कक्षा 9 हिंदी स्पर्श गद्य खंड: तुम कब जाओगे, अतिथि - NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 9 की हिंदी पुस्तक 'स्पर्श' के गद्य खंड के पाठ 'तुम कब जाओगे, अतिथि' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह पाठ शरद जोशी द्वारा लिखित है और एक अनचाहे अतिथि के मेजबान पर पड़ने वाले प्रभाव को दर्शाता है। समाधानों में लेखक की भावनाओं, अतिथि के व्यवहार के विभिन्न पहलुओं और भारतीय संस्कृति में अतिथि सत्कार की परंपरा पर प्रकाश डाला गया है। पाठ के मुख्य कथनों की व्याख्या की गई है, जैसे कि 'अंदर ही अंदर कहीं मेरा बटुआ काँप गया' और 'एक देवता और एक मनुष्य अधिक देर तक साथ नहीं रह सकते'। ये समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। छात्र इन समाधानों का उपयोग पाठ के केंद्रीय विचारों को समझने, लेखक के व्यंग्य को पहचानने और परीक्षा में पूछे जाने वाले विभिन्न प्रकार के प्रश्नों के उत्तर देने के लिए कर सकते हैं। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर स्पष्ट और संक्षिप्त तरीके से दिया गया है, जिससे छात्रों को मुख्य बिंदुओं को याद रखने में आसानी होती है। यह संसाधन छात्रों को पाठ के सार को आत्मसात करने और हिंदी विषय में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने में सहायता करेगा।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 9 |
| Subject | हिंदी |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | Gadd Khand - Sharad Joshi – Tum Kab Jaoge, Atithi |
Chapter summary
कक्षा 9 हिंदी स्पर्श गद्य खंड के पाठ 'तुम कब जाओगे, अतिथि' के लिए ये NCERT समाधान छात्रों को पाठ की गहन समझ प्रदान करते हैं। समाधानों में लेखक की अतिथि के प्रति बदलती भावनाओं, उसके बढ़ते असंतोष और अतिथि के लंबे समय तक रुकने से उत्पन्न होने वाली सामाजिक और आर्थिक समस्याओं का विश्लेषण किया गया है। पाठ के महत्वपूर्ण कथनों और पंक्तियों की विस्तृत व्याख्या शामिल है, जो छात्रों को लेखक के व्यंग्य और संदेश को समझने में मदद करती है। यह खंड छात्रों को अतिथि सत्कार की भारतीय परंपरा और उसके व्यावहारिक पहलुओं पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
Learning outcomes
- लेखक की अतिथि के प्रति बदलती भावनाओं को समझना।
- पाठ में प्रयुक्त व्यंग्य और हास्य को पहचानना।
- भारतीय संस्कृति में अतिथि सत्कार के महत्व और सीमाओं का विश्लेषण करना।
- पाठ के महत्वपूर्ण कथनों और पंक्तियों की व्याख्या करना।
- अतिथि के लंबे समय तक रुकने के सामाजिक और आर्थिक प्रभावों का मूल्यांकन करना।
Topics covered
Paper topics
- अतिथि सत्कार की परंपरा
- अनचाहे अतिथि का प्रभाव
- लेखक का व्यंग्य
- आर्थिक और सामाजिक दबाव
- मानवीय सम्बन्धों में बदलाव
- पाठ के महत्वपूर्ण कथन
- शरद जोशी की लेखन शैली
- भारतीय संस्कृति और अतिथि
Important topics
- अनचाहे अतिथि का मेजबान पर प्रभाव
- लेखक के व्यंग्यात्मक विचार
- अतिथि सत्कार की सीमाओं का विश्लेषण
- पाठ के महत्वपूर्ण कथनों की व्याख्या
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Questions and Solutions
प्रश्न 1:
प्रश्न 2:
पाठ के निम्नलिखित कथनों की व्याख्या इस प्रकार है:
- (क) अंदर ही अंदर कहीं मेरा बटुआ काँप गया । इस कथन का आशय यह है कि जब लेखक के घर में एक अनचाहा अतिथि आ गया, तो उसे इस बात की चिंता सताने लगी कि उसे अतिथि की खूब खातिरदारी करनी पड़ेगी। आज के महंगाई के दौर में घर चलाना ही एक बड़ी चुनौती है, ऐसे में अतिथि के आने से होने वाले अतिरिक्त खर्च का विचार करके लेखक का बटुआ (यानी उसका बजट) अंदर ही अंदर काँप उठा, अर्थात वह आर्थिक रूप से चिंतित हो गया।
- (ख) अतिथि सदैव देवता नहीं होता ,वह मानव और थोड़े अंशों में राक्षस भी हो सकता हैं । भारतीय संस्कृति में अतिथि को देवता तुल्य माना जाता है और उसका आदर-सत्कार किया जाता है। लेकिन, जब कोई अतिथि आवश्यकता से अधिक समय तक रुककर मेजबान के लिए परेशानी का कारण बन जाता है, तो उसका देवता जैसा सम्मान कम होने लगता है। ऐसी स्थिति में, वह केवल एक मानव ही नहीं, बल्कि कुछ हद तक राक्षस जैसा भी प्रतीत हो सकता है, क्योंकि वह मेजबान के लिए बोझ और कष्ट का कारण बन जाता है।
- (ग) लोग दूसरे के होम की स्वीटनेस को काटने न दौड़ें । 'स्वीट होम' अर्थात घर वह स्थान होता है जहाँ व्यक्ति को सबसे अधिक सुख और शांति मिलती है। यह घर की मिठास या मधुरता होती है जो व्यक्ति को अपनेपन का अहसास कराती है। इस पंक्ति का अर्थ है कि किसी को भी दूसरों के घर के इस सुखद और मधुर माहौल को बिगाड़ने का प्रयास नहीं करना चाहिए। अर्थात, किसी के घर की शांति और खुशी को भंग करने का कारण नहीं बनना चाहिए।
- (घ) मेरी सहनशीलता की की वह अंतिम सुबह होगी । लेखक अपने अतिथि को पिछले चार दिनों से झेल रहा था और अब उसकी सहनशक्ति जवाब देने लगी थी। स्थिति इतनी बिगड़ गई थी कि पकवान से लेकर खिचड़ी तक पर आ गई थी और दोनों के बीच बातचीत भी बंद हो गई थी। लेखक मन ही मन अतिथि को कोस रहा था और यह सोचने लगा था कि यदि अगले दिन भी अतिथि नहीं गया, तो उसकी सहनशीलता की सीमा समाप्त हो जाएगी और वह शायद उसे अपमानित करके भी घर से निकालने पर मजबूर हो जाए।
- (ङ) एक देवता और एक मनुष्य अधिक देर तक साथ नहीं रह सकते इस कथन का अर्थ है कि देवता और मनुष्य दोनों अपने-अपने स्थान पर ही शोभा पाते हैं। देवता मंदिर में पूजनीय होते हैं और मनुष्य समाज में। अतिथि को देवता इसलिए कहा जाता है क्योंकि वह थोड़े समय के लिए आता है और अपनी उपस्थिति से माहौल को खुशनुमा बना देता है, ठीक वैसे ही जैसे भगवान भक्त को दर्शन देकर चले जाते हैं। दोनों के बीच दूरी बनी रहने के कारण ही प्रेम और सम्मान का भाव बना रहता है। यदि वे बहुत अधिक समय तक साथ रहें, तो उनके बीच मन-मुटाव बढ़ सकता है और यह रिश्ता खराब हो सकता है।
प्रश्न 1:
प्रश्न 2:
Common mistakes
- पाठ के व्यंग्यात्मक लहजे को समझने में चूक।
- अतिथि सत्कार की परंपरा के व्यावहारिक पहलुओं को नजरअंदाज करना।
- लेखक की आंतरिक भावनाओं और बाहरी व्यवहार के बीच अंतर को न समझ पाना।
Revision tips
- पाठ को कम से कम दो बार ध्यान से पढ़ें, विशेषकर लेखक के विचारों पर ध्यान केंद्रित करें।
- प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को अपने शब्दों में लिखने का अभ्यास करें।
- पाठ के महत्वपूर्ण कथनों को याद करें और उनकी व्याख्या करने का प्रयास करें।
- अतिथि सत्कार की परंपरा से जुड़े सामाजिक और आर्थिक पहलुओं पर विचार करें।
Practice MCQs
Q1. लेखक अपने अतिथि को किस प्रकार की विदाई देना चाहता था?
Explanation: लेखक चाहता था कि अतिथि एक अच्छी यादें लेकर जाए, इसलिए वह भावभीनी विदाई देना चाहता था।
Q2. पाठ में 'मेरा बटुआ काँप गया' इस कथन का क्या अर्थ है?
Explanation: महंगाई के दौर में अतिथि के आने और उसकी खातिरदारी के खयाल से लेखक को होने वाले अतिरिक्त खर्च की चिंता सता रही थी।
Q3. लेखक के अनुसार, 'एक देवता और एक मनुष्य अधिक देर तक साथ नहीं रह सकते' क्यों?
Explanation: यह पंक्ति बताती है कि दूरी के कारण ही देवता और मनुष्य के बीच सम्मान और प्रेम बना रहता है, साथ रहने से यह भाव कम हो सकता है।
Q4. अतिथि का कपड़े धुलवाने का अनुरोध लेखक के लिए कैसा आघात था?
Explanation: यह अनुरोध अप्रत्याशित था क्योंकि इससे अतिथि के और रुकने का संकेत मिलता था, जो लेखक के लिए असहनीय होता जा रहा था।
Q5. पाठ में 'सम्बन्धों का संक्रमण का दौर' से क्या तात्पर्य है?
Explanation: जब अतिथि लंबे समय तक रुककर बोझ बनने लगा, तो घर के लोगों का व्यवहार बदल गया, जिससे सम्बन्धों में खटास आ गई।
Frequently asked questions
कक्षा 9 हिंदी के 'तुम कब जाओगे, अतिथि' पाठ के मुख्य विषय क्या हैं?
इस पाठ का मुख्य विषय अनचाहे अतिथि का मेजबान पर पड़ने वाला आर्थिक, सामाजिक और मानसिक प्रभाव है। यह अतिथि सत्कार की भारतीय परंपरा और उसकी सीमाओं पर भी प्रकाश डालता है।
लेखक अतिथि को कैसी विदाई देना चाहता था?
लेखक अपने अतिथि को एक भावभीनी और यादगार विदाई देना चाहता था, ताकि अतिथि उसके घर की अच्छी यादें लेकर जाए।
पाठ में 'मेरा बटुआ काँप गया' इस वाक्य का क्या अर्थ है?
इस वाक्य का अर्थ है कि लेखक को अतिथि के आने से होने वाले अतिरिक्त खर्च की चिंता सता रही थी, क्योंकि महंगाई के इस दौर में घर चलाना वैसे ही मुश्किल था।
लेखक ने अतिथि को 'देवता' और 'राक्षस' क्यों कहा है?
भारतीय संस्कृति में अतिथि को देवता माना जाता है, लेकिन जब वही अतिथि लंबे समय तक रुककर परेशानी का कारण बन जाए, तो वह मानव और धीरे-धीरे राक्षस जैसा लगने लगता है।
यह समाधान छात्रों के लिए कैसे उपयोगी हैं?
ये समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ प्रदान करते हैं, महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर स्पष्ट करते हैं और परीक्षा की तैयारी में मदद करते हैं।
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