सीबीएसई कक्षा 12 इतिहास: बंधुत्व, जाति तथा वर्ग आरंभिक समाज NCERT समाधान

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यह खंड सीबीएसई कक्षा 12 इतिहास के अध्याय 'बंधुत्व, जाति तथा वर्ग: आरंभिक समाज (लगभग 600 ई.पू. से 600 ई.)' के लिए विस्तृत समाधान प्रदान करता है। इसमें महाकाव्य की परिभाषा, मनुस्मृति के महत्व, महाभारत युद्ध के कारण और परिणाम, कुल और जाति की अवधारणा, अंतर्विवाह, चांडालों की स्थिति, महाभारत की भाषा और विषयवस्तु, तथा इसके महत्व जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है। साथ ही, बी.बी. लाल के उत्खनन से प्राप्त घरों के साक्ष्य, बौद्ध और ब्राहमणीय सामाजिक अनुबंध की अवधारणाओं के बीच अंतर, और महाभारत को सामाजिक मूल्यों के अध्ययन के स्रोत के रूप में कैसे उपयोग किया जा सकता है, इन पर भी प्रकाश डाला गया है। ये समाधान छात्रों को प्रारंभिक भारतीय समाज की जटिलताओं को समझने और परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 12
Subjectइतिहास
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter3. बंधुत्व, जाति तथा वर्ग आरंभिक समाज

Chapter summary

यह NCERT समाधान कक्षा 12 इतिहास के अध्याय 'बंधुत्व, जाति तथा वर्ग: आरंभिक समाज' पर केंद्रित है, जो लगभग 600 ई.पू. से 600 ई. तक के समाज का अध्ययन करता है। इसमें महाकाव्य, मनुस्मृति, महाभारत, जाति व्यवस्था, अंतर्विवाह, और सामाजिक संरचनाओं जैसे प्रमुख विषयों को शामिल किया गया है। समाधान छात्रों को इन अवधारणाओं की गहरी समझ प्रदान करते हैं, जिसमें महाभारत के महत्व, पुरातात्विक साक्ष्य, और विभिन्न सामाजिक दृष्टिकोणों के बीच तुलना शामिल है। यह अध्याय प्रारंभिक भारतीय समाज की जटिलताओं को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण आधार प्रदान करता है।

Learning outcomes

  • महाकाव्य की परिभाषा और उदाहरणों को समझना।
  • मनुस्मृति के सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व का विश्लेषण करना।
  • महाभारत युद्ध के कारणों, परिणामों और इसके महत्व का वर्णन करना।
  • कुल, जाति और अंतर्विवाह जैसी सामाजिक संरचनाओं को परिभाषित करना।
  • चांडालों की सामाजिक स्थिति और प्राचीन समाज में उनके कार्यक्षेत्र को समझना।
  • महाभारत की भाषा, विषयवस्तु और भारतीय संस्कृति पर इसके प्रभाव का मूल्यांकन करना।
  • बी.बी. लाल के पुरातात्विक निष्कर्षों के आधार पर प्रारंभिक आवासों की विशेषताओं की व्याख्या करना।
  • बौद्ध और ब्राहमणीय सामाजिक अनुबंध की अवधारणाओं के बीच अंतर को स्पष्ट करना।

Topics covered

Paper topics

  • महाकाव्य का अर्थ
  • मनुस्मृति का महत्व
  • महाभारत युद्ध के कारण और परिणाम
  • कुल और जाति की अवधारणा
  • अंतर्विवाह
  • चांडालों की सामाजिक स्थिति
  • महाभारत की भाषा और विषयवस्तु
  • महाभारत का महत्व
  • बी.बी. लाल के पुरातात्विक निष्कर्ष
  • बौद्ध और ब्राहमणीय सामाजिक अनुबंध
  • सामाजिक मूल्यों का अध्ययन
  • प्रारंभिक समाज की संरचना

Important topics

  • महाकाव्य और महाभारत का महत्व
  • जाति व्यवस्था और सामाजिक संरचना
  • मनुस्मृति और सामाजिक नियम
  • बौद्ध बनाम ब्राहमणीय सामाजिक दृष्टिकोण
  • महाभारत को ऐतिहासिक स्रोत के रूप में उपयोग

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Questions and Solutions

प्रश्न 1: महाकाव्य का अर्थ स्पष्ट कीजिए।

महाकाव्य का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
Solution: महाकाव्य एक ऐसी विस्तृत काव्य रचना होती है जिसमें किसी महान नायक या राष्ट्र के जीवन, उसकी उपलब्धियों, संघर्षों और महत्वपूर्ण घटनाओं का वर्णन किया जाता है। ये रचनाएँ अक्सर लंबी होती हैं और इनमें वीर रस की प्रधानता होती है। भारतीय साहित्य में रामायण और महाभारत को महाकाव्य के प्रमुख उदाहरण के रूप में जाना जाता है।

प्रश्न 2: मनुस्मृति का दो महत्व बताइए।

मनुस्मृति का दो महत्व बताइए।
Solution: मनुस्मृति के दो प्रमुख महत्व निम्नलिखित हैं:
  1. यह उस काल के समाज के नियमों, कानूनों और सामाजिक प्रथाओं का विस्तृत वर्णन प्रस्तुत करती है, जिससे तत्कालीन सामाजिक संरचना को समझने में मदद मिलती है।
  2. मनुस्मृति का प्रभाव आज भी हिंदू धर्म के अनुयायियों की जीवन शैली, रीति-रिवाजों और कानूनी व्यवस्थाओं पर देखा जा सकता है, जो इसे एक स्थायी महत्व का ग्रंथ बनाता है।

प्रश्न 3: महाभारत का युद्ध क्यों हुआ था? इसका क्या परिणाम हुआ?

महाभारत का युद्ध क्यों हुआ था? इसका क्या परिणाम हुआ?
Solution: महाभारत का युद्ध मुख्य रूप से हस्तिनापुर के सिंहासन और संबंधित भूमि तथा अधिकारों को लेकर पांडवों और कौरवों के बीच हुए लंबे संघर्ष और विवाद का परिणाम था। इस युद्ध का परिणाम यह हुआ कि पांडवों की विजय हुई और उन्होंने हस्तिनापुर का राज्य प्राप्त किया, हालांकि इस युद्ध में भारी विनाश हुआ और दोनों पक्षों के अनेक योद्धा मारे गए।

प्रश्न 4: कुल तथा जाति का क्या अर्थ है।

कुल तथा जाति का क्या अर्थ है।
Solution: संस्कृत ग्रंथों में, 'कुल' शब्द का प्रयोग सामान्यतः एक छोटे, घनिष्ठ परिवार या वंश के लिए किया जाता था। वहीं, 'जाति' शब्द का प्रयोग संबंधियों के एक बड़े समूह के लिए होता था, जो संभवतः एक सामान्य पूर्वज से जुड़े होते थे और जिनकी अपनी विशिष्ट पहचान और नियम होते थे।

प्रश्न 5: अंतर्विवाह से क्या तात्पर्य है?

अंतर्विवाह से क्या तात्पर्य है?
Solution: अंतर्विवाह (Endogamy) एक ऐसी वैवाहिक प्रथा है जिसमें विवाह एक विशिष्ट समूह के भीतर ही संपन्न होते हैं। यह समूह गोत्र, कुल, जाति या यहाँ तक कि एक ही भौगोलिक क्षेत्र में निवास करने वाले लोगों का हो सकता है। इस प्रथा का उद्देश्य समूह की पहचान और एकता को बनाए रखना होता है।

प्रश्न 6: चांडाल किसे कहा जाता था?

चांडाल किसे कहा जाता था?
Solution: प्राचीन काल में, 'चांडाल' उन लोगों को कहा जाता था जो ऐसे कार्य करते थे जिन्हें उच्च वर्ग वर्जित मानता था। इन कार्यों में शवों को दफनाना या जलाना, मृत पशुओं को उठाना और उनका चमड़ा निकालना जैसे कार्य शामिल थे। चांडालों को समाज में निम्न स्थान प्राप्त था और वे अक्सर बहिष्कृत माने जाते थे।

प्रश्न 7: महाभारत की भाषा तथा विषयवस्तु पर प्रकाश डालिए?

महाभारत की भाषा तथा विषयवस्तु पर प्रकाश डालिए?
Solution: महाभारत की भाषा और विषयवस्तु अत्यंत समृद्ध और बहुआयामी है:
  1. भाषा: महाभारत को मूल रूप से संस्कृत भाषा में रचा गया था। इसकी भाषा को सरल, सुबोध और प्रवाहमयी माना जाता है, जिससे यह आम लोगों तक भी पहुँच सके।
  2. विषयवस्तु: यह ग्रंथ केवल एक युद्ध की कहानी नहीं है, बल्कि इसमें दर्शन, धर्म, राजनीति, नैतिकता, और सामाजिक जीवन से जुड़े अनेक प्रसंग और उपदेश समाहित हैं। यह एक गतिशील ग्रंथ है जिसकी अनेक पुनर्व्याख्याएँ समय के साथ अस्तित्व में आई हैं। इसके अनेक प्रसंगों को मूर्तिकला, नाट्य कला और नृत्य कला के माध्यम से भी अभिव्यक्त किया गया है।

प्रश्न 8: महाभारत के महत्व पर प्रकाश डालिए?

महाभारत के महत्व पर प्रकाश डालिए?
Solution: महाभारत का महत्व बहुआयामी है और यह भारतीय संस्कृति तथा इतिहास के अध्ययन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है:
  1. यह भारतीय संस्कृति और हिन्दू धर्म के विकास का एक विस्तृत लेखा-जोखा प्रस्तुत करता है।
  2. यह एक बहुआयामी ग्रंथ है जो समाज के विभिन्न पहलुओं जैसे राजनीति, धर्म, दर्शन और आदर्शों की झलक प्रदान करता है।
  3. इसमें युद्ध और शांति, सद्गुण और दुर्गुण, कर्तव्य और नैतिकता जैसे विषयों पर गहन विचार प्रस्तुत किए गए हैं।
  4. यह भारतीय इतिहास के अध्ययन के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत है, यद्यपि इसके कुछ रूपक कथाएँ काल्पनिक हो सकती हैं।
  5. यह सामाजिक, नैतिक और दार्शनिक मूल्यों का एक विशाल भंडार है जो आज भी प्रासंगिक हैं।

प्रश्न 9: महाभारत काल के द्वितीय चरण में (बारहवीं से सातवीं शताब्दी ई. पू. में) मिलने वाले घरों के बारे में बी.बी. लाल ने क्या लिखा है?

महाभारत काल के द्वितीय चरण में (बारहवीं से सातवीं शताब्दी ई. पू. में) मिलने वाले घरों के बारे में बी.बी. लाल ने क्या लिखा है?
Solution: महाभारत काल के द्वितीय चरण (लगभग 12वीं से 7वीं शताब्दी ई.पू.) के घरों के बारे में पुरातत्वविद् बी.बी. लाल ने अपने उत्खनन में महत्वपूर्ण साक्ष्य पाए हैं। उन्होंने इस अवधि में आबादी के पाँच स्तरों की पहचान की, जिनमें से दूसरा और तीसरा स्तर विशेष रूप से आवासों से संबंधित हैं। बी.बी. लाल के अनुसार:
  1. दूसरे स्तर के आवासों में घरों की कोई निश्चित या सुनियोजित परियोजना (लेआउट) नहीं थी, जो एक अव्यवस्थित बसावट का संकेत देता है।
  2. आवासों के निर्माण में मिट्टी की दीवारों और कच्ची मिट्टी की ईंटों का प्रयोग किया गया था।
  3. कुछ घरों की दीवारों को सरकंडों (reed) से भी बनाया गया था, जो स्थानीय निर्माण सामग्री के उपयोग को दर्शाता है।
ये निष्कर्ष प्रारंभिक भारतीय बस्तियों की निर्माण तकनीकों और जीवन शैली पर प्रकाश डालते हैं।

प्रश्न 10: किन मायनों में सामाजिक अनुबंध की बौद्ध अवधारणा समाज के उस ब्राहमणीय दृष्टिकोण से भिन्न थी जो पुरूषसूक्त पर आधारित था?

किन मायनों में सामाजिक अनुबंध की बौद्ध अवधारणा समाज के उस ब्राहमणीय दृष्टिकोण से भिन्न थी जो पुरूषसूक्त पर आधारित था?
Solution: सामाजिक अनुबंध की बौद्ध अवधारणा और पुरूषसूक्त पर आधारित ब्राहमणीय दृष्टिकोण के बीच कई महत्वपूर्ण अंतर थे:
  1. विषमता की प्रकृति: बौद्ध धर्म समाज की विषमता को एक सत्य मानता था, लेकिन यह मानता था कि यह विषमता नैसर्गिक (प्राकृतिक) नहीं थी और न ही स्थाई। इसके विपरीत, ब्राहमणीय दृष्टिकोण, विशेष रूप से पुरूषसूक्त में, सामाजिक असमानता का आधार जन्म को मानता था, जो एक दैवीय व्यवस्था का हिस्सा था।
  2. मानव और प्रकृति का संबंध: बौद्ध धर्म में मानव और प्रकृति को शुरू से ही एक दूसरे पर परस्पर निर्भर माना गया है, जो एक अधिक समतावादी दृष्टिकोण को दर्शाता है।
  3. राजा का चुनाव: बौद्ध अवधारणा के अनुसार, राजा लोगों द्वारा अपनी सेवाओं के बदले में कर प्राप्त करने के लिए चुना जाता था, जो एक प्रकार का सामाजिक अनुबंध था। ब्राहमणीय व्यवस्था में, राजा का पद अक्सर वंशानुगत होता था और उसे दैवीय अधिकार प्राप्त माने जाते थे।
  4. स्थायित्व: बौद्ध दृष्टिकोण के अनुसार, सामाजिक व्यवस्था परिवर्तनशील थी, जबकि ब्राहमणीय व्यवस्था में जन्म आधारित वर्ण व्यवस्था को अधिक स्थाई और अपरिवर्तनीय माना जाता था।
इस प्रकार, बौद्ध अवधारणा अधिक लचीली और मानव-केंद्रित थी, जबकि ब्राहमणीय दृष्टिकोण जन्म और दैवीय व्यवस्था पर अधिक बल देता था।

प्रश्न 11: प्राचीनकाल के सामाजिक मूल्यों के अध्ययन के लिए महाभारत एक अच्छा स्त्रोत है।

प्राचीनकाल के सामाजिक मूल्यों के अध्ययन के लिए महाभारत एक अच्छा स्त्रोत है।
Solution: प्राचीनकाल के सामाजिक मूल्यों के अध्ययन के लिए महाभारत वास्तव में एक उत्कृष्ट स्रोत है, क्योंकि यह तत्कालीन समाज की जटिलताओं और मान्यताओं को गहराई से दर्शाता है:
  1. पारिवारिक और सामाजिक संबंध: महाभारत मुख्य रूप से संबंधियों के बीच युद्ध की कहानी है, इसलिए यह पारिवारिक संबंधों, उनके उतार-चढ़ाव और सामाजिक जीवन की झलक प्रदान करता है।
  2. पितृवंशिता और संपत्ति का अधिकार: ग्रंथ स्पष्ट रूप से पितृवंशिता (Patriarchy) की प्रथा का पालन दर्शाता है, जहाँ पैतृक संपत्ति पर मुख्य रूप से पुत्रों का अधिकार होता था।
  3. विवाह और कर्तव्य: इसमें पुत्रियों के विवाह को समय पर संपन्न करना पिता का कर्तव्य माना गया है। साथ ही, यह भी दर्शाया गया है कि विशिष्ट परिवारों में बहुपति प्रथा (Polyandry) भी प्रचलित थी, जैसा कि द्रौपदी के पाँच पांडवों से विवाह के प्रसंग में देखा जा सकता है।
  4. नैतिक और दार्शनिक मूल्य: महाभारत में धर्म, कर्म, न्याय, कर्तव्य और नैतिकता जैसे गहन दार्शनिक और सामाजिक मूल्यों पर विस्तृत चर्चा की गई है, जो तत्कालीन समाज की नैतिक चेतना को समझने में सहायक है।
  5. सामाजिक संरचना: यह ग्रंथ तत्कालीन समाज की विभिन्न परतों, उनके संबंधों और अपेक्षाओं को भी चित्रित करता है।
इन सभी कारणों से, महाभारत प्राचीन भारतीय समाज के सामाजिक मूल्यों, संरचनाओं और मान्यताओं को समझने के लिए एक अमूल्य ऐतिहासिक और साहित्यिक स्रोत है।

Common mistakes

  • महाकाव्य की परिभाषा को केवल 'लंबी कविता' तक सीमित कर देना, उसके सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को अनदेखा करना।
  • मनुस्मृति के महत्व को केवल एक धार्मिक ग्रंथ के रूप में देखना, उसके सामाजिक और कानूनी प्रभाव को कम आंकना।
  • जाति व्यवस्था की जटिलताओं को केवल जन्म आधारित मानना, उसके सामाजिक और आर्थिक पहलुओं को नजरअंदाज करना।
  • महाभारत को केवल एक युद्ध की कहानी समझना, उसके दार्शनिक, नैतिक और सामाजिक संदेशों को न समझना।
  • बौद्ध और ब्राहमणीय दृष्टिकोणों के बीच सूक्ष्म अंतरों को समझने में कठिनाई।

Revision tips

  • प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को मुख्य बिंदुओं में विभाजित करें और उन्हें याद करने का प्रयास करें।
  • महाभारत से संबंधित विभिन्न अवधारणाओं (जैसे युद्ध, सामाजिक संरचना, भाषा) को एक साथ जोड़कर पढ़ें।
  • मनुस्मृति और बौद्ध अवधारणाओं के बीच तुलनात्मक अध्ययन करें ताकि अंतर स्पष्ट हो सकें।
  • बी.बी. लाल के निष्कर्षों को प्रारंभिक समाज के भौतिक साक्ष्यों के रूप में समझें।
  • अध्याय के प्रमुख शब्दों (जैसे कुल, जाति, गोत्र, अंतर्विवाह) की परिभाषाओं को स्पष्ट रूप से समझें।

Practice MCQs

Q1. महाकाव्य का अर्थ क्या है?

Q2. मनुस्मृति का एक प्रमुख महत्व क्या है?

Q3. महाभारत का युद्ध मुख्य रूप से किस कारण हुआ था?

Q4. संस्कृत ग्रंथों में 'कुल' शब्द का प्रयोग किसके लिए होता था?

Q5. बौद्ध धर्म के अनुसार, सामाजिक विषमता कैसी थी?

Frequently asked questions

कक्षा 12 इतिहास के लिए 'बंधुत्व, जाति तथा वर्ग: आरंभिक समाज' अध्याय में मुख्य रूप से किन विषयों को शामिल किया गया है?

इस अध्याय में महाकाव्य की परिभाषा, मनुस्मृति का महत्व, महाभारत युद्ध के कारण और परिणाम, कुल और जाति की अवधारणा, अंतर्विवाह, चांडालों की स्थिति, महाभारत की भाषा और विषयवस्तु, तथा इसके महत्व जैसे विषयों को शामिल किया गया है। साथ ही, प्रारंभिक समाज की संरचना और विभिन्न सामाजिक दृष्टिकोणों पर भी चर्चा की गई है।

महाभारत को प्राचीन समाज के अध्ययन के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत क्यों माना जाता है?

महाभारत को प्राचीन समाज के अध्ययन के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है क्योंकि यह न केवल संबंधियों के बीच युद्ध की कहानी है, बल्कि इसमें तत्कालीन समाज की पितृवंशिता, संपत्ति के अधिकार, विवाह प्रथाओं (जैसे बहुपति प्रथा), और सामाजिक जीवन की झलक मिलती है।

मनुस्मृति का समाज पर क्या प्रभाव था?

मनुस्मृति तात्कालिक समाज के नियमों और प्रथाओं का वर्णन करती है और इसका प्रभाव आज भी हिंदुओं की जीवन शैली में दिखाई देता है। यह सामाजिक व्यवस्था, कर्तव्यों और अधिकारों को परिभाषित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थी।

बौद्ध धर्म और ब्राहमणीय दृष्टिकोण में सामाजिक अनुबंध को लेकर क्या अंतर है?

बौद्ध धर्म सामाजिक विषमता को नैसर्गिक या स्थाई नहीं मानता, बल्कि इसे मानव निर्मित और परिवर्तनशील मानता है, जहाँ राजा लोगों द्वारा चुना जाता था। इसके विपरीत, ब्राहमणीय दृष्टिकोण में असमानता का आधार जन्म को माना जाता है, जो पुरूषसूक्त पर आधारित था।

ये NCERT समाधान छात्रों की परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेंगे?

ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के लिए विस्तृत और स्पष्ट उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को अध्याय की गहरी समझ विकसित करने में मदद मिलती है। महत्वपूर्ण अवधारणाओं की व्याख्या और विभिन्न दृष्टिकोणों की तुलना परीक्षा में पूछे जाने वाले विश्लेषणात्मक प्रश्नों का उत्तर देने के लिए उपयोगी है।

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