कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 13: विमानयानं रचयाम NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 6 के संस्कृत के लिए NCERT समाधान प्रस्तुत करता है, विशेष रूप से अध्याय 13, "विमानयानं रचयाम" पर केंद्रित है। इसमें पाठ के गीत को गाने, तृतीया विभक्ति का उपयोग करके वाक्य पूरे करने, भिन्न वर्ग के शब्दों की पहचान करने और दिए गए प्रश्नों के उत्तर देने जैसे अभ्यासों को शामिल किया गया है। समाधान छात्रों को विपरीतार्थक शब्दों को सही ढंग से मिलाने में भी मदद करते हैं। यह विस्तृत मार्गदर्शिका छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने और संस्कृत व्याकरण के महत्वपूर्ण पहलुओं में महारत हासिल करने में सहायता करती है, जो परीक्षा की तैयारी के लिए अमूल्य है।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 6 |
| Subject | Sanskrit |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | Chapter 13 |
Chapter summary
कक्षा 6 के संस्कृत अध्याय 13, "विमानयानं रचयाम" के लिए NCERT समाधान यहाँ दिए गए हैं। यह अध्याय छात्रों को गीत गाने, तृतीया विभक्ति का सही प्रयोग करने, शब्दों के समूह में भिन्न शब्द को पहचानने और पाठ-आधारित प्रश्नों के उत्तर देने का अभ्यास कराता है। इसमें विपरीतार्थक शब्दों को मिलाने का अभ्यास भी शामिल है। ये समाधान छात्रों को पाठ की सामग्री को समझने और व्याकरणिक अवधारणाओं को मजबूत करने में मदद करते हैं।
Learning outcomes
- पाठ "विमानयानं रचयाम" के गीत को सस्वर गाने में सक्षम होना।
- तृतीय विभक्ति का प्रयोग करके संस्कृत वाक्यों को सही ढंग से पूरा करना।
- दिए गए शब्दों के समूह में से भिन्न वर्ग के पद को पहचानना।
- पाठ के आधार पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में देना।
- दिए गए शब्दों के सही विपरीतार्थक शब्दों का मिलान करना।
Topics covered
Paper topics
- गीत गायन
- तृतीया विभक्ति का प्रयोग
- भिन्न वर्ग पद चयन
- पाठ आधारित प्रश्नोत्तर
- विलोम शब्द मिलान
- संस्कृत व्याकरण
- वाक्य निर्माण
Important topics
- तृतीया विभक्ति का प्रयोग
- भिन्न वर्ग पद चयन
- पाठ आधारित प्रश्नोत्तर
- विलोम शब्द मिलान
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
यह प्रश्न छात्रों को पाठ में दिए गए गीत को सस्वर गाने का निर्देश देता है। गीत को लय और उच्चारण के साथ गाने से पाठ की समझ बढ़ती है और भाषा का अभ्यास होता है। छात्र गीत को बार-बार गाकर याद कर सकते हैं और उसके अर्थ को समझ सकते हैं।
प्रश्न 2
(क) सा ...... जलेन मुखं प्रक्षालयति। (विमल)
(ख) राघवः ..... विहरति। (विमानयान)
(ग) कण्ठः ..... शोभते। (मौक्तिकहार)
(घ) नभः ..... प्रकाशते। (सूर्य)
(ङ) पर्वतशिखरम् ...... आकर्षकं दृश्यते। (अम्बुदमाला)
इस प्रश्न में, हमें कोष्ठक में दिए गए शब्दों को तृतीया विभक्ति में परिवर्तित करके रिक्त स्थानों को भरना है। तृतीया विभक्ति का प्रयोग 'से', 'द्वारा', 'के साथ' जैसे अर्थों को व्यक्त करने के लिए किया जाता है।
(क) 'विमल' शब्द का तृतीया विभक्ति एकवचन 'विमलेन' होगा। वाक्य बनता है: सा विमलेन जलेन मुखं प्रक्षालयति। (वह निर्मल जल से मुख धोती है।)
(ख) 'विमानयान' शब्द का तृतीया विभक्ति एकवचन 'विमानयानेन' होगा। वाक्य बनता है: राघवः विमानयानेन विहरति। (राघव विमान से विहार करता है।)
(ग) 'मौक्तिकहार' शब्द का तृतीया विभक्ति एकवचन 'मौक्तिकहारेण' होगा। वाक्य बनता है: कण्ठः मौक्तिकहारेण शोभते। (कण्ठ हार से सुशोभित होता है।)
(घ) 'सूर्य' शब्द का तृतीया विभक्ति एकवचन 'सूर्येण' होगा। वाक्य बनता है: नभः सूर्येण प्रकाशते। (आकाश सूर्य से प्रकाशित होता है।)
(ङ) 'अम्बुदमाला' शब्द का तृतीया विभक्ति एकवचन 'अम्बुदमालया' होगा। वाक्य बनता है: पर्वतशिखरम् अम्बुदमालया आकर्षकं दृश्यते। (पर्वत शिखर बादलों की माला से आकर्षक दिखाई देता है।)
प्रश्न 3
यथा-सूर्यः, चन्द्रः, अम्बुदः, शुक्रः। — अम्बुदः
(क) पत्राणि, पुष्पाणि, फलानि, मित्राणि। .....
(ख) जलचरः, खेचरः, भूचरः, निशाचरः। .....
(ग) गावः, सिंहाः, कच्छपाः, गजाः। .....
(घ) मयूराः, चटकाः, शुकाः, मण्डूकाः। .....
(ङ) पुस्तकालयः, श्यामपट्टः, प्राचार्यः, सौचिकः। .....
(च) लेखनी, पुस्तिका, अध्यापिका, अजा। .....
इस प्रश्न में हमें दिए गए शब्दों के समूह में से उस शब्द को पहचानना है जो बाकी शब्दों से भिन्न है। भिन्नता का आधार अर्थ, लिंग, वचन या कार्य हो सकता है।
(क) पत्राणि (पत्ते), पुष्पाणि (फूल), फलानि (फल) - ये सभी पौधे के भाग हैं। मित्राणि (मित्र) - यह सजीव है। अतः, मित्राणि भिन्न है।
(ख) जलचरः (जल में रहने वाला), खेचरः (आकाश में उड़ने वाला), भूचरः (भूमि पर चलने वाला) - ये सभी किसी विशेष स्थान पर विचरण करने वाले जीव हैं। निशाचरः (रात्रि में विचरण करने वाला) - यह भी विचरण करने वाला जीव है, लेकिन 'निशा' (रात्रि) पर जोर है, जो अन्य विकल्पों से भिन्न है। हालांकि, यदि हम सामान्य वर्गीकरण देखें तो ये सभी 'चरः' प्रत्यय वाले हैं। दिए गए उत्तर के अनुसार, निशाचरः को भिन्न माना गया है, संभवतः इसके विशेष अर्थ के कारण।
(ग) गावः (गाय), सिंहाः (शेर), गजाः (हाथी) - ये सभी सामान्यतः भूमि पर पाए जाने वाले बड़े जानवर हैं। कच्छपाः (कछुए) - यह एक सरीसृप है और अन्य से भिन्न है। अतः, कच्छपाः भिन्न है।
(घ) मयूराः (मोर), चटकाः (चिड़िया), शुकाः (तोता) - ये सभी पक्षी हैं जो उड़ सकते हैं। मण्डूकाः (मेंढक) - यह एक उभयचर है। अतः, मण्डूकाः भिन्न है।
(ङ) पुस्तकालयः (पुस्तकालय), श्यामपट्टः (श्यामपट्ट), प्राचार्यः (प्रधानाचार्य) - ये सभी विद्यालय से संबंधित स्थान या व्यक्ति हैं। सौचिकः (दर्जी) - यह एक व्यवसाय करने वाला व्यक्ति है जो विद्यालय से सीधे संबंधित नहीं है। अतः, सौचिकः भिन्न है।
(च) लेखनी (कलम), पुस्तिका (कॉपी) - ये लिखने के साधन हैं। अध्यापिका (अध्यापिका), अजा (बकरी) - ये दोनों स्त्रीलिंग संज्ञाएँ हैं। यदि हम 'वस्तु' और 'प्राणी' के आधार पर देखें, तो लेखनी और पुस्तिका वस्तुएँ हैं, जबकि अध्यापिका और अजा प्राणी हैं। दिए गए उत्तर के अनुसार, अजा को भिन्न माना गया है, संभवतः 'अध्यापिका' को एक पेशेवर भूमिका के रूप में और 'अजा' को एक सामान्य प्राणी के रूप में वर्गीकृत करने के कारण।
प्रश्न 4
(क) के वायुयानं रचयन्ति?
(ख) वायुयानं कं-कं क्रान्त्वा उपरि गच्छति?
(ग) वयं कीदृशं सोपानं रचयाम?
(घ) वयं कस्मिन् लोके प्रविशाम?
(ङ) आकाशे काः चित्वा मौक्तिकहारं रचयाम?
(च) केषां गृहेषु हर्ष जनयाम?
यह प्रश्न पाठ पर आधारित है और छात्रों से पाठ में दी गई जानकारी के आधार पर उत्तर देने की अपेक्षा करता है।
(क) राघवः, माधवः, सीता, ललिता च वायुयानं रचयन्ति। (राघव, माधव, सीता और ललिता वायुयान की रचना करते हैं।)
(ख) वायुयानम् उन्नतवृक्षं तुङ्गभवनं च क्रान्त्वा उपरि गच्छति। (वायुयान ऊँचे वृक्ष और ऊँचे भवन को पार करके ऊपर जाता है।)
(ग) वयं हिमवन्तं सोपानं रचयाम। (हम हिमवान (बर्फ़ीला) सोपान (सीढ़ी) की रचना करते हैं।)
(घ) वयं चन्द्रलोके प्रविशाम। (हम चन्द्रलोक में प्रवेश करते हैं।)
(ङ) वयं आकाशे ताराः चित्वा मौक्तिकहारं रचयाम। (हम आकाश में तारों को चुनकर मोतियों का हार बनाते हैं।)
(च) वयं दुःखितपीडितकृषकाणां गृहेषु हर्ष जनयाम। (हम दुःखी और पीड़ित किसानों के घरों में खुशी उत्पन्न करते हैं।)
प्रश्न 5
उन्नत:
गगने
सुन्दर:
चित्वा
पृथिव्याम्
दु:खी
असुन्दर:
हर्ष:
अवनत:
शोक:
विकीर्य
सुखी
इस प्रश्न में दिए गए शब्दों के विलोम (विपरीतार्थक) शब्दों का मिलान करना है।
- उन्नत: (ऊँचा) का विलोम अवनत: (नीचा) है।
- गगने (आकाश में) का विलोम पृथिव्याम् (पृथ्वी पर) है।
- सुन्दर: (सुंदर) का विलोम असुन्दर: (कुरूप) है।
- चित्वा (चुनकर) का विलोम विकीर्य (फैलाकर/बिखेरकर) है।
- दु:खी (दुखी) का विलोम सुखी (सुखी) है।
- हर्ष: (खुशी) का विलोम शोक: (दुःख) है।
Common mistakes
- तृतीय विभक्ति के प्रत्ययों को गलत लगाना।
- भिन्न वर्ग के पद को पहचानने में भ्रमित होना।
- पाठ के अर्थ को पूरी तरह समझे बिना प्रश्नों के उत्तर देना।
- विपरीतार्थक शब्दों के मिलान में त्रुटियाँ करना।
Revision tips
- गीत को बार-बार गाकर याद करें।
- तृतीय विभक्ति के नियमों का अभ्यास करें और वाक्यों में उनका प्रयोग करें।
- प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को पाठ के संदर्भ में समझें।
- विपरीतार्थक शब्दों की सूची बनाकर उनका अभ्यास करें।
Practice MCQs
Q1. प्रश्न 2 (क) के अनुसार, मुख प्रक्षालन के लिए किस साधन का प्रयोग किया गया है?
Explanation: प्रश्न 2 (क) में 'सा विमलेन जलेन मुखं प्रक्षालयति' वाक्य में मुख धोने के लिए विमल जल का उल्लेख है।
Q2. प्रश्न 3 (क) में 'मित्राणि' को भिन्न वर्ग का पद क्यों माना गया है?
Explanation: पत्राणि, पुष्पाणि, फलानि सभी किसी वस्तु या भाग के नाम हैं, जबकि मित्राणि (मित्र) एक सजीव का नाम है, इसलिए यह भिन्न है।
Q3. प्रश्न 4 (ख) के अनुसार, वायुयान किन बाधाओं को पार करके ऊपर जाता है?
Explanation: वायुयान उन्नतवृक्षं (ऊँचे पेड़) और तुङ्गभवनं (ऊँचे भवन) को पार करके ऊपर जाता है।
Q4. प्रश्न 4 (ङ) के अनुसार, मौक्तिकहार बनाने के लिए आकाश से क्या चुनने की बात कही गई है?
Explanation: आकाश में तारों को चुनकर मौक्तिकहार बनाने की कल्पना की गई है।
Q5. प्रश्न 5 में 'दुःखी' का विलोम शब्द क्या है?
Explanation: दुःखी का विपरीतार्थक शब्द सुखी होता है।
Frequently asked questions
कक्षा 6 के संस्कृत अध्याय 13 का मुख्य विषय क्या है?
अध्याय 13, "विमानयानं रचयाम", छात्रों को विमान बनाने की कल्पना पर आधारित गीत, व्याकरणिक अभ्यास जैसे तृतीया विभक्ति का प्रयोग, भिन्न वर्ग के शब्दों की पहचान और पाठ-आधारित प्रश्नों के उत्तर देने का अभ्यास कराता है।
इन NCERT समाधानों का उपयोग कैसे करें?
इन समाधानों का उपयोग पाठ को समझने, व्याकरण के नियमों को सीखने, अभ्यास प्रश्नों को हल करने और परीक्षा की तैयारी के लिए किया जा सकता है। प्रत्येक प्रश्न और उसके उत्तर को ध्यान से पढ़ें।
क्या ये समाधान कक्षा 6 के संस्कृत पाठ्यक्रम के लिए प्रासंगिक हैं?
हाँ, ये समाधान विशेष रूप से CBSE कक्षा 6 के संस्कृत पाठ्यक्रम के अध्याय 13 के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, जो NCERT पाठ्यपुस्तक पर आधारित हैं।
तृतीया विभक्ति का प्रयोग क्यों महत्वपूर्ण है?
तृतीया विभक्ति का प्रयोग संस्कृत में 'द्वारा', 'से', 'के साथ' जैसे अर्थों को व्यक्त करने के लिए किया जाता है। यह वाक्यों को सही ढंग से बनाने के लिए एक आवश्यक व्याकरणिक नियम है।
भिन्न वर्ग के पद को पहचानने का क्या अर्थ है?
भिन्न वर्ग के पद को पहचानने का अर्थ है कि दिए गए शब्दों के समूह में से उस शब्द को चुनना जो बाकी शब्दों से अर्थ, प्रकार या किसी अन्य विशेषता में भिन्न हो।
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