कक्षा 8 संस्कृत NCERT समाधान: पाठ 4 सदैव पुरतो निधेहि चरणम्
यह पृष्ठ कक्षा 8 संस्कृत के NCERT समाधान प्रस्तुत करता है, विशेष रूप से पाठ 4 'सदैव पुरतो निधेहि चरणम्' पर केंद्रित है। यह पाठ छात्रों को जीवन में निरंतर आगे बढ़ते रहने और बाधाओं का सामना करने के लिए प्रेरित करता है। समाधानों में गीत का सस्वर गायन, एक-पद वाले उत्तर, क्रिया और अव्यय पदों का रिक्त स्थानों में प्रयोग, विलोम शब्दों का मिलान, और विभिन्न लकार (काल) में क्रिया रूपों का निर्माण शामिल है। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर स्पष्ट और विस्तृत रूप से समझाया गया है, जिससे छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा के लिए प्रभावी ढंग से तैयारी करने में मदद मिलेगी। ये समाधान छात्रों को संस्कृत भाषा की बारीकियों को समझने और आत्मविश्वास के साथ उत्तर देने में सहायता करते हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 8 |
| Subject | संस्कृत |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 4. सदैव पुरतो निधेहि चरणम् |
Chapter summary
कक्षा 8 संस्कृत के पाठ 4 'सदैव पुरतो निधेहि चरणम्' के NCERT समाधान छात्रों को गीत के माध्यम से जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। इसमें एक-पद उत्तर, क्रिया और अव्यय पदों के रिक्त स्थान पूर्ति, विलोम शब्द मिलान, और क्रिया के विभिन्न कालों (लकार) में परिवर्तन जैसे अभ्यासों को शामिल किया गया है। ये समाधान छात्रों को व्याकरणिक संरचनाओं को समझने और पाठ के संदेश को आत्मसात करने में मदद करते हैं।
Learning outcomes
- पाठ 4 के गीत को सस्वर गाने का अभ्यास करना।
- एक-पद उत्तरों के माध्यम से पाठ की मुख्य अवधारणाओं को समझना।
- क्रिया और अव्यय पदों का सही प्रयोग सीखना।
- विलोम शब्दों के मिलान से शब्दावली का विस्तार करना।
- लट् लकार से लोट् और विधिलिङ् लकार में क्रिया रूपों का निर्माण सीखना।
- संस्कृत व्याकरण के नियमों को लागू करना।
Topics covered
Paper topics
- सदैव पुरतो निधेहि चरणम् गीत
- एक-पद उत्तर
- क्रिया पद
- अव्यय पद
- विलोम पद
- लट् लकार
- लोट् लकार
- विधिलिङ् लकार
- संस्कृत व्याकरण
- प्रेरक गीत
Important topics
- सदैव पुरतो निधेहि चरणम् गीत का भावार्थ
- क्रिया पदों का लोट् और विधिलिङ् लकार में परिवर्तन
- अव्यय पदों का वाक्यों में प्रयोग
- विलोम पदों का मिलान
- पाठ के मुख्य संदेश को समझना
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
यह प्रश्न छात्रों को पाठ में दिए गए गीत को सस्वर गाने का अभ्यास करने के लिए प्रोत्साहित करता है। छात्र शिक्षक के मार्गदर्शन में या स्वयं गीत को लय और सुर के साथ गा सकते हैं। यह गीत जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
प्रश्न 2
- (क) हमारा अपना साधन क्या होता है?
- (ख) पथ में क्या विषमा (कठिन) और प्रखर (तीखे) होते हैं?
- (ग) हमें निरंतर क्या करते रहना चाहिए?
- (घ) इस गीत के रचयिता कौन हैं?
- (ङ) वह किस प्रकार के कवि माने जाते हैं?
इस प्रश्न में पाठ के आधार पर कुछ प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में देने हैं:
- (क) हमारा अपना साधन हमारा बल (शक्ति) होता है।
- (ख) पथ में पाषाण (पत्थर) विषमा और प्रखर होते हैं।
- (ग) हमें निरंतर ध्येय-स्मरणम् (लक्ष्य का स्मरण) करते रहना चाहिए।
- (घ) इस गीत के रचयिता श्रीधर भास्कर वर्णेकर हैं।
- (ङ) वह राष्ट्रवादी कवि माने जाते हैं।
प्रश्न 3
निधेहि, विधेहि, जहीहि, देहि, भज, चल, कुरु
यथा- त्वं पुरतः चरणं निधेहि।
- (क) त्वं विद्यालयं .....।
- (ख) राष्ट्रे अनुरक्तिं .....।
- (ग) मह्यं जलं ………।
- (घ) मूढ! ..... धनागमतृष्णाम्।
- (ङ) ..... गोविन्दम्।
- (च) सततं ध्येयस्मरणं ………।
दिए गए क्रिया पदों का सही स्थान पर प्रयोग इस प्रकार है:
- (क) त्वं विद्यालयं चल। (तुम विद्यालय चलो।)
- (ख) राष्ट्रे अनुरक्तिं विधेहि। (राष्ट्र में प्रेम करो।)
- (ग) मह्यं जलं देहि। (मुझे जल दो।)
- (घ) मूढ! जहीहि धनागमतृष्णाम्। (मूर्ख! धन की लालसा को छोड़ दो।)
- (ङ) भज गोविन्दम्। (गोविन्द का भजन करो।)
- (च) सततं ध्येयस्मरणं कुरु। (निरंतर लक्ष्य का स्मरण करो।)
प्रश्न 4
एव, खलु, तथा, परितः, पुरतः, सदा, विना
- (क) विद्यालयस्य ..... एकम् उद्यानम् अस्ति।
- (ख) सत्यम् ..... जयते।
- (ग) कि भवान् स्नानं कृतवान् .....?
- (घ) स: यथा चिन्तयति ..... आचरति।
- (ङ) ग्रामं ..... वृक्षाः सन्ति।
- (च) विद्यां ..... जीवनं वृथा।
- (छ) ..... भगवन्तं भज।
दिए गए अव्यय पदों का सही स्थान पर प्रयोग इस प्रकार है:
- (क) विद्यालयस्य पुरतः एकम् उद्यानम् अस्ति। (विद्यालय के सामने एक उद्यान है।)
- (ख) सत्यम् एव जयते। (सत्य की ही जीत होती है।)
- (ग) कि भवान् स्नानं कृतवान् खलु? (क्या आपने स्नान कर लिया है?)
- (घ) स: यथा चिन्तयति तथा आचरति। (वह जैसा सोचता है वैसा आचरण करता है।)
- (ङ) ग्रामं परितः वृक्षाः सन्ति। (गाँव के चारों ओर वृक्ष हैं।)
- (च) विद्यां विना जीवनं वृथा। (विद्या के बिना जीवन व्यर्थ है।)
- (छ) सदा भगवन्तं भज। (हमेशा भगवान का भजन करो।)
प्रश्न 5
पुरत:, विरक्ति:, स्वकीयम्, आगमनम्, भीति:, पृष्ठत:, परकीयम्, गमनम्, साहस:
विलोम पदों का सही मिलान इस प्रकार है:
पुरतः - पृष्ठतः (सामने - पीछे)
स्वकीयम् - परकीयम् (अपना - पराया)
भीति: - साहस: (भय - साहस)
अनुरक्ति: - विरक्ति: (प्रेम - घृणा/वैराग्य)
गमनम् - आगमनम् (जाना - आना)
प्रश्न 6
लट् लकार में: पठति, खेलसि, खादन्ति, पिबामि, हसत:, नयाम:
लोट् लकार में: ?
विधिलिङ् लकार में: ?
दिए गए लट् लकार के पदों से लोट् और विधिलिङ् लकार के पदों का निर्माण इस प्रकार है:
लट् लकार | लोट् लकार | विधिलिङ् लकार
पठति | पठतु | पठेत्
खेलसि | खेल | खेले: (या खेलत)
खादन्ति | खादन्तु | खादेयु:
पिबामि | पिबानि | पिबेयम्
हसत: | हसताम् | हसेताम्
नयाम: | नयाम | नयेम
स्पष्टीकरण:
- लोट् लकार आज्ञा या प्रार्थना के लिए प्रयोग होता है।
- विधिलिङ् लकार चाहिए या संभावना के अर्थ में प्रयोग होता है।
प्रश्न 7
यथा- गिरिशिखर (सप्तमी-एकवचने) - गिरिशिखरे
पथिन् (सप्तमी-एकवचने) - .....
दिए गए पद को सप्तमी-एकवचन में परिवर्तित करने पर रूप इस प्रकार होगा:
पथिन् (सप्तमी-एकवचने) - पथि
स्पष्टीकरण: 'पथिन्' (रास्ता) एक इकारान्त नपुंसकलिङ्ग शब्द है। इसके सप्तमी-एकवचन का रूप 'पथि' होता है।
Common mistakes
- क्रिया और अव्यय पदों को पहचानने में त्रुटि।
- लकार परिवर्तन में गलतियाँ करना।
- विलोम शब्दों को गलत मिलाना।
- एक-पद उत्तरों में पूर्ण वाक्य लिख देना।
Revision tips
- पाठ 4 के गीत को बार-बार गाकर याद करें।
- सभी अभ्यास प्रश्नों को हल करने का प्रयास करें, विशेषकर व्याकरण वाले।
- विलोम शब्दों और क्रिया रूपों की सूची बनाकर उनका अभ्यास करें।
- पाठ के मुख्य संदेश 'सदैव पुरतो निधेहि चरणम्' को ध्यान में रखें।
Practice MCQs
Q1. पाठ 4 के अनुसार, हमारा स्वकीय साधन क्या होता है?
Explanation: पाठ में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि 'बलम्' ही हमारा स्वकीय साधन है, अर्थात हमारी अपनी शक्ति ही हमारा सहारा है।
Q2. गीत के अनुसार, पथ में क्या विषमा और प्रखर होते हैं?
Explanation: गीत में 'पाषाणा:' शब्द का प्रयोग किया गया है, जिसका अर्थ है पत्थर। ये पथ में विषमा और प्रखर माने गए हैं।
Q3. हमें निरंतर क्या करते रहना चाहिए?
Explanation: गीत के अनुसार, 'सततं ध्येयस्मरणं कुरु' अर्थात निरंतर अपने लक्ष्य का स्मरण करते रहना चाहिए।
Q4. मञ्जूषा से क्रिया पद 'जहीहि' का क्या अर्थ है?
Explanation: 'जहीहि' क्रिया पद का अर्थ है 'छोड़ दो' या 'त्याग दो'। इसका प्रयोग धन की तृष्णा को छोड़ने के संदर्भ में हुआ है।
Q5. अव्यय पद 'परितः' का क्या अर्थ है?
Explanation: 'परितः' एक अव्यय पद है जिसका अर्थ 'चारों ओर' होता है। जैसे - ग्रामं परितः वृक्षाः सन्ति।
Q6. विलोम पद 'भीति:' का सही मिलान क्या है?
Explanation: 'भीति:' का अर्थ भय होता है, जिसका विलोम 'साहस:' (हिम्मत) होता है।
Frequently asked questions
कक्षा 8 के संस्कृत पाठ 4 का मुख्य संदेश क्या है?
पाठ 4, 'सदैव पुरतो निधेहि चरणम्', का मुख्य संदेश यह है कि हमें जीवन में आने वाली कठिनाइयों और बाधाओं से डरना नहीं चाहिए, बल्कि अपने लक्ष्य की ओर निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए।
इस पाठ के समाधान छात्रों की परीक्षा तैयारी में कैसे मदद करेंगे?
ये समाधान छात्रों को पाठ के अर्थ, व्याकरणिक अभ्यासों (जैसे क्रिया, अव्यय, विलोम पद) और लकार परिवर्तन को समझने में मदद करते हैं, जो परीक्षा में पूछे जाते हैं।
पाठ 4 में किस प्रकार के व्याकरणिक अभ्यासों को शामिल किया गया है?
पाठ 4 में एक-पद उत्तर, मञ्जूषा से क्रिया और अव्यय पदों को चुनकर रिक्त स्थान भरना, विलोम पदों का मिलान करना, और लट् लकार से लोट् व विधिलिङ् लकार में क्रिया रूपों का निर्माण करना जैसे अभ्यास शामिल हैं।
क्या इन समाधानों में गीत का सस्वर गायन भी शामिल है?
समाधानों में गीत को सस्वर गाने का निर्देश दिया गया है, हालांकि गायन स्वयं समाधान का हिस्सा नहीं है, बल्कि एक गतिविधि के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
विलोम पदों का मिलान करने से क्या लाभ है?
विलोम पदों का मिलान करने से छात्रों की शब्दावली बढ़ती है और वे विपरीतार्थक शब्दों को पहचानना सीखते हैं, जो भाषा की समझ के लिए महत्वपूर्ण है।
लकार परिवर्तन का अभ्यास क्यों महत्वपूर्ण है?
लकार परिवर्तन का अभ्यास संस्कृत व्याकरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह छात्रों को विभिन्न कालों (वर्तमान, आज्ञा, चाहिए) में क्रियाओं का सही रूप बनाना सिखाता है।
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