CBSE Class 5 Environmental Studies NCERT Solutions: Chapter 19 - किसानों की कहानी - बीज की जुबानी
This chapter, 'A Farmer's Story - The Seed's Tale', from the CBSE Class 5 Environmental Studies curriculum, delves into the fascinating world of agriculture and the journey of seeds. Students will explore different types of grains and pulses, understand the methods used to protect them from pests, and learn about various farming festivals celebrated across India, such as Lohri. The chapter contrasts traditional farming practices with modern agricultural techniques, highlighting the impact of technology and chemicals on farming and the environment. It encourages critical thinking about the concept of 'progress' in agriculture and its socio-economic implications. These NCERT Solutions provide clear explanations and answers to all questions, helping students grasp the concepts of crop cultivation, seed preservation, agricultural diversity, and the importance of sustainable farming practices for effective exam revision.
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 5 |
| Subject | Environmental Studies |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 19 किसानों की कहानी -बीज की जुबानी |
Chapter summary
Chapter 19, 'A Farmer's Story - The Seed's Tale', focuses on the life cycle of seeds and the agricultural practices associated with them. It covers topics like different types of grains and pulses, methods of pest control for stored grains, and agricultural festivals. The chapter also draws a comparison between traditional and modern farming methods, prompting discussions on the definition and consequences of 'progress' in agriculture. These solutions offer detailed answers to all textbook questions, aiding students in understanding the nuances of farming and its impact.
Learning outcomes
- Understand the importance of different grains and pulses in daily diet.
- Identify methods used to protect stored grains from pests.
- Learn about various farming-related festivals celebrated in India.
- Compare and contrast traditional and modern farming techniques.
- Analyze the concept of 'progress' in agriculture and its effects.
- Recognize the role of seeds in the agricultural cycle.
Topics covered
Paper topics
- Grains and Pulses
- Pest Control for Grains
- Agricultural Festivals (Lohri, Pongal)
- Traditional Farming Methods
- Modern Farming Methods
- Concept of Progress in Agriculture
- Impact of Agriculture on Environment
- Role of Seeds
- Local Crops
- Farming Practices
Important topics
- Comparison of Traditional and Modern Farming
- Concept and Consequences of Agricultural 'Progress'
- Methods to Protect Stored Grains
- Agricultural Festivals
- Role of Seeds in Farming
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
हाँ, मेरे घर में रोटियाँ बनती हैं। हम मुख्य रूप से गेहूँ के आटे से रोटियाँ बनाते हैं। गेहूँ एक प्रमुख अनाज है जिसका उपयोग भारत में व्यापक रूप से रोटी बनाने के लिए किया जाता है।
प्रश्न 2
हाँ, मैंने ज्वार और बाजरे की रोटियाँ खाई हैं। ज्वार की रोटी थोड़ी सख्त लेकिन पौष्टिक होती है, और इसका स्वाद मुझे पसंद आया। बाजरे की रोटी का स्वाद भी अच्छा होता है, खासकर जब यह ताज़ी बनी हो और घी के साथ खाई जाए। ये दोनों ही अनाज स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद माने जाते हैं।
प्रश्न 3
हमारे घर में अनाज और दालों को कीड़ों से बचाने के लिए कई तरीके अपनाए जाते हैं। सबसे पहले, अनाज और दालों को अच्छी तरह सुखाया जाता है ताकि उनमें नमी न रहे। फिर, उन्हें साफ करके एयरटाइट (हवाबंद) डिब्बों या बर्तनों में रखा जाता है। कभी-कभी, नीम की सूखी पत्तियों को भी अनाज के साथ रख दिया जाता है, क्योंकि उनकी गंध कीड़ों को दूर रखती है। समय-समय पर, अनाज को धूप में भी सुखाया जाता है ताकि कोई कीड़ा या लार्वा पनप न सके।
प्रश्न 4
भारत एक कृषि प्रधान देश है, इसलिए यहाँ खेती से जुड़े कई त्योहार अलग-अलग मौसमों में मनाए जाते हैं। कुछ प्रमुख त्योहार हैं:
- लोहड़ी: यह मुख्य रूप से सर्दियों के मौसम में, 13 जनवरी को मनाया जाता है। यह पंजाब और आसपास के राज्यों में लोकप्रिय है। इस अवसर पर गुड़, तिल से बनी चीजें जैसे गजक, रेवड़ी खाई जाती हैं। लोग आग जलाकर उसके चारों ओर नाच-गाकर और गीत गाकर इसे मिल-जुलकर मनाते हैं।
- पोंगल: यह भी फसल कटाई का त्योहार है जो दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु में, सर्दियों के अंत में मनाया जाता है। इस दौरान चावल, गुड़ और दूध से बने पकवान जैसे पोंगल (एक मीठा व्यंजन) पकाए जाते हैं। यह परिवार के साथ मिलकर मनाया जाता है।
- बैसाखी: यह उत्तरी भारत, विशेषकर पंजाब में, वसंत ऋतु के अंत में (अप्रैल में) मनाया जाता है। यह नई फसल के आगमन का प्रतीक है। इस दिन लोग पारंपरिक गीत गाते हैं, नृत्य करते हैं और विशेष पकवान बनाते हैं। यह भी एक सामुदायिक त्योहार है।
- ओणम: केरल में मनाया जाने वाला यह त्योहार फसल कटाई के मौसम से जुड़ा है और यह मुख्य रूप से अगस्त या सितंबर में होता है। इस दौरान विभिन्न प्रकार के पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं और परिवार के सदस्य मिलकर इसका जश्न मनाते हैं।
लोहड़ी के बारे में विस्तृत जानकारी:
- त्योहार का नाम: लोहड़ी
- किस मौसम में मनाते हैं?: यह हर साल सर्दियों के मौसम में, 13 जनवरी को मनाया जाता है।
- किन-किन राज्यों में मनाया जाता है?: यह मुख्य रूप से पंजाब में मनाया जाता है, लेकिन हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे उत्तरी राज्यों में भी इसका प्रचलन है। तमिलनाडु में इसे 'पोंगल' और कर्नाटक में 'येल्ला बेल्ला' जैसे नामों से भी इसी समय के आसपास मनाया जाता है।
- क्या-क्या पकाया जाता है?: इस अवसर पर गुड़ और तिल से बने पकवान जैसे गजक, रेवड़ी, तिल के लड्डू बहुत लोकप्रिय हैं। मक्के की रोटी और सरसों का साग भी खाया जाता है। लोग भुनी हुई मूंगफली और मक्का भी खाते हैं।
- उस त्योहार को कैसे मनाते हैं-सब मिलकर या अपने-अपने घरों में?: पंजाब में लोहड़ी को सभी लोग मिल-जुलकर मनाते हैं। शाम को आग जलाई जाती है, जिसके चारों ओर लोग इकट्ठा होकर नाचते-गाते हैं और एक-दूसरे को बधाई देते हैं। परिवार और दोस्त एक साथ आते हैं। कुछ अन्य राज्यों में इसे परिवार के सदस्यों के साथ भी मनाया जाता है। गुजरात में इस अवसर पर पतंगें भी उड़ाई जाती हैं।
प्रश्न 5
हाँ, मेरे घर में बड़ों से बात करने पर पता चला कि कुछ ऐसी खाने की चीजें हैं जो पहले बनाई जाती थीं पर अब कम बनती हैं या बिल्कुल नहीं बनतीं। मेरी दादी बताती हैं कि उनके समय में वे घर पर ही तिल और कूटे हुए चावल को मिलाकर स्वादिष्ट लड्डू बनाती थीं, जिन्हें 'तिलकुट' कहा जाता था। इसके अलावा, वे मौसमी फलों से तरह-तरह के मुरब्बे और अचार भी घर पर ही बनाती थीं। आजकल लोग बाजार में मिलने वाली तैयार चीजों जैसे गजक या रेवड़ी को ज्यादा पसंद करते हैं और घर पर पारंपरिक व्यंजन बनाने का चलन कम हो गया है।
प्रश्न 6
मेरे इलाके में कई तरह के अनाज और साग-सब्जी उगाए जाते हैं। अनाज में मुख्य रूप से गेहूँ, मक्का और धान (चावल) की खेती होती है। साग-सब्जी में आलू, प्याज, टमाटर, बैंगन, भिंडी और विभिन्न प्रकार की मौसमी सब्जियाँ उगाई जाती हैं। हमारे इलाके में लीची और आम भी बहुत अच्छी गुणवत्ता के होते हैं और ये फल अपनी मिठास और स्वाद के लिए दूर-दूर तक मशहूर हैं, जिनकी काफी मांग रहती है।
प्रश्न 7
हाँ, मैं चित्रों में दिखाए गए अनाजों को पहचान सकता हूँ। चित्र में सरसों (या राई), गेहूँ और बाजरा के दाने या पौधे दिखाए गए हैं। सरसों के दाने छोटे और गोल होते हैं, गेहूँ के दाने थोड़े बड़े और अंडाकार होते हैं, और बाजरे के दाने छोटे, गोल और हल्के भूरे रंग के होते हैं।
प्रश्न 8
बाजरे के बीज ने दामजीभाई और हसमुख की खेती के तरीकों में कई महत्वपूर्ण अंतर देखे:
- जुताई: दामजीभाई अपने खेतों की जुताई पारंपरिक तरीके से हल और बैलों का उपयोग करके करते थे। इसके विपरीत, हसमुख ने अपने खेतों की जुताई के लिए आधुनिक ट्रैक्टर का इस्तेमाल किया।
- बीज: दामजीभाई बीज के रूप में पिछले साल की फसल के अनाज का ही प्रयोग करते थे, जिसे वे खुद सहेज कर रखते थे। हसमुख ने बाजार से अच्छी गुणवत्ता वाले उन्नत बीज खरीदे।
- खाद: दामजीभाई शायद जैविक खाद या गोबर की खाद का प्रयोग करते थे। हसमुख ने अपने खेतों में अच्छी गुणवत्ता वाली रासायनिक खाद डाली।
- सिंचाई: दामजीभाई शायद पारंपरिक सिंचाई विधियों का उपयोग करते थे। हसमुख ने सिंचाई के लिए बिजली से चलने वाला पम्प लगवाया, जिससे पानी की उपलब्धता आसान हो गई।
- फसल का चुनाव: दामजीभाई शायद वही फसलें उगाते थे जो पारंपरिक रूप से उगाई जाती रही हैं। हसमुख ने उन फसलों की खेती छोड़ दी जिनकी बाजार में अच्छी कीमत नहीं मिलती थी और शायद अधिक मुनाफे वाली फसलें चुनीं।
संक्षेप में, दामजीभाई पारंपरिक और सरल तरीकों से खेती करते थे, जबकि हसमुख ने आधुनिक तकनीक और व्यावसायिक दृष्टिकोण अपनाया।
प्रश्न 9
'तरक्की' का मतलब सिर्फ ज्यादा पैसे कमाना ही नहीं है, बल्कि जीवन स्तर में सुधार लाना भी है। मेरे विचार से तरक्की का अर्थ है:
- आर्थिक समृद्धि: लोगों की आय में वृद्धि होना, जिससे वे अपनी बुनियादी जरूरतों को आसानी से पूरा कर सकें और बेहतर जीवन जी सकें।
- बेहतर जीवन शैली: अच्छी गुणवत्ता वाले भोजन, स्वच्छ पानी, स्वास्थ्य सेवाएँ और शिक्षा तक पहुँच होना।
- सुविधाएँ: बेहतर सड़कें, बिजली, परिवहन, संचार और आवास जैसी आधुनिक सुविधाओं की उपलब्धता।
- शिक्षा और स्वास्थ्य: बच्चों के लिए अच्छे स्कूलों और सभी के लिए सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं का होना, जिससे लोग स्वस्थ और शिक्षित रहें।
- खुशहाली: समाज में शांति, सुरक्षा और आपसी भाईचारा होना, जहाँ लोग अपने जीवन से संतुष्ट हों।
प्रश्न 10
मैं अपने गाँव या इलाके में निम्नलिखित तरक्की देखना चाहूँगा:
- बेहतर सड़कें और परिवहन: गाँव को मुख्य सड़कों से जोड़ने वाली अच्छी सड़कें हों और सार्वजनिक परिवहन की सुविधा उपलब्ध हो।
- 24 घंटे बिजली: निर्बाध बिजली की आपूर्ति हो ताकि घरों में काम करने और पढ़ाई करने में आसानी हो।
- अच्छे स्कूल और कॉलेज: बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके, जिसके लिए अच्छे स्कूल और उच्च शिक्षा के संस्थान हों।
- स्वास्थ्य सेवाएँ: एक अच्छा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल हो जहाँ सभी को समय पर चिकित्सा सुविधा मिल सके।
- रोजगार के अवसर: स्थानीय स्तर पर लोगों के लिए पर्याप्त रोजगार के अवसर पैदा हों, ताकि उन्हें पलायन न करना पड़े।
- स्वच्छता और जल आपूर्ति: साफ-सफाई की अच्छी व्यवस्था हो और सभी घरों में पीने के साफ पानी की आपूर्ति हो।
- पार्क और खेल के मैदान: बच्चों और युवाओं के लिए खेलने के लिए सुरक्षित पार्क और खेल के मैदान हों।
- बेहतर कानून-व्यवस्था: गाँव में शांति और सुरक्षा का माहौल हो।
प्रश्न 11
आगे चलकर हसमुख की खेती का बुरा हाल हुआ होगा। उसने आधुनिक तकनीकों और रासायनिक खादों का बहुत ज्यादा इस्तेमाल किया, जिससे जमीन की उर्वरा शक्ति धीरे-धीरे खत्म हो गई होगी। लगातार एक ही तरह की फसल उगाने और रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी की प्राकृतिक गुणवत्ता नष्ट हो गई होगी, जिससे फसल की पैदावार कम हो गई होगी। साथ ही, उसने खेती और ट्रैक्टर आदि के लिए बैंक से कर्ज भी लिया था। जब पैदावार कम हुई और लागत बढ़ गई, तो वह शायद कर्ज चुकाने में भी असमर्थ हो गया होगा। इस वजह से, वह खेती जारी रखने में सक्षम नहीं रहा होगा और उसे भारी नुकसान उठाना पड़ा होगा।
प्रश्न 12
परेश ने खेती न करके ट्रक चलाने का फैसला शायद इसलिए किया होगा क्योंकि उसने अपने पिता हसमुख की खेती की दुर्दशा देखी थी। हसमुख ने आधुनिक तरीके अपनाए, लेकिन अत्यधिक रासायनिक खादों और कीटनाशकों के प्रयोग से जमीन की उर्वरा शक्ति खत्म हो गई। साथ ही, शायद सभी किसानों द्वारा एक ही तरह की फसल उगाने से बाजार में उसकी कीमत भी कम मिल रही थी। हसमुख कर्ज में डूब गया था और खेती से मुनाफा कमाना मुश्किल हो गया था। इन सब कारणों से परेश ने खेती को एक अनिश्चित और घाटे का सौदा समझा होगा और उसने ट्रक चलाने जैसे किसी अन्य व्यवसाय को चुनना बेहतर समझा होगा, जिससे उसे तुरंत आय मिल सके और वह कर्ज के बोझ से बच सके।
प्रश्न 13
मुझे लगता है कि बीज का शक बिल्कुल सही था। हसमुख के साथ जो हुआ वह वास्तविक तरक्की नहीं थी, बल्कि एक तरह का नुकसान था। उसने मुनाफे के लिए आधुनिक तरीकों का इस्तेमाल किया, लेकिन इससे जमीन की उर्वरा शक्ति खत्म हो गई, जो खेती के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। रासायनिक खादों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग ने मिट्टी को बंजर बना दिया और भूजल स्तर को भी नीचे गिरा दिया होगा। मशीनों के उपयोग से बेरोजगारी भी बढ़ी होगी। यह अल्पकालिक लाभ तो दे सकता है, लेकिन लंबे समय में यह पर्यावरण और किसानों दोनों के लिए हानिकारक है। इसलिए, इसे तरक्की कहना गलत होगा। वास्तविक तरक्की वह है जो पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना सभी के लिए स्थायी लाभ लाए।
प्रश्न 14
हाँ, मेरे आस-पास ऐसे कई बदलाव हुए हैं जिन्हें 'तरक्की' कहा जाता है, लेकिन उनमें कुछ दिक्कतें भी हैं। उदाहरण के लिए, हमारे शहर में पहले एक पुरानी बस्ती थी जहाँ बहुत से गरीब लोग रहते थे। अब उस जगह पर एक बड़ा शॉपिंग मॉल और ऊँची इमारतें बना दी गई हैं। यह देखने में तो शहर का विकास और तरक्की लगती है, क्योंकि इससे शहर सुंदर दिखता है और व्यापार बढ़ता है। लेकिन, जिन लोगों को उस बस्ती से हटाया गया, उन्हें रहने के लिए नई और बेहतर जगह नहीं मिली या उन्हें बहुत दूर विस्थापित कर दिया गया। इससे उनकी रोजी-रोटी पर भी असर पड़ा। इस तरह के विकास से कुछ लोगों को फायदा होता है, लेकिन गरीबों और कमजोर वर्गों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। यह एक ऐसी तरक्की है जिसमें सभी का भला नहीं होता।
प्रश्न 15
खेती से जुड़े मेरे मन में कई सवाल उठते हैं, जिन्हें मैं किसी किसान से पूछना चाहूँगा:
- आप एक साल में कितनी अलग-अलग तरह की फसलें उगाते हैं?
- हर फसल को उगाने के लिए कितनी बार और कितना पानी देना पड़ता है?
- आप अपनी फसल को कीड़ों और बीमारियों से बचाने के लिए किन तरीकों का इस्तेमाल करते हैं? क्या आप रासायनिक दवाइयों का प्रयोग करते हैं या प्राकृतिक तरीकों पर निर्भर हैं?
- फसल उगाने में कितना खर्च आता है और बेचने पर कितना मुनाफा होता है?
- क्या आप अपनी फसल को सीधे बाजार में बेचते हैं या किसी बिचौलिए के माध्यम से?
- खेती के लिए जमीन को उपजाऊ बनाए रखने के लिए आप क्या करते हैं?
- क्या मौसम में बदलाव (जैसे कम बारिश या ज्यादा गर्मी) आपकी फसल को प्रभावित करता है? आप इससे कैसे निपटते हैं?
- खेती के अलावा आपकी आय का कोई और स्रोत है?
- खेती में नई तकनीकें अपनाने के क्या फायदे और नुकसान हैं?
- क्या आप अपनी जमीन पर जैविक खेती करने के बारे में सोचते हैं?
Common mistakes
- Confusing traditional and modern farming methods.
- Not fully understanding the environmental impact of modern farming.
- Defining 'progress' solely in terms of economic gain without considering sustainability.
- Limited knowledge of different agricultural festivals and their significance.
Revision tips
- Review the differences between traditional and modern farming methods discussed in the chapter.
- Make a list of farming festivals and the states where they are celebrated.
- Think critically about the definition of 'progress' and its implications for farmers and the environment.
- Discuss the role of seeds and their journey from farm to table.
- Try to recall the methods used to protect grains from pests.
Practice MCQs
Q1. भारत में खेती से जुड़ा कौन सा त्योहार 13 जनवरी को मनाया जाता है?
Explanation: लोहड़ी एक महत्वपूर्ण कृषि त्योहार है जो हर साल 13 जनवरी को मनाया जाता है, खासकर पंजाब और आसपास के क्षेत्रों में।
Q2. अनाज और दालों को कीड़ों से बचाने के लिए क्या किया जाता है?
Explanation: अनाज और दालों को कीड़ों से बचाने के लिए उन्हें धूप में सुखाना और एयरटाइट डिब्बों में रखना एक प्रभावी तरीका है।
Q3. दामजीभाई खेती के लिए किस तरीके का इस्तेमाल करते थे?
Explanation: दामजीभाई खेती के पारंपरिक तरीकों का पालन करते थे, जिसमें खेतों की जुताई के लिए हल-बैलों का उपयोग शामिल था।
Q4. हसमुख ने खेती के लिए किस तकनीक का इस्तेमाल किया?
Explanation: हसमुख ने खेती के आधुनिक तरीकों को अपनाया, जिसमें ट्रैक्टर से जुताई और सिंचाई के लिए बिजली के पम्प का उपयोग शामिल था।
Q5. 'तरक्की' का क्या अर्थ हो सकता है?
Explanation: तरक्की को अक्सर बेहतर जीवन शैली, अधिक आय, आधुनिक सुविधाओं और बेहतर शिक्षा के रूप में समझा जाता है।
Frequently asked questions
यह पाठ किसानों की कहानी के बारे में क्या बताता है?
यह पाठ किसानों की कहानी के माध्यम से बीजों की यात्रा, खेती के पारंपरिक और आधुनिक तरीकों, कृषि से जुड़े त्योहारों और 'तरक्की' की अवधारणा पर प्रकाश डालता है।
किसानों की कहानी - बीज की जुबानी पाठ में किन अनाजों का उल्लेख है?
इस पाठ में गेहूँ, ज्वार, बाजरा, सरसों और राई जैसे अनाजों का उल्लेख किया गया है।
खेती से जुड़े कौन से त्योहारों के बारे में जानकारी दी गई है?
पाठ में लोहड़ी, पोंगल और बैसाखी जैसे खेती से जुड़े त्योहारों के बारे में जानकारी दी गई है, जिसमें लोहड़ी पर विशेष ध्यान दिया गया है।
पारंपरिक और आधुनिक खेती के तरीकों में क्या अंतर है?
पारंपरिक खेती में हल-बैलों और जैविक खाद का उपयोग होता है, जबकि आधुनिक खेती में ट्रैक्टर, बिजली के पम्प और रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग किया जाता है।
क्या 'तरक्की' हमेशा फायदेमंद होती है?
पाठ के अनुसार, 'तरक्की' हमेशा फायदेमंद नहीं होती। आधुनिक तरीकों से पर्यावरण को नुकसान हो सकता है और लोग बेरोजगार भी हो सकते हैं, इसलिए वास्तविक तरक्की पर सवाल उठाया गया है।
इस पाठ से छात्र क्या सीख सकते हैं?
छात्र खेती के महत्व, बीजों की भूमिका, विभिन्न कृषि पद्धतियों, त्योहारों और आधुनिक कृषि के पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों के बारे में सीख सकते हैं।
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