सीबीएसई कक्षा 12 इतिहास: उपनिवेशवाद और देहात (सरकारी अभिलेखों का अध्ययन) NCERT समाधान

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यह पृष्ठ सीबीएसई कक्षा 12 इतिहास के अध्याय 10, 'उपनिवेशवाद और देहात' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। यह खंड सरकारी अभिलेखों के अध्ययन पर केंद्रित है, जिसमें स्थायी बंदोबस्त, रैयतवाड़ी व्यवस्था, भाड़ा पत्र, संथालों का जीवन, दक्कन दंगा आयोग और जोतदारों जैसी महत्वपूर्ण अवधारणाओं को शामिल किया गया है। समाधानों में राजस्व भुगतान में जमींदारों की विफलता के कारणों और संथालों के ब्रिटिश शासन के खिलाफ विद्रोह के कारणों पर भी प्रकाश डाला गया है। ये समाधान छात्रों को इन विषयों की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा के लिए प्रभावी ढंग से तैयारी करने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 12
Subjectइतिहास
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter10. उपनिवेशवाद और देहात (सरकारी अभिलेखों का अध्ययन)

Chapter summary

कक्षा 12 इतिहास के अध्याय 10, 'उपनिवेशवाद और देहात' के लिए NCERT समाधान, सरकारी अभिलेखों के अध्ययन के माध्यम से ग्रामीण भारत में उपनिवेशवाद के प्रभावों की पड़ताल करते हैं। यह अध्याय स्थायी बंदोबस्त, रैयतवाड़ी व्यवस्था, भाड़ा पत्र, संथालों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति, दक्कन दंगे और जोतदारों की भूमिका जैसी प्रमुख अवधारणाओं को स्पष्ट करता है। समाधान छात्रों को राजस्व संग्रह की जटिलताओं, जमींदारों और किसानों के सामने आने वाली चुनौतियों और ब्रिटिश शासन के प्रतिरोध को समझने में मदद करते हैं।

Learning outcomes

  • स्थायी बंदोबस्त और रैयतवाड़ी व्यवस्था जैसी राजस्व प्रणालियों को समझना।
  • भाड़ा पत्र के महत्व और उसके पीछे के कारणों का विश्लेषण करना।
  • संथालों के जीवन और उनकी सामाजिक-आर्थिक विशेषताओं की व्याख्या करना।
  • दक्कन दंगा आयोग की स्थापना और उसके उद्देश्यों को समझना।
  • जोतदारों की भूमिका और ग्रामीण समाज में उनके प्रभाव का वर्णन करना।
  • राजस्व भुगतान में जमींदारों की विफलता के कारणों की पहचान करना।
  • संथालों के ब्रिटिश शासन के विरुद्ध विद्रोह के कारणों का मूल्यांकन करना।

Topics covered

Paper topics

  • स्थायी बंदोबस्त
  • रैयतवाड़ी बंदोबस्त
  • भाड़ा पत्र
  • संथाल
  • दक्कन दंगा आयोग
  • जोतदार
  • राजस्व भुगतान
  • जमींदारों की विफलता
  • ब्रिटिश शासन के विरुद्ध विद्रोह
  • सरकारी अभिलेखों का अध्ययन
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था
  • उपनिवेशवाद का प्रभाव

Important topics

  • स्थायी बंदोबस्त और रैयतवाड़ी व्यवस्था
  • संथालों का जीवन और विद्रोह
  • राजस्व भुगतान में जमींदारों की विफलता के कारण
  • दक्कन दंगा आयोग की रिपोर्ट
  • जोतदारों की भूमिका

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Questions and Solutions

प्र.1 स्थायी बंदोबस्त क्या था?

स्थायी बंदोबस्त क्या था?
Solution: स्थायी बंदोबस्त एक भू-राजस्व प्रणाली थी जिसे 1793 में ब्रिटिश गवर्नर-जनरल लॉर्ड कार्नवालिस द्वारा लागू किया गया था। इस व्यवस्था के तहत, जमींदारों को भूमि का मालिक माना गया और उनसे यह अपेक्षा की गई कि वे किसानों से लगान वसूल कर उसका एक निश्चित हिस्सा कंपनी को स्थायी रूप से देते रहेंगे। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य कंपनी के लिए राजस्व आय को स्थिर करना था, भले ही फसलें अच्छी हों या खराब।

प्र.2 रैयतबारी बन्दोबस्त क्या था?

रैयतबारी बन्दोबस्त क्या था?
Solution: रैयतवाड़ी बंदोबस्त एक अन्य भू-राजस्व प्रणाली थी जिसे ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में लागू किया था। इस व्यवस्था में, सरकार का सीधा संबंध जमींदारों के बजाय सीधे किसानों या 'रैयत' से होता था। किसानों को अपनी भूमि पर स्वामित्व का अधिकार दिया गया और उनसे सीधे लगान वसूल किया जाता था। यह व्यवस्था मुख्य रूप से मद्रास और बंबई प्रेसीडेंसी में लागू की गई थी। इस प्रणाली में लगान की दरें अक्सर बहुत अधिक होती थीं, जिससे किसानों पर कर्ज का बोझ बढ़ जाता था।

प्र.3 भाड़ा पत्र क्या था?

भाड़ा पत्र क्या था?
Solution: भाड़ा पत्र एक प्रकार का दस्तावेज था जो किसानों (रैयत) द्वारा साहूकारों को दिया जाता था। इस पत्र के माध्यम से रैयत यह स्वीकार करते थे कि वे साहूकारों से खेती करने के लिए जमीन और पशुधन को 'भाड़े' पर ले रहे हैं। वास्तव में, यह जमीन और पशु अक्सर किसानों के ही होते थे, जिन्हें वे ऋण न चुका पाने की स्थिति में साहूकारों को गिरवी रख देते थे या साहूकार उन पर कब्जा कर लेते थे। यह किसानों की आर्थिक लाचारी को दर्शाता है।

प्र.4 संथाल कौन थे? उनके जीवन की दो विशेषताएं क्या थीं?

संथाल कौन थे? उनके जीवन की दो विशेषताएं क्या थीं?
Solution: संथाल भारत की एक प्रमुख आदिवासी जनजाति थी जो मुख्य रूप से राजमहल पहाड़ियों के आसपास के निचले इलाकों में निवास करती थी।

उनके जीवन की दो प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित थीं:

  1. खेती और भूमि का विस्तार: संथाल हल का उपयोग करके खेती करते थे और वे जंगलों को साफ करके तथा भूमि को खेती योग्य बनाकर कृषि का विस्तार करने में माहिर थे। जमींदार अक्सर उन्हें नई भूमि तैयार करने के लिए काम पर लगाते थे।
  2. स्वायत्त जीवन शैली: वे अपनी एक अलग सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान रखते थे और बाहरी दुनिया के हस्तक्षेप को कम पसंद करते थे। वे अपनी जमीन और संसाधनों पर निर्भर रहते थे।

प्र.5 दक्कन दंगा आयोग से आप क्या समझते हैं?

दक्कन दंगा आयोग से आप क्या समझते हैं?
Solution: दक्कन दंगा आयोग का गठन 1875 में दक्कन क्षेत्र (वर्तमान महाराष्ट्र) में किसानों द्वारा किए गए व्यापक दंगों की जांच के लिए ब्रिटिश सरकार द्वारा किया गया था। इन दंगों में किसानों ने साहूकारों और व्यापारियों की संपत्तियों को निशाना बनाया था। बॉम्बे सरकार ने इन दंगों के कारणों और प्रकृति का पता लगाने के लिए यह जांच आयोग बिठाया था। आयोग की रिपोर्ट 1878 में ब्रिटिश संसद में पेश की गई, जिसमें किसानों की शिकायतों और साहूकारों के शोषण का विस्तृत विवरण था।

प्र.6 जोतदार कौन थे?

जोतदार कौन थे?
Solution: जोतदार 18वीं शताब्दी के अंत में ग्रामीण बंगाल में एक शक्तिशाली वर्ग के रूप में उभरे धनी किसान थे। वे बड़ी मात्रा में जमीन के मालिक होते थे और खेती का काम अपने खेतिहर मजदूरों से करवाते थे। जमींदारों की आर्थिक कठिनाइयों का लाभ उठाकर, जोतदारों ने अपनी जमीनें खरीदीं और अपनी आर्थिक शक्ति को बढ़ाया। वे अक्सर जमींदारों को राजस्व का भुगतान करने में चूक करते थे, लेकिन किसानों से लगान वसूलने में अधिक कठोर होते थे, जिससे ग्रामीण समाज में उनका प्रभाव बढ़ता गया।

प्र.7 राजस्व राशि के भुगतान में जमींदार क्यों चूक करते थे?

राजस्व राशि के भुगतान में जमींदार क्यों चूक करते थे?
Solution: जमींदार कई कारणों से राजस्व राशि का भुगतान करने में चूक करते थे, जिनमें प्रमुख थे:
  1. ऊंची राजस्व दरें: ब्रिटिश सरकार ने शुरू में राजस्व की मांग बहुत ऊंची रखी थी, यह सोचकर कि भविष्य में इसे बढ़ाया नहीं जा सकेगा। इससे जमींदारों पर भुगतान का भारी बोझ पड़ता था।
  2. भूमि सुधार का खर्च: जमींदारों को अपनी भूमि में सुधार और विकास के लिए काफी धन खर्च करना पड़ता था, जिससे उनके पास राजस्व चुकाने के लिए धन की कमी हो जाती थी।
  3. कानूनी समझ का अभाव: नए ब्रिटिश कानूनों और नियमों को समझने में असमर्थता के कारण भी वे राजस्व भुगतान में कोताही करते थे।
  4. कृषि उपज की कम कीमतें: 1790 के दशक में कृषि उपज की कीमतें अक्सर बहुत कम रहती थीं, जिससे किसान जमींदारों को समय पर लगान नहीं दे पाते थे। जब किसानों से पैसा नहीं मिलता था, तो जमींदार आगे कंपनी को राजस्व कैसे चुका सकते थे?
  5. प्रतिकूल मौसम और फसल बर्बादी: सूखा, बाढ़ या अन्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसलें बर्बाद हो जाती थीं, लेकिन राजस्व की मांग स्थिर रहती थी। ऐसी प्रतिकूल परिस्थितियों में राजस्व चुकाना जमींदारों के लिए अत्यंत कठिन हो जाता था।
  6. प्रशासनिक अधिकारों का हनन: जमींदारों से पुलिस और न्यायिक अधिकार छीन लिए गए थे, और वे अपनी सेना भी नहीं रख सकते थे। इससे किसानों पर उनका नियंत्रण कमजोर हो गया था, जिससे लगान वसूलना मुश्किल हो गया था।
  7. जोतदारों और मुखियाओं का बढ़ता प्रभाव: जमींदारों की शक्ति कमजोर होने पर जोतदार, गांव के मुखिया और अन्य प्रभावशाली लोग मजबूत हो गए। वे जमींदारों या उनके एजेंटों (अमल) को किसानों से लगान वसूलने में बाधा डालते थे, जिससे जमींदारों की वसूली प्रक्रिया बाधित होती थी।

प्र.8 संथालों ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध विद्रोह क्यों किया?

संथालों ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध विद्रोह क्यों किया?
Solution: संथालों ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध कई कारणों से विद्रोह किया, जो उनकी जीवन शैली और अधिकारों पर बढ़ते अतिक्रमण से जुड़े थे:
  1. भूमि का अधिग्रहण: ब्रिटिश सरकार और जमींदारों ने संथालों की पारंपरिक भूमि पर कब्जा करना शुरू कर दिया था और उन्हें अपनी जमीन से बेदखल कर दिया था।
  2. अत्यधिक कर और शोषण: ब्रिटिश नीतियों के तहत उन पर भारी कर लगाए गए थे, जिन्हें चुकाना उनके लिए मुश्किल था। साहूकारों ने भी अत्यधिक ब्याज दरें वसूल कर उनका शोषण किया।
  3. बाहरी लोगों का हस्तक्षेप: बाहरी व्यापारी, साहूकार और कंपनी के अधिकारी उनके जीवन में हस्तक्षेप करने लगे थे, जिससे उनकी स्वायत्तता समाप्त हो रही थी।
  4. जमींदारी व्यवस्था का प्रभाव: जमींदारों ने संथालों को अपनी भूमि पर खेती करने के लिए रखा, लेकिन बाद में उन्हें लगान चुकाने में असमर्थ होने पर जमीन से बेदखल कर दिया।
  5. कानून और व्यवस्था का अभाव: ब्रिटिश शासन के तहत, संथालों को न्याय नहीं मिल रहा था और उनके पारंपरिक अधिकारों का हनन हो रहा था।
इन सभी कारणों ने मिलकर संथालों को 1855-56 में सिद्धू और कान्हू के नेतृत्व में एक बड़े विद्रोह के लिए प्रेरित किया।

Common mistakes

  • विभिन्न राजस्व प्रणालियों के बीच अंतर करने में भ्रमित होना।
  • भाड़ा पत्र के वास्तविक उद्देश्य को गलत समझना।
  • संथालों के विद्रोह के कारणों को सतही तौर पर समझना।
  • जमींदारों द्वारा राजस्व भुगतान में चूक के सभी कारणों को सूचीबद्ध न कर पाना।

Revision tips

  • प्रत्येक राजस्व प्रणाली (स्थायी बंदोबस्त, रैयतवाड़ी) की मुख्य विशेषताओं और अंतरों को सूचीबद्ध करें।
  • संथालों के विद्रोह के कारणों और परिणामों पर एक संक्षिप्त नोट तैयार करें।
  • जमींदारों द्वारा राजस्व भुगतान में चूक के कारणों को समझने के लिए एक माइंड मैप बनाएं।
  • सरकारी अभिलेखों के अध्ययन के महत्व पर विचार करें और उदाहरणों के साथ समझाएं।

Practice MCQs

Q1. स्थायी बंदोबस्त व्यवस्था किसके द्वारा और कब लागू की गई थी?

Q2. रैयतवाड़ी बंदोबस्त में सरकार का सीधा संबंध किससे होता था?

Q3. भाड़ा पत्र क्या दर्शाता था?

Q4. दक्कन दंगा आयोग का गठन किस वर्ष की घटनाओं की जांच के लिए किया गया था?

Q5. 18वीं शताब्दी के अंत में धनी किसानों के समूह को क्या कहा जाता था?

Frequently asked questions

यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?

यह NCERT समाधान सीबीएसई कक्षा 12 के इतिहास विषय के लिए हैं, विशेष रूप से अध्याय 10: 'उपनिवेशवाद और देहात' पर केंद्रित हैं।

स्थायी बंदोबस्त क्या था और इसे क्यों लागू किया गया?

स्थायी बंदोबस्त 1793 में लॉर्ड कार्नवालिस द्वारा लागू की गई एक भू-राजस्व प्रणाली थी। इसके तहत जमींदारों को भूमि का मालिक बनाकर उनसे एक निश्चित राशि लगान के रूप में वसूल की जाती थी, जिसे स्थायी कर दिया गया था।

रैयतवाड़ी व्यवस्था स्थायी बंदोबस्त से कैसे भिन्न थी?

रैयतवाड़ी व्यवस्था में सरकार का सीधा संबंध किसानों (रैयत) से होता था, न कि जमींदारों से। यह व्यवस्था मद्रास और बंबई प्रेसीडेंसी में लागू की गई थी और इसमें लगान की दरें काफी ऊँची थीं।

संथाल कौन थे और उन्होंने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध विद्रोह क्यों किया?

संथाल राजमहल पहाड़ियों के निचले भागों में रहने वाले कृषक समुदाय थे। उन्होंने ब्रिटिश नीतियों, भूमि अधिग्रहण, अत्यधिक करों और साहूकारों के शोषण के कारण विद्रोह किया।

दक्कन दंगा आयोग का गठन क्यों किया गया था?

दक्कन दंगा आयोग का गठन 1875 में दक्कन क्षेत्र में किसानों द्वारा किए गए दंगों की जांच करने और उनकी शिकायतों को समझने के लिए किया गया था।

यह समाधान परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेंगे?

ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के विस्तृत और स्पष्ट उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को अध्याय की अवधारणाओं को गहराई से समझने और परीक्षा में पूछे जाने वाले विभिन्न प्रकार के प्रश्नों का उत्तर देने में मदद मिलती है।

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