कक्षा 9 हिंदी संचयन: मेरा छोटा सा निजी पुस्तकालय - धर्मवीर भारती NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 9 की हिंदी संचयन पुस्तक के पाठ 'मेरा छोटा सा निजी पुस्तकालय' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है, जिसे धर्मवीर भारती ने लिखा है। यह पाठ लेखक के जीवन के उस दौर पर प्रकाश डालता है जब वे गंभीर रूप से बीमार थे और मृत्यु के करीब थे। समाधानों में लेखक के ऑपरेशन से जुड़ी हिचकिचाहट, उनकी किताबों के प्रति गहरी रुचि और बचपन की स्मृतियों का वर्णन शामिल है। इसमें बताया गया है कि कैसे पत्रिकाओं और किताबों ने उनके जीवन को आकार दिया, और कैसे उनके पिता के प्रोत्साहन ने उन्हें अपनी निजी लाइब्रेरी बनाने के लिए प्रेरित किया। ये समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 9
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
ChapterSanchyan - Mera Chota Sa Niji Pustkalaya – Dharamvir Bharti

Chapter summary

कक्षा 9 की हिंदी संचयन पुस्तक के पाठ 'मेरा छोटा सा निजी पुस्तकालय' के ये NCERT समाधान लेखक धर्मवीर भारती के जीवन के एक महत्वपूर्ण हिस्से को दर्शाते हैं। समाधान पाठ के मुख्य बिंदुओं को स्पष्ट करते हैं, जैसे कि लेखक की गंभीर बीमारी के दौरान ऑपरेशन में सर्जन की हिचकिचाहट, किताबों के प्रति उनका बचपन से लगाव, और कैसे पत्रिकाओं ने उनके पढ़ने के शौक को बढ़ावा दिया। यह भी बताया गया है कि कैसे पिता के एक छोटे से प्रोत्साहन ने उन्हें अपनी निजी लाइब्रेरी बनाने की प्रेरणा दी। ये समाधान छात्रों को पाठ के सार को समझने में सहायता करते हैं।

Learning outcomes

  • लेखक के जीवन के कठिन समय और उनकी मानसिक स्थिति को समझना।
  • किताबों के प्रति लेखक के गहरे प्रेम और उसके कारणों का विश्लेषण करना।
  • बचपन की स्मृतियों और पारिवारिक माहौल के प्रभाव को पहचानना।
  • पिता के प्रोत्साहन के महत्व और उसके दूरगामी परिणामों को समझना।
  • लेखक की निजी लाइब्रेरी के निर्माण की प्रक्रिया को जानना।

Topics covered

Paper topics

  • लेखक का गंभीर बीमारी का अनुभव
  • ऑपरेशन में सर्जन की हिचकिचाहट
  • किताबों के प्रति बचपन का प्रेम
  • पारिवारिक माहौल का प्रभाव
  • पत्रिकाओं का महत्व
  • बाल साहित्य का प्रभाव
  • निजी लाइब्रेरी का निर्माण
  • पिता का प्रोत्साहन
  • किताबें खरीदने का पहला अनुभव
  • लेखक का आत्म-चिंतन

Important topics

  • लेखक का गंभीर बीमारी का अनुभव और ऑपरेशन की जटिलताएँ
  • किताबों के प्रति लेखक का गहरा लगाव और उसका विकास
  • पिता के कथन से मिली निजी लाइब्रेरी बनाने की प्रेरणा
  • बचपन की स्मृतियों और पारिवारिक प्रभाव का विश्लेषण

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

लेखक का ऑपरेशन करने से सर्जन क्यों हिचक रहे थे ?
Solution: लेखक की जान बचाने के लिए डॉ. बोर्गेस ने 900 वोल्ट के शॉक देकर उनका ऑपरेशन किया था। इस प्रक्रिया में लेखक का 60 प्रतिशत दिल हमेशा के लिए नष्ट हो गया था। शेष 40 प्रतिशत दिल पर कोई भी जोखिम नहीं लेना चाहते थे, क्योंकि यह बहुत नाजुक स्थिति थी। इसी कारण, सर्जन लेखक के दिल का ऑपरेशन करने में हिचकिचा रहे थे, क्योंकि वे कोई भी गलती नहीं करना चाहते थे जिससे उनकी जान को और खतरा हो।

प्रश्न 2

' किताबों वाले कमरे ' में रहने के पीछे लेखक के मन में क्या भावना थी ?
Solution: अस्पताल से घर लौटने पर लेखक की यह तीव्र इच्छा थी कि उन्हें किताबों वाले कमरे में रखा जाए। बचपन में सुनी परियों की कहानियों से प्रेरित होकर, लेखक को ऐसा महसूस होता था कि उनके प्राण अब उनके शरीर में नहीं, बल्कि उन हज़ारों किताबों में बसते हैं जिन्हें उन्होंने पिछले तीस-चालीस सालों में इकट्ठा किया था। यह भावना उन्हें किताबों के प्रति एक गहरा जुड़ाव महसूस कराती थी, मानो वे किताबें उनकी अपनी आत्मा का हिस्सा हों।

प्रश्न 3

लेखक के घर कौन-कौन सी पत्रिकाएँ आती थीं ?
Solution: लेखक के घर में बचपन से ही पढ़ने-लिखने का माहौल था, जिसके कारण नियमित रूप से कई पत्रिकाएँ आती थीं। इनमें मुख्य रूप से 'वेदोदम', 'आर्यमित्र साप्ताहिक', और 'सरस्वती' जैसी पत्रिकाएँ शामिल थीं। इसके अतिरिक्त, 'गृहिणी' नामक पत्रिका भी आती थी। लेखक के लिए विशेष रूप से दो बाल पत्रिकाएँ आती थीं - 'बालसखा' और 'चमचम'। इन बाल पत्रिकाओं में परियों, राजकुमारों, दानवों और सुंदर राजकुमारियों की कहानियाँ तथा रेखाचित्र होते थे, जो लेखक के बचपन के मनोरंजन का अहम हिस्सा थे।

प्रश्न 4

लेखक को किताबें पढ़ने और सहेजने का शौक कैसे लगा ?
Solution: लेखक को किताबें पढ़ने और सहेजने का शौक उनके घर में नियमित रूप से आने वाली पत्रिकाओं और उनके लिए विशेष रूप से आने वाली किताबों के कारण लगा। बचपन से ही किताबों से घिरे रहने के कारण, वे हर समय उनमें खोए रहते थे। खाना खाते समय भी वे किताबें पढ़ते रहते थे। भले ही बड़ी किताबों के विषय उन्हें तुरंत समझ में न आते हों, फिर भी वे उन्हें पढ़ने और समझने की पूरी कोशिश करते थे। इस निरंतर संपर्क ने उनमें किताबों के प्रति गहरी रुचि और उन्हें सहेजने की आदत विकसित की।

प्रश्न 5

माँ लेखक की स्कूली पढ़ाई को लेकर क्यों चितित रहती थी ?
Solution: लेखक की माँ उनकी स्कूली पढ़ाई को लेकर इसलिए चिंतित रहती थीं क्योंकि वे देखती थीं कि उनका बेटा स्कूल की निर्धारित किताबों पर ध्यान नहीं देता। उन्हें डर था कि अगर वह स्कूल की पढ़ाई पर ध्यान नहीं देगा तो परीक्षा में पास कैसे होगा। माँ को यह भी चिंता थी कि कहीं वह पढ़ाई छोड़कर साधु न बन जाए और घर से भाग न जाए। इसके विपरीत, पिता का मानना था कि लेखक को उसकी रुचि के अनुसार पढ़ने देना चाहिए, क्योंकि जीवन में यही ज्ञान काम आएगा।

प्रश्न 6

स्कूल से इनाम में मिली अंग्रेजी की दोनों पुस्तकों ने किस प्रकार लेखक के लिए नई दुनिया के द्वार खोल दिए?
Solution: लेखक को स्कूल से इनाम में दो अंग्रेजी किताबें मिली थीं जिन्होंने उनके ज्ञान के क्षितिज का विस्तार किया। पहली किताब में विभिन्न पक्षियों की जातियों, उनकी बोलियों और आदतों के बारे में विस्तृत जानकारी थी। दूसरी किताब, जिसका नाम 'ट्रस्टी द रग' था, पानी के जहाजों से संबंधित थी। इसमें विभिन्न प्रकार के जहाजों, उनके द्वारा लाए जाने वाले माल, उनके यात्रा मार्गों, और नाविकों के जीवन के बारे में बताया गया था। इन किताबों ने लेखक को न केवल प्रकृति और जीव-जंतुओं के बारे में सिखाया, बल्कि समुद्री यात्राओं, व्यापार और विभिन्न देशों की दुनिया से भी परिचित कराया, जिससे उनके लिए एक नई दुनिया के द्वार खुल गए।

प्रश्न 7

' आज से यह खाना तुम्हारी किताबों का । तुम्हारी अपनी लाइब्रेरी है । ' –पिता के इस कथन से लेखक को क्या प्रेरणा मिली ?
Solution: लेखक को पहले से ही किताबें पढ़ने का गहरा शौक था। जब उनके पिता ने उन्हें मिली किताबों को देखकर अलमारी का एक खाना दिखाते हुए यह कहा कि 'आज से यह खाना तुम्हारी किताबों का। तुम्हारी अपनी लाइब्रेरी है।', तो लेखक को मानो अपनी खुद की एक निजी लाइब्रेरी स्थापित करने की प्रेरणा मिल गई। पिता के इस प्रोत्साहन ने उनके शौक को एक औपचारिक रूप दिया और उस अलमारी के छोटे से खाने को धीरे-धीरे बढ़ाते हुए एक विशाल पुस्तकालय में बदलने की नींव रखी।

प्रश्न 8

लेखक द्वारा पहली पुस्तक खरीदने की घटना का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए ।
Solution: लेखक अपनी माँ से अनुमति लेकर 'देवदास' फिल्म देखने सिनेमाघर गए थे। सिनेमाघर के पास ही एक किताबों की दुकान थी। वहाँ उन्होंने 'देवदास' उपन्यास देखा। उपन्यास को देखकर लेखक के मन में उसे खरीदने का लालच आ गया। उन्होंने सोचा कि फिल्म तो एक बार देखने के बाद समाप्त हो जाएगी, लेकिन अगर वे किताब खरीद लेते हैं तो वह हमेशा उनके पास रहेगी और वे जितनी बार चाहें उसे पढ़ सकते हैं। इसके अतिरिक्त, सिनेमा का टिकट डेढ़ रुपये का था, जबकि किताब केवल दस आने की थी। इस प्रकार, लेखक ने किताब खरीदने का निर्णय लिया, जिससे उन्हें किताब भी मिल गई और पैसे भी बच गए।

Common mistakes

  • लेखक की बीमारी की गंभीरता को कम आंकना।
  • किताबों के प्रति लेखक के लगाव के पीछे के भावनात्मक कारणों को नजरअंदाज करना।
  • पिता के कथन के महत्व को केवल शाब्दिक अर्थ में लेना।

Revision tips

  • लेखक की बीमारी और ऑपरेशन से जुड़े विवरणों को ध्यान से पढ़ें।
  • उन घटनाओं को रेखांकित करें जिन्होंने लेखक के पढ़ने के शौक को बढ़ावा दिया।
  • पिता के कथन के प्रतीकात्मक अर्थ पर विचार करें।
  • पाठ में वर्णित विभिन्न पत्रिकाओं और उनकी सामग्री को याद रखें।

Practice MCQs

Q1. लेखक का ऑपरेशन करने से सर्जन क्यों हिचक रहे थे?

Q2. लेखक को 'किताबों वाले कमरे' में रखने की इच्छा क्यों थी?

Q3. लेखक के घर कौन सी प्रमुख पत्रिकाएँ आती थीं?

Q4. लेखक को बचपन में किताबें पढ़ने का शौक कैसे लगा?

Q5. पिता के 'आज से यह खाना तुम्हारी किताबों का' कहने से लेखक को क्या प्रेरणा मिली?

Frequently asked questions

कक्षा 9 हिंदी संचयन के पाठ 'मेरा छोटा सा निजी पुस्तकालय' के लेखक कौन हैं?

कक्षा 9 हिंदी संचयन के पाठ 'मेरा छोटा सा निजी पुस्तकालय' के लेखक धर्मवीर भारती हैं।

लेखक को ऑपरेशन से पहले किन समस्याओं का सामना करना पड़ा?

लेखक की हालत इतनी गंभीर थी कि उनकी साँस, नब्ज और धड़कन बंद हो गई थी, जिससे डॉक्टरों ने उन्हें लगभग मृत घोषित कर दिया था। उनके दिल का 60% हिस्सा भी नष्ट हो चुका था।

लेखक को 'किताबों वाले कमरे' में रहने की इच्छा क्यों थी?

लेखक को ऐसा महसूस होता था कि उनके प्राण शरीर से निकलकर उनकी हज़ारों किताबों में बस गए हैं, इसलिए वे उस कमरे में रहना चाहते थे।

लेखक के पिता ने उन्हें अपनी लाइब्रेरी बनाने के लिए कैसे प्रेरित किया?

पिता ने लेखक को अलमारी का एक खाना देते हुए कहा, 'आज से यह खाना तुम्हारी किताबों का। तुम्हारी अपनी लाइब्रेरी है।' इससे लेखक को अपनी लाइब्रेरी बनाने की प्रेरणा मिली।

लेखक ने अपनी पहली पुस्तक कौन सी खरीदी और क्यों?

लेखक ने देवदास उपन्यास खरीदा क्योंकि वह फिल्म देखने गए थे, लेकिन उन्होंने सोचा कि फिल्म एक बार देखकर खत्म हो जाएगी, जबकि किताब हमेशा उनके पास रहेगी और वे जितनी बार चाहें पढ़ सकते थे। साथ ही, किताब टिकट से सस्ती भी थी।

यह समाधान छात्रों के लिए कैसे उपयोगी हैं?

ये समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ प्रदान करते हैं, मुख्य अवधारणाओं को स्पष्ट करते हैं और परीक्षा की तैयारी में मदद करते हैं।

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