सीबीएसई कक्षा 12 इतिहास: ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ (हड़प्पा सभ्यता) - एनसीईआरटी समाधान
यह पृष्ठ सीबीएसई कक्षा 12 इतिहास के अध्याय 1, 'ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ' के लिए विस्तृत एनसीईआरटी समाधान प्रस्तुत करता है, जो हड़प्पा सभ्यता पर केंद्रित है। इसमें हड़प्पा सभ्यता में मनके बनाने की सामग्री और उनकी प्राप्ति के तरीकों, सिंधु घाटी सभ्यता के बारे में सीमित जानकारी के कारणों, कनिंघम और मार्शल जैसी प्रमुख हस्तियों द्वारा अपनाई गई पुरातात्विक तकनीकों में अंतर, और सामाजिक विषमताओं को समझने में शवाधानों के महत्व जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई है। समाधान हड़प्पाई जल निकासी प्रणाली की विशेषताओं और शासकों द्वारा किए जाने वाले संभावित कार्यों का भी विश्लेषण करते हैं। ये समाधान छात्रों को हड़प्पा सभ्यता की जटिलताओं को समझने और परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | इतिहास |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 1. ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ |
Chapter summary
कक्षा 12 इतिहास के अध्याय 1 'ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ' के ये एनसीईआरटी समाधान हड़प्पा सभ्यता के विभिन्न पहलुओं को कवर करते हैं। इसमें मनके बनाने की सामग्री, शिल्प उत्पादन के लिए संसाधनों की प्राप्ति, सिंधु घाटी सभ्यता के अध्ययन में आने वाली कठिनाइयाँ (जैसे लिपि का अपठित होना), और पुरातात्विक अन्वेषण की तकनीकों (कनिंघम और मार्शल के दृष्टिकोण) पर प्रकाश डाला गया है। समाधान शवाधानों के माध्यम से सामाजिक विषमताओं की समझ, जल निकासी व्यवस्था की उन्नत तकनीक, और शासकों की भूमिका जैसे विषयों का भी विश्लेषण करते हैं।
Learning outcomes
- हड़प्पा सभ्यता में मनके बनाने के लिए प्रयुक्त विभिन्न पदार्थों और उन्हें प्राप्त करने की विधियों को समझना।
- सिंधु घाटी सभ्यता के बारे में सीमित जानकारी के कारणों का विश्लेषण करना।
- हड़प्पा सभ्यता के पुरातात्विक अध्ययन में कनिंघम और मार्शल द्वारा अपनाई गई तकनीकों के बीच अंतर स्पष्ट करना।
- शवाधानों के अध्ययन से हड़प्पाई समाज में व्याप्त सामाजिक विषमताओं को समझना।
- हड़प्पाई जल निकासी प्रबंधन प्रणाली की विशेषताओं का वर्णन करना।
- हड़प्पाई समाज में शासकों के संभावित कार्यों और जिम्मेदारियों पर चर्चा करना।
Topics covered
Paper topics
- हड़प्पा सभ्यता
- मनके बनाने की सामग्री
- शिल्प उत्पादन
- पुरातात्विक तकनीक
- कनिंघम का योगदान
- मार्शल की विधि
- व्हीलर की विधि
- शवाधान और सामाजिक विषमता
- जल निकासी प्रबंधन
- हड़प्पाई शासकों के कार्य
- लिपि का महत्व
- संसाधन प्राप्ति
Important topics
- मनके बनाने की सामग्री और प्राप्ति के स्रोत
- कनिंघम और मार्शल की पुरातात्विक विधियों में अंतर
- शवाधानों के माध्यम से सामाजिक विषमताओं की समझ
- हड़प्पाई जल निकासी प्रबंधन
- शासकों द्वारा किए जाने वाले संभावित कार्य
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
- पत्थर: कार्नीलियन (एक सुंदर लाल रंग का पत्थर), जैरपर, रफटिक, क्वार्ज़ और सेलखड़ी।
- धातुएँ: ताँबा, काँसा और सोना।
- अन्य सामग्री: शंख, फयॉन्स (एक प्रकार का चमकीला नीला या हरा चीनी मिट्टी का पदार्थ) और पक्की मिट्टी।
- स्थानीय उपलब्धता: जहाँ कुछ वस्तुएँ आसानी से उपलब्ध होती थीं, जैसे कि शंख, वहाँ उन्होंने बस्तियाँ स्थापित कीं। उदाहरण के लिए, नागेश्वर और बालाकोट में शंख आसानी से उपलब्ध था।
- अभियान भेजना: अन्य मूल्यवान धातुओं और पत्थरों के लिए, उन्होंने दूर के क्षेत्रों में अभियान भेजे। उदाहरण के लिए, ताँबे के लिए राजस्थान के खेतड़ी क्षेत्र और सोने के लिए दक्षिण भारत में।
प्रश्न 2
- लिपि का अपठित होना: सिंधु घाटी सभ्यता की लिपि को आज तक पढ़ा नहीं जा सका है। जबकि मिस्र और मेसोपोटामिया जैसी अन्य सभ्यताओं के बारे में हमारी विस्तृत जानकारी उनकी पढ़ी जा सकने वाली लिपियों के कारण है, जो हमें उनके साहित्य, प्रशासन और दैनिक जीवन के बारे में बताती है।
- केवल पुरातात्विक साक्ष्यों पर निर्भरता: सिंधु घाटी सभ्यता के बारे में हमारा ज्ञान पूरी तरह से पुरातात्विक अवशेषों जैसे कि इमारतें, औजार, बर्तन, मुहरें और कंकाल के अध्ययन पर आधारित है। इन साक्ष्यों से अनुमान लगाना संभव है, लेकिन यह लिखित स्रोतों से प्राप्त प्रत्यक्ष जानकारी की तरह विस्तृत नहीं होता।
प्रश्न 3
- काल निर्धारण का भ्रम: कनिंघम का मुख्य ध्यान उपमहाद्वीप में चौथी से सातवीं शताब्दी ईस्वी के बीच आए चीनी बौद्ध तीर्थयात्रियों द्वारा छोड़े गए वृत्तांतों पर था। वे इन वृत्तांतों के आधार पर प्रारंभिक बस्तियों की पहचान करने का प्रयास कर रहे थे।
- ऐतिहासिकता का प्रारंभ बिंदु: कनिंघम का यह मानना था कि भारतीय इतिहास का प्रारंभ गंगा की घाटी में विकसित हुए पहले शहरों से होता है। इस कारण, वे हड़प्पा जैसी सिंधु घाटी की प्राचीन सभ्यता के महत्व और काल को सही ढंग से नहीं समझ पाए और उसे अपने अध्ययन के मुख्य केंद्र में नहीं रखा। उनका झुकाव छठी शताब्दी ईसा पूर्व और उसके बाद के कालों से संबंधित पुरातत्व की ओर अधिक था।
प्रश्न 4
- जॉन मार्शल की तकनीक: मार्शल पुरास्थल के विभिन्न स्तरों के महत्व को पूरी तरह से समझे बिना, पूरे टीले में एक समान क्षैतिज इकाइयों में खुदाई करते थे। इसका परिणाम यह होता था कि अलग-अलग कालखंडों से संबंधित पुरावस्तुएँ एक ही इकाई में मिल जाती थीं, जिससे उनके मूल संदर्भ और काल की बहुमूल्य जानकारी खो जाती थी।
- अलेक्जेंडर कनिंघम की तकनीक: कनिंघम का दृष्टिकोण मुख्य रूप से ऐतिहासिक ग्रंथों और चीनी तीर्थयात्रियों के वृत्तांतों पर आधारित था, और उनका ध्यान गंगा घाटी की सभ्यताओं पर अधिक केंद्रित था। वे हड़प्पा जैसी सिंधु घाटी की प्राचीन सभ्यताओं के पुरातात्विक महत्व को पूरी तरह से नहीं समझ पाए।
- आर.ई.एम. व्हीलर का योगदान: मार्शल की तकनीक की समस्या को आर.ई.एम. व्हीलर ने पहचाना। उन्होंने यह आवश्यक समझा कि खुदाई टीले के स्तर विन्यास (stratigraphy) का अनुसरण करते हुए की जानी चाहिए, न कि एकसमान क्षैतिज इकाइयों के आधार पर। इससे पुरावस्तुओं के संदर्भ को समझना आसान हो गया।
प्रश्न 5
- कब्रों की बनावट में भिन्नता: हड़प्पा स्थलों पर पाए गए शवाधानों में मृतकों को गर्तों में दफनाया जाता था। इन गर्तों की बनावट, आकार और गहराई में भिन्नता पाई जाती है। कुछ कब्रें साधारण होती हैं, जबकि अन्य अधिक विस्तृत और गहरी होती हैं, जो संभवतः सामाजिक या आर्थिक स्थिति में अंतर को दर्शाती हैं।
- शव के साथ रखी वस्तुएँ: कई कब्रों में कंकाल के पास मिट्टी के बर्तन (मृदभाण्ड) और आभूषण जैसी वस्तुएँ मिली हैं। इन वस्तुओं की संख्या, गुणवत्ता और प्रकार में भिन्नता देखी गई है। कुछ कब्रों में बहुमूल्य आभूषण और बड़ी संख्या में बर्तन मिले हैं, जबकि अन्य में बहुत कम या कुछ भी नहीं। यह अंतर संभवतः मृतकों के सामाजिक या आर्थिक दर्जे को इंगित करता है, और यह भी कि इन वस्तुओं का प्रयोग मृत्यु के बाद भी किया जा सकता था।
- लिंग भेद: पुरुषों और महिलाओं दोनों के शवाधानों से आभूषण मिले हैं, जो यह दर्शाता है कि दोनों लिंगों के लोग आभूषण पहनते थे, लेकिन उनकी मात्रा और प्रकार सामाजिक स्थिति के अनुसार भिन्न हो सकते थे।
प्रश्न 6
- सामग्री और निर्माण: नगर की नालियाँ मुख्य रूप से मिट्टी के गारे, चूने और जिप्सम से बनी होती थीं। इन्हें बड़ी ईंटों और पत्थरों से ढका जाता था, जिससे इन्हें आसानी से ऊपर उठाकर सफाई की जा सके।
- छोटी और बड़ी नालियों का संयोजन: घरों से निकलने वाला गंदा पानी छोटी नालियों के माध्यम से सड़कों के किनारे बनी बड़ी नालियों में आकर मिलता था। ये बड़ी नालियाँ शहर के बाहर तक जाती थीं, जिससे पूरे शहर का गंदा पानी व्यवस्थित तरीके से बाहर निकल जाता था।
- वर्षा जल निकासी: वर्षा के पानी के निकास के लिए भी विशेष प्रबंध थे। बड़ी नालियों का घेरा 3 से 5 फुट तक होता था, जो भारी मात्रा में पानी को बाहर निकालने में सक्षम था।
- सड़कों के किनारे गड्ढे: घरों से निकलने वाले गंदे पानी के निकास के लिए सड़कों के दोनों ओर गड्ढे भी बने हुए थे, जो पानी को जमा करने और फिर नालियों में प्रवाहित करने में सहायक होते थे।
- स्वच्छता पर जोर: इस सुव्यवस्थित जल निकासी प्रणाली से यह स्पष्ट होता है कि हड़प्पा सभ्यता के लोग अपने नगरों की सफाई और सार्वजनिक स्वास्थ्य के प्रति अत्यधिक सचेत थे। यह उनकी योजनाबद्ध शहरी जीवन शैली का प्रमाण है।
प्रश्न 7
- जटिल निर्णय लेना और कार्यान्वयन: विद्वानों का मानना है कि शासक जटिल राजनीतिक और आर्थिक निर्णय लेते थे और उन्हें लागू करवाते थे। इसका एक प्रमाण हड़प्पा सभ्यता में पाई जाने वाली असाधारण एकरूपता है, जो मुहरों, बांटों, ईंटों और मृदभाण्डों में देखी जाती है। यह एक केंद्रीकृत सत्ता की ओर इशारा करता है।
- संसाधन प्रबंधन और नियोजन: शासक संभवतः बस्तियों की स्थापना, विशाल दीवारों और सार्वजनिक इमारतों के निर्माण, और दुर्गों के निर्माण से पहले चबूतरों के निर्माण जैसे बड़े पैमाने की परियोजनाओं का नियोजन और प्रबंधन करते थे।
- श्रमिकों का संगठन: लाखों की संख्या में ईंटें बनाने और अन्य निर्माण कार्यों के लिए श्रमिकों की व्यवस्था करना एक अत्यंत कठिन कार्य था, जिसे संभवतः शासक वर्ग ही संभव बना पाता था।
- विदेशी व्यापार और संबंध: शासक संभवतः दूरस्थ क्षेत्रों से कच्चे माल (जैसे सोना, कीमती पत्थर) प्राप्त करने और व्यापारिक संबंध स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे।
- धार्मिक और अनुष्ठानिक कार्य: यद्यपि हड़प्पा समाज में पुरोहित वर्ग की स्पष्ट पहचान नहीं है, फिर भी शासक संभवतः धार्मिक अनुष्ठानों और समारोहों का नेतृत्व करते थे या उन्हें प्रायोजित करते थे, जैसा कि कुछ सार्वजनिक इमारतों (जैसे मोहनजोदड़ो का महान स्नानागार) से संकेत मिलता है।
Common mistakes
- पुरातात्विक साक्ष्यों के संदर्भ को अनदेखा करना, जैसा कि मार्शल की तकनीक में देखा गया।
- हड़प्पा सभ्यता की लिपि को न पढ़ पाने के कारण उसके बारे में सीमित जानकारी को कम आंकना।
- कनिंघम के प्रारंभिक ऐतिहासिक काल पर ध्यान केंद्रित करने के कारण हड़प्पा सभ्यता के महत्व को समझने में हुई चूक को नजरअंदाज करना।
- शवाधानों में मिली वस्तुओं के आधार पर सामाजिक विषमताओं की व्याख्या में जल्दबाजी करना।
Revision tips
- मनके बनाने की सामग्री और प्राप्ति के स्रोतों को सूचीबद्ध करें।
- कनिंघम और मार्शल की पुरातात्विक विधियों के बीच मुख्य अंतरों को सारणीबद्ध करें।
- जल निकासी प्रणाली की विशेषताओं को चित्रों या आरेखों की सहायता से समझें।
- शवाधानों से प्राप्त साक्ष्यों और उनसे निकाले गए सामाजिक निष्कर्षों को जोड़कर पढ़ें।
- शासकों के कार्यों से संबंधित तर्कों को समझें और उन्हें पुरातात्विक साक्ष्यों से जोड़ें।
Practice MCQs
Q1. हड़प्पा सभ्यता में मनके बनाने के लिए निम्नलिखित में से कौन सा पदार्थ प्रयुक्त नहीं होता था?
Explanation: हड़प्पा सभ्यता में लोहा धातु का प्रयोग नहीं होता था। मनके बनाने के लिए कार्नीलियन, जैरपर, रफटिक, क्वार्ज़, सेलखड़ी, ताँबा, काँसा, सोना, शंख, फयॉन्स और पक्की मिट्टी का प्रयोग होता था।
Q2. सिंधु घाटी सभ्यता के बारे में हमारी जानकारी सीमित क्यों है?
Explanation: सिंधु घाटी सभ्यता के बारे में हमारी जानकारी मुख्य रूप से पुरातात्विक अवशेषों पर आधारित है, क्योंकि उस काल की लिपि को आज तक पढ़ा नहीं जा सका है, जो अन्य प्राचीन सभ्यताओं के अध्ययन का एक प्रमुख आधार है।
Q3. कनिंघम का यह मानना था कि भारतीय इतिहास का प्रारंभ किससे हुआ?
Explanation: कनिंघम का यह भ्रम था कि भारतीय इतिहास का प्रारंभ गंगा की घाटी में विकसित हुए पहले शहरों से होता है, जिसके कारण वे हड़प्पा सभ्यता के महत्व को पूरी तरह समझ नहीं पाए।
Q4. आर.ई.एम. व्हीलर ने पुरातात्विक खुदाई की किस समस्या का समाधान किया?
Explanation: व्हीलर ने पहचाना कि एकसमान क्षैतिज इकाइयों के बजाय टीले के स्तर विन्यास का अनुसरण करते हुए खुदाई करना अधिक आवश्यक है, जिससे पुरावस्तुओं के संदर्भ की बहुमूल्य जानकारी सुरक्षित रहती है।
Q5. हड़प्पा स्थलों से मिले शवाधानों में कंकाल के पास मृदभाण्ड और आभूषण मिलने से क्या संकेत मिलता है?
Explanation: कंकाल के पास मृदभाण्ड और आभूषणों का मिलना इस बात का संकेत देता है कि हड़प्पावासी संभवतः मृत्युपरांत जीवन में विश्वास करते थे और इन वस्तुओं का प्रयोग परलोक में भी किया जा सकता था।
Frequently asked questions
कक्षा 12 इतिहास के अध्याय 1 में किन मुख्य विषयों को शामिल किया गया है?
इस अध्याय में हड़प्पा सभ्यता के प्रमुख पहलुओं को शामिल किया गया है, जैसे मनके बनाने की सामग्री और प्राप्ति, सिंधु घाटी सभ्यता के अध्ययन में आने वाली कठिनाइयाँ, पुरातात्विक अन्वेषण की तकनीकें, शवाधानों से सामाजिक विषमताओं की समझ, जल निकासी व्यवस्था और शासकों की भूमिका।
हड़प्पा सभ्यता के बारे में हमारी जानकारी अन्य सभ्यताओं की तुलना में कम क्यों है?
इसका मुख्य कारण यह है कि हड़प्पा सभ्यता की लिपि को आज तक पढ़ा नहीं जा सका है। अन्य सभ्यताओं के विपरीत, हम केवल पुरातात्विक अवशेषों के आधार पर ही इसके बारे में अनुमान लगा पाते हैं।
पुरातात्विक खुदाई में कनिंघम और मार्शल की तकनीकों में क्या अंतर था?
कनिंघम का ध्यान प्रारंभिक ऐतिहासिक काल पर था, जबकि मार्शल पुरास्थल के स्तर विन्यास को अनदेखा कर समान क्षैतिज इकाइयों में खुदाई करते थे। आर.ई.एम. व्हीलर ने इस समस्या को हल करते हुए स्तर विन्यास के अनुसार खुदाई की तकनीक अपनाई।
शवाधान हड़प्पा सभ्यता में सामाजिक विषमताओं को समझने में कैसे सहायक हैं?
शवाधानों में मिली कब्रों की बनावट में भिन्नता और कंकाल के पास पाए जाने वाले मृदभाण्ड व आभूषणों की संख्या और गुणवत्ता सामाजिक स्तर में अंतर को दर्शाती है।
हड़प्पाई जल निकासी प्रबंधन प्रणाली की मुख्य विशेषताएँ क्या थीं?
इस प्रणाली में मिट्टी, गारे, चूने और जिप्सम से बनी ढकी हुई नालियाँ शामिल थीं, जो घरों से गंदे पानी को मुख्य सड़कों की बड़ी नालियों तक ले जाती थीं। यह सफाई और स्वास्थ्य के प्रति उनकी जागरूकता को दर्शाता है।
ये एनसीईआरटी समाधान छात्रों की परीक्षा तैयारी में कैसे मदद करेंगे?
ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को विस्तृत और स्पष्ट रूप से समझाते हैं, जिससे छात्रों को हड़प्पा सभ्यता के जटिल विषयों को गहराई से समझने में मदद मिलती है। यह परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदुओं को याद रखने और उत्तर लिखने का अभ्यास करने में सहायक है।
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