कक्षा 12 रसायन विज्ञान अध्याय 5: रसायन NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 12 रसायन विज्ञान के अध्याय 5, 'रसायन' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। इसमें पाठ्यनिहित प्रश्नों के उत्तर शामिल हैं जो पृष्ठ 117 और 118 पर दिए गए हैं। समाधान भौतिक और रासायनिक अधिशोषण, उत्प्रेरण, कोलाइडल कणों के स्कंदन और अवक्षेप के मात्रात्मक विश्लेषण जैसे महत्वपूर्ण विषयों को कवर करते हैं। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर स्पष्ट चरणों और संक्षिप्त स्पष्टीकरण के साथ प्रस्तुत किया गया है, जिससे छात्रों को अवधारणाओं को समझने और परीक्षा की तैयारी में मदद मिलती है।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | रसायन विज्ञान |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 5. रसायन |
Chapter summary
कक्षा 12 रसायन विज्ञान के अध्याय 5, 'रसायन' के लिए यह NCERT समाधान पृष्ठ 117-118 पर दिए गए पाठ्यनिहित प्रश्नों पर केंद्रित है। यह भौतिक और रासायनिक अधिशोषण की विशेषताओं, उत्प्रेरण में विशोषण की भूमिका, और हार्डी-शुल्जे नियम के अनुप्रयोग जैसे विषयों को स्पष्ट करता है। समाधान छात्रों को अवक्षेपों को धोने के महत्व और एस्टर के जल-अपघटन जैसी प्रतिक्रियाओं के व्यवहार को समझने में मदद करते हैं।
Learning outcomes
- रसोवशोषण के अभिलक्षणों को समझना।
- भौतिक अधिशोषण पर ताप के प्रभाव का विश्लेषण करना।
- चूर्णित पदार्थों की उच्च अधिशोषण क्षमता के कारण को स्पष्ट करना।
- उत्प्रेरण में कार्बन मोनोऑक्साइड की विषाक्तता के प्रभाव को समझना।
- एस्टर के जल-अपघटन में स्व-उत्प्रेरण की अवधारणा को समझना।
- उत्प्रेरण में विशोषण की भूमिका का वर्णन करना।
- हार्डी-शुल्जे नियम के संशोधन को समझना।
- अवक्षेप के मात्रात्मक आकलन से पहले धोने के महत्व को जानना।
Topics covered
Paper topics
- अधिशोषण
- भौतिक अधिशोषण
- रसोवशोषण (रासायनिक अधिशोषण)
- उत्प्रेरण
- उत्प्रेरक विष
- स्व-उत्प्रेरण
- विशोषण
- हार्डी-शुल्जे नियम
- स्कंदन
- कोलाइड
- अवक्षेप का शुद्धिकरण
Important topics
- अधिशोषण के प्रकार और विशेषताएँ
- उत्प्रेरण और उत्प्रेरक विष की भूमिका
- स्व-उत्प्रेरण की अवधारणा
- हार्डी-शुल्जे नियम और स्कंदन
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
- उच्च विशिष्टता: रसोवशोषण अत्यधिक विशिष्ट होता है। यह केवल तभी होता है जब अधिशोषक और अधिशोष्य के बीच रासायनिक बंध बनने की प्रबल संभावना होती है। उदाहरण के लिए, ऑक्सीजन धातुओं पर ऑक्साइड बनाकर अधिशोषित होती है।
- पृष्ठीय क्षेत्रफल पर निर्भरता: अधिशोषक का पृष्ठीय क्षेत्रफल बढ़ने पर रसोवशोषण की मात्रा भी बढ़ती है।
प्रश्न 2
ठोस + गैस ठोस पर गैस का अधिशोषण + ऊष्मा
ला-शातेलिए के सिद्धांत के अनुसार, यदि किसी ऊष्क्षेपी प्रक्रम में तापमान बढ़ाया जाता है, तो साम्य उस दिशा में विस्थापित हो जाता है जहाँ ऊष्मा का अवशोषण होता है, अर्थात पश्च दिशा में। इसलिए, तापमान बढ़ने पर भौतिक अधिशोषण घट जाता है।
प्रश्न 3
प्रश्न 4
प्रश्न 5
एस्टर जल कार्बोक्सिलिक अम्ल अल्कोहल
प्रारंभ में, अभिक्रिया धीमी गति से होती है क्योंकि अभिकारकों की सांद्रता कम होती है। जैसे-जैसे अभिक्रिया आगे बढ़ती है, कार्बोक्सिलिक अम्ल (RCOOH) उत्पन्न होता है। यह उत्पन्न कार्बोक्सिलिक अम्ल विलयन में आयन प्रदान करता है, जो स्वयं अभिक्रिया के लिए उत्प्रेरक का कार्य करते हैं। इस स्व-उत्प्रेरण के कारण, अभिक्रिया की गति कुछ समय बाद तीव्र हो जाती है।
प्रश्न 6
प्रश्न 7
हालांकि, यह नियम केवल विपरीत आवेश वाले आयनों द्वारा उदासीनीकरण पर जोर देता है। एक संशोधन यह हो सकता है कि यह माना जाए कि विपरीत आवेश वाले कोलाइडी विलयनों को मिलाने पर भी उनके आवेशों के पारस्परिक उदासीनीकरण से स्कंदन हो सकता है। अतः, हार्डी-शुल्जे नियम में संशोधन इस प्रकार किया जा सकता है: "दो विपरीत आवेश वाले कोलाइडी विलयनों को समान मोलर अनुपात में मिलाने पर, उन पर उपस्थित आवेशों के पारस्परिक उदासीनीकरण के कारण स्कंदन हो जाता है।"
प्रश्न 8
Common mistakes
- भौतिक और रासायनिक अधिशोषण के बीच अंतर करने में भ्रम।
- उत्प्रेरक विषाक्तता के प्रभाव को गलत समझना।
- स्व-उत्प्रेरण की अवधारणा को ठीक से लागू न कर पाना।
- हार्डी-शुल्जे नियम के अनुप्रयोग में त्रुटियाँ।
Revision tips
- प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को ध्यान से पढ़ें और मुख्य अवधारणाओं को नोट करें।
- भौतिक और रासायनिक अधिशोषण के बीच अंतर को सारणीबद्ध करें।
- उत्प्रेरण से संबंधित प्रश्नों में उत्प्रेरक की भूमिका और विषाक्तता पर विशेष ध्यान दें।
- स्कंदन और अवक्षेपण से संबंधित नियमों को उदाहरण सहित समझें।
Practice MCQs
Q1. रसोवशोषण (रासायनिक अधिशोषण) की एक प्रमुख विशेषता क्या है?
Explanation: रसोवशोषण अत्यधिक विशिष्ट होता है और केवल तभी होता है जब अधिशोषक और अधिशोष्य के बीच रासायनिक बंध बनने की संभावना होती है।
Q2. ताप बढ़ाने पर भौतिक अधिशोषण क्यों घटता है?
Explanation: भौतिक अधिशोषण एक ऊष्क्षेपी प्रक्रम है। ला-शातेलिए के नियम के अनुसार, तापमान बढ़ाने पर साम्य पश्च दिशा में विस्थापित होता है, जिससे अधिशोषण घट जाता है।
Q3. चूर्णित पदार्थ प्रभावी अधिशोषक क्यों होते हैं?
Explanation: चूर्णित पदार्थों का पृष्ठीय क्षेत्रफल क्रिस्टलीय रूपों की तुलना में बहुत अधिक होता है, जिससे वे बेहतर अधिशोषक बनते हैं।
Q4. हॉबर प्रक्रम में कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) को हटाना क्यों आवश्यक है?
Explanation: कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) हॉबर प्रक्रम में प्रयुक्त लौह उत्प्रेरक के लिए एक विष का कार्य करती है, जिससे उत्प्रेरक की क्षमता घट जाती है।
Q5. एस्टर के जल-अपघटन में कौन सा पदार्थ स्वः उत्प्रेरक का कार्य करता है?
Explanation: एस्टर के जल-अपघटन के दौरान उत्पन्न कार्बोक्सिलिक अम्ल विलयन में H⁺ आयन उत्पन्न करते हैं, जो अभिक्रिया के लिए स्वः उत्प्रेरक का कार्य करते हैं।
Frequently asked questions
रसायन विज्ञान में अधिशोषण क्या है?
अधिशोषण वह प्रक्रिया है जिसमें किसी पदार्थ के अणु (अधिशोष्य) किसी अन्य पदार्थ (अधिशोषक) की सतह पर जमा हो जाते हैं।
भौतिक अधिशोषण और रासायनिक अधिशोषण में मुख्य अंतर क्या है?
भौतिक अधिशोषण कमजोर वैन डेर वाल्स बलों के कारण होता है और यह उत्क्रमणीय होता है, जबकि रासायनिक अधिशोषण रासायनिक बंधों के निर्माण के कारण होता है और यह सामान्यतः अनुत्क्रमणीय होता है।
उत्प्रेरक विष क्या होता है?
उत्प्रेरक विष वह पदार्थ है जो उत्प्रेरक की क्रियाशीलता को कम या समाप्त कर देता है। हॉबर प्रक्रम में CO लौह उत्प्रेरक के लिए विष का कार्य करता है।
स्व-उत्प्रेरण का क्या अर्थ है?
स्व-उत्प्रेरण वह स्थिति है जब किसी रासायनिक अभिक्रिया में उत्पन्न उत्पाद स्वयं ही उत्प्रेरक का कार्य करता है, जिससे अभिक्रिया की गति बढ़ जाती है। एस्टर के जल-अपघटन में उत्पन्न कार्बोक्सिलिक अम्ल स्व-उत्प्रेरक का कार्य करता है।
हार्डी-शुल्जे नियम क्या बताता है?
हार्डी-शुल्जे नियम के अनुसार, स्कंदन शक्ति आयन की संयोजकता पर निर्भर करती है; आयन की संयोजकता जितनी अधिक होगी, उसकी स्कंदन शक्ति उतनी ही अधिक होगी।
अवक्षेप को धोने का क्या महत्व है?
अवक्षेप को धोने से उसकी सतह पर अधिशोषित अशुद्धियाँ या अभिकारक आयन हट जाते हैं, जिससे मात्रात्मक आकलन में त्रुटि नहीं होती है।
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