सीबीएसई कक्षा 12 इतिहास: यात्रियों के नजरिये - समाज के बारे में उनकी समझ NCERT समाधान

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यह खंड सीबीएसई कक्षा 12 इतिहास के अध्याय 5, 'यात्रियों के नजरिये - समाज के बारे में उनकी समझ' के लिए विस्तृत समाधान प्रदान करता है। यह अध्याय लगभग 10वीं से 17वीं शताब्दी तक भारत की यात्रा करने वाले यात्रियों के अनुभवों और समाज के बारे में उनकी समझ पर केंद्रित है। समाधानों में अल-बिरूनी, इब्न बतूता और फ्रांस्वा बर्नियर जैसे प्रमुख यात्रियों के दृष्टिकोण शामिल हैं। यह अध्याय यात्रियों द्वारा सामना की जाने वाली भाषा, धार्मिक और सांस्कृतिक बाधाओं, साथ ही भारतीय समाज, रीति-रिवाजों और राजनीतिक संरचनाओं पर उनके अवलोकनों की पड़ताल करता है। ये समाधान छात्रों को इन यात्रियों के दृष्टिकोण से मध्यकालीन भारत के सामाजिक-सांस्कृतिक परिदृश्य को समझने में मदद करते हैं, जो परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण हैं।

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BoardCBSE
ClassClass 12
Subjectइतिहास
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter5. यात्रियों के नजरिये समाज के बारे में उनकी समझ

Chapter summary

यह अध्याय मध्यकालीन भारत (लगभग 10वीं से 17वीं शताब्दी) की यात्रा करने वाले यात्रियों के दृष्टिकोण और समाज के बारे में उनकी समझ पर केंद्रित है। इसमें अल-बिरूनी, इब्न बतूता और फ्रांस्वा बर्नियर जैसे यात्रियों के अनुभवों का विश्लेषण किया गया है। समाधान यात्रियों द्वारा अनुभव की गई भाषाई और सांस्कृतिक भिन्नताओं, भारतीय समाज पर उनके अवलोकनों और उनकी यात्राओं के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हैं। यह अध्याय छात्रों को विभिन्न यात्रियों के लेंस के माध्यम से उस समय के सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक ताने-बाने को समझने में मदद करता है।

Learning outcomes

  • मध्यकाल में भारत की यात्रा करने वाले प्रमुख यात्रियों की पहचान करना।
  • अल-बिरूनी, इब्न बतूता और बर्नियर जैसे यात्रियों के भारत आने के उद्देश्यों को समझना।
  • यात्रियों द्वारा सामना की जाने वाली भाषाई और सांस्कृतिक बाधाओं का विश्लेषण करना।
  • यात्रियों के अवलोकनों के माध्यम से मध्यकालीन भारतीय समाज की समझ विकसित करना।
  • सती प्रथा और राजकीय भू-स्वामित्व जैसे सामाजिक मुद्दों पर यात्रियों के विचारों का मूल्यांकन करना।
  • अल-बिरूनी की 'किताब-उल-हिंद' की विशेषताओं को जानना।

Topics covered

Paper topics

  • मध्यकालीन यात्री
  • अल-बिरूनी
  • इब्न बतूता
  • फ्रांस्वा बर्नियर
  • भारतीय समाज का अवलोकन
  • सांस्कृतिक भिन्नताएँ
  • भाषाई बाधाएँ
  • धार्मिक प्रथाएँ
  • सती प्रथा
  • राजकीय भू-स्वामित्व
  • किताब-उल-हिंद
  • यात्रियों के दृष्टिकोण

Important topics

  • अल-बिरूनी, इब्न बतूता और बर्नियर के यात्रा उद्देश्य और अवलोकन
  • यात्रियों द्वारा अनुभव की गई भाषाई और सांस्कृतिक बाधाएँ
  • मध्यकालीन भारतीय समाज पर यात्रियों के विचार
  • सती प्रथा और राजकीय भू-स्वामित्व जैसे सामाजिक मुद्दे
  • अल-बिरूनी की 'किताब-उल-हिंद' का महत्व

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

मध्यकाल (11वीं से 17वीं शताब्दी) के दौरान भारत की यात्रा करने वाले किन्हीं दो यात्रियों के नाम बताइए।
Solution: मध्यकाल (लगभग 11वीं से 17वीं शताब्दी) में भारत की यात्रा करने वाले दो प्रमुख यात्री थे:
  1. अल-बिरूनी: यह यात्री 11वीं शताब्दी में उज्बेकिस्तान से भारत आया था।
  2. इब्न बतूता: यह यात्री 14वीं शताब्दी में मोरक्को से भारत आया था।
  3. फ्रांस्वा बर्नियर: यह यात्री 17वीं शताब्दी में फ्रांस से भारत आया था।

प्रश्न 2

अल-बिरूनी के भारत आने का मुख्य उद्देश्य क्या था?
Solution: अल-बिरूनी के भारत आने के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित थे:
  1. उन लोगों के लिए एक सहायक संसाधन तैयार करना जो हिन्दुओं के धार्मिक विषयों पर चर्चा करना चाहते थे।
  2. एक सूचना संग्रह तैयार करना जो उन लोगों के लिए उपयोगी हो जो भारतीय संस्कृति और ज्ञान से जुड़ना चाहते थे।

प्रश्न 3

क्या आपको लगता है कि अल-बिरूनी भारतीय समाज के विषय में अपनी जानकारी और समझ के लिए केवल संस्कृत के ग्रंथों पर ही आश्रित रहा? अपने उत्तर के पक्ष में तर्क दीजिए।
Solution: हाँ, अल-बिरूनी भारतीय समाज को समझने के लिए काफी हद तक संस्कृत ग्रंथों पर आश्रित रहा। उसने विशेष रूप से ब्राह्मणों द्वारा रचित कृतियों का अध्ययन किया। उसने भारतीय समाज को समझने के लिए वेदों, पुराणों, भगवद गीता, पतंजलि की कृतियों और मनुस्मृति जैसे ग्रंथों से अंश उद्धृत किए। यह दर्शाता है कि उसकी समझ का एक बड़ा हिस्सा इन धार्मिक और शास्त्रीय ग्रंथों पर आधारित था, जो उस समय के समाज की एक विशिष्ट झलक प्रस्तुत करते थे।

प्रश्न 4

भारत में पाए जाने वाले उन वृक्षों के नाम बताइए जिन्हें देखकर इब्न बतूता को आश्चर्य हुआ था।
Solution: इब्न बतूता को भारत में दो प्रकार के वृक्षों को देखकर आश्चर्य हुआ:
  1. नारियल: इब्न बतूता ने नारियल के फल की तुलना मानव सिर से की, जो उसे काफी असामान्य लगा।
  2. पान: पान एक ऐसी लता है जिसे अंगूर की बेल की तरह उगाया जाता है। इसका कोई फल नहीं होता, बल्कि केवल इसकी पत्तियों का उपयोग किया जाता है। इब्न बतूता को इसकी अनूठी खेती और उपयोगिता ने आश्चर्यचकित किया।

प्रश्न 5

फ्रांस्वा बर्नियर ने मुगल साम्राज्य में किस अधिक जटिल सच्चाई की ओर इशारा किया?
Solution: फ्रांस्वा बर्नियर ने मुगल साम्राज्य की एक जटिल सच्चाई की ओर इशारा किया कि शिल्पकारों के पास अपने उत्पादों को बेहतर बनाने का कोई प्रोत्साहन नहीं था। इसका कारण यह था कि मुनाफे का एक बड़ा हिस्सा राज्य द्वारा करों के रूप में ले लिया जाता था। इसके अतिरिक्त, बर्नियर ने यह भी माना कि पूरे विश्व से बड़ी मात्रा में बहुमूल्य धातुएँ (सोना और चांदी) भारत आती थीं, क्योंकि उत्पादों का निर्यात सोने और चांदी के बदले होता था, जिससे देश में धन का संचय होता था।

प्रश्न 6

अल-बिरूनी ने किन "अवरोधों" की चर्चा की है, जो उसके अनुसार भारतीय समाज को समझने में बाधक थे?
Solution: अल-बिरूनी ने भारत को समझने में निम्नलिखित प्रमुख अवरोधों का सामना किया:
  1. भाषा की समस्या: अल-बिरूनी के अनुसार, संस्कृत भाषा अरबी और फारसी से इतनी भिन्न थी कि विचारों और सिद्धांतों का एक भाषा से दूसरी भाषा में अनुवाद करना अत्यंत कठिन था।
  2. धार्मिक अवस्था और प्रथा में भिन्नता: अल-बिरूनी एक मुसलमान था और उसके धार्मिक विश्वास तथा प्रथाएँ भारत की बहुसंख्यक आबादी से भिन्न थीं। इस भिन्नता ने उसे स्थानीय मान्यताओं और प्रथाओं को पूरी तरह से समझने में बाधा उत्पन्न की।
  3. स्थानीय लोगों की आत्मलीनता तथा प्रथक्करण की नीति: अल-बिरूनी ने महसूस किया कि भारतीय लोग बाहरी लोगों से घुलने-मिलने में संकोच करते थे और अपनी संस्कृति व समाज को अलग रखने की प्रवृत्ति रखते थे। इस अलगाव ने उसे समाज की गहरी समझ विकसित करने में मुश्किल पैदा की।

प्रश्न 7

फ्रांस्वा बर्नियर के अनुसार, राजकीय भू-स्वामित्व के क्या बुरे प्रभाव पड़े?
Solution: फ्रांस्वा बर्नियर ने राजकीय भू-स्वामित्व के कई बुरे प्रभावों की ओर इशारा किया:
  1. उदासीनता: भू-धारक अपने बच्चों को भूमि हस्तांतरित नहीं कर सकते थे, इसलिए वे उत्पादन के स्तर को बनाए रखने या उसमें वृद्धि करने के लिए दूरगामी निवेश करने के प्रति उदासीन थे।
  2. "बेहतर" भू-धारकों के वर्ग का अभाव: निजी भू-स्वामित्व के अभाव ने ऐसे"बेहतर" भू-धारकों के वर्ग के उदय को रोका जो कृषि में सुधार कर सकें।
  3. कृषि का विनाश: इस व्यवस्था के कारण कृषि का पतन हुआ क्योंकि किसानों के पास सुधार के लिए कोई प्रोत्साहन या अधिकार नहीं था।
  4. किसानों का उत्पीड़न: इसके चलते किसानों का अत्यधिक उत्पीड़न हुआ क्योंकि वे अपनी भूमि के स्वामी नहीं थे और राज्य की मांगों के अधीन थे।
  5. जीवन स्तर में गिरावट: इन सभी कारणों से समाज के सभी वर्गों के जीवन स्तर में निरंतर गिरावट की स्थिति उत्पन्न हुई।

प्रश्न 8

सती प्रथा के विषय में फ्रांस्वा बर्नियर ने क्या लिखा है?
Solution: फ्रांस्वा बर्नियर ने सती प्रथा के बारे में अपने अवलोकन को अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया है। उसके अनुसार:
  1. यह एक अत्यंत क्रूर प्रथा थी जिसमें विधवा को जीवित ही अग्नि की भेंट चढ़ा दिया जाता था।
  2. विधवा को सती होने के लिए अक्सर विवश किया जाता था, भले ही वह ऐसा न करना चाहे।
  3. बाल विधवाओं के प्रति भी समाज में कोई सहानुभूति नहीं थी, और उन्हें भी इस प्रथा का शिकार बनाया जाता था।
  4. सती होने वाली स्त्री की चीखें और पीड़ा भी उपस्थित लोगों के हृदय को पिघलाने में असमर्थ होती थीं।
  5. इस भयानक प्रक्रिया में पुरोहित (ब्राह्मण) और घर की बड़ी महिलाएँ भी सक्रिय रूप से भाग लेती थीं, जो इस प्रथा को और भी भयावह बनाती थी।

प्रश्न 9

"किताब-उल-हिंद" किसने लिखी थी? इसकी मुख्य विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
Solution: "किताब-उल-हिंद" (जिसे 'तहकीक-ए-हिंद' भी कहा जाता है) की रचना प्रसिद्ध यात्री और विद्वान अल-बिरूनी ने की थी। इसकी मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
  1. भाषा: यह ग्रंथ अरबी भाषा में लिखा गया था, जो उस समय विद्वानों के बीच एक प्रमुख भाषा थी।
  2. शैली: इसकी भाषा सरल, स्पष्ट और सुबोध है, जिससे यह व्यापक रूप से पठनीय बन जाती है।
  3. विषय-वस्तु: यह एक अत्यंत विस्तृत ग्रंथ है जो भारतीय समाज के विभिन्न पहलुओं को कवर करता है। इसमें सामाजिक और धार्मिक जीवन, दर्शन, खगोल विज्ञान, गणित, कानून, रीति-रिवाज और भूगोल जैसे विषयों पर गहन जानकारी दी गई है।
  4. संरचना: पुस्तक को विभिन्न विषयों पर आधारित अध्यायों में विभाजित किया गया है, जो पाठक को व्यवस्थित तरीके से जानकारी प्रदान करती है।

Common mistakes

  • यात्रियों द्वारा देखे गए सामाजिक रीति-रिवाजों और प्रथाओं के महत्व को कम आंकना।
  • विभिन्न यात्रियों के अवलोकनों के बीच अंतर करने में कठिनाई।
  • संस्कृत ग्रंथों पर अल-बिरूनी की निर्भरता के दायरे को गलत समझना।
  • बर्नियर द्वारा वर्णित राजकीय भू-स्वामित्व के नकारात्मक प्रभावों को पूरी तरह से न समझना।

Revision tips

  • प्रत्येक यात्री के यात्रा के उद्देश्य और उनके द्वारा देखे गए समाज के मुख्य बिंदुओं को सूचीबद्ध करें।
  • अल-बिरूनी, इब्न बतूता और बर्नियर द्वारा वर्णित सामाजिक प्रथाओं (जैसे सती प्रथा) की तुलना करें।
  • यात्रियों द्वारा सामना की गई बाधाओं (जैसे भाषा) और उनके समाधानों पर ध्यान केंद्रित करें।
  • 'किताब-उल-हिंद' जैसी महत्वपूर्ण कृतियों की मुख्य विशेषताओं को याद करें।

Practice MCQs

Q1. अल-बिरूनी ने भारत के बारे में अपनी समझ के लिए मुख्य रूप से किन ग्रंथों पर भरोसा किया?

Q2. इब्न बतूता को भारत में कौन से वृक्ष देखकर आश्चर्य हुआ?

Q3. फ्रांस्वा बर्नियर के अनुसार, मुगल साम्राज्य में शिल्पकारों के पास अपने उत्पादों को बेहतर बनाने का प्रोत्साहन क्यों नहीं था?

Q4. अल-बिरूनी ने भारत को समझने में किन मुख्य बाधाओं का उल्लेख किया है?

Q5. बर्नियर के अनुसार, राजकीय भू-स्वामित्व का कृषि पर क्या प्रभाव पड़ा?

Frequently asked questions

यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?

यह NCERT समाधान सीबीएसई कक्षा 12 के इतिहास विषय के लिए हैं, विशेष रूप से अध्याय 5: यात्रियों के नजरिये - समाज के बारे में उनकी समझ।

इस अध्याय में किन प्रमुख यात्रियों का उल्लेख किया गया है?

इस अध्याय में मुख्य रूप से अल-बिरूनी (11वीं शताब्दी), इब्न बतूता (14वीं शताब्दी) और फ्रांस्वा बर्नियर (17वीं शताब्दी) जैसे यात्रियों का उल्लेख किया गया है।

अल-बिरूनी ने भारत को समझने में किन मुख्य बाधाओं का सामना किया?

अल-बिरूनी ने भाषा की भिन्नता (संस्कृत का अरबी/फारसी से अंतर), धार्मिक और सांस्कृतिक प्रथाओं में भिन्नता, तथा भारतीयों की आत्मलीनता और अलगाव की नीति को मुख्य बाधाएँ बताया।

बर्नियर ने मुगल साम्राज्य में शिल्पकारों की स्थिति के बारे में क्या कहा?

बर्नियर के अनुसार, शिल्पकारों के पास अपने उत्पादों को बेहतर बनाने का कोई प्रोत्साहन नहीं था क्योंकि मुनाफे का अधिग्रहण राज्य द्वारा कर लिया जाता था।

सती प्रथा के बारे में बर्नियर के क्या विचार थे?

बर्नियर ने सती प्रथा को एक क्रूर प्रथा बताया जिसमें विधवाओं को अग्नि में जला दिया जाता था, और अक्सर उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर किया जाता था।

ये समाधान परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करते हैं?

ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के विस्तृत और स्पष्ट उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को मध्यकालीन भारत के सामाजिक-सांस्कृतिक परिदृश्य को गहराई से समझने और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर देने में मदद मिलती है।

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