कक्षा 12 रसायन विज्ञान अध्याय 3: वैधुत रसायन NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 12 रसायन विज्ञान के अध्याय 3, 'वैधुत रसायन' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। इसमें इलेक्ट्रोड विभव की गणना, विभिन्न पदार्थों की ऑक्सीकरण क्षमता का निर्धारण, और नर्न्स्ट समीकरण के अनुप्रयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है। समाधानों में प्रत्येक प्रश्न के लिए चरण-दर-चरण स्पष्टीकरण दिया गया है, जिससे छात्रों को अवधारणाओं को गहराई से समझने में मदद मिलती है। यह सामग्री परीक्षा की तैयारी और पुनरीक्षण के लिए एक उत्कृष्ट संसाधन है, जो छात्रों को इलेक्ट्रोकैमिस्ट्री के मूल सिद्धांतों में महारत हासिल करने में सहायता करती है।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | रसायन विज्ञान |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 3. वैधुत रसायन |
Chapter summary
अध्याय 3, 'वैधुत रसायन', इलेक्ट्रोकैमिस्ट्री के मूल सिद्धांतों पर केंद्रित है। यह खंड इलेक्ट्रोड विभव की गणना, मानक इलेक्ट्रोड विभव की भूमिका, और नर्न्स्ट समीकरण का उपयोग करके विभिन्न परिस्थितियों में इलेक्ट्रोड विभव का निर्धारण सिखाता है। इसमें रेडॉक्स अभिक्रियाओं की व्यवहार्यता और विभिन्न पदार्थों की ऑक्सीकरण-अपचयन क्षमताओं का विश्लेषण भी शामिल है। ये समाधान छात्रों को इन महत्वपूर्ण अवधारणाओं को स्पष्ट करने में मदद करते हैं।
Learning outcomes
- मानक इलेक्ट्रोड विभव की गणना करने की विधि को समझना।
- विभिन्न पदार्थों की ऑक्सीकरण और अपचयन क्षमताओं की तुलना करना।
- नर्न्स्ट समीकरण का उपयोग करके इलेक्ट्रोड विभव की गणना करना।
- रेडॉक्स अभिक्रियाओं की व्यवहार्यता का विश्लेषण करना।
- वैद्युत रासायनिक सेल के निर्माण और कार्यप्रणाली को समझना।
Topics covered
Paper topics
- मानक इलेक्ट्रोड विभव
- अर्द्धसेल
- वैद्युत रासायनिक सेल
- नर्न्स्ट समीकरण
- ऑक्सीकरण
- अपचयन
- रेडॉक्स अभिक्रिया
- pH का प्रभाव
- इलेक्ट्रोड विभव की गणना
Important topics
- मानक इलेक्ट्रोड विभव की गणना
- नर्न्स्ट समीकरण का अनुप्रयोग
- ऑक्सीकरण और अपचयन क्षमता की तुलना
- रेडॉक्स अभिक्रियाओं की व्यवहार्यता
- pH का इलेक्ट्रोड विभव पर प्रभाव
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
Mg<sup>2+</sup>/Mg इलेक्ट्रोड के मानक इलेक्ट्रोड विभव (E°) को ज्ञात करने के लिए, हम एक वैद्युत रासायनिक सेल का निर्माण करते हैं। इस सेल में दो अर्द्धसेल होते हैं:
- ऑक्सीकरण अर्द्धसेल: एक मैग्नीशियम (Mg) इलेक्ट्रोड को 1 M MgSO₄ विलयन में डुबोया जाता है।
- अपचयन अर्द्धसेल: एक मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड (SHE) का उपयोग किया जाता है, जिसमें प्लैटिनम (Pt) इलेक्ट्रोड 1 M HCl विलयन में डूबा होता है और 1 atm दाब पर हाइड्रोजन गैस प्रवाहित की जाती है।
इन दोनों अर्द्धसेलों को एक लवण सेतु (salt bridge) द्वारा जोड़ा जाता है और एक वोल्टमीटर से मापा जाता है। सेल को निम्न प्रकार से दर्शाया जा सकता है:
वोल्टमीटर द्वारा मापा गया सेल विभव (Ecell) मानक परिस्थितियों में निम्न समीकरण द्वारा दिया जाता है:
इस मामले में, मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड कैथोड के रूप में कार्य करता है (E° = 0 V) और Mg इलेक्ट्रोड एनोड के रूप में कार्य करता है। इसलिए:
वोल्टमीटर का पाठ्यांक हमें Ecell का मान देता है, जिससे हम Mg<sup>2+</sup>/Mg इलेक्ट्रोड के मानक इलेक्ट्रोड विभव (E°Mg²⁺/Mg) की गणना कर सकते हैं।
प्रश्न 2
नहीं, आप जिंक के पात्र में कॉपर सल्फेट का विलयन नहीं रख सकते हैं। इसका कारण यह है कि जिंक (Zn) कॉपर (Cu) की तुलना में अधिक क्रियाशील धातु है।
मानक इलेक्ट्रोड विभव (E°) के मान इस प्रकार हैं:
चूंकि जिंक का मानक इलेक्ट्रोड विभव कॉपर से अधिक ऋणात्मक है, जिंक एक प्रबल अपचायक है और कॉपर आयनों (Cu²⁺) को आसानी से अपचयित कर सकता है। यदि जिंक के पात्र में कॉपर सल्फेट का विलयन रखा जाता है, तो निम्नलिखित रेडॉक्स अभिक्रिया होगी:
इस अभिक्रिया में, जिंक धातु ऑक्सीकृत होकर जिंक आयन बनाती है और कॉपर आयन अपचयित होकर कॉपर धातु बनाते हैं। यह अभिक्रिया पात्र को धीरे-धीरे नष्ट कर देगी।
प्रश्न 3
फेरस आयनों (Fe²⁺) का फेरिक आयनों (Fe³⁺) में ऑक्सीकरण निम्न अभिक्रिया द्वारा होता है:
किसी पदार्थ द्वारा Fe²⁺ को Fe³⁺ में ऑक्सीकृत करने के लिए, उस पदार्थ का मानक अपचयन विभव (E°red) Fe³⁺/Fe²⁺ युग्म के मानक अपचयन विभव (0.77 V) से अधिक होना चाहिए। दूसरे शब्दों में, वह पदार्थ एक प्रबल ऑक्सीकारक होना चाहिए जो इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण कर सके।
मानक इलेक्ट्रोड विभव की तालिकाओं के अनुसार, निम्नलिखित तीन पदार्थ अनुकूल परिस्थितियों में फेरस आयनों को फेरिक आयनों में ऑक्सीकृत कर सकते हैं:
- फ्लोरीन (F₂): इसका मानक अपचयन विभव बहुत अधिक होता है।
- क्लोरीन (Cl₂): इसका मानक अपचयन विभव (E° = +1.36 V) Fe³⁺/Fe²⁺ युग्म से अधिक है।
- ब्रोमीन (Br₂): इसका मानक अपचयन विभव (E° = +1.07 V) Fe³⁺/Fe²⁺ युग्म से अधिक है।
ये सभी पदार्थ Fe²⁺ से इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करके Fe³⁺ में ऑक्सीकरण को प्रेरित कर सकते हैं।
प्रश्न 4
हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड के लिए अर्द्ध-अभिक्रिया है:
इस अर्द्ध-अभिक्रिया के लिए नर्न्स्ट समीकरण है:
यहाँ, मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड विभव शून्य (0 V) होता है, और इलेक्ट्रॉनों की संख्या है।
हमें pH = 10 दिया गया है। हम जानते हैं कि , इसलिए ।
दिए गए pH = 10 के लिए, ।
अब इन मानों को नर्न्स्ट समीकरण में रखने पर:
अतः, pH = 10 वाले विलयन के संपर्क वाले हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड का विभव -0.591 V होगा।
Common mistakes
- इलेक्ट्रोड विभव की गणना करते समय मानक और गैर-मानक स्थितियों के बीच भ्रमित होना।
- ऑक्सीकरण और अपचयन क्षमता के बीच अंतर को गलत समझना।
- नर्न्स्ट समीकरण में सही मानों को प्रतिस्थापित करने में त्रुटियाँ करना।
- रेडॉक्स अभिक्रियाओं में इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण को गलत तरीके से दर्शाना।
Revision tips
- प्रत्येक प्रश्न के लिए हल की गई विधि को ध्यान से समझें, विशेष रूप से नर्न्स्ट समीकरण के अनुप्रयोग पर ध्यान केंद्रित करें।
- विभिन्न इलेक्ट्रोड विभव मानों और उनकी संबंधित ऑक्सीकरण/अपचयन शक्तियों के बीच संबंध को याद करें।
- सेल आरेख बनाने और इलेक्ट्रोड विभव की गणना के लिए सूत्र लागू करने का अभ्यास करें।
- पाठ्यपुस्तक में दिए गए उदाहरणों और अभ्यास प्रश्नों को हल करके अपनी समझ को मजबूत करें।
Practice MCQs
Q1. Mg²⁺/Mg निकाय का मानक इलेक्ट्रोड विभव ज्ञात करने के लिए किस प्रकार के सेल का निर्माण किया जाता है?
Explanation: Mg²⁺/Mg निकाय का मानक इलेक्ट्रोड विभव ज्ञात करने के लिए एक वैद्युत रासायनिक सेल का निर्माण किया जाता है जिसमें एक Mg अर्द्धसेल और एक मानक हाइड्रोजन अर्द्धसेल होता है।
Q2. जिंक के पात्र में कॉपर सल्फेट का विलयन क्यों नहीं रखा जा सकता है?
Explanation: जिंक, कॉपर की तुलना में अधिक प्रबल अपचायक है क्योंकि इसका मानक इलेक्ट्रोड विभव (E°) कॉपर से कम होता है। इसलिए, जिंक कॉपर आयनों को विस्थापित कर देगा।
Q3. निम्नलिखित में से कौन सा पदार्थ फेरस आयनों (Fe²⁺) को फेरिक आयनों (Fe³⁺) में ऑक्सीकृत कर सकता है?
Explanation: Br₂ (ब्रोमीन) एक प्रबल ऑक्सीकारक है और इसका मानक इलेक्ट्रोड विभव (E°) Fe³⁺/Fe²⁺ से अधिक होता है, इसलिए यह Fe²⁺ को Fe³⁺ में ऑक्सीकृत कर सकता है।
Q4. pH = 10 वाले विलयन के संपर्क वाले हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड का विभव क्या होगा?
Explanation: नर्न्स्ट समीकरण का उपयोग करके, E = 0 - (0.0591/1) log(1/[H⁺]) = -0.0591 × pH = -0.0591 × 10 = -0.591 V।
Frequently asked questions
मानक इलेक्ट्रोड विभव क्या है और इसे कैसे मापा जाता है?
मानक इलेक्ट्रोड विभव एक अर्द्धसेल का विभव होता है जब सभी अभिकारक और उत्पाद मानक परिस्थितियों (298 K तापमान, 1 atm दबाव, 1 M सांद्रता) में होते हैं। इसे एक मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड (SHE) के साथ जोड़कर मापा जाता है।
नर्न्स्ट समीकरण का क्या महत्व है?
नर्न्स्ट समीकरण गैर-मानक परिस्थितियों में इलेक्ट्रोड विभव की गणना करने के लिए उपयोग किया जाता है। यह इलेक्ट्रोड विभव को आयनों की सांद्रता और तापमान से जोड़ता है।
क्या जिंक कॉपर सल्फेट के विलयन को रख सकता है? क्यों या क्यों नहीं?
नहीं, जिंक कॉपर सल्फेट के विलयन को नहीं रख सकता क्योंकि जिंक कॉपर से अधिक क्रियाशील है और कॉपर आयनों को विस्थापित कर देगा, जिससे अभिक्रिया होगी।
फेरस आयनों को फेरिक आयनों में ऑक्सीकृत करने के लिए किन पदार्थों का उपयोग किया जा सकता है?
उन पदार्थों का उपयोग किया जा सकता है जो आयरन से अधिक प्रबल ऑक्सीकारक होते हैं, जैसे कि फ्लोरीन (F₂), क्लोरीन (Cl₂), और ब्रोमीन (Br₂)।
pH मान इलेक्ट्रोड विभव को कैसे प्रभावित करता है?
हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड के मामले में, pH मान सीधे इलेक्ट्रोड विभव को प्रभावित करता है। नर्न्स्ट समीकरण के अनुसार, उच्च pH (कम [H⁺]) इलेक्ट्रोड विभव को कम (अधिक ऋणात्मक) बनाता है।
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