कक्षा 10 मनिका: तिरुक्कुरल्-सूक्ति -सौरभम् NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 10 मनिका के लिए 'तिरुक्कुरल्-सूक्ति -सौरभम्' अध्याय के विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें तिरुवल्लुवर के महान ग्रंथ 'तिरुक्कुरल्' से चुनी गई सूक्तियों का परिचय, उनका हिंदी अनुवाद, अन्वय और भावार्थ शामिल है। समाधान छात्रों को श्लोकों के अर्थ को गहराई से समझने, व्याकरणिक पहलुओं जैसे संधि-विच्छेद, समास और प्रत्यय को पहचानने में मदद करते हैं। प्रश्न-उत्तर खंड छात्रों की समझ का परीक्षण करता है और उन्हें परीक्षा की तैयारी के लिए आवश्यक अभ्यास प्रदान करता है। यह संसाधन छात्रों को तिरुक्कुरल् की ज्ञानवर्धक सूक्तियों से परिचित कराएगा और उनकी संस्कृत भाषा की समझ को बेहतर बनाएगा।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
SubjectManika
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
ChapterChapter 8 तिरुक्कुरल्-सूक्ति -सौरभम्

Chapter summary

कक्षा 10 मनिका के 'तिरुक्कुरल्-सूक्ति -सौरभम्' अध्याय के ये NCERT समाधान तिरुवल्लुवर के प्रसिद्ध ग्रंथ 'तिरुक्कुरल्' की महत्वपूर्ण सूक्तियों पर केंद्रित हैं। इसमें श्लोकों का हिंदी अनुवाद, अन्वय (गद्य क्रम) और भावार्थ (सारांश) दिया गया है। समाधान छात्रों को शब्दार्थ, संधि-विच्छेद, समास और प्रत्यय जैसे व्याकरणिक बिंदुओं को समझने में सहायता करते हैं। विभिन्न प्रकार के प्रश्न, जैसे एक-शब्द उत्तर, पूर्ण वाक्य उत्तर, प्रश्न निर्माण और बहुविकल्पीय प्रश्न, छात्रों को विषय की गहन समझ विकसित करने और परीक्षा के लिए प्रभावी ढंग से तैयारी करने में मदद करते हैं।

Learning outcomes

  • तिरुवल्लुवर और तिरुक्कुरल् ग्रंथ का परिचय प्राप्त करना।
  • संस्कृत श्लोकों का हिंदी अनुवाद और भावार्थ समझना।
  • श्लोकों में प्रयुक्त व्याकरणिक तत्वों (संधि, समास, प्रत्यय) की पहचान करना।
  • एक-शब्द, पूर्ण-वाक्य और प्रश्न-निर्माण जैसे विभिन्न प्रकार के उत्तर देने का अभ्यास करना।
  • सूक्तियों के माध्यम से जीवन मूल्यों और ज्ञान को आत्मसात करना।

Topics covered

Paper topics

  • तिरुवल्लुवर का परिचय
  • तिरुक्कुरल् ग्रंथ का परिचय
  • सूक्ति 1: पिता का पुत्र के प्रति कर्तव्य
  • श्लोक का हिंदी अनुवाद
  • अन्वय (गद्य क्रम)
  • भावार्थ (सारांश)
  • शब्दार्थ
  • संधि-विच्छेद (विसर्ग संधि, यण संधि, दीर्घ संधि)
  • समास (कर्मधारय, षष्ठी तत्पुरुष)
  • प्रत्यय (क्त, ल्यप्, क्तिन्, तल्)
  • प्रश्न निर्माण
  • व्याकरणिक कार्य

Important topics

  • तिरुक्कुरल् की सूक्तियों का अर्थ और महत्व
  • पिता-पुत्र संबंध और शिक्षा का महत्व
  • श्लोक का व्याकरणिक विश्लेषण (संधि, समास, प्रत्यय)
  • अन्वय और भावार्थ को समझना
  • परीक्षा उपयोगी प्रश्न-उत्तर

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

(I) एकपदेन उत्तरत–

  1. प्रतिमा कस्य वर्तते?
  2. का प्रतिमाम् 'महाकवि:' इति मन्यते?

(II) पूर्णवाक्येन उत्तरत-

संस्कृतपुस्तके किम् प्रदत्तम्?

(III) भाषिककार्यम् –

  1. 'प्रदत्तानि' क्रियापदस्य कर्तृपदं किम्?
  • (क) श्लोकानि (ख) पद्यानि (ग) छन्दांसि (घ) कतिचित्
  1. 'पाठम्' अस्य विशेषणपदं किम्?
  • (क) तम् (ख) स: (ग) तत् (घ) एतम्
  1. 'मूर्तिम्' इत्यर्थे अत्र कि पदं प्रयुक्तम्?
  • (क) प्रतिमा (ख) एतां (ग) यात्राणि (घ) प्रतिमान्
  1. 'अत्रैव' इति पदस्य सन्धिवच्छेदं कृत्वा लिखत।
  • (क) अत्र + इव (ख) अत्र + ऐव (ग) अत्र + एव (घ) अत्र + ऐव
Solution:

(I) एकपदेन उत्तरत:

  1. प्रतिमा तिरुवल्लुवरस्य वर्तते। (यह प्रतिमा तिरुवल्लुवर की है।)
  2. शारदा प्रतिमाम् 'महाकवि:' इति मन्यते। (शारदा प्रतिमा को 'महाकवि' मानती है।)

(II) पूर्णवाक्येन उत्तरत:

संस्कृतपुस्तके 'तिरुक्कुरल्' इति ग्रन्थस्य कतिचित् पद्यानि संस्कृत भाषायाम् अनृद्य प्रदत्तानि। (संस्कृत की पुस्तक में 'तिरुक्कुरल्' ग्रंथ के कुछ पद संस्कृत भाषा में अनुवाद करके दिए गए हैं।)

(III) भाषिककार्यम्:

  1. 'प्रदत्तानि' क्रियापद का कर्तृपद (कर्ता) है: (ख) पद्यानि। यहाँ 'पद्यानि' (पद) कर्ता हैं जिनके लिए 'प्रदत्तानि' (दिए गए) क्रियापद का प्रयोग हुआ है।
  2. 'पाठम्' का विशेषणपद है: (क) तम्। यहाँ 'तम्' (उस) विशेषण 'पाठम्' (पाठ) के लिए प्रयुक्त हुआ है।
  3. 'मूर्तिम्' के अर्थ में यहाँ प्रयुक्त पद है: (घ) प्रतिमा। 'मूर्तिम्' का अर्थ भी प्रतिमा होता है।
  4. 'अत्रैव' का संधि-विच्छेद है: (ग) अत्र + एव। यह वृद्धि संधि का उदाहरण है, जहाँ 'अ' और 'ए' मिलकर 'ऐ' बनाते हैं।

प्रश्न 2

प्रश्ननिर्माणम् –

  1. एष: खलु महाकवि: तिरुवल्लुवर: अस्ति।
  2. पद्यानि पठित्वा वयं ज्ञानवृद्धिं करिष्याम:।
  3. छात्रा: सन्त-तिरुवल्लुवरस्य प्रतिमां दृष्ट्वा परस्परं चर्चां कुर्वन्ति।
  4. अनेन महान् पावनः ग्रन्थः विरचितः।
  5. तस्य नाम तिरुक्कुरल् वर्तते।
Solution:

रेखांकित पदों के स्थान पर प्रश्नवाचक शब्द का प्रयोग करके प्रश्न का निर्माण करें:

  1. क: खलु महाकवि: तिरुवल्लुवर: अस्ति? (कौन वास्तव में महाकवि तिरुवल्लुवर हैं?)
  2. किम् पठित्वा वयं ज्ञानवृद्धिं करिष्याम:? (क्या पढ़कर हम ज्ञान में वृद्धि करेंगे?)
  3. कस्य प्रतिमां दृष्ट्वा छात्रा: परस्परं चर्चां कुर्वन्ति? (किसकी प्रतिमा को देखकर छात्र आपस में चर्चा कर रहे हैं?)
  4. कीदृश: ग्रन्थः अनेन विरचितः? (किस प्रकार का ग्रंथ इनके द्वारा रचित है?)
  5. किम् नाम तस्य वर्तते? (उनका क्या नाम है?)

प्रश्न 3

तिरुक्कुरल्-सूक्ति-सौरभम्

(तिरुक्कुरल् की सूक्तियों की सुगंध)

1. पिता यच्छति पुत्राय बाल्ये विद्याधनं महत्।

पिताऽस्य किं तपस्तेपे इत्युक्तिस्तत्कृतज्ञता ॥ १ ॥

हिंदी अनुवाद (Hindi Translation)

पिता पुत्र को बचपन में विद्यारूपी बहुत बड़ा धन देता है। इससे पिता ने क्या तप किया? यह कथन ही उसकी कृतज्ञता है।

अन्वयः (Prose-order)

पिता यच्छति पुत्राय बाल्ये विद्याधनं महत्।

पिताऽस्य किं तपस्तेपे इत्युक्तिस्तत्कृतज्ञता।

पिता (i) ______ बाल्ये महत् (ii) ______ यच्छित। अस्य (पुत्रस्य) पिता किं (iii) ______ तेपे इति

(iv) ______ तत्कृतज्ञता।

मञ्जूषा- विद्याधनं, उक्तिः, पुत्राय, तपः

Solution:

श्लोक के अनुसार अन्वय को पूरा करें:

पिता (i) पुत्राय बाल्ये महत् (ii) विद्याधनं यच्छित। अस्य (पुत्रस्य) पिता किं (iii) तपः तेपे इति (iv) उक्तिः तत्कृतज्ञता।

व्याख्या: पिता अपने पुत्र को बचपन में विद्या रूपी महान धन देता है। पुत्र के पिता ने इसके लिए क्या तप किया, यह कथन ही (पुत्र की) कृतज्ञता है।

प्रश्न 4

शब्दार्थाः (Word-meanings Sanskrit to Sanskrit, Hindi and English)

बाल्ये-बाल्ये वयसि, बचपन में (In the childhood)। महत्-बृहत्, बड़ा (big)। उक्ति:-कथनम्, कथन (Saying)।

संस्कृते भावार्थः (Summary)

पिता यच्छति पुत्राय बाल्ये विद्याधनं महत्।

पिताऽस्य किं तपस्तेपे इत्युक्तिस्तत्कृतज्ञता ॥ 1 ॥

अर्थात्-बाल्ये काले स्वपुत्राय (i) ______ दातुं पिता अतिकष्टं सहमान: सर्वविधं तप: कृत्वा अपि स:

(ii) " शिक्षयितुं यतते। यदि तस्य पुत्र: एतन्मात्रम् एव स्मरेत् यत् (iii) " तस्मै (विद्यादानाय) महत्

तपः अकरोत्, इयम् (iv) ..... एव तस्य पुत्रस्य कृतज्ञतां प्रकटयित।

मञ्जूषा - उक्ति:, स्वसन्ततिं, पिता, विद्याधनं।

Solution:

श्लोक के भावार्थ को मञ्जूषा की सहायता से पूरा करें:

अर्थात्-बाल्ये काले स्वपुत्राय (i) विद्याधनं दातुं पिता अतिकष्टं सहमान: सर्वविधं तप: कृत्वा अपि स: (ii) स्वसन्ततिं शिक्षयितुं यतते। यदि तस्य पुत्र: एतन्मात्रम् एव स्मरेत् यत् (iii) पिता तस्मै (विद्यादानाय) महत् तपः अकरोत्, इयम् (iv) उक्तिः एव तस्य पुत्रस्य कृतज्ञतां प्रकटयित।

व्याख्या: भावार्थ बताता है कि पिता अपने पुत्र को विद्या रूपी धन देने के लिए बहुत कष्ट सहता है और तप करता है। यदि पुत्र केवल इतना याद रखे कि पिता ने उसे यह विद्या देने के लिए कितना महान तप किया, तो यही कथन पुत्र की कृतज्ञता को दर्शाता है।

प्रश्न 5

सन्धि-विच्छेद: (Disjoin Sandhi)

तपस्तेपे - तपः + तेपे (विसर्ग सन्धिः)।

इत्युक्तिः – इति + उक्तिः (यण् सन्धिः)।

पिताऽस्य - पिता + अस्य (दीर्घ सन्धि:)।

समासाः (Compounds)

विद्याधनम् - विद्या एव धनम् (कर्मधारय:)।

तत्कृतज्ञता - तस्य कृतज्ञता (षष्ठी तत्पुरुष:)।

प्रत्ययाः (Suffixes)

उक्ति: - वच् + क्तिन्।

कृतज्ञता - कृतज्ञ + तल्।

(I) एकपदेन उत्तरत-

(i) विद्याधनम् कः यच्छति?

(ii) पिता पुत्राय विद्याधनम् कदा यच्छति?

(II) पूर्णवाक्येन उत्तरत-

(i) पिता कस्मै विद्याधनम् यच्छति?

(ii) अत्र धनम् किम् अमन्यत?

(III) भाषिककार्यम् -

(i) 'विद्याधनम्' श्लोके अस्य विशेषणपदं किम्?

(ख) बाल्ये

(ग) किम्

(क) महत्

(घ) पिता

(ii) श्लोके अव्ययपदं किम्?

(क) किम्

(ख) तप:

(ग) इति

(घ) तेपे

Solution:

(I) एकपदेन उत्तरत:

  1. विद्याधनम् पिता यच्छति। (पिता विद्या रूपी धन देता है।)
  2. पिता पुत्राय विद्याधनम् बाल्ये यच्छति। (पिता पुत्र को बचपन में विद्या रूपी धन देता है।)

(II) पूर्णवाक्येन उत्तरत:

  1. पिता पुत्राय विद्याधनम् यच्छति। (पिता पुत्र को विद्या रूपी धन देता है।)
  2. अत्र धनम् विद्याधनम् अमन्यत। (यहाँ धन को विद्या धन माना गया है।)

(III) भाषिककार्यम्:

  1. 'विद्याधनम्' का विशेषणपद है: (क) महत्। यहाँ 'महत्' (महान) विशेषण 'विद्याधनम्' (विद्या रूपी धन) के लिए प्रयुक्त हुआ है।
  2. श्लोक में अव्ययपद है: (ग) इति। 'इति' एक अव्यय है जिसका प्रयोग कथन को समाप्त करने के लिए किया जाता है।

Common mistakes

  • श्लोकों के अर्थ को समझने में कठिनाई।
  • व्याकरणिक विश्लेषण (संधि, समास, प्रत्यय) में त्रुटियाँ।
  • प्रश्न के प्रकार के अनुसार सही उत्तर न दे पाना।
  • अन्वय और भावार्थ को सही ढंग से न समझ पाना।

Revision tips

  • प्रत्येक श्लोक के हिंदी अनुवाद और भावार्थ को ध्यान से पढ़ें।
  • व्याकरणिक बिंदुओं (संधि, समास, प्रत्यय) को समझने के लिए उदाहरणों का अभ्यास करें।
  • दिए गए प्रश्नों के उत्तर स्वयं लिखने का प्रयास करें और फिर समाधान से मिलान करें।
  • अन्वय और भावार्थ को पूरा करने के लिए मञ्जूषा का सही उपयोग सीखें।

Practice MCQs

Q1. तिरुक्कुरल् ग्रंथ के रचयिता कौन हैं?

Q2. श्लोक 1 में पिता पुत्र को बचपन में क्या धन देता है?

Q3. 'पिताऽस्य' का संधि-विच्छेद क्या है?

Q4. श्लोक 1 में 'उक्तिः' शब्द का क्या अर्थ है?

Q5. भावार्थ में पुत्र की कृतज्ञता कैसे प्रकट होती है?

Frequently asked questions

यह समाधान किस कक्षा और विषय के लिए है?

यह समाधान CBSE बोर्ड की कक्षा 10 की मनिका (संस्कृत) पुस्तक के 'तिरुक्कुरल्-सूक्ति -सौरभम्' अध्याय के लिए है।

'तिरुक्कुरल्-सूक्ति -सौरभम्' का क्या अर्थ है?

इसका अर्थ है 'तिरुक्कुरल् की सूक्तियों की सुगंध', जो तिरुवल्लुवर द्वारा रचित महान ग्रंथ की ज्ञानवर्धक बातों को दर्शाता है।

समाधान में श्लोकों का क्या-क्या दिया गया है?

समाधान में प्रत्येक श्लोक का हिंदी अनुवाद, अन्वय (गद्य क्रम), भावार्थ (सारांश), शब्दार्थ और व्याकरणिक विश्लेषण (संधि, समास, प्रत्यय) प्रदान किया गया है।

क्या इन समाधानों से परीक्षा की तैयारी में मदद मिलेगी?

हाँ, ये समाधान श्लोकों की गहन समझ, व्याकरणिक अभ्यास और विभिन्न प्रकार के प्रश्नों के उत्तर देने की क्षमता विकसित करके परीक्षा की तैयारी में बहुत मदद करेंगे।

तिरुवल्लुवर कौन थे?

तिरुवल्लुवर एक महान तमिल कवि और दार्शनिक थे, जिन्हें 'तिरुक्कुरल्' नामक नीति ग्रंथ की रचना के लिए जाना जाता है।

श्लोक 1 में किस प्रकार के धन का उल्लेख है?

श्लोक 1 में 'विद्याधनं' अर्थात विद्या रूपी धन का उल्लेख है, जिसे पिता पुत्र को बचपन में प्रदान करता है।

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