कक्षा 9 हिंदी स्पर्श गद्य खंड: धर्म की आड़ - गणेशशंकर विद्यार्थी NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 9 के हिंदी स्पर्श गद्य खंड के पाठ 'धर्म की आड़' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। गणेशशंकर विद्यार्थी द्वारा लिखित यह पाठ धर्म के नाम पर होने वाले पाखंड और शोषण का पर्दाफाश करता है। समाधानों में पाठ के सभी प्रश्नों के उत्तर स्पष्ट और सरल भाषा में दिए गए हैं, जो छात्रों को धर्म के वास्तविक अर्थ और समाज में इसके दुरुपयोग को समझने में मदद करते हैं। यह पाठ बताता है कि कैसे कुछ चालाक लोग धर्म के नाम पर आम जनता की भावनाओं का फायदा उठाते हैं और अपने स्वार्थ सिद्ध करते हैं। समाधान छात्रों को इन सामाजिक बुराइयों को पहचानने और धर्म के सही स्वरूप को समझने के लिए प्रेरित करते हैं। ये समाधान परीक्षा की तैयारी के लिए अत्यंत उपयोगी हैं, क्योंकि ये पाठ की गहरी समझ प्रदान करते हैं और महत्वपूर्ण अवधारणाओं को स्पष्ट करते हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 9 |
| Subject | हिंदी |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | Gadd Khand - Ganeshshankar Vidyathi – Dharm Ki Aad |
Chapter summary
कक्षा 9 के हिंदी स्पर्श गद्य खंड के पाठ 'धर्म की आड़' के ये NCERT समाधान छात्रों को गणेशशंकर विद्यार्थी द्वारा प्रस्तुत धर्म के नाम पर होने वाले शोषण और पाखंड के विषय को समझने में सहायता करते हैं। समाधान पाठ के मुख्य प्रश्नों का उत्तर देते हैं, जिसमें बताया गया है कि कैसे कुछ लोग धर्म का दुरुपयोग करते हैं और आम जनता को गुमराह करते हैं। यह पाठ धर्म की सच्ची भावना और समाज में इसके सही स्थान पर प्रकाश डालता है, साथ ही धर्म के नाम पर होने वाले व्यापार को रोकने के उपायों पर भी चर्चा करता है।
Learning outcomes
- धर्म के नाम पर होने वाले शोषण और पाखंड को पहचानना।
- लेखक के विचारों को समझना कि धर्म की सच्ची भावना क्या है।
- आम जनता की भावनाओं का दुरुपयोग कैसे किया जाता है, इसका विश्लेषण करना।
- देश की स्वाधीनता और धार्मिक सहिष्णुता के महत्व को समझना।
- सामाजिक बुराइयों के प्रति आलोचनात्मक दृष्टिकोण विकसित करना।
Topics covered
Paper topics
- धर्म के नाम पर पाखंड
- धार्मिक शोषण
- आम जनता का शोषण
- धर्म की सच्ची भावना
- लेखक के विचार
- सामाजिक बुराइयां
- धार्मिक सहिष्णुता
- बुद्धि पर कब्जा
- स्वार्थ सिद्धि
- देश की स्वाधीनता
Important topics
- धर्म के नाम पर पाखंड और शोषण
- धर्म की सच्ची भावना और उसका स्वरूप
- लेखक द्वारा वर्णित सामाजिक बुराइयां
- आम जनता की भावनाओं का दुरुपयोग
- धार्मिक सहिष्णुता का महत्व
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Questions and Solutions
प्रश्न 1:
प्रश्न 2:
प्रश्न 3:
प्रश्न 4:
प्रश्न 5:
प्रश्न 6:
खंड – ख
प्रश्न 1:
प्रश्न 2:
प्रश्न 3:
Common mistakes
- धर्म के नाम पर होने वाले पाखंड को वास्तविक धर्म समझ लेना।
- लेखक के विचारों की गहराई को न समझ पाना।
- धार्मिक भावनाओं का दुरुपयोग करने वालों को पहचान न पाना।
- धर्म और अंधविश्वास के बीच अंतर स्पष्ट न कर पाना।
Revision tips
- पाठ के मुख्य विचारों को सारांशित करें और धर्म के दुरुपयोग के उदाहरणों को नोट करें।
- प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को अपने शब्दों में लिखने का अभ्यास करें।
- लेखक के विचारों पर ध्यान केंद्रित करें, विशेष रूप से धर्म की सच्ची भावना के बारे में।
- परीक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण लगने वाले प्रश्नों और उनके उत्तरों को दोहराएं।
Practice MCQs
Q1. चलते-पुरजे लोग धर्म के नाम पर क्या करते हैं?
Explanation: लेखक के अनुसार, कुछ चालाक लोग अपनी बड़प्पन बनाए रखने के लिए अनपढ़ और उत्साही लोगों का धर्म के नाम पर गलत इस्तेमाल करते हैं।
Q2. चालाक लोग साधारण आदमी की किस अवस्था का लाभ उठाते हैं?
Explanation: चालाक लोग आम आदमी के मन में यह बात बिठा देते हैं कि धर्म और ईमान की रक्षा के लिए प्राण तक दे देना चाहिए, और इसी का वे लाभ उठाते हैं।
Q3. आने वाला समय किस प्रकार के धर्म को नहीं टिकने देगा?
Explanation: लेखक का मानना है कि भविष्य में वह धर्म नहीं टिकेगा जो लोगों को आपस में लड़ाकर अपना स्वार्थ साधता है।
Q4. लेखक की दृष्टि में धर्म की भावना कैसी होनी चाहिए?
Explanation: लेखक के अनुसार, धर्म आत्मा को शुद्ध करने और ऊंचा उठाने का साधन होना चाहिए, न कि किसी की स्वाधीनता छीनने का।
Q5. 'बुद्धि पर मार' के संबंध में लेखक का क्या विचार है?
Explanation: लेखक का मानना है कि कुछ स्वयंभू मसीहा धर्म के नाम पर भोली जनता की बुद्धि पर कब्जा कर लेते हैं और उन्हें अपना गुलाम बना लेते हैं।
Frequently asked questions
कक्षा 9 हिंदी स्पर्श गद्य खंड के पाठ 'धर्म की आड़' में मुख्य रूप से क्या समझाया गया है?
इस पाठ में गणेशशंकर विद्यार्थी ने धर्म के नाम पर होने वाले पाखंड, शोषण और जनता को गुमराह करने की प्रवृत्ति का पर्दाफाश किया है। यह धर्म की सच्ची भावना और समाज में इसके सही स्थान पर भी प्रकाश डालता है।
लेखक के अनुसार, धर्म के नाम पर होने वाले व्यापार को कैसे रोका जा सकता है?
लेखक का मानना है कि इस व्यापार को रोकने के लिए सभी को धर्म से ऊपर उठकर देश के बारे में सोचना होगा और ऐसे लोगों को स्पष्ट जवाब देना होगा कि वे अब उनकी बातों में आने वाले नहीं हैं।
पाठ 'धर्म की आड़' में 'बुद्धि पर मार' से क्या तात्पर्य है?
'बुद्धि पर मार' से लेखक का तात्पर्य है कि कुछ लोग धर्म के नाम पर भोली-भाली जनता को डराकर उनकी बुद्धि पर कब्जा कर लेते हैं और उन्हें अपने अनुसार कार्य करने के लिए विवश करते हैं।
लेखक धर्म की भावना को कैसा मानते हैं?
लेखक के अनुसार, धर्म आत्मा को शुद्ध करने और ऊंचा उठाने का साधन होना चाहिए। यह मन का सौदा हो, ईश्वर और आत्मा के बीच का संबंध हो, और किसी भी दशा में दूसरे की स्वाधीनता को छीनने का साधन न बने।
यह NCERT समाधान कक्षा 9 के छात्रों के लिए कैसे उपयोगी हैं?
ये समाधान पाठ की गहरी समझ प्रदान करते हैं, महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर स्पष्ट करते हैं और छात्रों को परीक्षा की तैयारी में मदद करते हैं। ये धर्म के वास्तविक अर्थ और सामाजिक मुद्दों पर आलोचनात्मक सोच विकसित करने में भी सहायक हैं।
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