कक्षा 12 रसायन विज्ञान: अध्याय 14 जैव अणु NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 12 रसायन विज्ञान के अध्याय 14, 'जैव अणु' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। इसमें ग्लूकोज, सुक्रोज, लैक्टोज, अमीनो एसिड, प्रोटीन और विटामिन जैसे महत्वपूर्ण जैव अणुओं से संबंधित पाठ्य-निहित प्रश्नों के हल शामिल हैं। समाधान प्रत्येक प्रश्न के पीछे के रासायनिक सिद्धांतों की गहन समझ प्रदान करते हैं, जैसे कि विलेयता, जल-अपघटन, संरचनात्मक विशेषताएं और जैविक कार्य। यह सामग्री छात्रों को इन अवधारणाओं को स्पष्ट करने, उनकी समस्या-समाधान क्षमताओं को बढ़ाने और आगामी परीक्षाओं के लिए प्रभावी ढंग से तैयारी करने में मदद करती है।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 12
Subjectरसायन विज्ञान
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter14. जैव अणु

Chapter summary

अध्याय 14 'जैव अणु' के ये NCERT समाधान कार्बोहाइड्रेट (ग्लूकोज, लैक्टोज), अमीनो एसिड और प्रोटीन की संरचना और गुणों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। इसमें विलेयता, जल-अपघटन प्रतिक्रियाओं और प्रोटीन विकृतीकरण जैसे विषयों को शामिल किया गया है। समाधान छात्रों को इन जैव अणुओं की रासायनिक प्रकृति और उनके जैविक महत्व को समझने में मदद करते हैं, जो परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण हैं।

Learning outcomes

  • ग्लूकोज, सुक्रोज, साइक्लोहेक्सेन और बेंजीन की जल में विलेयता के कारणों को समझना।
  • लैक्टोज के जल-अपघटन से बनने वाले उत्पादों की पहचान करना।
  • D-ग्लूकोस के पेन्टाऐसीटेट में एल्डिहाइड समूह की अनुपस्थिति को समझाना।
  • अमीनो एसिड और हैलो एसिड की गलनांक और जल में विलेयता में अंतर का कारण बताना।
  • अंडे को उबालने पर प्रोटीन विकृतीकरण की प्रक्रिया को समझना।
  • विटामिन C के शरीर में संचित न होने के कारण का विश्लेषण करना।

Topics covered

Paper topics

  • जैव अणु
  • कार्बोहाइड्रेट
  • ग्लूकोज
  • सुक्रोज
  • लैक्टोज
  • डाइसैकेराइड
  • मोनोसैकेराइड
  • अमीनो एसिड
  • प्रोटीन
  • प्रोटीन विकृतीकरण
  • विटामिन
  • विटामिन C

Important topics

  • कार्बोहाइड्रेट की संरचना और विलेयता
  • डाइसैकेराइड का जल-अपघटन
  • एल्डिहाइड समूह की पहचान और अभिक्रियाशीलता
  • अमीनो एसिड की ज्विटरियन प्रकृति और गुण
  • प्रोटीन विकृतीकरण
  • विटामिन की घुलनशीलता

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

ग्लूकोस तथा सुक्रोज जल में विलेय हैं जबिक साइक्लोहेक्सेन अथवा बेन्जीन (सामान्य छ: सदस्यीय वलय युक्त यौगिक) जल में अविलेय होते हैं। समझाइए।
Solution:

ग्लूकोस (C_6H_{12}O_6) में पाँच हाइड्रॉक्सिल (-OH) समूह होते हैं, और सुक्रोज (C_{12}H_{22}O_{11}) में भी कई हाइड्रॉक्सिल समूह होते हैं। ये हाइड्रॉक्सिल समूह ध्रुवीय प्रकृति के होते हैं और जल के अणुओं के साथ अंतराण्विक हाइड्रोजन बंध बना सकते हैं। हाइड्रोजन बंध बनाने की यह क्षमता इन यौगिकों को जल में आसानी से विलेय बनाती है।

इसके विपरीत, बेन्जीन (C_6H_6) और साइक्लोहेक्सेन (C_6H_{12}) हाइड्रोकार्बन हैं जिनमें कोई ध्रुवीय समूह नहीं होता है। ये जल के अणुओं के साथ हाइड्रोजन बंध बनाने में असमर्थ होते हैं, जिसके कारण ये जल में अविलेय होते हैं।

प्रश्न 2

लैक्टोस के जल-अपघटन से किन उत्पादों के बनने की अपेक्षा करते हैं?
Solution:

लैक्टोस एक डाइसैकेराइड है। जब लैक्टोस का जल-अपघटन किया जाता है, तो यह दो मोनोसैकेराइड इकाइयों में टूट जाता है। ये उत्पाद हैं:

  1. एक अणु D-(+)-ग्लूकोस का
  2. एक अणु D-(+)-गैलेक्टोस का

इस अभिक्रिया को निम्न समीकरण द्वारा दर्शाया जा सकता है:

C_{12}H_{22}O_{11} \xrightarrow{H_3O^+} C_6H_{12}O_6 \text{ (ग्लूकोज)} + C_6H_{12}O_6 \text{ (गैलेक्टोज)}

प्रश्न 3

D-ग्लूकोस के पेन्टाऐसीटेट में आप ऐल्डिहाइड समूह की अनुपस्थिति को कैसे समझाएगें?
Solution:

D-ग्लूकोस एक ऐल्डोहैक्सोस है और यह ऐल्डिहाइड समूह (-CHO) की विशिष्ट अभिक्रियाएँ (जैसे HCN, टॉलेन अभिकर्मक, या फेहलिंग अभिकर्मक के साथ अभिक्रिया) प्रदर्शित करता है। हालाँकि, जब D-ग्लूकोस का पेन्टाऐसीटेट बनाया जाता है, तो यह इन विशिष्ट ऐल्डिहाइड अभिक्रियाओं को नहीं देता है।

इसका कारण यह है कि D-ग्लूकोस में ऐल्डिहाइड समूह वास्तव में एक चक्रीय हेमीएसिटल संरचना का हिस्सा होता है। पेन्टाऐसीटेट बनाने की प्रक्रिया में, यह हेमीएसिटल समूह एसिटिलेटेड हो जाता है, जिससे ऐल्डिहाइड समूह रासायनिक रूप से अभिक्रिया के लिए उपलब्ध नहीं रहता है।

अभिक्रिया इस प्रकार है:

D\text{-ग्लूकोस} + 5(CH_3CO)_2O \rightarrow D\text{-ग्लूकोस का पेन्टाऐसीटेट} + 5CH_3COOH

पेन्टाऐसीटेट में, ऐल्डिहाइड कार्बन पर एसिटिल समूह (-COCH_3) जुड़ जाता है, जिससे वह अभिक्रियाशील नहीं रहता।

प्रश्न 4

ऐमीनों अम्लों के गलनांक एवं जल में विलेयता सामान्यत: संगत हैलो अम्लों की तुलना में अधिक होती है। समझाइए।
Solution:

अमीनो अम्ल अपनी द्विध्रुवीय (ज्विटरियन) प्रकृति (NH_3^+ \text{–} CHR \text{–} COO^-) के कारण प्रबल द्विध्रुव-द्विध्रुव आकर्षण बल प्रदर्शित करते हैं। इस आयनिक प्रकृति के कारण उनके गलनांक उच्च होते हैं। जब अमीनो अम्ल जल में घोले जाते हैं, तो वे जल के अणुओं के साथ हाइड्रोजन बंध बना सकते हैं, जिससे वे जल में विलेय होते हैं (समइलेक्ट्रॉनी बिंदु पर छोड़कर, जहाँ उनकी विलेयता न्यूनतम होती है)।

इसके विपरीत, हैलो अम्ल द्विध्रुवीय नहीं होते हैं। उनमें केवल कार्बोक्सिल समूह ही हाइड्रोजन बंध में भाग ले सकता है, हैलोजन परमाणु नहीं। इसलिए, हैलो अम्ल, अमीनो अम्लों की तुलना में कम गलनांक और कम जल विलेयता प्रदर्शित करते हैं।

प्रश्न 5

अण्डे को उबालने पर उसमें उपस्थित जल कहाँ चला जाता है?
Solution:

जब अंडे को उबाला जाता है, तो अंडे के अंदर मौजूद ग्लोबुलर प्रोटीन विकृत (denature) हो जाते हैं। विकृतीकरण की प्रक्रिया में, प्रोटीन अपनी मूल त्रि-आयामी संरचना खो देते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान, प्रोटीन अणु पानी को अवशोषित या अधिशोषित कर लेते हैं, जिससे अंडे का तरल भाग गाढ़ा हो जाता है और पानी की मात्रा कम महसूस होती है। यह पानी प्रोटीन संरचना में समाहित हो जाता है।

प्रश्न 6

हमारे शरीर में विटामिन C संचित क्यों नहीं होता है?
Solution:

विटामिन C, जिसे एस्कॉर्बिक अम्ल भी कहा जाता है, एक जल में घुलनशील विटामिन है। जल में घुलनशील होने के कारण, शरीर अतिरिक्त विटामिन C को जमा करके नहीं रखता है। यह लगातार शरीर से मूत्र के माध्यम से उत्सर्जित होता रहता है। इसी कारण से, विटामिन C शरीर में संचित नहीं हो पाता है और इसकी नियमित आपूर्ति आवश्यक होती है।

Common mistakes

  • ध्रुवीयता और हाइड्रोजन बॉन्डिंग के महत्व को समझने में विफलता।
  • एल्डिहाइड और हेमीएसिटल समूहों के बीच अंतर को स्पष्ट न कर पाना।
  • जैव अणुओं की संरचनात्मक विशेषताओं को ठीक से न जोड़ पाना।
  • प्रोटीन विकृतीकरण के प्रभाव को गलत समझना।

Revision tips

  • प्रत्येक जैव अणु की संरचना और उसके गुणों के बीच संबंध पर ध्यान दें।
  • विलेयता और हाइड्रोजन बॉन्डिंग से संबंधित प्रश्नों का अभ्यास करें।
  • रासायनिक अभिक्रियाओं (जैसे जल-अपघटन) के उत्पादों को याद रखें।
  • प्रोटीन विकृतीकरण और विटामिन की घुलनशीलता जैसी अवधारणाओं को समझें।

Practice MCQs

Q1. ग्लूकोज और सुक्रोज जल में विलेय क्यों होते हैं?

Q2. लैक्टोज के जल-अपघटन से कौन से मोनोसैकेराइड बनते हैं?

Q3. D-ग्लूकोस के पेन्टाऐसीटेट में एल्डिहाइड समूह की अभिक्रियाएँ क्यों नहीं होती हैं?

Q4. अमीनो एसिड के गलनांक सामान्यतः हैलो एसिड से अधिक क्यों होते हैं?

Q5. विटामिन C शरीर में संचित क्यों नहीं होता है?

Frequently asked questions

कक्षा 12 रसायन विज्ञान के अध्याय 14 में कौन से मुख्य जैव अणु शामिल हैं?

इस अध्याय में मुख्य रूप से कार्बोहाइड्रेट (जैसे ग्लूकोज, सुक्रोज, लैक्टोज), अमीनो एसिड और प्रोटीन जैसे जैव अणु शामिल हैं। विटामिन C का भी उल्लेख किया गया है।

ग्लूकोज और सुक्रोज जल में क्यों घुलनशील हैं, जबकि साइक्लोहेक्सेन और बेंजीन नहीं?

ग्लूकोज और सुक्रोज में कई ध्रुवीय हाइड्रॉक्सिल (-OH) समूह होते हैं जो जल के अणुओं के साथ हाइड्रोजन बंध बना सकते हैं। साइक्लोहेक्सेन और बेंजीन गैर-ध्रुवीय होते हैं और हाइड्रोजन बंध नहीं बना पाते हैं, इसलिए वे जल में अविलेय होते हैं।

D-ग्लूकोस के पेन्टाऐसीटेट से एल्डिहाइड समूह की उपस्थिति का पता क्यों नहीं चलता है?

D-ग्लूकोस के पेन्टाऐसीटेट में, एल्डिहाइड समूह एक चक्रीय हेमीएसिटल संरचना का हिस्सा बन जाता है, जो रासायनिक रूप से अभिक्रियाशील नहीं होता है। इसलिए, यह एल्डिहाइड के लिए विशिष्ट परीक्षण नहीं देता है।

अमीनो एसिड के उच्च गलनांक का क्या कारण है?

अमीनो एसिड ज्विटरियन (द्विध्रुवीय आयन) के रूप में मौजूद होते हैं, जिनमें धनात्मक और ऋणात्मक दोनों आवेश होते हैं। यह आयनिक प्रकृति मजबूत अंतराण्विक आकर्षण पैदा करती है, जिसके लिए उच्च गलनांक की आवश्यकता होती है।

अंडे को उबालने पर प्रोटीन का क्या होता है?

अंडे को उबालने पर, ग्लोबुलर प्रोटीन विकृत हो जाते हैं। यह विकृतीकरण प्रोटीन की त्रि-आयामी संरचना को बदल देता है, जिससे वे अपनी जैविक कार्यक्षमता खो देते हैं और अवक्षेपित हो जाते हैं।

विटामिन C शरीर में क्यों नहीं टिकता है?

विटामिन C जल में घुलनशील है। शरीर अतिरिक्त विटामिन C को जमा नहीं करता है, बल्कि इसे मूत्र के माध्यम से लगातार उत्सर्जित करता रहता है।

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