कक्षा 8 संस्कृत NCERT समाधान: अध्याय 10 अशोकवनिका

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यह पृष्ठ सीबीएसई कक्षा 8 संस्कृत के अध्याय 10, 'अशोकवनिका' के लिए विस्तृत समाधान प्रदान करता है। इसमें पाठ के श्लोकों का सस्वर गायन, रिक्त स्थानों की पूर्ति, श्लोकांशों का मिलान, 'तत्' शब्दरूपों का प्रयोग, और दिए गए प्रश्नों के उत्तर शामिल हैं। छात्रों को श्लोकों को समझने, व्याकरणिक संरचनाओं को पहचानने और पाठ की सामग्री को आत्मसात करने में मदद करने के लिए प्रत्येक प्रश्न का उत्तर स्पष्ट रूप से समझाया गया है। ये समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी में सहायता करने और पाठ की गहरी समझ विकसित करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 8
Subjectसंस्कृत
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
ChapterChapter 10 अशोकवनिका

Chapter summary

कक्षा 8 संस्कृत के अध्याय 10 'अशोकवनिका' के लिए ये NCERT समाधान छात्रों को पाठ की सामग्री को समझने में मदद करते हैं। इसमें श्लोकों के उच्चारण, गायन, रिक्त स्थानों की पूर्ति, श्लोकांशों के मिलान और 'तत्' शब्दरूपों के प्रयोग जैसे अभ्यासों को शामिल किया गया है। साथ ही, पाठ से संबंधित प्रश्नों के उत्तर भी दिए गए हैं, जो छात्रों को पाठ के अर्थ और व्याकरणिक पहलुओं को स्पष्ट करने में सहायक हैं।

Learning outcomes

  • अशोकवनिका पाठ के श्लोकों का सस्वर उच्चारण और गायन कर सकेंगे।
  • श्लोकों में रिक्त स्थानों की पूर्ति कर सकेंगे।
  • श्लोकों के अंशों का सही मिलान कर सकेंगे।
  • 'तत्' शब्दरूपों का विभिन्न लिंगों और विभक्तियों में प्रयोग सीख सकेंगे।
  • पाठ में दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिख सकेंगे।
  • पाठ के अर्थ और मुख्य पात्रों को समझ सकेंगे।

Topics covered

Paper topics

  • श्लोक उच्चारण
  • श्लोक गायन
  • रिक्त स्थान पूर्ति
  • श्लोकांश मिलान
  • 'तत्' शब्दरूप (पुल्लिंग, स्त्रीलिंग, नपुंसक)
  • अशोकवनिका पाठ का अर्थ
  • पुष्पों के नाम
  • पात्र परिचय (हनुमान)
  • वाक्य निर्माण

Important topics

  • 'तत्' शब्दरूपों का प्रयोग
  • श्लोकों का अर्थ समझना
  • रिक्त स्थानों की पूर्ति
  • श्लोकांशों का मिलान
  • पाठ के मुख्य प्रश्नोत्तर

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

अधोलिखितानि पदानि उच्चारयत-(निम्नलिखित पदों का उच्चारण कीजिए-) सर्वर्तुकुसुमै: सर्वर्तुपुष्पै: कर्णिकारै: मृगगणद्विजै: फलवद्भिश्च पादपैर्मधुगन्धिभि: सप्तपर्णाश्च चम्पकोद्दालकाः विबुधोद्यानम् ददर्शाविदूरस्थम् प्रासादमूर्जितम् किंशुकैश्च
Solution:

यह प्रश्न छात्रों को पाठ में आए कुछ महत्वपूर्ण संस्कृत शब्दों का सही उच्चारण सीखने के लिए दिया गया है। छात्र इन शब्दों का अभ्यास स्वयं कर सकते हैं।

उदाहरण के लिए:

  • सर्वर्तुकुसुमै: (Sarvartukusumaiḥ) - सभी ऋतुओं के फूलों से
  • कर्णिकारै: (Karṇikāraiḥ) - कनेर के फूलों से
  • मृगगणद्विजै: (Mṛggaṇadvijaiḥ) - हिरणों के झुंडों और पक्षियों से
  • फलवद्भिश्च पादपै: (Phalavadbhiśca Pādapaiḥ) - और फलदार वृक्षों से
  • मधुगन्धिभि: (Madhugandhibhiḥ) - मीठी सुगंध वाले
  • सप्तपर्णाश्च (Saptaparnāśca) - और सप्तपर्ण (एक प्रकार का वृक्ष)
  • चम्पकोद्दालकाः (Champakoddālakāḥ) - चंपा और उद्दालक (एक प्रकार का वृक्ष)
  • विबुधोद्यानम् (Vibudhodhyānam) - देवताओं का उद्यान
  • ददर्शाविदूरस्थम् (Dadṛśāvidūrastham) - दूर नहीं देखा
  • प्रासादमूर्जितम् (Prāsādamūrjitam) - ऊँचा महल
  • किंशुकैश्च (Kiṁśukaiśca) - और पलाश (टेसू) के फूलों से

छात्रों को इन शब्दों का बार-बार उच्चारण करके अभ्यास करना चाहिए।

प्रश्न 2

पाठान्तर्गतान् सर्वान् श्लोकान् सस्वरं गायत—(पाठ के अन्तर्गत सभी श्लोकों का सस्वर गायन कीजिए-)
Solution:

यह प्रश्न छात्रों को पाठ में दिए गए श्लोकों को लय और सुर के साथ गाने का अभ्यास करने के लिए प्रोत्साहित करता है। सस्वर गायन से श्लोकों को याद करना और उनके अर्थ को समझना आसान हो जाता है। छात्र शिक्षक की सहायता से या स्वयं प्रयास करके इन श्लोकों का गायन कर सकते हैं।

प्रश्न 3

श्लोकेषु रिक्तस्थानानि पूरयत—(श्लोकों में रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए—)

(क) अशोक ...... तु तस्यां वानर .....। स ददर्शाविदूरस्थं ..... प्रासादमूर्जितम्।।

(ख) कर्णिकारै: किंशुकैश्च .....। स देश: ..... तेषां प्रदीप्त इव .....।

Solution:

इस प्रश्न में श्लोकों के कुछ अंश दिए गए हैं जिनमें रिक्त स्थान हैं। इन रिक्त स्थानों को पाठ के आधार पर सही शब्दों से भरना है।

(क) का उत्तर:

अशोक विनकायां तु तस्यां वानर पुंगवः। स ददर्शाविदूरस्थं चैत्य-प्रासादमूर्जितम्।।

स्पष्टीकरण: यहाँ 'विनकायां' का अर्थ वाटिका या उपवन है, 'पुंगवः' का अर्थ श्रेष्ठ या वीर है, और 'चैत्य' का अर्थ पवित्र स्थान या स्तूप है, जो यहाँ प्रासाद के साथ प्रयुक्त हुआ है।

(ख) का उत्तर:

कर्णिकारै: किंशुकैश्च सुपुष्यितै:। स देश: प्रभया तेषां प्रदीप्त इव सर्वतः।।

स्पष्टीकरण: 'सुपुष्यितै:' का अर्थ है अच्छी तरह खिले हुए फूलों से युक्त। 'प्रभया' का अर्थ है प्रकाश या चमक से। 'सर्वतः' का अर्थ है चारों ओर से।

प्रश्न 4

श्लोकांशान् योजयत-(श्लोकों का मिलान कीजिए-)

(क) (ख) नन्दनं विबुधोद्यानं पुण्यगन्धं मनोहरम्।

अनेकगन्धप्रवहं प्रदीप्त इव सर्वत:। स देश: प्रभया तेषां चित्रं चैत्ररथं यथा। पुंनागा: सप्तपर्णाश्च रम्यं मृगगणद्विजै:। नानानिनादैरुद्यानं चम्पकोद्दालकास्तथा।

Solution:

इस प्रश्न में श्लोकों के विभिन्न अंशों को सही क्रम में मिलाना है ताकि एक पूर्ण श्लोक बन सके। दिए गए अंशों को पाठ के अनुसार व्यवस्थित किया गया है।

सही मिलान इस प्रकार है:

(क) नन्दनं विबुधोद्यानं चित्रं चैत्ररथं यथा।

(ख) अनेकगन्धप्रवहं पुण्यगन्धं मनोहरम्।

(ग) स देश: प्रभया तेषां प्रदीप्त इव सर्वतः।

(घ) पुंनागा: सप्तपर्णाश्च चम्पकोद्दालकास्तथा।

(ङ) नानानिनादैरुद्यानं रम्यं मृगगणद्विजै:।

स्पष्टीकरण: यह श्लोक अशोकवनिका की सुंदरता का वर्णन करता है, जिसमें विभिन्न प्रकार के फूल, उनकी सुगंध, और पक्षियों व जानवरों की आवाजों का उल्लेख है, जो इसे स्वर्ग के नंदनवन के समान सुंदर बनाते हैं।

प्रश्न 5

निर्देशानुसारं 'तत्' इति शब्दरूपै: रिक्तस्थानानि पूरयत-(निर्देश के अनुसार 'तत्' के शब्दरूपों के द्वारा रिक्तस्थानों की पूर्ति कीजिए-)

विभक्तिः एकवचनम् द्विवचनम् बहुवचनम्

(क) यथा– पुँल्लिङ्ग प्रथमा सः

षष्ठी तस्य *************

सप्तमी ************** ************ तेषु

(ख) यथा- स्त्रीलिङ्गे षष्ठी ************** तयो: ...............

द्वितीया ताम् ..............

तृतीया ...... ताभ्याम् ...............

(ग) यथा- नपुंसकलिङ्गे प्रथमा तत् . . . . . . . . . . . . . . . . . . . तानि द्वितीया ......

चतुर्थी तस्मै ...............

Solution:

यह प्रश्न 'तत्' (वह) सर्वनाम शब्द के विभिन्न लिंगों (पुल्लिंग, स्त्रीलिंग, नपुंसक) और विभक्तियों (प्रथमा से सप्तमी तक) में रूपों को याद करने और उनका अभ्यास करने के लिए है।

(क) पुल्लिंग 'तत्' के रूप:

प्रथमा: सः (वह एक) - तौ (वे दो) - ते (वे सब)

षष्ठी: तस्य (उसका) - तयोः (उन दोनों का) - तेषाम् (उन सबका)

सप्तमी: तस्मिन् (उसमें) - तयोः (उन दोनों में) - तेषु (उन सब में)

(ख) स्त्रीलिंग 'तत्' के रूप:

षष्ठी: तस्याः (उसका) - तयोः (उन दोनों का) - तासाम् (उन सबका)

द्वितीया: ताम् (उसको) - ते (उन दोनों को) - ताः (उन सबको)

तृतीया: तया (उसके द्वारा) - ताभ्याम् (उन दोनों के द्वारा) - ताभिः (उन सबके द्वारा)

(ग) नपुंसकलिङ्ग 'तत्' के रूप:

प्रथमा: तत् (वह एक) - ते (वे दो) - तानि (वे सब)

द्वितीया: तत् (उसको) - ते (उन दोनों को) - तानि (उन सबको)

चतुर्थी: तस्मै (उसके लिए) - ताभ्याम् (उन दोनों के लिए) - तेभ्यः (उन सबके लिए)

नोट: 'तत्' शब्द का अर्थ 'वह' होता है और यह तीनों लिंगों में प्रयुक्त होता है। इसके रूप संज्ञा की तरह चलते हैं।

प्रश्न 6

प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत-(प्रश्नों के उत्तर लिखिए-)

(क) पाठेऽस्मिन् देश: इति शब्दस्य कोऽर्थ:?

(ख) केषाञ्चित् पञ्च पुष्पाणां नामानि लिखत।

(ग) वानरपुंगवः किं ददर्श?

(घ) अत्र वानरपुङ्गवः कः?

(ङ) उद्यानम् कै: निनादै: रम्यम्?

Solution:

यह प्रश्न पाठ 'अशोकवनिका' पर आधारित है और छात्रों की समझ का परीक्षण करता है।

(क) पाठेऽस्मिन् देश: इति शब्दस्य कोऽर्थ:?

उत्तर: पाठेऽस्मिन् देश: इति शब्दस्य स्थानम् इति अर्थ:। (इस पाठ में 'देशः' शब्द का अर्थ 'स्थान' है।)

(ख) केषाञ्चित् पञ्च पुष्पाणां नामानि लिखत।

उत्तर: कर्णिकारम्, किंशुकम्, पुंनगः, चम्पकम्, उद्दालकः इति पञ्चपुष्पाणां नामानि सन्ति। (कर्णिकार, किंशुक, पुंनाग, चम्पक, उद्दालक ये पाँच फूलों के नाम हैं।)

(ग) वानरपुंगवः किं ददर्श?

उत्तर: वानरपुंगव: अविदूरस्थं चैत्यप्रासादम् (सीताम्) ददर्श। (वानर श्रेष्ठ ने पास में स्थित चैत्य-प्रासाद (सीता जी) को देखा।)

(घ) अत्र वानरपुङ्गवः कः?

उत्तर: अत्र वानरपुङ्गवः श्री हनुमान् अस्ति। (यहाँ वानरपुङ्गव श्री हनुमान हैं।)

(ङ) उद्यानम् कै: निनादै: रम्यम्?

उत्तर: उद्यानम् नानानिनादै: मृगगणद्विजै: रम्यम्। (उद्यान अनेक प्रकार की ध्वनियों से और हिरणों के झुंडों व पक्षियों से रमणीय है।)

प्रश्न 7

चक्रस्थपदानि प्रयुज्य वाक्यानि रचयत-(चक्र में स्थित पदों का प्रयोग करके वाक्य बनाइए—)

यथा-राम: सीतालक्ष्मणाभ्यां सह वनं गच्छति।

(क) राम: ***************************************

(ख) राम: सुग्रीवेण सह मैत्रीं स्थापयति।

(ग) राम: रावणं हन्ति।

(घ) ***************************************

(ङ) ***************************************

(च) ······

(छ) .....।

Solution:

इस प्रश्न में दिए गए शब्दों (जो संभवतः एक चक्र में थे, लेकिन यहाँ केवल उदाहरण और कुछ पूर्ण वाक्य दिए गए हैं) का प्रयोग करके वाक्य बनाने हैं। दिए गए उदाहरण और पूर्ण वाक्यों के आधार पर, हम अनुमान लगा सकते हैं कि यह प्रश्न राम के जीवन की घटनाओं या उनके संबंधों पर आधारित वाक्यों को पूरा करने के लिए है।

दिए गए वाक्यों के आधार पर संभावित पूर्ण वाक्य:

(क) राम: पित्रोः वन्दनं करोति। (राम पिता-माता का अभिवादन करते हैं।)

(ख) राम: सुग्रीवेण सह मैत्रीं स्थापयति। (राम सुग्रीव के साथ मित्रता स्थापित करते हैं।)

(ग) राम: रावणं हन्ति। (राम रावण का वध करते हैं।)

(घ) (संभावित) रामः सीतायाः हरणस्य दुःखं अनुभवति। (राम सीता के हरण का दुःख अनुभव करते हैं।)

(ङ) (संभावित) रामः हनुमतः वन्दनं करोति। (राम हनुमान का वंदन करते हैं।)

(च) (संभावित) रामः भरतेन सह राज्यं करोति। (राम भरत के साथ राज्य करते हैं।)

(छ) (संभावित) रामः विभीषणं राज्यं ददाति। (राम विभीषण को राज्य देते हैं।)

स्पष्टीकरण: यह अभ्यास छात्रों को विभिन्न कारक (कारक) और क्रियाओं का उपयोग करके सार्थक वाक्य बनाने का कौशल सिखाता है।

Common mistakes

  • 'तत्' शब्दरूपों के विभिन्न लिंगों (पुल्लिंग, स्त्रीलिंग, नपुंसक) और विभक्तियों में भ्रमित होना।
  • श्लोकों के अर्थ को समझने में कठिनाई।
  • रिक्त स्थानों को भरने के लिए सही पदों का चयन न कर पाना।
  • श्लोकांशों के मिलान में त्रुटि करना।

Revision tips

  • सभी श्लोकों को बार-बार सस्वर पढ़ें और उनका अर्थ समझने का प्रयास करें।
  • 'तत्' शब्दरूपों की सारणी को अच्छी तरह याद करें और अभ्यास करें।
  • रिक्त स्थान पूर्ति और श्लोकांश मिलान वाले प्रश्नों का अभ्यास करें।
  • दिए गए प्रश्नों के उत्तरों को अपनी भाषा में लिखने का अभ्यास करें।

Practice MCQs

Q1. अशोकवनिका पाठ में 'देशः' शब्द का क्या अर्थ है?

Q2. निम्नलिखित में से कौन सा पुष्प अशोकवनिका पाठ में वर्णित नहीं है?

Q3. वानरपुंगव ने किसे देखा?

Q4. अशोकवनिका पाठ में 'वानरपुंगवः' किसे कहा गया है?

Q5. उद्यान किनकी आवाजों से रमणीय था?

Frequently asked questions

कक्षा 8 संस्कृत के अध्याय 10 का क्या नाम है?

कक्षा 8 संस्कृत के अध्याय 10 का नाम 'अशोकवनिका' है।

इस अध्याय में मुख्य रूप से किन व्याकरणिक बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है?

इस अध्याय में मुख्य रूप से 'तत्' शब्दरूपों (पुल्लिंग, स्त्रीलिंग, नपुंसक) के विभिन्न विभक्तियों में प्रयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

क्या इन समाधानों में श्लोकों का अर्थ भी समझाया गया है?

हाँ, समाधानों में श्लोकों से संबंधित प्रश्नों के उत्तर दिए गए हैं, जिससे पाठ के अर्थ को समझने में सहायता मिलती है।

अशोकवनिका पाठ में किन पुष्पों के नाम आए हैं?

पाठ में कर्णिकार, किंशुक, पुंनाग, सप्तपर्ण, चम्पक और उद्दालक जैसे पुष्पों के नाम आए हैं।

यह समाधान छात्रों के लिए कैसे उपयोगी है?

यह समाधान छात्रों को पाठ को बेहतर ढंग से समझने, व्याकरण का अभ्यास करने और परीक्षा की तैयारी में मदद करता है।

क्या इन समाधानों में श्लोकों का सस्वर गायन करने का निर्देश है?

हाँ, समाधानों में श्लोकों का सस्वर गायन करने का निर्देश दिया गया है, जिसे छात्र स्वयं कर सकते हैं।

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