कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 15 मातुलचन्द्र NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 6 के संस्कृत अध्याय 15, 'मातुलचन्द्र' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह अध्याय बच्चों द्वारा चाँद को 'मामा' के रूप में संबोधित करने और उससे विभिन्न प्रश्न पूछने के इर्द-गिर्द घूमता है। समाधानों में बालगीत को सस्वर गाने, पद्यांशों को सही क्रम में जोड़ने, रिक्त स्थानों को भरने, पाठ पर आधारित प्रश्नों के उत्तर देने और संज्ञाओं को सम्बोधन रूपों में बदलने का अभ्यास शामिल है। ये समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने, संस्कृत व्याकरण के नियमों को लागू करने और परीक्षा की तैयारी के लिए अपने ज्ञान को मजबूत करने में मदद करते हैं। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर स्पष्ट और संक्षिप्त तरीके से दिया गया है, जिससे छात्रों को अवधारणाओं को आसानी से समझने में सहायता मिलती है।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 6
SubjectSanskrit
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
ChapterChapter 15

Chapter summary

कक्षा 6 के संस्कृत अध्याय 15 'मातुलचन्द्र' के ये NCERT समाधान छात्रों को चाँद के प्रति बच्चों के स्नेह और जिज्ञासा को समझने में मदद करते हैं। इसमें गीत के पद्यांशों को सही क्रम में लगाना, रिक्त स्थानों की पूर्ति करना, पाठ आधारित प्रश्नों के उत्तर देना और संज्ञाओं को सम्बोधन में बदलना सिखाया गया है। यह अभ्यास छात्रों की पाठ्य-समझ और व्याकरणिक कौशल को मजबूत करता है।

Learning outcomes

  • बालगीत 'मातुलचन्द्र' को सस्वर और अभिनय के साथ गाने का अभ्यास करना।
  • दिए गए पद्यांशों को उनके सही क्रम में व्यवस्थित करना सीखना।
  • पाठ के संदर्भ में रिक्त स्थानों को उपयुक्त शब्दों से भरना।
  • पाठ पर आधारित प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में देना।
  • संज्ञाओं को सम्बोधन (vocative case) में परिवर्तित करने के नियम समझना और लागू करना।
  • चाँद के प्रति बच्चों के भावों और जिज्ञासा को समझना।

Topics covered

Paper topics

  • मातुलचन्द्र (चाँद मामा)
  • बालगीत
  • पद्यांशों का क्रम निर्धारण
  • रिक्त स्थानों की पूर्ति
  • पाठ आधारित प्रश्नोत्तर
  • सम्बोधन कारक
  • संज्ञा परिवर्तन
  • संस्कृत व्याकरण

Important topics

  • मातुलचन्द्र का सम्बोधन
  • पद्यांशों का सही क्रम
  • रिक्त स्थानों की पूर्ति
  • सम्बोधन कारक का प्रयोग
  • पाठ के मुख्य भाव

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

बालगीतं साभिनयं सस्वरं गायत। (बाल गीत को अभिनय के साथ सस्वर गाइए)
Solution: इस प्रश्न का उत्तर छात्रों को बालगीत 'मातुलचन्द्र' को अभिनय के साथ सस्वर गाने का अभ्यास करने के लिए प्रोत्साहित करता है। यह एक व्यावहारिक गतिविधि है जिसे कक्षा में या व्यक्तिगत रूप से किया जा सकता है। गीत के बोलों को समझकर और उन्हें उचित हाव-भाव के साथ गाकर छात्र पाठ के भाव को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं।

प्रश्न 2

पद्यांशान् योजयत (पद्यांशो को जोड़ों)
Solution: इस प्रश्न में दिए गए पद्यांशों को उनके सही क्रम में जोड़ना है। गीत के प्रवाह और अर्थ के अनुसार सही क्रम इस प्रकार है:
  1. मातुल! किरसि कथं न स्नेहम्।
  2. तारकखचितं सितपरिधानम्।
  3. त्वरितमेहि मा श्रावय गीतिम्।
  4. अतिशयविस्तृत नीलाकाशः।
  5. धवलं तव चन्द्रिकावितानम् ।

प्रश्न 3

पद्यांशेषु रिक्तस्थानानि पूरयत (पद्यांशो मे रिक्तस्थान भरो)
Solution: इस प्रश्न में दिए गए पद्यांशों में रिक्त स्थानों को उपयुक्त शब्दों से भरना है। पाठ के अनुसार सही उत्तर इस प्रकार हैं:
  1. प्रिय मातुल! वर्धय मे प्रीतिम्।
  2. कथं प्रयास्यसि मातुलचन्द्र।
  3. नैव दृश्यते क्वचिदवकाश:।
  4. मह्यं दास्यसि मातुंलचन्द्र!।
  5. कथमायासि न भो! मम गेहम्।

प्रश्न 4

प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत (प्रश्नो के उत्तर लिखो)
Solution: इस प्रश्न में पाठ पर आधारित प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में लिखने हैं। उत्तर इस प्रकार हैं:
  1. अस्मिन् पाठे कः मातुलः? उत्तर: अस्मिन् पाठे चन्द्रः मातुलः । (इस पाठ में चाँद मामा है।)
  2. नीलाकाशः कीदृशः अस्ति? उत्तर: नीलाकाशः अतिशयविस्तृतः अस्ति। (नीला आकाश बहुत विस्तृत है।)
  3. मातुलचन्द्रः कि न किरति? उत्तर: मातुलचन्द्रः स्नेहं न किरति । (मामा चाँद स्नेह नहीं करता है। - यह प्रश्न के भाव को समझने के लिए है, गीत में बच्चा ऐसा पूछता है।)
  4. किं श्रावियतु शिशु चन्द्रं कथयति? उत्तर: गीति श्रावियतु शिशु चन्द्रं कथयति। (गीत सुनाने के लिए बच्चा चाँद से कहता है।)
  5. चन्द्रस्य सितपरिधानं कथम् अस्ति? उत्तर: चन्द्रस्य सितपरिधानं तारकखचितम् अस्ति। (चाँद का सफेद वस्त्र तारों से जड़ा हुआ है।)

प्रश्न 5

उदाहरणानुसारं निम्नलिखितपदानि सम्बोधने परिवर्तयत (उदाहरण के अनुसार निम्नलिखित पदो को सम्बोधन मे बदलो) यथा- चन्द्रः — चन्द्र!
Solution: इस प्रश्न में संज्ञाओं को सम्बोधन कारक में बदलना है। सम्बोधन का प्रयोग किसी को पुकारने या संबोधित करने के लिए किया जाता है। प्रथम भाग (पुल्लिंग एकवचन): यथा- चन्द्रः — चन्द्र!
  • (क) शिष्यः — शिष्य!
  • (ख) गोपालः – गोपाल!
द्वितीय भाग (स्त्रीलिंग एकवचन): यथा- बालिका — बालिके!
  • (क) प्रियंवदा – प्रियंवदे!
  • (ख) लता – लते!

स्पष्टीकरण: पुल्लिंग एकवचन में, 'अ' या 'आ' की मात्रा वाले शब्दों का सम्बोधन रूप मूल शब्द जैसा ही होता है (जैसे रामः -> राम!) या 'अ' की जगह 'अः' का लोप हो जाता है (जैसे बालकः -> बालक!)। 'आ' की मात्रा वाले शब्दों का सम्बोधन रूप मूल शब्द जैसा ही होता है (जैसे गोपालः -> गोपाल!)। स्त्रीलिंग एकवचन में, 'आ' की मात्रा वाले शब्दों का सम्बोधन रूप 'ए' हो जाता है (जैसे लता -> लते!)। 'ई' की मात्रा वाले शब्दों का सम्बोधन रूप 'ई' ही रहता है (जैसे नदी -> नदी!)।

Common mistakes

  • पद्यांशों को गलत क्रम में जोड़ना।
  • रिक्त स्थानों में अनुपयुक्त शब्दों का प्रयोग करना।
  • सम्बोधन के रूपों को पहचानने या बनाने में त्रुटि करना।
  • पाठ के अर्थ को पूरी तरह समझे बिना प्रश्नों के उत्तर देना।

Revision tips

  • गीत को बार-बार गाकर याद करें और उसके अर्थ को समझें।
  • अभ्यास 2 और 3 में दिए गए पद्यांशों को अलग-अलग लिखकर क्रम मिलाने का अभ्यास करें।
  • प्रश्न 4 के उत्तरों को पाठ के आधार पर अपने शब्दों में लिखने का प्रयास करें।
  • प्रश्न 5 में दिए गए उदाहरणों को ध्यान से देखें और अन्य संज्ञाओं के साथ सम्बोधन बनाने का अभ्यास करें।

Practice MCQs

Q1. इस पाठ में चाँद को क्या कहकर संबोधित किया गया है?

Q2. नीलाकाश कैसा बताया गया है?

Q3. शिशु चाँद से क्या गाने के लिए कहता है?

Q4. चाँद के सफेद वस्त्र (परिधान) कैसे हैं?

Q5. सम्बोधन के रूप में 'चन्द्रः' का सही रूप क्या है?

Frequently asked questions

यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए है?

यह NCERT समाधान कक्षा 6 के संस्कृत विषय के अध्याय 15 'मातुलचन्द्र' के लिए है।

इस समाधान में क्या-क्या शामिल है?

इसमें अभ्यास के सभी प्रश्न शामिल हैं, जैसे बालगीत गाना, पद्यांशों को जोड़ना, रिक्त स्थान भरना, पाठ पर आधारित प्रश्नों के उत्तर देना और संज्ञाओं को सम्बोधन में बदलना।

क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे?

हाँ, ये समाधान पाठ की गहरी समझ प्रदान करते हैं और व्याकरणिक अभ्यासों के माध्यम से छात्रों को परीक्षा के लिए तैयार करने में मदद करते हैं।

सम्बोधन कारक क्या होता है?

सम्बोधन कारक का प्रयोग किसी को पुकारने या संबोधित करने के लिए किया जाता है। जैसे 'चन्द्रः' का सम्बोधन 'चन्द्र!' है।

क्या प्रश्न 2 में पद्यांशों को जोड़ने का सही क्रम दिया गया है?

हाँ, प्रश्न 2 के उत्तर में पद्यांशों को उनके सही क्रम में जोड़ा गया है।

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