कक्षा 5 पर्यावरण अध्ययन: पाठ 18 जाएँ तो जाएँ कहाँ - NCERT समाधान

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यह खंड कक्षा 5 के पर्यावरण अध्ययन के लिए NCERT समाधान प्रस्तुत करता है, विशेष रूप से पाठ 18 'जाएँ तो जाएँ कहाँ' पर केंद्रित है। यह पाठ विस्थापन के मानवीय पहलुओं, विशेष रूप से बड़े बांध परियोजनाओं के कारण होने वाले विस्थापन की पड़ताल करता है। छात्र जात्रा की कहानी के माध्यम से सीखते हैं कि कैसे एक व्यक्ति और उसके समुदाय को अपनी जड़ों, संस्कृति और आजीविका को छोड़ना पड़ता है। समाधान बच्चों को शहरी जीवन की वास्तविकताओं, जैसे भीड़भाड़, काम की तलाश और शिक्षा की चुनौतियों से भी अवगत कराते हैं। यह पाठ बच्चों को अपने परिवेश से जुड़ने, विभिन्न आवाजों को पहचानने और अपने बड़ों से सीखने के महत्व पर भी प्रकाश डालता है। ये समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ हासिल करने, महत्वपूर्ण अवधारणाओं को स्पष्ट करने और परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। यह खंड छात्रों को पाठ की मुख्य अवधारणाओं को समझने में मदद करता है, जिसमें शामिल हैं: * **विस्थापन और उसका प्रभाव:** बड़े विकास परियोजनाओं, जैसे कि बांध निर्माण के कारण समुदायों को अपना घर और जमीन छोड़ने के लिए मजबूर होने के कारण होने वाली कठिनाइयों को समझना। * **शहरी जीवन की वास्तविकताएं:** बड़े शहरों में जीवन की चुनौतियों का पता लगाना, जिसमें भीड़भाड़, आजीविका की तलाश और शिक्षा तक पहुंच शामिल है। * **संस्कृति और पहचान:** यह समझना कि कैसे एक व्यक्ति की जड़ें, परंपराएं और समुदाय की भावना उसकी पहचान को आकार देती है। * **सीखना और अनुकूलन:** विभिन्न वातावरणों में नई चीजें सीखने और नई परिस्थितियों के अनुकूल होने के महत्व पर जोर देना। ये समाधान छात्रों को पाठ की सामग्री को प्रभावी ढंग से समझने और याद रखने में सहायता करते हैं, जिससे वे परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 5
SubjectEnvironmental Studies
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter18 जाएँ तो जाएँ कहाँ

Chapter summary

कक्षा 5 के पर्यावरण अध्ययन के पाठ 18 'जाएँ तो जाएँ कहाँ' के लिए NCERT समाधान, विस्थापन के विषय पर केंद्रित हैं। यह पाठ जात्रा की कहानी के माध्यम से बताता है कि कैसे बड़े बांधों के निर्माण के कारण लोगों को अपना गाँव और जमीन छोड़नी पड़ती है। समाधान बच्चों को शहरी जीवन की चुनौतियों, जैसे भीड़भाड़ और काम की तलाश, के बारे में भी बताते हैं। यह पाठ बच्चों को अपने आसपास की दुनिया से जुड़ने, विभिन्न ध्वनियों को पहचानने और अपने बड़ों से सीखने के महत्व पर भी प्रकाश डालता है।

Learning outcomes

  • विस्थापन के कारणों और परिणामों को समझना।
  • बड़े शहरों में जीवन की चुनौतियों का विश्लेषण करना।
  • पारंपरिक जीवन शैली और आधुनिक शहरी जीवन के बीच अंतर की पहचान करना।
  • अपने समुदाय और जड़ों के महत्व को समझना।
  • विभिन्न ध्वनियों और पक्षियों की आवाजों को पहचानना।
  • अपने बड़ों से सीखने के महत्व को समझना।

Topics covered

Paper topics

  • विस्थापन
  • बांध निर्माण
  • शहरी जीवन
  • ग्रामीण जीवन
  • आजीविका
  • शिक्षा
  • पारंपरिक कौशल
  • संस्कृति
  • पहचान
  • परिवार
  • पर्यावरण
  • ध्वनि

Important topics

  • विस्थापन के कारण और प्रभाव
  • शहरी बनाम ग्रामीण जीवन
  • आजीविका के साधन
  • पारंपरिक ज्ञान का महत्व
  • सांस्कृतिक पहचान

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Questions and Solutions

सोचो और बताओ

जाऱ्या भीड़ में रहकर भी अकेला महसूस कर रहा था। क्या तुम्हारे साथ भी कभी ऐसा हुआ है?
Solution: हाँ, कभी-कभी ऐसा महसूस होता है, खासकर जब मैं किसी नई जगह पर होता हूँ या जब मैं किसी ऐसी भीड़ में होता हूँ जहाँ मैं किसी को नहीं जानता। उदाहरण के लिए, स्कूल की सभा में या किसी बड़े मेले में, जहाँ बहुत सारे लोग होते हैं, लेकिन कोई अपना परिचित नहीं होता, तब भी अकेलापन महसूस हो सकता है।
अपनी जगह छोड़कर दूर नई जगह जाकर रहना कैसा लगता होगा?
Solution: अपनी जगह छोड़कर दूर नई जगह जाकर रहना शुरू में थोड़ा मुश्किल और अकेलापन भरा हो सकता है। नई जगह के माहौल, लोगों और जीवनशैली के साथ तालमेल बिठाने में समय लगता है। हालाँकि, यह एक नया अनुभव भी हो सकता है, जिससे नई चीजें सीखने और नए दोस्त बनाने का मौका मिलता है। धीरे-धीरे नई जगह भी अपनी लगने लगती है।
जाऱ्या जैसे परिवार बड़े शहरों में क्यों आते होंगे?
Solution: जाऱ्या जैसे परिवार अक्सर बड़े शहरों में बेहतर अवसरों की तलाश में आते हैं। इन अवसरों में अच्छी नौकरी, बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएँ और जीवन जीने के लिए अधिक साधन शामिल हो सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर इन सुविधाओं की कमी होती है, इसलिए लोग बेहतर भविष्य की उम्मीद में शहरों की ओर पलायन करते हैं।
क्या तुमने ऐसे बच्चों को देखा है, जो काम पर भी जाते हैं?
Solution: हाँ, मैंने ऐसे कई बच्चों को देखा है जो अपनी उम्र के अन्य बच्चों की तरह स्कूल जाने के बजाय काम करते हैं। वे अक्सर सड़कों पर सामान बेचते हुए, ढाबों में काम करते हुए, या घरों में छोटे-मोटे काम करते हुए दिखाई देते हैं।
ये बच्चे किस तरह के काम करते हैं? क्यों करने पड़ते होंगे?
Solution: ये बच्चे अक्सर छोटे-मोटे काम करते हैं जैसे कि दुकानों में मदद करना, गाड़ियाँ साफ़ करना, सड़कों पर फूल या अन्य सामान बेचना, या घरों में घरेलू काम करना। उन्हें यह काम गरीबी के कारण करना पड़ता है। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी होती है कि वे बच्चों की शिक्षा का खर्च नहीं उठा सकते, और बच्चों को भी परिवार की आय में योगदान देना पड़ता है ताकि वे अपना और अपने परिवार का पेट पाल सकें।

एन.सी.ई.आर.टी. पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 167)

बताओ

खेड़ी गाँव में बच्चे क्या-क्या सीखते थे?
Solution: खेड़ी गाँव में बच्चे अपने परिवेश और परंपराओं से जुड़ी कई चीजें सीखते थे। वे मछली पकड़ना सीखते थे, जो उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था। वे विभिन्न पक्षियों की आवाजों को पहचानना और उनकी नकल करना सीखते थे। इसके अलावा, वे ढोल बजाना, नाचना और गाना भी सीखते थे, जो उनके सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न अंग था।
तुम अपने बड़ों से क्या-क्या सीखते हो?
Solution: मैं अपने बड़ों से बहुत कुछ सीखता हूँ। वे मुझे जीवन के महत्वपूर्ण सबक सिखाते हैं, जैसे कि बड़ों का आदर करना, छोटों से प्यार करना और सभी के साथ सम्मान से पेश आना। वे मुझे अच्छी आदतें अपनाने और सही-गलत का फर्क समझने में मदद करते हैं। वे मुझे कहानियाँ सुनाते हैं, जिससे मुझे ज्ञान मिलता है और मेरा मनोरंजन भी होता है।
जिन चीजों का ज्ञान जात्र्या को खेड़ी में हासिल हुआ, उनमें से कितना उन्हें मुंबई में काम आया होगा?
Solution: जात्र्या को खेड़ी में हासिल हुए ज्ञान में से कुछ चीजें मुंबई में काम आ सकती थीं। जैसे, मछली पकड़ने का कौशल शायद सीधे तौर पर काम न आए, लेकिन यह उसे प्रकृति और जल स्रोतों के बारे में सिखाता है। ढोल बजाना, नाचना और गाना जैसी कलाएँ उसे मनोरंजन या सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उपयोगी हो सकती थीं। पक्षियों को पहचानना और उनकी आवाजों की नकल करना उसे शहरी जीवन की भागदौड़ में भी प्रकृति से जोड़े रख सकता था। हालाँकि, मुंबई जैसे बड़े शहर में जीवनयापन के लिए उसे नए कौशल सीखने की अधिक आवश्यकता थी।
क्या तुम रोज पक्षियों की आवाजें सुनते हो? कौन-कौन से?
Solution: हाँ, मैं लगभग हर रोज पक्षियों की आवाजें सुनता हूँ। मेरे घर के आसपास अक्सर कौवे का 'काँव-काँव', गौरैया की चहचहाहट और कभी-कभी कबूतर की गुटर गूं सुनाई देती है। सुबह के समय चिड़ियों की चहचहाहट कानों में मधुर संगीत की तरह लगती है।
क्या तुम किसी पक्षी की आवाज की नकल कर सकते?
Solution: हाँ, मैं कुछ पक्षियों की आवाजों की नकल करने की कोशिश कर सकता हूँ। जैसे, मैं कौवे की 'काँव-काँव' की आवाज की नकल कर सकता हूँ। कभी-कभी तोते की 'मिट्ठू-मिट्ठू' या कोयल की 'कुहू-कुहू' की आवाज की नकल करने का भी प्रयास करता हूँ, हालाँकि यह थोड़ा मुश्किल होता है।
तुम रोज ऐसी कौन-सी आवाजें सुनते हो, जो खेड़ी के लोग नहीं सुनते होंगे?
Solution: मैं रोज ऐसी कई आवाजें सुनता हूँ जो शायद खेड़ी जैसे शांत गाँव के लोग नहीं सुनते होंगे। इनमें सबसे प्रमुख है - गाड़ियों का शोर, जैसे कार, बस, मोटरसाइकिल का हॉर्न और इंजन की आवाज। इसके अलावा, हवाई जहाज के उड़ने की गड़गड़ाहट, लाउडस्पीकर की तेज आवाजें, और मशीनों की आवाजें भी मैं रोज सुनता हूँ, जो खेड़ी के प्राकृतिक वातावरण से बिल्कुल अलग हैं।
क्या तुमने सन्नाटा महसूस किया है? कब और कहाँ?
Solution: हाँ, मैंने सन्नाटा महसूस किया है। यह अक्सर देर रात को, जब सब सो रहे होते हैं, तब महसूस होता है। कभी-कभी सुबह बहुत जल्दी, सूरज उगने से पहले भी एक अजीब सी शांति और सन्नाटा होता है। यह सन्नाटा तब भी महसूस होता है जब मैं किसी बहुत शांत जगह पर अकेला होता हूँ, जैसे किसी जंगल में या किसी सुनसान कमरे में।

एन.सी.ई.आर.टी. पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 169)

चर्चा करो और बताओ

जात्र्या के गाँव के कई लोगों को अपना जंगल-जमीन छोड़ना मंजूर न था। ऐसा क्यों?
Solution: जात्र्या के गाँव के कई लोगों को अपना जंगल-जमीन छोड़ना मंजूर नहीं था क्योंकि वे उस जगह से भावनात्मक रूप से जुड़े हुए थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन वहीं बिताया था, वहीं खेले-कूदे और बड़े हुए थे। वह जंगल और जमीन उनकी पहचान का हिस्सा थे, उनकी आजीविका का स्रोत थे और उनकी संस्कृति से जुड़े हुए थे। उन्हें उस जगह से गहरा लगाव था और उसे छोड़ना उनके लिए बहुत मुश्किल था।
न चाहते हुए भी उन्हें अपना गाँव छोड़ना ही पड़ा। सोचो क्यों?
Solution: उन्हें न चाहते हुए भी अपना गाँव छोड़ना पड़ा क्योंकि सरकार ने नदी पर एक बड़ा बाँध बनाने का फैसला किया था। बाँध बनने के कारण नदी का पानी बहुत बड़े इलाके में फैल गया और उनका गाँव उस पानी में डूब गया। जब उनका घर और जमीन ही पानी में समा गई, तो उनके पास गाँव छोड़ने के अलावा कोई और चारा नहीं बचा था।
जात्र्या के खेड़ी के परिवार में कितने लोग थे?
Solution: जात्र्या के खेड़ी के परिवार में केवल तीन लोग थे: जात्र्या स्वयं, उसकी माँ और उसके पिता। लेकिन जात्र्या के लिए उसका पूरा गाँव ही उसके परिवार जैसा था, क्योंकि वहाँ के सभी लोग एक-दूसरे से जुड़े हुए थे और एक-दूसरे का ख्याल रखते थे।
जात्र्या जब अपने भविष्य के बारे में सोचता तो उसके मन में कौन-कौन आता?
Solution: जब जात्र्या अपने भविष्य के बारे में सोचता था, तो उसके मन में उसकी होने वाली पत्नी और उसके बच्चे आते थे। वह कल्पना करता था कि उसका अपना परिवार होगा, और वह उन्हें एक अच्छा जीवन देगा।
अपने परिवार के भविष्य के बारे में सोचते हो तो तुम्हारे मन में कौन-कौन आता है?
Solution: जब मैं अपने परिवार के भविष्य के बारे में सोचता हूँ, तो मेरे मन में मेरे माता-पिता, मेरे दादा-दादी, मेरे नाना-नानी, मेरे भाई-बहन और मेरे बच्चे (यदि भविष्य में होंगे) आते हैं। मैं चाहता हूँ कि वे सभी स्वस्थ रहें, खुश रहें और उन्हें जीवन में सभी सुख-सुविधाएँ मिलें।
क्या तुमने ऐसे लोगों के बारे में सुना है, जो अपनी पुरानी जगह से हटना पसंद नहीं करते? उनकी कुछ बातें बताओ।
Solution: हाँ, मैंने ऐसे कई लोगों के बारे में सुना है, और अपने दादा-दादी जैसे लोगों को देखा भी है, जो अपनी पुरानी जगह या गाँव से हटना पसंद नहीं करते। वे अपनी जन्मभूमि से गहरा लगाव रखते हैं। उन्हें अपने गाँव की मिट्टी, वहाँ के पेड़-पौधे, अपने पड़ोसी और अपनी पुरानी दिनचर्या बहुत प्रिय होती है। शहर की भागदौड़, शोर और प्रदूषण उन्हें पसंद नहीं आता। वे अक्सर कहते हैं कि गाँव की हवा और शांति सबसे अच्छी है, और वे वहीं रहना पसंद करते हैं जहाँ उनकी जड़ें हैं।

एन.सी.ई.आर.टी. पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 170)

क्या तुम कोई ऐसी जगह जानते हो, जहाँ स्कूल है ही नहीं?
Solution: हाँ, मैं ऐसी कुछ जगहों के बारे में जानता हूँ जहाँ स्कूल की सुविधा उपलब्ध नहीं है। खासकर कुछ दूरदराज के गाँवों या आदिवासी इलाकों में स्कूल की कमी देखी जाती है। मेरे अपने गाँव के पास के एक छोटे से टोले में भी अभी तक कोई स्कूल नहीं है, जिसके कारण वहाँ के बच्चों को पढ़ने के लिए काफी दूर जाना पड़ता है।

कल्पना करो

जहाँ बाँध बनता है, वहाँ के लोगों को क्या-क्या परेशानियाँ होती होंगी?
Solution: जहाँ बाँध बनता है, वहाँ के लोगों को कई तरह की परेशानियाँ होती हैं:
  1. घर और जमीन का डूबना: बाँध के कारण बनने वाली झील में लोगों के घर, खेत और जंगल डूब जाते हैं।
  2. विस्थापन: उन्हें अपना घर और जमीन छोड़कर कहीं और जाकर बसना पड़ता है, जो एक बहुत ही कठिन प्रक्रिया है।
  3. आजीविका का नुकसान: खेती, जंगल से कमाई या अन्य पारंपरिक व्यवसायों के खत्म हो जाने से उनकी रोजी-रोटी छिन जाती है।
  4. नई जगह पर समायोजन: नई जगह पर जाकर फिर से घर बनाना, नए सिरे से जीवन शुरू करना और वहाँ के लोगों के साथ घुलना-मिलना बहुत चुनौतीपूर्ण होता है।
  5. सांस्कृतिक और सामाजिक प्रभाव: समुदाय का टूटना, पुरानी परंपराओं और रिश्तों का कमजोर पड़ना भी एक बड़ी समस्या है।
खेड़ी गाँव और जात्र्या के सपनों के नए गाँव के चित्र अपनी कॉपी में बनाओ। अपने साथी का चित्र भी देखो। उनमें अंतर ढूँढ़ो।
Solution: खेड़ी गाँव का चित्र बनाते समय, मैंने वहाँ के कच्चे घरों, हरे-भरे खेतों, नदी और आसपास के जंगल को दर्शाया होगा। जात्र्या के सपनों के नए गाँव के चित्र में, मैंने शायद पक्के घर, अच्छी सड़कें, स्कूल, अस्पताल और खेलने के लिए मैदान जैसी आधुनिक सुविधाएँ दिखाई होंगी। अपने साथी के चित्र को देखकर, मैं यह अंतर ढूँढ सकता हूँ कि क्या उसने मेरे द्वारा सोची गई सभी सुविधाओं को शामिल किया है, या उसने कुछ अलग कल्पना की है। उदाहरण के लिए, हो सकता है किसी के चित्र में नदी या पुल न हो, जबकि दूसरे के चित्र में पक्की इमारतें न हों।

एन.सी.ई.आर.टी. पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 171)

लिखो :

क्या सिंदूरी गाँव जाऱ्या के सपनों के गाँव जैसा था?
Solution: नहीं, सिंदूरी गाँव जाऱ्या के सपनों के गाँव जैसा बिल्कुल नहीं था। जाऱ्या ने सोचा था कि नए गाँव में सब कुछ अच्छा होगा, लेकिन सिंदूरी गाँव की वास्तविकता बहुत अलग थी।
'सिंदूरी' और 'अपने सपनों के गाँव' में उसे क्या अंतर मिला?
Solution: जाऱ्या को सिंदूरी गाँव में कई अंतर मिले। सबसे बड़ा अंतर यह था कि सिंदूरी में हर चीज़ के लिए पैसे की ज़रूरत थी, जबकि उसके गाँव में कई चीजें मुफ्त में या आपसी सहयोग से मिल जाती थीं। सिंदूरी में बीमार पड़ने पर इलाज के लिए अस्पताल जाना पड़ता था, जहाँ अक्सर दवाएँ भी नहीं मिलती थीं। इसके विपरीत, उसके गाँव में बीमार होने पर जड़ी-बूटियों से इलाज हो जाता था, जो अधिक सुलभ था। सिंदूरी में लोगों के बीच आपसी जुड़ाव और अपनापन भी कम था, जैसा कि उसके गाँव में था।
क्या तुम कभी किसी के घर 'बिन-बुलाए मेहमान' थे? कैसा लगा?
Solution: नहीं, मैं कभी भी किसी के घर 'बिन-बुलाए मेहमान' नहीं रहा हूँ। जब भी मैं किसी के घर जाता हूँ, तो या तो मुझे आमंत्रित किया गया होता है या मैं अपने परिवार के साथ जाता हूँ। बिन-बुलाए मेहमान बनकर जाना अच्छा नहीं लगता क्योंकि इससे मेजबान को असुविधा हो सकती है और मुझे भी अजीब लग सकता है।
जब तुम्हारे यहाँ कुछ दिन मेहमान रहने आते हैं, तब तुम्हारे परिवार वाले क्या-क्या करते हैं?
Solution: जब हमारे यहाँ मेहमान आते हैं, तो मेरा पूरा परिवार उनकी आवभगत में लग जाता है। हम उन्हें घर के सबसे अच्छे कमरे में ठहराते हैं। उनके खाने-पीने का खास ख्याल रखा जाता है, उन्हें उनकी पसंद का खाना खिलाने की कोशिश की जाती है। हम उनकी सुविधा का ध्यान रखते हैं और कोशिश करते हैं कि उन्हें किसी भी तरह की परेशानी न हो। हम उनके साथ समय बिताते हैं, बातें करते हैं और उन्हें घुमाने ले जाते हैं।

एन.सी.ई.आर.टी. पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 172)

सोचो

जात्र्याभाई ने क्या सोचकर मुंबई जाने की ठानी?
Solution: जात्र्याभाई ने यह सोचकर मुंबई जाने की ठानी कि यदि उसे 'बिन बुलाए मेहमान' की तरह ही रहना है, तो ऐसी जगह जाए जहाँ कम से कम उसके सपने पूरे हो सकें। वह शायद यह उम्मीद कर रहा था कि मुंबई जैसे बड़े शहर में उसे काम मिलेगा और वह अपने परिवार के लिए बेहतर जीवन जी सकेगा, भले ही उसे अपना घर और गाँव छोड़ना पड़ा हो।
क्या उन्हें मुंबई वैसा ही मिला?
Solution: नहीं, जात्र्याभाई को मुंबई वैसा बिल्कुल नहीं मिला जैसा उसने सोचा था। मुंबई में भी हालात बहुत अच्छे नहीं थे। उसे वहाँ भी कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा, और जीवन उतना आसान नहीं था जितनी उसने कल्पना की थी।
जात्र्याभाई के बच्चे मुंबई में किस तरह के स्कूल में जाते होंगे?
Solution: जात्र्याभाई के बच्चे मुंबई में संभवतः नगर निगम द्वारा चलाए जाने वाले सरकारी स्कूलों में जाते होंगे। ये स्कूल अक्सर उन परिवारों के बच्चों के लिए होते हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं और निजी स्कूलों की फीस वहन नहीं कर सकते। इन स्कूलों में शिक्षा तो दी जाती है, लेकिन सुविधाओं के मामले में वे निजी स्कूलों से थोड़े भिन्न हो सकते हैं।

Common mistakes

  • विस्थापन के भावनात्मक और सामाजिक प्रभावों को कम आंकना।
  • शहरी जीवन की कठिनाइयों को केवल भौतिक सुख-सुविधाओं के रूप में देखना।
  • पारंपरिक ज्ञान और कौशल के महत्व को अनदेखा करना।
  • विभिन्न संस्कृतियों और जीवन शैलियों के प्रति असंवेदनशीलता।

Revision tips

  • जात्रा की कहानी को ध्यान से पढ़ें और उसके अनुभवों को समझने का प्रयास करें।
  • विस्थापन के कारणों और प्रभावों पर चर्चा करें।
  • अपने आस-पास की ध्वनियों और पक्षियों की आवाजों को पहचानने का अभ्यास करें।
  • अपने बड़ों से उनके अनुभवों के बारे में पूछें और उनसे सीखें।

Practice MCQs

Q1. जात्रा को अपना गाँव क्यों छोड़ना पड़ा?

Q2. खेड़ी गाँव में बच्चे क्या-क्या सीखते थे?

Q3. बड़े शहरों में जात्रा जैसे परिवार क्यों आते हैं?

Q4. जात्रा को मुंबई में क्या उम्मीद थी?

Q5. सिंदूरी गाँव और जात्रा के सपनों के गाँव में क्या अंतर था?

Frequently asked questions

यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए है?

यह NCERT समाधान कक्षा 5 के पर्यावरण अध्ययन (Environmental Studies) विषय के लिए हैं, जो पाठ 18 'जाएँ तो जाएँ कहाँ' पर आधारित है।

यह समाधान किन मुख्य विषयों को कवर करते हैं?

यह समाधान विस्थापन, बड़े बांधों के प्रभाव, शहरी जीवन की चुनौतियाँ, पारंपरिक कौशल और ग्रामीण जीवन के बीच अंतर जैसे विषयों को कवर करते हैं।

क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे?

हाँ, ये समाधान पाठ की गहरी समझ प्रदान करते हैं, महत्वपूर्ण अवधारणाओं को स्पष्ट करते हैं और अभ्यास के लिए प्रश्नोत्तर प्रारूप में प्रस्तुत किए गए हैं, जो परीक्षा की तैयारी के लिए सहायक हैं।

विस्थापन का क्या अर्थ है और यह पाठ में क्यों महत्वपूर्ण है?

विस्थापन का अर्थ है किसी व्यक्ति या समुदाय का अपने मूल स्थान से कहीं और जाकर बसना। यह पाठ बांध निर्माण जैसी परियोजनाओं के कारण होने वाले विस्थापन के मानवीय और सामाजिक प्रभावों को दर्शाता है।

शहरी जीवन की किन चुनौतियों पर यह पाठ प्रकाश डालता है?

यह पाठ शहरी जीवन की चुनौतियों जैसे भीड़भाड़, आजीविका की तलाश, शिक्षा की उपलब्धता और जीवन की भागदौड़ पर प्रकाश डालता है।

क्या इन समाधानों में पाठ के सभी प्रश्न शामिल हैं?

हाँ, इन समाधानों में पाठ्यपुस्तक के पाठ 18 'जाएँ तो जाएँ कहाँ' के सभी प्रश्नों के उत्तर विस्तृत और स्पष्ट रूप से दिए गए हैं।

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