कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 8: संसारसागरस्य नायकाः NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 8 संस्कृत के अध्याय 8, 'संसारसागरस्य नायकाः' के लिए व्यापक NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह अध्याय प्राचीन भारत में जल संरक्षण की महत्वपूर्ण प्रणाली, तालाबों के निर्माण और उन कुशल कारीगरों, जिन्हें 'गजधर' कहा जाता था, के योगदान पर प्रकाश डालता है। समाधानों में गजधरों की भूमिका, उनके द्वारा किए जाने वाले कार्य जैसे योजना बनाना, व्यय का आकलन करना और निर्माण सामग्री का प्रबंधन करना, और समाज में उनके सम्मानजनक स्थान को विस्तार से समझाया गया है। इसमें व्याकरण के महत्वपूर्ण पहलुओं जैसे संधि-विच्छेद, रिक्त स्थानों की पूर्ति, पद-निर्माण और विभक्ति-प्रयोग का भी अभ्यास शामिल है। ये समाधान छात्रों को न केवल पाठ की गहरी समझ प्रदान करते हैं, बल्कि परीक्षा की तैयारी के लिए एक उत्कृष्ट संसाधन के रूप में भी कार्य करते हैं, जिससे वे अवधारणाओं को स्पष्ट रूप से समझ सकें और अभ्यास कर सकें।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 8 |
| Subject | संस्कृत |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | Chapter 8 संसारसागरस्य नायकाः |
Chapter summary
कक्षा 8 संस्कृत के अध्याय 8, 'संसारसागरस्य नायकाः' के ये NCERT समाधान प्राचीन भारत में जल प्रबंधन की कला पर केंद्रित हैं। यह अध्याय उन गुमनाम नायकों, गजधरों पर प्रकाश डालता है जिन्होंने विशाल तालाबों और अन्य जल संरचनाओं का निर्माण किया। समाधान पाठ की व्याख्या करते हैं, गजधरों के महत्व को रेखांकित करते हैं, और व्याकरणिक अभ्यासों जैसे प्रश्न-निर्माण, संधि, रिक्त स्थान भरना, पद-निर्माण और विभक्ति प्रयोग के माध्यम से छात्रों की समझ को मजबूत करते हैं।
Learning outcomes
- गजधर शब्द का अर्थ और समाज में उनकी भूमिका को समझना।
- प्राचीन भारत में जल संरक्षण की विधियों और तालाबों के महत्व को जानना।
- पाठ में प्रयुक्त विभिन्न व्याकरणिक नियमों (संधि, विभक्ति, पद-निर्माण) का अभ्यास करना।
- रेखांकित पदों के आधार पर प्रश्न बनाने का कौशल विकसित करना।
- दिए गए शब्दों और मञ्जूषा का प्रयोग करके वाक्यों को पूरा करना सीखना।
Topics covered
Paper topics
- गजधर का अर्थ और कार्य
- तालाबों का निर्माण और महत्व
- जल संरक्षण की प्राचीन विधियाँ
- संसारसागरस्य नायकाः पाठ का सारांश
- संधि और संधि-विच्छेद
- रिक्त स्थानों की पूर्ति
- पद-निर्माण (धातु, प्रत्यय, उपसर्ग)
- विभक्ति प्रयोग
- प्रश्न-निर्माण
Important topics
- गजधर का महत्व और भूमिका
- तालाब निर्माण की प्रक्रिया
- संधि और पद-निर्माण के नियम
- विभक्ति प्रयोग के उदाहरण
- पाठ के मुख्य भावार्थ को समझना
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Questions and Solutions
प्रश्न 1. एकपदेन उत्तरत (एक पद में उत्तर दीजिए)
(क) 'गजधर' शब्द का प्रयोग मुख्य रूप से राजस्थान राज्य के भागों में होता है।
(ख) गजपरिमाण (गज की माप) को गजधर धारण करता है, अर्थात वही मापता है।
(ग) कार्य की समाप्ति पर वेतन के अतिरिक्त गजधरों को सम्मान प्रदान किया जाता था।
(घ) जो केवल शिल्पकार के रूप में जाने जाते हैं, वे आदरणीय नहीं माने जाते थे, बल्कि जो निर्माण की योजना बनाते थे, वे अधिक महत्वपूर्ण थे।
प्रश्न 2. अधोलिखितानां प्रश्नानामुत्तराणि लिखत (निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए)
(क) तालाब (तडाग) देश के लगभग सभी हिस्सों में बनाए जाते थे।
(ख) गजधर समाज के निर्माण की गहराई को मापने वाले (गाम्भीर्यस्य मापकाः) के रूप में जाने जाते थे।
(ग) गजधर नए निर्माण की योजना प्रस्तुत करते थे, भविष्य के व्यय का अनुमान लगाते थे, और निर्माण के लिए आवश्यक उपकरणों और सामग्री की व्यवस्था करते थे।
(घ) गजधर सम्मान के योग्य थे क्योंकि वे समाज के लिए महत्वपूर्ण निर्माण कार्य करते थे।
प्रश्न 3. रेखाङ्कितानि पदानि आधृत्य प्रश्न-निर्माणं कुरुत (रेखांकित पदों के आधार पर प्रश्न-निर्माण कीजिए)
(क) गजधर किसका दायित्व निभाते थे? (कस्य दायित्वं गजधराः निभालयन्ति स्म?)
(ख) किसके स्वामी असमर्थ हैं? (केषां स्वामिन: असमर्था: सन्ति?)
(ग) कार्य समाप्ति पर क्या प्राप्त करते हैं? (कार्यसमाप्तौ कानि अतिरिच्य सम्मानमि प्राप्नुवन्ति?)
(घ) कौन सा शब्द सुन्दर है? (क: सुन्दर: शब्द: अस्ति?)
(ङ) क्या संसार के सागर कहे जाते हैं? (के संसारसागरा: कथ्यन्ते?)
प्रश्न 4. अधोलिखितेषु यथापेक्षितं सन्धिं/विच्छेदं कुरुत (निम्नलिखित में यथापेक्षित संधि या संधि-विच्छेद कीजिए)
(क) 'अद्य' और 'अपि' के मेल से 'अद्यापि' बनता है (अ + अ = आ)।
(ख) 'स्मरणार्थम्' का संधि-विच्छेद 'स्मरण + अर्थम्' होगा।
(ग) 'इति' और 'अस्मिन्' के मेल से 'इत्यस्मिन्' बनता है (इ + अ = य)।
(घ) 'एतेष्वेव' का संधि-विच्छेद 'एतेषु + एव' होगा।
(ङ) 'सहसा' और 'एव' के मेल से 'सहसैव' बनता है (आ + ए = ऐ)।
प्रश्न 5. मञ्जूषात: समुचितानि पदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत (मञ्जूषा से उचित पदों को चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए)
मञ्जूषा: रचयन्ति, गृहीत्वा, सहसा, जिज्ञासा, सह
(क) छात्रा: पुस्तकानि ..... विद्यालयं गच्छन्ति। (ख) मालाकाराः पुष्पैः मालाः .....। (ग) मम मनसि एका ..... वर्तते। (घ) रमेश: मित्रै: ..... विद्यालयं गच्छति। (ङ) ..... बालिका तत्र अहसत्।(क) छात्र पुस्तकों को लेकर (गृहीत्वा) विद्यालय जाते हैं।
(ख) मालाकार फूलों से मालाएँ बनाते हैं (रचयन्ति)।
(ग) मेरे मन में एक जिज्ञासा (जिज्ञासा) है।
(घ) रमेश मित्रों के साथ (सह) विद्यालय जाता है।
(ङ) अचानक (सहसा) वह बालिका वहाँ हँस पड़ी।
प्रश्न 6. पदनिर्माणं कुरुत (पदों का निर्माण कीजिए)
(i) धातुः प्रत्ययः पदम्
यथा — ह + तुमुन् = हर्तुम्
तृ + तुमुन् = .....
(ii) यथा — नम् + क्त्वा = नत्वा
गम् + क्त्वा ********************
त्यज् + क्त्वा *******************
भुज् + क्त्वा .................
(iii) उपसर्गः धातुः प्रत्ययः = पदम्
यथा- उप + ल्यप् + गम् = उपगम्य
सम् + ल्यप् + पूज् = .....
आ + ल्यप् + नी = .....
प्र + ल्यप् + दा = .....
(i) 'तृ' धातु में 'तुमुन्' प्रत्यय जोड़ने पर 'तर्तुम्' पद बनता है।
(ii) 'गम्' + 'क्त्वा' = 'गत्व', 'त्यज्' + 'क्त्वा' = 'त्यक्त्वा', 'भुज्' + 'क्त्वा' = 'भुक्त्वा'। इन सभी में 'क्त्वा' प्रत्यय का प्रयोग हुआ है।
(iii) 'सम्' + 'पूज्' + 'ल्यप्' = 'संपूज्य', 'आ' + 'नी' + 'ल्यप्' = 'आनीय', 'प्र' + 'दा' + 'ल्यप्' = 'प्रदाय'। यहाँ उपसर्ग, धातु और 'ल्यप्' प्रत्यय का प्रयोग करके पद निर्माण किया गया है।
प्रश्न 7. कोष्ठकेषु दत्तेषु शब्देषु समुचितां विभक्तिं योजयित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत (कोष्ठकों में दिए गए शब्दों में सुमुचित विभक्ति का योग करके रिक्तस्थानों की पूर्ति कीजिए)
(i) यथा-विद्यालयं परित: वृक्षा: सन्ति। (विद्यालय)
(क) ..... उभयतः ग्रामाः सन्ति। (ग्राम)
(ख) ..... सर्वतः अट्टालिकाः सन्ति। (नगर)
(ग) धिक् ....। (कापुरुष)
(ii) यथा-मृगा: मृगै: सह धावन्ति। (मृग)
(क) बालका: """ सह पठन्ति। (बालिका)
(ख) पुत्र: ..... सह आपणं गच्छति। (पितृ)
(ग) शिशु: ..... सह क्रीडित। (मातृ)
(i) (क) 'ग्राम' शब्द के साथ 'उभयतः' (दोनों ओर) के योग में द्वितीया विभक्ति का प्रयोग होगा: ग्रामम् उभयतः ग्रामाः सन्ति।
(ख) 'नगर' शब्द के साथ 'सर्वतः' (सब ओर) के योग में द्वितीया विभक्ति का प्रयोग होगा: नगरम् सर्वतः अट्टालिकाः सन्ति।
(ग) 'धिक्' (धिक्कार है) के योग में द्वितीया विभक्ति का प्रयोग होता है: धिक् कापुरुषम्!
(ii) (क) 'बालिका' शब्द के साथ 'सह' (साथ) के योग में तृतीया विभक्ति का प्रयोग होगा: बालका: बालिकाभिः सह पठन्ति।
(ख) 'पितृ' शब्द के साथ 'सह' के योग में तृतीया विभक्ति का प्रयोग होगा: पुत्र: पित्रा सह आपणं गच्छति।
(ग) 'मातृ' शब्द के साथ 'सह' के योग में तृतीया विभक्ति का प्रयोग होगा: शिशु: मात्रा सह क्रीडित।
Common mistakes
- संधि विच्छेद या संयोजन में त्रुटियाँ करना।
- वाक्यों में सही विभक्ति का प्रयोग न कर पाना।
- प्रश्न निर्माण करते समय सही प्रश्नवाचक शब्द का चयन न करना।
- मञ्जूषा से अनुपयुक्त शब्दों का चयन करके रिक्त स्थान भरना।
Revision tips
- प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को पाठ के संदर्भ में समझने का प्रयास करें।
- व्याकरण के अभ्यासों को हल करते समय संबंधित नियमों को दोहराएँ।
- गजधरों के महत्व और उनके कार्यों पर विशेष ध्यान दें।
- सभी रिक्त स्थानों को भरने के बाद वाक्यों को एक बार फिर से पढ़ें ताकि अर्थ स्पष्ट हो सके।
Practice MCQs
Q1. गजधर शब्द का प्रयोग मुख्य रूप से किस राज्य के भागों में होता है?
Explanation: पाठ के अनुसार, 'गजधर' शब्द का प्रयोग राजस्थान राज्य के भागों में होता है।
Q2. गजधर किसे कहा जाता था?
Explanation: गजधर वे लोग थे जो तालाबों और अन्य जल संरचनाओं के निर्माण की योजना बनाते थे और उनका निर्माण करते थे, इसलिए वे वास्तुकार या इंजीनियर के समान थे।
Q3. कार्य समाप्ति पर गजधरों को वेतन के अतिरिक्त क्या मिलता था?
Explanation: पाठ में उल्लेख है कि कार्य पूरा होने पर गजधरों को वेतन के अतिरिक्त सम्मान भी प्रदान किया जाता था।
Q4. 'अद्य + अपि' का सही संधि रूप क्या है?
Explanation: यहाँ 'अ' और 'अ' मिलकर 'आ' बनाते हैं, जिससे 'अद्यापि' बनता है।
Q5. मञ्जूषा से सही शब्द चुनकर वाक्य पूरा करें: 'छात्राः पुस्तकानि..... विद्यालयं गच्छन्ति।'
Explanation: छात्र पुस्तक को 'लेकर' (गृहीत्वा) विद्यालय जाते हैं।
Frequently asked questions
कक्षा 8 संस्कृत के अध्याय 8 का क्या शीर्षक है?
कक्षा 8 संस्कृत के अध्याय 8 का शीर्षक 'संसारसागरस्य नायकाः' है।
'संसारसागरस्य नायकाः' पाठ में किनके बारे में बताया गया है?
इस पाठ में प्राचीन भारत के उन गुमनाम नायकों, जिन्हें 'गजधर' कहा जाता था, के बारे में बताया गया है जिन्होंने विशाल तालाबों और जल संरचनाओं का निर्माण किया।
गजधर का मुख्य कार्य क्या था?
गजधरों का मुख्य कार्य तालाबों और अन्य जल संरचनाओं के निर्माण की योजना बनाना, व्यय का आकलन करना, निर्माण सामग्री का प्रबंधन करना और स्वयं निर्माण कार्य का निर्देशन करना था।
क्या इन समाधानों में व्याकरण का अभ्यास शामिल है?
हाँ, इन समाधानों में संधि-विच्छेद, रिक्त स्थानों की पूर्ति, पद-निर्माण और विभक्ति प्रयोग जैसे व्याकरणिक अभ्यासों को शामिल किया गया है।
यह समाधान छात्रों के लिए कैसे उपयोगी है?
यह समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ प्रदान करता है, व्याकरण के नियमों को स्पष्ट करता है, और परीक्षा की तैयारी के लिए अभ्यास के अवसर प्रदान करता है।
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