों को निर्धारित करते हैं, जो पौधों के विकास को प्रभावित करते हैं। कणों के आकार के आधार पर मृदा को चिकनी मृदा, गाद, रेत और बजरी में वर्गीकृत किया जा सकता है।

प्रश्न 2.2

उद्देश्य: मृदा का pH मान ज्ञात करना।
Solution:

इस प्रयोग का उद्देश्य विभिन्न मृदा नमूनों का pH मान ज्ञात करना है।

सामग्री: विभिन्न मृदा के नमूने, परखनली, पोर्सिलेन टाइल, बेरियम सल्फेट, सार्वत्रिक सूचक, जल।

विधि:

प्रत्येक मृदा नमूने को एक अलग परखनली में लें।

प्रत्येक परखनली में उतनी ही मात्रा में बेरियम सल्फेट मिलाएँ।

इसमें 15 mm जल मिलाकर मिश्रण को अच्छी प्रकार हिलाएँ।

मिश्रण को कुछ देर स्थिर रहने दें और फिर ऊपर से साफ तरल को सावधानीपूर्वक अलग कर लें (निथार लें)।

पोर्सिलेन टाइल पर इस तरल की कुछ बूँदें लें।

इसमें उतनी ही मात्रा में सार्वत्रिक सूचक मिलाएँ।

उत्पन्न रंग परिवर्तन का मिलान विभिन्न pH मानों के लिए दिए गए रंग चार्ट से करें।

जिस pH के रंग से मिलान हो जाता है, वही उस मृदा का pH मान होता है।

निष्कर्ष:

मृदा में विभिन्न विलेयशील लवण पाए जाते हैं जो उसके pH को प्रभावित करते हैं।

उदासीन मृदा में लिटमस का रंग परिवर्तन नहीं होता है।

क्षारीय मृदा घोल में लिटमस नीला हो जाता है, जबकि अम्लीय मृदा घोल में लिटमस लाल हो जाता है।

सामान्यतः बगीचे की मृदा का pH मान लगभग 7, सड़क के किनारे की मृदा का pH 6.5 और खुली मृदा का pH मान लगभग 7.5 होता है।

प्रश्न 2.3

उद्देश्य: मृदा के नमूने में नमी की मात्रा ज्ञात करना।
Solution:

इस प्रयोग का उद्देश्य विभिन्न मृदा नमूनों में उपस्थित नमी की मात्रा का निर्धारण करना है।

सामग्री: विभिन्न प्रकार की मृदा के नमूने, भौतिक तुला, क्रूसिबल, बीकर, अवन (oven) या स्पिरिट लैम्प।

विधि:

एक स्वच्छ एवं शुष्क क्रूसिबल को भौतिक तुला में तौलकर उसका प्रारंभिक भार (W1) ज्ञात करें।

क्रूसिबल में एक छोटी चम्मच मृदा का नमूना लेकर पुन: भौतिक तुला में तौलें और कुल भार (W2) ज्ञात करें। इस प्रकार मृदा नमूने का भार (W_soil = W2 - W1) होगा।

इस मृदा नमूने वाले क्रूसिबल को 24 घंटे के लिए गर्म वायु अवन में 105 – 110°C ताप पर रखें। यदि अवन उपलब्ध न हो, तो स्पिरिट लैम्प का उपयोग करके सावधानीपूर्वक सुखाया जा सकता है।

अवन से निकालने के बाद, क्रूसिबल को ठंडा होने दें और फिर उसका भार (W3) ज्ञात करें।

भार में कमी (W_moisture = W2 - W3) मृदा में उपस्थित नमी की मात्रा को दर्शाती है।

इस प्रक्रिया को सभी मृदा नमूनों के लिए दोहराएँ।

निष्कर्ष: मृदा में नमी की मात्रा उसके प्रकार पर निर्भर करती है। रेतीली मृदा में नमी की मात्रा बहुत कम होती है, जबकि चिकनी मृदा में नमी की मात्रा अधिक होती है। बगीचे की मृदा में ह्यूमस की उपस्थिति के कारण नमी अधिक समय तक बनी रहती है।

प्रश्न 2.4

उद्देश्य: विभिन्न प्रकार की मृदा की जलधारण क्षमता का अध्ययन करना।
Solution:

इस प्रयोग का उद्देश्य विभिन्न प्रकार की मृदा की जल को धारण करने की क्षमता का अध्ययन और तुलना करना है।

सामग्री: मृदा के शुष्क नमूने (जैसे बगीचे की मृदा, खेत की मृदा, नदी की मृदा), भौतिक तुला, छिद्रित तली वाले टिन के डिब्बे (X, Y, Z), फिल्टर पेपर, जल।

विधि:

मृदा के शुष्क नमूनों को बारीक पीस लें।

प्रत्येक टिन के डिब्बे (X, Y, Z) के नीचे फिल्टर पेपर लगाएँ।

प्रत्येक डिब्बे (फिल्टर पेपर सहित) का भार अलग-अलग ज्ञात करें।

X, Y, Z डिब्बों में अलग-अलग स्थानों की पिसी हुई मृदा भरकर पुन: उनका भार ज्ञात करें। (यह मृदा सहित डिब्बे का भार होगा)।

प्रत्येक डिब्बे को जल से भरी एक पेट्रीडिश में इस प्रकार रखें कि डिब्बे का निचला भाग जल में डूबा रहे।

डिब्बों को पेट्रीडिश में तब तक रहने दें जब तक मृदा की ऊपरी सतह गीली न हो जाए और जल का अवशोषण बंद न हो जाए।

डिब्बों को पेट्रीडिश से बाहर निकाल लें और उन्हें तब तक रखें जब तक उनसे पानी का टपकना बंद न हो जाए।

अब प्रत्येक डिब्बे (मृदा सहित) का अंतिम भार ज्ञात करें।

प्रत्येक डिब्बे में भार में हुई वृद्धि (जो अवशोषित जल की मात्रा है) की गणना करें।

निष्कर्ष: अवशोषित जल की मात्रा के आधार पर, यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि बगीचे की मृदा की जल धारण क्षमता सबसे अधिक होती है, उसके बाद खेत की मृदा की जल धारण क्षमता नदी की मृदा से अधिक होती है। यह मृदा की संरचना और कणों के आकार पर निर्भर करता है।

प्रश्न 2.5

उद्देश्य: विभिन्न प्रकार की मृदा में पाए जाने वाले पौधों का उससे सहसंबंध स्थापित करना।
Solution:

इस प्रयोग का उद्देश्य विभिन्न प्रकार की मृदा की विशेषताओं और उनमें उगने वाले पौधों के बीच संबंध का अध्ययन करना है।

विधि एवं अवलोकन:

विभिन्न प्रकार की मृदाओं का अवलोकन करने पर निम्नलिखित सहसंबंध देखे जा सकते हैं:

  • रेतीली मृदा या रेतीली दोमट मृदा: इस प्रकार की मृदा की जल धारण क्षमता कम होती है क्योंकि इसमें पानी जल्दी रिस जाता है। इसमें पोषक तत्वों की मात्रा भी प्रायः कम होती है, जिससे यह कम उपजाऊ होती है। ऐसी मृदा में प्रायः शुष्कोद्भिद् (xerophytes) पादप उगते हैं, जो कम जल में जीवित रह सकते हैं। इन पौधों की संख्या भी अपेक्षाकृत कम होती है।
  • चिकनी मृदा (Clay Soil): इसमें जल धारण क्षमता अधिक होती है और यह पोषक तत्वों को अच्छी तरह रोक सकती है, लेकिन जलभराव की समस्या हो सकती है। यह कुछ विशेष प्रकार की फसलों के लिए उपयुक्त होती है।
  • दोमट मृदा (Loamy Soil): यह रेत, गाद और चिकनी मृदा का मिश्रण होती है, जिसमें जल धारण क्षमता और वायु संचार का अच्छा संतुलन होता है। यह प्रायः सबसे उपजाऊ मानी जाती है और इसमें विभिन्न प्रकार के पौधे अच्छी तरह उगते हैं।

निष्कर्ष: मृदा की बनावट, जल धारण क्षमता, पोषक तत्वों की उपलब्धता और वायु संचार जैसे कारक यह निर्धारित करते हैं कि उस मृदा में किस प्रकार के पौधे उग सकते हैं और उनकी वृद्धि कैसी होगी। शुष्कोद्भिद् पौधे रेतीली मृदा में पाए जाते हैं, जबकि अधिक उपजाऊ मृदाओं में विविध प्रकार के पौधे उगते हैं।

Common mistakes

  • प्रयोगों में सामग्री की सही मात्रा का उपयोग न करना।
  • अवलोकन और मापन में सटीकता की कमी।
  • निष्कर्ष निकालते समय प्रायोगिक डेटा की गलत व्याख्या करना।
  • प्रयोग विधि के चरणों का सही क्रम में पालन न करना।

Revision tips

  • प्रत्येक प्रयोग के उद्देश्य को स्पष्ट रूप से समझें।
  • प्रयोग विधि के प्रत्येक चरण को ध्यान से पढ़ें और उसका पालन करें।
  • अवलोकन और निष्कर्षों को अपनी भाषा में लिखें।
  • मृदा के विभिन्न गुणों और उनके महत्व को याद करें।

Practice MCQs

Q1. पराग अंकुरण के अध्ययन के लिए किस शर्करा विलयन का उपयोग किया जाता है?

Q2. मृदा के गठन (Texture) का अध्ययन करने के लिए किस उपकरण का उपयोग किया जाता है?

Q3. मृदा का pH मान ज्ञात करने के लिए किस सूचक का प्रयोग किया जाता है?

Q4. मृदा में नमी की मात्रा ज्ञात करने के लिए नमूने को कितने तापमान पर सुखाया जाता है?

Q5. किस प्रकार की मृदा की जलधारण क्षमता सबसे अधिक होती है?

Frequently asked questions

कक्षा 12 जीव विज्ञान के अध्याय 17 में कौन से मुख्य प्रयोग शामिल हैं?

अध्याय 17 में मुख्य रूप से पराग अंकुरण का अध्ययन, मृदा की बनावट, रंग, ताप, pH मान, नमी की मात्रा और जलधारण क्षमता का निर्धारण, तथा मृदा और पौधों के बीच सहसंबंध का अध्ययन शामिल है।

पराग अंकुरण के प्रयोग में 10% शर्करा विलयन का क्या महत्व है?

10% शर्करा विलयन परागकणों को अंकुरित होने के लिए आवश्यक पोषक तत्व और नमी प्रदान करता है, जिससे पराग नलिका का विकास देखा जा सके।

मृदा के गठन का अध्ययन कैसे किया जाता है?

मृदा के गठन का अध्ययन विभिन्न व्यास की छलनियों का उपयोग करके किया जाता है। मृदा को इन छलनियों से छानकर कणों को उनके आकार के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।

मृदा में नमी की मात्रा ज्ञात करने की विधि क्या है?

मृदा में नमी की मात्रा ज्ञात करने के लिए, मृदा के नमूने को तौलकर उसे 105-110°C पर सुखाया जाता है। सुखाने के बाद पुनः तौलने पर भार में आई कमी नमी की मात्रा को दर्शाती है।

यह समाधान छात्रों के लिए कैसे उपयोगी हैं?

ये समाधान छात्रों को प्रत्येक प्रयोग की विधि, सामग्री और निष्कर्षों को स्पष्ट रूप से समझने में मदद करते हैं, जिससे वे अपने प्रायोगिक कार्य को सफलतापूर्वक पूरा कर सकें और परीक्षा के लिए बेहतर तैयारी कर सकें।

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