सीबीएसई कक्षा 12 इतिहास: शासक और इतिवृत्त NCERT समाधान

NCERT Solutions PDF Class 12 PDF

यह पृष्ठ सीबीएसई कक्षा 12 इतिहास के अध्याय 9, 'शासक और इतिवृत्त' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। इसमें मुगल साम्राज्य के शासकों, उनके इतिवृत्तों (इतिहासों) और उनसे संबंधित महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला गया है। समाधान अति लघु, लघु और विस्तृत प्रश्नों के उत्तर देते हैं, जिनमें कोर्निश, किताबखाना, पांडुलिपि निर्माण, बाबर की आत्मकथा, शाही परिवार की स्त्रियों की भूमिका, बादशाहनामा और मनसबदारी प्रणाली जैसे विषयों को शामिल किया गया है। यह सामग्री छात्रों को मुगल काल के इतिहास को गहराई से समझने और परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए डिज़ाइन की गई है।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 12
Subjectइतिहास
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter9. शासक और इतिवृत्त

Chapter summary

अध्याय 9 'शासक और इतिवृत्त' के ये NCERT समाधान मुगल शासकों के जीवन और उनके द्वारा संरक्षित ऐतिहासिक अभिलेखों पर केंद्रित हैं। इसमें कोर्निश जैसी दरबारी प्रथाओं, किताबखाना जैसी संस्थाओं, पांडुलिपि निर्माण की प्रक्रिया, बाबर की आत्मकथा और बादशाहनामा जैसे महत्वपूर्ण ग्रंथों की चर्चा की गई है। साथ ही, शाही परिवार की स्त्रियों की भूमिका और मनसबदारी प्रणाली के गुण-दोषों का भी विश्लेषण किया गया है। ये समाधान छात्रों को मुगल इतिहास की समझ को मजबूत करने में सहायता करते हैं।

Learning outcomes

  • कोर्निश जैसी मुगल दरबारी प्रथाओं को समझना।
  • किताबखाना और पांडुलिपि निर्माण की प्रक्रिया का ज्ञान प्राप्त करना।
  • बाबर की आत्मकथा और बादशाहनामा जैसे ऐतिहासिक ग्रंथों का विश्लेषण करना।
  • मुगल शाही परिवार की स्त्रियों की भूमिका का मूल्यांकन करना।
  • मनसबदारी प्रणाली के गुण और दोषों को समझना।

Topics covered

Paper topics

  • कोर्निश
  • मुगल वंश और संस्थापक
  • किताबखाना
  • पांडुलिपि निर्माण
  • बाबर की आत्मकथा (तुजके बाबरी)
  • शाही परिवार की स्त्रियों की भूमिका
  • जहाँआरा
  • बादशाहनामा
  • अब्दुल हमीद लाहौरी
  • मनसबदारी प्रणाली
  • मुगल इतिहास
  • इतिवृत्त

Important topics

  • मनसबदारी प्रणाली के गुण और दोष
  • शाही परिवार की स्त्रियों की भूमिका का मूल्यांकन
  • बादशाहनामा पर टिप्पणी
  • बाबर की आत्मकथा का महत्व
  • किताबखाना और पांडुलिपि निर्माण प्रक्रिया

PDF preview

Read page by page below. PDF is streamed from the official NCERT website — no download button on this page.

Loading document …
Page of
Loading page …

Questions and Solutions

अति लघु प्रश्न 1

प्र.1 कोर्निश शब्द के अर्थ को स्पष्ट कीजिए।
Solution: कोर्निश मुगल दरबार में अभिवादन का एक औपचारिक तरीका था। इस प्रथा में, दरबारी अपने दाहिने हाथ की हथेली को अपने माथे पर रखते थे और फिर सम्मान व्यक्त करने के लिए आगे की ओर सिर झुकाते थे। यह शासक के प्रति निष्ठा और सम्मान प्रदर्शित करने का एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान था।

अति लघु प्रश्न 2

प्र.2 1526 से 1707 तक के बीच भारत में शासन करने वाले वंश का नाम बताइए और इस वंश के संस्थापक कौन थे ?
Solution: 1526 से 1707 ईस्वी तक के काल में भारत पर **मुगल वंश** ने शासन किया। इस शक्तिशाली वंश का संस्थापक **बाबर** था, जिसने 1526 में पानीपत के प्रथम युद्ध में इब्राहिम लोदी को हराकर मुगल साम्राज्य की नींव रखी थी।

अति लघु प्रश्न 3

प्र.3 'किताबखाना' शब्द का अर्थ क्या है ?
Solution: 'किताबखाना' शब्द का शाब्दिक अर्थ 'पुस्तकालय' होता है। हालाँकि, मुगल काल में यह केवल एक पुस्तकालय से कहीं अधिक था। यह एक विशेष लेखन गृह या कार्यशाला थी जहाँ शासकों द्वारा महत्वपूर्ण पांडुलिपियों को संग्रहीत किया जाता था, उनका अध्ययन किया जाता था, और नई पांडुलिपियों को तैयार करने का कार्य भी किया जाता था। यह ज्ञान और पांडुलिपि निर्माण का केंद्र था।

अति लघु प्रश्न 4

प्र.4 पांडुलिपियों की संरचना में संलग्न कुछ लोगों के कार्यो को बताइए ?
Solution: पांडुलिपियों के निर्माण की प्रक्रिया एक जटिल कार्य था जिसमें कई कुशल कारीगर शामिल होते थे। इन लोगों के प्रमुख कार्यों में शामिल थे: कागज बनाना, सुलेखन (सुंदर लिखावट), घिसाई (पृष्ठों को चिकना करना), चित्रकारी (चित्र बनाना), और जिल्दसाजी (पुस्तक को बांधना)। प्रत्येक कार्य के लिए विशेष विशेषज्ञता की आवश्यकता होती थी।

अति लघु प्रश्न 5

प्र.5 बाबर की आत्मकथा कौन-सी भाषा में लिखी गई थी ?
Solution: बाबर की आत्मकथा, जिसे **'तुजके बाबरी'** के नाम से जाना जाता है, मूल रूप से **तुर्की** भाषा में लिखी गई थी। बाद में, इस कृति का फारसी भाषा में अनुवाद किया गया और इसे **'बाबरनामा'** के नाम से जाना जाने लगा। यह आत्मकथा बाबर के जीवन, उसके विचारों और उसके अनुभवों का प्रत्यक्ष विवरण प्रस्तुत करती है।

लघु प्रश्न 6

प्र.६ मुगल साम्राज्य में शाही परिवार की स्त्रियों द्वारा निभाई गई भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।
Solution: मुगल साम्राज्य में शाही परिवार की स्त्रियों ने विभिन्न महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं, जो केवल घरेलू कार्यों तक सीमित नहीं थीं। उनका मूल्यांकन निम्नलिखित बिंदुओं के आधार पर किया जा सकता है:
  1. सामाजिक वर्गीकरण: शाही परिवार में स्त्रियों को उनकी पृष्ठभूमि के आधार पर वर्गीकृत किया जाता था, जैसे बेगम (पत्नियां) और अगाहा (अन्य महिलाएँ)।
  2. विविध कार्य संपादन: पत्नियों और अन्य महिलाओं ने साधारण कार्यों से लेकर बुद्धिमत्तापूर्ण प्रबंधन तक विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन किया।
  3. वित्तीय नियंत्रण: नूरजहाँ के प्रभाव के बाद, प्रमुख रानियों और राजकुमारियों ने महत्वपूर्ण वित्तीय स्रोतों पर नियंत्रण स्थापित करना शुरू कर दिया।
  4. आय का स्रोत: जहाँआरा और रोशनआरा जैसी राजकुमारियों को ऊँचे शाही मनसबदारों के समान वार्षिक आय प्राप्त होती थी, जो उनकी आर्थिक शक्ति को दर्शाता है।
  5. व्यापारिक संबंध: जहाँआरा को सूरत जैसे प्रमुख बंदरगाहों से प्राप्त होने वाले राजस्व का भी अधिकार प्राप्त था, जो उनके आर्थिक प्रभाव को दर्शाता है।
  6. निर्माण और संरक्षण: संसाधनों पर नियंत्रण ने शाही परिवार की महत्वपूर्ण स्त्रियों को इमारतों और बागों के निर्माण जैसे कार्यों को करने का अधिकार दिया। उदाहरण के लिए, चाँदनी चौक की रूपरेखा जहाँआरा द्वारा ही बनवाई गई थी।
इस प्रकार, मुगल शाही स्त्रियों ने न केवल पारिवारिक जीवन में बल्कि आर्थिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।

लघु प्रश्न 7

प्र.७ 'बादशाहनामा' पर संक्षेप में टिप्पणी लिखिए।
Solution: 'बादशाहनामा' मुगल सम्राट शाहजहाँ के शासनकाल का एक महत्वपूर्ण सरकारी इतिहास है। इसके लेखक अबुल फजल के एक योग्य शिष्य, **अब्दुल हमीद लाहौरी** थे।

शाहजहाँ ने लाहौरी की योग्यता के बारे में सुनकर, उन्हें अकबरनामा की तर्ज पर अपने शासन का इतिहास लिखने का कार्य सौंपा। बादशाहनामा को तीन जिल्दों (दफतरों) में विभाजित किया गया है, और प्रत्येक जिल्द दस चंद्र वर्षों के काल का विवरण प्रस्तुत करती है।

लाहौरी ने बादशाह के शासनकाल के पहले दो दशकों (1627-1647 ई.) का विवरण पहली और दूसरी जिल्द में लिखा है। इन जिल्दों में बाद में शाहजहाँ के वजीर, सादुल्ला खाँ द्वारा कुछ सुधार भी किए गए। यह ग्रंथ मुगल प्रशासन, घटनाओं और सांस्कृतिक जीवन की विस्तृत जानकारी प्रदान करता है।

विस्तृत उत्तर 8

प्र.8 मनसबदारी के प्रणाली के गुण और दोषों की विवेचना कीजिए।
Solution: मनसबदारी प्रणाली मुगल साम्राज्य की एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और सैन्य व्यवस्था थी। इसके गुण और दोष निम्नलिखित हैं: मनसबदारी प्रणाली के गुण:
  1. सम्राट को सैन्य परेशानियों से मुक्ति: इस प्रणाली ने सम्राट को सीधे सैन्य संगठन और रसद की व्यवस्था करने की जटिलताओं से मुक्त कर दिया, क्योंकि मनसबदार अपनी सेना रखने के लिए जिम्मेदार थे।
  2. योग्यतानुसार पद प्रदान: मनसबदारी व्यवस्था में पदोन्नति और नियुक्ति योग्यता के आधार पर की जाती थी, जिससे कुशल व्यक्तियों को अवसर मिलता था।
  3. प्रशासनिक व्यय पर नियंत्रण: मनसबदारों को वेतन के बदले जागीरें दी जाती थीं, जिससे शाही खजाने पर सीधा वित्तीय बोझ कम होता था और प्रशासनिक व्यय को नियंत्रित करने में मदद मिलती थी।
  4. साम्राज्य का विस्तार और स्थायित्व: मनसबदारों को साम्राज्य के विभिन्न हिस्सों में तैनात किया जाता था, जिससे साम्राज्य के विस्तार और उसके शासन को बनाए रखने में मदद मिलती थी।
  5. कला और साहित्य के पोषक: कई मनसबदार कला, साहित्य और वास्तुकला के संरक्षक भी थे, जिन्होंने सांस्कृतिक विकास में योगदान दिया।
मनसबदारी प्रणाली के दोष:

(नोट: दिए गए स्रोत में दोषों का विस्तृत विवरण नहीं है, केवल शीर्षक दिया गया है। एक पूर्ण उत्तर के लिए, इन दोषों पर शोध की आवश्यकता होगी, जैसे कि भ्रष्टाचार, जागीरों का अत्यधिक विभाजन, या मनसबदारों की निष्ठा में कमी आदि।)

Common mistakes

  • कोर्निश का अर्थ समझने में गलती करना।
  • किताबखाना के उद्देश्य को केवल पुस्तकालय तक सीमित समझना।
  • पांडुलिपि निर्माण में शामिल विभिन्न कार्यों को अनदेखा करना।
  • मनसबदारी प्रणाली के लाभों या हानियों को पूरी तरह से न समझना।

Revision tips

  • प्रत्येक प्रश्न के उत्तर में मुख्य शब्दों को रेखांकित करें।
  • मनसबदारी प्रणाली के गुण और दोषों की तुलनात्मक सूची बनाएं।
  • शाही परिवार की स्त्रियों की भूमिका से संबंधित प्रमुख उदाहरणों को याद करें।
  • बाबरनामा और बादशाहनामा जैसे ग्रंथों के लेखकों और उनकी सामग्री पर ध्यान दें।

Practice MCQs

Q1. कोर्निश क्या था?

Q2. बाबर की आत्मकथा मूल रूप से किस भाषा में लिखी गई थी?

Q3. बादशाहनामा के लेखक कौन थे?

Q4. मनसबदारी प्रणाली का मुख्य उद्देश्य क्या था?

Q5. जहाँआरा को किस बंदरगाह से राजस्व प्राप्त होता था?

Frequently asked questions

कक्षा 12 इतिहास के अध्याय 9 का मुख्य विषय क्या है?

कक्षा 12 इतिहास के अध्याय 9, 'शासक और इतिवृत्त' का मुख्य विषय मुगल शासकों, उनके द्वारा लिखे गए इतिवृत्तों (इतिहासों), दरबारी जीवन, और प्रशासनिक व्यवस्थाओं जैसे मनसबदारी प्रणाली पर केंद्रित है।

कोर्निश का क्या अर्थ है और यह किस संदर्भ में प्रयोग होता है?

कोर्निश मुगल दरबार में अभिवादन का एक औपचारिक तरीका था। इसमें दरबारी अपने दाहिने हाथ की हथेली को माथे पर रखकर आगे की ओर सिर झुकाते थे।

बादशाहनामा किसने लिखा और यह किस बारे में है?

बादशाहनामा को अब्दुल हमीद लाहौरी ने लिखा था। यह मुगल सम्राट शाहजहाँ के शासनकाल (1627-1647 ई.) के पहले दो दशकों का विस्तृत इतिहास है।

मनसबदारी प्रणाली के क्या लाभ थे?

मनसबदारी प्रणाली के लाभों में सम्राट को सैन्य संगठन की चिंताओं से मुक्ति, योग्यतानुसार पद प्रदान करना, प्रशासनिक व्यय को सीमित करना और साम्राज्य को विस्तार व स्थायित्व प्रदान करना शामिल था।

क्या मुगल शाही परिवार की स्त्रियाँ प्रशासन में भूमिका निभाती थीं?

हाँ, मुगल शाही परिवार की स्त्रियाँ, विशेषकर नूरजहाँ के बाद, महत्वपूर्ण वित्तीय स्रोतों पर नियंत्रण रखती थीं और जहाँआरा जैसी राजकुमारियाँ इमारतों व बागों के निर्माण का अधिकार रखती थीं, जिससे वे अप्रत्यक्ष रूप से प्रशासन में भूमिका निभाती थीं।

ये NCERT समाधान छात्रों की परीक्षा तैयारी में कैसे मदद करेंगे?

ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को स्पष्ट और विस्तृत तरीके से प्रस्तुत करते हैं, जिससे छात्रों को मुगल इतिहास के महत्वपूर्ण पहलुओं को समझने में मदद मिलती है। यह परीक्षा में पूछे जाने वाले विभिन्न प्रकार के प्रश्नों के उत्तर देने की क्षमता विकसित करता है।

Content reviewed by the NCERT Help team. Editorial Team and update policy

NCERT Solutions PDF PDF on NCERT Help. URL unchanged for search indexing.