कक्षा 10 मनिका: अध्याय 7 रमणीया की सृष्टि ऐषा NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 10 की मनिका पुस्तक के अध्याय 7, 'रमणीया की सृष्टि ऐषा' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह अध्याय प्रकृति की सुंदरता और उसके संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालता है। समाधान में पाठ का हिंदी अनुवाद, महत्वपूर्ण शब्दार्थ, संधि-विच्छेद, समास, प्रत्यय और अभ्यास प्रश्नों के उत्तर शामिल हैं। छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने, व्याकरणिक अवधारणाओं को मजबूत करने और परीक्षा के लिए प्रभावी ढंग से तैयारी करने में मदद करने के लिए प्रत्येक प्रश्न का उत्तर स्पष्ट और संक्षिप्त रूप से दिया गया है। यह संसाधन छात्रों को पाठ की बारीकियों को समझने और संस्कृत भाषा में अपनी दक्षता बढ़ाने में सहायता करेगा।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 10 |
| Subject | Manika |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | Chapter 7 रमणीया की सृष्टि ऐषा |
Chapter summary
कक्षा 10 मनिका के अध्याय 7 'रमणीया की सृष्टि ऐषा' के ये NCERT समाधान छात्रों को पाठ की विषय-वस्तु को समझने में मदद करते हैं। इसमें पाठ का हिंदी अनुवाद, कठिन शब्दों के अर्थ (संस्कृत-हिंदी-अंग्रेजी), संधि-विच्छेद, समास और प्रत्यय जैसी व्याकरणिक बारीकियों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। अभ्यास प्रश्नों के उत्तर विस्तृत रूप से दिए गए हैं, जिससे छात्रों को पाठ की समझ और भाषा कौशल दोनों को बेहतर बनाने में सहायता मिलती है।
Learning outcomes
- प्रकृति की सुंदरता और उसके संरक्षण के महत्व को समझना।
- पाठ 'रमणीया की सृष्टि ऐषा' का हिंदी में अनुवाद करना।
- दिए गए संस्कृत शब्दों के अर्थ (संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी) बताना।
- संधि-विच्छेद, समास और प्रत्यय जैसी व्याकरणिक अवधारणाओं को पहचानना और लागू करना।
- अभ्यास प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में देना।
Topics covered
Paper topics
- प्रकृति की सुंदरता
- पर्यावरण संरक्षण
- संस्कृत पाठ का हिंदी अनुवाद
- संस्कृत शब्दावली
- संधि-विच्छेद
- समास
- प्रत्यय
- व्याकरणिक कार्य
- संवाद लेखन (नाटिका)
- पात्र परिचय
- विश्व पर्यावरण दिवस
Important topics
- प्रकृति का संरक्षण क्यों महत्वपूर्ण है?
- पाठ 'रमणीया की सृष्टि ऐषा' का सार
- संधि और समास के नियम
- क्रियाओं के कर्तृपद की पहचान
- विशेषण-विशेष्य संबंध
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
- रङ्गमञ्चे कति पात्रे स्त:? (मंच पर कितने पात्र हैं?)
- का स्नेहेन पालयति? (कौन स्नेह से पालती है?)
यहाँ एकपद उत्तर के लिए प्रश्न और उनके उत्तर दिए गए हैं:
- रङ्गमञ्चे द्वे पात्रे स्त:। (मंच पर दो पात्र हैं।) स्पष्टीकरण: पाठ के अनुसार, नट और नटी मंच पर प्रवेश करते हैं, जो दो पात्र हैं।
- प्रकृति: स्नेहेन पालयति। (प्रकृति स्नेह से पालती है।) स्पष्टीकरण: पाठ में कहा गया है कि 'प्रकृति: माता सर्वान् स्नेहेन परिपालयति'।
प्रश्न 2
- सृष्टि: केन दूषिता न कर्त्तव्या? (सृष्टि को किससे दूषित नहीं करना चाहिए?)
- का सौन्दर्यमयी अस्ति? (कौन सी सुन्दर है?)
यहाँ पूर्ण वाक्य में उत्तर देने वाले प्रश्न और उनके उत्तर दिए गए हैं:
- सृष्टि: परस्परं कलहेन विवादेन च दूषिता न कर्त्तव्या। (सृष्टि को आपस में कलह और विवाद से दूषित नहीं करना चाहिए।) स्पष्टीकरण: पाठ में स्पष्ट रूप से यह निर्देश दिया गया है कि सृष्टि को आपस की लड़ाई और झगड़े से खराब नहीं करना चाहिए।
- इयं सृष्टि: अति सौन्दर्यमयी अस्ति। (यह सृष्टि बहुत ही सुन्दर है।) स्पष्टीकरण: पाठ के अनुसार, यह संसार या सृष्टि अत्यंत सुन्दर और मनमोहक है।
प्रश्न 3
- 'परिपालयति' इति क्रियायाः कर्तृपदम् किम्? ('परिपालयति' इस क्रिया का कर्ता पद क्या है?)
- (क) माता (ख) प्रकृति: (ग) भार्या (घ) पुत्री
- 'शुभे अवसरे' इति अनयो: पदयो: विशेषणपदं किम्? ('शुभे अवसरे' इन दोनों पदों में विशेषण पद कौन सा है?)
- (क) शुभ: (ख) अवसरे (ग) शुभे (घ) अवसर:
- 'एषा' इति सर्वनामपदस्य प्रयोग: कस्मै अभवत्? ('एषा' इस सर्वनाम पद का प्रयोग किसके लिए हुआ है?)
- (क) मात्रे (ख) तस्यै (ग) बालिकायै (घ) सृष्ट्यै
- 'विश्व पर्यावरणदिवस:' कस्मिन् मासे मन्यते? (विश्व पर्यावरण दिवस किस महीने में मनाया जाता है?)
- (क) मई मासे (ख) जून मासे (ग) अप्रैल मासे (घ) जुलाई मासे
यहाँ भाषाई कार्य से संबंधित प्रश्नों के उत्तर दिए गए हैं:
- 'परिपालयति' क्रिया का कर्ता पद (ख) प्रकृति: है। स्पष्टीकरण: वाक्य 'प्रकृति: माता सर्वान् स्नेहेन परिपालयति' में 'परिपालयति' (पालती है) क्रिया का कर्ता 'प्रकृति' है।
- 'शुभे अवसरे' में विशेषण पद (ग) शुभे है। स्पष्टीकरण: 'अवसर' (अवसर) एक संज्ञा है, और 'शुभे' (शुभ) उस अवसर की विशेषता बता रहा है, इसलिए 'शुभे' विशेषण है।
- 'एषा' सर्वनाम पद का प्रयोग (घ) सृष्ट्यै (सृष्टि के लिए) हुआ है। स्पष्टीकरण: पाठ के अंत में नाटिका का शीर्षक 'रमणीया हि सृष्टि: एषा' है, जहाँ 'एषा' सृष्टि के लिए प्रयुक्त हुआ है।
- 'विश्व पर्यावरणदिवस:' (ख) जून मासे (जून महीने में) मनाया जाता है। स्पष्टीकरण: पाठ में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि 'अद्य जूनमासस्य पञ्चमी तारिका। अद्य तु विश्वपर्यावरणदिवस:'।
प्रश्न 4
दिए गए उत्तरों के आधार पर प्रश्न बनाएँ।
- अद्य जून मासस्य पञ्चमी तारिका। (आज जून महीने की पाँच तारीख है।) प्रश्न: ?
- प्रकृति: माता सर्वान् स्नेहेन पालयति। (प्रकृति माता सभी को स्नेह से पालती है।) प्रश्न: ?
- रमणीया हि सृष्टि: एषा। (यह सृष्टि निश्चय ही बहुत सुन्दर है।) प्रश्न: ?
- रङ्गमञ्चे नटी नट: च प्रविशत:। (मंच पर नटी और नट प्रवेश करते हैं।) प्रश्न: ?
- अद्य विश्व पर्यावरणस्य दिवसः वर्तते। (आज विश्व पर्यावरण दिवस है।) प्रश्न: ?
यहाँ दिए गए उत्तरों के लिए प्रश्न निर्माण किया गया है:
- प्रश्न: अद्य कति (कितनी) तारिका? या अद्य कस्यां तारिकायाम्? (आज कौन सी तारीख है?) उत्तर: अद्य जून मासस्य पञ्चमी तारिका।
- प्रश्न: का सर्वान् स्नेहेन पालयति? (कौन सभी को स्नेह से पालती है?) उत्तर: प्रकृति: माता सर्वान् स्नेहेन पालयति।
- प्रश्न: सृष्टि: कीदृशी अस्ति? (सृष्टि कैसी है?) उत्तर: रमणीया हि सृष्टि: एषा।
- प्रश्न: रङ्गमञ्चे के प्रविशत:? (मंच पर कौन प्रवेश करते हैं?) उत्तर: रङ्गमञ्चे नटी नट: च प्रविशत:।
- प्रश्न: अद्य कस्य दिवसः वर्तते? (आज किसका दिवस है?) उत्तर: अद्य विश्व पर्यावरणस्य दिवसः वर्तते।
प्रश्न 5
निम्नलिखित शब्दों के विपरीतार्थक शब्द दिए गए विकल्पों में से चुनें:
- स्नेहेन (स्नेह से)
- वरिष्ठ: (बड़ा/श्रेष्ठ)
- नटी (अभिनेत्री)
- दूषिता (दूषित/गंदी)
- सौन्दर्यमयी (सुन्दर)
विकल्प:
- (क) नट: (अभिनेता)
- (ख) कुरूपा (कुरूप/बदसूरत)
- (ग) शुद्धा (शुद्ध/साफ)
- (घ) तिरस्कारेण (तिरस्कार से/घृणा से)
- (ङ) कनिष्ठ: (छोटा/निकृष्ट)
यहाँ दिए गए शब्दों के सही विपरीतार्थक शब्द चुने गए हैं:
- स्नेहेन (स्नेह से) का विपरीतार्थक शब्द है (घ) तिरस्कारेण (तिरस्कार से)।
- वरिष्ठ: (बड़ा/श्रेष्ठ) का विपरीतार्थक शब्द है (ङ) कनिष्ठ: (छोटा/निकृष्ट)।
- नटी (अभिनेत्री) का विपरीतार्थक शब्द है (क) नट: (अभिनेता)।
- दूषिता (दूषित/गंदी) का विपरीतार्थक शब्द है (ग) शुद्धा (शुद्ध/साफ)।
- सौन्दर्यमयी (सुन्दर) का विपरीतार्थक शब्द है (ख) कुरूपा (कुरूप/बदसूरत)।
प्रश्न 6
[स्थान: सरस्तीरम्! समय: प्रभातवेला। तत्र राजहंस: हंसी च विहरत:। नेपथ्ये काकध्वनि: श्रूयते।]
राजहंस: अये! किन्नु खलु सरस्तीरे विहरति मिय केनापि कर्कशै: 'का का' शब्दै: वातावरणम् आकुलीक्रियते?
राजहंसी: भर्तः! काकात् अन्यः को भवितुमर्हति? अस्य वर्णः अपि कृष्णः, कर्म अपि कृष्णम्। मेध्यम् अमेध्यं सर्वमेव भक्षयति। कर्णकटुशब्दै:-
काकः (प्रविश्य, सक्रोधम्) आः किम् उक्तवती भवती? यदि अहं कृष्णवर्णः तर्हि श्रीरामस्य वर्णः कीदृशः? श्रीवासुदेवस्य वर्णः कीदृशः? मुग्धे! अहं तु अतीव कर्तव्यपरायणः। प्रभाते 'का-का' ध्वनिना सुप्तान् प्रबोधयामि कर्मसु च विनियोजयामि।
राजहंसः: हुं! किमनेन? एतत् कार्यं तु कुक्कुटोऽपि करोति।
प्रश्न (क): राजहंस को कौवे की कौन सी बात अप्रिय लगी?
प्रश्न (ख): कौवे ने अपने काले रंग और कर्कश ध्वनि के बचाव में किनके उदाहरण दिए?
प्रश्न (ग): कौवे के अनुसार उसका क्या कर्तव्य है?
प्रश्न (घ): राजहंस ने कौवे के कार्य को किस अन्य पक्षी के कार्य के समान बताया?
पाठ के आधार पर प्रश्नों के उत्तर निम्नलिखित हैं:
प्रश्न (क): राजहंस को कौवे की कर्कश 'काँव-काँव' ध्वनि से वातावरण का दूषित होना अप्रिय लगा।
प्रश्न (ख): कौवे ने अपने काले रंग के बचाव में भगवान श्रीराम और श्रीवासुदेव (श्रीकृष्ण) के रंग का उदाहरण दिया।
प्रश्न (ग): कौवे के अनुसार उसका कर्तव्य है कि वह प्रभात काल में 'काँव-काँव' ध्वनि से सोए हुए लोगों को जगाए और उन्हें कर्मों में प्रवृत्त करे।
प्रश्न (घ): राजहंस ने कौवे के कार्य (जगाने का) को मुर्गे (कुक्कुट) के कार्य के समान बताया।
प्रश्न 7
निम्नलिखित शब्दों के अर्थ लिखें:
- रङ्गमञ्च:
- तारिका
- कनिष्ठ:
- नेपथ्ये
- मेध्यम्
- प्रविश्य
यहाँ दिए गए संस्कृत शब्दों के अर्थ संस्कृत, हिंदी और अंग्रेजी में दिए गए हैं:
- रङ्गमञ्च: - नाट्यमञ्च:, जहाँ नाटक आदि खेले जाते हैं (stage)।
- तारिका - दिनाङ्क:, तिथि (date)।
- कनिष्ठ - लघु:, छोटा (junior)।
- नेपथ्ये - परोक्षे, पर्दे के पीछे (Back ground)।
- मेध्यम् - शोधनम्, अच्छा (Good)।
- प्रविश्य - प्रवेशं कृत्वा, प्रवेश करके (After entry)।
प्रश्न 8
निम्नलिखित शब्दों का संधि-विच्छेद करें:
- प्राङ्गणे
- शुभावसरे
- कोऽपि
- सरस्तीरम्
- कुक्कुटोऽपि
- अतीव
- किन्त
यहाँ दिए गए शब्दों का संधि-विच्छेद और संधि का प्रकार बताया गया है:
- प्राङ्गणे - प्राम् + गणे (परसवर्ण सन्धि:)।
- शुभावसरे - शुभ + अवसरे (दीर्घसन्धि:)।
- कोऽपि - क: + अपि (विसर्गसन्धि:)।
- सरस्तीरम् - सर: + तीरम् (विसर्गसन्धि:)।
- कुक्कुटोऽपि - कुक्कुट: + अपि (पूर्वरूप सन्धि:)।
- अतीव - अति + इव (दीर्घसन्धि:)।
- किन्त - किम् + नु (परसवर्ण सन्धि:)।
प्रश्न 9
निम्नलिखित सामासिक पदों का विग्रह करें और समास का नाम बताएं:
- शुभावसरे
- हार्दिकम् अभिनन्दनम्
- रङ्गमञ्च:
- लघुनाटिकाया:
- प्रभातवेला
- काकध्वनि:
- सरस्तीरम्
यहाँ दिए गए सामासिक पदों का विग्रह और समास का नाम बताया गया है:
- शुभावसरे - शुभे अवसरे (कर्मधारय:)।
- हार्दिकम् अभिनन्दनम् - हार्दिकाभिनन्दनम् (कर्मधारयः)।
- रङ्गमञ्च: - रङ्गाय मञ्च: (चतुर्थी तत्पुरुष:)।
- लघुनाटिकाया: - लघ्वी नाटिका, तस्या: (कर्मधारय:)।
- प्रभातवेला - प्रभातस्य वेला (षष्ठी तत्पुरुष:)।
- काकध्वनि: - काकस्य ध्विन: (षष्ठी तत्पुरुष:)।
- सरस्तीरम् - सरसः तीरम् (षष्ठी तत्पुरुषः)।
प्रश्न 10
निम्नलिखित शब्दों में प्रयुक्त प्रत्यय बताएं:
- बद्ध्वा
- अभिनन्दनम्
- दूषिता
- कर्त्तव्या
- महत्त्वम्
- रमणीया
- वरिष्ठ:
यहाँ दिए गए शब्दों में प्रयुक्त प्रत्यय बताए गए हैं:
- बद्ध्वा – बध् + क्त्वा (क्त्वा प्रत्यय)।
- अभिनन्दनम् – अभि + नन्द् + ल्युट् (ल्युट् प्रत्यय)।
- दूषिता – दुषित + टाप् (टाप् प्रत्यय)।
- कर्त्तव्या – कृ + तव्यत् + टाप् (तव्यत् और टाप् प्रत्यय)।
- महत्त्वम् – महत् + त्व (त्व प्रत्यय)।
- रमणीया – रम् + अनीयर् + टाप् (अनीयर् और टाप् प्रत्यय)।
- वरिष्ठ: – वृत्र् + इष्ठन् (इष्ठन् प्रत्यय)।
Common mistakes
- संधि-विच्छेद करते समय नियमों को गलत लागू करना।
- समास की पहचान में त्रुटियाँ करना।
- क्रियाओं के कर्तृपद या विशेषण-विशेष्य पदों को पहचानने में गलती करना।
- शब्दार्थों को संदर्भ से हटकर समझना।
Revision tips
- पाठ के हिंदी अनुवाद को ध्यान से पढ़ें और मुख्य संदेश को समझें।
- शब्दावली अनुभाग से महत्वपूर्ण शब्दों को याद करें और वाक्यों में प्रयोग का अभ्यास करें।
- व्याकरण अनुभाग (संधि, समास, प्रत्यय) के नियमों को दोहराएं और अभ्यास प्रश्नों में उन्हें पहचानें।
- सभी अभ्यास प्रश्नों के उत्तरों को समझें, न कि केवल रटें।
Practice MCQs
Q1. पाठ के अनुसार, सृष्टि को किससे दूषित नहीं करना चाहिए?
Explanation: पाठ में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सृष्टि को आपस में कलह और विवाद से दूषित नहीं करना चाहिए।
Q2. प्रकृति माता सभी को कैसे पालती है?
Explanation: पाठ के अनुसार, प्रकृति माता सभी को स्नेह (प्यार) से परिपालयति (पालती है)।
Q3. 'शुभावसरे' शब्द में कौन सी संधि है?
Explanation: 'शुभावसरे' का संधि-विच्छेद 'शुभ + अवसरे' होता है, जिसमें 'अ + अ' मिलकर 'आ' बनाते हैं, जो दीर्घ संधि का उदाहरण है।
Q4. पाठ में कितने पात्रों का उल्लेख है?
Explanation: पाठ के आरंभ में नट और नटी का उल्लेख है, जो दो पात्र हैं।
Q5. विश्व पर्यावरण दिवस किस तारीख को मनाया जाता है?
Explanation: पाठ में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि 'अद्य जूनमासस्य पञ्चमी तारिका। अद्य तु विश्वपर्यावरणदिवस:'।
Frequently asked questions
यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए है?
यह NCERT समाधान कक्षा 10 की मनिका (संस्कृत) पुस्तक के अध्याय 7 'रमणीया की सृष्टि ऐषा' के लिए है।
समाधान में क्या-क्या शामिल है?
समाधान में पाठ का हिंदी अनुवाद, महत्वपूर्ण संस्कृत शब्दों के अर्थ (संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी में), संधि-विच्छेद, समास, प्रत्यय और अभ्यास प्रश्नों के विस्तृत उत्तर शामिल हैं।
यह समाधान छात्रों की परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेगा?
यह समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ प्रदान करता है, व्याकरणिक अवधारणाओं को स्पष्ट करता है, और अभ्यास प्रश्नों के उत्तर देकर उन्हें परीक्षा के लिए तैयार करता है।
क्या समाधान में पाठ के व्याकरणिक पहलुओं पर भी ध्यान दिया गया है?
हाँ, समाधान में संधि-विच्छेद, समास और प्रत्यय जैसे व्याकरणिक पहलुओं को विस्तार से समझाया गया है।
पाठ 'रमणीया की सृष्टि ऐषा' का मुख्य संदेश क्या है?
पाठ का मुख्य संदेश यह है कि सृष्टि अत्यंत सुंदर है और हमें इसे आपसी कलह और विवाद से दूषित नहीं करना चाहिए, क्योंकि प्रकृति माता सभी का समान रूप से पालन करती है।
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