CBSE Class 8 Sanskrit Chapter 3 भगवदज्जुकम्र NCERT Solutions

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This resource provides comprehensive NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit, Chapter 3, titled 'भगवदज्जुकम्र'. The chapter, a Sanskrit play, explores themes of life, death, and transmigration of souls through a unique narrative. The solutions cover a range of exercises, including answering questions in a single word or full sentence, performing sandhi viccheda (word splitting), identifying and using avyaya (indeclinable) words, determining who speaks to whom, finding antonyms, and constructing sentences with given words. It also includes exercises on word formation, identifying grammatical elements like case, number, and verb roots, and distinguishing between similar-sounding words. These solutions are designed to help students grasp the nuances of the Sanskrit language and the play's content, aiding in effective exam preparation and revision.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 8
Subjectसंस्कृत
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
ChapterChapter 3 भगवदज्जुकम्र

Chapter summary

Chapter 3 of Class 8 Sanskrit, 'भगवदज्जुकम्र', is presented through NCERT Solutions that focus on language comprehension and grammatical application. The solutions guide students through understanding the play's dialogue and context by answering specific questions, breaking down compound words (sandhi viccheda), identifying and using indeclinable words (avyaya), and understanding character interactions. Exercises also cover vocabulary (antonyms), sentence construction, and word formation, reinforcing grammatical concepts like case and number. This chapter's solutions emphasize practical application of Sanskrit grammar within the context of a literary text.

Learning outcomes

  • Understand the characters and plot of the play 'भगवदज्जुकम्र'.
  • Answer questions based on the provided Sanskrit text.
  • Perform sandhi viccheda (word splitting) for given Sanskrit words.
  • Identify and use avyaya (indeclinable) words correctly in sentences.
  • Determine the speaker and listener in dialogues.
  • Understand and use antonyms (viparītārthakāḥ śabdāḥ).
  • Construct meaningful sentences using given Sanskrit words.
  • Form Sanskrit words based on given roots, case, and number.

Topics covered

Paper topics

  • भगवदज्जुकम्र play comprehension
  • Ekpaduttar (One-word answers)
  • Sandhi Viccheda (Word splitting)
  • Avyaya Pad (Indeclinable words)
  • Kaha/Kaam prati kathayati (Speaker and listener identification)
  • Viparitarthak Shabd (Antonyms)
  • Vakya Nirman (Sentence construction)
  • Pad Nirman (Word formation)
  • Grammatical analysis (Vibhakti, Vachan, Dhatu, Upsarg)
  • Bhinnaprakritik Pad (Odd one out)
  • Sanskrit grammar application
  • Literary analysis of Sanskrit drama

Important topics

  • Understanding the play 'भगवदज्जुकम्र'
  • Sandhi Viccheda practice
  • Identification and usage of Avyaya words
  • Grammatical analysis of words (Vibhakti, Vachan)
  • Sentence construction and word formation
  • Character dialogues and interactions

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

क) गणिकायाः नाम किम्? (गणिका का नाम क्या था?) ख) परिव्राजकस्य शिष्यः कः आसीत्? (परिव्राजक का शिष्य कौन था?) ग) यमदूत: गणिकाया: जीवं कस्य शरीरे निद्धाति? (यमदूत गणिका के जीव को किसके शरीर में रखता है?) घ) परहितनिरता के भवन्तु? (दूसरों के हित में लगे हुए कौन होते हैं?)
Solution:

यहाँ दिए गए प्रश्नों के उत्तर एक पद में इस प्रकार हैं:

  • (क) वसन्तसेना
  • (ख) शाण्डिल्यः
  • (ग) परिव्राजकस्य (शरीरे)
  • (घ) भूतगणाः

प्रश्न 2

सन्धिविच्छेदं कुरुत (सन्धि-विच्छेद कीजिए):

यथा- तत्रैव = तत्र + एव

भगवन्नयम् + ..........

श्वासश्च ..... + ..........

खल्वकृतज्ञा: ······ + ·········

सप्तैता: + ......

करोतीति ..... + ......

Solution:

दिए गए शब्दों का सन्धि-विच्छेद इस प्रकार है:

  • भगवन् + अयम्
  • श्वासः + च
  • खलु + अकृतज्ञाः
  • सप्त + एताः
  • करोति + इति

प्रश्न 3

उदाहरणानुसारं अव्ययपदानि चिनुत (उदाहरण अनुसार अव्यय पदों का चयन कीजिए):

यथा- राधा अपि नृत्यति। (अव्यय पद: अपि)

क) त्वं कदा गृहं गमिष्यसि।

ख) अधुना कः समयः।

ग) महात्मागान्धी सदा सत्यं वदति स्म।

घ) अहं श्वः विद्यालयं गमिष्यामि।

ङ) इदानीं त्वं श्लोकं पठ।

Solution:

दिए गए वाक्यों में अव्यय पद निम्नलिखित हैं:

  • (क) कदा (कब)
  • (ख) अधुना (अब)
  • (ग) सदा (हमेशा)
  • (घ) श्वः (आने वाला कल)
  • (ङ) इदानीम् (इस समय)

अव्यय वे शब्द होते हैं जो लिंग, वचन, कारक आदि के कारण परिवर्तित नहीं होते हैं।

प्रश्न 4

अधोलिखितानि कथनानि कः /का कं/कां प्रति कथयाति? (निम्नलिखित कथनों को कौन किसके प्रति कहता है?)

क) मूर्ख वैद्य! अलं परिश्रमेण।

ख) कुत्र कुत्र रामिलक:।

ग) विषवेगा: शतम्।

घ) गुलिका: मया आनीता:।

ङ) इदम् उदकम्।

च) अरे! प्रत्यागतप्राण: खलु भगवान्।

Solution:

दिए गए कथनों को कहने वाले और सुनने वाले (किसके प्रति) इस प्रकार हैं:

कथन कः/का (कहने वाला) कं/कां प्रति (सुनने वाला)
(क) मूर्ख वैद्य! अलं परिश्रमेण। गणिका वैद्यं प्रति
(ख) कुत्र कुत्र रामिलक:। परिव्राजकः (किसी अन्य पात्र से पूछ रहा है)
(ग) विषवेगा: शतम्। वैद्यः (किसी अन्य पात्र से या स्वयं से)
(घ) गुलिका: मया आनीता:। वैद्यः (चेटी से)
(ङ) इदम् उदकम्। चेटी (वैद्य या गणिका से)
(च) अरे! प्रत्यागतप्राण: खलु भगवान्। शाण्डिल्यः (परिव्राजक के प्रति)

प्रश्न 5

विपरीतार्थकाः शब्दाः लेखनीयाः (विपरीतार्थक शब्द लिखिए):

गुणा:

स्वीकार:

दक्षिणहस्त:

अन्या

कृतज्ञ:

Solution:

दिए गए शब्दों के विपरीतार्थक शब्द इस प्रकार हैं:

  • गुणाः - दोषाः
  • स्वीकारः - अस्वीकारः
  • दक्षिणहस्तः - वामहस्तः
  • अन्या - अन्या (यह शब्द स्वयं में विशेषण है, इसका विपरीतार्थक संदर्भ पर निर्भर करेगा, पर यहाँ समान रूप में प्रयोग किया गया है)
  • कृतज्ञः - कृतघ्नः / अकृतज्ञः

प्रश्न 6

अधोलिखितानि पदानि प्रयुज्य वाक्यानि रचयत (नीचे लिखे पदों का प्रयोग करके वाक्यों की रचना कीजिए):

गुलिका:, कुठारिका, क्षिप्रम्, यत्न:, लोके

Solution:

दिए गए पदों का प्रयोग करके वाक्य रचना इस प्रकार है:

  • गुलिकाः: बालकः मधुर-गुलिकाः खादति। (The boy eats sweet pills.)
  • कुठारिका: कृषकाय कुठारिका आवश्यक अस्ति। (A spade is necessary for the farmer.)
  • क्षिप्रम्: त्वं क्षिप्रम् गृहं गच्छ। (You go home quickly.)
  • यत्न:: परीक्षायां उत्तमफलप्राप्तये यत्नः करणीयः। (Effort must be made to get good results in the exam.)
  • लोके: लोके सत्यमेव जयते। (Truth alone triumphs in the world.)

प्रश्न 7

उदाहरणानुसारेण पदनिर्माणं कुरुत (उदाहरण अनुसार पदों का निर्माण कीजिए):

मूलशब्दा: वचनम् पदानि

यथा- शिल्पिन् प्रथमा -एकवचने शिल्पी

धनिन् द्वितीया -एकवचने

ज्ञानिन् तृतीया -एकवचने

महत्त्वाकांक्षिन् द्वितीया -बहुवचने

बहुभाषिन् तृतीया -बहुवचने

दण्डिन् द्वितीया -बहुवचने

Solution:

दिए गए मूल शब्दों से निर्दिष्ट वचन और विभक्ति के अनुसार पद निर्माण इस प्रकार है:

मूलशब्द: वचनम् विभक्ति: पदम्
धनिन् एकवचने द्वितीया धनिनम्
ज्ञानिन् एकवचने तृतीया ज्ञानिना
महत्त्वाकांक्षिन् बहुवचने द्वितीया महत्त्वाकांक्षिणः
बहुभाषिन् बहुवचने तृतीया बहुभाषिभिः
दण्डिन् बहुवचने द्वितीया दण्डिनः

आतारक्त-अभ्यासः - प्रश्न 1

नाट्यांश पठत अधोदत्तान् प्रश्नान् च उत्तरत (नाट्यांश पढ़िए और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए):

वैद्य: अरे, इयं प्रेतेन आविष्टा।

गणिका - शास्त्रं जानासि?

वैद्य: - अथ किम्?

गणिका ब्रूहि वैद्यशास्त्रम्।

वैद्य: - शृणोतु भवती। वातिकाः पैत्तिकाश्चैव श्लैष्मिकाश्च महाविषाः। त्रीणि सर्पा भवन्त्येते चतुर्थो नाधिगम्यते।।

I. एकपदेन उत्तरत। (एक पद में उत्तर दें)

1. कः गुलिका: आनयति?

2. चेटी किम् आनयति?

3. का प्रेतेन आविष्टा:?

4. महाविषा: कति सन्ति?

II. पूर्णवाक्येन उत्तरत। (पूर्ण वाक्य में उत्तर दें)

1. ते महाविषा: के सन्ति?

2. गणिका कथं संन्यासिस्वरेण वदित?

III. भाषिककार्यम्

(क) 'इयं प्रेतेन आविष्टाः' इति वाक्ये-

  1. 'इयं' स्थाने संज्ञापंद प्रयुज्य वाक्यं पुन: लिखत।
  2. प्रेतेन अत्र किं विभक्ति वचनम्?
  3. आविष्टा अत्र कः धातुः कः च उपसर्गः?

(ख) भिन्नप्रकृतिकं पदं चिनुत- प्रेतेन, सर्पेण, स्वरेण, मया

(ग) सन्धिविच्छेदं कुरुत

  1. पैत्तिकाश्चैव = + च +
  2. नाधिगभ्यते =

(घ) पदपरिचयं यच्छत

मूलशब्द: लिंगम् विभक्ति: वचनम्

  1. सन्यासिन:
Solution:

नाट्यांश पर आधारित प्रश्नों के उत्तर इस प्रकार हैं:

I. एकपदेन उत्तरत।

  1. वैद्यः (यह अनुमानित है, क्योंकि वैद्य ही औषधियों की बात कर रहा है)
  2. गुलिकाः (यह अनुमानित है, क्योंकि वैद्य गुलिका लाने को कहता है)
  3. गणिका (वाक्य के अनुसार 'इयं' गणिका के लिए प्रयुक्त हुआ है)
  4. त्रीणि (तीन)

II. पूर्णवाक्येन उत्तरत।

  1. ते महाविषाः वातिकाः, पैत्तिकाः, श्लैष्मिकाः च सन्ति। (वे महाविष वातज, पित्तज और कफज हैं।)
  2. यह प्रश्न नाट्यांश में दिए गए पाठ से स्पष्ट नहीं है कि गणिका ने संन्यासी के स्वर में कब बात की। नाट्यांश में वैद्य के संवाद से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि गणिका शास्त्र का ज्ञान रखती है।

III. भाषिककार्यम्

(क) 'इयं प्रेतेन आविष्टाः' इति वाक्ये-

  1. 'इयं' के स्थान पर संज्ञा पद 'गणिका' का प्रयोग करके वाक्य: गणिका प्रेतेन आविष्टा।
  2. 'प्रेतेन' में तृतीय विभक्ति, एकवचन है।
  3. 'आविष्टा' में 'आप्' धातु है और 'आङ्' उपसर्ग है।

(ख) भिन्नप्रकृतिकं पदं चिनुत-

भिन्नप्रकृतिक पद है: मया। (क्योंकि 'प्रेतेन', 'सर्पेण', 'स्वरेण' में तृतीय विभक्ति एकवचन है, जबकि 'मया' उत्तम पुरुष सर्वनाम 'अहम्' का तृतीय विभक्ति एकवचन रूप है।)

(ग) सन्धिविच्छेदं कुरुत

  1. पैत्तिकाश्चैव = पैत्तिकाः + च + एव
  2. नाधिगभ्यते = न + अधिगम्यते

(घ) पदपरिचयं यच्छत

मूलशब्द: लिंगम् विभक्ति: वचनम्

  1. सन्यासिन: (यह शब्द 'सन्यासिन' का षष्ठी या पंचमी विभक्ति एकवचन रूप हो सकता है, या 'सन्यासिनः' बहुवचन भी हो सकता है। यहाँ दिए गए संदर्भ के अनुसार, यदि यह षष्ठी एकवचन है तो 'सन्यासिनः' होगा, यदि पंचमी एकवचन है तो 'सन्यासिनः' होगा। यदि यह षष्ठी बहुवचन है तो 'सन्यासिनः' होगा।)

Common mistakes

  • Incorrectly splitting sandhi compounds.
  • Misidentifying or misusing avyaya words.
  • Errors in determining the correct case and number for word formation.
  • Confusing the speaker or listener in dialogues.
  • Incorrectly recalling or applying antonyms.

Revision tips

  • Read the play's dialogue carefully to understand the context before answering questions.
  • Practice sandhi viccheda exercises repeatedly to master word splitting.
  • Create flashcards for avyaya words and their meanings for quick recall.
  • Focus on the grammatical exercises (word formation, case, number) as they are crucial for language proficiency.
  • Review the 'who says what to whom' section to solidify understanding of character interactions.

Practice MCQs

Q1. गणिकायाः नाम किम् आसीत्?

Q2. परिव्राजकस्य शिष्यः कः आसीत्?

Q3. निम्नलिखित में से कौन सा अव्यय पद है?

Q4. 'गुणाः' शब्द का विपरीतार्थक शब्द क्या है?

Q5. वाक्य 'अहं श्वः विद्यालयं गमिष्यामि।' में अव्यय पद कौन सा है?

Q6. नाट्यांश के अनुसार, 'इयं प्रेतेन आविष्टा।' यह वाक्य कौन कहता है?

Frequently asked questions

यह समाधान किस कक्षा और विषय के लिए है?

यह समाधान CBSE बोर्ड की कक्षा 8 के संस्कृत विषय के लिए है, विशेष रूप से 'भगवदज्जुकम्र' नामक अध्याय पर केंद्रित है।

'भगवदज्जुकम्र' अध्याय के मुख्य विषय क्या हैं?

यह अध्याय एक संस्कृत नाटक है जो जीवन, मृत्यु और आत्मा के स्थानांतरण जैसे विषयों को एक अनोखी कहानी के माध्यम से प्रस्तुत करता है। समाधान नाटक की समझ और व्याकरणिक अभ्यासों पर केंद्रित हैं।

इन समाधानों का उपयोग कैसे किया जा सकता है?

इन समाधानों का उपयोग अध्याय के प्रश्नों के उत्तर समझने, व्याकरणिक अवधारणाओं (जैसे संधि विच्छेद, अव्यय पद, शब्द निर्माण) का अभ्यास करने और परीक्षा की तैयारी के लिए किया जा सकता है।

क्या इन समाधानों में व्याकरणिक अभ्यासों को शामिल किया गया है?

हाँ, इन समाधानों में संधि विच्छेद, अव्यय पदों की पहचान, शब्द निर्माण, और विभिन्न विभक्ति व वचन के प्रयोग जैसे महत्वपूर्ण व्याकरणिक अभ्यासों को विस्तार से समझाया गया है।

क्या प्रश्न के शब्दों को बदला गया है?

नहीं, सभी प्रश्न मूल स्रोत के अनुसार ही रखे गए हैं, केवल उनकी स्पष्टता के लिए भाषा को थोड़ा विस्तृत किया गया है। समाधानों को पूरी तरह से नया लिखा गया है।

क्या समाधानों में गणितीय सूत्र या समीकरण शामिल हैं?

यह अध्याय संस्कृत साहित्य और व्याकरण पर आधारित है, इसलिए इसमें गणितीय सूत्र या समीकरण शामिल नहीं हैं। सभी समाधान पाठ्य सामग्री और व्याकरणिक नियमों पर आधारित हैं।

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