कक्षा 12 जीव विज्ञान अध्याय 7: विकास NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 12 जीव विज्ञान के अध्याय 7, 'विकास' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। इसमें डार्विन के चयन सिद्धांत के संदर्भ में जीवाणुओं में प्रतिजैविक प्रतिरोध की व्याख्या, विकास से संबंधित विवादों और नए जीवाश्मों पर चर्चा, प्रजाति की एक स्पष्ट परिभाषा, और मानव विकास के विभिन्न घटकों जैसे मस्तिष्क के आकार, कंकाल संरचना, आहार संबंधी आदतें और अंगूठे की संरचना का विस्तृत विश्लेषण शामिल है। ये समाधान छात्रों को विकासवाद की जटिल अवधारणाओं को समझने, महत्वपूर्ण वैज्ञानिक तर्कों का विश्लेषण करने और मानव विकास की यात्रा में अंतर्दृष्टि प्राप्त करने में मदद करते हैं। परीक्षा की तैयारी के लिए यह एक अमूल्य संसाधन है।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | जीव विज्ञान |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 7. विकास |
Chapter summary
अध्याय 7 'विकास' के लिए NCERT समाधान कक्षा 12 जीव विज्ञान के छात्रों को विकासवाद के मूल सिद्धांतों से परिचित कराते हैं। इसमें डार्विन के सिद्धांत, जीवाश्म साक्ष्य, प्रजाति की अवधारणा और मानव विकास की प्रमुख विशेषताओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है। समाधान छात्रों को वैज्ञानिक तर्कों को समझने और विकास की प्रक्रिया में विभिन्न कारकों के महत्व का विश्लेषण करने में सहायता करते हैं।
Learning outcomes
- डार्विन के चयन सिद्धांत के आधार पर जीवाणुओं में प्रतिजैविक प्रतिरोध की व्याख्या करना।
- विकास से संबंधित वर्तमान विवादों और नए जीवाश्मों के महत्व को समझना।
- प्रजाति की एक वैज्ञानिक और सटीक परिभाषा प्रदान करना।
- मानव विकास के दौरान मस्तिष्क के आकार, कंकाल संरचना और आहार में हुए परिवर्तनों का विश्लेषण करना।
- मानव विकास में अंगूठे की संरचना और कार्य की भूमिका को पहचानना।
Topics covered
Paper topics
- डार्विन का चयन सिद्धांत
- जीवाणुओं में प्रतिजैविक प्रतिरोध
- विकास संबंधी विवाद
- नए जीवाश्म
- प्रजाति की परिभाषा
- मानव विकास
- मस्तिष्क का आकार और कार्य
- कंकालीय संरचना में परिवर्तन
- मानव आहार
- हाथ के अंगूठे की संरचना
- द्विपदचलन
- प्राकृतिक चयन
Important topics
- डार्विन का चयन सिद्धांत और प्रतिजैविक प्रतिरोध
- प्रजाति की परिभाषा और उसके मापदंड
- मानव विकास के प्रमुख शारीरिक परिवर्तन (मस्तिष्क, कंकाल)
- जीवाश्म साक्ष्य और विकास संबंधी विवाद
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
डार्विन के चयन सिद्धांत के अनुसार, विकास का आधार विभिन्नताएँ हैं। जीवाणुओं की मूल समष्टि में, कुछ जीवाणु स्वाभाविक रूप से प्रतिजैविक (एण्टीबायोटिक) के प्रति प्रतिरोधी हो सकते हैं, भले ही यह प्रतिरोध उन्हें सामान्य परिस्थितियों में कोई विशेष लाभ न दे। समष्टि के अधिकांश सदस्य आमतौर पर प्रतिजैविक के प्रति संवेदनशील होते हैं।
जब प्रतिजैविक का प्रयोग किया जाता है, तो यह एक चयन दबाव के रूप में कार्य करता है। संवेदनशील जीवाणु इस प्रतिजैविक के प्रभाव से मर जाते हैं। हालाँकि, जो कुछेक प्रतिरोधी जीवाणु जीवित बचते हैं, वे अब प्रतिस्पर्धा के अभाव में लाभ की स्थिति में आ जाते हैं। ये प्रतिरोधी जीवाणु तेजी से प्रजनन करते हैं और अपनी संख्या बढ़ाते हैं। परिणामस्वरूप, नई उत्पन्न जीवाणु समष्टि में मुख्य रूप से प्रतिरोधी जीवाणु ही होते हैं। इस प्रक्रिया को जीवाणुओं में प्रतिरोधकता का विकास कहा जाता है, जो प्राकृतिक चयन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
प्रश्न 2
विकास से संबंधित कई रोचक विवाद और नए जीवाश्मों की खोजें समाचारों और वैज्ञानिक लेखों में सामने आती रहती हैं। ये विकास की हमारी समझ को लगातार परिष्कृत करते हैं।
विकास सम्बन्धी विवाद (A Few Controversies about Evolution):
- मानव विकास का स्थान: क्या मानव का विकास एशिया, अफ्रीका और यूरोप में अलग-अलग हुआ, या आधुनिक मानव अफ्रीका में विकसित होकर विश्व भर में फैले? इस पर वैज्ञानिकों में अभी भी पूर्ण एकमत नहीं है।
- जीवन की उत्पत्ति का स्थान: क्या जीवन की उत्पत्ति पृथ्वी पर ही हुई, या यह बाह्य अंतरिक्ष से आया? यह एक सतत बहस का विषय है।
- नियण्डरथल मानवों का विलुप्त होना: सारे नियण्डरथल मनुष्य एक साथ कैसे समाप्त हुए, यह एक रहस्य बना हुआ है और विवाद का विषय है।
- पक्षियों के पंखों का प्रारंभिक लाभ: क्या पक्षियों के पंख उनके विकास के प्रारंभिक चरणों में, जब वे छोटे थे, उपयोगी थे? यदि नहीं, तो वे कैसे चयनित होते रहे? यह प्रश्न भी चर्चा का विषय है।
- डायनासोरों का विलुप्त होना: सारे डायनासोर विलुप्त क्यों हो गए, जबकि उसी काल के कई छोटे सरीसृप आज भी मौजूद हैं? इसके कारणों पर विभिन्न मत हैं।
नए जीवाश्म (New Fossils):
- ताइवान के समुद्र से मिले मानव जीवाश्मों के अध्ययन से पता चलता है कि आधुनिक मानव के विकास से पहले भी वहाँ विभिन्न प्रकार के मानव पूर्वज मौजूद हो सकते थे।
- अमेरिकन जरनल ऑफ फिजीकल एन्थ्रोपोलॉजी के अनुसार, चीन में मिले कुछ दाँतों के पुरावशेष ऐसे मानव के हैं जो न तो होमो सेपियन्स थे और न ही नियण्डरथल मानव।
- मंगोलिया से Halszkaraptor escuilliei नामक डायनासोर का जीवाश्म मिला है।
- समुद्र में पाए जाने वाले बोबिट वर्म (Bobbit worm) के जीवाश्म भी खोजे गए हैं।
- कनाडा के क्यूबेक से लगभग 3.7 अरब वर्ष पुराने जीवाणु जैसे जीव का जीवाश्म प्राप्त हुआ है, जो जीवन की प्राचीनता को दर्शाता है।
प्रश्न 3
प्रजाति (Species) को जीव विज्ञान में वर्गीकरण की सबसे छोटी और मौलिक इकाई माना जाता है। किसी भी जीव समूह को एक प्रजाति के अंतर्गत रखने के लिए निम्नलिखित विशेषताएँ महत्वपूर्ण हैं:
- समान पूर्वज: एक प्रजाति के सभी जीवों की उत्पत्ति एक सामान्य पूर्वज से होती है।
- अंतःप्रजनन क्षमता: एक प्रजाति के सदस्य आपस में सफलतापूर्वक प्रजनन कर सकते हैं (Interbreeding)। इससे उत्पन्न संतानें भी स्वयं प्रजनन करने में सक्षम होनी चाहिए। यह प्रजनन क्षमता प्रजाति की निरंतरता के लिए आवश्यक है।
- समानताएँ और जीनपूल: एक प्रजाति के जीवों में काफी हद तक शारीरिक और आनुवंशिक समानताएँ पाई जाती हैं, जो उन्हें अन्य प्रजातियों से अलग करती हैं। वे एक ही प्रकार के जीनपूल (Gene pool) को साझा करते हैं, जिसका अर्थ है कि वे एक बंद आनुवंशिक इकाई का निर्माण करते हैं।
संक्षेप में, प्रजाति जीवों का एक ऐसा समूह है जो एक सामान्य पूर्वज से उत्पन्न हुआ है, आपस में प्रजनन कर सकता है और प्रजनन योग्य संतानें उत्पन्न कर सकता है, और एक विशिष्ट जीनपूल साझा करता है।
प्रश्न 4
मानव विकास एक क्रमिक प्रक्रिया रही है जिसमें विभिन्न शारीरिक और कार्यात्मक घटकों में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं। प्रमुख घटक निम्नलिखित हैं:
मस्तिष्क का आकार और कार्य (Brain size and function):
- मानव विकास के दौरान मस्तिष्क के आकार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। कपियों की तुलना में, मानव मस्तिष्क का आयतन काफी बढ़ गया है। उदाहरण के लिए, ऑस्ट्रेलोपिथेकस में यह 350-450cc था, होमो हैबिलिस में 650-850cc, होमो इरेक्टस में लगभग 900cc, और आधुनिक मानव (होमो सेपियन्स) में यह 1350-1450cc तक पहुँच गया है।
- मस्तिष्क के विकास के साथ-साथ, घ्राण शक्ति से संबंधित भाग (olfactory lobe) छोटा होता गया, जबकि दृष्टि से संबंधित भाग (visual lobe) बड़ा और अधिक जटिल हुआ।
- संवाद, भाषाई कौशल, योजना बनाने, कला और तकनीक से संबंधित मस्तिष्क के हिस्से भी विकसित हुए, जिससे तंत्रिका-पेशीय समन्वय (neuro-muscular coordination) बेहतर हुआ।
कंकालीय संरचना (Skeletal structure):
- पैरों और घुटनों का अनुकूलन: घुटने अधिक वजन सहने में सक्षम हुए। टखने की अस्थि (ankle bone) थोड़ी बाहर की ओर उभरी, जिससे द्विपदचलन (bipedal locomotion) यानी दो पैरों पर चलना अधिक कुशल हुआ।
- रीढ़ की हड्डी: रीढ़ की हड्डी 'S' आकार की हो गई, जो सीधे खड़े होने और चलने में सहायता करती है, जबकि कपियों में यह अधिक वक्रीय होती है।
- श्रोणि मेखला (Pelvic girdle): यह चौड़ी हो गई, जिससे शरीर का संतुलन बेहतर हुआ।
- चेहरे की संरचना: आँख की भौंहों (eyebrow ridge) का उभार कम हुआ, जबड़े (jaw) नुकीले न होकर चपटे हो गए, और ठोड़ी (chin) का विकास हुआ।
- पैर का तलवा: पैर का तलवा चापदार (arched) हो गया, जो चलने के दौरान झटके सहने और संतुलन बनाने में मदद करता है।
- मुद्रा (Posture): चलने-फिरने का ढंग सीधा हो गया।
खानपान (Diet):
- प्रारंभिक होमिनिड्स जैसे ड्रायोपिथेकस, रामापिथेकस, ऑस्ट्रेलोपिथेकस और होमो हैबिलिस मुख्य रूप से शाकाहारी थे।
- होमो इरेक्टस संभवतः मांसाहारी भी रहे होंगे।
- बाद के काल जैसे नियण्डरथल, क्रोमैगनॉन और आधुनिक मानव सर्वाहारी (omnivorous) रहे हैं। मनुष्य की छोटी कैनाइन दांत और लंबी आहार नाल उसकी शाकाहारी प्रवृत्ति की ओर भी संकेत करती है।
हाथ के अंगूठे की रचना व विन्यास (Structure and arrangement of thumb):
- अंगूठे का पूर्णरूप से विरोधामुखी (opposable thumb) होना मानव विकास का एक महत्वपूर्ण पहलू है। इस अनुकूलन के कारण वस्तुओं पर पकड़ मजबूत हुई और औजारों का उपयोग करने की क्षमता विकसित हुई, जिससे कौशल विकास संभव हुआ।
- अंगूठा लंबा हो गया और उंगलियाँ आसानी से मुड़कर वस्तुओं को पकड़ने में सक्षम हो गईं।
Common mistakes
- प्रतिजैविक प्रतिरोध के विकास को एक सचेत अनुकूलन के रूप में समझना, न कि प्राकृतिक चयन के परिणाम के रूप में।
- प्रजाति की परिभाषा में केवल बाहरी समानता पर ध्यान केंद्रित करना, अंतःप्रजनन क्षमता को अनदेखा करना।
- मानव विकास के विभिन्न चरणों के बीच अंतर करने में कठिनाई।
- विकास से संबंधित विवादों को तथ्यों के बजाय राय के रूप में प्रस्तुत करना।
Revision tips
- प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को समझने के लिए डार्विन के सिद्धांत और प्राकृतिक चयन की अवधारणाओं को दोहराएं।
- मानव विकास के विभिन्न चरणों से जुड़े प्रमुख शारीरिक परिवर्तनों की एक सारणी बनाएं।
- प्रजाति की परिभाषा के मुख्य बिंदुओं को याद करें, विशेष रूप से अंतःप्रजनन क्षमता पर जोर दें।
- नए जीवाश्मों और विकास संबंधी विवादों पर चर्चा करते समय वैज्ञानिक दृष्टिकोण बनाए रखें।
Practice MCQs
Q1. जीवाणुओं में प्रतिजैविक प्रतिरोध का विकास किस सिद्धांत का एक उदाहरण है?
Explanation: प्रतिजैविक के प्रयोग से संवेदी जीवाणु मर जाते हैं, जबकि प्रतिरोधी जीवाणु जीवित रहकर प्रजनन करते हैं, जो प्राकृतिक चयन का एक स्पष्ट उदाहरण है।
Q2. प्रजाति की परिभाषा के अनुसार, एक प्रजाति के सदस्य क्या करने में सक्षम होते हैं?
Explanation: प्रजाति की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इसके सदस्य आपस में प्रजनन कर सकते हैं और ऐसी संतानें उत्पन्न कर सकते हैं जो स्वयं भी प्रजनन में सक्षम हों।
Q3. मानव विकास के दौरान मस्तिष्क के आकार में क्या परिवर्तन देखा गया?
Explanation: मानव विकास के क्रम में मस्तिष्क का आकार काफी बढ़ा है, जिससे जटिल संज्ञानात्मक कार्यों, भाषा और कौशल का विकास संभव हुआ।
Q4. मानव कंकाल संरचना में द्विपदचलन (bipedal locomotion) को बेहतर बनाने वाला कौन सा परिवर्तन हुआ?
Explanation: टखने की अस्थि में हुए परिवर्तन ने द्विपदचलन को अधिक कुशल बनाया, जिससे मनुष्य सीधे खड़े होकर चल सके।
Q5. हाथ के अंगूठे का पूर्णरूप से विरोधामुखी (opposable) होना किस विकास के लिए महत्वपूर्ण था?
Explanation: विरोधामुखी अंगूठे ने मनुष्यों को वस्तुओं को सटीकता से पकड़ने और औजारों का उपयोग करने की क्षमता प्रदान की, जो कौशल विकास के लिए आवश्यक था।
Frequently asked questions
जीवाणुओं में प्रतिजैविक प्रतिरोध कैसे विकसित होता है?
जब प्रतिजैविक का प्रयोग किया जाता है, तो अधिकांश संवेदनशील जीवाणु मर जाते हैं। कुछ जीवाणु जिनमें पहले से ही प्रतिरोधक क्षमता होती है, वे जीवित बच जाते हैं और तेजी से प्रजनन करते हैं, जिससे प्रतिरोधी जीवाणुओं की एक नई समष्टि बन जाती है। यह डार्विन के चयन सिद्धांत का एक उदाहरण है।
प्रजाति को परिभाषित करने के लिए कौन से मुख्य मापदंड हैं?
प्रजाति के सदस्यों की उत्पत्ति समान पूर्वज से होती है, वे आपस में प्रजनन योग्य होते हैं और उनसे उत्पन्न संतानें भी प्रजनन योग्य होती हैं। वे एक ही जीनपूल साझा करते हैं और उनमें काफी समानताएं होती हैं।
मानव विकास में मस्तिष्क के आकार में वृद्धि का क्या महत्व है?
मस्तिष्क के आकार में वृद्धि ने संवाद, भाषा, कला और तकनीक जैसे जटिल संज्ञानात्मक कार्यों के विकास को संभव बनाया है, जिससे मानव प्रजाति को अन्य जीवों से अलग पहचान मिली है।
क्या विकास संबंधी विवादों का समाधान हो गया है?
विकास से संबंधित कई विवाद अभी भी जारी हैं, जैसे मानव विकास की सटीक उत्पत्ति का स्थान, जीवन की उत्पत्ति का स्रोत, और कुछ प्रजातियों के विलुप्त होने के कारण। वैज्ञानिक इन पर शोध जारी रखे हुए हैं।
यह समाधान छात्रों की परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेंगे?
ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को स्पष्ट, चरण-दर-चरण तरीके से समझाते हैं, जिससे छात्रों को अवधारणाओं को गहराई से समझने और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों का उत्तर देने में आत्मविश्वास प्राप्त करने में मदद मिलती है।
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