कक्षा 10 मनिका: अध्याय 2 आज्ञा गुरूणां हि अविचारणीया NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 10 मनिका के लिए "आज्ञा गुरूणां हि अविचारणीया" अध्याय के NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह अध्याय हमें सिखाता है कि घर में होने वाले अनावश्यक झगड़ों से दूर रहना चाहिए, क्योंकि ये विनाश का कारण बन सकते हैं। समाधान में श्लोक का अन्वय, भावार्थ, शब्दार्थ, समास, संधि-विच्छेद और प्रत्यय शामिल हैं। प्रश्नों के उत्तर विस्तृत रूप से दिए गए हैं, जिससे छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने में मदद मिलती है। ये समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी में सहायता करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, जो उन्हें अवधारणाओं को स्पष्ट करने और महत्वपूर्ण विषयों को याद रखने में मदद करते हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 10 |
| Subject | Manika |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | Chapter 2 आज्ञा गुरूणां हि अविचारणीया |
Chapter summary
कक्षा 10 मनिका के अध्याय 2 "आज्ञा गुरूणां हि अविचारणीया" के ये NCERT समाधान छात्रों को श्लोक के माध्यम से घर में होने वाले झगड़ों के दुष्परिणामों को समझने में मदद करते हैं। समाधान में श्लोक का अन्वय, भावार्थ, शब्दार्थ, समास, संधि-विच्छेद और प्रत्यय का विस्तृत विश्लेषण शामिल है। यह छात्रों को व्याकरणिक पहलुओं और पाठ के अर्थ को समझने में सहायता करता है, जिससे वे परीक्षा के लिए बेहतर तैयारी कर सकें।
Learning outcomes
- श्लोक 'तस्मात् स्यात् कलहो यत्र...' का अन्वय और भावार्थ समझना।
- दिए गए गद्यांश से एकपद और पूर्णवाक्य उत्तर देना।
- गद्यांश से विशेष्य और कर्तृपद पहचानना।
- 'एकान्ते' और 'भाजनम्' जैसे शब्दों के पर्यायवाची खोजना।
- दिए गए वाक्यों के लिए प्रश्न निर्माण करना।
- दूसरे श्लोक के हिंदी अनुवाद और उसके महत्व को समझना।
Topics covered
Paper topics
- श्लोक का अन्वय
- श्लोक का भावार्थ
- शब्दार्थ (संस्कृत-हिंदी-अंग्रेजी)
- समास
- संधि-विच्छेद
- प्रत्यय
- एकपद उत्तर
- पूर्णवाक्य उत्तर
- भाषिक कार्य (पर्यायवाची, विशेष्य, कर्तृपद)
- प्रश्न निर्माण
- द्वितीय श्लोक का अनुवाद
- झगड़ों के दुष्परिणाम
Important topics
- श्लोक का अन्वय और भावार्थ
- व्याकरणिक अभ्यास (समास, संधि-विच्छेद, प्रत्यय)
- गद्यांश आधारित प्रश्नोत्तर
- प्रश्न निर्माण
- झगड़ों से बचने का संदेश
PDF preview
Read page by page below. PDF is streamed from the official NCERT website — no download button on this page.
Questions and Solutions
प्रश्न 1: एकपद में उत्तर दें।
- राजा का नाम चन्द्र था।
- आपसी झगड़ा (कलह) बन्दरों के विनाश का कारण बनेगा।
प्रश्न 2: पूर्ण वाक्य में उत्तर दें।
- वानर-यूथपति ने एकांत में बात कही।
- वनर-यूथपति ने बन्दरों को एकांत में बुलाया और उनसे बात की।
प्रश्न 3: भाषिक कार्य।
- 'एकान्ते' इति अर्थे किं पदं प्रयुक्तम्?
- (क) रहसि
- (ख) अवेक्ष्य
- (ग) आशु
- (घ) पुष्टिम्
- 'बालवाहनयोग्यम्' इति पदस्य विशेष्यपदं किम्?
- (क) मेषम्
- (ग) मेषयूथम्
- (घ) वानरयूथम्
- 'ताडयन्ति स्म' इति क्रियायाः कर्तृपदं किम्?
- (क) बालकाः
- (ख) राजपुत्राः
- (ग) वानरा:
- (घ) सूपकाराः
- 'भाजनम्' इति पदस्य पर्यायपदं गद्यांशात् एव चित्वा लिखत।
- (क) कलहं
- (ख) पात्रं
- (ग) मृणत्यं
- (घ) काष्ठं
- सही उत्तर है (क) रहसि। 'रहसि' शब्द का अर्थ एकांत होता है।
- सही उत्तर है (ग) मेषयूथम्। 'बालवाहनयोग्यम्' (बच्चों की सवारी के योग्य) विशेषण मेषयूथम् (भेड़ों के झुंड) के लिए प्रयुक्त हुआ है।
- सही उत्तर है (घ) सूपकाराः। रसोइए (सूपकार) भेड़ को पीटते थे, इसलिए 'ताडयन्ति स्म' क्रिया का कर्ता 'सूपकाराः' है।
- सही उत्तर है (ख) पात्रं। गद्यांश में 'भाजनम्' के स्थान पर 'पात्रं' शब्द का प्रयोग हुआ है, जिसका अर्थ बर्तन होता है।
प्रश्न 4: प्रश्न निर्माण करें।
- यूथपः सर्वान् कपीन् आहूय रहसि अवदत्।
- कस्मिंश्चित् नगरे चन्द्रो नाम भूपतिः प्रतिवसित स्म ।
- एतेषां कलहः न वानराणां हिताय।
- राजपुत्राः वानस्यूथं नित्यं पुष्टिं नयन्ति स्म।
- तेन तम् आशु ताडयन्ति स्म।
- यूथपः सर्वान् कपीन् आहूय कुत्र अवदत्? (वनर-यूथपति ने सभी बन्दरों को बुलाकर कहाँ कहा?)
- किम् नगरे चन्द्रो नाम भूपतिः प्रतिवसित स्म? (किस नगर में चन्द्र नाम का राजा रहता था?)
- केषाम् कलहः न वानराणां हिताय? (किसका झगड़ा बन्दरों के हित में नहीं था?)
- के वानरयूथं नित्यं पुष्टिं नयन्ति स्म? (राजकुमार कौन थे जो बन्दरों को नित्य पुष्ट करते थे?)
- सूपकाराः कम् आशु ताडयन्ति स्म? (रसोइए किसे शीघ्र पीटते थे?)
प्रश्न 5: दूसरे श्लोक का हिंदी अनुवाद करें।
इसीलिए कहीं हम सभी का विनाश न हो जाए, इसीलिए राजभवन को छोड़कर वन को जाते हैं। क्योंकि—झगड़ों से राजमहलों का अंत हो जाता है। बुरे वाक्य बोलने से मित्रता का विनाश हो जाता है। बुरे शासन से देश का विनाश हो जाता है। दुष्कर्म से मनुष्यों का यश नष्ट हो जाता है।
Common mistakes
- अनावश्यक झगड़ों को अनदेखा करना या उनमें शामिल होना।
- श्लोक के भावार्थ को गलत समझना।
- व्याकरणिक अभ्यासों में गलतियाँ करना, जैसे कि सही पद या पर्यायवाची न चुन पाना।
- प्रश्न निर्माण करते समय सही प्रश्नवाचक शब्द का चयन न कर पाना।
Revision tips
- श्लोक के अर्थ को अपने शब्दों में समझने का प्रयास करें।
- सभी व्याकरणिक अभ्यासों (अन्वय, संधि-विच्छेद, प्रत्यय, समास) का अभ्यास करें।
- दिए गए गद्यांश को ध्यान से पढ़ें और मुख्य बिंदुओं को नोट करें।
- प्रश्न निर्माण अभ्यास को हल करने के लिए रेखांकित शब्दों पर ध्यान केंद्रित करें।
Practice MCQs
Q1. जिस घर में नित्य बिना कारण झगड़ा होता है, उस घर को क्या करना चाहिए?
Explanation: श्लोक के अनुसार, जिस घर में नित्य बिना कारण झगड़ा होता है, उसे जीवन चाहने वाले व्यक्ति को दूर से ही छोड़ देना चाहिए।
Q2. वानरों के स्वामी ने रसोइयों और भेड़ के झगड़े को देखकर क्या सोचा?
Explanation: वानर-यूथपति ने सोचा कि रसोइयों और भेड़ के बीच का यह झगड़ा बन्दरों के हित के लिए नहीं है और यह उनके विनाश का कारण बन सकता है।
Q3. गद्यांश में 'अहर्निशम्' शब्द का क्या अर्थ है?
Explanation: 'अहर्निशम्' का अर्थ है दिन और रात, अर्थात लगातार या चौबीसों घंटे।
Q4. दूसरे श्लोक के अनुसार, बुरे शासन से किसका अंत हो जाता है?
Explanation: दूसरे श्लोक में बताया गया है कि कुराजान्तानि राष्ट्राणि अर्थात् बुरे शासन से देशों का अंत हो जाता है।
Q5. 'ताडयन्ति स्म' क्रिया का कर्तृपद क्या है?
Explanation: गद्यांश के अनुसार, रसोइए (सूपकार) भेड़ को पीटते थे, इसलिए 'ताडयन्ति स्म' क्रिया का कर्तृपद 'सूपकाराः' है।
Frequently asked questions
यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए है?
यह NCERT समाधान कक्षा 10 की मनिका (संस्कृत) पुस्तक के अध्याय 2 'आज्ञा गुरूणां हि अविचारणीया' के लिए है।
इस अध्याय का मुख्य संदेश क्या है?
इस अध्याय का मुख्य संदेश यह है कि घर में होने वाले अनावश्यक झगड़ों से दूर रहना चाहिए, क्योंकि वे विनाश का कारण बन सकते हैं। साथ ही, बुरे शासन और दुष्कर्म के परिणामों पर भी प्रकाश डाला गया है।
समाधान में कौन-कौन से व्याकरणिक बिंदु शामिल हैं?
समाधान में समास, संधि-विच्छेद और प्रत्यय जैसे व्याकरणिक बिंदुओं का विस्तृत विश्लेषण शामिल है।
क्या इन समाधानों से परीक्षा की तैयारी में मदद मिलेगी?
हाँ, ये समाधान विस्तृत उत्तर, व्याकरणिक स्पष्टीकरण और अभ्यास प्रश्न प्रदान करते हैं, जो छात्रों को परीक्षा की तैयारी में बहुत मदद करेंगे।
श्लोक 'तस्मात् स्यात् कलहो यत्र...' का क्या अर्थ है?
इस श्लोक का अर्थ है कि जिस घर में नित्य बिना कारण झगड़ा होता है, उस घर को जीवन चाहने वाले व्यक्ति को दूर से ही छोड़ देना चाहिए।
Content reviewed by the NCERT Help team. Editorial Team and update policy
NCERT Solutions PDF PDF on NCERT Help. URL unchanged for search indexing.