CBSE Class 5 Hindi NCERT Solutions: वे दिन भी क्या दिन थे

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CBSE Class 5 Hindi के पाठ 'वे दिन भी क्या दिन थे' में हम किताबों और सीखने के तरीकों के विकास पर चर्चा करते हैं। यह पाठ हमें अतीत की ओर ले जाता है, जहाँ हम कागज़ की किताबों की तुलना भविष्य की डिजिटल शिक्षा से करते हैं। समाधानों में सदियों पहले छपी किताबों की अवधारणा, किताबों को सहेजने का महत्व, और भौतिक किताबों व स्क्रीन-आधारित सीखने के बीच पसंद जैसे विषयों पर प्रकाश डाला गया है। इसमें कागज से पहले लेखन सामग्री के इतिहास और मशीनों से सीखने बनाम शिक्षकों से सीखने के बीच के अंतर को भी दर्शाया गया है, जो शिक्षा में मानवीय तत्व पर जोर देता है। इसके अतिरिक्त, यह पाठ प्रौद्योगिकी द्वारा संचार और दैनिक जीवन में लाए गए बदलावों पर विचार करने के लिए प्रेरित करता है, जिसमें सामान्य वस्तुओं की पिछली और वर्तमान कीमतों की तुलना और व्यक्तिगत व सार्वजनिक क्षेत्रों में कंप्यूटर के उपयोग शामिल हैं। ये समाधान सीखने और समाज पर तकनीकी प्रगति के प्रभाव के बारे में समझ और आलोचनात्मक सोच को बढ़ाने के लिए एक उत्कृष्ट संसाधन हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 5
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
ChapterChapter 8

Chapter summary

Chapter 8, 'वे दिन भी क्या दिन थे', for CBSE Class 5 Hindi focuses on the theme of past versus future in learning and communication. The NCERT Solutions provided here help students understand the historical context of books, the evolution of reading materials from paper to digital formats, and the comparison between traditional teaching methods and machine-based learning. It encourages critical thinking about technological advancements and their impact on daily life, including changes in communication and the cost of goods over time.

Learning outcomes

  • Understand the historical context of books and learning.
  • Compare traditional paper books with digital reading formats.
  • Analyze the advantages and disadvantages of machine-based learning versus teacher-led instruction.
  • Reflect on the evolution of communication methods and technology.
  • Discuss the impact of technology on personal and public life.
  • Understand the concept of inflation by comparing past and present prices of goods.

Topics covered

Paper topics

  • Evolution of books
  • Paper vs. digital reading
  • Machine learning vs. teacher-led learning
  • Historical writing materials
  • Technological advancements
  • Changes in communication
  • Computer usage
  • Inflation and price changes
  • Past vs. present comparisons

Important topics

  • Comparison of paper books and screen-based learning
  • Role of teachers versus machines in education
  • Historical context of books and writing
  • Impact of technology on daily life and communication

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Questions and Solutions

प्रश्न 1. कुम्मी के हाथ जो किताब आई थी वह कब छपी होगी?

प्रश्न 1. कुम्मी के हाथ जो किताब आई थी वह कब छपी होगी?
Solution: कहानी में कुम्मी को जो किताब मिली थी, वह भविष्य की तकनीक के विपरीत, बहुत पुरानी थी। यह किताब सदियों पहले छपी होगी, जो उस समय की पारंपरिक छपाई का प्रतीक है।

प्रश्न 2. रोहित ने कहा था, "कितनी पुस्तकें बेकार जाती होंगी। एक बार पढ़ी और फिर बेकार हो गईं।" क्या सचमुच में ऐसा होता है?

प्रश्न 2. रोहित ने कहा था, "कितनी पुस्तकें बेकार जाती होंगी। एक बार पढ़ी और फिर बेकार हो गईं।" क्या सचमुच में ऐसा होता है?
Solution: यह बात कुछ हद तक सच हो सकती है, लेकिन यह पूरी तरह से पुस्तक के उपयोग पर निर्भर करता है। यदि कोई पुस्तक पढ़कर उसे फेंक दिया जाए या कबाड़ी को बेच दिया जाए, तो वह बेकार जा सकती है। हालाँकि, यदि पुस्तकों को सहेज कर रखा जाए और बार-बार पढ़ा जाए, तो वे कभी बेकार नहीं होतीं। अच्छी पुस्तकें पीढ़ी-दर-पीढ़ी ज्ञान और मनोरंजन का स्रोत बनी रहती हैं और उनकी सीख जीवन में उतारी जा सकती है।

प्रश्न 3. कागज के पन्नों की किताब और टेलीविजन के पर्दे पर चलने वाली किताब तुम इनमें से किसको पसंद करोगे? क्यों?

प्रश्न 3. कागज के पन्नों की किताब और टेलीविजन के पर्दे पर चलने वाली किताब तुम इनमें से किसको पसंद करोगे? क्यों?
Solution: मैं कागज के पन्नों वाली किताब को पसंद करूँगा। इसका कारण यह है कि कागज की किताबों को हम अपनी सुविधानुसार कभी भी, कहीं भी पढ़ सकते हैं। इन्हें एक से अधिक बार पढ़ा जा सकता है, और हम अपनी गति से, किस्तों में भी पढ़ सकते हैं। टेलीविजन के पर्दे पर चलने वाली किताब में ये सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होतीं, जैसे कि इसे बार-बार या अपनी गति से पढ़ना।

प्रश्न 4. तुम कागज़ पर छपी किताबों से पड़ते हो। पता करो कि कागज़ से पहले की छपाई किस-किस चीज पर हुआ करती थी?

प्रश्न 4. तुम कागज़ पर छपी किताबों से पड़ते हो। पता करो कि कागज़ से पहले की छपाई किस-किस चीज पर हुआ करती थी?
Solution: कागज के आविष्कार से पहले, छपाई विभिन्न सामग्रियों पर की जाती थी। उस समय लोग ज्ञान को दर्ज करने और फैलाने के लिए पत्तों (जैसे ताड़ के पत्ते), ताम्रपत्रों (तांबे की चादरों) और लकड़ी की सतहों का उपयोग करते थे। इन पर उकेर कर या लिखकर सामग्री तैयार की जाती थी।

प्रश्न 5. तुम मशीन की मदद से पढ़ना चाहोगे या अध्यापक की मदद से? दोनों के पढ़ाने में किस-किस तरह की आसानियाँ और मुश्किलें हैं?

प्रश्न 5. तुम मशीन की मदद से पढ़ना चाहोगे या अध्यापक की मदद से? दोनों के पढ़ाने में किस-किस तरह की आसानियाँ और मुश्किलें हैं?
Solution: मैं अध्यापक की मदद से पढ़ना चाहूँगा। अध्यापक के पढ़ाने में यह आसानी होती है कि वे हमारे सामने उपस्थित रहकर पाठ पढ़ाते हैं, जिससे पाठ को समझना सरल हो जाता है। यदि हमें कोई बात एक बार में समझ न आए, तो अध्यापक उसे दोबारा समझा सकते हैं। वे डाँटकर अनुशासन बनाए रखते हैं, लेकिन साथ ही प्यार और स्नेह भी दिखाते हैं, जिससे कक्षा में एक अपनापन और सहज माहौल बनता है। मशीन की मदद से पढ़ाई में ये मानवीय पहलू नहीं होते, और यह ऊबाऊ भी हो सकती है। मशीनें जानकारी दे सकती हैं, लेकिन वे अध्यापक की तरह व्यक्तिगत मार्गदर्शन और भावनात्मक जुड़ाव प्रदान नहीं कर सकतीं।

प्रश्न 1. 1967 में हिंदी में छपी इस कहानी में कल्पना की गई है कि सालों बाद स्कूल की जगह मशीनें ले लेंगी। तुम भी। कल्पना करो कि बहुत सालों बाद ये चीजें कैसी होंगी- पेन • घड़ी • टेलीफोन/मोबाइल • टेलीविज़न • कोई और चीज़ जिसके बारे में तुम सोचना चाहो....

प्रश्न 1. 1967 में हिंदी में छपी इस कहानी में कल्पना की गई है कि सालों बाद स्कूल की जगह मशीनें ले लेंगी। तुम भी। कल्पना करो कि बहुत सालों बाद ये चीजें कैसी होंगी-
  • पेन
  • घड़ी
  • टेलीफोन/मोबाइल
  • टेलीविज़न
  • कोई और चीज़ जिसके बारे में तुम सोचना चाहो....
Solution: यह प्रश्न छात्रों की कल्पना पर आधारित है। यहाँ कुछ संभावित उत्तर दिए गए हैं, लेकिन छात्र अपनी रचनात्मकता का उपयोग कर सकते हैं:

पेन: शायद ऐसे पेन होंगे जो बोलते होंगे और लिखे हुए को तुरंत डिजिटल रूप में बदल देंगे, या ऐसे पेन जो स्याही के बिना ही लिख सकेंगे, शायद लेजर या ऊर्जा से।

घड़ी: घड़ियाँ शायद सिर्फ समय ही नहीं बताएंगी, बल्कि हमारे स्वास्थ्य की निगरानी करेंगी, हमारे मूड का पता लगाएंगी, और शायद हमारे विचारों को भी पढ़ सकेंगी। वे हमारे शरीर पर ही एकीकृत हो सकती हैं।

टेलीफोन/मोबाइल: भविष्य के मोबाइल शायद हमारे दिमाग से सीधे जुड़ जाएंगे, जिससे हम बिना बोले या टाइप किए संवाद कर सकेंगे। वे होलोग्राफिक कॉल कर सकेंगे और हमारी हर जरूरत को पूरा करने के लिए एक व्यक्तिगत सहायक के रूप में काम करेंगे।

टेलीविज़न: टेलीविज़न शायद सपाट स्क्रीन से हटकर त्रि-आयामी (3D) या होलोग्राफिक हो जाएंगे, जो कमरे में कहीं भी दिखाई दे सकते हैं। वे हमारी भावनाओं के अनुसार सामग्री बदल सकेंगे और हमें अनुभव में पूरी तरह से शामिल कर लेंगे।

कोई और चीज़ (जैसे कार): भविष्य की कारें शायद उड़ने वाली होंगी, पूरी तरह से स्वचालित (सेल्फ-ड्राइविंग) होंगी, और पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा पर चलेंगी। वे हमारे गंतव्य तक पहुँचने के लिए सबसे कुशल मार्ग का चयन करेंगी।

प्रश्न 2. नीचे कुछ वस्तुओं के नाम दिए गए हैं। बड़ों से पूछकर पता करें कि बीस साल पहले इनकी क्या कीमत थी और अब इनका कितना दाम है?

प्रश्न 2. नीचे कुछ वस्तुओं के नाम दिए गए हैं। बड़ों से पूछकर पता करें कि बीस साल पहले इनकी क्या कीमत थी और अब इनका कितना दाम है?

वस्तुओं के नाम: आलू, लड्डू, दाल, शक्कर, चावल, दूध

Solution: यह प्रश्न छात्रों को अपने बड़ों से पूछकर जानकारी एकत्र करने के लिए प्रोत्साहित करता है। यहाँ एक उदाहरण दिया गया है कि बीस साल पहले और अब इन वस्तुओं की कीमतें क्या हो सकती हैं (ये कीमतें अनुमानित हैं और क्षेत्र के अनुसार भिन्न हो सकती हैं):
वस्तु का नाम बीस साल पहले (अनुमानित कीमत) अब (अनुमानित कीमत)
आलू 8-10 रुपये प्रति कि. ग्रा. 20-30 रुपये प्रति कि. ग्रा.
लड्डू 100-150 रुपये प्रति कि. ग्रा. 250-400 रुपये प्रति कि. ग्रा. (सामग्री के अनुसार)
शक्कर 15-20 रुपये प्रति कि. ग्राम 40-50 रुपये प्रति कि. ग्रा.
दाल (अरहर/चना) 30-40 रुपये प्रति कि. ग्रा. 100-140 रुपये प्रति कि. ग्रा.
चावल (बासमती) 40-50 रुपये प्रति कि. ग्रा. 100-150 रुपये प्रति कि. ग्रा.
दूध 15-20 रुपये प्रति लीटर 50-60 रुपये प्रति लीटर
इस तुलना से पता चलता है कि समय के साथ वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि हुई है, जिसे मुद्रास्फीति कहते हैं।

प्रश्न 3. आज हमारे कई काम कंप्यूटर की मदद से होते हैं। सोचो और लिखो कि अपने व्यक्तिगत और सार्वजनिक जीवन में हम कंप्यूटर का इस्तेमाल किन-किन उद्देश्यों के लिए करते हैं?

प्रश्न 3. आज हमारे कई काम कंप्यूटर की मदद से होते हैं। सोचो और लिखो कि अपने व्यक्तिगत और सार्वजनिक जीवन में हम कंप्यूटर का इस्तेमाल किन-किन उद्देश्यों के लिए करते हैं?
Solution: कंप्यूटर हमारे व्यक्तिगत और सार्वजनिक जीवन का एक अभिन्न अंग बन गया है। इसके उपयोग के कुछ प्रमुख उद्देश्य इस प्रकार हैं: व्यक्तिगत जीवन में कंप्यूटर का उपयोग:
  • मनोरंजन: फिल्में देखना, संगीत सुनना, गेम खेलना।
  • संचार: ईमेल भेजना, सोशल मीडिया का उपयोग करना, वीडियो कॉल करना।
  • जानकारी प्राप्त करना: इंटरनेट पर किसी भी विषय पर जानकारी खोजना, ऑनलाइन पढ़ना।
  • शिक्षा: ऑनलाइन कोर्स करना, अध्ययन सामग्री प्राप्त करना, असाइनमेंट बनाना।
  • व्यक्तिगत प्रबंधन: बजट बनाना, फोटो व्यवस्थित करना, नोट्स लिखना।
सार्वजनिक जीवन में कंप्यूटर का उपयोग:
  • रेल/हवाई टिकट बुकिंग: यात्रा के लिए टिकट बुक करना।
  • बैंकिंग: ऑनलाइन पैसे भेजना/प्राप्त करना, खातों का प्रबंधन करना।
  • सरकारी सेवाएँ: टैक्स भरना, प्रमाण पत्र बनवाना, सरकारी योजनाओं की जानकारी लेना।
  • व्यापार और वाणिज्य: ऑनलाइन खरीदारी, बिलिंग, इन्वेंट्री प्रबंधन।
  • संचार और सूचना प्रसार: समाचार वेबसाइटें, सरकारी सूचना पोर्टल।
  • अनुसंधान और विकास: वैज्ञानिक प्रयोगों में, डेटा विश्लेषण में।

प्रश्न 4. जानकारी देने या लेने के लिए कई तरीके अपनाए जाते हैं। हम जो कुछ सोचते या महसूस करते हैं उसे अभिव्यक्त करने या बताने के भी कई ढंग हो सकते हैं। बॉक्स में ऐसे कुछ साधन दिए गए हैं। उनका वर्गीकरण करके नीचे दी गई तालिका में लिखो।

प्रश्न 4. जानकारी देने या लेने के लिए कई तरीके अपनाए जाते हैं। हम जो कुछ सोचते या महसूस करते हैं उसे अभिव्यक्त करने या बताने के भी कई ढंग हो सकते हैं। बॉक्स में ऐसे कुछ साधन दिए गए हैं। उनका वर्गीकरण करके नीचे दी गई तालिका में लिखो।

बॉक्स में दिए गए साधन: संदेश, अभिनय, रेडियो, नृत्य के हाव-भाव

Solution: जानकारी या भावनाओं को व्यक्त करने के विभिन्न साधनों को वर्गीकृत किया जा सकता है। यहाँ दिए गए साधनों का वर्गीकरण इस प्रकार है:
साधन का प्रकार उदाहरण विवरण
मौखिक/लिखित संचार संदेश यह लिखित या मौखिक रूप से जानकारी या विचार व्यक्त करने का एक सीधा तरीका है।
अभिनय/शारीरिक अभिव्यक्ति अभिनय, नृत्य के हाव-भाव ये बिना बोले, शारीरिक गतिविधियों, चेहरे के भावों और हाव-भावों के माध्यम से भावनाओं, विचारों या कहानियों को व्यक्त करने के तरीके हैं।
श्रव्य माध्यम रेडियो यह ध्वनि के माध्यम से सूचना, संगीत या कहानियाँ प्रसारित करने का एक तरीका है, जिसे सुना जा सकता है।
इस प्रकार, संदेश लिखित या मौखिक संचार है, अभिनय और नृत्य के हाव-भाव शारीरिक अभिव्यक्ति हैं, और रेडियो एक श्रव्य माध्यम है।

Common mistakes

  • Assuming technology always offers a better learning experience without considering the human element.
  • Not fully appreciating the value and longevity of physical books.
  • Underestimating the importance of teacher-student interaction in learning.
  • Failing to connect historical changes in technology to present-day life.

Revision tips

  • Reread the chapter to grasp the core message about past and future learning.
  • Focus on the comparison between paper books and screen-based learning in the solutions.
  • Think about how technology has changed your own life and learning habits.
  • Discuss the questions about machines vs. teachers with friends or family to gain different perspectives.

Practice MCQs

Q1. कहानी में कुम्मी को मिली किताब कब छपी होगी?

Q2. कागज के पन्नों वाली किताब को क्यों पसंद किया जा सकता है?

Q3. कागज के आविष्कार से पहले छपाई किन चीजों पर होती थी?

Q4. मशीन से पढ़ने की तुलना में अध्यापक से पढ़ने में क्या आसानी है?

Q5. कहानी के अनुसार, सालों बाद स्कूल की जगह कौन ले सकता है?

Frequently asked questions

यह समाधान किस कक्षा और विषय के लिए है?

यह समाधान CBSE कक्षा 5 हिंदी के लिए है, विशेष रूप से 'वे दिन भी क्या दिन थे' नामक अध्याय के लिए।

इस अध्याय के समाधानों में मुख्य रूप से किन विषयों पर चर्चा की गई है?

समाधानों में किताबों के इतिहास, कागज के पन्नों वाली किताबों और स्क्रीन पर चलने वाली किताबों की तुलना, मशीन और अध्यापक द्वारा पढ़ाने के तरीकों के फायदे-नुकसान, और तकनीक के हमारे जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव पर चर्चा की गई है।

क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे?

हाँ, ये समाधान अध्याय की अवधारणाओं को स्पष्ट करने, महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर देने और परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण विषयों को समझने में मदद करेंगे।

समाधानों में 'वे दिन भी क्या दिन थे!' का क्या अर्थ है?

यह वाक्य बीते हुए समय की प्रशंसा में कहा जाता है, जब चीजें आज की तुलना में अलग या बेहतर मानी जाती थीं। इस अध्याय में, यह भविष्य की तकनीक की तुलना में पुरानी किताबों और सीखने के तरीकों के बारे में है।

क्या समाधानों में पुराने समय की चीजों की कीमतों की तुलना की गई है?

हाँ, समाधानों में कुछ वस्तुओं (जैसे आलू, दाल, चावल) की बीस साल पहले की कीमतों की तुलना वर्तमान कीमतों से की गई है, जो मुद्रास्फीति को समझने में मदद करता है।

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