कक्षा 8 संस्कृत: भगवदज्जुकम् NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 8 संस्कृत के 'भगवदज्जुकम्' पाठ के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें पाठ के विभिन्न अभ्यासों को हल किया गया है, जिनमें एक पद में उत्तर, संधि-विच्छेद, अव्यय पदों की पहचान, विपरीतार्थक शब्दों का लेखन, और दिए गए पदों का प्रयोग करके वाक्य निर्माण शामिल है। इसके अतिरिक्त, यह नाट्यांश पर आधारित प्रश्नों के उत्तर, भाषिक कार्य जैसे संज्ञा पद का प्रयोग, विभक्ति और वचन की पहचान, धातु और उपसर्ग का विश्लेषण, भिन्न प्रकृति के पदों का चयन, और संधि-विच्छेद का भी समाधान प्रदान करता है। ये समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा की तैयारी में सहायता करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 8 |
| Subject | संस्कृत |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 3. भगवदज्जुकम् |
Chapter summary
कक्षा 8 संस्कृत के 'भगवदज्जुकम्' पाठ के ये NCERT समाधान छात्रों को नाटक के मुख्य पात्रों, कथानक और भाषा पर केंद्रित अभ्यास प्रदान करते हैं। इसमें एक पद वाले उत्तर, संधि-विच्छेद, अव्यय पदों का चयन, विपरीतार्थक शब्द, और वाक्य रचना जैसे व्याकरणिक पहलुओं को शामिल किया गया है। नाट्यांश पर आधारित प्रश्न और भाषिक कार्य छात्रों की समझ को और गहरा करते हैं।
Learning outcomes
- एक पद में प्रश्नों के उत्तर देने की क्षमता विकसित करना।
- दिए गए शब्दों का संधि-विच्छेद करने का कौशल प्राप्त करना।
- वाक्यों में अव्यय पदों की पहचान और प्रयोग को समझना।
- विपरीतार्थक शब्दों को पहचानना और लिखना।
- दिए गए पदों का प्रयोग करके सार्थक वाक्य बनाना।
- नाट्यांश पर आधारित प्रश्नों को हल करना।
Topics covered
Paper topics
- भगवदज्जुकम् पाठ का सारांश
- एक पद में उत्तर
- संधि-विच्छेद
- अव्यय पद
- विपरीतार्थक शब्द
- वाक्य निर्माण
- नाट्यांश आधारित प्रश्न
- भाषिक कार्य (विभक्ति, वचन, धातु, उपसर्ग)
- संज्ञा और सर्वनाम का प्रयोग
- व्याकरणिक विश्लेषण
Important topics
- संधि-विच्छेद
- अव्यय पदों की पहचान
- विपरीतार्थक शब्द
- नाट्यांश पर आधारित प्रश्न
- भाषिक कार्य
PDF preview
Read page by page below. PDF is streamed from the official NCERT website — no download button on this page.
Questions and Solutions
प्रश्न 1
- (क) गणिकायाः नाम किम्?
- (ख) परिव्राजकस्य शिष्यः कः आसीत्?
- (ग) यमदूत: गणिकाया: जीवं कस्य शरीरे निद्धाति?
- (घ) परहितनिरता के भवन्तु?
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक पद में इस प्रकार हैं:
- (क) गणिका का नाम वसन्तसेना था।
- (ख) परिव्राजक का शिष्य शाण्डिल्यः था।
- (ग) यमदूत गणिका के जीव को परिव्राजकस्य (परिव्राजक के) शरीर में रखता है।
- (घ) परहित में लगी हुई भूतगणाः (भूतगण) होनी चाहिए।
प्रश्न 2
दिए गए पदों का सन्धि-विच्छेद इस प्रकार है:
- भगवन्नयम् = भगवन् + अयम्
- श्वासश्च = श्वासः + च
- खल्वकृतज्ञा: = खलु + अकृतज्ञाः
- सप्तैता: = सप्त + एताः
- करोतीति = करोति + इति
प्रश्न 3
- (क) त्वं कदा गृहं गमिष्यसि। .................
- (ख) अधुना क: समय:।
- (ग) महात्मागान्धी सदा सत्यं वदति स्म। ****************
- (घ) अहं श्व: विद्यालयं गमिष्यामि। ****************
- (ङ) इदानीं त्वं श्लोकं पठ। *****************
दिए गए वाक्यों में अव्यय पद निम्नलिखित हैं:
- (क) कदा (कब)
- (ख) अधुना (अब)
- (ग) सदा (हमेशा)
- (घ) श्वः (कल - आने वाला)
- (ङ) इदानीम् (इस समय)
ये शब्द वाक्य में किसी भी परिवर्तन के साथ नहीं बदलते हैं।
प्रश्न 4
- (क) मूर्ख वैद्य! अलं परिश्रमेण। ...... **************
- (ख) कुत्र कुत्र रामिलक:।
- (ग) विषवेगा: शतम्। ***************
- (घ) गुलिका: मया आनीता:। ***************
- (ङ) इदम् उदकम्।
- (च) अरे! प्रत्यागतप्राण: खलु भगवान्। .................
निम्नलिखित कथनों को कहने वाले और सुनने वाले इस प्रकार हैं:
- (क) गणिका (गणिका) वैद्यं (वैद्य के प्रति) प्रति कहती है।
- (ख) परिव्राजकः (परिव्राजक) शाण्डिल्यं (शाण्डिल्य के प्रति) प्रति कहता है।
- (ग) वैद्यः (वैद्य) गणिकां (गणिका के प्रति) प्रति कहता है।
- (घ) वैद्यः (वैद्य) चेटीं (चेटी के प्रति) प्रति कहता है।
- (ङ) चेटी (चेटी) गणिकां (गणिका के प्रति) प्रति कहती है।
- (च) शाण्डिल्यः (शाण्डिल्य) वैद्यं (वैद्य के प्रति) प्रति कहता है।
प्रश्न 5
दिए गए शब्दों के विपरीतार्थक शब्द निम्नलिखित हैं:
- गुणाः (गुण) - दोषाः (दोष)
- स्वीकार: (स्वीकार) - अस्वीकार: (अस्वीकार)
- दक्षिणहस्त: (दाहिना हाथ) - वामहस्त: (बायाँ हाथ)
- अन्या (अन्य) - अन्या (अन्य - यहाँ समान अर्थ वाला शब्द दिया गया है, संभवतः यह 'अनन्या' का विपरीतार्थक पूछ रहा है, जो 'अन्ये' या 'विशिष्टा' हो सकता है, पर दिए गए स्रोत के अनुसार 'अन्या' ही है)
- कृतज्ञ: (आभार मानने वाला) - कृतघ्नः / अकृतज्ञः (आभार न मानने वाला)
प्रश्न 6
गुलिका:, कुठारिका, क्षिप्रम्, यत्न:, लोके
दिए गए पदों का प्रयोग करके निम्नलिखित वाक्य बनाए गए हैं:
- गुलिकाः - बालकः गुलिकाः खादति। (बालक गोलियाँ खाता है।)
- कुठारिका - मम कुठारिका कुत्र अस्ति? (मेरी कुल्हाड़ी कहाँ है?)
- क्षिप्रम् - त्वम् क्षिप्रम् गृहं गच्छ। (तुम शीघ्र घर जाओ।)
- यत्नः - तव यत्नः उत्तमः अस्ति। (तुम्हारा प्रयास उत्तम है।)
- लोके - लोके चन्द्रः सुन्दरः भवति। (संसार में चंद्रमा सुंदर होता है।)
प्रश्न 7
मूलशब्दाः वचनम् पदानि
यथा- शिल्पिन् प्रथमा -एकवचने शिल्पी
धनिन् द्वितीया -एकवचने
ज्ञानिन् तृतीया -एकवचने
महत्त्वाकांक्षिन् द्वितीया -बहुवचने
बहुभाषिन् तृतीया -बहुवचने
दण्डिन् द्वितीया -बहुवचने
दिए गए मूल शब्दों से निर्दिष्ट वचन और विभक्ति के अनुसार पद निर्माण इस प्रकार है:
- धनिन् (द्वितीया - एकवचन) - धनिनम्
- ज्ञानिन् (तृतीया - एकवचन) - ज्ञानिना
- महत्त्वाकांक्षिन् (द्वितीया - बहुवचन) - महत्त्वाकांक्षिणः
- बहुभाषिन् (तृतीया - बहुवचन) - बहुभाषिभिः
- दण्डिन् (द्वितीया - बहुवचन) - दण्डिनः
आतारक्त-अभ्यासः: प्रश्न 1
वैद्य: अरे, इयं प्रेतेन आविष्टा।
गणिका - शास्त्रं जानासि?
वैद्य: _ अथ किम्?
गणिका ब्रूहि वैद्यशास्त्रम्।
वैद्य: - शृणोतु भवती। वातिकाः पैत्तिकाश्चैव श्लैष्मिकाश्च महाविषाः। त्रीणि सर्पा भवन्त्येते चतुर्थो नाधिगम्यते।।
I. एकपदेन उत्तरत।
- क: गुलिका: आनयति? 2. चेटी किम् आनयति?
- का प्रेतेन आविष्टा:? 4. महाविषा: कति सन्ति?
II. पूर्णवाक्येन उत्तरत।
- ते महाविषा: के सन्ति?
- गणिका कथं संन्यासिस्वरेण वदित?
III. भाषिककार्यम्
- (क) 'इयं प्रेतेन आविष्टाः इति वाक्ये-
- 'इयं' स्थाने संज्ञापंद प्रयुज्य वाक्यं पुन: लिखत।
- प्रेतेन अत्र किं विभक्ति वचनम्?
- आविष्टा अत्र कः धातुः कः च उपसर्गः?
- (ख) भिन्नप्रकृतिकं पदं चिनुत-प्रेतेन, सर्पेण, स्वरेण, मया
- (ग) सन्धिविच्छेदं कुरुत 1. पैत्तिकाश्चैव = + च +
- (घ) पदपरिचयं यच्छत
2. नाधिगभ्यते =
मूलशब्द: लिगम् विभक्ति: वचनम्
संन्यासिनः
नाट्यांश पर आधारित प्रश्नों के उत्तर निम्नलिखित हैं:
I. एकपदेन उत्तरत।
- कः गुलिकाः आनयति? - वैद्यः (वैद्य गुलिका लाता है। - यह नाट्यांश के अनुसार है, यद्यपि मूल पाठ में चेटी का उल्लेख है। नाट्यांश में वैद्य कहता है 'गुलिका: मया आनीता:')
- चेटी किम् आनयति? - उदकम् (चेटी जल लाती है। - यह नाट्यांश के अनुसार है, यद्यपि मूल पाठ में चेटी का उल्लेख है।)
- का प्रेतेन आविष्टाः? - इयं (यह स्त्री प्रेत से ग्रसित है।)
- महाविषाः कति सन्ति? - त्रीणि (तीन महाविष हैं।)
II. पूर्णवाक्येन उत्तरत।
- ते महाविषाः के सन्ति? - ते महाविषाः वातिकाः, पैत्तिकाः, श्लैष्मिकाः सन्ति। (वे महाविष वात, पित्त और कफ हैं।)
- गणिका कथं संन्यासिस्वरेण वदित? - गणिका शास्त्रं ज्ञात्वा संन्यासिस्वरेण वदित। (गणिका शास्त्र जानकर संन्यासी के स्वर में बोली।)
III. भाषिककार्यम्
- (क) 'इयं प्रेतेन आविष्टाः इति वाक्ये-
- 'इयं' स्थाने संज्ञापंद प्रयुज्य वाक्यं पुन: लिखत। - गणिका प्रेतेन आविष्टा अस्ति। (यहाँ 'इयं' के स्थान पर 'गणिका' संज्ञा पद का प्रयोग किया गया है।)
- प्रेतेन अत्र किं विभक्ति वचनम्? - तृतीया विभक्तिः, एकवचनम् (प्रेतेन में तृतीय विभक्ति, एकवचन है।)
- आविष्टा अत्र कः धातुः कः च उपसर्गः? - धातु: 'विश्' (प्रवेश करना), उपसर्ग: 'आ' (आविष्टा में 'विश्' धातु है और 'आ' उपसर्ग है।)
- (ख) भिन्नप्रकृतिकं पदं चिनुत-प्रेतेन, सर्पेण, स्वरेण, मया
- उत्तर: मया (यह सर्वनाम है, अन्य सभी तृतीय विभक्ति के रूप हैं।)
- (ग) सन्धिविच्छेदं कुरुत
- 1. पैत्तिकाश्चैव = पैत्तिकाः + च + एव
- 2. नाधिगभ्यते = न + अधि + गम्यते (यहाँ 'न + अधिगम्यते' भी संभव है, पर 'न + अधि + गम्यते' अधिक विस्तृत है।)
- (घ) पदपरिचयं यच्छत
मूलशब्द: लिगम् विभक्ति: वचनम्
संन्यासिनः - पुंल्लिगम्, षष्ठी विभक्तिः, एकवचनम् (संन्यासिनः - पुल्लिंग, षष्ठी विभक्ति, एकवचन)
Common mistakes
- संधि-विच्छेद करते समय शब्दों को गलत तोड़ना।
- अव्यय पदों की पहचान में भ्रमित होना।
- विपरीतार्थक शब्दों को गलत लिखना।
- वाक्य निर्माण में व्याकरणिक अशुद्धियाँ करना।
Revision tips
- प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को पाठ के संदर्भ में समझने का प्रयास करें।
- संधि-विच्छेद और अव्यय पदों के नियमों को दोहराएं।
- विपरीतार्थक शब्दों की सूची बनाएं और उनका अभ्यास करें।
- दिए गए पदों से वाक्य बनाने का अभ्यास करें।
Practice MCQs
Q1. प्रश्न 1: गणिका का नाम क्या था?
Explanation: पाठ के अनुसार, गणिका का नाम वसन्तसेना था।
Q2. प्रश्न 2: परिव्राजक का शिष्य कौन था?
Explanation: परिव्राजक का शिष्य शाण्डिल्य था।
Q3. प्रश्न 3: 'भगवन्नयम्' का संधि-विच्छेद क्या होगा?
Explanation: भगवन्नयम् का संधि-विच्छेद भगवन् + अयम् होता है।
Q4. प्रश्न 4: 'कदा' शब्द किस प्रकार का है?
Explanation: कदा एक अव्यय पद है, जो प्रश्न पूछने के लिए प्रयोग होता है।
Q5. प्रश्न 5: 'कृतज्ञ:' का विपरीतार्थक शब्द क्या है?
Explanation: कृतज्ञ: का विपरीतार्थक शब्द कृतघ्न: होता है।
Q6. प्रश्न 6: 'गुलिका:' शब्द का प्रयोग किस वाक्य में किया गया है?
Explanation: दिए गए वाक्यों में से 'बालकः गुलिकाः खादति।' में गुलिकाः शब्द का प्रयोग हुआ है।
Q7. प्रश्न 7: 'धनिन्' शब्द का द्वितीया विभक्ति एकवचन रूप क्या होगा?
Explanation: धनिन् शब्द का द्वितीया विभक्ति एकवचन रूप धनिनम् होता है।
Frequently asked questions
यह समाधान किस कक्षा और विषय के लिए है?
यह समाधान कक्षा 8 के संस्कृत विषय के लिए है, विशेष रूप से 'भगवदज्जुकम्' पाठ पर केंद्रित है।
इस समाधान में क्या-क्या शामिल है?
इसमें पाठ के सभी अभ्यासों के उत्तर शामिल हैं, जैसे एक पद में उत्तर, संधि-विच्छेद, अव्यय पद, विपरीतार्थक शब्द, वाक्य निर्माण, और नाट्यांश पर आधारित प्रश्न।
क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी के लिए उपयोगी हैं?
हाँ, ये समाधान पाठ की गहरी समझ प्रदान करते हैं और व्याकरणिक अभ्यासों के माध्यम से परीक्षा की तैयारी में बहुत सहायक हैं।
संधि-विच्छेद वाले प्रश्नों को कैसे हल किया गया है?
संधि-विच्छेद वाले प्रश्नों में, दिए गए संयुक्त पदों को उनके मूल शब्दों में तोड़ा गया है, जैसे 'भगवन्नयम्' को 'भगवन् + अयम्' में।
अव्यय पद क्या होते हैं और उन्हें कैसे पहचाना जाता है?
अव्यय वे शब्द होते हैं जिनके रूप में लिंग, वचन या कारक के कारण कोई परिवर्तन नहीं होता है। समाधान में 'कदा', 'अधुना', 'सदा', 'श्व:', 'इदानीम्' जैसे अव्यय पदों की पहचान की गई है।
विपरीतार्थक शब्द क्या हैं और उनका अभ्यास कैसे करें?
विपरीतार्थक शब्द वे होते हैं जो किसी शब्द के विपरीत अर्थ को व्यक्त करते हैं। समाधान में 'गुणाः' का 'दोषाः', 'कृतज्ञ:' का 'कृतघ्न:' जैसे उदाहरण दिए गए हैं।
Content reviewed by the NCERT Help team. Editorial Team and update policy
NCERT Solutions PDF PDF on NCERT Help. URL unchanged for search indexing.