कक्षा 10 मनिका: अध्याय 5 अभ्यासवशं मनः NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 10 मनिका के अध्याय 5, 'अभ्यासवशं मनः' (मन अभ्यास से वश में होता है) के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें श्लोकों का हिंदी अनुवाद, गद्यांश क्रम (अन्वय), शब्दार्थ, भावार्थ, संधि-विच्छेद, समास और प्रत्यय विश्लेषण शामिल हैं। समाधान छात्रों को श्लोकों के अर्थ को गहराई से समझने, व्याकरणिक संरचनाओं को पहचानने और संस्कृत भाषा की बारीकियों को सीखने में मदद करते हैं। यह अभ्यास छात्रों को श्लोकों के विभिन्न पहलुओं का विश्लेषण करने और उत्तर देने के लिए प्रोत्साहित करता है, जिससे परीक्षा की तैयारी में सहायता मिलती है।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
SubjectManika
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
ChapterChapter 5 अभ्यासवशगं मनः

Chapter summary

कक्षा 10 मनिका के अध्याय 5 'अभ्यासवशं मनः' के ये NCERT समाधान छात्रों को संस्कृत श्लोकों के अर्थ, व्याकरण और संरचना को समझने में मदद करते हैं। इसमें श्लोकों का अनुवाद, शब्दार्थ, भावार्थ, संधि, समास और प्रत्यय का विश्लेषण शामिल है। यह अभ्यास छात्रों को श्लोकों से संबंधित प्रश्नों के उत्तर देने और भाषा की गहरी समझ विकसित करने में सहायता करता है।

Learning outcomes

  • श्लोक 1 और 2 का हिंदी अनुवाद समझना।
  • दिए गए श्लोकों से संबंधित व्याकरणिक तत्वों (संधि, समास, प्रत्यय) की पहचान करना।
  • शब्दों के संस्कृत-हिंदी-अंग्रेजी अर्थों को समझना।
  • श्लोक के भावार्थ को स्पष्ट करना।
  • दिए गए श्लोकों के आधार पर प्रश्नों के उत्तर देना।

Topics covered

Paper topics

  • श्लोक 1 का हिंदी अनुवाद
  • श्लोक 2 का हिंदी अनुवाद
  • अन्वय (गद्यांश क्रम)
  • शब्दार्थ (संस्कृत-हिंदी-अंग्रेजी)
  • भावार्थ (सारांश)
  • संधि-विच्छेद
  • समास
  • प्रत्यय
  • व्याकरणिक कार्य (पर्यायवाची, सर्वनाम, अव्यय)
  • प्रश्न निर्माण
  • काम और क्रोध का स्वरूप
  • मनुष्य के पापकर्म का कारण

Important topics

  • श्लोक 1 और 2 का पूर्ण अनुवाद और भावार्थ
  • काम को शत्रु के रूप में समझना
  • संधि, समास और प्रत्यय का विश्लेषण
  • पापकर्म के कारणों की व्याख्या
  • व्याकरणिक अभ्यासों को हल करना

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

एकपदेन उत्तरत- अत्र श्रीकृष्णाय सम्बोधनपदम् किम्?
Solution:

इस प्रश्न में पूछा गया है कि श्लोक में श्रीकृष्ण के लिए किस संबोधन पद का प्रयोग किया गया है। श्लोक के आरम्भ में अर्जुन श्रीकृष्ण को संबोधित करते हुए कहते हैं, "वार्ष्णेय!"।

अतः, सही उत्तर है: वार्ष्णेय

प्रश्न 2

पूर्णवाक्येन उत्तरत- अनिच्छन् पुरुष: किम् करोति?
Solution:

यह प्रश्न पूछता है कि अनिच्छा होने पर भी मनुष्य क्या करता है। श्लोक के अनुसार, मनुष्य न चाहते हुए भी बलपूर्वक पाप कर्म में प्रवृत्त होता है।

पूर्ण वाक्य में उत्तर है: अनिच्छन् अपि पुरुषः पापं करोति। (न चाहते हुए भी मनुष्य पाप करता है।)

प्रश्न 3

भाषिककार्यम्-
  1. 'करोति' अस्य पर्याय: श्लोकात् एव चित्वा लिखत।
  • (क) गच्छति (ख) चरति (ग) नियोजित: (घ) प्रयुक्त:
Solution:

इस प्रश्न में 'करोति' (करता है) का श्लोक से पर्यायवाची शब्द चुनना है। श्लोक में 'पापं चरति' का प्रयोग हुआ है, जिसका अर्थ है 'पाप करता है'। इसलिए, 'करोति' का पर्यायवाची 'चरति' है।

सही विकल्प है: (ख) चरति

प्रश्न 4

  1. 'अयम्' इति सर्वनामपदस्य प्रयोगः कस्मै अभवत्?

(घ) पुरुषाय

Solution:

यह प्रश्न पूछता है कि 'अयम्' (यह) सर्वनाम पद किसके लिए प्रयुक्त हुआ है। श्लोक में 'अयं पूरुषः' कहा गया है, जिसका अर्थ है 'यह पुरुष'। इसलिए, 'अयम्' का प्रयोग 'पुरुष' के लिए हुआ है।

सही उत्तर है: पुरुषाय (अर्थात् पुरुष के लिए)।

प्रश्न 5

  1. 'न इच्छन्' इति स्थाने किम् अव्ययपदं प्रयुक्तम्?

(घ) इच्छत:

Solution:

यह प्रश्न पूछता है कि 'न इच्छन्' (न चाहने वाला) के स्थान पर कौन सा अव्यय पद प्रयुक्त हुआ है। श्लोक में 'अनिच्छन्' शब्द का प्रयोग हुआ है, जो 'न इच्छन्' का ही रूप है। समाधान में दिए गए विकल्पों में से 'अनिच्छन्' सही उत्तर है।

सही विकल्प है: (क) अनिच्छन् (यह विकल्प समाधान के भाग में दिया गया है, यद्यपि प्रश्न में (घ) लिखा है)।

प्रश्न 6

  1. 'इच्छन्' इति पदे क: प्रत्यय:?
  • (क) क्त (ख) क्तवतु (ग) शतृ (घ) शानच्
Solution:

यह प्रश्न 'इच्छन्' पद में प्रयुक्त प्रत्यय के बारे में पूछता है। 'इच्छन्' वर्तमानकालिक कृदंत है, जो 'इष्' धातु से 'शतृ' प्रत्यय के योग से बनता है। यह 'पुल्लिंग' में 'इच्छन्', 'नपुंसक' में 'इच्छत्' और 'स्त्रीलिंग' में 'इच्छन्ती' रूप में प्रयुक्त होता है।

सही विकल्प है: (ग) शतृ

प्रश्न 7

प्रश्निर्माणम्
  1. पुरुष: पापं चरति।
  2. अनिच्छन्निप पुरुष: पापं करोति।
  3. पुरुष: एव बलादिव नियुक्त: भवति।

उत्तराणि-(i) किम् (ii) कथम् (iii) कीदृश:।

Solution:

यह प्रश्न निर्माण का अभ्यास है, जहाँ दिए गए वाक्यों के लिए प्रश्नवाचक शब्द (किम्, कथम्, कीदृश:) का चयन करना है।

  1. पुरुष: पापं चरति। - यहाँ 'क्या करता है?' प्रश्न के लिए 'किम्' का प्रयोग होगा। प्रश्न: किम् चरति? (क्या करता है?)
  2. अनिच्छन्निप पुरुष: पापं करोति। - यहाँ 'कैसे पाप करता है?' प्रश्न के लिए 'कथम्' का प्रयोग होगा। प्रश्न: कथम् पापं करोति? (कैसे पाप करता है?)
  3. पुरुष: एव बलादिव नियुक्त: भवति। - यहाँ 'कैसा होता है?' या 'किस प्रकार का होता है?' प्रश्न के लिए 'कीदृश:' का प्रयोग होगा। प्रश्न: कीदृश: भवति? (कैसा होता है?)

प्रश्न 8

श्रीकृष्णः उवाच काम एष क्रोध एष रजोगुणसमुद्भवः। महाशनो महापाप्पा विद्ध्येनमिह वैरिणम्॥२॥
Solution:

यह प्रश्न श्लोक संख्या 2 का हिंदी अनुवाद प्रस्तुत करता है। श्रीकृष्ण कहते हैं कि रजोगुण से उत्पन्न होने वाला यह काम ही क्रोध है। यह अत्यंत भोगी (सब कुछ खाने वाला) और महापापी है। इसे ही इस संसार में अपना शत्रु समझो।

हिंदी अनुवाद: श्रीकृष्ण बोले- रजोगुण से उत्पन्न होने वाला यह काम ही क्रोध है। यह सब कुछ खाने वाला और महापापी है। इसे ही यहाँ (इस संसार में) शत्रु समझो।

प्रश्न 9

अन्वयं लिखत (Prose-order) काम एष क्रोध एष रजोगुणसमुद्भवः। महाशनो महापाप्पा विव्ध्येनमिह वैरिणम्॥२॥ रजोगुणसमुद्रभव: (i) काम: एष: (ii) महाशना: (iii) एनम् इह
  1. ..... विद्धि। मञ्जूषा - क्रोध:, वैरिणं, महापाप्मा, एष: उत्तराणि –(i) एष: (ii) क्रोध: (iii) महापाप्मा (iv) वैरिणं
Solution:

यह प्रश्न श्लोक 2 के गद्यांश क्रम (अन्वय) को पूरा करने के लिए है। दिए गए शब्दों को सही क्रम में रखकर श्लोक का अर्थ स्पष्ट किया जाता है।

सही अन्वय इस प्रकार है:

रजोगुणसमुद्भवः एष: काम: एष: क्रोध:। महाशना: (महापाप्मा) एनम् इह वैरिणं विद्धि।

अर्थात्, रजोगुण से उत्पन्न यह काम है, यह क्रोध है। इसे ही यहाँ (इस संसार में) महाभक्षक, महापापी शत्रु जानो।

मञ्जूषा के अनुसार उत्तर:

  1. (i) एष:
  2. (ii) क्रोध:
  3. (iii) महापाप्मा
  4. (iv) वैरिणं

प्रश्न 10

संस्कृते भावार्थः (Summary)

काम एष क्रोध एष रजोगुणसमुद्भवः। महाशनो महापाप्पा विव्ध्येनमिह वैरिणम्॥२॥ अस्य भावोऽस्ति-श्रीकृष्ण: (i) अवदत्-रजोगुणात् (ii) अयं काम: क्रोध: च अस्ति। एष: सर्वभोजी (iii) ..... च वर्तते। त्वम् अस्मिन् (शरीरे) एनम् एव (iv) ...... जानीहि। मञ्जूषा - समुत्पन्नः, शत्रुम्, अर्जुनम्, महापापी उत्तराणि-(i) अर्जुनम् (ii) समुत्पन्न: (iii) महापापी (iv) शत्रुम्

Solution:

यह प्रश्न श्लोक 2 के भावार्थ को पूरा करने के लिए है, जिसमें श्रीकृष्ण अर्जुन को काम और क्रोध के स्वरूप के बारे में समझा रहे हैं।

सही भावार्थ इस प्रकार है:

अस्य भावोऽस्ति-श्रीकृष्ण: अर्जुनम् अवदत्-रजोगुणात् समुत्पन्नः अयं काम: क्रोध: च अस्ति। एष: सर्वभोजी महापापी च वर्तते। त्वम् अस्मिन् (शरीरे) एनम् एव शत्रुम् जानीहि।

अर्थात्, इसका भाव यह है कि श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा - रजोगुण से उत्पन्न यह काम ही क्रोध है। यह सर्वभक्षी, महापापी है। तुम इसे ही (इस शरीर में) शत्रु जानो।

प्रश्न 11

समासाः (Compounds)

रजोगुणसमुद्भवः - रजोगुणात् समुद्भवः (पञ्चमी तत्पुरुषः)। महाशन: महत् अशनम् यस्य सः (बहुव्रीहिः)। महापाप्मा – महान् पाप्मा (कर्मधारय:)।

Solution:

यह प्रश्न दिए गए शब्दों के समास विग्रह और समास के प्रकार को स्पष्ट करता है।

  • रजोगुणसमुद्भवः: इसका विग्रह 'रजोगुणात् समुद्भवः' (रजोगुण से उत्पन्न) है और यह पंचमी तत्पुरुष समास है, क्योंकि इसमें 'से' (पंचमी विभक्ति) का लोप है।
  • महाशनः: इसका विग्रह 'महत् अशनम् यस्य सः' (जिसका भोजन महान् है) है और यह बहुव्रीहि समास है, क्योंकि यह किसी अन्य (काम/क्रोध) की विशेषता बता रहा है।
  • महापाप्मा: इसका विग्रह 'महान् पाप्मा' (महान् पाप) है और यह कर्मधारय समास है, क्योंकि इसमें विशेषण-विशेष्य भाव है।

Common mistakes

  • व्याकरणिक विश्लेषण में त्रुटियाँ (संधि, समास, प्रत्यय)।
  • शब्दार्थों को गलत समझना या गलत पर्याय चुनना।
  • श्लोक के भावार्थ को सही ढंग से व्यक्त न कर पाना।
  • अनुवाद में व्याकरणिक अशुद्धियाँ।

Revision tips

  • प्रत्येक श्लोक के हिंदी अनुवाद को ध्यान से पढ़ें और समझें।
  • संधि, समास और प्रत्यय के नियमों को दोहराने के लिए समाधान में दिए गए विश्लेषण का उपयोग करें।
  • शब्दार्थों को याद करने के लिए फ्लैशकार्ड या सूचियों का उपयोग करें।
  • अभ्यास प्रश्नों के उत्तर स्वयं देने का प्रयास करें और फिर समाधान से मिलान करें।

Practice MCQs

Q1. श्लोक 1 में अर्जुन ने श्रीकृष्ण को किस संबोधन पद से संबोधित किया है?

Q2. श्लोक 2 के अनुसार, काम और क्रोध किससे उत्पन्न होते हैं?

Q3. 'महाशनः' शब्द का क्या अर्थ है?

Q4. श्लोक 1 में 'पापं चरति' का क्या अर्थ है?

Q5. श्लोक 2 में किसे 'वैरिणम्' (शत्रु) कहा गया है?

Frequently asked questions

यह समाधान किस कक्षा और विषय के लिए है?

यह समाधान कक्षा 10 के मनिका (संस्कृत) विषय के लिए है, विशेष रूप से अध्याय 5 'अभ्यासवशं मनः' पर केंद्रित है।

इन समाधानों में क्या शामिल है?

इन समाधानों में श्लोकों का हिंदी अनुवाद, शब्दार्थ, भावार्थ, संधि-विच्छेद, समास, प्रत्यय विश्लेषण और व्याकरणिक अभ्यास शामिल हैं।

यह समाधान छात्रों की परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेगा?

यह समाधान छात्रों को श्लोकों के अर्थ, व्याकरणिक संरचनाओं और महत्वपूर्ण अवधारणाओं को समझने में मदद करता है, जिससे वे परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों का उत्तर देने के लिए बेहतर ढंग से तैयार हो सकें।

क्या इन समाधानों में केवल अनुवाद दिया गया है?

नहीं, अनुवाद के अलावा, समाधानों में व्याकरणिक विश्लेषण (संधि, समास, प्रत्यय), शब्दार्थ और श्लोकों का भावार्थ भी शामिल है, जो विषय की गहरी समझ प्रदान करते हैं।

श्लोक 1 में अर्जुन ने श्रीकृष्ण से क्या प्रश्न पूछा है?

अर्जुन ने पूछा है कि मनुष्य न चाहते हुए भी, किसके द्वारा प्रेरित होकर बलपूर्वक पाप कर्म करता है।

श्लोक 2 में श्रीकृष्ण ने किसे शत्रु बताया है?

श्रीकृष्ण ने काम (इच्छा) को ही क्रोध का रूप बताते हुए उसे महाभक्षक, महापापी और इस संसार में शत्रु बताया है।

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