कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 10: कृषिकाः कर्मवीराः NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 6 संस्कृत के अध्याय 10, 'कृषिकाः कर्मवीराः' (मेहनती किसान) के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह अध्याय किसानों के कठिन परिश्रम, उनके जीवन की चुनौतियों और समाज में उनके महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डालता है। समाधानों में श्लोकांशों का सही मिलान, कथनों की सत्यता का मूल्यांकन और पर्यायवाची शब्दों की पहचान शामिल है। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर स्पष्ट और संक्षिप्त रूप से समझाया गया है, जिससे छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने में मदद मिलेगी। ये समाधान छात्रों को किसानों के महत्व को समझने और संस्कृत भाषा में उनकी शब्दावली को बेहतर बनाने में सहायता करेंगे, जो परीक्षा की तैयारी के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 6 |
| Subject | Sanskrit |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | Chapter 10 |
Chapter summary
कक्षा 6 संस्कृत के अध्याय 10, 'कृषिकाः कर्मवीराः' के ये NCERT समाधान छात्रों को किसानों के मेहनती जीवन से परिचित कराते हैं। इसमें श्लोकांशों को सही क्रम में जोड़ना, दिए गए कथनों की सत्यता परखना और पर्यायवाची शब्दों को पहचानना सिखाया गया है। समाधानों के माध्यम से छात्र किसानों के श्रम, उनकी कठिनाइयों और उनके द्वारा समाज को अन्न प्रदान करने के महत्व को समझेंगे। यह अभ्यास छात्रों की संस्कृत समझ और शब्दावली को मजबूत करने में सहायक है।
Learning outcomes
- किसानों के परिश्रम और जीवन के बारे में समझना।
- श्लोकांशों को सही क्रम में मिलाने का अभ्यास करना।
- दिए गए कथनों की सत्यता का मूल्यांकन करना सीखना।
- पर्यायवाची शब्दों को पहचानना और उनका प्रयोग समझना।
- संस्कृत पाठ के अर्थ को स्पष्ट करना।
Topics covered
Paper topics
- कृषकों का जीवन
- किसानों का परिश्रम
- श्लोकांश मिलान
- कथन सत्यता
- पर्यायवाची शब्द
- संस्कृत शब्दावली
- पाठ 10: कृषिकाः कर्मवीराः
Important topics
- किसानों का परिश्रम और महत्व
- श्लोकांशों का सही अर्थ और मिलान
- पर्यायवाची शब्दों की पहचान
- कठिन जीवन का वर्णन
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Questions and Solutions
प्रश्न 1. उच्चारणं कुरुत (उच्चारण करें)
इस प्रश्न में दिए गए संस्कृत शब्दों का सही उच्चारण करने का अभ्यास करना है। प्रत्येक शब्द का स्पष्ट उच्चारण महत्वपूर्ण है।
सूर्यस्तपतु (सूर्य तपतु) - सूर्य का तप या गर्मी।
जीर्णम् (जीर्णम्) - पुराना, फटा हुआ।
शीतकालेऽपि (शीतकाले अपि) - सर्दी के मौसम में भी।
वारियतुम् (वारयितुम्) - रोकने के लिए।
ग्रीष्मे (ग्रीष्मे) - गर्मी के मौसम में।
सस्यपूर्णानि (सस्यपूर्णानि) - अनाज से भरे हुए।
पदत्राणे (पदत्राणे) - जूते या चप्पल।
कण्टकावृता (कण्टकावृता) - कांटों से भरी हुई।
क्षुधा-तृषाकुलौ (क्षुधा-तृषाकुलौ) - भूख और प्यास से व्याकुल (दो व्यक्ति)।
प्रश्न 2. श्लोकांशान् योजयत (श्लोकांशों का मिलान करें)
क: गृहं जीर्णं न वर्षासु
ख: हलेन च कुदालेन
ग: पादयोर्न पदत्राणे।
घ: तयोः श्रमेण क्षेत्राणि
ङ: धरित्री सरसा जाता
मिलान के लिए शब्द:
1. वृष्टिं वारयितुं क्षमम्।
2. तौ तु क्षेत्राणि कर्षतः।
3. शरीरे वसनानि नो।
4. सस्यपूर्णानि सर्वदा।
5. या शुष्का कण्टकावृता।
इस प्रश्न में श्लोक के दो हिस्सों को सही ढंग से जोड़ना है। प्रत्येक श्लोकांश का अर्थ समझने के बाद ही सही मिलान किया जा सकता है।
- गृहं जीर्णं न वर्षासु — वृष्टिं वारयितुं क्षमम्। (घर पुराना है, बारिश को रोकने में सक्षम नहीं है।)
- हलेन च कुदालेन — तौ तु क्षेत्राणि कर्षतः। (हल और कुदाल से वे दोनों खेत जोतते हैं।)
- पादयोर्न पदत्राणे। — शरीरे वसनानि नो। (पैरों में जूते नहीं हैं, शरीर पर वस्त्र नहीं हैं।)
- तयोः श्रमेण क्षेत्राणि — सस्यपूर्णानि सर्वदा। (उनके परिश्रम से खेत हमेशा अनाज से भरे रहते हैं।)
- धरित्री सरसा जाता — या शुष्का कण्टकावृता। (पृथ्वी हरी-भरी हो जाती है, जो सूखी और कांटों से भरी थी।)
प्रश्न 3. उपयुक्तकथनानां समक्षम् 'आम्' अनुपयुक्तकथनानां समक्षं 'न' इति लिखत (उपयुक्त कथनों के सामने 'आम्' तथा अनुपयुक्त कथनों के सामने 'न' लिखें)
(क) कृषकाः सर्वेभ्यः अन्नं यच्छन्ति। (किसान सभी को अन्न देते हैं।)
(ख) कृषकाणां जीवनं कष्टप्रदं न भवति। (किसानों का जीवन कष्टप्रद नहीं होता है।)
(ग) कृषक: क्षेत्राणि सस्यपूर्णानि करोति। (किसान खेतों को अनाज से भर देता है।)
(घ) शीते शरीरे कम्पनं न भवति। (सर्दी में शरीर कांपता नहीं है।)
(ङ) श्रमेण धरित्री सरसा भवति। (परिश्रम से पृथ्वी हरी-भरी हो जाती है।)
इस प्रश्न में पाठ के आधार पर दिए गए कथनों की सत्यता का मूल्यांकन करना है।
- (क) कृषकाः सर्वेभ्यः अन्नं यच्छन्ति। — आम्। (किसान सभी को अन्न देते हैं, यह सत्य है।)
- (ख) कृषकाणां जीवनं कष्टप्रदं न भवति। — न। (किसानों का जीवन बहुत कष्टप्रद होता है, इसलिए यह कथन गलत है।)
- (ग) कृषक: क्षेत्राणि सस्यपूर्णानि करोति। — आम्। (किसान अपने परिश्रम से खेतों को अनाज से भर देता है, यह सत्य है।)
- (घ) शीते शरीरे कम्पनं न भवति। — न। (सर्दी में शरीर कांपता है, इसलिए यह कथन गलत है।)
- (ङ) श्रमेण धरित्री सरसा भवति। — आम्। (किसानों के परिश्रम से पृथ्वी हरी-भरी और उपजाऊ हो जाती है, यह सत्य है।)
प्रश्न ४. मञ्जूषातः पर्यायवाचिपदानि चित्वा लिखत (मंजूषा से पर्यायवाची पद चुनकर लिखें)
मंजूषा: रवि:, वस्त्राणि, जर्जरम्, अधिकम्, पृथ्वी, पिपासा
शब्द:
वसनानि – ______________
सूर्य: – ______________
तृषा – ______________
विपुलम् – ______________
जीर्णम् – ______________
धरित्री – ______________
इस प्रश्न में दिए गए संस्कृत शब्दों के पर्यायवाची शब्द मंजूषा से ढूंढकर लिखने हैं।
वसनानि – वस्त्राणि (वस्त्र, कपड़े)
सूर्य: – रवि: (सूर्य)
तृषा – पिपासा (प्यास)
विपुलम् – अधिकम् (बहुत, अधिक)
जीर्णम् – जर्जरम् (पुराना, फटा हुआ)
धरित्री – पृथ्वी (पृथ्वी, धरती)
Common mistakes
- श्लोकांशों को गलत क्रम में मिलाना।
- कथनों की सत्यता का गलत मूल्यांकन करना।
- पर्यायवाची शब्दों को पहचानने में त्रुटि करना।
Revision tips
- प्रत्येक श्लोकांश के अर्थ को समझें और फिर मिलान करें।
- कथनों को पाठ के संदर्भ में ध्यान से पढ़ें और फिर 'आम्' या 'न' का चयन करें।
- मंजूषा में दिए गए शब्दों और उनके अर्थों का अभ्यास करें।
- किसानों के जीवन से संबंधित मुख्य बिंदुओं को याद करें।
Practice MCQs
Q1. किसानों के जीवन का वर्णन किस शब्द से किया गया है?
Explanation: अध्याय का शीर्षक 'कृषिकाः कर्मवीराः' है, जिसका अर्थ है मेहनती किसान। यह किसानों के परिश्रमी स्वभाव को दर्शाता है।
Q2. किसानों के पास अक्सर क्या नहीं होता है?
Explanation: श्लोक में बताया गया है कि किसानों के पैरों में जूते (पदत्राणे) नहीं होते हैं, जो उनके कठिन जीवन को दर्शाता है।
Q3. 'धरित्री सरसा जाता' का क्या अर्थ है?
Explanation: किसानों के परिश्रम से पृथ्वी हरी-भरी और उपजाऊ हो जाती है, जिसे 'धरित्री सरसा जाता' कहा गया है।
Q4. 'तृषा' शब्द का क्या अर्थ है?
Explanation: मंजूषा में 'तृषा' का पर्यायवाची 'पिपासा' दिया गया है, जिसका अर्थ प्यास होता है।
Q5. किसान अपने खेतों को किससे सींचते हैं?
Explanation: श्लोक के अनुसार, किसानों के श्रम से खेत सस्यपूर्ण (अन्न से भरे हुए) हो जाते हैं, जो अप्रत्यक्ष रूप से सींचने का भाव व्यक्त करता है।
Frequently asked questions
कक्षा 6 संस्कृत के अध्याय 10 का शीर्षक क्या है?
कक्षा 6 संस्कृत के अध्याय 10 का शीर्षक 'कृषिकाः कर्मवीराः' है, जिसका अर्थ है 'मेहनती किसान'।
यह समाधान किन छात्रों के लिए उपयोगी है?
यह समाधान विशेष रूप से CBSE बोर्ड से कक्षा 6 के उन छात्रों के लिए उपयोगी है जो संस्कृत विषय का अध्ययन कर रहे हैं और अध्याय 10 के अभ्यास प्रश्नों को समझना चाहते हैं।
समाधान में किस प्रकार के प्रश्न शामिल हैं?
समाधान में उच्चारण अभ्यास, श्लोकांशों का मिलान, कथनों की सत्यता की जाँच और पर्यायवाची शब्दों को पहचानने जैसे प्रश्न शामिल हैं।
क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे?
हाँ, ये समाधान छात्रों को अध्याय की अवधारणाओं को स्पष्ट करने, शब्दावली सुधारने और अभ्यास प्रश्नों को हल करने की विधि सीखने में मदद करके परीक्षा की तैयारी में सहायता करेंगे।
समाधान में पर्यायवाची शब्द कैसे समझाए गए हैं?
समाधान में दिए गए 'मंजूषा' से सही पर्यायवाची शब्दों को चुनकर मिलान करने का तरीका बताया गया है, जिससे छात्रों को शब्दों के अर्थ और उनके समानार्थी शब्द समझने में आसानी होती है।
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