सीबीएसई कक्षा 12 इतिहास: 1857 के विद्रोह और राज के NCERT समाधान

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यह पृष्ठ सीबीएसई कक्षा 12 इतिहास के अध्याय 11, 'विद्रोही और राज' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है, जो 1857 के विद्रोह पर केंद्रित है। इसमें विद्रोह के राजनीतिक और प्रशासनिक कारणों, जैसे ब्रिटिश साम्राज्यवादी नीतियों, राज्य अपहरण की नीति, पेंशनों और उपाधियों की समाप्ति, मुगल सम्राट के प्रति असम्मानजनक व्यवहार, अवध के विलय और सहायक संधि के दुरुपयोग जैसे विषयों को शामिल किया गया है। समाधान विद्रोह की असफलता के कारणों पर भी प्रकाश डालते हैं, जिनमें विद्रोह का समय से पहले फैलना, देशी शासकों का अंग्रेजों को सहयोग, उच्च वर्ग का समर्थन न मिलना, विद्रोहियों के सीमित साधन, सामान्य आदर्श का अभाव, ब्रिटिश सेनापतियों की प्रतिभा और संचार साधनों पर अंग्रेजों का नियंत्रण शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, समाधान 1857 के विद्रोह के स्वरूप की भी व्याख्या करते हैं, इसे केवल एक सैनिक विद्रोह के रूप में और प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के रूप में प्रस्तुत करते हुए। ये समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए एक स्पष्ट और व्यापक समझ प्रदान करते हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 12
Subjectइतिहास
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter11. विद्रोही और राज

Chapter summary

यह खंड सीबीएसई कक्षा 12 इतिहास के अध्याय 11, 'विद्रोही और राज' से संबंधित NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें 1857 के विद्रोह के विभिन्न पहलुओं को शामिल किया गया है, जिसमें इसके राजनीतिक और प्रशासनिक कारण, विद्रोह की असफलता के कारण और इसके बहुआयामी स्वरूप का विश्लेषण शामिल है। समाधान छात्रों को विद्रोह के मूल कारणों और परिणामों को समझने में मदद करते हैं।

Learning outcomes

  • 1857 के विद्रोह के राजनीतिक और प्रशासनिक कारणों की पहचान करना।
  • सहायक संधि और राज्य अपहरण जैसी ब्रिटिश नीतियों के प्रभाव को समझना।
  • 1857 के विद्रोह की असफलता के विभिन्न कारणों का विश्लेषण करना।
  • 1857 के विद्रोह को एक सैनिक विद्रोह और प्रथम स्वतंत्रता संग्राम दोनों के रूप में समझना।
  • विद्रोह में विभिन्न वर्गों और शासकों की भूमिका का मूल्यांकन करना।

Topics covered

Paper topics

  • 1857 का विद्रोह
  • विद्रोही और राज
  • सहायक संधि
  • राज्य अपहरण की नीति
  • अवध का विलय
  • सामान्य सेवा भर्ती अधिनियम
  • विद्रोह के राजनीतिक कारण
  • विद्रोह के प्रशासनिक कारण
  • विद्रोह की असफलता के कारण
  • विद्रोह का स्वरूप
  • सैनिक विद्रोह
  • प्रथम स्वतंत्रता संग्राम

Important topics

  • 1857 के विद्रोह के राजनीतिक और प्रशासनिक कारण
  • 1857 के विद्रोह की असफलता के कारण
  • 1857 के विद्रोह का स्वरूप (सैनिक विद्रोह बनाम प्रथम स्वतंत्रता संग्राम)
  • सहायक संधि और राज्य अपहरण की नीति का प्रभाव

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Questions and Solutions

प्र.1 सहायक संधि को किस गवर्नर जनरल द्वारा लागू किया गया? इसे स्वीकार करने वाले चार प्रमुख शक्तियों के नाम लिखिए।

सहायक संधि को किस गवर्नर जनरल द्वारा लागू किया गया? इसे स्वीकार करने वाले चार प्रमुख शक्तियों के नाम लिखिए।
Solution: सहायक संधि को गवर्नर जनरल लॉर्ड वैलेस्ली द्वारा लागू किया गया था। यह संधि ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को भारतीय राज्यों के साथ संबंध स्थापित करने की अनुमति देती थी, जिसमें भारतीय शासकों को अपनी सेना भंग कर ब्रिटिश सेना रखनी पड़ती थी और ब्रिटिश रेजीडेंट को अपने दरबार में रखना पड़ता था। इस संधि को स्वीकार करने वाली प्रमुख शक्तियों में हैदराबाद, अवध, मैसूर और तंजौर शामिल थे।

प्र.2 कानपुर में किस अंग्रेज महिला ने भारतीय सिपाहियों से वीरतापूर्वक अपनी रक्षा की?

कानपुर में किस अंग्रेज महिला ने भारतीय सिपाहियों से वीरतापूर्वक अपनी रक्षा की?
Solution: कानपुर में मिस व्हीलर नामक अंग्रेज महिला ने भारतीय सिपाहियों के विद्रोह के दौरान वीरतापूर्वक अपनी रक्षा करने का प्रयास किया था। हालांकि, उस समय की परिस्थितियों में उनकी रक्षा संभव नहीं हो पाई थी।

प्र.3 अवध का अंतिम नवाब कौन था? उसे पेंशन देकर कहाँ भेजा गया?

अवध का अंतिम नवाब कौन था? उसे पेंशन देकर कहाँ भेजा गया?
Solution: अवध का अंतिम नवाब वाजिद अली शाह था। ब्रिटिश सरकार द्वारा अवध के विलय के बाद, उन्हें पेंशन देकर कलकत्ता भेज दिया गया था, जहाँ उन्होंने अपना शेष जीवन व्यतीत किया।

प्र.4 सामान्य सेवा भर्ती अधिनियम किस गवर्नर जनरल के शासनकाल में तथा कब पारित किया गया?

सामान्य सेवा भर्ती अधिनियम किस गवर्नर जनरल के शासनकाल में तथा कब पारित किया गया?
Solution: सामान्य सेवा भर्ती अधिनियम 1856 में पारित किया गया था। यह अधिनियम उस समय के गवर्नर जनरल लॉर्ड कैनिंग के शासनकाल में लागू हुआ था। इस अधिनियम के अनुसार, भारतीय सिपाहियों को समुद्र पार करके कहीं भी सेवा देने के लिए बाध्य किया जा सकता था, जो कि उस समय की धार्मिक मान्यताओं के विरुद्ध था और विद्रोह का एक कारण बना।

प्र.1 1857 विद्रोह के राजनैतिक एवं प्रशासनिक कारणों का वर्णन करें।

1857 विद्रोह के राजनैतिक एवं प्रशासनिक कारणों का वर्णन करें।
Solution: 1857 के विद्रोह के पीछे कई राजनीतिक और प्रशासनिक कारण थे, जिनमें प्रमुख निम्नलिखित हैं:
  1. ब्रिटिश शासकों की साम्राज्यवादी नीति: अंग्रेजों ने भारत में अपने साम्राज्य का विस्तार करने के लिए आक्रामक नीतियां अपनाईं, जिससे भारतीय शासकों और जनता में असंतोष बढ़ा।
  2. राज्य अपहरण की नीति: लॉर्ड डलहौजी की राज्य अपहरण की नीति के तहत, अनेक भारतीय राज्यों को ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया गया, जैसे सतारा, झांसी, नागपुर आदि। इससे शासकों में असुरक्षा की भावना पैदा हुई।
  3. पेंशनों तथा उपाधियों की समाप्ति: अंग्रेजों ने अनेक भारतीय शासकों की पेंशनें और उपाधियाँ समाप्त कर दीं, जिससे उनकी प्रतिष्ठा और आर्थिक स्थिति पर गहरा आघात लगा। उदाहरण के लिए, पेशवा बाजीराव द्वितीय की पेंशन बंद कर दी गई थी।
  4. मुगल सम्राट के प्रति असम्मानजनक बर्ताव: ब्रिटिश सरकार ने मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर के प्रति भी अपमानजनक व्यवहार किया। उन्हें लाल किले से निकालकर कुतुब मीनार के पास एक छोटे से मकान में रहने को मजबूर किया गया और उनके उत्तराधिकारियों को भी कोई विशेष सम्मान नहीं दिया गया।
  5. अवध का विलय: कुशासन का आरोप लगाकर 1856 में अवध को ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया गया। अवध के नवाब वाजिद अली शाह को पेंशन देकर कलकत्ता भेज दिया गया। इस विलय ने अवध की जनता और सैनिकों में गहरा रोष उत्पन्न किया।
  6. सहायक संधि का दुरूपयोग: सहायक संधि के माध्यम से अंग्रेजों ने भारतीय राज्यों की स्वतंत्रता को सीमित कर दिया था और उन पर अपना नियंत्रण बढ़ा दिया था। इस संधि का दुरुपयोग करके अनेक राज्यों को अपने अधीन किया गया, जिससे उनमें असंतोष पनपा।

प्र.2 1857 विद्रोह की असफलता के क्या कारण थे?

1857 विद्रोह की असफलता के क्या कारण थे?
Solution: 1857 का विद्रोह अनेक कारणों से असफल रहा, जिनमें प्रमुख निम्नलिखित हैं:
  1. विद्रोह का निश्चित तिथि से पूर्व विस्फोट: विद्रोह की योजना एक निश्चित तिथि के लिए बनाई गई थी, लेकिन चर्बी वाले कारतूसों के मामले के कारण यह समय से पहले ही भड़क उठा। इससे विद्रोहियों को पूरी तरह संगठित होने का अवसर नहीं मिला।
  2. अंग्रेजों को देशी शासकों का सहयोग प्राप्त होना: अनेक भारतीय शासक, जैसे सिंधिया, होलकर, निजाम और पटियाला के शासक, विद्रोह में शामिल नहीं हुए और उन्होंने अंग्रेजों का सहयोग किया। इससे विद्रोहियों को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पाया।
  3. उच्च वर्ग का सहयोग न मिलना: शिक्षित मध्यम वर्ग, जमींदार और व्यापारी वर्ग जैसे उच्च वर्गों ने विद्रोह में भाग नहीं लिया, या कुछ मामलों में उन्होंने अंग्रेजों का समर्थन किया।
  4. विद्रोहियों के सीमित साधन: विद्रोहियों के पास हथियारों, धन और संचार के साधनों की भारी कमी थी। इसके विपरीत, अंग्रेजों के पास आधुनिक हथियार, प्रशिक्षित सेना और बेहतर संचार व्यवस्था थी।
  5. सामान्य आदर्श का अभाव: विद्रोहियों के बीच एकता और एक सामान्य राष्ट्रीय उद्देश्य का अभाव था। विभिन्न क्षेत्रों और समूहों के अपने-अपने उद्देश्य थे, जिससे एक एकीकृत आंदोलन खड़ा नहीं हो सका।
  6. प्रतिभावान ब्रिटिश सेनापति: अंग्रेजों के पास लॉरेंस, नील, हैवलॉक और आउट्रम जैसे कुशल और अनुभवी सेनापति थे, जिन्होंने विद्रोह को दबाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  7. संचार-साधनों पर अंग्रेजों का नियंत्रण: अंग्रेजों ने तार (टेलीग्राफ) और रेलवे जैसी संचार व्यवस्था पर अपना नियंत्रण बनाए रखा, जिससे वे अपनी सेनाओं को आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जा सके और सूचनाओं का आदान-प्रदान कर सके।

प्र.3 1857 विद्रोह के स्वरूप का वर्णन करें

1857 विद्रोह के स्वरूप का वर्णन करें
Solution: 1857 के विद्रोह के स्वरूप को लेकर इतिहासकारों में मतभेद है। इसे मुख्य रूप से दो दृष्टिकोणों से देखा जाता है:

(क) सैनिक विद्रोह मात्र:

  • इस दृष्टिकोण के अनुसार, विद्रोह का प्रारंभ सैनिकों द्वारा किया गया था और इसका मुख्य तात्कालिक कारण चर्बी वाले कारतूसों का मामला था।
  • विद्रोह का प्रसार संपूर्ण देश में नहीं हुआ, बल्कि यह मुख्य रूप से सैनिक छावनियों और उनसे जुड़े क्षेत्रों तक ही सीमित रहा।
  • चूंकि इसे सामान्य जनता का व्यापक समर्थन प्राप्त नहीं था, इसलिए ब्रिटिश सरकार को इसे दबाने में अधिक कठिनाई नहीं हुई।

(ख) प्रथम स्वतंत्रता संग्राम:

  • इस दृष्टिकोण के अनुसार, यह केवल एक सैनिक विद्रोह नहीं था, बल्कि लाखों कारीगरों, किसानों और सिपाहियों ने मिलकर ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ संघर्ष किया था।
  • इस आंदोलन में हिन्दू और मुसलमान एकजुट होकर लड़े और उन्होंने बहादुर शाह जफर को अपना सम्राट स्वीकार किया, जो एक राष्ट्रीय एकता का प्रतीक था।
  • घुमक्कड़ सन्यासियों, फकीरों और मदारियों ने गांव-गांव में इस आंदोलन का प्रचार-प्रसार किया, जिससे यह जन-आंदोलन का रूप ले सका।
  • इसने भविष्य के राष्ट्रीय आंदोलनों के लिए प्रेरणा का कार्य किया और इसे भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम माना जाता है।

Common mistakes

  • विद्रोह के कारणों और स्वरूप को केवल एक दृष्टिकोण से देखना।
  • विद्रोह की असफलता के कारणों को सतही तौर पर समझना।
  • ब्रिटिश नीतियों के दूरगामी प्रभावों को नजरअंदाज करना।

Revision tips

  • विद्रोह के राजनीतिक और प्रशासनिक कारणों की सूची बनाएं और उन्हें विस्तार से समझें।
  • विद्रोह की असफलता के कारणों को बिंदुवार याद करें और उनके महत्व को समझें।
  • विद्रोह के स्वरूप पर दिए गए दोनों दृष्टिकोणों (सैनिक विद्रोह और प्रथम स्वतंत्रता संग्राम) का तुलनात्मक अध्ययन करें।

Practice MCQs

Q1. सहायक संधि को किस गवर्नर जनरल द्वारा लागू किया गया था?

Q2. 1857 के विद्रोह के समय अवध का अंतिम नवाब कौन था?

Q3. सामान्य सेवा भर्ती अधिनियम किस वर्ष पारित किया गया था?

Q4. 1857 के विद्रोह के राजनीतिक कारणों में से एक क्या था?

Q5. 1857 के विद्रोह की असफलता का एक कारण क्या था?

Frequently asked questions

1857 के विद्रोह के मुख्य राजनीतिक कारण क्या थे?

1857 के विद्रोह के मुख्य राजनीतिक कारणों में ब्रिटिश शासकों की साम्राज्यवादी नीति, राज्य अपहरण की नीति, पेंशनों और उपाधियों की समाप्ति, मुगल सम्राट के प्रति असम्मानजनक बर्ताव, अवध का विलय और सहायक संधि का दुरुपयोग शामिल थे।

1857 के विद्रोह को प्रथम स्वतंत्रता संग्राम क्यों कहा जाता है?

1857 के विद्रोह को प्रथम स्वतंत्रता संग्राम इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें लाखों कारीगरों, किसानों और सिपाहियों ने ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष किया था, और इसमें हिन्दू-मुसलमानों ने मिलकर भाग लिया था।

विद्रोह की असफलता के कुछ प्रमुख कारण क्या थे?

विद्रोह की असफलता के प्रमुख कारणों में विद्रोह का निश्चित तिथि से पूर्व विस्फोट, अंग्रेजों को देशी शासकों का सहयोग प्राप्त होना, उच्च वर्ग का सहयोग न मिलना, विद्रोहियों के सीमित साधन, सामान्य आदर्श का अभाव और संचार-साधनों पर अंग्रेजों का नियंत्रण शामिल थे।

सहायक संधि का क्या अर्थ है और इसका विद्रोह से क्या संबंध था?

सहायक संधि एक ऐसी व्यवस्था थी जिसके तहत भारतीय शासकों को अपनी सेना भंग कर ब्रिटिश सेना रखनी पड़ती थी और ब्रिटिश रेजीडेंट को अपने दरबार में रखना पड़ता था। इसका दुरुपयोग करके अंग्रेजों ने कई राज्यों पर नियंत्रण स्थापित किया, जो विद्रोह का एक कारण बना।

यह NCERT समाधान कक्षा 12 के छात्रों के लिए कैसे उपयोगी हैं?

ये समाधान कक्षा 12 के छात्रों को 1857 के विद्रोह से संबंधित महत्वपूर्ण अवधारणाओं, कारणों, स्वरूप और परिणामों की स्पष्ट और विस्तृत समझ प्रदान करते हैं, जिससे उन्हें परीक्षा की तैयारी में मदद मिलती है।

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