कक्षा 12 रसायन विज्ञान अध्याय 7: P-ब्लॉक के तत्व NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 12 रसायन विज्ञान के अध्याय 7, 'P-ब्लॉक के तत्व' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। इसमें वर्ग 15 के तत्वों के हाइड्राइडों की अपचायक क्षमता, डाइनाइट्रोजन की अक्रियता, अमोनिया के उत्पादन के लिए हैबर प्रक्रम की अनुकूलतम परिस्थितियाँ, अमोनिया की कॉपर (II) आयनों के साथ अभिक्रिया, डाइनाइट्रोजन पेंटोक्साइड में नाइट्रोजन की सहसंयोजकता और फॉस्फीन तथा फॉस्फोनियम आयन के बीच आबंध कोणों में अंतर जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है। ये समाधान छात्रों को P-ब्लॉक तत्वों के रासायनिक व्यवहार और संरचनात्मक पहलुओं को गहराई से समझने में मदद करते हैं, जिससे वे परीक्षा की तैयारी प्रभावी ढंग से कर सकें।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 12
Subjectरसायन विज्ञान
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter7. P - ब्लाक के तत्व

Chapter summary

अध्याय 7, 'P-ब्लॉक के तत्व' के ये NCERT समाधान वर्ग 15 के तत्वों के हाइड्राइडों की अपचायक शक्ति, डाइनाइट्रोजन की कम क्रियाशीलता, अमोनिया निर्माण की हैबर विधि, और अमोनिया की धातु आयनों के साथ अभिक्रियाओं पर केंद्रित हैं। इसमें N2O5 में नाइट्रोजन की सहसंयोजकता और PH3 व PH4+ के आबंध कोणों की तुलना भी शामिल है। ये समाधान छात्रों को P-ब्लॉक तत्वों के महत्वपूर्ण रासायनिक गुणों और संरचनाओं को समझने में सहायता करते हैं।

Learning outcomes

  • P-ब्लॉक तत्वों के हाइड्राइडों की अपचायक क्षमता की तुलना करना सीखें।
  • डाइनाइट्रोजन की कम क्रियाशीलता के कारण को समझें।
  • अमोनिया के औद्योगिक उत्पादन (हैबर प्रक्रम) के लिए अनुकूलतम परिस्थितियों का वर्णन करें।
  • अमोनिया की धातु आयनों के साथ होने वाली अभिक्रियाओं को समझें।
  • N2O5 में नाइट्रोजन की सहसंयोजकता निर्धारित करें।
  • PH3 और PH4+ के आबंध कोणों में अंतर के कारणों का विश्लेषण करें।

Topics covered

Paper topics

  • P-ब्लॉक तत्व
  • वर्ग 15 के तत्व
  • हाइड्राइडों की अपचायक क्षमता
  • डाइनाइट्रोजन की अक्रियता
  • अमोनिया का हैबर प्रक्रम
  • अमोनिया की अभिक्रियाएँ
  • संकर आयन
  • N2O5 की संरचना
  • सहसंयोजकता
  • आबंध कोण

Important topics

  • वर्ग 15 के हाइड्राइडों की अपचायक क्षमता
  • डाइनाइट्रोजन की कम क्रियाशीलता का कारण
  • अमोनिया के हैबर प्रक्रम की अनुकूलतम परिस्थितियाँ
  • Cu2+ के साथ अमोनिया की अभिक्रिया
  • N2O5 में नाइट्रोजन की सहसंयोजकता
  • PH3 और PH4+ के आबंध कोणों की तुलना

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

ट्राइहैलाइडों की अपेक्षा पेंटाहैलाइड अधिक सहसंयोजी क्यों होते हैं?
Solution: पेंटाहैलाइडों में केंद्रीय परमाणु की ऑक्सीकरण अवस्था +5 होती है, जबकि ट्राइहैलाइडों में यह +3 होती है। केंद्रीय परमाणु की धनात्मक ऑक्सीकरण अवस्था जितनी अधिक होती है, उसकी ध्रवण क्षमता उतनी ही अधिक होती है। उच्च ध्रवण क्षमता के कारण केंद्रीय परमाणु और हैलोजन परमाणु के बीच बने बंध का सहसंयोजी लक्षण बढ़ जाता है। इसलिए, ट्राइहैलाइडों की तुलना में पेंटाहैलाइड अधिक सहसंयोजी होते हैं।

प्रश्न 2

वर्ग-15 के तत्वों के हाइड्राइडों में BiH_3 सबसे प्रबल अपचायक क्यों है?
Solution: वर्ग-15 के सभी तत्वों में, बिस्मथ (Bi) परमाणु सबसे बड़ा होता है। इसके परिणामस्वरूप, Bi-H बंध की दूरी सबसे अधिक होती है और Bi-H बंध वियोजन एन्थेल्पी सबसे कम होती है। यही कारण है कि BiH3 का बंध, वर्ग के अन्य हाइड्राइडों की तुलना में आसानी से वियोजित (टूट) हो जाता है, जिससे यह सबसे प्रबलतम अपचायक बन जाता है।

प्रश्न 3

डाइनाइट्रोजन (N2) कमरे के ताप पर कम क्रियाशील क्यों है?
Solution: डाइनाइट्रोजन (N2) में दो नाइट्रोजन परमाणुओं के बीच एक अत्यंत मजबूत त्रिबंध (N≡N) होता है। इस त्रिबंध की बंध एन्थेल्पी बहुत उच्च होती है, जिसके कारण यह सामान्य परिस्थितियों में आसानी से नहीं टूटता है। इसी उच्च बंध एन्थेल्पी के कारण डाइनाइट्रोजन कमरे के ताप पर काफी अक्रिय (कम क्रियाशील) होता है।

प्रश्न 4

अमोनिया की लब्धि को बढ़ाने के लिये आवश्यक स्थितियों का वर्णन कीजिए।
Solution: अमोनिया का उत्पादन मुख्य रूप से हैबर प्रक्रम द्वारा किया जाता है, जिसकी अभिक्रिया निम्न प्रकार है:

N_2(g) + 3H_2(g) \longrightarrow 2 NH_3(g), \Delta_f H^\circ = -46.1 \text{ kJ mol}^{-1}

ला-शातेलिए नियम के अनुसार, अमोनिया के उत्पादन के लिए उच्च दाब अनुकूल होता है। अमोनिया उत्पादन के लिए अनुकूलतम परिस्थितियाँ निम्नलिखित हैं:
  1. तापमान: लगभग 700 K (यह तापमान अभिक्रिया दर को पर्याप्त रूप से बढ़ाने के लिए आवश्यक है, जबकि उच्च तापमान साम्यावस्था को बाईं ओर विस्थापित करता है)।
  2. दाब: 200 वायुमंडलीय दाब या 200 \times 10^5 Pa (उच्च दाब साम्यावस्था को उत्पाद (अमोनिया) की ओर विस्थापित करता है)।
  3. उत्प्रेरक: आयरन ऑक्साइड (यह अभिक्रिया की दर को बढ़ाता है)।
  4. वर्धक: मोलिब्डेनम (Mo) या K_2O तथा Al_2O_3 (ये वर्धक उत्प्रेरक की क्रियाशीलता को बढ़ाते हैं)।
इन अनुकूलतम परिस्थितियों में अमोनिया की लब्धि अधिकतम होती है।

प्रश्न 5

Cu^{2+} विलयन के साथ अमोनिया कैसे क्रिया करती है?
Solution: जब अमोनिया (जो जलीय विलयन में अमोनियम हाइड्रॉक्साइड के रूप में होती है) को Cu^{2+} आयनों वाले विलयन से गुजारा जाता है, तो एक संकुल यौगिक बनता है। अमोनिया के अणु कॉपर (II) आयन के साथ समन्वय बंध बनाकर टेट्राऐमीन कॉपर (II) आयन, [Cu(NH_3)_4]^{2+}, बनाते हैं। इस संकुल के बनने के कारण विलयन का रंग गहरा नीला हो जाता है। अभिक्रिया इस प्रकार है:

\mathrm{Cu}^{2+}(aq) + 4\,\mathrm{NH_3}(aq) \longrightarrow [\mathrm{Cu(NH_3)_4}]^{2+} \,(aq)

(नीला) (गहरा नीला)

प्रश्न 6

N2O5 में नाइट्रोजन की सहसंयोजकता क्या है?
Solution: डाइनाइट्रोजन पेंटोक्साइड (N_2O_5) की संरचना में, प्रत्येक नाइट्रोजन परमाणु चार अन्य परमाणुओं (ऑक्सीजन) के साथ सहसंयोजक बंध बनाता है। नाइट्रोजन परमाणु के पास कुल चार साझे के इलेक्ट्रॉन युग्म होते हैं जो बंध निर्माण में भाग लेते हैं। इसलिए, N_2O_5 में नाइट्रोजन की सहसंयोजकता 4 होती है।

प्रश्न 7

PH3 से PH4+ का आबन्ध कोण अधिक है क्यों?
Solution: PH_3 (फॉस्फीन) और PH_4^{+} (फॉस्फोनियम आयन) दोनों में फॉस्फोरस परमाणु sp^3-संकरित होता है। PH_4^{+} आयन में, फॉस्फोरस परमाणु चार बंधित इलेक्ट्रॉन युग्मों से घिरा होता है, जिसके कारण इसकी ज्यामिति चतुष्फलकीय होती है और बंध कोण लगभग 109.5° होता है। इसके विपरीत, PH_3 अणु में, फॉस्फोरस परमाणु पर तीन बंधित इलेक्ट्रॉन युग्म और एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होता है। एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म और बंधित इलेक्ट्रॉन युग्म के बीच प्रतिकर्षण के कारण, P-H बंधों को थोड़ा अंदर की ओर धकेला जाता है, जिससे बंध कोण 109.5° से कम होकर लगभग 93.6° हो जाता है। इसलिए, PH_4^{+} का आबंध कोण PH_3 से अधिक होता है।

Common mistakes

  • हाइड्राइडों की अपचायक क्षमता के क्रम को गलत समझना।
  • हैबर प्रक्रम में उत्प्रेरक और वर्धक की भूमिका को गलत बताना।
  • N2O5 में नाइट्रोजन की सहसंयोजकता की गणना में त्रुटि करना।
  • आबंध कोणों को प्रभावित करने वाले कारकों (जैसे एकाकी युग्म) को अनदेखा करना।

Revision tips

  • प्रत्येक तत्व के हाइड्राइड की अपचायक क्षमता के क्रम को याद करें।
  • हैबर प्रक्रम के लिए आवश्यक तापमान, दाब और उत्प्रेरक को सूचीबद्ध करें।
  • अमोनिया की विभिन्न धातु आयनों के साथ अभिक्रियाओं के उत्पादों को समझें।
  • सहसंयोजकता और आबंध कोणों को प्रभावित करने वाले कारकों पर ध्यान केंद्रित करें।

Practice MCQs

Q1. वर्ग-15 के हाइड्राइडों में सबसे प्रबल अपचायक कौन सा है?

Q2. डाइनाइट्रोजन (N2) कमरे के ताप पर कम क्रियाशील क्यों होता है?

Q3. अमोनिया के औद्योगिक उत्पादन (हैबर प्रक्रम) के लिए अनुकूलतम तापमान क्या है?

Q4. जब अमोनिया जलीय Cu2+ विलयन से क्रिया करती है, तो कौन सा संकर बनता है?

Q5. N2O5 में नाइट्रोजन की सहसंयोजकता कितनी होती है?

Frequently asked questions

P-ब्लॉक के तत्व कौन से हैं?

P-ब्लॉक में समूह 13 से 18 तक के तत्व शामिल हैं, जिनमें अंतिम इलेक्ट्रॉन P-ऑर्बिटल में प्रवेश करता है।

BiH3 सबसे प्रबल अपचायक क्यों है?

BiH3 सबसे प्रबल अपचायक है क्योंकि Bi-H बंध की वियोजन एन्थेल्पी सबसे कम होती है, जिससे यह आसानी से प्रोटॉन (H+) दान कर सकता है।

अमोनिया के हैबर प्रक्रम में आयरन उत्प्रेरक का क्या कार्य है?

आयरन उत्प्रेरक हैबर प्रक्रम में अभिक्रिया की दर को बढ़ाता है, जिससे अमोनिया का उत्पादन तीव्र गति से होता है।

Cu2+ आयन के साथ अमोनिया की अभिक्रिया का क्या महत्व है?

यह अभिक्रिया एक गहरा नीला संकर [Cu(NH3)4]2+ बनाती है, जिसका उपयोग कॉपर आयनों की पहचान और मात्रा निर्धारण में किया जाता है।

N2O5 में नाइट्रोजन की सहसंयोजकता 4 क्यों होती है?

N2O5 की संरचना में, नाइट्रोजन परमाणु चार अन्य परमाणुओं (ऑक्सीजन) के साथ सहसंयोजक बंध बनाता है, जिससे इसकी सहसंयोजकता 4 होती है।

PH3 का आबंध कोण PH4+ से कम क्यों होता है?

PH3 में फॉस्फोरस पर एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होता है, जो बंध युग्मों के बीच प्रतिकर्षण बढ़ाकर आबंध कोण को 109.5° से कम कर देता है, जबकि PH4+ में केवल बंध युग्म होते हैं।

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