कक्षा 8 संस्कृत NCERT समाधान: पाठ 2 बिलस्य वाणी न कदापि मे श्रुता
यह पृष्ठ कक्षा 8 संस्कृत के लिए NCERT समाधान प्रस्तुत करता है, विशेष रूप से पाठ 2 'बिलस्य वाणी न कदापि मे श्रुता' पर केंद्रित है। यह पाठ एक चालाक लोमड़ी और एक भूखे शेर की कहानी बताता है, जहाँ लोमड़ी अपनी बुद्धि का उपयोग करके शेर के चंगुल से बच निकलती है। समाधानों में पाठ के सभी अभ्यासों को शामिल किया गया है, जिसमें उच्चारण, एक-पद और पूर्ण-वाक्य उत्तर, अव्यय पदों का प्रयोग, घटनाक्रम के अनुसार वाक्यों को व्यवस्थित करना और व्याकरणिक कार्य शामिल हैं। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर स्पष्ट और विस्तृत तरीके से दिया गया है, जिससे छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने और संस्कृत भाषा के अपने ज्ञान को मजबूत करने में मदद मिलती है। ये समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी में सहायता करने के लिए एक उत्कृष्ट संसाधन हैं, जो उन्हें अवधारणाओं को समझने और उत्तर लिखने का सही तरीका सीखने में मदद करते हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 8 |
| Subject | संस्कृत |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | Chapter 2 बिलस्य वाणी न कदापि मे श्रुता |
Chapter summary
कक्षा 8 संस्कृत के पाठ 2 'बिलस्य वाणी न कदापि मे श्रुता' के लिए NCERT समाधान यहाँ दिए गए हैं। यह पाठ एक चालाक लोमड़ी की कहानी पर आधारित है जो अपनी बुद्धि से एक शेर को चकमा देती है। समाधानों में पाठ के सभी अभ्यासों को शामिल किया गया है, जिसमें उच्चारण अभ्यास, एक-पद और पूर्ण-वाक्य उत्तर, अव्यय शब्दों का सही प्रयोग, और घटनाओं के क्रम को समझने जैसे महत्वपूर्ण व्याकरणिक और पाठ-आधारित प्रश्न शामिल हैं। यह छात्रों को कहानी के पात्रों, उनकी बुद्धिमत्ता और संवादों को समझने में मदद करता है।
Learning outcomes
- पाठ 'बिलस्य वाणी न कदापि मे श्रुता' के पात्रों और कथानक को समझना।
- संस्कृत में एक-पद और पूर्ण-वाक्य उत्तर देने का अभ्यास करना।
- दिए गए अव्यय शब्दों का सही संदर्भ में प्रयोग करना सीखना।
- घटनाओं के क्रम को पहचानना और वाक्यों को तदनुसार व्यवस्थित करना।
- संस्कृत व्याकरण के मूल तत्वों, जैसे क्रियापद, कर्ता, विशेषण और विभक्ति-वचन को समझना।
- संधि विच्छेद करने का अभ्यास करना।
Topics covered
Paper topics
- बिलस्य वाणी न कदापि मे श्रुता (कहानी का सारांश)
- उच्चारण अभ्यास
- एक-पद उत्तर
- पूर्ण-वाक्य उत्तर
- अव्यय पदों का प्रयोग (सदा, बहि:, दूरं, तावत्, तर्हि, तदा, सहसा, यदा)
- घटनाक्रम के अनुसार वाक्यों का क्रम निर्धारण
- व्याकरणिक कार्य (कर्ता, क्रिया, विशेषण, विभक्ति, वचन)
- संधि विच्छेद (क्षुधार्तः, अत्रैव)
Important topics
- अव्यय पदों का सही प्रयोग
- कहानी का सारांश और पात्रों का विश्लेषण
- घटनाक्रम के अनुसार वाक्यों को व्यवस्थित करना
- व्याकरणिक कार्य (कर्ता, क्रिया, विशेषण, विभक्ति, वचन)
- संधि विच्छेद
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Questions and Solutions
प्रश्न 1: उच्चारणं कुरुत (उच्चारण कीजिए)
यह एक उच्चारण अभ्यास है। छात्रों को इन शब्दों का स्वयं उच्चारण करना चाहिए ताकि उनकी संस्कृत उच्चारण क्षमता में सुधार हो सके। शिक्षक कक्षा में इसका मार्गदर्शन कर सकते हैं।
प्रश्न 2: एकपदेन उत्तरं लिखत (एक पद में उत्तर लिखिए)
(क) सिंह का नाम खरनखर था।
(ख) गुफा का स्वामी दिधपुच्छ नामक लोमड़ (शृगाल) था।
(ग) सिंह सूर्यास्त के समय गुफा के पास आया था।
(घ) भय से व्याकुल मन वाले लोगों (भयसन्त्रस्तमनसाम्) के हाथ-पैर आदि क्रियाएँ काम नहीं करती हैं।
(ङ) गुफा शेर की गर्जना से गूंज उठी (उच्चगर्जनेन)।
प्रश्न 3: मञ्जूषातः अव्ययपदं चित्वा वाक्यानि पूरयत (मञ्जूषा से अव्यय शब्दों को चुनकर वाक्य पूरे कीजिए)
(क) यदा दशवादनं भवति ..... छात्रा: विद्यालयं गच्छन्ति।
(ख) सूर्य: पूर्विदशायां ..... उदेति।
(ग) शृगाल: गुहाया: ..... आसीत्।
(घ) स च यावत् पश्यित, """ सिंहपदपद्धित: गुहायां प्रविष्टा दृश्यते।
(ङ) शृगालोऽपि ततः .....पलायमानः अपठत्।
(च) यदि सफलताम् इच्छसिःःःःःःःआलस्यं त्यज।
दिए गए अव्यय शब्दों का प्रयोग करके वाक्य इस प्रकार पूरे होंगे:
(क) यदा दशवादनं भवति तदा छात्रा: विद्यालयं गच्छन्ति। (जब दस बजते हैं, तब छात्र विद्यालय जाते हैं।)
(ख) सूर्य: पूर्विदशायां सदा उदेति। (सूर्य पूर्वी दिशा में हमेशा उगता है।)
(ग) शृगाल: गुहाया: बहि: आसीत्। (लोमड़ गुफा के बाहर था।)
(घ) स च यावत् पश्यित, तावत् सिंहपदपद्धित: गुहायां प्रविष्टा दृश्यते। (और उसने जैसे ही देखा, वैसे ही शेर के पैरों के निशान गुफा में प्रवेश करते हुए दिखाई दिए।)
(ङ) शृगालोऽपि ततः दूरं पलायमानः अपठत्। (लोमड़ भी वहाँ से दूर भागता हुआ बोला।)
(च) यदि सफलताम् इच्छसि तर्हि आलस्यं त्यज। (यदि सफलता चाहते हो, तो आलस्य छोड़ दो।)
प्रश्न 4: पूर्णवाक्येन उत्तरत (पूर्ण वाक्य में उत्तर दीजिए)
(क) खरनखर नामक सिंह एक वन में रहता था।
(ख) बड़ी गुफा को देखकर सिंह ने सोचा कि निश्चित रूप से इस गुफा में रात में कोई जीव आता है, इसलिए वह यहीं छिपकर प्रतीक्षा करेगा।
(ग) लोमड़ ने सोचा कि वह विनाश को प्राप्त हो गया है, क्योंकि उसे विश्वास था कि इस गुफा में शेर है। उसने सोचा कि अब क्या करना चाहिए।
(घ) लोमड़ बहुत दूर भाग गया।
(ङ) यह विचार करके कि मेरी पुकार सुनकर वह (लोमड़) गुफा में प्रवेश करके मेरा भोजन बनेगा, सिंह ने लोमड़ को पुकारा।
(च) इस कहानी में लोमड़ (शृगाल) की चतुराई का वर्णन किया गया है।
प्रश्न 5: मञ्जूषातः अव्ययपदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत (मञ्जूषा से अव्यय पदों को चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए)
एकस्मिन् वने कश्चन व्याधः जालं विस्तीर्यः स्थितः। .....सथतः। आकाशे सपरिवारः कपोतराजः चित्रग्रीवः निर्गतः। ......तण्डुलकणानामुपरि कपोतानां लोभो जातः। ...... ······राजा तत्र सहमत: नासीत्। तस्य युक्ति: आसीत्······नर्जने वने कोऽपि मनुष्यो नास्ति......राजः कुतो वा तण्डुलकणानां सम्भवः? .....राजः उपदेशमस्वीकृत्य ते नीचै: आगता, ""विदधीत न क्रियाम्'।
दिए गए अव्यय शब्दों का प्रयोग करके रिक्त स्थान इस प्रकार भरे जाएंगे:
एकस्मिन् वने कश्चन व्याधः जालं विस्तीर्यः स्थितः। तत्र सथतः। आकाशे सपरिवारः कपोतराजः चित्रग्रीवः निर्गतः। सहसा तण्डुलकणानामुपरि कपोतानां लोभो जातः। परन्तु राजा तत्र सहमत: नासीत्। तस्य युक्ति: आसीत् यदि नर्जने वने कोऽपि मनुष्यो नास्ति तर्हि राजः कुतो वा तण्डुलकणानां सम्भवः? यदा राजः उपदेशमस्वीकृत्य ते नीचै: आगता, तदा "विदधीत न क्रियाम्"।
व्याख्या:
- तत्र - वहाँ (व्याध वहाँ जाल फैलाकर बैठा था)।
- सहसा - अचानक (अचानक कबूतरों का लोभ हुआ)।
- परन्तु - लेकिन (राजा सहमत नहीं था)।
- यदि... तर्हि - यदि...तो (यदि मनुष्य नहीं है तो दाने कहाँ से आएँगे?)।
- यदा... तदा - जब...तब (जब राजा का उपदेश न मानकर वे नीचे आए, तब उन्होंने कहा)।
प्रश्न 6: घटनाक्रमानुसारं वाक्यानि लिखत (वाक्यों को घटना के क्रम अनुसार लिखिए)
कहानी की घटनाओं को सही क्रम में इस प्रकार व्यवस्थित किया जाएगा:
- (ग) परिभ्रमन् सिंह: क्षुधार्तो जात:। (घूमते हुए सिंह को भूख लगी।)
- (ख) सिंह: एकां महतीं गुहाम् अपश्यत्। (सिंह ने एक बड़ी गुफा देखी।)
- (क) गुहाया: स्वामी दिधपुच्छ: नाम शृगाल: समागच्छत्। (गुफा का स्वामी दिधपुच्छ नामक लोमड़ आया।)
- (छ) गुहायां कोऽपि अस्ति इति शृगालस्य विचारः। (लोमड़ का विचार था कि गुफा में कोई है।)
- (ङ) सिंह: शृगालस्य आह्वानमकरोत्। (सिंह ने लोमड़ को पुकारा।)
- (घ) दूरस्थ: शृगाल: रवं कर्त्तुमारब्ध:। (दूर स्थित लोमड़ ने आवाज करना शुरू किया।)
- (च) दूरं पलायमानः शृगाृलः श्लोकमपठत्। (दूर भागता हुआ लोमड़ श्लोक बोला।)
अतिरिक्तः अभ्यासः
कस्मिश्चित् वने खरनखर: नाम सिंह: प्रतिवसित स्म। स: कदाचित् इतस्तत: परिभ्रमन् क्षुधार्त: न किञ्चिदपि आहारं प्राप्तवान्। ततः सूर्यास्तसमये एकां महतीं गुहां दृष्ट्वा सः अचिन्तयत्-''नूनम् एतस्यां गुहायां रात्रौ कोऽपि जीव: आगच्छति। अत: अत्रैव निगूढो भूत्वा तिष्ठामि'' इति।
1. एकपदेन उत्तरत।
खरनखर: क: आसीत्? ______
स: कुत्र वसित स्म? ______
2. सः कीदृशः इतः ततः अभ्रभत्?_____
3. सः कदा गुहाम् अपश्यत्?
4. पूर्णवाक्येन उत्तरत।
गुहां दृष्ट्वा सिंह: किम् अचिन्तयत्?
5. एतत् विचिन्त्य सः किम् अकरोत्?
6. भाषिककार्यम्
(क) 'एतस्यां गुहायां कोऽपि जीवः आगच्छति' इति वाक्ये-
1. आगच्छति क्रियापदस्य क: कर्ता?--
2. 'एतस्यां गुहायाम्'_____ अत्र किं विशेषणपदम्?_____
3. वाक्ये किम् अव्यय पदम् प्रयुक्तम्?_____
'रात्रौ'______अत्र किं विभक्ति वचनम्?_____
(ख) यथानिर्देशम् रिक्तस्थानानि पूरयत-
1. एतस्याम् _____ (द्विव.) _____ (ब. व.)
2. गुहायाम् _____ (द्विव.) _____ (ब. व.)
3. दृष्ट्वा _____ धातु: ____ प्रत्यय:
(ग) सन्धिविच्छेदं कुरुत।
1. क्षुधार्त: = ____ + ____
2. अत्रैव = ___ +
दिए गए पाठांश के आधार पर अतिरिक्त अभ्यास के प्रश्न इस प्रकार हल किए जाएंगे:
1. एकपदेन उत्तरत:
- खरनखर: क: आसीत्? सिंह:
- स: कुत्र वसित स्म? वने
2. सः कीदृशः इतः ततः अभ्रभत्? क्षुधार्तः (वह भूख से व्याकुल होकर इधर-उधर घूम रहा था।)
3. सः कदा गुहाम् अपश्यत्? सूर्यास्तसमये (उसने सूर्यास्त के समय गुफा देखी।)
4. पूर्णवाक्येन उत्तरत:
गुहां दृष्ट्वा सिंह: अचिन्तयत्- ''नूनम् एतस्यां गुहायां रात्रौ कोऽपि जीव: आगच्छति। अत: अत्रैव निगूढो भूत्वा तिष्ठामि'' इति। (गुफा को देखकर सिंह ने सोचा - 'निश्चित रूप से इस गुफा में रात में कोई जीव आता है। इसलिए यहीं छिपकर बैठ जाता हूँ।')
5. एतत् विचिन्त्य सः किम् अकरोत्? एतत् विचिन्त्य सः अत्रैव निगूढो भूत्वा तिष्ठामि इति अकरोत्। (यह सोचकर उसने वहीं छिपकर बैठ जाने का निश्चय किया।)
6. भाषिककार्यम्
(क) 'एतस्यां गुहायां कोऽपि जीवः आगच्छति' इति वाक्ये-
- आगच्छति क्रियापदस्य क: कर्ता?-- जीवः
- 'एतस्यां गुहायाम्' एतस्याम् अत्र किं विशेषणपदम्? गुहायाम् (यहाँ 'एतस्याम्' विशेषण है और 'गुहायाम्' विशेष्य है, लेकिन प्रश्न विशेषणपद पूछ रहा है, जो 'एतस्याम्' है। यदि 'गुहायाम्' का विशेषण पूछा गया है तो वह 'एतस्याम्' होगा। प्रश्न थोड़ा अस्पष्ट है, पर सामान्यतः 'एतस्याम्' को विशेषण माना जाता है।)
- वाक्ये किम् अव्यय पदम् प्रयुक्तम्? अत्रैव
'रात्रौ'______अत्र किं विभक्ति वचनम्? षष्ठी विभक्ति, एकवचन (यहाँ 'रात्रौ' में सप्तमी विभक्ति, एकवचन है, जो समय का बोध कराती है।)
(ख) यथानिर्देशम् रिक्तस्थानानि पूरयत-
- एतस्याम् गुहायाम् (द्विव.) गुहासु (ब. व.)
- गुहायाम् गुहायाम् (द्विव.) गुहासु (ब. व.)
- दृष्ट्वा दृश् धातु: क्त्वा प्रत्यय:
(ग) सन्धिविच्छेदं कुरुत।
- क्षुधार्त: = क्षुधा + आर्त:
- अत्रैव = अत्र + एव
Common mistakes
- अव्यय शब्दों के अर्थ और प्रयोग में भ्रमित होना।
- वाक्यों को घटनाक्रम के अनुसार गलत क्रम में व्यवस्थित करना।
- व्याकरणिक कार्यों में कर्ता-क्रिया संबंध या विशेषण-विशेष्य संबंध को गलत समझना।
- संधि विच्छेद करते समय शब्दों को सही ढंग से अलग न कर पाना।
Revision tips
- कहानी को ध्यान से पढ़ें और मुख्य पात्रों की बुद्धिमत्ता पर ध्यान केंद्रित करें।
- सभी अव्यय शब्दों के अर्थ और वाक्यों में उनके प्रयोग का अभ्यास करें।
- घटनाक्रम वाले प्रश्न को हल करते समय, कहानी के प्रवाह को याद करें।
- व्याकरणिक कार्य (कर्ता, क्रिया, विशेषण, विभक्ति) को हल करने के लिए पाठ के वाक्यों का विश्लेषण करें।
- संधि विच्छेद के नियमों को दोहराएं और अभ्यास करें।
Practice MCQs
Q1. सिंह का नाम क्या था?
Explanation: पाठ के अनुसार, सिंह का नाम खरनखर था।
Q2. लोमड़ी (शृगाल) ने गुफा में शेर की उपस्थिति का पता कैसे लगाया?
Explanation: लोमड़ी ने गुफा में प्रवेश करते हुए शेर के पैरों के निशान देखे और यह निष्कर्ष निकाला कि शेर अंदर है।
Q3. लोमड़ी ने शेर से बचने के लिए क्या चालाकी की?
Explanation: लोमड़ी ने शेर को आवाज दी, लेकिन जब शेर ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, तो उसने शेर को यह विश्वास दिलाया कि गुफा हमेशा अपने अंदर आने वाले का आह्वान करती है, और फिर वह भाग गई।
Q4. सिंह ने लोमड़ी के आह्वान का उत्तर क्यों नहीं दिया?
Explanation: सिंह गुफा के अंदर छिपा हुआ था और लोमड़ी के आने का इंतजार कर रहा था, इसलिए वह लोमड़ी के आह्वान का उत्तर नहीं दे सका।
Q5. इस कहानी से मुख्य सीख क्या मिलती है?
Explanation: कहानी यह सिखाती है कि संकट के समय में बुद्धि और चतुराई का प्रयोग करके किसी भी कठिन परिस्थिति का सामना किया जा सकता है।
Frequently asked questions
यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए है?
यह NCERT समाधान कक्षा 8 के संस्कृत विषय के लिए है, विशेष रूप से पाठ 2 'बिलस्य वाणी न कदापि मे श्रुता' पर केंद्रित है।
पाठ 'बिलस्य वाणी न कदापि मे श्रुता' का क्या अर्थ है?
इस पाठ का अर्थ है 'गुफा की वाणी मैंने कभी नहीं सुनी'। यह एक ऐसी कहानी है जहाँ एक चालाक लोमड़ी अपनी बुद्धि से एक शेर को चकमा देती है।
इन समाधानों में किस प्रकार के प्रश्न शामिल हैं?
इन समाधानों में उच्चारण अभ्यास, एक-पद और पूर्ण-वाक्य उत्तर, अव्यय शब्दों का प्रयोग, वाक्यों को घटनाक्रम में व्यवस्थित करना, और व्याकरणिक कार्य (जैसे कर्ता, क्रिया, विशेषण, संधि विच्छेद) जैसे प्रश्न शामिल हैं।
क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे?
हाँ, ये समाधान पाठ की गहरी समझ प्रदान करते हैं और सभी अभ्यासों के विस्तृत उत्तर देते हैं, जो परीक्षा की तैयारी के लिए बहुत उपयोगी हैं।
अव्यय पद क्या होते हैं और उनका प्रयोग कैसे किया जाता है?
अव्यय वे शब्द होते हैं जो लिंग, वचन या कारक के अनुसार नहीं बदलते हैं। इस पाठ में 'सदा', 'बहि:', 'दूरं', 'तावत्', 'तर्हि', 'तदा', 'सहसा', 'यदा' जैसे अव्यय पदों का प्रयोग सिखाया गया है।
कहानी का मुख्य पात्र कौन है और उसकी क्या विशेषता है?
कहानी का मुख्य पात्र एक चालाक लोमड़ी (शृगाल) है, जिसकी विशेषता उसकी तीव्र बुद्धि और संकट के समय में चतुराई से काम लेने की क्षमता है।
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