कक्षा 12 रसायन विज्ञान: उपसहसंयोजक यौगिक NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 12 रसायन विज्ञान के अध्याय 9, 'उपसहसंयोजक यौगिक' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। इसमें उपसहसंयोजन यौगिकों के सूत्र लिखने और उनके IUPAC नामकरण से संबंधित पाठ्यनिहित प्रश्नों के हल शामिल हैं। समाधानों में धातु आयन, लिगैंड और प्रतिआयन की पहचान करने के चरण-दर-चरण स्पष्टीकरण दिए गए हैं, साथ ही धातु की ऑक्सीकरण अवस्था की गणना भी की गई है। यह खंड छात्रों को उपसहसंयोजन यौगिकों के नामकरण और सूत्रण के सिद्धांतों को समझने में मदद करता है, जो परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | रसायन विज्ञान |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 9. उपसहसंयोजक यौगिक |
Chapter summary
अध्याय 9, 'उपसहसंयोजक यौगिक' के ये NCERT समाधान छात्रों को उपसहसंयोजन यौगिकों के सूत्र लिखने और उनके IUPAC नामकरण का अभ्यास करने में सहायता करते हैं। समाधानों में धातु आयन, लिगैंड और प्रतिआयन की पहचान करने के साथ-साथ धातु की ऑक्सीकरण अवस्था की गणना करने की प्रक्रिया को स्पष्ट किया गया है। यह छात्रों को उपसहसंयोजन रसायन विज्ञान की बुनियादी अवधारणाओं को मजबूत करने में मदद करता है।
Learning outcomes
- उपसहसंयोजन यौगिकों के सूत्र लिखना सीखें।
- दिए गए सूत्रों के लिए IUPAC नामकरण का अभ्यास करें।
- धातु आयनों की ऑक्सीकरण अवस्था की गणना करना समझें।
- लिगैंड और प्रतिआयन की पहचान करना सीखें।
Topics covered
Paper topics
- उपसहसंयोजन यौगिकों के सूत्र लिखना
- उपसहसंयोजन यौगिकों का IUPAC नामकरण
- धातु आयनों की ऑक्सीकरण अवस्था की गणना
- लिगैंड की पहचान
- प्रतिआयन की पहचान
- कोबाल्ट यौगिक
- निकेल यौगिक
- क्रोमियम यौगिक
- प्लैटिनम यौगिक
- आयरन यौगिक
- साइनाइड लिगैंड
- ऐमीन लिगैंड
Important topics
- उपसहसंयोजन यौगिकों के सूत्र लिखना
- उपसहसंयोजन यौगिकों का IUPAC नामकरण
- धातु आयनों की ऑक्सीकरण अवस्था की गणना
- लिगैंड और प्रतिआयन की पहचान
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Questions and Solutions
प्रश्न 1. निम्नलिखित उपसहसंयोजन यौगिकों के सूत्र लिखिए
- टेट्राऐमीनडाइएक्वाकोबाल्ट (Ш) क्लोराइड
- पोटैशियम टेट्रासायनोनिकैलेट (II)
- द्रिस (एथेन-12-डाइऐमीन) क्रोमियम (III) क्लोराइड
- ऐमीनब्रोमिडोक्लोरोनाइट्रिटो-N-प्लैटिनेट (II)
- डाइक्लोरोबिस (एथेन-1,2-डाइऐमीन) प्लैटिनम (IV) नाइट्रेट
- आयरन (III) हेक्सासायनिडोफेरेट (II)
Solution: उपसहसंयोजन यौगिकों के सूत्र लिखने के लिए, हमें धातु आयन, लिगैंड्स और उनके आवेशों को समझना होगा।
- टेट्राऐमीनडाइएक्वाकोबाल्ट (III) क्लोराइड धातु: कोबाल्ट (Co), ऑक्सीकरण अवस्था: +3 लिगैंड्स: ऐमीन (NH₃), आवेश: 0; एक्वा (H₂O), आवेश: 0 प्रतिआयन: क्लोराइड (Cl⁻), आवेश: -1 संकुल आयन पर आवेश = (+3) + 4(0) + 2(0) = +3 इस आवेश को संतुलित करने के लिए 3 क्लोराइड आयनों की आवश्यकता होगी। अतः सूत्र है:
- पोटेशियम टेट्रासायनोनिकैलेट (II) धातु: निकेल (Ni), ऑक्सीकरण अवस्था: +2 लिगैंड: साइनाइड (CN⁻), आवेश: -1 प्रतिआयन: पोटेशियम (K⁺), आवेश: +1 संकुल आयन पर आवेश = (+2) + 4(-1) = -2 इस आवेश को संतुलित करने के लिए 2 पोटेशियम आयनों की आवश्यकता होगी। अतः सूत्र है:
- द्रिस (एथेन-1,2-डाइऐमीन) क्रोमियम (III) क्लोराइड धातु: क्रोमियम (Cr), ऑक्सीकरण अवस्था: +3 लिगैंड: एथेन-1,2-डाइऐमीन (en), आवेश: 0 प्रतिआयन: क्लोराइड (Cl⁻), आवेश: -1 संकुल आयन पर आवेश = (+3) + 3(0) = +3 इस आवेश को संतुलित करने के लिए 3 क्लोराइड आयनों की आवश्यकता होगी। अतः सूत्र है:
- ऐमीनब्रोमिडोक्लोरोनाइट्रिटो-N-प्लैटिनेट (II) धातु: प्लैटिनम (Pt), ऑक्सीकरण अवस्था: +2 लिगैंड्स: ऐमीन (NH₃), आवेश: 0; ब्रोमिडो (Br⁻), आवेश: -1; क्लोरो (Cl⁻), आवेश: -1; नाइट्रिटो-N (NO₂⁻), आवेश: -1 संकुल आयन पर आवेश = (+2) + 0 + (-1) + (-1) + (-1) = -1 अतः सूत्र है: (यह एक संकुल आयन है, प्रतिआयन नहीं दिया गया है, इसलिए आवेश -1 है)
- डाइक्लोरोबिस (एथेन,1,2-डाइऐमीन) प्लैटिनम (IV) नाइट्रेट धातु: प्लैटिनम (Pt), ऑक्सीकरण अवस्था: +4 लिगैंड्स: क्लोरो (Cl⁻), आवेश: -1; एथेन-1,2-डाइऐमीन (en), आवेश: 0 प्रतिआयन: नाइट्रेट (NO₃⁻), आवेश: -1 संकुल आयन पर आवेश = (+4) + 2(-1) + 2(0) = +2 इस आवेश को संतुलित करने के लिए 2 नाइट्रेट आयनों की आवश्यकता होगी। अतः सूत्र है:
- आयरन (III) हेक्सासायनिडोफेरेट (II) यह एक जटिल यौगिक है जिसमें दो धातु आयन शामिल हैं। केंद्रीय धातु आयन: फेरेट (Fe), ऑक्सीकरण अवस्था: +2 लिगैंड: साइनाइडो (CN⁻), आवेश: -1 बाहरी धातु आयन: आयरन (Fe), ऑक्सीकरण अवस्था: +3 संकुल आयन पर आवेश = (+2) + 6(-1) = -4 बाहरी आयरन आयन (Fe³⁺) इस आवेश को संतुलित करेगा। अतः सूत्र है: (यहाँ Fe₄[Fe(CN)₆]₃ का अर्थ है कि बाहरी Fe आयनों की संख्या 4 है और संकुल आयनों की संख्या 3 है, जिससे कुल आवेश संतुलित होता है। यदि हम इसे अलग तरह से देखें, तो फेरेट (II) का अर्थ है [Fe(CN)₆]⁴⁻ और आयरन (III) का अर्थ है Fe³⁺। आवेश संतुलन के लिए Fe₃[Fe(CN)₆]₂ का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन दिए गए प्रारूप के अनुसार Fe₄[Fe(CN)₆]₃ भी एक संभावित प्रतिनिधित्व है, जहाँ बाहरी Fe आयनों की संख्या को समायोजित किया गया है।)
प्रश्न 2. निम्नलिखित उपसहसंयोजन यौगिकों के IUPAC नाम लिखिए
- [Co(NH₃)₆]Cl₃
- [Co(NH₃)₅Cl]Cl₂
- K₃[Fe(CN)₆]
- K₃[Fe(C₂O₄)₃]
- K₂[PdCl₄]
- [Pt(NH₃)₂Cl(NH₂CH₃)]Cl
Solution: उपसहसंयोजन यौगिकों का IUPAC नामकरण करते समय, हम लिगैंड्स को वर्णानुक्रम में सूचीबद्ध करते हैं, उसके बाद धातु का नाम आता है। धातु की ऑक्सीकरण अवस्था को रोमन अंकों में कोष्ठक में दर्शाया जाता है।
- [Co(NH₃)₆]Cl₃ लिगैंड: ऐमीन (NH₃) - 6 बार (हेक्साऐमीन) धातु: कोबाल्ट (Co) प्रतिआयन: क्लोराइड (Cl⁻) कोबाल्ट की ऑक्सीकरण अवस्था: x + 6(0) + 3(-1) = 0 => x = +3 नाम: हेक्साऐमीनकोबाल्ट (III) क्लोराइड
- [Co(NH₃)₅Cl]Cl₂ लिगैंड्स: ऐमीन (NH₃) - 5 बार (पेंटाऐमीन); क्लोरो (Cl⁻) - 1 बार (क्लोरो) धातु: कोबाल्ट (Co) प्रतिआयन: क्लोराइड (Cl⁻) कोबाल्ट की ऑक्सीकरण अवस्था: x + 5(0) + 1(-1) + 2(-1) = 0 => x = +3 नाम: पेंटाऐमीनक्लोराइडोकोबाल्ट (III) क्लोराइड
- K₃[Fe(CN)₆] प्रतिआयन: पोटेशियम (K⁺) - 3 बार (ट्राइपोटेशियम) लिगैंड: साइनाइडो (CN⁻) - 6 बार (हेक्सासायनो) धातु: आयरन (Fe) - यह ऋणायन संकुल है, इसलिए 'फेरेट' का उपयोग होगा। आयरन की ऑक्सीकरण अवस्था: 3(+1) + x + 6(-1) = 0 => x = +3 नाम: पोटेशियम हेक्सासायनोफेरेट (III)
- K₃[Fe(C₂O₄)₃] प्रतिआयन: पोटेशियम (K⁺) - 3 बार (ट्राइपोटेशियम) लिगैंड: ऑक्सलेटो (C₂O₄²⁻) - 3 बार (ट्रिस(ऑक्सलेटो)) धातु: आयरन (Fe) - ऋणायन संकुल, इसलिए 'फेरेट'। आयरन की ऑक्सीकरण अवस्था: 3(+1) + x + 3(-2) = 0 => x = +3 नाम: पोटेशियम ट्रिस(ऑक्सलेटो)फेरेट (III)
- K₂[PdCl₄] प्रतिआयन: पोटेशियम (K⁺) - 2 बार (डाइपोटेशियम) लिगैंड: क्लोरो (Cl⁻) - 4 बार (टेट्राक्लोरो) धातु: पैलेडियम (Pd) - ऋणायन संकुल, इसलिए 'पैलेडेट'। पैलेडियम की ऑक्सीकरण अवस्था: 2(+1) + x + 4(-1) = 0 => x = +2 नाम: पोटेशियम टेट्राक्लोरोपैलेडेट (II)
- [Pt(NH₃)₂Cl(NH₂CH₃)]Cl लिगैंड्स: ऐमीन (NH₃) - 2 बार (डाइऐमीन); क्लोरो (Cl⁻) - 1 बार (क्लोरो); मेथिलऐमीन (CH₃NH₂) - 1 बार (मेथिलऐमीन) धातु: प्लैटिनम (Pt) प्रतिआयन: क्लोराइड (Cl⁻) प्लैटिनम की ऑक्सीकरण अवस्था: x + 2(0) + 1(-1) + 1(-1) + 1(-1) = 0 => x = +3 नाम: डाइऐमीनक्लोरो(मेथिलऐमीन)प्लैटिनम (III) क्लोराइड
Common mistakes
- लिगैंड और प्रतिआयन के बीच भ्रमित होना।
- धातु की ऑक्सीकरण अवस्था की गणना में त्रुटियाँ।
- IUPAC नामकरण नियमों को लागू करने में गलतियाँ।
Revision tips
- प्रत्येक प्रश्न के लिए सूत्र लिखने और नामकरण की प्रक्रिया को ध्यान से समझें।
- धातु की ऑक्सीकरण अवस्था की गणना के चरणों का अभ्यास करें।
- विभिन्न लिगैंड्स और उनके आवेशों को याद रखें।
- सूत्र और नाम के बीच संबंध स्थापित करने का प्रयास करें।
Practice MCQs
Q1. टेट्राऐमीनडाइएक्वाकोबाल्ट (III) क्लोराइड का सूत्र क्या है?
Explanation: कोबाल्ट (III) की ऑक्सीकरण अवस्था +3 है, और चार अमोनिया (0 आवेश) और दो जल (0 आवेश) लिगैंड हैं। क्लोराइड प्रतिआयन हैं। कुल आवेश +3 को संतुलित करने के लिए 3 क्लोराइड आयनों की आवश्यकता होती है।
Q2. पोटेशियम टेट्रासायनोनिकैलेट (II) का सूत्र क्या है?
Explanation: निकेल (II) की ऑक्सीकरण अवस्था +2 है, और चार साइनाइड ( -1 आवेश प्रत्येक) लिगैंड हैं। संकुल पर कुल आवेश +2 + 4(-1) = -2 होता है। पोटेशियम धनायन (+1 आवेश) द्वारा इसे संतुलित करने के लिए 2 पोटेशियम आयनों की आवश्यकता होती है।
Q3. [Co(NH₃)₆]Cl₃ का IUPAC नाम क्या है?
Explanation: इसमें छह अमोनिया लिगैंड (ऐमीन) और कोबाल्ट धातु है। क्लोराइड प्रतिआयन है। कोबाल्ट की ऑक्सीकरण अवस्था +3 है।
Q4. [Co(NH₃)₅Cl]Cl₂ का IUPAC नाम क्या है?
Explanation: इसमें पांच अमोनिया लिगैंड (ऐमीन) और एक क्लोराइडो लिगैंड है। कोबाल्ट की ऑक्सीकरण अवस्था +3 है, और क्लोराइड प्रतिआयन है।
Q5. K₃[Fe(CN)₆] में आयरन (Fe) की ऑक्सीकरण अवस्था क्या है?
Explanation: पोटेशियम का आवेश +1 है, साइनाइड का आवेश -1 है। यदि आयरन की ऑक्सीकरण अवस्था x है, तो 3(+1) + x + 6(-1) = 0, जिससे x = +3 प्राप्त होता है।
Frequently asked questions
उपसहसंयोजन यौगिकों के सूत्र लिखने के लिए किन मुख्य बातों का ध्यान रखना चाहिए?
सूत्र लिखते समय धातु आयन, लिगैंड्स और उनके आवेशों को पहचानना महत्वपूर्ण है। धातु की ऑक्सीकरण अवस्था को संतुलित करने के लिए प्रतिआयन की संख्या निर्धारित की जाती है।
IUPAC नामकरण में धातु की ऑक्सीकरण अवस्था कैसे निर्धारित की जाती है?
धातु की ऑक्सीकरण अवस्था निर्धारित करने के लिए, हम संकुल पर कुल आवेश और लिगैंड्स के आवेशों का उपयोग करते हैं। धातु की ऑक्सीकरण अवस्था को रोमन अंकों में कोष्ठक में लिखा जाता है।
क्या ये समाधान कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा के लिए उपयोगी हैं?
हाँ, ये समाधान विशेष रूप से कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा की तैयारी के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, जो उपसहसंयोजन यौगिकों से संबंधित महत्वपूर्ण अवधारणाओं और प्रश्नों को कवर करते हैं।
लिगैंड और प्रतिआयन में क्या अंतर है?
लिगैंड वे अणु या आयन होते हैं जो केंद्रीय धातु परमाणु या आयन से सीधे जुड़े होते हैं। प्रतिआयन वे आयन होते हैं जो संकुल आयन के आवेश को संतुलित करते हैं और कोष्ठक के बाहर लिखे जाते हैं।
क्या इन समाधानों में जटिल यौगिकों के नामकरण के सभी नियम शामिल हैं?
ये समाधान उपसहसंयोजन यौगिकों के सूत्र लिखने और IUPAC नामकरण के मूल सिद्धांतों को कवर करते हैं, जो NCERT पाठ्यक्रम के अनुसार हैं।
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