कक्षा 12 इतिहास: राजा, किसान और नगर - NCERT समाधान

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यह पृष्ठ सीबीएसई कक्षा 12 इतिहास के अध्याय 2, "राजा, किसान और नगर: आरंभिक राज्य और अर्थव्यवस्थाएँ (लगभग 600 ई. पू. से 600 ई.)" के लिए विस्तृत समाधान प्रदान करता है। इसमें अति लघु और लघु उत्तरीय प्रश्नों के उत्तर शामिल हैं, जो छात्रों को प्रारंभिक भारतीय इतिहास के महत्वपूर्ण पहलुओं को समझने में मदद करते हैं। समाधानों में महापाषाण, छठी शताब्दी ई. पू. के परिवर्तन, धम्म महामात्त, मौर्य साम्राज्य के स्रोत, कुषाणों का परिचय, अशोक के अभिलेखों की भाषा और लिपि, मगध के उदय के कारण, महाजनपदों की विशेषताएँ, अशोक के धम्म के सिद्धांत, कृषि में हुए परिवर्तन और अभिलेखों के ऐतिहासिक महत्व जैसे विषयों को शामिल किया गया है। ये समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी और विषय की गहरी समझ विकसित करने में सहायक होंगे।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 12
Subjectइतिहास
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter2. राजा, किसान और नगर आरंभिक राज्य और अर्थव्यवस्थाएँ

Chapter summary

कक्षा 12 इतिहास के अध्याय 2 के ये NCERT समाधान "राजा, किसान और नगर" पर केंद्रित हैं, जो लगभग 600 ई. पू. से 600 ई. तक की प्रारंभिक भारतीय राज्यों और अर्थव्यवस्थाओं का अन्वेषण करते हैं। समाधान अति लघु और लघु प्रश्नों के माध्यम से महापाषाण काल, छठी शताब्दी ई. पू. के प्रमुख बदलावों, मौर्य और कुषाण जैसे साम्राज्यों, अशोक के धम्म, और कृषि तथा अभिलेखों के महत्व जैसे विषयों को स्पष्ट करते हैं। यह छात्रों को उस काल की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक संरचनाओं की जानकारी प्रदान करता है।

Learning outcomes

  • महापाषाण काल की प्रकृति और उद्देश्य को समझना।
  • छठी शताब्दी ई. पू. को भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी काल के रूप में पहचानना।
  • मौर्य साम्राज्य के बारे में जानकारी के स्रोतों का उल्लेख करना।
  • अशोक के धम्म के प्रमुख सिद्धांतों की व्याख्या करना।
  • मगध के एक शक्तिशाली राज्य के रूप में उदय के कारणों का विश्लेषण करना।
  • महाजनपदों की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन करना।
  • कृषि क्षेत्र में छठी शताब्दी ई. पू. से छठी शताब्दी ई. तक हुए परिवर्तनों को सूचीबद्ध करना।

Topics covered

Paper topics

  • महापाषाण
  • छठी शताब्दी ई. पू. का परिवर्तन
  • प्रारंभिक राज्य और अर्थव्यवस्थाएँ
  • धम्म महामात्त
  • मौर्य साम्राज्य
  • मेगस्थनीज की इंडिका
  • कौटिल्य का अर्थशास्त्र
  • अशोक के अभिलेख
  • कुषाण साम्राज्य
  • मगध का उदय
  • महाजनपद
  • कृषि में परिवर्तन

Important topics

  • छठी शताब्दी ई. पू. का परिवर्तनकारी काल
  • मौर्य साम्राज्य और अशोक
  • मगध का उदय और महाजनपद
  • कृषि में हुए प्रमुख परिवर्तन
  • अभिलेखों का ऐतिहासिक महत्व

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

महापाषाण क्या हैं?
Solution: महापाषाण पत्थरों के बड़े ढाँचे होते थे जो ईसा पूर्व प्रथम सहस्त्रताब्दी के दौरान मध्य और दक्षिण भारत में पाए जाते थे। इन्हें मुख्य रूप से कब्रगाहों के ऊपर स्मारक के रूप में स्थापित किया जाता था। इन कब्रों में शवों के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के लोहे के उपकरण और औजार भी दफनाए जाते थे, जो उस काल की धातु प्रौद्योगिकी और सामाजिक प्रथाओं को दर्शाते हैं।

प्रश्न 2

छठी शताब्दी ई. पू. को प्रारंभिक भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी काल क्यों कहा जाता है?
Solution: छठी शताब्दी ई. पू. को भारतीय इतिहास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी काल माना जाता है क्योंकि इस दौरान कई प्रमुख बदलाव हुए:
  1. राज्यों का उदय: इस काल में छोटे जनपदों से बड़े और शक्तिशाली राज्यों (जिन्हें महाजनपद कहा गया) का उदय हुआ, जैसे मगध।
  2. लोहे का बढ़ता प्रयोग: लोहे के औजारों और हथियारों का प्रयोग बढ़ा, जिससे कृषि और युद्ध तकनीकों में सुधार हुआ।
  3. सिक्कों का प्रचलन: व्यापार को सुगम बनाने के लिए आहत सिक्कों जैसे सिक्कों का प्रयोग शुरू हुआ।
  4. दार्शनिक विचारधाराओं का उदय: इसी काल में बौद्ध और जैन धर्म सहित विभिन्न नई दार्शनिक और धार्मिक विचारधाराओं का उदय हुआ, जिन्होंने समाज को गहराई से प्रभावित किया।
ये सभी कारक मिलकर इस काल को एक युगांतरकारी बनाते हैं।

प्रश्न 3

धम्म महामात्त कौन थे?
Solution: धम्म महामात्त सम्राट अशोक द्वारा नियुक्त विशेष अधिकारी थे। इनका मुख्य कार्य अशोक के 'धम्म' (नैतिक आचार संहिता) के सिद्धांतों का प्रचार-प्रसार करना था। ये अधिकारी समाज के विभिन्न वर्गों तक धम्म के संदेश को पहुँचाते थे और लोगों को नैतिक जीवन जीने के लिए प्रेरित करते थे।

प्रश्न 4

मौर्यों के बारे में जानने के लिए कोई दो स्रोतों के नाम लिखिए।
Solution: मौर्य साम्राज्य के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित दो प्रमुख स्रोत हैं:
  1. कौटिल्य का अर्थशास्त्र: यह ग्रंथ मौर्य काल की राजनीतिक, आर्थिक और प्रशासनिक व्यवस्था का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करता है।
  2. मेगस्थनीज का इंडिका: यूनानी राजदूत मेगस्थनीज द्वारा लिखा गया यह ग्रंथ मौर्यकालीन समाज, संस्कृति और शासन की जानकारी देता है।
  3. अशोक के अभिलेख: अशोक के शिलालेख और स्तंभलेख भी मौर्य साम्राज्य, विशेषकर उसके शासनकाल और धम्म के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं।

प्रश्न 5

कुषाण कौन थे?
Solution: कुषाण मध्य एशिया की एक कबायली जाति थे जिन्होंने पश्चिमोत्तर भारत तक एक विशाल साम्राज्य स्थापित किया था। वे अपनी सैन्य शक्ति और व्यापारिक कौशल के लिए जाने जाते थे। कुषाणों ने भारत में सबसे पहले बड़े पैमाने पर सोने के सिक्के जारी किए, जिससे उनके आर्थिक प्रभुत्व का पता चलता है। कनिष्क उनके सबसे प्रसिद्ध शासकों में से एक था।

प्रश्न 6

अशोक के अभिलेख किन-किन भाषाओं व लिपियों में लिखे जाते थे?
Solution: सम्राट अशोक के अभिलेख मुख्य रूप से दो भाषाओं और लिपियों में मिलते हैं:
  • भाषा: प्राकृत भाषा।
  • लिपि: ब्राहमी लिपि (जो अधिकांश भारत में प्रयुक्त होती थी) और खरोष्ठी लिपि (जो पश्चिमोत्तर भारत में प्रयुक्त होती थी)। कुछ अभिलेख यूनानी और अरामाइक भाषाओं में भी पाए गए हैं, जो साम्राज्य की व्यापकता को दर्शाते हैं।

प्रश्न 7

मगध के एक शक्तिशाली राज्य के रूप में उदय के कारणों की चर्चा कीजिए।
Solution: मगध के एक शक्तिशाली राज्य के रूप में उदय के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे:
  1. महत्वाकांक्षी शासक: बिम्बिसार, अजातशत्रु और महापद्मनन्द जैसे योग्य और महत्वाकांक्षी शासकों ने मगध के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  2. उपजाऊ भूमि: गंगा और सोन नदियों के किनारे स्थित होने के कारण मगध की भूमि अत्यंत उपजाऊ थी, जिससे कृषि उत्पादन अधिक होता था और राज्य को राजस्व प्राप्त होता था।
  3. लोहे की खानें: मगध क्षेत्र में लोहे की खानें उपलब्ध थीं, जिनसे हथियार और औजार बनाने में मदद मिली, जो सैन्य शक्ति और कृषि विकास के लिए आवश्यक थे।
  4. सामरिक राजधानियाँ: मगध की दो राजधानियाँ थीं - राजगृह (जो एक किलेबंद शहर था) और पाटलिपुत्र (जो गंगा नदी के किनारे स्थित एक महत्वपूर्ण व्यापारिक और प्रशासनिक केंद्र था)। ये राजधानियाँ रक्षा और व्यापार दोनों की दृष्टि से महत्वपूर्ण थीं।
  5. वन संपदा और हाथी: मगध के जंगली क्षेत्रों में हाथियों की उपलब्धता थी, जिन्हें सेना में शामिल किया जाता था, जिससे उनकी सैन्य क्षमता बढ़ती थी।

प्रश्न 8

महाजनपदों की प्रमुख पाँच विशेषताओं की व्याख्या कीजिए।
Solution: महाजनपदों की प्रमुख पाँच विशेषताएँ निम्नलिखित थीं:
  1. शासन प्रणाली: अधिकांश महाजनपदों पर राजा का शासन होता था, जो वंशानुगत होता था। हालाँकि, 'गण' और 'संघ' नामक कुछ राज्यों में सामूहिक शासन प्रणाली प्रचलित थी, जहाँ कई लोगों का समूह मिलकर शासन करता था।
  2. किलेबंद राजधानी: प्रत्येक महाजनपद की एक सुदृढ़ और किलेबंद राजधानी होती थी, जो सुरक्षा और प्रशासनिक नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण थी।
  3. स्थायी सेना और नौकरशाही: महाजनपदों के पास स्थायी सेना होती थी, जिसके सैनिकों की भर्ती अक्सर कृषक वर्ग से की जाती थी। साथ ही, एक नियमित नौकरशाही व्यवस्था भी होती थी जो प्रशासन चलाने में मदद करती थी।
  4. धर्मशास्त्रों का प्रभाव: उस समय प्रचलित धर्मशास्त्रों (जैसे मनुस्मृति) में शासकों और अन्य लोगों के लिए नियमों का निर्धारण किया गया था। राजा को क्षत्रिय वर्ग से होने की अपेक्षा की जाती थी।
  5. कर व्यवस्था: शासकों का मुख्य कार्य किसानों, व्यापारियों और शिल्पकारों से नियमित रूप से कर वसूलना था, जिसका उपयोग राज्य के खर्चों, सेना और प्रशासन को चलाने के लिए किया जाता था।

प्रश्न 9

अशोक के धम्म के बारे में लिखिए।
Solution: अशोक का धम्म कोई नया धर्म नहीं था, बल्कि यह एक नैतिक आचार संहिता थी जिसमें विभिन्न धर्मों के मूल सिद्धांतों को शामिल किया गया था। इसके प्रमुख सिद्धांत निम्नलिखित थे:
  1. बड़ों का आदर: सभी को अपने से बड़ों, जैसे माता-पिता, गुरुजनों और बुजुर्गों का आदर करना चाहिए।
  2. सन्यासियों और ब्राह्मणों के प्रति उदारता: धार्मिक गुरुओं और विद्वानों के प्रति सम्मान और उदारता का भाव रखना।
  3. सेवकों और दासों के साथ उदार व्यवहार: अपने अधीन काम करने वाले लोगों और सेवकों के साथ दया और उदारता का व्यवहार करना।
  4. दूसरे के धर्मों और परंपराओं का आदर: सभी धर्मों और परंपराओं के प्रति सहिष्णुता रखना और उनका सम्मान करना।
  5. अहिंसा: किसी भी जीव की हिंसा न करना।
  6. दान: जरूरतमंदों को दान देना।
  7. धम्म महामात्त की नियुक्ति: अशोक ने धम्म के प्रचार के लिए विशेष अधिकारियों (धम्म महामात्त) की नियुक्ति की थी।
अशोक का उद्देश्य इस धम्म के माध्यम से समाज में शांति, सद्भाव और नैतिकता को बढ़ावा देना था।

प्रश्न 10

छठी शताब्दी ई. पू. से छठी शताब्दी ई. तक कृषि क्षेत्र में हुए मुख्य परिवर्तनों का उल्लेख कीजिए।
Solution: छठी शताब्दी ई. पू. से छठी शताब्दी ई. तक कृषि क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए, जिन्होंने उत्पादकता और विस्तार को प्रभावित किया:
  1. लोहे के फाल वाले हल का प्रयोग: कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए लोहे के फाल वाले हल का व्यापक प्रयोग शुरू हुआ, जिससे कठोर भूमि की जुताई संभव हुई।
  2. धान की रोपाई: गंगा की घाटी जैसे क्षेत्रों में धान की रोपाई की तकनीक विकसित हुई, जो पारंपरिक बुवाई की तुलना में अधिक उत्पादक थी।
  3. सिंचाई के साधनों का विकास: कुओं, तालाबों और नहरों जैसी सिंचाई प्रणालियों का निर्माण और प्रयोग बढ़ा, जिससे सूखे क्षेत्रों में भी खेती संभव हुई।
  4. कुदाल का प्रयोग: पंजाब और राजस्थान जैसे अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में खेती के लिए कुदाल का प्रयोग किया जाता था, जो वहाँ की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल था।
  5. भूमि-अनुदान: शासक वर्ग ने भूमि-अनुदान के माध्यम से कृषि को नए क्षेत्रों में प्रोत्साहित किया। इससे बड़े जमींदार और ग्राम प्रधान अधिक शक्तिशाली हुए और उनका किसानों पर नियंत्रण बढ़ा।
  6. उपज में वृद्धि: इन परिवर्तनों के परिणामस्वरूप कृषि उपज में वृद्धि हुई, जिससे जनसंख्या वृद्धि और शहरीकरण को बढ़ावा मिला।

प्रश्न 11

इतिहास के पुनर्निर्माण में अभिलेख किस तरह सहायता करते हैं?
Solution: इतिहास के पुनर्निर्माण में अभिलेख अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं क्योंकि वे उस काल के बारे में प्रत्यक्ष और विश्वसनीय जानकारी प्रदान करते हैं। उनकी सहायता इस प्रकार है:
  1. शासकों और उनकी उपलब्धियों की जानकारी: अभिलेखों में शासकों के नाम, उनके शासनकाल, विजयों, प्रशासनिक नीतियों और महत्वपूर्ण घटनाओं का उल्लेख होता है, जिससे उनके बारे में जानकारी मिलती है।
  2. सामाजिक और आर्थिक स्थिति: कुछ अभिलेखों में भूमि-दान, कर व्यवस्था, व्यापारिक गतिविधियों और सामाजिक संरचनाओं का वर्णन होता है, जो तत्कालीन समाज और अर्थव्यवस्था को समझने में मदद करते हैं।
  3. धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन: मंदिरों, मठों या धार्मिक स्थलों से संबंधित अभिलेख उस काल की धार्मिक मान्यताओं, प्रथाओं और सांस्कृतिक विकास पर प्रकाश डालते हैं।
  4. भौगोलिक विस्तार: अभिलेखों में उल्लिखित स्थानों और क्षेत्रों से तत्कालीन साम्राज्य के भौगोलिक विस्तार का अनुमान लगाया जा सकता है।
  5. भाषा और लिपि का विकास: अभिलेखों में प्रयुक्त भाषा और लिपियों का अध्ययन तत्कालीन भाषा विज्ञान और लेखन कला के विकास को समझने में सहायक होता है।
इस प्रकार, अभिलेख अतीत को जानने और समझने के लिए अमूल्य स्रोत हैं।

Common mistakes

  • महापाषाणों को केवल कब्रों के रूप में समझना, उनके सांस्कृतिक महत्व को अनदेखा करना।
  • छठी शताब्दी ई. पू. के बौद्धिक और राजनीतिक उथल-पुथल के महत्व को कम आंकना।
  • अशोक के धम्म को केवल एक धर्म समझना, जबकि यह एक आचार संहिता थी।
  • कृषि परिवर्तनों के सामाजिक और आर्थिक प्रभावों के बीच संबंध स्थापित न कर पाना।

Revision tips

  • प्रत्येक प्रश्न के उत्तर में मुख्य बिंदुओं को रेखांकित करें।
  • विभिन्न साम्राज्यों (जैसे मौर्य, कुषाण) और उनके योगदानों की तुलना करें।
  • अशोक के धम्म के सिद्धांतों को याद करने के लिए निमोनिक्स का प्रयोग करें।
  • कृषि परिवर्तनों और उनके परिणामों के बीच कारण-कार्य संबंध को समझें।
  • अभिलेखों को ऐतिहासिक पुनर्निर्माण के प्राथमिक स्रोत के रूप में उनके महत्व को समझें।

Practice MCQs

Q1. महापाषाणों का संबंध मुख्य रूप से किस काल से है?

Q2. छठी शताब्दी ई. पू. को भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी काल क्यों माना जाता है?

Q3. सम्राट अशोक द्वारा नियुक्त 'धम्म महामात्त' का मुख्य कार्य क्या था?

Q4. मौर्य साम्राज्य के बारे में जानकारी का एक महत्वपूर्ण स्रोत 'अर्थशास्त्र' किसने लिखा था?

Q5. कुषाणों ने भारत में किस प्रकार के सिक्कों को सबसे पहले जारी किया था?

Q6. मगध के एक शक्तिशाली राज्य के रूप में उदय का एक कारण क्या था?

Frequently asked questions

कक्षा 12 इतिहास के अध्याय 2 का मुख्य विषय क्या है?

कक्षा 12 इतिहास के अध्याय 2, "राजा, किसान और नगर", लगभग 600 ई. पू. से 600 ई. तक के प्रारंभिक भारतीय राज्यों और अर्थव्यवस्थाओं के विकास पर केंद्रित है।

इस अध्याय के समाधान किन प्रकार के प्रश्नों को कवर करते हैं?

यह समाधान अति लघु उत्तरीय (2 अंक) और लघु उत्तरीय (5 अंक) प्रश्नों को कवर करते हैं, जो विषय की व्यापक समझ प्रदान करते हैं।

अशोक के धम्म का क्या महत्व है?

अशोक का धम्म एक नैतिक आचार संहिता थी जिसमें बड़ों का आदर, सहिष्णुता और सेवकों के प्रति उदारता जैसे सिद्धांत शामिल थे, जिसका उद्देश्य समाज में शांति और व्यवस्था बनाए रखना था।

मगध के शक्तिशाली राज्य बनने के क्या कारण थे?

मगध के उदय के मुख्य कारण उपजाऊ भूमि, लोहे की खानों की उपलब्धता, रणनीतिक राजधानियाँ (राजगृह और पाटलिपुत्र) और महत्वाकांक्षी शासक थे।

कृषि क्षेत्र में छठी शताब्दी ई. पू. से छठी शताब्दी ई. तक क्या प्रमुख परिवर्तन हुए?

इस अवधि में लोहे के हल का प्रयोग, धान की रोपाई, सिंचाई के साधनों का विकास और भूमि-अनुदान जैसी प्रथाओं से कृषि उत्पादकता में वृद्धि हुई।

इतिहास के पुनर्निर्माण में अभिलेखों की क्या भूमिका है?

अभिलेख शासकों, उनकी उपलब्धियों, सामाजिक-आर्थिक स्थितियों और धार्मिक विचारों के बारे में प्रत्यक्ष जानकारी प्रदान करके इतिहास के पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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