CBSE Class 5 Hindi NCERT Solutions: Chapter 2 - फसलों के त्योहार

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This section provides comprehensive NCERT Solutions for Class 5 Hindi, Chapter 2: 'Faslon ke Tyohar' (Festivals of Crops). It delves into the cultural significance of harvest festivals, exploring regional variations and their connection to weather and seasons. The solutions explain the importance of festivals like Makar Sankranti, discuss the concept of diversity in India through various examples like languages, clothing, new year celebrations, and food. It also touches upon the role of farmers and the journey of agricultural produce, highlighting the challenges faced by farmers. These solutions are designed to help students understand the rich cultural tapestry of India and the importance of agriculture, aiding in their exam preparation by clarifying key concepts and providing detailed explanations.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 5
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
ChapterChapter 2

Chapter summary

Chapter 2, 'Faslon ke Tyohar', focuses on the cultural significance of harvest festivals in India. The NCERT Solutions cover topics such as understanding the context of festivals like Makar Sankranti, appreciating the diversity in languages, clothing, food, and new year celebrations across India, and recognizing the vital role of farmers. The solutions aim to provide clear explanations for each question, enhancing students' understanding of cultural diversity and agricultural practices.

Learning outcomes

  • Understand the significance of harvest festivals in India.
  • Identify and appreciate the diversity in Indian culture (language, clothing, food, new year).
  • Explain the connection between festivals and seasons/weather.
  • Recognize the importance of farmers and their contribution to society.
  • Express personal preferences and daily routines related to festivals.

Topics covered

Paper topics

  • फसलों के त्योहार (Harvest Festivals)
  • मौसम का अंदाज़ (Weather Estimation)
  • मकर संक्रांति (Makar Sankranti)
  • विविधता में एकता (Unity in Diversity)
  • भारतीय भाषाएँ (Indian Languages)
  • भारतीय पहनावे (Indian Clothing)
  • नए वर्ष का स्वागत (New Year Celebrations)
  • भारतीय भोजन (Indian Cuisine)
  • तिल का महत्व (Importance of Sesame Seeds)
  • किसानों की भूमिका (Role of Farmers)
  • खेती और अन्न (Farming and Food Grains)
  • सांस्कृतिक विविधता (Cultural Diversity)

Important topics

  • फसलों के त्योहारों का महत्व
  • भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता
  • किसानों का जीवन और संघर्ष
  • त्योहारों का मौसम और प्रकृति से संबंध
  • तिल और उससे बनने वाले उत्पाद

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

"खिचड़ी में अइसन जाड़ा हम पहिले कब्बो ना देखनीं ।" यहाँ 'खिचड़ी' से क्या मतलब निकाल रही हो?
Solution: इस वाक्य में 'खिचड़ी' शब्द का प्रयोग मकर संक्रांति के त्योहार के संदर्भ में किया गया है। मकर संक्रांति एक ऐसा त्योहार है जो सर्दियों के मौसम में मनाया जाता है, और इस वाक्य के माध्यम से वक्ता उस विशेष दिन पर पड़ रही अत्यधिक ठंड का वर्णन कर रहा है, जो उसने पहले कभी अनुभव नहीं की थी।

प्रश्न 2

क्या कभी ऐसा हो सकता है कि सूरज बिल्कुल ही न निकले? अगर ऐसा हो तो चारों तरफ अंधेरा छा जाएगा। ठंड बढ़ जाएगी। लोगों के लिए काम करना मुश्किल हो जाएगा। जीवन की रफ्तार थम-सी जाएगी। अपने साथियों के साथ बातचीत करके लिखो।
Solution: यह एक काल्पनिक स्थिति पर आधारित प्रश्न है। सामान्य परिस्थितियों में, पृथ्वी के घूमने के कारण हर दिन सूरज निकलता है। लेकिन, यदि किसी कारणवश सूरज बिल्कुल न निकले, तो जैसा कि प्रश्न में बताया गया है, चारों ओर गहरा अंधेरा छा जाएगा। तापमान बहुत गिर जाएगा, जिससे अत्यधिक ठंड पड़ेगी। अंधेरे और ठंड के कारण लोगों को अपने दैनिक कार्य करने में बहुत कठिनाई होगी, जैसे कि खेतों में काम करना, स्कूल जाना या अन्य कोई भी बाहरी गतिविधि। बिजली न होने पर जीवन पूरी तरह से ठप पड़ जाएगा और जीवन की गति रुक जाएगी। यह स्थिति जीवन के लिए अत्यंत विनाशकारी होगी।

प्रश्न 3

बाहर देखने से समय का अंदा क्यों नहीं हो रहा था? जिनके पास घड़ी नहीं होती वे समय का अनुमान किस तरह से लगाते हैं?
Solution: बाहर देखने से समय का अंदाज़ा इसलिए नहीं हो रहा था क्योंकि उस समय सूरज नहीं निकला था। बादल छाए होने या कोहरे के कारण सूरज की स्थिति स्पष्ट नहीं दिख रही थी, जिससे दिन के समय का अनुमान लगाना मुश्किल हो रहा था।

जिन लोगों के पास घड़ी नहीं होती है, वे समय का अनुमान मुख्य रूप से निम्नलिखित तरीकों से लगाते हैं:

  • सूरज की स्थिति: सुबह सूरज के उगने, दोपहर में उसकी तेज़ी और शाम को उसके ढलने के आधार पर वे समय का अंदाज़ा लगाते हैं।
  • आसमान का रंग: सुबह, दोपहर और शाम को आसमान के रंग में होने वाले बदलावों को देखकर भी समय का पता लगाया जाता है।
  • पशु-पक्षियों की गतिविधियाँ: कुछ लोग पशु-पक्षियों की दिनचर्या को देखकर भी समय का अनुमान लगाते हैं, जैसे सुबह पक्षियों का चहचहाना या शाम को उनका घोंसलों में लौटना।
  • अन्य प्राकृतिक संकेत: हवा की दिशा या तापमान में होने वाले बदलावों से भी कभी-कभी समय का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

प्रश्न (तुम्हारी जुबान)

(क) "आज ई लोग के उठे के नईखे का?" (ख) "जा भाग के देख केरा के पत्ता आइल की ना?"

इन वाक्यों को अपने घर की भाषा में लिखो।

Solution:

ये वाक्य भोजपुरी या मगही जैसी किसी स्थानीय बोली में लिखे गए हैं। इन्हें मानक हिंदी में इस प्रकार लिखा जा सकता है:

  • (क) आज ये लोग उठेंगे नहीं क्या?
  • (ख) दौड़ कर जाओ और देखो कि केले का पत्ता आया है या नहीं।

यह अभ्यास छात्रों को अपनी क्षेत्रीय भाषाओं और मानक हिंदी के बीच संबंध को समझने और अपनी भाषा में व्यक्त करने की क्षमता विकसित करने में मदद करता है।

प्रश्न 1 (भारत तेरे रंग अनेक)

विविधता हमारे देश की पहचान है। फसलों का त्योहार हमारे देश के विविध रंग-रूपों का एक उदाहरण है। नीचे विविधता के कुछ और उदाहरण दिए गए हैं। पाँच-पाँच बच्चों का समूह एक-एक उदाहरण लें और उस पर जानकारी इकट्ठी करे। (जानकारी चित्र, फोटोग्राफ, कहानी, कविता, सूचनापरक सामग्री के रूप में हो सकती है।) हर समूह इस जानकारी को कक्षा में प्रस्तुत करे।

भाषा

कपड़े

  • नया वर्ष

भोजन

  • लोक कला
Solution: यह प्रश्न छात्रों को भारत की सांस्कृतिक विविधता को समझने और उस पर शोध करने के लिए प्रोत्साहित करता है। प्रत्येक समूह को दिए गए विषयों (भाषा, कपड़े, नया वर्ष, भोजन, लोक कला) में से किसी एक पर जानकारी एकत्र करनी है और उसे कक्षा में प्रस्तुत करना है।

यहाँ कुछ उदाहरण दिए गए हैं कि छात्र कैसे जानकारी एकत्र कर सकते हैं:

  • भाषा: भारत में बोली जाने वाली विभिन्न भाषाओं के नाम, उनकी विशेषताएँ, और वे कहाँ बोली जाती हैं, इस पर जानकारी।
  • कपड़े: विभिन्न राज्यों के पारंपरिक परिधानों के चित्र, उनके नाम और वे कब पहने जाते हैं, इस पर जानकारी।
  • नया वर्ष: भारत में विभिन्न संस्कृतियों द्वारा मनाए जाने वाले नए वर्ष के त्योहारों (जैसे उगादी, वैसाखी, गुड़ी पड़वा, नव वर्ष) और उनकी विधियों पर जानकारी।
  • भोजन: भारत के विभिन्न क्षेत्रों के प्रसिद्ध व्यंजनों के चित्र, उनकी सामग्री और बनाने की विधि पर जानकारी।
  • लोक कला: मधुबनी, वारली, गोंड जैसी विभिन्न भारतीय लोक कलाओं के उदाहरण, उनकी विशेषताएँ और बनाने की तकनीक पर जानकारी।

यह गतिविधि छात्रों में टीम वर्क, शोध कौशल और प्रस्तुति क्षमता को बढ़ावा देती है।

प्रश्न 1 (विविधता के उदाहरणों पर जानकारी)

(यह प्रश्न पिछले प्रश्न का ही भाग है, जिसमें विविधता के उदाहरणों पर जानकारी प्रस्तुत की जानी है।)
Solution: यहाँ विविधता के कुछ उदाहरणों पर संक्षिप्त जानकारी दी गई है, जिसे छात्र अपनी प्रस्तुति के लिए आधार बना सकते हैं:

भाषा: भारत एक बहुभाषी देश है जहाँ सैकड़ों भाषाएँ और बोलियाँ बोली जाती हैं। हिंदी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है, लेकिन कन्नड़, तेलुगू, तमिल, मलयालम, मराठी, गुजराती, बंगाली, पंजाबी जैसी कई अन्य प्रमुख भाषाएँ भी हैं, जिनकी अपनी समृद्ध साहित्यिक परंपराएँ हैं।

कपड़े: भारत के विभिन्न क्षेत्रों में लोगों के पहनावे में भारी विविधता है। दक्षिण भारत में जहाँ लुंगी और साड़ी आम है, वहीं उत्तर भारत में सलवार-कमीज, कुर्ता-पायजामा, घाघरा-चोली लोकप्रिय हैं। हर क्षेत्र की अपनी पारंपरिक वेशभूषा होती है जो वहाँ की संस्कृति को दर्शाती है।

नया वर्ष: भारत में नया वर्ष अलग-अलग समय पर और अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। हिंदी कैलेंडर के अनुसार होली के आसपास नया साल शुरू होता है, जबकि चैत्र माह में गुड़ी पड़वा और उगादी मनाया जाता है। पंजाब में वैसाखी और दक्षिण भारत में पोंगल जैसे त्योहार भी नए साल के आगमन का प्रतीक हैं।

भोजन: भारत का भोजन भी अत्यंत विविध है। उत्तर भारत में रोटी, चावल, दाल, सब्जियाँ प्रमुख हैं, जबकि दक्षिण भारत में इडली, डोसा, सांभर, चावल लोकप्रिय हैं। पश्चिम बंगाल में मछली और चावल मुख्य भोजन है, और गुजरात में ढोकला, थेपला जैसे व्यंजन पसंद किए जाते हैं।

लोक कला: भारत में विभिन्न प्रकार की लोक कलाएँ प्रचलित हैं, जैसे बिहार की मधुबनी पेंटिंग, महाराष्ट्र की वारली कला, मध्य प्रदेश की गोंड कला, राजस्थान की फड़ पेंटिंग आदि। ये कलाएँ स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और विश्वासों को दर्शाती हैं।

प्रश्न 2

तुम्हें कौन-सा त्योहार सबसे अच्छा लगता है और क्यों? इस दिन तुम्हारी दिनचर्या क्या रहती है?
Solution: यह एक व्यक्तिगत प्रश्न है जिसका उत्तर छात्र अपनी पसंद के अनुसार देंगे। यहाँ एक उदाहरण दिया गया है:

मुझे होली का त्योहार सबसे अच्छा लगता है। इसका कारण यह है कि इस दिन सभी लोग आपसी भेदभाव भुलाकर एक-दूसरे को रंग लगाते हैं और मिलकर खुशियाँ मनाते हैं। यह रंगों का त्योहार है जो जीवन में उत्साह और उमंग भर देता है।

होली के दिन मेरी दिनचर्या इस प्रकार रहती है:

  • सुबह जल्दी उठकर नए कपड़े पहनता हूँ।
  • अपने दोस्तों और परिवार के साथ मिलकर पिचकारियों में रंग भरता हूँ और एक-दूसरे पर रंग और गुलाल डालता हूँ।
  • तरह-तरह के पकवानों का आनंद लेता हूँ, जैसे गुजिया, मालपुआ और ठंडाई।
  • शाम को नहा-धोकर, नए कपड़े पहनकर बड़ों का आशीर्वाद लेता हूँ और उनसे मिलता हूँ।

यह त्योहार मुझे बहुत खुशी देता है और मुझे अपने दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिलता है।

प्रश्न (अन्न के बारे में)

(क) फ़सल के त्योहार पर 'तिल' का बहुत महत्व होता है। तिल का किन-किन रूपों में इस्तेमाल किया जाता है? पता करो। (ख) तुम जानती हो कि तिल से तेल बनता है? और किन चीज़ों से तेल बनता है और कैसे? हो सके तो तेल की दुकान में जाकर पूछो।
Solution:

(क) फसलों के त्योहारों, विशेषकर मकर संक्रांति पर तिल का बहुत महत्व होता है। तिल का उपयोग कई रूपों में किया जाता है:

  • मिठाइयाँ: तिल से कई तरह की स्वादिष्ट मिठाइयाँ बनाई जाती हैं, जैसे तिलकुट (तिल और गुड़ का मिश्रण), रेवड़ी (तिल और गुड़ से बनी गोल मिठाई), और गज्जक (तिल, गुड़ और मूंगफली से बनी पट्टी)। ये मिठाइयाँ सर्दियों के मौसम में विशेष रूप से खाई जाती हैं।
  • तेल: तिल का उपयोग तिल का तेल निकालने के लिए किया जाता है, जो खाने के काम आता है और इसके कई स्वास्थ्य लाभ भी हैं।
  • धार्मिक कार्य: कुछ धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा-पाठ में भी तिल का प्रयोग किया जाता है।

(ख) हाँ, तिल से तेल बनता है। तिल के दानों को कोल्हू या मशीन में डालकर दबाया जाता है, जिससे तेल निकलता है।

तिल के अलावा, कई अन्य चीज़ों से भी तेल बनाया जाता है, जैसे:

  • सरसों/राई: इससे सरसों का तेल बनता है, जो उत्तर भारत में खाना पकाने के लिए बहुत लोकप्रिय है।
  • मूंगफली: मूंगफली से मूंगफली का तेल निकाला जाता है, जिसका उपयोग तलने और पकाने में होता है।
  • सोयाबीन: सोयाबीन से सोयाबीन का तेल बनता है, जो आजकल काफी इस्तेमाल होता है।
  • सूरजमुखी: सूरजमुखी के बीजों से सूरजमुखी का तेल बनता है, जो स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है।
  • नारियल: नारियल से नारियल का तेल निकाला जाता है, जिसका उपयोग खाने और बालों के लिए किया जाता है।
  • जैतून: जैतून (Olive) से जैतून का तेल बनता है, जो सलाद और अन्य व्यंजनों में इस्तेमाल होता है।

तेल निकालने की प्रक्रिया में बीजों को पीसकर या दबाकर उनका तेल अलग किया जाता है।

प्रश्न (किसान और चीजों का सफर)

किसान और खेती हममें से बहुत से लोगों की जानी-पहचानी दुनिया का हिस्सा नहीं है। विशेष रूप से शहर के ज्यादातर लोगों को यह अहँसास नहीं है कि हमारी जिंदगी किस हद तक इनसे जुड़ी हुई है। देश के कई हिस्सों में आज किसानों को जिंदा रहने के लिए बहुत मेहनत और संघर्ष करना पड़ रहा है। अगर यह जानने की कोशिश करें कि हम दिनभर जो चीजें खाते हैं वे कहाँ से आती हैं तो किसानों की हमारी जिंदगी में भूमिका को हम समझ पाएँगे। आलू की पकौड़ी, बर्फी और आइसक्रीम- इन तीन चीज़ों के बारे में नीचे दिए बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए जानकारी इकट्ठी करो और 'मेरी कहानी' के रूप में उसे लिखो।
Solution: यह प्रश्न छात्रों को किसानों के महत्व और उनके संघर्षों से अवगत कराने के लिए है। यह उन्हें यह सोचने के लिए प्रेरित करता है कि हम जो भोजन खाते हैं, वह कहाँ से आता है और इसमें किसानों की क्या भूमिका है। छात्रों को आलू की पकौड़ी, बर्फी और आइसक्रीम के बारे में जानकारी एकत्र करके 'मेरी कहानी' के रूप में लिखना है।

यहाँ एक उदाहरण दिया गया है कि छात्र कैसे जानकारी एकत्र कर सकते हैं और उसे कहानी के रूप में लिख सकते हैं:

आलू की पकौड़ी की कहानी:

मेरी कहानी एक आलू की पकौड़ी की है। मेरा जन्म एक खेत में हुआ था, जहाँ एक किसान ने मुझे बड़े प्यार से बोया और मेरी देखभाल की। किसान ने मुझे पानी दिया, खाद डाली और खरपतवार हटाए। कड़ी धूप और बारिश सहते हुए मैं बड़ा हुआ। जब मैं पूरी तरह पक गया, तो किसान ने मुझे और मेरे साथियों को जमीन से निकाला। फिर मुझे मंडी ले जाया गया, जहाँ से एक दुकानदार ने मुझे खरीदा। दुकानदार ने मुझे एक ठेले वाले को बेचा, जो मुझे शहर में लाया। उसने मुझे छीलकर, काटकर, बेसन में लपेटकर गरमागरम तेल में तला। अब मैं एक स्वादिष्ट आलू की पकौड़ी हूँ, जिसे बच्चे और बड़े चाव से खाते हैं। लेकिन इस सफर में उस किसान की मेहनत और संघर्ष शामिल है, जिसने मुझे उगाया।

बर्फी की कहानी:

मेरी कहानी एक बर्फी की है। मैं दूध से बना हूँ। एक किसान के पास एक गाय थी, जिसने मुझे दूध दिया। उस दूध को एक हलवाई ने खरीदा। हलवाई ने उस दूध को उबाला, उसमें चीनी और मावा मिलाया और फिर उसे जमाकर बर्फी का रूप दिया। मेरी यात्रा एक किसान के खेत से शुरू हुई, जहाँ गाय चरती थी, और हलवाई की दुकान पर खत्म हुई, जहाँ मैं खाने के लिए तैयार हुआ।

आइसक्रीम की कहानी:

मेरी कहानी एक आइसक्रीम की है। मुझे बनाने के लिए दूध, चीनी और फलों का इस्तेमाल होता है। दूध एक किसान की गाय से आता है। चीनी गन्ने से बनती है, जिसे किसान उगाते हैं। फल भी खेतों में उगते हैं। इन सबको मिलाकर एक फैक्ट्री में मुझे बनाया जाता है। मेरा सफर भी खेतों से शुरू होकर फैक्ट्री तक आता है, और फिर आपकी प्लेट तक पहुँचता है।

इन कहानियों के माध्यम से छात्र यह समझ सकते हैं कि हमारे भोजन का हर कौर किसानों की मेहनत से जुड़ा है और हमें उनका सम्मान करना चाहिए।

Common mistakes

  • Confusing the literal meaning of 'Khichdi' with the festival.
  • Not fully explaining the reasons for not being able to tell time by looking outside.
  • Providing very brief answers without elaboration.
  • Failing to connect the farmer's struggle to everyday life.

Revision tips

  • Focus on understanding the cultural context of each festival mentioned.
  • Pay attention to the examples of diversity provided for language, clothes, and food.
  • Reflect on the farmer's role and the journey of food from farm to table.
  • Practice rewriting sentences in your own regional language as demonstrated in the exercise.

Practice MCQs

Q1. पाठ 'फसलों के त्योहार' में 'खिचड़ी' शब्द का क्या अर्थ है?

Q2. सूरज न निकलने पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

Q3. घड़ी न होने पर समय का अनुमान कैसे लगाया जा सकता है?

Q4. भारत की विविधता का उदाहरण क्या नहीं है?

Q5. तिल का उपयोग किन चीज़ों में होता है?

Frequently asked questions

यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?

यह NCERT समाधान CBSE बोर्ड की कक्षा 5 के हिंदी विषय के लिए हैं, विशेष रूप से अध्याय 2: 'फसलों के त्योहार' पर केंद्रित हैं।

अध्याय 2 'फसलों के त्योहार' में मुख्य रूप से किन विषयों को शामिल किया गया है?

इस अध्याय में फसलों से जुड़े त्योहारों, मौसम के अंदाज़, भारत की भाषाई, पहनावे, भोजन और नए वर्ष की विविधता, और किसानों के जीवन व खेती के महत्व जैसे विषयों को शामिल किया गया है।

क्या इन समाधानों में प्रश्नों के उत्तर विस्तृत रूप से दिए गए हैं?

हाँ, प्रत्येक प्रश्न का उत्तर स्पष्ट, विस्तृत और समझने योग्य भाषा में दिया गया है, जिससे छात्रों को विषय की गहरी समझ विकसित करने में मदद मिले।

क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी में सहायक हैं?

हाँ, ये समाधान छात्रों को अध्याय के महत्वपूर्ण बिंदुओं को समझने, विभिन्न सांस्कृतिक पहलुओं को जानने और किसानों की भूमिका को पहचानने में मदद करते हैं, जो परीक्षा की तैयारी के लिए आवश्यक हैं।

'खिचड़ी' शब्द का प्रयोग किस त्योहार के संदर्भ में किया गया है?

पाठ में 'खिचड़ी' शब्द का प्रयोग मकर संक्रांति त्योहार के संदर्भ में किया गया है, जो फसलों के मौसम से जुड़ा एक महत्वपूर्ण त्योहार है।

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